MBBS Seats: दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी 408 नई मेडिकल सीटें, जानें किस कोर्स में बढ़ने जा रही हैं कितनी सीटें

MBBS Seats: दिल्ली सरकार राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत सरकार ने मेडिकल शिक्षा क्षमता विस्तार के लिए रोडमैप तैयार किया है। साथ ही सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, पीजी और डीएनबी सीटों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना है। साथ ही राजधानी की स्वास्थ्य सेवा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत चिकित्सा कार्यबल का निर्माण करना है। दिल्ली सरकार की योजना के तहत, नए और मौजूदा मेडिकल संस्थानों में 300 एमबीबीएस सीटें और 103 पीजी/डीएनबी सीटें जोड़ी जाएंगी। पांच फेलोशिप सीटों का भी प्रस्ताव है, जिससे नई मेडिकल सीटों की कुल संख्या 408 हो जाएगी।

अस्पताल-वार सीट विस्तार का प्रस्ताव

ग्रीनफील्ड मॉडल के तहत, इंदिरा गांधी अस्पताल (IGH) और द्वारका के गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में विकसित किए जा रहे मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 150 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव है मेडिकल कॉलेज में PG सीटों की संख्या 125 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है। मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (MAIDS) में बीडीएस सीटों की संख्या भी 50 से बढ़ाकर 70 करने का प्रस्ताव है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में पीजी सीटों को 260 से बढ़ाकर 295 करने का प्रस्ताव है, जबकि एमएआईडीएस में पीजी सीटें 22 से बढ़कर 42 हो जाएंगी। बीएसए मेडिकल कॉलेज में भी 24 सीटों के साथ नए पीजी कोर्स शुरू होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सरकार के रोडमैप में अलग-अलग सरकारी मेडिकल संस्थानों में 103 नई पीजी/डीएनबी सीटों का प्रावधान है, जिसमें 67 एमडी/एमएस और 36 डीएनबी सीटें शामिल हैं। इसके अलावा, पांच फेलोशिप सीटों का प्रस्ताव है—तीन जीटीबी हॉस्पिटल में और दो दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में। इससे पीजी, डीएनबी और फेलोशिप लेवल पर नई सीटों की कुल संख्या 108 हो जाएगी।

डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह बढ़ोतरी सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद ज्यादा ट्रेंड डॉक्टर, स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट तैयार करना है जो दिल्ली के लोगों को बेहतर हेल्थकेयर दे सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की लीडरशिप में, सरकार लगातार चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ा रही है, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और पेशेंट-केयर सुविधाओं को भी मजबूत कर रही है।

सरकार डीएम/एमसीएच और स्ट्रक्चर्ड पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप जैसे सुपर-स्पेशियलिटी प्रोग्राम को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। प्रस्तावित रोडमैप को लागू करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) समेत सक्षम अथॉरिटी से जरूरी मंजूरी लेने का प्रोसेस अभी चल रहा है।

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योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

योगी सरकार की निर्यात नीति से किसानों को सीधा लाभ, निवेश की नई लहर

 

 

 

 

 

 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने निर्यात क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जिसने निर्यात के लिए समर्पित त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति (2026-29) लागू की है। एक अप्रैल 2026 से प्रभावी इस नीति के शुरुआती दो माह में ही इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अप्रैल-मई 2026 में प्रदेश से निर्यात 84.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि देश का समग्र निर्यात 6.3 प्रतिशत बढ़ा। राष्ट्रीय निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई और प्रदेश पांचवें स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
 

 

यूपी ने 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की

 

अप्रैल-मई 2026 में देश से कुल 6.15 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान 86 लाख डॉलर रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में देश का निर्यात 5.78 करोड़ डॉलर और प्रदेश का योगदान 46.6 लाख डॉलर था। इस दौरान देश के निर्यात में 36.5 लाख डॉलर की वृद्धि हुई, जबकि उत्तर प्रदेश ने अकेले 39.4 लाख डॉलर की वृद्धि अर्जित की। बस्ती से 25,000 कुंतल शीरे का निर्यात भी हुआ, जिससे 5,00,000 अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, अतः यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों में सम्मिलित नहीं है और उनसे अतिरिक्त है। महत्वपूर्ण यह है कि राज्य ने इसके लिए कोई आर्थिक सहायता या अनुदान नहीं दिया, बल्कि नियामक शुल्कों को तर्कसंगत बनाया है। प्रत्येक निर्यात बोतल पर ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था लागू है। एपीडा ने इस क्षेत्र के लिए करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर का राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य रखा है और उत्तर प्रदेश लगातार अपना योगदान बढ़ा रहा है।

 

निवेश और रोजगार के नए अवसर

 

नीति की 3 वर्ष की स्थिरता से उद्योग जगत का भरोसा बढ़ा है। यूनाइटेड ब्रुअरीज उन्नाव और माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज हरदोई में नई इकाई स्थापित कर रही हैं। वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने फर्रुखाबाद में इकाई स्थापित की है। एलाइड ब्लेंडर्स एण्ड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को पुनर्जीवित किया है। गोरखपुर में लगभग एक वर्ष पहले एथेनॉल उत्पादन के लिए स्थापित कियान डिस्टिलरी ने पेय आसवनी और ब्रुअरी, दोनों की स्थापना के लिए आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार रैडिको खेतान अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रहा है। एक अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनी का स्थल चयन अंतिम चरण में है, जबकि कई मौजूदा आसवनियां क्षमता विस्तार कर रही हैं।

 

किसानों को बढ़ी मांग का सीधा फायदा

 

आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि इस नीति का महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के किसानों को मिल रहा है। ईएनए उत्पादन बढ़ने से चीनी मिलों के शीरे की मांग बढ़ी है, जिससे गन्ना किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है। वहीं ग्रेन आधारित आसवनियों में उत्पादन बढ़ने से अनाज की खरीद भी बढ़ी है। यानी निर्यात बढ़ने के साथ प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन, किसानों से खरीद और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। नीति में किसान हित को लेकर सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। जिस आसवनी अथवा उसके स्वामी की किसी अन्य इकाई या चीनी मिल पर गन्ना मूल्य भुगतान अथवा आबकारी देयों की वसूली प्रमाण-पत्र प्रभावी है, उसे नीति की कोई छूट नहीं मिलेगी। इससे निर्यात प्रोत्साहन को सीधे किसानों के भुगतान से जोड़ा गया है।

 

कांच से लेकर परिवहन तक बढ़ा कारोबार

 

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि इस क्षेत्र की पश्च संबद्धता गन्ना, शीरा और अनाज जैसी कृषि उपज से जुड़ी है, जबकि अग्र संबद्धता में कांच, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे उद्योग आते हैं। अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश की इकाइयों ने अन्य राज्यों को 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 45.7 प्रतिशत अधिक हैं। यह वृद्धि घरेलू आपूर्ति घटाकर नहीं, बल्कि कुल उत्पादन बढ़ने से हुई है।

 

देश के लिए मॉडल बनी योगी सरकार की नीति

 

केंद्र सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से गठित टास्क फोर्स सभी राज्यों के लिए आदर्श निर्यात नीति तैयार कर रही है। इसमें एपीडा और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग शामिल हैं। टास्क फोर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की नीति की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए उपयोगी ढांचा बताया गया और राष्ट्रीय आदर्श नीति में प्रदेश के अनुभवों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। इस तरह योगी सरकार की नीति ने किसान हित, निवेश, रोजगार और विदेशी मुद्रा अर्जन को एक साथ जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को निर्यात के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।

Mumbai Local Train update: मुंबईकरों के लिए खुशखबरी! अब दौड़ेगी वंदे मेट्रो AC लोकल ट्रेन, जानें कब तक तैयार हो जाएगी ये पूरी फ्लीट

Mumbai Local Train update: मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई को जल्द ही 238 नई वंदे मेट्रो एसी लोकल ट्रेनें (2856 कोच) मिलने जा रही हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन ने ऐलान किया है कि इन नई एसी लोकल ट्रेनों को भारतीय रेलवे की ही तीन अलग-अलग प्रोडक्शन यूनिट में तैयार किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एमआरवीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विलास वाडेकर ने बताया है कि रेलवे की तीन मैन्युफैक्चरिंग सर्विस में बनने वाली पहली 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेन 2027 में मिल जाएगी जबकि 238 ट्रेनों की पूरी फ्लीट 2030 तक उपलब्ध करा दी जाएगी।

19,293 करोड़ रुपये की लागत आएगी

एमआरवीसी के मुताबिक मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MUTP) 3 के तहत खरीदी जा रही इन 238 वंदे मेट्रो उपनगरीय ट्रेनों (2,856 कोच) के रोलिंग-स्टॉक की अनुमानित लागत 19293 करोड़ रुपये है। इन 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेनों का निर्माण रेलवे की तीन प्रमुख इकाइयों इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में किया जाएगा।

पहले इन ट्रेनों को निजी या विदेशी कंपनियों के माध्यम से खरीदने और उनके जीवनकाल के रखरखाव के लिए इंटरनेशनल टेंडर मंगाए गए। इसे लेकर मन लायक रिस्पॉन्स नहीं मिलने की वजह से सरकार ने इसे अपने कारखानों में बनाने का फैसला लिया है।

अंतरराष्ट्रीय टेंडर में आ रही थीं दिक्कतें, रेल मंत्री ने बताया नया प्लान

प्रक्रिया में हुए बदलाव को लेकर बुधवार शाम जारी एक वीडियो संदेश में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पुरानी खरीद प्रक्रिया में कई समस्याएं थीं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने अब इन ट्रेनों का निर्माण अपनी खुद की तीन उत्पादन इकाइयों में करने का निर्णय लिया है। रेल मंत्री ने कहा कि पुरानी योजना के तहत पूरी खरीद 2030 में जाकर पूरी होने वाली थी, जो हमें कतई स्वीकार्य नहीं थी। इसीलिए आज यह नया फैसला लिया गया है कि इनका उत्पादन भारत सरकार की तीन उत्पादन इकाइयों ICF, RCF और MCF में किया जाएगा, ताकि पहली लोकल ट्रेन 2027 तक हर हाल में पटरी पर आ जाए।

एमआरवीसी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, पुरानी खरीद प्रक्रिया के तहत अगर काम होता तो सीरीज प्रोडक्शन शुरू होने में ही करीब तीन साल लग जाते। इस वजह से पहली ट्रेन 2030 में मिलती और पूरी फ्लीट 2034 तक जाकर तैयार हो पाती। जून 2023 में एमआरवीसी ने 238 एसी लोकल ट्रेनों की खरीद और उनके 35 वर्षों के रखरखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय बोलियां आमंत्रित की थीं। मई 2023 में रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी इस टेंडर में दो साल का समय प्रोटोटाइप ट्रेन बनाने के लिए और उसके बाद औसतन 50 ट्रेनें प्रति वर्ष की दर से पांच साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

सफल बोलीदाता को पालघर जिले के वणगांव और रायगढ़ जिले के भिवपुरी में नए रखरखाव डिपो स्थापित करने, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और 35 वर्षों के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने की शर्त रखी गई थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर 22000 करोड़ का निवेश, सफर होगा आरामदायक

एमआरवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए संशोधित विनिर्माण कार्यक्रम से इन एसी ट्रेनों को मुंबई रेल नेटवर्क के नए कॉरिडोर और क्षमता विस्तार कार्यों के शुरू होने के साथ ही पटरी पर उतारा जा सकेगा। क्षमता विस्तार कार्यों में लगभग ₹22,000 करोड़ का भारी निवेश किया जा रहा है। इसमें नए कॉरिडोर बनाना, अतिरिक्त रेलवे लाइनें बिछाना, 15-कोच वाली ट्रेनों को चलाने के लिए प्लेटफॉर्मों की लंबाई बढ़ाना, यार्डों का पुनर्गठन करना और नेटवर्क को मजबूत करने वाले कई काम शामिल हैं।

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सरकारी स्टील कंपनी मार्केट से जुटाएगी बड़ा फंड! FY27 में 5% का FPO लाने की प्लानिंग, सरकार से मांगी मंजूरी

Steel Authority of India FPO: सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) बाजार से फंड जुटाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, महारत्न कंपनी ‘सेल’ ने चालू वित्त वर्ष (FY27) में 5 फीसदी का फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) लाने के लिए वित्त मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) से संपर्क किया है।

इसके पीछे का उद्देश्य अपनी विस्तार योजनाओं के लिए पैसे जुटाना है। कंपनी की योजना नए शेयर जारी कर मिलने वाले फंड का सीधा इस्तेमाल अपने प्लांटों के आधुनिकीकरण और कैपेक्स जरूरतों को पूरा करने में करने की है।

OFS से अलग कैसे है FPO का रास्ता?

आमतौर पर सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने के लिए सरकार ऑफर फॉर सेल (OFS) का रास्ता चुनती है, लेकिन SAIL इस बार FPO के जरिए फंड जुटाना चाहती है। OFS के जरिए जब सरकार शेयर बेचती है, तो उससे मिलने वाला सारा पैसा भारत सरकार के खजाने में जाता है। वहीं FPO के तहत कंपनी नए इक्विटी शेयर जनता के लिए जारी करती है। इससे जुटाई गई राशि सीधे कंपनी के बैलेंस शीट में जाती है, जिसका इस्तेमाल बिजनेस विस्तार में होता है।

वर्तमान में SAIL में भारत सरकार की हिस्सेदारी 65 फीसदी है। फ्रेश इक्विटी जारी होने से सरकार की शेयरहोल्डिंग में थोड़ी गिरावट तो आएगी, लेकिन इससे सरकार को सीधे तौर पर कोई रेवेन्यू नहीं मिलेगा, बल्कि पूरी रकम कंपनी के खाते में जाएगी।

कैपेक्स और क्षमता विस्तार के लिए फंड की जरूरत

इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाली महारत्न कंपनी SAIL हाल के वर्षों में अपने उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार पूंजीगत व्यय बढ़ा रही है। कंपनी देश भर में भिलाई, बोकारो, राउरकेला, दुर्गापुर और बर्नपुर में 5 इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट और 3 स्पेशल स्टील प्लांट संचालित करती है। फ्रेश शेयर बिक्री से मिलने वाला फंड कंपनी को कर्ज या सिर्फ आंतरिक लाभ पर निर्भर रहने के बजाय पूंजी जुटाने का एक मजबूत विकल्प प्रदान करेगा।

Q1 में मुनाफा दोगुना से ज्यादा बढ़ा

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब कंपनी के पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे काफी मजबूत रहे हैं। जून तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ दो गुने से अधिक बढ़कर ₹1,644.05 करोड़ रहा, जिसमें खर्चों में आई कमी का बड़ा योगदान रहा। जून तिमाही के दौरान क्रूड स्टील का उत्पादन 4.76 मिलियन टन रहा, जबकि बिक्री 4.16 MT रही।

SAIL के चेयरमैन अशोक कुमार पांडा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू इस्पात खपत में लगातार सुधार देखने को मिला है और भारतीय स्टील उद्योग ने मजबूत जुझारूपन दिखाया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Quality Power Q1 Results: मुनाफा 47% बढ़ा, ऑर्डर बुक दमदार; डिविडेंड का भी ऐलान

Quality Power Q1 Results: पावर इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी Quality Power Electrical Equipments ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं।

कंपनी का एडजस्टेड कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 47% बढ़कर 54.5 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले साल की समान तिमाही में 37.1 करोड़ रुपये था। वहीं, रेवेन्यू 32% बढ़कर 256.4 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 194.1 करोड़ रुपये थी।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी मजबूत

क्वालिटी पावर का एडजस्टेड EBITDA 50% बढ़कर 72.5 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, एडजस्टेड EBITDA मार्जिन 25% से बढ़कर 28.3% पर पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि एडजस्टेड आंकड़ों में तुर्की के कारोबार पर Ind AS 29 के तहत दर्ज 7.82 करोड़ रुपये के गैर-नकद (Non-Cash) नुकसान को शामिल नहीं किया गया है।

रिपोर्टेड आधार पर EBITDA 64.7 करोड़ रुपये, EBITDA मार्जिन 25.2%, जबकि शुद्ध मुनाफा 46.7 करोड़ रुपये और PAT मार्जिन 18.2% रहा।

ऑर्डर बुक और नए प्रोजेक्ट पर फोकस

30 जून 2026 तक क्वालिटी पावर की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक 1,945.5 करोड़ रुपये रही, जो FY26 की कुल रेवेन्यू का करीब 1.9 गुना है। तिमाही के दौरान कंपनी को 104.9 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। इनमें अमेरिका के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के लिए हाई-वोल्टेज रिएक्टर, जापान में FACTS सिस्टम और Hitachi Energy India से 400 kV इंस्ट्रूमेंट ट्रांसफॉर्मर के ऑर्डर शामिल हैं।

सांगली प्लांट में उत्पादन की तैयारी

क्वालिटी पावर के सांगली प्लांट में क्षमता विस्तार का काम जारी है। मशीनों की स्थापना की जा रही है और नियामकीय मंजूरी मिलने के बाद अगस्त में ट्रायल प्रोडक्शन शुरू करने का लक्ष्य है। चेयरमैन और एमडी पीटी पांडियन ने कहा कि हाई-वोल्टेज और एनर्जी ट्रांजिशन सॉल्यूशंस की मजबूत मांग के चलते कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की अच्छी शुरुआत की है।

डिविडेंड और शेयर का हाल

क्वालिटी पावर ने FY27 के लिए 0.25 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम लाभांश देने की भी घोषणा की है।

कंपनी का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 3.63% की गिरावट के साथ 1115 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 37.56% चढ़ा है। 1 साल में इसने 41.77% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 8.64 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: बिगब्लॉक कंस्ट्रक्शन का घाटा कम हुआ, रेवेन्यू 40% बढ़ा; नया प्लांट लगाने का प्लान

BigBloc Construction Q1 Results: AAC ब्लॉक और ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल बनाने वाली कंपनी BigBloc Construction ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे दर्ज किए हैं। कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 40.5% बढ़कर 79.14 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान तिमाही में 56.35 करोड़ रुपये थी।

कंपनी के घाटे में बड़ी कमी

कंपनी का नेट लॉस घटकर 71.95 लाख रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 4.96 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA 386% बढ़कर 6.28 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 2.29% से बढ़कर 7.93% पर पहुंच गया। कंपनी ने इसका श्रेय बेहतर ऑपरेशनल, लागत नियंत्रण और वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स को दिया है।

क्षमता विस्तार पर जोर

तिमाही के दौरान BigBloc Construction ने उमरगांव प्लांट में कंस्ट्रक्शन केमिकल्स का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया। इसमें ब्लॉक जॉइंटिंग मोर्टार, रेडी मिक्स प्लास्टर और टाइल एडहेसिव्स शामिल हैं। कंपनी का कुल क्षमता उपयोग बढ़कर 69% हो गया, जो पिछले साल 53% था। इसके अलावा समूह की रूफटॉप सोलर क्षमता बढ़कर 3.34 मेगावाट हो गई।

इंदौर में बनेगा सबसे बड़ा AAC प्लांट

BigBloc ने हाल ही में इंदौर के पास 56,950 वर्ग मीटर जमीन खरीदी है। यहां भारत का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड AAC ब्लॉक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया जाएगा। मानसून के बाद इसका निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी को L&T से बुलेट ट्रेन स्टेशन परियोजना का ऑर्डर भी मिला है, जिससे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में उसकी मौजूदगी और मजबूत हुई है।

कंपनी के CFO मोहित साबू ने कहा कि BigBloc अब सिर्फ AAC ब्लॉक निर्माता नहीं, बल्कि एक इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग सॉल्यूशंस कंपनी बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी का फोकस क्षमता विस्तार, नए प्रोडक्ट्स, वितरण नेटवर्क और लंबी अवधि में शेयरधारकों के लिए वैल्यू बढ़ाने पर रहेगा।

Q1 Results: ज्वेलरी कंपनी का मुनाफा 140% बढ़ा, रेवेन्यू 78% उछला; शेयरों पर नजर रहेगी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

KEI Industries Share Price:अच्छे तिमाही नतीजों से शेयर सरपट दौड़ा, 9% उछलकर 4 हफ्ते के हाई पर पहुंचा भाव, अब क्या करें?

KEI Industries Share Price: केबल इंडस्ट्रीज KEI Industries का शेयर 4 अगस्त को 9 फीसदी से ज्यादा तेजी देखने को मिली और यह आज ₹5,475 प्रति के चार हफ़्ते के हाई पर पहुंच गया। शेयर में यह तेजी तिमाही नतीजों के बाद देखने को मिली है। कंपनी ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे दिखाए, जिसकी वजह रेवेन्यू मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज में सुधार था।

कंपनी ने जून तिमाही के लिए ₹3,190 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो साल-दर-साल (YoY) आधार पर 23% की बढ़ोतरी है।

ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल के अनुसार, जहां टॉपलाइन (रेवेन्यू) मजबूत रही, वहीं वॉल्यूम ग्रोथ सिंगल-डिजिट में ही रही। इसकी वजह इनपुट कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी और पॉलीकैब, हैवेल्स और RR काबेल जैसी दूसरी कंपनियों के वॉल्यूम ट्रेंड में सुस्ती थी।

ऑपरेटिंग लेवल पर, EBITDA साल-दर-साल 53% बढ़कर ₹400 करोड़ हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन 240 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 12.4% हो गया। इसकी वजह ऑपरेटिंग लेवरेज और बेहतर प्रोडक्ट मिक्स था। बॉटम लाइन (मुनाफ़े) की बात करें तो, कंपनी ने ₹270 करोड़ का नेट प्रॉफ़िट (PAT) दर्ज किया, जो साल-दर-साल 40% ज़्यादा है। हालाँकि, तिमाही के दौरान ‘अन्य आय’ (other income) कम होने के कारण प्रॉफ़िट ग्रोथ, EBITDA ग्रोथ के मुकाबले कम रही।

मज़बूत मार्जिन परफॉर्मेंस के बाद, ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल का मानना ​​है कि इस बात की काफ़ी संभावना है कि कंपनी FY27 के लिए अपने 10.5%–11% के EBITDA मार्जिन गाइडेंस को बढ़ा सकती है।

ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर चैनल ग्रोथ का मुख्य ड्राइवर बना रहा। इस तिमाही में कुल रेवेन्यू में इसका योगदान लगभग 59% रहा, जबकि एक साल पहले यह 51% था।

इस चैनल से रेवेन्यू साल-दर-साल 42% बढ़कर ₹1,880 करोड़ हो गया। चूंकि डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर के ज़रिए होने वाली बिक्री पर आम तौर पर ज़्यादा मार्जिन मिलता है, इसलिए बेहतर होते चैनल मिक्स से भविष्य में मुनाफ़े को सहारा मिलने की उम्मीद है।

कंपनी ने अपनी सलारपुर फैसिलिटी में ₹700 करोड़ की कैपेसिटी बढ़ाने (क्षमता विस्तार) की भी घोषणा की, ताकि 50,000 km केबल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और 40,000 मीट्रिक टन GI वायर कैपेसिटी जोड़ी जा सके।

यह प्रोजेक्ट चरणों में पूरा किया जाएगा और इसके FY29 की दूसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है। जून तिमाही के आखिर तक, कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन (क्षमता का उपयोग) केबल के लिए लगभग 72%, कम्युनिकेशन केबल के लिए 45%, हाउस वायर और वाइंडिंग वायर के लिए 61% और स्टेनलेस स्टील वायर के लिए 91% था।

ब्रोकरेज की शेयर पर क्या है राय

जून तिमाही के नतीजों के बाद, JM फाइनेंशियल ने KEI इंडस्ट्रीज़ पर अपनी ‘buy’ रेटिंग दी है और इसके लिए टारगेट प्राइस ₹5,800 तय किया। ब्रोकरेज का मानना ​​है कि कंपनी का EBITDA मार्जिन प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा है, जिससे FY27 के लिए मार्जिन गाइडेंस में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है।उन्हें यह भी उम्मीद है कि FY28 में मार्जिन और बढ़ेगा, क्योंकि FY27 के आखिर तक एक्स्ट्रा-हाई वोल्टेज (EHV) केबल फैसिलिटीज़ शुरू हो जाएंगी।

वहीं, मोतीलाल ओसवाल ने भी स्टॉक पर अपनी ‘buy’ रेटिंग बनाए रखी और इसका टारगेट प्राइस ₹5,010 तय किया। हालांकि, स्टॉक अभी अपने टारगेट प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहा है।

ब्रोकरेज ने बताया कि KEI का Q1 FY27 EBITDA उनके अनुमान से ज़्यादा रहा। इसकी वजह केबल्स एंड वायर्स (C&W) और इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) सेगमेंट में मज़बूत रेवेन्यू ग्रोथ थी, हालांकि EPC बिजनेस को इस तिमाही में नुकसान हुआ।

मोतीलाल ओसवाल ने आगे कहा कि वे C&W सेक्टर को लेकर स्ट्रक्चरली पॉजिटिव हैं, क्योंकि इसमें लंबे समय तक ग्रोथ के मजबूत कारण मौजूद हैं और लगातार मांग बनी हुई है।

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Rhetan TMT को अहम BIS सर्टिफिकेशन मिला, सरकारी प्रोजेक्ट्स में सप्लाई का रास्ता खुला

स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT ने अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को प्रीमियम TMT ग्रेड के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) का सर्टिफिकेशन मिल गया है। इसके साथ ही कंपनी ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी का दावा है कि इससे उसकी उत्पादन क्षमता, लागत दक्षता और बाजार पहुंच मजबूत होगी।

प्रीमियम TMT ग्रेड बनाने की मिली मंजूरी

Rhetan TMT को Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार बनाने के लिए BIS लाइसेंस मिला है। इस मंजूरी के बाद Rhetan TMT अब देशभर में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम ग्रेड TMT बार की सप्लाई कर सकेगी। इससे कंपनी के लिए नए बाजार खुलेंगे और उसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का भी विस्तार होगा।

सोलर प्रोजेक्ट से घटेगी बिजली की लागत

Rhetan TMT ने अपना 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट भी पूरा कर लिया है। कंपनी को GEDA रजिस्ट्रेशन और NHAI समेत सभी जरूरी मंजूरियां मिल चुकी हैं। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट अगस्त 2026 के पहले सप्ताह के अंत तक बिजली उत्पादन शुरू कर देगा। कंपनी का मानना है कि इससे ऊर्जा लागत कम होगी और मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा टिकाऊ बनेगी।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि कंपनी पिछले कुछ वर्षों से क्वालिटी, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल एक्सीलेंस पर लगातार निवेश कर रही है। उनके मुताबिक, BIS सर्टिफिकेशन से प्रीमियम स्टील सेगमेंट में कंपनी की मौजूदगी मजबूत होगी। वहीं, सोलर पावर प्रोजेक्ट से उत्पादन प्रक्रिया ज्यादा कुशल बनेगी और लंबे समय में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

Rhetan TMT का कारोबार

Rhetan TMT, TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल रिहायशी, कमर्शियल और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होता है। कंपनी का कहना है कि वह आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग तकनीक, गुणवत्ता और क्षमता विस्तार पर लगातार फोकस कर रही है, ताकि भारत के बढ़ते स्टील और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सके।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

JK Cement Q1 Result: 20% बढ़ा रेवेन्यू लेकिन 14% गिरा मुनाफा, ये है वजह, सोमवार को रहेगी शेयरों पर नजर

JK Cement Q1 Result: सीमेंट सेक्टर की दिग्गज कंपनी जेके सीमेंट के लिए चालू वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत मिली-जुली रही। एक तरफ इसके रेवेन्यू में 20% से अधिक की तेजी आई तो दूसरी तरफ ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी को झटका लगा और शुद्ध मुनाफा भी 14% से अधिक घट गया। कंपनी ने 18 जुलाई को जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश किए और अब सोमवार 20 जुलाई को मार्केट खुलने पर शेयरों पर इसका असर दिख सकता है। अभी इसके शेयरों के स्थिति की बात करें तो 17 जुलाई को बीएसई पर यह 0.65% की गिरावट के साथ ₹5388.90 (JK Cement Share Price)s पर बंद हुआ था। पिछले साल 20 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह एक साल के हाई ₹7,565 पर था जिससे 10 महीने में यह 38.27% फिसलकर 12 जून 2026 को एक साल के निचले स्तर ₹4,670.05 पर आ गया था।

JK Cement Q1 Result: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में जेके सीमेंट का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 20.3% बढ़कर ₹4,031.7 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन शुद्ध मुनाफा इस दौरान 14.5% गिरकर ₹277 करोड़ पर आ गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी को जून तिमाही में दबाव झेलना पड़ा। इसका ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.8% गिरकर जून तिमाही में ₹647.7 करोड़ पर आ गया तो ईबीआईटीडीए मार्जिन भी सिकुड़कर 20.5% से 16.1% पर आ गया। मार्जिन में गिरावट के चलते इसकी कमाई पर दबाव पड़ा और रेवेन्यू में दोहरे अंकों की ग्रोथ के बावजूद शुद्ध मुनाफा नीचे आया।

जून तिमाही में कंपनी की वॉल्यूम ग्रोथ मजबूत बनी रही और सालाना आधार पर इसमें 18% की तेजी आई। ग्रे सीमेंट का वॉल्यूम 19% तो व्हाइट सीमेंट और पुट्टी का वॉल्यूम 11% बढ़ा। जून तिमाही में ग्रे सीमेंट की बिक्री 59.6 लाख टन रही तो व्हाइट सीमेंट की बिक्री 5.4 लाख टन रही जोकि सालाना आधार पर 29% अधिक रहा।

कंपनी के मुताबिक दोहरे अंकों में वॉल्यूम ग्रोथ की वजह वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में शुरू हुए 6 MTPA क्षमता विस्तार और यूएई से कम आयात पर व्हाइट सीमेंट वॉल्यूम में हुई बढ़ोतरी है। ऑपरेटिंग प्रॉफिट को लेकर कंपनी का कहना है कि प्राइस हाइक और व्हाइट सीमेंट वॉल्यूम में तेजी के बावजूद मेंटेनेंस और पैकेजिंग कॉस्ट में उछाल के चलते इसे झटका लगा।

विस्तार की योजना को लेकर कंपनी का कहना है कि ग्रे सीमेंट कैपेसिटी बढ़ाने का काम योजना के मुताबिक ही बढ़ रहा है। अभी इसकी क्षमता 32.3 MTPA है जिसे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2028 तक 40 MTPA और वित्त वर्ष 2030 तक 50 MTPA करने की योजना है। इसे लेकर कंपनी ने अगले दो साल में ₹5000-₹6000 करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) की योजना बनाई है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स ने ओडिशा में शुरू किया एल्युमीनियम फॉयल प्लांट, ₹800 करोड़ का निवेश

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी लिमिटेड (SMEL) की सब्सिडियरी SMEL Steel Structural Pvt. Ltd. ने ओडिशा के संबलपुर स्थित अपनी एल्युमीनियम फॉयल यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर कुल करीब ₹800 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश में एल्युमीनियम फॉयल और फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट्स (FRP) दोनों यूनिट शामिल हैं।

18,000 TPA क्षमता वाली फॉयल यूनिट शुरू

नई एल्युमीनियम फॉयल यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 18,000 टन (TPA) है। यहां 6 से 40 माइक्रोन मोटाई वाली प्रीमियम ग्रेड एल्युमीनियम फॉयल बनाई जाएगी। कंपनी के मुताबिक, इस यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

सितंबर तक शुरू होगी FRP यूनिट

श्याम मेटालिक्स की Aluminium Flat Rolled Products (FRP) यूनिट अंतिम चरण में है। इसके सितंबर 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। इस यूनिट की सालाना क्षमता 60,000 TPA होगी। यहां 0.3 से 4.0 मिमी मोटाई वाले एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएंगे।

ऑपरेटिंग मार्जिन में 40-50% बढ़ोतरी की उम्मीद

कंपनी का कहना है कि दोनों यूनिट पूरी तरह चालू होने के बाद ऑपरेटिंग मार्जिन में 40% से 50% तक सुधार हो सकता है। बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ज्यादा रियलाइजेशन से रेवेन्यू में भी मजबूत बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के दम पर उसकी टॉपलाइन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ सकती है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

श्याम मेटालिक्स का कहना है कि यह निवेश वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा। इससे हाई-क्वालिटी एल्युमीनियम उत्पादों की घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

श्याम मेटालिक्स ने क्या कहा?

श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बृज भूषण अग्रवाल ने कहा कि संबलपुर में फॉयल प्रोडक्शन की शुरुआत कंपनी के लिए एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य हाई-वैल्यू एल्युमीनियम उत्पादों के जरिए नए बाजारों में विस्तार करना है। इससे ओडिशा में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सितंबर तक FRP यूनिट शुरू होने के बाद कंपनी का डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

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