Viral Video: ट्रेन से बेडशीट चुराते पकड़े गया ये कपल, TTE के टोकने पर महिला देने लगी अजीब दलील

Viral Video: भारतीय रेलवे की AC ट्रेनों में यात्रियों को दिए जाने वाले बेडरोल, चादर और तौलिये के गायब होने का मुद्दा सोशल मीडिया पर एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक कपल रेलवे की चादरें अपने सामान में ले जाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस दौरान पकड़े जाने पर महिला ने सफाई देते हुए दावा किया कि उन्होंने चादरें इसलिए रख ली थीं क्योंकि TTE ने उनसे अधिक पैसे लिए थे। बता दें कि ऐसी चारी की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं।

AC कोच से बेडशीट और तौलिए जैसे सामान का गायब होना लंबे समय से भारतीय रेलवे के लिए चिंता का विषय रहा है। इस समस्या से न केवल रेलवे को नुकसान हुआ है। बल्कि यह सवाल भी उठा है कि जब इन्वेंट्री से ये चीजें गायब हो जाती हैं तो इनकी कीमत कौन चुकाता है।

सूटकेस खुलवाया तो अंदर मिलीं रेलवे की चादरें

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर @arunruby08 नाम के यूजर की तरफ से शेयर किए गए वीडियो में एक व्यक्ति प्लेटफॉर्म पर खड़ा दिखाई देता है। वीडियो बना रहा शख्स उससे सूटकेस खोलने के लिए कहता है। यात्री के बैग खोलने पर उसमें रेलवे की ओर से उपलब्ध कराई गई चादरों का एक पैकेट दिखाई देता है, जिसे वह बाहर निकालकर वापस कर देता है। इस दौरान महिला वीडियो बनाए जाने पर आपत्ति जताती है। वह इसे ‘फालतू का ड्रामा’ बताती है।

वह बार-बार वीडियो रिकॉर्डिंग बंद करने के लिए कहती है। जब उनसे पूछा जाता है कि अतिरिक्त पैसे किसने लिए थे, तो महिला जवाब देती है- TC ने…।” इसके बाद वीडियो बना रहा व्यक्ति उन्हें याद दिलाता है कि बेडशीट रेलवे की संपत्ति है, TTE की नहीं, जिसे अतिरिक्त पैसे लिए जाने के कारण अपने साथ ले जाया जा सकता है। महिला फिर कहती है कि उन्होंने अतिरिक्त पैसे लिए जाने की वजह से चादरें रख ली थीं और अब उन्हें वापस कर रहे हैं।

‘चोरी और सीनाजोरी…’

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहस शुरू हो गई। कई यूजर्स ने कपल की सफाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रेन में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और कंबल यात्रा के बाद वापस किए जाने होते हैं। एक यूजर ने लिखा, “इसे लगा कि टिकट के साथ फ्री है, कुर्ता-पायजामा बनाने के लिए।” वहीं, दूसरे यूजर ने लिखा, “इसी को कहते हैं चोरी और सीनाजोरी…।”

एक अन्य शख्स ने लिखा, “एक तो चोरी, ऊपर से तेवर तो देखो।” एक और यूजर ने कहा, “क्या टाइम आ गया है… खुद गलत भी करो और झगड़ा, गुस्सा भी दिखाओ।” कुछ यूजर्स ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग भी की। एक कमेंट में रेलवे से PNR के जरिए यात्रियों की जानकारी निकालकर कानूनी नोटिस और जुर्माना भेजने की मांग की गई है। इसी टिप्पणी में दावा किया गया कि 2022 के बाद चार वर्षों में 1.27 करोड़ चादरें, तौलिये, कंबल और तकिए चोरी हुए हैं। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

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रेलवे के सामने पुरानी चुनौती है चोरी कांड

ट्रेनों से लिनेन गायब होने की समस्या रेलवे के लिए लंबे समय से चिंता का विषय रही है। चादर, कंबल और तौलिये जैसी वस्तुओं के गायब होने से रेलवे के इन्वेंट्री पर असर पड़ता है। उनकी दोबारा खरीद पर अतिरिक्त खर्च होता है। हालांकि, वायरल वीडियो में महिला द्वारा TTE पर एक्स्ट्रा पैसे लिए जाने का आरोप लगाया गया है। इस आरोप की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, इस बारे में भारतीय रेलवे की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

Vande Bharat News: ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस पर 10 बड़े अपडेट! काशी को मिलेगी स्लीपर ट्रेन, सूरत-उदयपुर रूट को भी मंजूरी; माल ढुलाई का भी हुआ ट्रायल

Indian Railways News: ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ अब अपने विस्तार के एक नए दौर में एंट्री कर रही है। भारतीय रेलवे स्लीपर वंदे भारत सेवाओं, नए रूटों और तेज रफ्तार माल ढुलाई जैसी कई योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई नए बदलाव और प्रस्ताव सामने आ रहे हैं, जिन पर यात्रियों की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में वंदे भारत नेटवर्क का विस्तार सिर्फ यात्रियों की यात्रा को तेज करने तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि लंबी दूरी की रात की यात्रा और तेज माल परिवहन में भी इसकी भूमिका बढ़ सकती है।

वाराणसी से नई दिल्ली के बीच संभावित स्लीपर वंदे भारत से लेकर सूरत-उदयपुर वंदे भारत और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी के ट्रायल तक, रेलवे का फोकस अब सिर्फ दिन में चलने वाली चेयर-कार वंदे भारत ट्रेनों तक सीमित नहीं रह गया है।

आइए जानते हैं वंदे भारत से जुड़े 10 बड़े अपडेट

1. वाराणसी को मिल सकती है दिल्ली के लिए स्लीपर वंदे भारत

  • वाराणसी के यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर अब आगे बढ़ने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड ने वाराणसी जंक्शन (कैंट) और नई दिल्ली के बीच स्लीपर वंदे भारत शुरू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हालांकि, ट्रेन का अंतिम रूट अभी तय नहीं हुआ है।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि यह सेवा त्योहारी सीजन से पहले शुरू हो सकती है। इससे दशहरा और दिवाली के दौरान बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को राहत मिल सकती है।
  • वाराणसी से पहले से ही काशी विश्वनाथ, शिवगंगा और बनारस-नई दिल्ली सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चलती हैं। इसके अलावा वाराणसी जंक्शन से दो वंदे भारत और तीन महामना एक्सप्रेस सेवाएं भी साप्ताहिक आधार पर संचालित होती हैं। इसके बावजूद यात्रियों की मांग काफी अधिक बनी हुई है।
  • खासकर रविवार शाम को दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में स्लीपर वंदे भारत काशी और राष्ट्रीय राजधानी के बीच लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प बन सकती है।

2. नई दिल्ली-पटना स्लीपर वंदे भारत की भी चर्चा

  • नई दिल्ली और पटना के बीच स्लीपर वंदे भारत ट्रेन को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस सेवा की शुरुआत को लेकर कोई अंतिम मंजूरी या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं दिया गया है।
  • स्लीपर वंदे भारत के विस्तार की चर्चाओं के बीच नई दिल्ली-पटना जैसे व्यस्त रूट पर ऐसी ट्रेन की संभावना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

3. तेज रफ्तार माल ढुलाई के लिए वंदे भारत ट्रेन

  • न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वंदे भारत का इस्तेमाल सिर्फ यात्रियों को तेज गति से सफर कराने तक सीमित नहीं रहने वाला है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा बनाई गई 16 कोच वाली ट्रेन को पार्सल और अन्य सामान को अधिक रफ्तार से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है।
  • इस ट्रेन का संभावित ग्राहक आधार पारंपरिक माल ढुलाई से आगे बढ़कर ई-कॉमर्स, कूरियर सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
  • अगर तेज रफ्तार मालगाड़ियों को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक चलाया जाता है, तो समय के प्रति संवेदनशील सामान को देश के प्रमुख बाजारों तक पहुंचाने के लिए कारोबारियों को परिवहन का एक और विकल्प मिल सकता है।

4. सूरत को मिली पहली वंदे भारत सेवा की मंजूरी

  • सूरत को अपनी पहली वंदे भारत सेवा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। रेलवे बोर्ड ने सूरत और उदयपुर सिटी के बीच नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी दी है।
  • प्रस्तावित ट्रेन का नंबर 26903/26904 बताया गया है। यह ट्रेन करीब 690 किलोमीटर की दूरी लगभग 7 घंटे 30 मिनट में तय करेगी।
  • ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलाने की योजना है और मंगलवार को इसका विकली ऑफ रहेगा।
  • ट्रेन सूरत से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर दोपहर 1:40 बजे उदयपुर सिटी पहुंचेगी। जबकि वापसी में उदयपुर से ट्रेन दोपहर 3:35 बजे चलेगी और रात 11 बजे सूरत पहुंचेगी।

5. सूरत-उदयपुर वंदे भारत के रास्ते में 9 प्रमुख ठहराव

  • आठ कोच वाली इस वंदे भारत ट्रेन के रास्ते में कुल 9 कमर्शियल स्टॉप प्रस्तावित हैं। इनमें शामिल हैं:-

भरूच

वडोदरा

आनंद

मणिनगर

असारवा

हिम्मतनगर

शामलाजी रोड

डूंगरपुर

जावर

  • यह ट्रेन गुजरात और राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों को तेज रेल कनेक्टिविटी से जोड़ेगी। इससे दोनों राज्यों के बीच सफर करने वाले यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, नई सूरत-उदयपुर वंदे भारत मौजूदा उदयपुर सिटी-असारवा वंदे भारत की जगह ले सकती है। यह ट्रेन फरवरी 2026 में शुरू हुई थी।
  • रेलवे बोर्ड की 31 अगस्त की मंजूरी के बाद नई सर्विस नवरात्रि से पहले शुरू होने की उम्मीद है। इस साल नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है।

6. मंगलुरु-बेंगलुरु वंदे भारत के समय पर उठे सवाल

  • बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच प्रस्तावित वंदे भारत का रनिंग टाइम ट्रायल पूरा हो चुका है। लेकिन ट्रायल के दौरान सामने आए समय को लेकर कर्नाटक के तटीय इलाकों के यात्री संगठनों ने चिंता जताई है।
  • दक्षिण पश्चिम रेलवे के ट्रायल में सुबह बेंगलुरु से ट्रेन चलाने और बाद में उसी दिन वापसी का कार्यक्रम शामिल था।
  • हालांकि, यात्री प्रतिनिधियों का कहना है कि अंतिम समय-सारिणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे तटीय क्षेत्र से बेंगलुरु आने वाले कामकाजी और कारोबारी यात्रियों को वास्तविक फायदा मिल सके।
  • पश्चिम करावली रेलवे यात्री अभिवृद्धि समिति के अध्यक्ष जी. हनुमंथ कामथ ने मांग की है कि ट्रेन सुबह मंगलुरु से रवाना हो और उसी रात वापस लौटे।
  • यात्रियों की चिंता यह है कि अगर ट्रेन बेंगलुरु बहुत देर से पहुंचेगी, खासकर आधी रात के करीब, तो सरकारी या कारोबारी काम से राजधानी आने वाले यात्रियों के लिए इसका उपयोग सीमित हो जाएगा।
  • यात्री संगठनों ने मंगलुरु सेंट्रल-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल वंदे भारत का उदाहरण देते हुए कहा है कि सुबह मंगलुरु से प्रस्थान और रात में वापसी का शेड्यूल यात्रियों के लिए बेहतर काम करता है।

7. बलांगीर से वंदे भारत की मांग पर रेलवे बोर्ड का जवाब

  • ओडिशा के बलांगीर से वंदे भारत ट्रेन शुरू करने की मांग पर भी रेलवे बोर्ड ने जवाब दिया है। सांसद निरंजन बिशी ने 30 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बलांगीर से नई दिल्ली, वाराणसी, बेंगलुरु और जम्मू जैसे प्रमुख शहरों के लिए वंदे भारत कनेक्टिविटी की मांग की थी।
  • रेलवे बोर्ड ने अपने जवाब में कहा कि बलांगीर के पास पहले से 66 ट्रेन सेवाएं हैं। इनमें बेंगलुरु और वाराणसी की ओर जाने वाली कई ट्रेनें शामिल हैं। दिल्ली की ओर मौजूदा कनेक्टिविटी के लिए रेलवे ने समता एक्सप्रेस और टिटलागढ़ की कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया।
  • हालांकि, रेलवे बोर्ड का जवाब नई वंदे भारत ट्रेन को मंजूरी नहीं माना जा सकता। बोर्ड ने संकेत दिया है कि किसी नई ट्रेन सेवा की शुरुआत ट्रैफिक सर्वे, परिचालन की व्यवहार्यता और कोचों की उपलब्धता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

8. वंदे भारत के TTE का वीडियो 1 करोड़ व्यूज के पार

  • नई ट्रेनों और रेलवे की योजनाओं से अलग वंदे भारत से जुड़ी एक घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है। TTE अमित गुप्ता के अनुसार, दो लड़के एक रेलवे स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत ट्रेन में सिर्फ अंदर से ट्रेन देखने के लिए चढ़ गए थे। ट्रेन में चढ़ने के बाद उसके दरवाजे बंद हो गए। वे तुरंत नीचे नहीं उतर सके।
  • इसके बाद उनकी मुलाकात TTE से हुई। शुरुआत में TTE को लगा कि दोनों बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में उन पर 4,840 रुपये का संभावित जुर्माना लग सकता था। लड़कों ने बताया कि उनके पास सिर्फ 300 रुपये हैं। बाद में TTE को पता चला कि दोनों ट्रेन में यात्रा करने के लिए नहीं बल्कि उसे अंदर से देखने के लिए चढ़े थे।
  • इसके बाद TTE ने कथित तौर पर 300 रुपये लेने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए। उन्होंने दोनों लड़कों को अगले स्टेशन पर उतरने के लिए कहा और दरवाजे के पास वाले हिस्से में बैठने को कहा।
  • अमित गुप्ता ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया गया है कि वीडियो को चार दिनों में 1 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं। वीडियो पर बड़ी संख्या में लाइक्स और सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं।

9. वंदे भारत बनाम राजधानी: कौन सी ट्रेन बेहतर?

  • वंदे भारत नेटवर्क के विस्तार के साथ इसकी तुलना राजधानी एक्सप्रेस से भी लगातार की जा रही है। हालांकि, दोनों ट्रेनों को अलग-अलग यात्रा जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
  • पहली राजधानी एक्सप्रेस 1969 में नई दिल्ली और हावड़ा के बीच शुरू हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी और देश के प्रमुख शहरों के बीच तेज रात की यात्रा उपलब्ध कराना था।
  • वहीं, वंदे भारत ने फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी रूट से सेवा शुरू की और इसे मुख्य रूप से तेज दिन की इंटर-सिटी यात्रा के लिए तैयार किया गया।
  • दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर यात्रा के स्वरूप का है। सामान्य वंदे भारत में चेयर-कार यात्रा की सुविधा होती है, जबकि कई सेवाओं में एग्जीक्यूटिव चेयर कार भी उपलब्ध है।
  • वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और आधुनिक सीटिंग जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
  • इसके मुकाबले राजधानी एक्सप्रेस में पारंपरिक रूप से फर्स्ट AC, सेकेंड AC और थर्ड AC में सोने की सुविधा होती है। इसलिए रातभर की यात्रा के लिए राजधानी अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
  • हालांकि, स्लीपर वंदे भारत के आने के बाद दोनों ट्रेनों के बीच का यह अंतर धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है।

10. स्लीपर वंदे भारत बदल सकती है लंबी दूरी की यात्रा का समीकरण

  • स्लीपर वंदे भारत में वंदे भारत की आधुनिक डिजाइन और तकनीक को रात की लंबी दूरी की यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन ट्रेनों में सोने के लिए बर्थ, कुशन वाली बर्थ, शोर कम करने वाली तकनीक और सेंसर आधारित लाइटिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
  • फर्स्ट AC सेक्शन में प्रीमियम यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं मिलने की भी उम्मीद है। इससे स्लीपर वंदे भारत कुछ चुनिंदा रूटों पर राजधानी एक्सप्रेस समेत प्रीमियम रात की ट्रेनों को सीधी टक्कर दे सकती है।
  • आखिरकार यात्रियों के लिए फैसला सिर्फ ट्रेन के नाम पर नहीं, बल्कि यात्रा का समय, कुल अवधि, सुविधा और किराए जैसे पहलुओं पर निर्भर करेगा। ताजा घटनाक्रम से साफ है कि वंदे भारत अब सिर्फ तेज रफ्तार वाली दिन की इंटर-सिटी ट्रेन तक सीमित नहीं रह गई है।
  • स्लीपर सेवाएं, नए रूट, तेज माल ढुलाई और मौजूदा सेवाओं में बदलाव इसके अगले विस्तार की दिशा तय कर रहे हैं। वाराणसी-नई दिल्ली स्लीपर वंदे भारत और सूरत-उदयपुर जैसी प्रस्तावित सेवाएं यात्रियों के लिए नई कनेक्टिविटी ला सकती हैं। जबकि तेज माल ढुलाई वाला मॉडल रेलवे के लिए एक नए कारोबारी क्षेत्र का रास्ता खोल सकता है।

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ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Mumbai Local Train update: मुंबईकरों के लिए खुशखबरी! अब दौड़ेगी वंदे मेट्रो AC लोकल ट्रेन, जानें कब तक तैयार हो जाएगी ये पूरी फ्लीट

Mumbai Local Train update: मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुंबई को जल्द ही 238 नई वंदे मेट्रो एसी लोकल ट्रेनें (2856 कोच) मिलने जा रही हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन ने ऐलान किया है कि इन नई एसी लोकल ट्रेनों को भारतीय रेलवे की ही तीन अलग-अलग प्रोडक्शन यूनिट में तैयार किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक एमआरवीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक विलास वाडेकर ने बताया है कि रेलवे की तीन मैन्युफैक्चरिंग सर्विस में बनने वाली पहली 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेन 2027 में मिल जाएगी जबकि 238 ट्रेनों की पूरी फ्लीट 2030 तक उपलब्ध करा दी जाएगी।

19,293 करोड़ रुपये की लागत आएगी

एमआरवीसी के मुताबिक मुंबई अर्बन ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (MUTP) 3 के तहत खरीदी जा रही इन 238 वंदे मेट्रो उपनगरीय ट्रेनों (2,856 कोच) के रोलिंग-स्टॉक की अनुमानित लागत 19293 करोड़ रुपये है। इन 12-कोच वाली एसी लोकल ट्रेनों का निर्माण रेलवे की तीन प्रमुख इकाइयों इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई, रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला और मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में किया जाएगा।

पहले इन ट्रेनों को निजी या विदेशी कंपनियों के माध्यम से खरीदने और उनके जीवनकाल के रखरखाव के लिए इंटरनेशनल टेंडर मंगाए गए। इसे लेकर मन लायक रिस्पॉन्स नहीं मिलने की वजह से सरकार ने इसे अपने कारखानों में बनाने का फैसला लिया है।

अंतरराष्ट्रीय टेंडर में आ रही थीं दिक्कतें, रेल मंत्री ने बताया नया प्लान

प्रक्रिया में हुए बदलाव को लेकर बुधवार शाम जारी एक वीडियो संदेश में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पुरानी खरीद प्रक्रिया में कई समस्याएं थीं। इसी वजह से केंद्र सरकार ने अब इन ट्रेनों का निर्माण अपनी खुद की तीन उत्पादन इकाइयों में करने का निर्णय लिया है। रेल मंत्री ने कहा कि पुरानी योजना के तहत पूरी खरीद 2030 में जाकर पूरी होने वाली थी, जो हमें कतई स्वीकार्य नहीं थी। इसीलिए आज यह नया फैसला लिया गया है कि इनका उत्पादन भारत सरकार की तीन उत्पादन इकाइयों ICF, RCF और MCF में किया जाएगा, ताकि पहली लोकल ट्रेन 2027 तक हर हाल में पटरी पर आ जाए।

एमआरवीसी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, पुरानी खरीद प्रक्रिया के तहत अगर काम होता तो सीरीज प्रोडक्शन शुरू होने में ही करीब तीन साल लग जाते। इस वजह से पहली ट्रेन 2030 में मिलती और पूरी फ्लीट 2034 तक जाकर तैयार हो पाती। जून 2023 में एमआरवीसी ने 238 एसी लोकल ट्रेनों की खरीद और उनके 35 वर्षों के रखरखाव के लिए अंतरराष्ट्रीय बोलियां आमंत्रित की थीं। मई 2023 में रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद जारी इस टेंडर में दो साल का समय प्रोटोटाइप ट्रेन बनाने के लिए और उसके बाद औसतन 50 ट्रेनें प्रति वर्ष की दर से पांच साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।

सफल बोलीदाता को पालघर जिले के वणगांव और रायगढ़ जिले के भिवपुरी में नए रखरखाव डिपो स्थापित करने, मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने और 35 वर्षों के लिए रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने की शर्त रखी गई थी।

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर 22000 करोड़ का निवेश, सफर होगा आरामदायक

एमआरवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए संशोधित विनिर्माण कार्यक्रम से इन एसी ट्रेनों को मुंबई रेल नेटवर्क के नए कॉरिडोर और क्षमता विस्तार कार्यों के शुरू होने के साथ ही पटरी पर उतारा जा सकेगा। क्षमता विस्तार कार्यों में लगभग ₹22,000 करोड़ का भारी निवेश किया जा रहा है। इसमें नए कॉरिडोर बनाना, अतिरिक्त रेलवे लाइनें बिछाना, 15-कोच वाली ट्रेनों को चलाने के लिए प्लेटफॉर्मों की लंबाई बढ़ाना, यार्डों का पुनर्गठन करना और नेटवर्क को मजबूत करने वाले कई काम शामिल हैं।

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New IRCTC Website: आज लाइव हो रही है आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट, 5 गुना तेजी से बुक होंगे तत्काल टिकट! मिलेंगे ये स्मार्ट फीचर्स

New IRCTC Website: भारतीय रेलवे के जरिए सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए आज का दिन बेहद खास है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) आज यानी 15 जुलाई को अपनी नए सिरे से डिजाइन की गई टिकट बुकिंग वेबसाइट को लाइव करने जा रहा है। इस नए और अपग्रेडेड प्लेटफॉर्म से यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग को बेहद तेज, आसान और सुलभ एक्सपीरियंस वाला होने का दावा किया जा रहा है।

भारतीय रेलवे डिजिटल सेवाओं को आधुनिक बनाने के प्रयासों के तहत यह बड़ा अपग्रेड करने जा रहा है। दरअसल पीक आवर्स (खास तौर पर तत्काल बुकिंग के समय) के दौरान वेबसाइट के धीमे होने और टिकट बुकिंग फेल होने को लेकर यात्री लगातार शिकायतें कर रहे थे। दावा किया जा रहा है कि नई वेबसाइट इन सभी समस्याओं को काफी हद तक दूर कर देगी। आइए जानते हैं कि नई वेबसाइट में क्या बदलाव किए गए हैं और यात्रियों को कौन से नए स्मार्ट फीचर्स मिलेंगे।

5 गुना तेज बुकिंग और भारी-भरकम ट्रैफिक संभालने की क्षमता

नई वेबसाइट का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सुधार इसकी ट्रैफिक संभालने की क्षमता में किया गया है। रेलवे से मिली जानकारी के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म अब हर मिनट 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। यह मौजूदा सिस्टम की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक है। अभी का सिस्टम प्रति मिनट सिर्फ 32000 बुकिंग ही संभाल पाता था।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) के बैकएंड को भी मजबूत किया गया है। अब यह प्रति मिनट 40 लाख से अधिक पूछताछ को सपोर्ट कर सकता है। पुराना सिस्टम सिर्फ 4 लाख पूछताछ ही संभाल पाता था। टिकट बुकिंग और दूसरी कैपिसिटी में हुई इस बढ़ोतरी के बाद पीक आवर्स में वेबसाइट के धीमे होने, पेमेंट फेल होने और बुकिंग एरर जैसी समस्याओं में भारी कमी आएगी।

यात्रियों के लिए नए और बेहद स्मार्ट फीचर्स

प्रदर्शन में सुधार के अलावा आईआरसीटीसी की इस नई वेबसाइट में यात्रियों की सुविधा के लिए कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं। अब यात्री टिकट बुकिंग के दौरान अपनी पसंद की सीट चुन सकेंगे। पहले यात्रियों को पूरी तरह से ऑटोमैटिक सीट आवंटन पर निर्भर रहना पड़ता था। इसमें एक फेयर कैलेंडर फीचर जोड़ा गया है। इसकी मदद से यात्री टिकट बुक करने से पहले अलग-अलग तारीखों के किरायों की तुलना कर सकेंगे। यह उन यात्रियों के लिए बेहद फायदेमंद होगा जिनके सफर की तारीखें फ्लेक्सिबल हैं और जो कम किराये में सफर करना चाहते हैं।

बुकिंग इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अब स्लीपर, एसी 3 टियर और एसी 2 टियर जैसी कई श्रेणियों की सीट उपलब्धता को एक ही स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। इसके लिए यात्रियों को बार-बार अलग-अलग टैब बदलने की जरूरत नहीं होगी।

आसान पहुंच और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस

नई वेबसाइट कई भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करेगी। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के लिए अपनी भाषा में टिकट बुक करना आसान हो जाएगा। छात्रों, दिव्यांगजनों और मरीजों के लिए दी जाने वाली कंसेशन बुकिंग सेवाओं को अब एक ही यूनीफाइड सिस्टम में जोड़ दिया गया है।

वेबसाइट के इंटरफेस को काफी सुव्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाया गया है। अब टिकट बुक करते समय यात्रियों को गैर-जरूरी पॉप-अप विज्ञापनों, बैनरों और बार-बार आने वाले कैप्चा वेरिफिकेशन से परेशान नहीं होना पड़ेगा। इससे बुकिंग की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।

रेलवे के बड़े डिजिटल कायाकल्प का हिस्सा

आईआरसीटीसी की इस नई वेबसाइट का लॉन्च होना भारतीय रेलवे में चल रहे एक बड़े डिजिटल बदलाव का हिस्सा है। यात्री सेवाओं में सुधार के साथ-साथ रेलवे ने हाल ही में बुनियादी ढांचे, माल ढुलाई संचालन और प्रोजेक्ट्स को पूरा करने से जुड़े कई बड़े सुधारों का भी ऐलान किया है।

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Vande Bharat यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब आखिरी मिनट में भी मिलेगा कन्फर्म टिकट…जान लें ये नया नियम

अब वंदे भारत एक्सप्रेस और दूसरी रिजर्व ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। भारतीय रेलवे ने नया नियम लागू किया है, जिसके तहत रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक खाली सीटों की बुकिंग की जा सकेगी। रेलवे का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे उन यात्रियों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है और आखिरी समय में कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद चार्ट जारी होने के बावजूद अगर किसी ट्रेन में सीट खाली रहती है, तो यात्री ट्रेन छूटने से 15 मिनट पहले तक उसे बुक करा सकेंगे। इससे यात्रियों को आखिरी समय में भी कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

क्या बदला है?

पहले जब किसी ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट तैयार हो जाता था, तो उसके बाद टिकट बुक कराने की सुविधा लगभग खत्म हो जाती थी। लेकिन अब रेलवे ने नियम बदल दिया है। नए नियम के अनुसार, अगर चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन सीटों की बुकिंग कर सकेंगे। रेलवे को उम्मीद है कि इस बदलाव से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल होगा। साथ ही, जिन लोगों का सफर अचानक तय होता है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी।

किन यात्रियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

रेलवे का यह नया नियम उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है या जिन्हें सामान्य बुकिंग के दौरान कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। अब अगर ट्रेन में चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली होंगी, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे ज्यादा लोगों को कन्फर्म सीट मिलने का मौका मिलेगा और ट्रेनों की खाली सीटों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता भी बेहतर होगी।

टिकट कैसे बुक करें?

यात्री खाली सीटों की बुकिंग आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट, आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या रेलवे के अधिकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के जरिए कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली हों। ऐसी स्थिति में यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उपलब्ध सीटों की बुकिंग कर सकेंगे।

यात्रियों के लिए जरूरी बातें

जो यात्री इस नई सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें स्टेशन जाने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि ट्रेन में कोई सीट खाली है या नहीं। साथ ही, उन्हें समय से पहले स्टेशन पहुंचना चाहिए और यात्रा के दौरान अपने साथ आईडी कार्ड जरूर रखना चाहिए। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि टिकट हमेशा आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट, रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या अधिकृत पीआरएस (PRS) काउंटर से ही बुक करें।

नई व्यवस्था का क्या फायदा होगा?

भारतीय रेलवे का मानना है कि इस नए नियम से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। साथ ही, जिन लोगों को अचानक यात्रा करनी पड़ती है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। अब अगर रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में खाली सीटों की संख्या भी कम होगी।