Vande Bharat Update: ‘वंदे भारत’ ट्रेन में बड़े बदलाव की आहट! एग्जीक्यूटिव क्लास से खत्म हो सकता है 180-डिग्री रोटेटिंग सीट का फीचर

Vande Bharat Update: देश की सबसे लोकप्रिय और प्रीमियम ट्रेनों में शामिल ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ के डिजाइन और फीचर्स में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रेलवे के सीनियर इंजीनियरों ने वंदे भारत ट्रेनों के एग्जीक्यूटिव क्लास से 180-डिग्री रोटेटिंग सीट (घूमने वाली सीट) के फीचर को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इस फीचर को हटाकर सीटों को फिक्स करने और अधिक मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है ताकि ट्रेन की ऑपरेशनल दक्षता को बेहतर बनाया जा सके।

क्यों हटाया जा सकता है रोटेटिंग सीट का फीचर?

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक सीनियर रेलवे इंजीनियरों का तर्क है कि सीटों को घुमाने वाला ये मैकेनिज्म जरूरत से ज्यादा जगह लेता है। इसकी वजह से सीट के कलपुर्जे भी जल्दी घिसते या खराब होते हैं। एक सीनियर रेलवे अधिकारी ने बताया कि मौजूदा वंदे भारत के एग्जीक्यूटिव क्लास में सीटों में रोटेशन और रिक्लाइनिंग दोनों तरह के मैकेनिज्म दिए गए हैं।

इससे यात्री ट्रेन की गति की दिशा में, खिड़की की तरफ या उलटी दिशा में सीट का रुख मोड़ सकते हैं। इस सुविधा के लिए अतिरिक्त मैकेनिकल कंपोनेंट्स, क्लीयरेंस और एक्स्ट्रा जगह की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा इस मैकेनिज्म की वजह से पुर्जे ढीले होने, खराब होने और बार-बार मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है।

प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर्स की बैठक में उठा मुद्दा

इस प्रस्ताव पर हाल ही में आयोजित प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर्स के एक सम्मेलन में चर्चा की गई। इस सम्मेलन में कोच उत्पादन इकाइयों ने एग्जीक्यूटिव क्लास के कोचों से रोटेटिंग सीट फीचर को हटाकर, पारंपरिक शताब्दी और अन्य ट्रेनों की तरह सीटों को पूरी तरह से फिक्स करने का विचार रखा।

रेलवे बोर्ड ने सम्मेलन को जो मिनट्स बनाए हैं उनमें लिखा गया है कि वंदे भारत के एग्जीक्यूटिव क्लास कोचों में सीटों को अधिक मजबूत बनाने के लिए उनके घूमने वाले फीचर को समाप्त किया जा सकता है। रेलवे बोर्ड ने इंटीग्रल कोच फैक्टरी, चेन्नई के प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर को इस सुझाव पर आगे की कार्रवाई शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

सीटें फिक्स होने से बढ़ेगी क्षमता और राजस्व

इंजीनियरों का सुझाव है कि सीटों को फिक्स करने से सीटों को घुमाने के लिए खाली छोड़ी जाने वाली जगह बच जाएगी। पंक्तियों के बीच की जगह को कम करके एग्जीक्यूटिव क्लास कोच में सीटों की एक एक्स्ट्रा पंक्ति जोड़ी जा सकती है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सीटों को फर्श के साथ स्थायी रूप से फिक्स कर दिया जाता है तो उनका स्ट्रक्चर और मजबूत होगा। इससे न सिर्फ यात्रियों की क्षमता बढ़ेगी बल्कि ट्रेन की राजस्व उत्पन्न करने की क्षमता में भी सुधार होगा। अधिकारियों के मुताबिक अगर कई कोचों और ट्रेन सेटों में एक-एक अतिरिक्त पंक्ति जुड़ती है तो इससे रेलवे की कमाई के मामले में बड़ा फायदा हो सकता है।

प्रीमियम सुविधा से मजबूती और रखरखाव पर ध्यान

हालांकि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है लेकिन अगर इसे मंजूरी मिलती है तो यह वंदे भारत एग्जीक्यूटिव क्लास के डिजाइन में एक बड़ा बदलाव होगा। यह कदम प्रीमियम फ्लेक्सिबिलिटी और सुविधाओं के बजाय ट्रेन की मजबूती, आसान रखरखाव और यात्री क्षमता बढ़ाने की दिशा में बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।

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Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कब शुरू होगी? 61% काम पूरा, जानिए पहले किस रूट पर दौड़ेगी

Bullet Train news: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को डेवलप करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसने 61 फीसदी से ज्यादा की फिजिकल प्रोग्रेस कर ली है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की जून महीने की रिपोर्ट के मुताबिक इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर अब तक 90966.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

पहले किस रूट पर और कब दौड़ेगी पहली बुलेट ट्रेन?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भारत की पहली बुलेट ट्रेन का पहला कमर्शियल रन अगस्त 2027 में शुरू होगा। यह शुरुआत 100 किलोमीटर लंबे सूरत से वापी खंड के बीच होगी। यह इस पूरे हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण होगा। इसके बाद वापी-अहमदाबाद और ठाणे-अहमदाबाद सेक्शन को चालू किया जाएगा। इसके बाद अंत में पूरा मुंबई-अहमदाबाद रूट चालू होगा। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पूरे 508 किमी के इस रूट का काम दिसंबर 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

1.08 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है कॉस्ट

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्र सरकार के प्रगति (PRAGATI) पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। वर्तमान में इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये रखी गई है। परियोजना के अंत तक इसकी कुल लागत बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय रेलवे लागत में होने वाली इस बढ़ोतरी को बिना जापानी एजेंसी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से अतिरिक्त कर्ज मांगे खुद ही वहन करेगी। गौरतलब है कि JICA ने इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से के लिए फंडिंग दी है।

ग्राउंड पर कितना हुआ काम?

संसद में पेश आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक इस 508 किलोमीटर के कॉरिडोर पर काम काफी तेजी से चल रहा है। 209 किलोमीटर ट्रैक बेड बनकर तैयार हो चुका है और 190 किलोमीटर तक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन के मस्तूल तैयार किए जा चुके हैं। 452 किलोमीटर पियर्स का काम भी पूरा कर लिया गया है जबकि 356 किलोमीटर के हिस्से में गर्डर बिछाए जा चुके हैं। महाराष्ट्र में घनसोली से शीलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी अंडर-सी टनल का काम चल रहा है। इसमें से 4.8 किलोमीटर टनलिंग का काम पूरा हो चुका है।

सूरत से वापी के बीच के 97 किमी के हिस्से पर नदी पुलों के निर्माण सहित सभी सिविल काम पूरे हो चुके हैं और 86% ट्रैक बेड बिछा दिया गया है। इस पूरे कॉरिडोर का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड यानी खंभों पर बनाया जा रहा है जबकि बाकी का हिस्सा टनल, ब्रिज और स्टेशन एरिया का है।

किन 12 स्टेशनों से होकर गुजरेगी बुलेट ट्रेन?

यह हाई-स्पीड कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है। इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं-

  • मुंबई
  • ठाणे
  • विरार
  • बोईसर
  • वापी
  • बिलिमोरा
  • सूरत
  • भरूच
  • वडोदरा
  • आनंद
  • अहमदाबाद
  • साबरमती

320 किमी/घंटे की रफ्तार, महज 1 घंटे 58 मिनट में सफर पूरा

पूरा प्रोजेक्ट चालू होने के बाद बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ेगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। जानकारी के मुताबिक अगर बुलेट ट्रेन सिर्फ 4 प्रमुख इंटरमीडिएट स्टेशनों पर रुकती है तो मुंबई से अहमदाबाद की दूरी तय करने में 1 घंटा 58 मिनट का समय लगेगा। अगर ट्रेन सभी 12 स्टेशनों पर रुकते हुए चलती है तो इस सफर को पूरा करने में 2 घंटे 17 मिनट का समय लगेगा। ऐसा माना जा रहा है कि यह कॉरिडोर पश्चिम भारत के दो प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जोड़कर रेल यात्रा का रूप बदल देगा।

टिकट बुकिंग का झंझट खत्म! जानें IRCTC के नए स्मार्ट फीचर के बारे में

रेलवे से ट्रैवल करने वाले करोड़ों पैसेंजर के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च होने वाला है, जिससे ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। आइए जानते हैं नई वेबसाइट में कौन-कौन से नए फीचर्स जोड़े गए हैं और इससे पैसेंजर को क्या-क्या फायदे मिलेंगे:

15 जुलाई तक लॉन्च हो सकती है नई वेबसाइट

IRCTC shares jump 2% as Indian Railways to hike passenger fares from July 1 - The Economic Times

IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन और अपग्रेडेड पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) का रिव्यू पूरा हो चुका है। रेलवे इसे 15 जुलाई 2026 तक आम लोगों के लिए लाइव कर सकता है। वेबसाइट को बेहतर बनाने में CRIS, IRCTC और MNIT जयपुर के स्टूडेंट्स ने मिलकर टेक्निकल सुधार किए हैं। इससे पैसेंजर को पहले से बेहतर और स्मूथ ऑनलाइन टिकट बुकिंग का एक्सपीरियंस मिलेगा।

एक स्क्रीन पर दिखेंगी सभी सीटों की जानकारी

Free Upgrade From Sleeper Class To 2AC: New Indian Railways Scheme | Check Details | Auto News - News18

नई वेबसाइट में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब स्लीपर, 3AC, 2AC और दूसरी सभी क्लासेज की अवेलेबल सीटें एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगी। अलग-अलग कैटेगरी देखने के लिए बार-बार क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पैसेंजर को सीटों की अवेलेबिलिटी एक नजर में समझ आ जाएगी और समय की बचत होगी।

कैप्चा और पॉप-अप से मिलेगी राहत

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टिकट बुकिंग के दौरान आने वाले उलझाऊ कैप्चा, फ्लैशिंग ग्राफिक्स और अनचाहे पॉप-अप को हटाया जा रहा है। इससे वेबसाइट ज्यादा साफ, तेज और उपयोग में आसान बनेगी। खासकर तत्काल टिकट बुक करने वाले पैसेंजर को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

तेज होगी टिकट बुकिंग प्रोसेस

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रेलवे ने टिकट बुकिंग के स्टेप्स कम कर दिए हैं, जिससे फास्ट चेकआउट की सुविधा मिलेगी। पैसेंजर की नाम, उम्र जैसी जानकारी पहले से सेव रहेगी, जिससे बार-बार फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। इससे तत्काल और सामान्य टिकट पहले से ज्यादा तेजी से बुक किए जा सकेंगे।

40 साल पुराना PRS सिस्टम होगा अपग्रेड

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रेलवे अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी अपग्रेड कर रहा है। IRCTC के अधिकारियों के अनुसार, नया सिस्टम टिकट बुकिंग को पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद बनाएगा। इससे वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने पर भी बेहतर परफॉरमेंस और कम टेक्निक दिक्कतें देखने को मिलेंगी।

Indian Railways Digital Ticket Rules: डिजिटल टिकट लेकर ट्रेन में सफर करने वाले रेलवे का ये 4 नियम जान लें वरना लगेगा जुर्माना

Indian Railway Ticket Rule: अगर आप भी अक्सर रेलवे काउंटर की लंबी लाइनों से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन से डिजिटल अनरिजर्व्ड (सामान्य/अनारक्षित) टिकट बुक करके सफर करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकटों को लेकर नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है और यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। रेलवे ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि टिकट चेकिंग के दौरान केवल रजिस्टर्ड मोबाइल फोन पर रेल वन (Rail One) ऐप के भीतर मौजूद मूल डिजिटल टिकट ही मान्य माना जाएगा। अगर आप टीटीई को टिकट का स्क्रीनशॉट, वॉट्सऐप कॉपी या पीडीएफ दिखाते हैं तो उसे अमान्य घोषित कर दिया जाएगा और रेलवे नियमों के तहत आपके ऊपर जुर्माना लगाया जाएगा। आइए जानते हैं रेलवे द्वारा जारी किए गए इन नियमों की पूरी डिटेल और वह घटना जिसके बाद रेलवे को यह स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा।

स्क्रीनशॉट दिखाने पर महिला यात्री से वसूला गया जुर्माना: जानें पूरा मामला

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक यह स्पष्टीकरण कोरबा-विशाखापट्टनम लिंक एक्सप्रेस में घटी एक घटना के बाद आया है। इस ट्रेन में कोरबा से रायपुर की यात्रा कर रही एक महिला यात्री को टिकट चेकिंग के दौरान वॉट्सऐप स्क्रीनशॉट दिखाना भारी पड़ गया और उन पर जुर्माना ठोक दिया गया।

मामले में क्या गड़बड़ी पाई गई?

महिला यात्री ने टीटीई को बताया कि उसके भाई ने अपने मोबाइल के रेल वन ऐप से यह टिकट बुक किया था और उसे वॉट्सऐप पर इसका स्क्रीनशॉट फॉरवर्ड कर दिया था। रेलवे अधिकारियों ने जब जांच की तो पाया कि वह टिकट शाम 4:45 बजे जनरेट किया गया था जबकि ट्रेन कोरबा स्टेशन से दोपहर 4:10 बजे ही रवाना हो चुकी थी। वह टिकट यात्रा कर रही महिला यात्री के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भी उपलब्ध नहीं था। इन सभी खामियों के चलते टीटीई ने स्क्रीनशॉट को अमान्य करार दिया और रेलवे नियमों के मुताबिक पेनल्टी वसूल की।

डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट के 4 बेहद जरूरी नियम

डिजिटल टिकटों के दुरुपयोग को रोकने और यात्रा के दौरान सही वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने यहां नीचे दिए गए नियम दोहराए हैं:

  • ऐप के अंदर ही दिखाना होगा ओरिजिनल टिकट: यात्रियों को चेकिंग के दौरान रेल वन ऐप खोलकर उसके भीतर ही ओरिजिनल टिकट दिखाना होगा। इसके अलावा स्क्रीनशॉट, तस्वीरें, पीडीएफ कॉपियां या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (जैसे वॉट्सऐप) पर फॉरवर्ड किए गए टिकट स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
  • उसी फोन और नंबर पर होना चाहिए टिकट: डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट सिर्फ तभी वैध माना जाएगा जब वह उसी मोबाइल फोन और उसी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मौजूद हो जिसका इस्तेमाल टिकट बुक करने के लिए किया गया था।
  • ट्रेन खुलने से पहले बुकिंग जरूरी: रेलवे ने याद दिलाया है कि डिजिटल अनरिजर्व्ड टिकट हमेशा ट्रेन के बोर्डिंग स्टेशन से रवाना होने से पहले ही बुक हो जाना चाहिए। अगर ट्रेन स्टेशन छोड़ चुकी है और उसके बाद टिकट जनरेट किया जाता है तो रेल वन ऐप में दिखने के बावजूद उसे अवैध माना जाएगा।
  • फोन चार्ज रखना यात्री की जिम्मेदारी: यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे पूरी यात्रा के दौरान उस मोबाइल फोन को अपने पास रखें जिससे बुकिंग की गई है। साथ ही फोन को पर्याप्त रूप से चार्ज रखें ताकि टिकट चेकिंग के समय कोई असुविधा न हो। यात्रा से पहले अपनी जर्नी डिटेल्स को भी अच्छी तरह वेरिफाई कर लें।

क्या यह नियम रिजर्व्ड (आरक्षित) टिकटों पर भी लागू है?

रायपुर डिवीजन के सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर (DCM) अवधेश कुमार त्रिवेदी ने इस पर स्थिति साफ की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के लिए सिर्फ रजिस्टर्ड डिवाइस पर उपलब्ध ओरिजिनल डिजिटल टिकट ही मान्य है। हालांकि ये नियम सिर्फ रेल वन ऐप के माध्यम से बुक किए गए डिजिटल अनरिजर्व्ड (अनारक्षित) टिकटों पर ही लागू होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस नियम का असर रिजर्व्ड टिकटों पर नहीं पड़ेगा क्योंकि रिजर्व्ड टिकटों के मामले में यात्रियों की पहचान का वेरिफिकेशन पहले से ही सरकार द्वारा जारी आईडी प्रूफ (पहचान पत्र) दस्तावेजों के माध्यम से किया जाता है।

Vande Bharat यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब आखिरी मिनट में भी मिलेगा कन्फर्म टिकट…जान लें ये नया नियम

अब वंदे भारत एक्सप्रेस और दूसरी रिजर्व ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। भारतीय रेलवे ने नया नियम लागू किया है, जिसके तहत रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक खाली सीटों की बुकिंग की जा सकेगी। रेलवे का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे उन यात्रियों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है और आखिरी समय में कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद चार्ट जारी होने के बावजूद अगर किसी ट्रेन में सीट खाली रहती है, तो यात्री ट्रेन छूटने से 15 मिनट पहले तक उसे बुक करा सकेंगे। इससे यात्रियों को आखिरी समय में भी कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

क्या बदला है?

पहले जब किसी ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट तैयार हो जाता था, तो उसके बाद टिकट बुक कराने की सुविधा लगभग खत्म हो जाती थी। लेकिन अब रेलवे ने नियम बदल दिया है। नए नियम के अनुसार, अगर चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन सीटों की बुकिंग कर सकेंगे। रेलवे को उम्मीद है कि इस बदलाव से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल होगा। साथ ही, जिन लोगों का सफर अचानक तय होता है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी।

किन यात्रियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

रेलवे का यह नया नियम उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है या जिन्हें सामान्य बुकिंग के दौरान कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। अब अगर ट्रेन में चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली होंगी, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे ज्यादा लोगों को कन्फर्म सीट मिलने का मौका मिलेगा और ट्रेनों की खाली सीटों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता भी बेहतर होगी।

टिकट कैसे बुक करें?

यात्री खाली सीटों की बुकिंग आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट, आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या रेलवे के अधिकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के जरिए कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली हों। ऐसी स्थिति में यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उपलब्ध सीटों की बुकिंग कर सकेंगे।

यात्रियों के लिए जरूरी बातें

जो यात्री इस नई सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें स्टेशन जाने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि ट्रेन में कोई सीट खाली है या नहीं। साथ ही, उन्हें समय से पहले स्टेशन पहुंचना चाहिए और यात्रा के दौरान अपने साथ आईडी कार्ड जरूर रखना चाहिए। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि टिकट हमेशा आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट, रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या अधिकृत पीआरएस (PRS) काउंटर से ही बुक करें।

नई व्यवस्था का क्या फायदा होगा?

भारतीय रेलवे का मानना है कि इस नए नियम से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। साथ ही, जिन लोगों को अचानक यात्रा करनी पड़ती है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। अब अगर रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में खाली सीटों की संख्या भी कम होगी।

Bullet Train: जेवर से लखनऊ सिर्फ 1 घंटा 40 मिनट में! बुलेट ट्रेन के इस प्लान से यूपी से दिल्ली का डिस्टेंस गजब रफ्तार में होगा तय

Bullet Train: उत्तर प्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली के बीच का सफर आने वाले समय में गजब की रफ्तार से तय होने वाला है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जेवर में शनिवार को आयोजित एक कार्यक्रम में प्रस्तावित दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बेहद अहम और बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश में यात्रा का समय बेहद कम हो जाएगा।

केवल 1 घंटे 40 मिनट में जेवर से लखनऊ का सफर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया कि इस प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली से लखनऊ का सफर महज 2 घंटे 10 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इसी तरह जेवर से लखनऊ का सफर पैसेंजर्स सिर्फ 1 घंटा 40 मिनट में तय कर सकेंगे। परियोजना की रफ्तार और महत्व पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैसे गंगा बहती है, ठीक उसी तरह बुलेट ट्रेन भी दौड़ेगी। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली-लखनऊ-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी की पूरी तस्वीर बदल देगा और राज्य के औद्योगिक व आर्थिक विकास को एक बहुत बड़ा बूस्ट देगा।

जेवर बनेगा उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली और सेमीकंडक्टर हब

आपको बता दें कि जेवर को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण का एक बड़ा केंद्र बनाने के लिए शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यमुना सिटी, जेवर में 6750 करोड़ रुपये के कुल निवेश वाले दो बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स का संयुक्त रूप से शिलान्यास किया। इन प्रोजेक्ट्स से क्षेत्र में करीब 3000 नौकरियां पैदा होंगी।

इन दो बड़ी परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

ASCENT-K Circuit (3250 करोड़ रुपये का निवेश): यह दक्षिण कोरिया की केसीसी (KCC) के साथ एक जॉइंट वेंचर है। यहां आधुनिक हाई-डेंसिटी और मल्टी-लेयर प्रिंटेड सर्किट बोर्ड्स का निर्माण किया जाएगा। Amber Enterprises (3500 करोड़ रुपये की फैसिलिटी): इस प्लांट में HVAC कंपोनेंट्स और पीसीबी असेंबली का निर्माण किया जाएगा।

पीसीबी आयात पर घटेगी निर्भरता, मजबूत होगा रुपया

केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने भारत की बढ़ती घरेलू विनिर्माण क्षमताओं की तारीफ करते हुए कहा कि देश अब इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की केवल असेम्बलिंग करने से आगे बढ़कर उनके कोर कंपोनेंट्स बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत हर साल लगभग 40000 करोड़ रुपये के पीसीबी का आयात करता रहा है। अब घरेलू उत्पादन से इस आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी। यहां बनाए जाने वाले एडवांस्ड मल्टी-लेयर पीसीबी (कुछ 20 से 22 लेयर वाले) आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। जिसे हम कभी आयात करते थे, अब उसे दुनिया के लिए मेक इन इंडिया करेंगे।

जेवर में बनने वाला हर एक पीसीबी विदेशी मुद्रा की बचत करेगा, रुपये को मजबूत करेगा और भारत के भुगतान संतुलन में सुधार लाएगा। हजारों करोड़ रुपये के इस निवेश के चलते जेवर क्षेत्र उत्तर भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में उभरने के लिए तैयार है। अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि उनके विजन के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने का सपना उत्तर प्रदेश में साकार हो रहा है।