रेलवे का नया डिजिटल अंदाज! स्टेशन नहीं अब मोबाइल पर देखें रेलवे की रील, जानकारी मिलेगी चंद सेकंडों में

रेलवे ने पैसेंजर तक स्पेशल ट्रेनों की जानकारी पहुंचाने का नया तरीका अपनाया है। अब ट्रेन की तारीख, समय, रूट और स्टॉपेज जैसी जरूरी डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर की जाने वाली छोटी रील्स में देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि इन वीडियो में सफर से जुड़ी खास जगहों की झलक भी दिखाई जाती है, जिससे पैसेंजर को जानकारी के साथ अपनी ट्रिप की तैयारी करने में भी आसानी होती है।

train update pos

चंद सेकेंड्स में ट्रेन की पूरी डिटेल्स

स्पेशल ट्रेनों को लेकर बनाई जा रही रील्स में ट्रेन के ऑपरेशन की तारीख, समय और प्रमुख स्टेशनों की इनफार्मेशन दी जाती है। पैसेंजर वीडियो देखकर जल्दी समझ सकते हैं कि ट्रेन कब और कहां से चलेगी। इससे उन्हें लंबी जानकारी पढ़ने या अलग-अलग जगहों पर ट्रेन की डिटेल ढूंढने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा।

 

मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स की झलकियां

इन रील्स को सिर्फ ट्रेन की जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। वीडियो में ट्रेन के रास्ते में आने वाले प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों की फोटो और छोटे वीडियो भी शामिल किए जाते हैं। इससे पैसेंजर को रूट का अंदाजा लगाने के साथ यह भी पता चलता है कि सफर के दौरान कौन-कौन सी खास जगहें रास्ते में पड़ सकती हैं।

 

फेसबुक और व्हाट्सऐप से कनेक्शन

रेलवे की ये रील्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सऐप ग्रुपों जैसे कई प्लेटफॉर्म पर शेयर की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद पैसेंजर तक जानकारी सीधे उनके मोबाइल पर पहुंच जाती है। छोटी वीडियो होने की वजह से इसे देखना और जरूरी जानकारी समझना भी आसान रहता है।

 

इनफार्मेशन के साथ एंटरटेनमेंट भी

रेलवे के पीआर प्रोफेशनल्स इन रील्स को पैसेंजर की पसंद और सोशल मीडिया के मौजूदा ट्रेंड को ध्यान में रखकर तैयार करते हैं। वीडियो को अट्रैक्टिव बनाने के लिए ट्रेंडिंग म्यूजिक और आसान विजुअल्स का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कानपुर से प्रयागराज होते हुए बेंगलुरु जाने वाली स्पेशल ट्रेन 04132-31 के लिए करीब 38 सेकेंड की रील तैयार की गई है।

रील्स से जानें पसंदीदा स्पेशल ट्रेन

सोशल मीडिया रील्स से सिर्फ नई स्पेशल ट्रेनों की इनफार्मेशन ही नहीं, बल्कि ट्रेन में हुए चेंज और रूट की इनफार्मेशन भी पैसेंजर तक पहुंचाई जा रही है। उदाहरण के लिए प्रयागराज से दादरी के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन को नारायणपुर बाजार तक बढ़ाया गया है।

 

रेलवे का यह तरीका बदलते समय के साथ पैसेंजर की जरूरतों को समझने की एक अच्छी कोशिश है। आज जब लोग मोबाइल पर कम समय में जानकारी पाना चाहते हैं, ऐसे में आसान तरीके से दी गई जानकारी ज्यादा असरदार हो सकती है। इस तरह की पहल से रेलवे और पैसेंजर के बीच कम्युनिकेशन भी आसान होगा और जरूरी अपडेट लोगों तक पहुंचाने का तरीका और बेहतर बन सकता है।

Railway Special Trains: दिवाली-छठ पर घर जाने की टेंशन खत्म! रेलवे ने शुरू की स्पेशल ट्रेनें, यहां देखें पूरी लिस्ट

दिवाली और छठ के मौके पर अगर आप ट्रेन से घर जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। त्योहारों के दौरान ट्रेनों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेन सेवाओं का संचालन शुरू करने का फैसला किया है। इन ट्रेनों के जरिए दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिलेंगे।

रेलवे की ओर से जारी शेड्यूल के मुताबिक, इन स्पेशल ट्रेनों के लिए बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में अगर आपका सफर दिवाली या छठ के आसपास है, तो टिकट बुक करने में देरी करना भारी पड़ सकता है।

60 दिन पहले खुली बुकिंग, सुबह 8 बजे से मौका

रेलवे के 60 दिन के एडवांस रिजर्वेशन पीरियड यानी ARP नियम के तहत यात्री टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग IRCTC की वेबसाइट, ऐप और रेलवे रिजर्वेशन काउंटर के जरिए की जा सकती है।

इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। त्योहार के आसपास उत्तर और पूर्व भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सीटें तेजी से भर सकती हैं और कई रूटों पर लंबी वेटिंग लिस्ट देखने को मिल सकती है।

किन रूटों पर चलेंगी स्पेशल ट्रेनें?

रेलवे ने अलग-अलग शहरों को जोड़ने वाली कई अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं की घोषणा की है। इनमें मुंबई से कटिहार, कानपुर से गुवाहाटी, कटिहार से अमृतसर और डिब्रूगढ़ से कोलकाता जैसे महत्वपूर्ण रूट शामिल हैं।

मुख्य स्पेशल ट्रेनों की सूची इस प्रकार है:

  • मुंबई सेंट्रल–कटिहार–मुंबई सेंट्रल (09189/09190): 5 सितंबर से 17 नवंबर के बीच 77 अतिरिक्त फेरे।
  • कानपुर सेंट्रल–गुवाहाटी–कानपुर सेंट्रल (04127/04128): 10 सितंबर से 11 दिसंबर के बीच 14 अतिरिक्त फेरे।
  • कटिहार–अमृतसर–कटिहार (05736/05735): 9 सितंबर से 27 नवंबर के बीच 12 अतिरिक्त फेरे।
  • डिब्रूगढ़–कोलकाता–डिब्रूगढ़ (05932/05931): 5 सितंबर से 30 नवंबर के बीच 13 अतिरिक्त फेरे।
  • वाराणसी–दिल्ली–वाराणसी (04209/04210)।
  • अयोध्या कैंट–आनंद विहार टर्मिनल (04213/04214): द्विसाप्ताहिक।
  • चंडीगढ़–पटना जंक्शन (04512/04511): साप्ताहिक।
  • फिरोजपुर कैंट–पटना जंक्शन (04616/04615): साप्ताहिक।
  • आनंद विहार टर्मिनल–जोगबनी (04008/04007): साप्ताहिक।
  • आनंद विहार टर्मिनल–मुजफ्फरपुर (04028/04027): द्विसाप्ताहिक।
  • दिल्ली–सीतामढ़ी–दिल्ली (04010/04009): साप्ताहिक।
  • नई दिल्ली–कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट (02456/02455)।
  • बरौनी–नई दिल्ली–बरौनी स्पेशल (02563/02564)।
  • दरभंगा–नई दिल्ली–दरभंगा स्पेशल (02569/02570)।

इन रूटों पर सबसे ज्यादा सीटों की मारामारी

दिवाली और छठ के दौरान बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहने की संभावना है। खासकर दिल्ली-पटना, मुंबई-पटना, बेंगलुरु-पटना, अहमदाबाद-पटना, दिल्ली-गोरखपुर, वाराणसी-दिल्ली और कानपुर-दिल्ली जैसे रूटों पर यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।इन रूटों पर नियमित ट्रेनों में कंफर्म टिकट मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए यात्रियों के लिए स्पेशल ट्रेनों का विकल्प काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

कंफर्म टिकट के लिए पहले से कर लें ये तैयारी

त्योहारों के दौरान टिकट बुकिंग के समय कुछ मिनट की देरी भी सीट हाथ से निकलने की वजह बन सकती है। इसलिए बुकिंग शुरू होने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहतर रहेगा।

Master List पहले ही तैयार रखें

IRCTC प्रोफाइल में यात्रियों के नाम, उम्र और बर्थ से जुड़ी जानकारी पहले से सेव कर दें। इससे बुकिंग के दौरान एक-एक जानकारी भरने में समय बर्बाद नहीं होगा।

समय से पहले IRCTC पर लॉगिन करें

बुकिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉगिन कर लेना बेहतर है। आखिरी समय पर लॉगिन करने की कोशिश में सर्वर या इंटरनेट से जुड़ी परेशानी होने पर टिकट बुकिंग प्रभावित हो सकती है।

पेमेंट में न करें देरी

टिकट बुक करते समय भुगतान का विकल्प भी अहम होता है। तेज पेमेंट के लिए UPI या IRCTC Wallet जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे पेमेंट प्रक्रिया जल्दी पूरी करने में मदद मिल सकती है।

आखिरी समय का इंतजार पड़ सकता है भारी

दिवाली और छठ देश के सबसे ज्यादा यात्रा वाले त्योहारों में शामिल हैं। ऐसे समय में बड़ी संख्या में लोग नौकरी और कारोबार वाले शहरों से अपने घर लौटते हैं। इसलिए नियमित ट्रेनों के साथ स्पेशल ट्रेनों में भी सीटें तेजी से भरने की संभावना रहती है।

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ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ट्रेन टिकट बुकिंग में होने वाला है ऐतिहासिक बदलाव! अब चंद सेकंड में यात्रियों को मिलेगा टिकट, रेलवे का नया PRS सिस्टम मचाएगा तहलका

Indian Railways Reservation System: इंडियन रेलवे ट्रेन टिकट बुकिंग को आधुनिक बनाने और यात्रियों के लिए रिजर्वेशन को तेज एवं सुविधाजनक बनाने के लिए एक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) शुरू करने जा रहा है। सेंटर फॉर रेलवे इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) द्वारा विकसित PRS लगभग चार दशकों से रेलवे रिजर्वेशन की रीढ़ रहा है। 1986 में शुरू किए गए इस सिस्टम ने पुराने मैनुअल रिजर्वेशन सिस्टम की जगह ली थी।

तब से यह ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को सपोर्ट करने के लिए विकसित हुआ है। मई में राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने घोषणा की थी कि 40 साल पुराने PRS (Passenger Reservation System) सिस्टम को अगस्त से शुरू करके चरणों में अपग्रेड किया जाएगा।

यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग, सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC और यात्रियों की पूछताछ से जुड़ी सेवाओं में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। सबसे खास बात यह है कि नया PRS मौजूदा सिस्टम की तुलना में कई गुना ज्यादा टिकट बुकिंग का दबाव संभाल सकेगा। रेलवे के मुताबिक, नया सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभालने में सक्षम होगा।

जबकि मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। इसी सिस्टम के जरिए टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट अलॉटमेंट, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और यात्रियों की पूछताछ जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। अब रेलवे इस पुराने सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से नई तकनीक वाले PRS से बदलने की तैयारी कर रहा है।

भारी ट्रैफिक को संभालने की क्षमता

तत्काल टिकट के समय IRCTC वेबसाइट पर अचानक बढ़ने वाले भारी ट्रैफिक को संभालने में नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्षम हो सकता है। Indianexpress.com से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पब्लिक रिलेशंस (PR) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल धर्मेंद्र तिवारी ने कहा कि नए सिस्टम में चरणबद्ध तरीके से बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च की गई IRCTC बीटा वेबसाइट इसी बदलाव का हिस्सा है।

अधिकारी ने कहा कि यह बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा। पुराने PRS को पूरी तरह से बदलने से पहले नए सिस्टम का अलग-अलग यूजर लोड स्तरों पर चरणों में टेस्ट किया जाएगा। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “नए यूजर-फ्रेंडली लुक और फील को चरण-दर-चरण लागू करने में लोड-आधारित टे्ट शामिल होगा, क्योंकि हम पुराने PRS से नए PRS की ओर बढ़ रहे हैं।”

भारतीय रेलवे में अभी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम क्या है?

PRS एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है जिसका उपयोग भारतीय रेलवे रिजर्व-टिकटों के मैनेज के लिए करता है। यह यात्रियों को टिकट बुक करने, बदलने और रद्द करने की सुविधा देता है। साथ ही सीट आवंटन, वेटलिस्ट, RAC स्टेटस, रिजर्वेशन चार्ट और यात्री पूछताछ को भी संभालता है। यह सिस्टम रेलवे रिजर्वेशन सेंटरों को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ता है। इससे टिकट रिजर्वेशन की प्रक्रिया आसान और अधिक कुशल हो जाती है।

PRS ने रेलवे टिकट बुकिंग को कैसे बदला?

PRS ने मैनुअल रिजर्वेशन रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग की जगह एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ले लिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ। यह एक राष्ट्रव्यापी रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म बन गया। इससे यात्री कंट्री-वाइड नेटवर्क फॉर कंप्यूटराइज्ड एन्हांस्ड रिजर्वेशन एंड टिकटिंग (CONCERT) के माध्यम से देश भर में अलग-अलग जगहों से ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं।

फिलहाल यात्री रेलवे रिजर्वेशन काउंटर, वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से रिजर्वेशन कर सकते हैं। ऑनलाइन बुकिंग इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ-साथ RailOne ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध है। इससे यात्री कहीं से भी टिकट बुक कर सकते हैं।

अगस्त से शुरू हुआ बदलाव, धीरे-धीरे होगा पूरा माइग्रेशन

रेलवे ने मई में घोषणा की थी कि करीब चार दशक पुराने PRS को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जाएगा। इसका काम अगस्त से शुरू किया जाएगा। धर्मेंद्र तिवारी के मुताबिक, नए सिस्टम की ओर माइग्रेशन शुरू हो चुका है। रेलवे इसे एक साथ पूरी तरह बदलने के बजाय धीरे-धीरे और अलग-अलग चरणों में लागू कर रहा है।

पहले नए सिस्टम को अलग-अलग स्तर के यूजर लोड पर टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद जैसे-जैसे सिस्टम स्थिर और सक्षम साबित होगा। फिर पुराने PRS से नए PRS की ओर माइग्रेशन बढ़ाया जाएगा। रेलवे के मुताबिक, नए सिस्टम के यूजर इंटरफेस और सुविधाओं को भी धीरे-धीरे बेहतर बनाया जा रहा है।

तत्काल टिकट वालों को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा

ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चिंता अक्सर तत्काल टिकट बुकिंग को लेकर होती है। टिकट विंडो खुलते ही लाखों लोग एक साथ बुकिंग की कोशिश करते हैं। भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट या ऐप पर दबाव बढ़ जाता है। IRCTC के अनुसार, 15 जुलाई को बीटा वेबसाइट लॉन्च होने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार देखने को मिला।

महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े की तुलना में पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल टिकट बुकिंग में 5 प्रतशित से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3 फीसदी और 30 मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

प्रति मिनट 1.5 लाख की होगी बुकिंग

रेल मंत्रालय के अनुसार, अपग्रेड किया गया PRS प्रति मिनट 1.5 लाख से ज्यादा टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। जबकि मौजूदा सिस्टम में यह क्षमता लगभग 32,000 टिकट की है। यह प्रति मिनट 40 लाख से ज्यादा पूछताछ को भी प्रोसेस करेगा। जबकि अभी यह संख्या लगभग 4 लाख है। नए सिस्टम में टिकट बुकिंग और पूछताछ के लिए कई भाषाओं वाला और इस्तेमाल में आसान इंटरफेस होगा। इसे रेलवे रिजर्वेशन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ज्यादा स्केलेबिलिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और भरोसेमंदता देने के लिए भी डिज़ाइन किया गया है।

नए सिस्टम की सबसे बड़ी ताकत इसकी क्षमता होगी

रेल मंत्रालय के अनुसार:-

मौजूदा PRS: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट क्षमता है।

नया PRS: 1.5 लाख से ज्यादा टिकट काटने की प्रति मिनट क्षमता होगी।

मौजूदा पूछताछ क्षमता: करीब 4 लाख प्रति मिनट होगी।

नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से ज्यादा प्रति मिनट होगी।

इसका मतलब है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग के साथ-साथ ट्रेन, सीट और रिजर्वेशन से जुड़ी बड़ी संख्या में यात्रियों की पूछताछ भी एक साथ संभाल सकेगा।

देशभर में ऑनलाइन टिकट बुकिंग का दबाव कितना बढ़ गया है?

रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी आरक्षित टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक किए गए। इससे साफ है कि रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था अब तेजी से डिजिटल हो चुकी है। ऐसे में पुराने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए बेहद जरूरी हो गया है।

नई व्यवस्था में मिलेगा ज्यादा आसान और मल्टी-लैंग्वेज इंटरफेस

नए PRS में यात्रियों के लिए ज्यादा यूजर-फ्रेंडली और मल्टीलिंगुअल इंटरफेस देने की तैयारी है। यानी टिकट बुकिंग और पूछताछ को ज्यादा आसान बनाने के साथ-साथ अलग-अलग भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा। नए सिस्टम को ज्यादा स्केलेबल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। ताकि भविष्य में यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन ट्रैफिक बढ़ने पर भी सिस्टम पर अचानक अत्यधिक दबाव न पड़े।

सिर्फ PRS ही नहीं, रेलवे का पूरा डिजिटल नेटवर्क हो रहा आधुनिक

CRIS ने यात्रियों की अलग-अलग जरूरतों के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इनमें UTS, NTES, IRCTC Rail Connect, RailOne, RailMadad, CoachMitra, Rail Sugam और Rail Rajbhasha शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए यात्रियों को टिकट बुकिंग, ट्रेन की जानकारी, शिकायत दर्ज कराने और रेलवे से जुड़ी कई अन्य रेलवे से जुड़ी सर्विस मिलती हैं। नए PRS और इन डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर टेक्नोलॉजी के तालमेल से रेलवे की ऑनलाइन सेवाओं को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

40 साल पुराने सिस्टम से Next-Generation PRS तक

भारतीय रेलवे का PRS चार दशक पहले मैनुअल रिजर्वेशन की जगह इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग व्यवस्था लेकर आया था। अब वही सिस्टम एक और बड़े तकनीकी बदलाव की ओर बढ़ रहा है। अगर चरणबद्ध तरीके से हो रहा यह माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में ट्रेन टिकट बुकिंग ज्यादा तेज, ज्यादा स्थिर और ज्यादा डिजिटल हो सकती है। यानी रेलवे के इस बदलाव का असली असर सिर्फ वेबसाइट की स्पीड पर नहीं, बल्कि करोड़ों यात्रियों के रोजमर्रा के टिकट बुकिंग अनुभव पर दिखाई दे सकता है।

रेलवे के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, यात्रियों ने जून 2025 और जून 2026 के बीच PRS के ज़रिए 65.08 करोड़ रिजर्व्ड टिकट बुक किए। इनमें से 57.90 करोड़ टिकट (यानी 89 प्रतिशत) ऑनलाइन बुक किए गए थे। IRCTC ने कहा कि 15 जुलाई को अपनी बीटा वेबसाइट लॉन्च करने के बाद टिकट बुकिंग की स्पीड में सुधार हुआ है।

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महीने के पहले और दूसरे पखवाड़े (15-15 दिन के समय) की तुलना करने पर पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में 5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। पांच मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जबकि 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

टिकट बुकिंग का झंझट खत्म! जानें IRCTC के नए स्मार्ट फीचर के बारे में

रेलवे से ट्रैवल करने वाले करोड़ों पैसेंजर के लिए अच्छी खबर है। जल्द ही IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन लॉन्च होने वाला है, जिससे ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी। आइए जानते हैं नई वेबसाइट में कौन-कौन से नए फीचर्स जोड़े गए हैं और इससे पैसेंजर को क्या-क्या फायदे मिलेंगे:

15 जुलाई तक लॉन्च हो सकती है नई वेबसाइट

IRCTC shares jump 2% as Indian Railways to hike passenger fares from July 1 - The Economic Times

IRCTC की नई वेबसाइट का बीटा वर्जन और अपग्रेडेड पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) का रिव्यू पूरा हो चुका है। रेलवे इसे 15 जुलाई 2026 तक आम लोगों के लिए लाइव कर सकता है। वेबसाइट को बेहतर बनाने में CRIS, IRCTC और MNIT जयपुर के स्टूडेंट्स ने मिलकर टेक्निकल सुधार किए हैं। इससे पैसेंजर को पहले से बेहतर और स्मूथ ऑनलाइन टिकट बुकिंग का एक्सपीरियंस मिलेगा।

एक स्क्रीन पर दिखेंगी सभी सीटों की जानकारी

Free Upgrade From Sleeper Class To 2AC: New Indian Railways Scheme | Check Details | Auto News - News18

नई वेबसाइट में सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि अब स्लीपर, 3AC, 2AC और दूसरी सभी क्लासेज की अवेलेबल सीटें एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगी। अलग-अलग कैटेगरी देखने के लिए बार-बार क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पैसेंजर को सीटों की अवेलेबिलिटी एक नजर में समझ आ जाएगी और समय की बचत होगी।

कैप्चा और पॉप-अप से मिलेगी राहत

160km की रफ्तार से चलेगी रैपिड ट्रेन, अब 3 घंटे नहीं सिर्फ 60 मिनट का होगा पटना से मुजफ्फरपुर का सफर!

टिकट बुकिंग के दौरान आने वाले उलझाऊ कैप्चा, फ्लैशिंग ग्राफिक्स और अनचाहे पॉप-अप को हटाया जा रहा है। इससे वेबसाइट ज्यादा साफ, तेज और उपयोग में आसान बनेगी। खासकर तत्काल टिकट बुक करने वाले पैसेंजर को इसका बड़ा फायदा मिलेगा।

तेज होगी टिकट बुकिंग प्रोसेस

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रेलवे ने टिकट बुकिंग के स्टेप्स कम कर दिए हैं, जिससे फास्ट चेकआउट की सुविधा मिलेगी। पैसेंजर की नाम, उम्र जैसी जानकारी पहले से सेव रहेगी, जिससे बार-बार फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होगी। इससे तत्काल और सामान्य टिकट पहले से ज्यादा तेजी से बुक किए जा सकेंगे।

40 साल पुराना PRS सिस्टम होगा अपग्रेड

Indian Railways: रेलवे अगस्त से रिजर्वेशन सिस्टम बदल देगा

रेलवे अपने 40 साल पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) को भी अपग्रेड कर रहा है। IRCTC के अधिकारियों के अनुसार, नया सिस्टम टिकट बुकिंग को पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद बनाएगा। इससे वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने पर भी बेहतर परफॉरमेंस और कम टेक्निक दिक्कतें देखने को मिलेंगी।

Vande Bharat यात्रियों के लिए खुशखबरी! अब आखिरी मिनट में भी मिलेगा कन्फर्म टिकट…जान लें ये नया नियम

अब वंदे भारत एक्सप्रेस और दूसरी रिजर्व ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। भारतीय रेलवे ने नया नियम लागू किया है, जिसके तहत रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक खाली सीटों की बुकिंग की जा सकेगी। रेलवे का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल करना है। इससे उन यात्रियों को भी राहत मिलेगी, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है और आखिरी समय में कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद चार्ट जारी होने के बावजूद अगर किसी ट्रेन में सीट खाली रहती है, तो यात्री ट्रेन छूटने से 15 मिनट पहले तक उसे बुक करा सकेंगे। इससे यात्रियों को आखिरी समय में भी कन्फर्म सीट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

क्या बदला है?

पहले जब किसी ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट तैयार हो जाता था, तो उसके बाद टिकट बुक कराने की सुविधा लगभग खत्म हो जाती थी। लेकिन अब रेलवे ने नियम बदल दिया है। नए नियम के अनुसार, अगर चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन सीटों की बुकिंग कर सकेंगे। रेलवे को उम्मीद है कि इस बदलाव से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल होगा। साथ ही, जिन लोगों का सफर अचानक तय होता है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी।

किन यात्रियों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

रेलवे का यह नया नियम उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद होगा, जिन्हें अचानक यात्रा करनी पड़ती है या जिन्हें सामान्य बुकिंग के दौरान कन्फर्म टिकट नहीं मिल पाता। अब अगर ट्रेन में चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली होंगी, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे ज्यादा लोगों को कन्फर्म सीट मिलने का मौका मिलेगा और ट्रेनों की खाली सीटों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। रेलवे का मानना है कि इस व्यवस्था से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में सीटों की उपलब्धता भी बेहतर होगी।

टिकट कैसे बुक करें?

यात्री खाली सीटों की बुकिंग आईआरसीटीसी (IRCTC) की वेबसाइट, आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या रेलवे के अधिकृत पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) काउंटर के जरिए कर सकते हैं। हालांकि, यह सुविधा तभी मिलेगी जब रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी ट्रेन में सीटें खाली हों। ऐसी स्थिति में यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उपलब्ध सीटों की बुकिंग कर सकेंगे।

यात्रियों के लिए जरूरी बातें

जो यात्री इस नई सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें स्टेशन जाने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि ट्रेन में कोई सीट खाली है या नहीं। साथ ही, उन्हें समय से पहले स्टेशन पहुंचना चाहिए और यात्रा के दौरान अपने साथ आईडी कार्ड जरूर रखना चाहिए। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि टिकट हमेशा आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट, रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप या अधिकृत पीआरएस (PRS) काउंटर से ही बुक करें।

नई व्यवस्था का क्या फायदा होगा?

भारतीय रेलवे का मानना है कि इस नए नियम से ट्रेनों में खाली सीटों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। साथ ही, जिन लोगों को अचानक यात्रा करनी पड़ती है, उन्हें आखिरी समय में भी कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। अब अगर रिजर्वेशन चार्ट बनने के बाद भी सीटें खाली रहती हैं, तो यात्री ट्रेन रवाना होने से 15 मिनट पहले तक उन्हें बुक कर सकेंगे। इससे यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और ट्रेनों में खाली सीटों की संख्या भी कम होगी।