बुजुर्ग कपल ने मांगी साइड लोअर बर्थ, युवक ने कहा- ₹1,050 दो फिर मिलेगी सीट, वायरल पोस्ट ने छेड़ी बहस

सोशल मीडिया पर ट्रेन में सीट को लेकर किया गया पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में बताया गया कि एक युवा यात्री ने अपनी साइड लोअर बर्थ एक बुजुर्ग दंपति को देने से मना कर दिया। युवक ने सीट के लिए करीब 2,100 रुपये खर्च किए थे और सीट बदलने के लिए उसने बुजुर्ग दंपति से पैसे भी मांगे। वहीं इस पोस्ट पर लोग तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है और इसे लेकर बहस जारी है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

सीट चेंज करने से किया मना

इस मामले को एक्स यूजर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, वह 3AC कोच में सफर कर रही थीं और उनकी सीट ऊपर वाली बर्थ पर थी। वहीं सामने बैठे एक युवक की सीट साइड लोअर थी। पोस्ट के अनुसार, एक बुजुर्ग दंपति ने युवक से उसकी साइड लोअर सीट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवक उम्र में छोटा है, इसलिए वह ऊपर वाली बर्थ पर आसानी से सो सकता है और उन्हें नीचे वाली सीट की जरूरत ज्यादा है। युवक ने बुजुर्ग दंपति की बात तुरंत नहीं मानी।

युवक ने मांगे पैसे

युवक ने बताया कि उसने साइड लोअर बर्थ के लिए करीब 2,100 रुपये का टिकट खरीदा। इसके बाद बातचीत तब अलग मोड़ ले गई, जब युवक ने कहा कि अगर दंपति उसे टिकट की कीमत का आधा यानी 1,050 रुपये दे दें, तो वह अपनी बर्थ उन्हें दे सकता है। उसकी इस बात पर मामला और चर्चा में आ गया। एक्स यूजर के अनुसार, पैसे देने की बात सामने आने के बाद बुजुर्ग दंपति ने अपनी मांग छोड़ दी और युवक अपनी साइड लोअर बर्थ पर बैठा रहा। ऊपर वाली बर्थ से पूरा मामला देखने वाले यात्री ने इस घटना को काफी अलग अनुभव बताया।

क्या छोड़ देना चाहिए सीट

पोस्ट में बताया कि, लंबी ट्रेन यात्रा में साइड लोअर बर्थ को यात्री काफी पसंद करते हैं, इसलिए कई लोग इसे आसानी से छोड़ना नहीं चाहते। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी सीट को लेकर यात्रियों की पसंद और बुजुर्गों को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई। पोस्ट में पूछा गया कि क्या किसी यात्री को दूसरे की सुविधा के लिए अपनी रिजर्व बर्थ छोड़ देनी चाहिए। यूजर ने लोगों से पूछा कि वे बुजुर्ग दंपति को अपनी साइड लोअर बर्थ देंगे या इसके बदले पैसे लेने की मांग करेंगे। इस पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई।

 

यूजर ने दिया ये रिएक्शन

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इसके बाद कई लोगों ने रेलवे के रिजर्वेशन नियमों और सफर के दौरान बुजुर्ग यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर अपनी राय साझा की। लोगों ने इस मामले पर अपने अनुभव भी बताए और बताया कि ऐसी स्थिति में यात्री और सीनियर सिटीजन दोनों के लिए क्या सही होना चाहिए।

एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि, ‘सीनियर सिटिजन्स को हमेशा लोअर बर्थ क्यों नहीं दी जाती, जबकि टिकट बुक करते समय उनकी उम्र की जानकारी पहले ही दर्ज की जाती है।’ एक यूजर ने कहा कि, ‘उसके माता-पिता और परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य ऊपर की बर्थ पर नहीं चढ़ सकते, फिर भी उन्हें कई बार अपर बर्थ दे दी जाती है।’ यूजर ने सवाल किया कि जब बुकिंग के समय उम्र की जानकारी साफ तौर पर दी जाती है, तो इसके बावजूद बुजुर्गों को लोअर बर्थ न मिलने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

दूसरे यूजर ने कहा कि, ‘हो सकता है युवक ने लेट बुकिंग या तत्काल टिकट के लिए ज्यादा पैसे दिए हों।’ उसके मुताबिक, ‘टिकट की कीमत यात्रा के लिए होती है, सिर्फ सीट के लिए नहीं। अगर बुजुर्ग दंपति को लोअर बर्थ की सच में जरूरत थी, तो युवक का पैसे लेने का फैसला उसकी अपनी मर्जी थी।’

RAC-वेटिंग यात्रियों के लिए बड़ी खबर! खाली बर्थ अब खुद होगी अलॉट, TTE के चक्कर खत्म

ट्रेन में खाली बर्थ अब खुद मिलेगी RAC-वेटिंग पैसेंजर्स को, रेलवे ला रहा डिजिटल सिस्टम

ट्रेन में सफर के दौरान खाली होने वाली बर्थ को लेकर रेलवे एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। इससे किसी पैसेंजर के ट्रेन में नहीं चढ़ने पर उसकी खाली बर्थ की जानकारी सिस्टम तक तुरंत पहुंच जाएगी और नियम के अनुसार उसे RAC या वेटिंग लिस्ट वाले पैसेंजर को अलॉट किया जा सकेगा। इससे सीट मिलने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान और साफ होने की उम्मीद है।

अब मोबाइल बता देगा कहां है खाली बर्थ!

नए सिस्टम के बाद पैसेंजर्स को ट्रेन में खाली हुई बर्थ के बारे में पता करने के लिए TTE को ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेलवे के सिस्टम में खाली बर्थ की जानकारी रियल टाइम में अपडेट होगी। पैसेंजर्स रेल मदद या IRCTC ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि सफर के दौरान किस स्टेशन से किस कोच में कितनी सीटें खाली हुई हैं। इसके बाद RAC और वेटिंग लिस्ट वाले पैसेंजर्स को तय नियम और क्रम के अनुसार बर्थ अलॉट की जा सकेगी। बर्थ मिलने की जानकारी पैसेंजर के मोबाइल पर भी भेजी जा सकेगी।

पहला ट्रायल होगा नई मुंबई से

रेलवे इस नई तकनीक को पहले मुंबई सेंट्रल डिवीजन की कुछ चुनिंदा ट्रेनों में आजमाने की तैयारी कर रहा है। योजना के मुताबिक दिसंबर 2026 तक कुछ TTE को स्मार्ट जैकेट, GPS और कैमरे देकर इसका ट्रायल किया जाएगा। इसके नतीजे देखने के बाद अप्रैल 2027 से इस तकनीक को देश के सभी 17 रेलवे जोनों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है। अगर TTE खाली बर्थ को सिस्टम में अपडेट नहीं करते या चेकिंग के लिए मौजूद नहीं होते हैं, तो पैसेंजर रेल मदद ऐप या 139 पर शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।

HHT से तुरंत अपडेट होगा डेटा

  • 4G कनेक्टिविटी और GPS ट्रैकिंग: डिवाइस में 4G की सुविधा होगी, जिससे डेटा रियल टाइम में सर्वर तक भेजा जा सकेगा। करीब 5 मीटर तक की सटीकता के साथ TTE की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
  • बायोमेट्रिक स्कैनर: फिंगरप्रिंट स्कैनर के जरिए TTE की डिजिटल उपस्थिति दर्ज होगी।
  • 12 घंटे का बैटरी बैकअप: लंबे सफर के दौरान डिवाइस को लगातार इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • मजबूत डिजाइन: HHT को वाटरप्रूफ और डस्टप्रूफ बनाया जा रहा है, ताकि सफर के दौरान इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

स्मार्ट जैकेट से TTE की सुरक्षा होगी मजबूत

  • GPS डिवाइस और HD बॉडी कैमरा: जैकेट में GPS लगा होगा, जिससे ड्यूटी के दौरान TTE की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। जैकेट में HD कैमरा लगाया जाएगा, जिससे ड्यूटी के दौरान होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकेगा।
  • SOS बटन: किसी इमरजेंसी में TTE एक बटन दबाकर तुरंत मदद के लिए अलर्ट भेज सकेंगे। ट्रेन में किसी पैसेंजर की तबीयत अचानक बिगड़ने पर TTE SOS दबाकर मदद मांग सकेंगे। SOS दबाते ही नजदीकी कंट्रोल रूम और अगले स्टेशन के स्टेशन मास्टर तक इमरजेंसी की जानकारी पहुंचाई जा सकेगी।

रेलवे का अनुमान है कि पूरी व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट जांच की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी हो सकती है और खाली बर्थ के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतों में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा, अगर TTE चेकिंग के लिए उपलब्ध नहीं होते या खाली बर्थ को सिस्टम में अपडेट नहीं करते, तो यात्री रेल मदद ऐप या 139 पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

रेलवे का नया डिजिटल अंदाज! स्टेशन नहीं अब मोबाइल पर देखें रेलवे की रील, जानकारी मिलेगी चंद सेकंडों में

रेलवे ने पैसेंजर तक स्पेशल ट्रेनों की जानकारी पहुंचाने का नया तरीका अपनाया है। अब ट्रेन की तारीख, समय, रूट और स्टॉपेज जैसी जरूरी डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर की जाने वाली छोटी रील्स में देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि इन वीडियो में सफर से जुड़ी खास जगहों की झलक भी दिखाई जाती है, जिससे पैसेंजर को जानकारी के साथ अपनी ट्रिप की तैयारी करने में भी आसानी होती है।

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चंद सेकेंड्स में ट्रेन की पूरी डिटेल्स

स्पेशल ट्रेनों को लेकर बनाई जा रही रील्स में ट्रेन के ऑपरेशन की तारीख, समय और प्रमुख स्टेशनों की इनफार्मेशन दी जाती है। पैसेंजर वीडियो देखकर जल्दी समझ सकते हैं कि ट्रेन कब और कहां से चलेगी। इससे उन्हें लंबी जानकारी पढ़ने या अलग-अलग जगहों पर ट्रेन की डिटेल ढूंढने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा।

 

मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स की झलकियां

इन रील्स को सिर्फ ट्रेन की जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। वीडियो में ट्रेन के रास्ते में आने वाले प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों की फोटो और छोटे वीडियो भी शामिल किए जाते हैं। इससे पैसेंजर को रूट का अंदाजा लगाने के साथ यह भी पता चलता है कि सफर के दौरान कौन-कौन सी खास जगहें रास्ते में पड़ सकती हैं।

 

फेसबुक और व्हाट्सऐप से कनेक्शन

रेलवे की ये रील्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सऐप ग्रुपों जैसे कई प्लेटफॉर्म पर शेयर की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद पैसेंजर तक जानकारी सीधे उनके मोबाइल पर पहुंच जाती है। छोटी वीडियो होने की वजह से इसे देखना और जरूरी जानकारी समझना भी आसान रहता है।

 

इनफार्मेशन के साथ एंटरटेनमेंट भी

रेलवे के पीआर प्रोफेशनल्स इन रील्स को पैसेंजर की पसंद और सोशल मीडिया के मौजूदा ट्रेंड को ध्यान में रखकर तैयार करते हैं। वीडियो को अट्रैक्टिव बनाने के लिए ट्रेंडिंग म्यूजिक और आसान विजुअल्स का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कानपुर से प्रयागराज होते हुए बेंगलुरु जाने वाली स्पेशल ट्रेन 04132-31 के लिए करीब 38 सेकेंड की रील तैयार की गई है।

रील्स से जानें पसंदीदा स्पेशल ट्रेन

सोशल मीडिया रील्स से सिर्फ नई स्पेशल ट्रेनों की इनफार्मेशन ही नहीं, बल्कि ट्रेन में हुए चेंज और रूट की इनफार्मेशन भी पैसेंजर तक पहुंचाई जा रही है। उदाहरण के लिए प्रयागराज से दादरी के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन को नारायणपुर बाजार तक बढ़ाया गया है।

 

रेलवे का यह तरीका बदलते समय के साथ पैसेंजर की जरूरतों को समझने की एक अच्छी कोशिश है। आज जब लोग मोबाइल पर कम समय में जानकारी पाना चाहते हैं, ऐसे में आसान तरीके से दी गई जानकारी ज्यादा असरदार हो सकती है। इस तरह की पहल से रेलवे और पैसेंजर के बीच कम्युनिकेशन भी आसान होगा और जरूरी अपडेट लोगों तक पहुंचाने का तरीका और बेहतर बन सकता है।

एक ट्रेन, कई खूबसूरत मंजिलें! वंदे भारत से बनाएं परफेक्ट वीकेंड प्लान

वीकेंड पर आप दिल्ली की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। वंदे भारत एक्सप्रेस से सफर करके कम समय में एक अच्छी छोटी ट्रिप का मजा लिया जा सकता है। ट्रेन का आरामदायक सफर आपका समय भी बचाता है और सफर की थकान भी कम करता है।

कम दिनों की छुट्टी में ऐसी जगह चुनना सही रहता है, जहां घूमने के लिए ज्यादा समय मिले और सफर में पूरा दिन न निकल जाए। वीकेंड ट्रिप के लिए ट्रेन से ट्रिप करना इसलिए भी अच्छा ऑप्शन है, क्योंकि आप आराम से सफर करते हुए अपने परिवार या दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं।

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1. चंडीगढ़, पंजाब-हरियाणा

वीकेंड में कम समय में घूमने के लिए चंडीगढ़ एक अच्छा ऑप्शन है। दिल्ली से चंडीगढ़ की वीकेंड ट्रिप के लिए 22447 वंदे भारत एक्सप्रेस सुविधाजनक ऑप्शन है। ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 5:50 बजे चलकर करीब 2 घंटे 48 मिनट में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन (CDG) सुबह 8:38 बजे पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹855 और Executive Chair Car का करीब ₹1,585 है। एक दिन की ट्रिप में सुबह रॉक गार्डन और रोज गार्डन घूमने के बाद सुखना झील घूम सकते हैं। शाम को झील के आसपास समय बिताने के बाद सेक्टर-17 मार्केट में शॉपिंग और लोकल फूड का आनंद लिया जा सकता है। अगर 2 दिन का समय है, तो दूसरे दिन कैपिटल कॉम्प्लेक्स और शहर के आसपास की जगहें देख सकते हैं।

 

2. देहरादून, उत्तराखंड

पहाड़ों और हरियाली के बीच छोटा-सा ब्रेक लेना चाहते हैं तो देहरादून का प्लान बनाया जा सकता है। देहरादून जाने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस 22457 दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल (ANVT) से शाम 5:50 बजे चलती है और करीब 4 घंटे 45 मिनट में रात 10:35 बजे देहरादून (DDN) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,075 और Executive Chair Car का करीब ₹1,900 है। शहर में एक दिन हो तो रॉबर्स केव, सहस्त्रधारा और फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट आसानी से घूमे जा सकते हैं। शाम को किसी लोकल कैफे में बैठकर देहरादून का माहौल एंजॉय करें। दो दिन मिल रहे हों तो अगले दिन मसूरी की ओर निकलना बेहतर रहेगा।

 

3. अजमेर, राजस्थान

अगर वीकेंड पर धार्मिक स्थलों के साथ राजस्थान की संस्कृति देखना चाहते हैं, तो अजमेर को चुन सकते हैं। दिल्ली से अजमेर जाने के लिए वंदे भारत का रूट जयपुर होते हुए अजमेर तक जाता है। इस यात्रा में करीब 5 घंटे 15 मिनट लगते हैं और AC Chair Car का किराया लगभग ₹1,150 से शुरू होने की जानकारी अवेलेबल है। स्टेशन पहुंचने के बाद अजमेर शरीफ दरगाह से घूमने की शुरुआत करें और फिर अढ़ाई दिन का झोपड़ा देखा जा सकता है। दिन के दूसरे हिस्से में आना सागर झील के आसपास वक्त बिताएं और शाम को स्थानीय बाजार में राजस्थानी मिठाइयों और खाने का स्वाद लें। दो दिन का प्लान है तो अगले दिन अजमेर से पुष्कर जाकर पुष्कर झील और ब्रह्मा मंदिर घूम सकते हैं।

 

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी की यात्रा बाकी जगहों से थोड़ी लंबी है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के लिए यह खास डेस्टिनेशन है। वाराणसी के लिए 22436 वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (NDLS) से सुबह 6:00 बजे चलती है और करीब 8 घंटे में दोपहर 2:00 बजे वाराणसी जंक्शन (BSB) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹1,835 और Executive Chair Car का करीब ₹3,385 है। यहां एक दिन का समय हो तो काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट को प्राथमिकता दें। शाम होते ही दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती देखना न भूलें। पुरानी गलियों में घूमकर बनारसी खान-पान का स्वाद भी लिया जा सकता है।

 

5. जयपुर, राजस्थान

शाही महलों, किलों और बाजारों से भरी जयपुर की यात्रा दिल्ली से वीकेंड पर आसानी से की जा सकती है। जयपुर के लिए दिल्ली से वंदे भारत की ट्रिप करीब 3 घंटे 37 मिनट से 3 घंटे 50 मिनट में पूरी हो सकती है। मौजूदा शेड्यूल में एक वंदे भारत दिल्ली कैंट (DEC) से दोपहर 3:10 बजे चलकर शाम 7:00 बजे जयपुर जंक्शन (JP) पहुंचती है। AC Chair Car का किराया करीब ₹835 और Executive Chair Car का करीब ₹1,610 है। दूसरी वंदे भारत दिल्ली कैंट से शाम 6:28 बजे चलकर रात 10:05 बजे जयपुर पहुंचती है। एक दिन में आमेर किला, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर को कवर किया जा सकता है। घूमने के बाद शाम का समय जौहरी बाजार या बापू बाजार में शॉपिंग के लिए रखें और दाल बाटी चूरमा, प्याज कचौरी जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लें।

ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

Viral Post: RAC टिकट वाली महिला ने सीट खाली करने से किया मना, दर्ज की शिकायत, फिर..

भारतीय रेलवे से हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं। वहीं सफर के लिए हर यात्री को टिकट लेना जरूरी होता है। इसके बावजूद कई यात्री अक्सर बिना टिकट ट्रेन में सफर करते पकड़े जाते हैं। वहीं हाल ही में एक यात्री ने ट्रेन में सफर के दौरान हुई परेशानी का एक्सपीरिएंश शेयर किया। जहां एक महिला किसी दूसरे यात्री की आरक्षित सीट पर बैठी नजर आई। यात्री के मुताबिक, महिला के पास RAC टिकट था, लेकिन उसने उसकी कन्फर्म सीट पर बैठकर उसे खाली करने से इनकार कर दिया। यात्री ने महिला को बताया कि सीट उसके नाम पर रिजर्व है, फिर भी महिला अपनी जगह से नहीं हटी। इस वजह से दोनों के बीच असहज स्थिति बन गई और यात्री काफी परेशान हो गया।

महिला ने सीट छोड़ने से किया मना

X पर अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए संजू चौधरी ने इस स्थिति को “इंडियन रेलवे का पीक” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई दूसरा यात्री कन्फर्म सीट पर कब्जा कर ले और वहां से हटने से मना कर दे, तो कन्फर्म टिकट बुक करने का क्या फायदा है। उन्होंने कहा, “मेरी रिजर्व सीट पर बैठी एक महिला के पास RAC टिकट है, लेकिन वह मुझे उस सीट पर बैठने से मना कर रही है जो असल में मुझे अलॉट की गई है।”

2.5 घंटे तक नहीं हुआ सामाधान

मामले को और मुश्किल बताते हुए यात्री ने कहा कि उसने पहले ही रेलवे अधिकारियों से शिकायत कर दी थी, लेकिन करीब ढाई घंटे बीतने के बाद भी उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। उसने कहा, “2.5 घंटे पहले कंप्लेंट की गई थी। अभी भी कोई सॉल्यूशन नहीं।” यात्री ने आगे सवाल उठाते हुए कहा, “तो कन्फर्म सीट बुक करने का क्या मतलब है अगर RAC टिकट वाला कोई व्यक्ति बस उस पर कब्जा कर सकता है और हिलने से मना कर सकता है?” पैसेंजर ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “बेसिक सॉल्यूशन के लिए 2.5 घंटे इंतजार करना पड़ा। बिल्कुल बेकार” और इस मामले में संबंधित अधिकारियों को भी टैग किया।

रेलवे ने दिया ध्यान

इसके बाद रेलवे सेवा ने मामले का संज्ञान लिया और यात्री से जरूरी जानकारी शेयर करने को कहा, ताकि शिकायत की जांच की जा सके। लेकिन, चौधरी ने जवाब देते हुए कहा, “आपका TTE आया और कहा कि मुझे उस व्यक्ति से कॉम्प्रोमाइज करना होगा क्योंकि RAC दो सदस्यों को अलॉट किया गया है और मुझे अपनी पूरी यात्रा सोकर करनी होगी।” इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा होने लगी।

लोगों ने किया कमेंट

कई यूजर्स ने रेलवे अधिकारियों से ऐसे मामलों में तुरंत दखल देने और उचित कार्रवाई करने की मांग की। एक यूजर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “बहुत बेकार, आप लोग कोई एक्शन क्यों नहीं ले रहे हैं? रिजर्वेशन नॉन-रिजर्वेशन हो गया है??” एक अन्य यूजर ने लिखा, “भाई बिल्कुल फ्रस्ट्रेट होने वाली बात है। पैसे देकर कन्फर्म टिकट लिया और फिर भी यह नाटक। रेलवे को इस पर सीरियस एक्शन लेना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “सीरियसली, यह खुद के पैसे/टिकट पे मज़ाकिया है। आखिर में सॉल्यूशन यह होगा कि एडजस्ट कर लो, वो लोग दो लोग हैं।”

Viral Video: न्यूली वेड कपल के लिए ट्रेन में हुआ खास इंतजाम, फर्स्ट AC बना ‘हनीमून सुइट’, वीडियो देख लोग रह गए हैरान

Viral Video: सोशल मीडिया पर ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे को न्यूली वेड कपल के लिए फूलों, गुब्बारों और फेयरी लाइट्स से खास अंदाज में सजाया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं। इस अनोखी सजावट को देखकर कई लोग हैरान रह गए वहीं कुछ ने इसको ‘चलता-फिरता हनीमून सुइट’ बताया। वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या रेलवे में इस तरह की सजावट की अनुमति होती है। सोशल मीडिया पर ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल हो रहा वीडियो

वीडियो की शुरुआत स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन से होती है। इसके बाद कैमरा कोच के अंदर आगे बढ़ता है और एक खास फर्स्ट एसी कूपे तक पहुंचता है। कूपे के दरवाजे को पिंक कलर के मोतियों वाले पर्दे और दिल के आकार की सजावट से खूबसूरती से सजाया गया है, जो लोगों का ध्यान तुरंत अपनी ओर खींच लेता है। कूपे के अंदर का नजारा किसी नॉर्मल ट्रेन के डिब्बे जैसा नहीं दिखता। पूरी जगह को खास अंदाज में सजाया गया है। छत पर रेड और सफेद रंग के गुब्बारे लगाए गए हैं, फर्श पर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरी गई हैं और दीवारों व खिड़कियों को गुलाब, गेंदा और रजनीगंधा के ताजे फूलों से सजाया गया है।

कूपे को खास अंदाज में सजाया गया

कूपे की नीचे वाली बर्थ पर सफेद चादर बिछाकर लाल और सफेद फूलों की पंखुड़ियों से दिल का बड़ा आकार बनाया गया था। बिस्तर पर भी गुलाब की पंखुड़ियां सजाई गई थीं, वहीं ऊपर की मुड़ी हुई बर्थ पर “आई लव यू” लिखा हुआ सजावटी कट-आउट लगाया गया था। रंग-बिरंगी फेयरी लाइट्स ने पूरे कूपे को और भी आकर्षक बना दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जहां कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में इसे “सुहागरात एक्सप्रेस” नाम दे दिया। जहां कई लोगों ने इस अनोखी सजावट की तारीफ की, वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या ट्रेन के कोच को इस तरह सजाने के लिए रेलवे से अनुमति ली गई थी।

यूजर्स ने किए कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मुझे नहीं पता कि यह कानूनी है या नहीं, लेकिन अगर रेलवे कपल्स के लिए ऐसे कूपे उपलब्ध कराए तो यह अच्छी कमाई का जरिया बन सकता है। बस यात्रियों की प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। हम नहीं चाहते कि यह कई होटलों की तरह बेवजह चर्चा का विषय बने।” एक अन्य यूजर ने सवाल किया, “क्या इनके पास इसकी परमिशन है?” एक और कमेंट में कहा गया, “भाई, इसकी इजाजत किसने दी और यह कब से होने लगा? यह बिल्कुल अनएक्सपेक्टेड है, और ये लोग इसमें सहज भी हैं।” वहीं, कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में इस सजे हुए कूपे को “चलता-फिरता हनीमून सुइट” भी कहा।