ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

राजधानी सा आराम, बुलेट जैसी रफ्तार, वंदे भारत ने बदल दिए 6 ट्रेन के रुट!

आज के टाइम में कम समय में लंबी दूरी का सफर करने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस बेहतरीन ऑप्शन है। देश के कई प्रमुख शहरों के बीच चलने वाली ये ट्रेनें हाई स्पीड, मॉडर्न सुविधाओं और कम ट्रैवल टाइम के लिए जानी जाती हैं। ये रही वंदे भारत ट्रेनें जो कुछ ही घंटों में लंबी दूरी तय कर देती हैं।

 

कोयंबटूर-बेंगलुरु सफर

कोयंबटूर-बेंगलुरु कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच ट्रैवल करने वाले ट्रैवलर के लिए सबसे तेज और सहूलियत भरी ट्रेनों में से एक है। यह सुबह 7:25 बजे कोयंबटूर से रवाना होती है और दोपहर 1:45 बजे बेंगलुरु कैंटोनमेंट स्टेशन पहुंच जाती है। करीब 377 किलोमीटर का सफर यह लगभग 6 घंटे 20 मिनट में पूरा करती है। इस ट्रेन के जरिए दोनों शहरों के बीच बिजनेस ट्रिप, ऑफिस मीटिंग और टूरिस्ट पहले की तुलना में काफी आसान और समय बचाने वाला बन गया है।

 

पटना-हावड़ा रूट

पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच चलने वाली सबसे तेज ट्रेनों में शामिल है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे पटना जंक्शन से रवाना होती है और 11:35 बजे हावड़ा स्टेशन पहुंच जाती है। लगभग 532 किलोमीटर की दूरी यह केवल 5 घंटे 35 मिनट में तय करती है। इसकी औसत रफ्तार 78 से 81 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। कम समय में सफर पूरा होने के कारण यह रोज ट्रैवल करने वाले लोगों, बिजनेस ट्रैवलर और स्टूडेंट्स के लिए भी एक बेहतरीन ऑप्शन बन चुकी है।

 

दिल्ली-वाराणसी यात्रा

नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस राजधानी दिल्ली और धार्मिक नगरी वाराणसी के बीच सबसे पॉपुलर हाई-स्पीड ट्रेनों में से एक है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलती है और दोपहर 2 बजे वाराणसी पहुंचती है। करीब 771 किलोमीटर की दूरी यह सिर्फ 8 घंटे में पूरी करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 95 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक है। कम समय में लंबी दूरी तय करने की वजह से यह ट्रेन तीर्थयात्रियों, टूरिस्ट और कामकाजी लोगों के बीच काफी पॉपुलर है।

 

 

मुंबई-गांधीनगर रूट

मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस महाराष्ट्र और गुजरात के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी अवेलेबल कराती है। यह सुबह 6:10 बजे मुंबई सेंट्रल से रवाना होती है और दोपहर 12:35 बजे गांधीनगर कैपिटल पहुंच जाती है। करीब 522 किलोमीटर की दूरी यह लगभग 6 घंटे 25 मिनट में तय करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार करीब 81 किमी/घंटा रहती है, जबकि कुछ सेक्शन में यह 130 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चल सकती है। यह ट्रेन दोनों राज्यों के बीच ट्रैवल को पहले की तुलना में ज्यादा तेज, आरामदायक बनाती है।

 

 

जोधपुर-दिल्ली सफर

जोधपुर-दिल्ली कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी के बीच तेज़ यात्रा का बेहतर विकल्प है। यह सुबह 5:30 बजे जोधपुर से रवाना होती है और दोपहर 1:30 बजे दिल्ली कैंटोनमेंट स्टेशन पहुंचती है। करीब 606 किलोमीटर का सफर यह लगभग 8 घंटे में पूरा करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 75 किमी/घंटा है, जबकि इसकी मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंचती है। इससे पैसेंजर को रोड ट्रैवल की तुलना में कम समय में बिना परेशानी के सफर का एक्सपीरियंस मिलता है।

 

 

मैसूरु-चेन्नई यात्रा

मैसूरु-MGR चेन्नई सेंट्रल वंदे भारत एक्सप्रेस कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच यात्रा करने वालों के लिए मॉडर्न और तेज रेल सर्विस है। यह ट्रेन सुबह करीब 6 बजे मैसूरु से निकलती है और दोपहर 12:45 बजे चेन्नई पहुंच जाती है। लगभग 500 किलोमीटर की दूरी यह 6 घंटे 45 मिनट में तय करती है। इसकी औसत रफ्तार 76 से 79 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। यह ट्रेन दोनों राज्यों के प्रमुख शहरों के बीच फास्ट, सेफ और आरामदायक जर्नी है।

 

सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम रूट

सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम वंदे भारत एक्सप्रेस तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच ट्रैवल को पहले से ज्यादा तेज और बेहतर बनाती है। यह सुबह 5 बजे सिकंदराबाद से रवाना होती है और दोपहर 1:50 बजे विशाखापत्तनम पहुंचती है। लगभग 699 किलोमीटर की दूरी यह 8 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार 79 से 82 किमी/घंटा रहती है, जबकि इसकी मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा है। लंबी दूरी तय करने के बावजूद यह ट्रेन कम समय में डेस्टिनेशन तक पहुंचाती है, जिससे पैसेंजर का काफी समय बचता है और जर्नी आसान होती है।

Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कब शुरू होगी? 61% काम पूरा, जानिए पहले किस रूट पर दौड़ेगी

Bullet Train news: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को डेवलप करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसने 61 फीसदी से ज्यादा की फिजिकल प्रोग्रेस कर ली है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की जून महीने की रिपोर्ट के मुताबिक इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर अब तक 90966.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

पहले किस रूट पर और कब दौड़ेगी पहली बुलेट ट्रेन?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भारत की पहली बुलेट ट्रेन का पहला कमर्शियल रन अगस्त 2027 में शुरू होगा। यह शुरुआत 100 किलोमीटर लंबे सूरत से वापी खंड के बीच होगी। यह इस पूरे हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण होगा। इसके बाद वापी-अहमदाबाद और ठाणे-अहमदाबाद सेक्शन को चालू किया जाएगा। इसके बाद अंत में पूरा मुंबई-अहमदाबाद रूट चालू होगा। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पूरे 508 किमी के इस रूट का काम दिसंबर 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

1.08 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है कॉस्ट

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्र सरकार के प्रगति (PRAGATI) पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। वर्तमान में इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये रखी गई है। परियोजना के अंत तक इसकी कुल लागत बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय रेलवे लागत में होने वाली इस बढ़ोतरी को बिना जापानी एजेंसी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से अतिरिक्त कर्ज मांगे खुद ही वहन करेगी। गौरतलब है कि JICA ने इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से के लिए फंडिंग दी है।

ग्राउंड पर कितना हुआ काम?

संसद में पेश आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक इस 508 किलोमीटर के कॉरिडोर पर काम काफी तेजी से चल रहा है। 209 किलोमीटर ट्रैक बेड बनकर तैयार हो चुका है और 190 किलोमीटर तक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन के मस्तूल तैयार किए जा चुके हैं। 452 किलोमीटर पियर्स का काम भी पूरा कर लिया गया है जबकि 356 किलोमीटर के हिस्से में गर्डर बिछाए जा चुके हैं। महाराष्ट्र में घनसोली से शीलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी अंडर-सी टनल का काम चल रहा है। इसमें से 4.8 किलोमीटर टनलिंग का काम पूरा हो चुका है।

सूरत से वापी के बीच के 97 किमी के हिस्से पर नदी पुलों के निर्माण सहित सभी सिविल काम पूरे हो चुके हैं और 86% ट्रैक बेड बिछा दिया गया है। इस पूरे कॉरिडोर का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड यानी खंभों पर बनाया जा रहा है जबकि बाकी का हिस्सा टनल, ब्रिज और स्टेशन एरिया का है।

किन 12 स्टेशनों से होकर गुजरेगी बुलेट ट्रेन?

यह हाई-स्पीड कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है। इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं-

  • मुंबई
  • ठाणे
  • विरार
  • बोईसर
  • वापी
  • बिलिमोरा
  • सूरत
  • भरूच
  • वडोदरा
  • आनंद
  • अहमदाबाद
  • साबरमती

320 किमी/घंटे की रफ्तार, महज 1 घंटे 58 मिनट में सफर पूरा

पूरा प्रोजेक्ट चालू होने के बाद बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ेगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। जानकारी के मुताबिक अगर बुलेट ट्रेन सिर्फ 4 प्रमुख इंटरमीडिएट स्टेशनों पर रुकती है तो मुंबई से अहमदाबाद की दूरी तय करने में 1 घंटा 58 मिनट का समय लगेगा। अगर ट्रेन सभी 12 स्टेशनों पर रुकते हुए चलती है तो इस सफर को पूरा करने में 2 घंटे 17 मिनट का समय लगेगा। ऐसा माना जा रहा है कि यह कॉरिडोर पश्चिम भारत के दो प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जोड़कर रेल यात्रा का रूप बदल देगा।

शाही सफर करें सिर्फ ₹1 लाख में, जानिए रेलवे के VIP सलून कोच की बुकिंग का पूरा प्रोसेस

रेलवे के सलून कोच का सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद लोगों में इसे लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई। इस वीडियो ने कई पैसेंजर के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर सलून कोच क्या होता है और क्या आम लोग भी इसमें सफर कर सकते हैं। दरअसल, रेलवे का यह खास कोच लग्जरी सुविधाओं के लिए जाना जाता है। आइए जानते हैं सलून कोच की बुकिंग, खर्च और इसमें मिलने वाली सुविधाओं के बारे में:

क्या होता है रेलवे का सलून कोच

Golden chariot luxury train to operate two itineraries this month, ETTravelWorld

रेलवे सलून कोच एक खास और लग्जरी कोच होता है, जिसमें पैसेंजर को आरामदायक सफर के लिए कई सुविधाएं मिलती हैं। इसमें दो बेडरूम, एक हॉल, किचन और बाथरूम जैसी सुविधाएं होती हैं। शुरुआत में इन कोचों का इस्तेमाल ब्रिटिश काल से ही सीनियर रेलवे ऑफिसर की ट्रैवल के लिए किया जाता था। रेलवे अधिकारी दूर-दराज के इलाकों में इंस्पेक्शन, इंवेस्टिगेशन या इमरजेंसी में इन सलून कोचों का यूज करते हैं। देशभर के अलग-अलग रेलवे जोन में कुल 336 सलून कोच हैं, जिनमें से कई एयर कंडीशन्ड भी हैं।

राष्ट्रपति से भी जुड़ी है सलून कोच की हिस्ट्री

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रेलवे सलून कोच का इस्तेमाल देश के बड़े नेताओं और राष्ट्रपतियों की ट्रैवल के लिए भी किया गया है। साल 1956 से राष्ट्रपति के लिए सलून कोच की सुविधा शुरू हुई थी। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. एस. राधाकृष्णन, डॉ. जाकिर हुसैन और अन्य राष्ट्रपतियों ने इससे ट्रैवल की थी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने साल 2006 में इस कोच से आखिरी जर्नी की थी। बाद में पुराने होने के कारण इसे कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया, लेकिन 2018 में इसे फिर से शुरू किया गया और आम पैसेंजर के लिए भी बुकिंग की फैसिलिटी उपलब्ध कराई गई।

आम पैसेंजर ऐसे करें सलून कोच की बुकिंग

Golden Chariot History, Introduction of Golden Chariot

अब आम पैसेंजर भी रेलवे के सलून कोच में सफर कर सकते हैं। इसके लिए IRCTC की वेबसाइट के जरिए बुकिंग करनी होती है। यात्री को IRCTC FTR (Full Tariff Rate) पोर्टल पर जाकर ट्रेन और रूट की जानकारी देनी होती है। अगर चुने गए रूट पर सलून कोच अवेलेबल है, तो इसे बुक किया जा सकता है। इस कोच में लगभग 8 लोग आराम से ट्रैवल कर सकते हैं और सफर के दौरान एक अटेंडेंट भी साथ रहता है।

सलून कोच बुक करने का खर्च

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सलून कोच की बुकिंग के लिए पैसेंजर को एक तय राशि जमा करनी होती है। इसके अलावा ज्यादा दिनों के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है। अगर पैसेंजर को खाना बनाने के लिए कुक की जरूरत हो तो इसकी फैसिलिटी भी दी जा सकती है। आमतौर पर रूट और ट्रैवल टाइम के हिसाब से इसका खर्च करीब 2 से 3 लाख रुपये तक जा सकता है। बुकिंग के लिए पहले से प्लानिंग बनाना जरूरी होता है, क्योंकि इसे लगभग 6 महीने पहले तक बुक किया जा सकता है।

सलून कोच बुक करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

Railways' make in India: A look at 24 coach train features - BusinessToday

सलून कोच की सुविधा लेने के लिए कुछ नियमों का पालन करना जरूरी है। यह फैसिलिटी कम से कम 500 किलोमीटर की जर्नी के लिए अवेलेबल होती है। बुकिंग के समय सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होता है और रूट पर कोच की अवेलेबिलिटी भी जरूरी है। यह सामान्य ट्रेन टिकट की तरह नहीं होता, बल्कि एक प्रीमियम और प्राइवेट ट्रैवल एक्सपीरियंस देता है, जिसमें पैसेंजर को ट्रेन के अंदर घर जैसी फैसिलिटी मिलती हैं।

Jupiter Wagons Share: रेल कंपनी को मिले ₹264 करोड़ के ऑर्डर, शेयरों पर रहेगी नजर

Jupiter Wagons Share: रेल फ्रेट वैगन बनाने वाली कंपनी Jupiter Wagons Ltd को ₹264.32 करोड़ के दो बड़े ऑर्डर मिले हैं। इनमें एक ऑर्डर JSW (South) Rail Logistics से और दूसरा Central Warehousing Corporation (CWC) से मिला है। इन नए ऑर्डर्स से कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिलेगी और आने वाले महीनों में रेवेन्यू की बेहतर विजिबिलिटी रहेगी।

JSW से मिला ₹122.88 करोड़ का ऑर्डर

जुपिटर वैगंस ने बताया कि JSW (South) Rail Logistics के साथ ₹122.88 करोड़ का लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) साइन किया गया है। इसके तहत कंपनी पांच BFNSM1 रेक और BVCM वैगन तैयार कर सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर सात महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। इसके अलावा कंपनी JSW को दो BFNV वैगन भी सप्लाई करेगी।

CWC ने दिया ₹141.44 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट

सरकारी कंपनी Central Warehousing Corporation (CWC) ने जुपिटर वैगंस को ₹141.44 करोड़ का ऑर्डर दिया है। इसके तहत कंपनी आठ BLSS रेक तैयार करेगी। इनमें 32 BLSS-A वैगन, 352 BLSS-B वैगन और आठ ब्रेक वैन शामिल होंगे। इस ऑर्डर को एक साल के भीतर पूरा करना है।

रेल लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ रही मांग

BLSS वैगन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंटेनर ट्रांसपोर्ट में होता है। ये बंदरगाहों, वेयरहाउस और औद्योगिक केंद्रों के बीच मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जुपिटर वैगंस के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक लोहिया ने कहा कि ये ऑर्डर कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और समय पर डिलीवरी पर ग्राहकों के भरोसे को दिखाते हैं। उनका कहना है कि रेल लॉजिस्टिक्स और फ्रेट इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से आगे भी ऐसे ऑर्डर मिलने की अच्छी संभावना है।

जुपिटर वैगंस के शेयरों का हाल

जुपिटर वैगंस  का शेयर गुरुवार को 1.68% गिरकर ₹263.10 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.20% टूटा है। वहीं, 1 साल में इसने 31% से ज्यादा का नेगेटिव रिटर्न दिया है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 395.95% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 11.77 हजार करोड़ रुपये है।

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