वंदे भारत समेत 5 ट्रेनों में रेलवे का बड़ा बदलाव, AI से होगी सफाई की निगरानी

ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे की ओर से अच्छी खबर है। रेलवे ने सफाई और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 5 सुपरफास्ट ट्रेनों में नई तकनीक आधारित व्यवस्था शुरू की है। इसमें 2 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं। इस पहल के तहत सफाई की निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI का इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही, यात्रियों की शिकायतों का समाधान 2 घंटे में निकाला जाएगा।

इन 5 ट्रेनों में शुरू हुई नई व्यवस्था

नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने इस पहल के तहत इन ट्रेनों को शामिल किया है।

  • कामाख्या-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस
  • गुवाहाटी-कोलकाता गरीब रथ एक्सप्रेस
  • डिब्रूगढ़-मुंबई एलटीटी एक्सप्रेस
  • न्यू जलपाईगुड़ी-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस
  • न्यू जलपाईगुड़ी-गुवाहाटी वंदे भारत एक्सप्रेस

AI तकनीक से चमकेंगे ट्रेन के कोच और टॉयलेट

इस नई तकनीक में AI आधारित सफाई जांच के साथ ऑनलाइन चेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए ट्रेनों में साफ-सफाई के स्तर का आकलन भी किया जाएगा। कोच की खिड़कियों की नियमित सफाई, शौचालयों के रखरखाव और कचरे के उचित प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाएगा। यात्रियों को समय पर चादर और अन्य सामान उपलब्ध कराने के साथ उन्हें वापस लेने की व्यवस्था भी बेहतर की जाएगी।

अब 2 घंटे में सुलझेंगी रेल यात्रियों की परेशानियां

ट्रेनों में यात्रियों की मदद के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी। ये टीमें पानी की उपलब्धता पर नजर रखने, छोटी तकनीकी समस्याओं में सहायता देने और यात्रियों की शिकायतों पर कार्रवाई करने का काम करेंगी। रेलवे ने शिकायतों के समाधान के लिए 2 घंटे का लक्ष्य तय किया है। जो समस्याएं इस समय में हल नहीं हो पाएंगी, उन्हें आगे संबंधित रेलवे अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ेगा स्टाफ पर कंट्रोल

इस पहल में जियो-टैगिंग के जरिए सेवाओं की जांच, कर्मचारियों की निगरानी और केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली को भी शामिल किया गया है। यात्रियों से मिलने वाली वास्तविक समय प्रतिक्रिया और स्टार रेटिंग के आधार पर भी सेवाओं का आकलन किया जाएगा।

रेलवे का मकसद इन नई तकनीकों से ट्रेनों में सफाई को बेहतर करना और यात्रियों की शिकायतों पर जल्दी से जल्दी काम करना है।

Vande Bharat Viral Photos: वंदे भारत ट्रेन में जंग लगे टॉयलेट और गंदगी देखकर भड़का, फिर रेलवे ने दी ये सफाई

अहमदाबाद। वंदे भारत एक्सप्रेस की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद ट्रेन की साफ-सफाई और मेंटेनेंस को लेकर सवाल उठने लगे। तस्वीरों में ट्रेन का बाहरी हिस्सा गंदा, कुछ कांच के पैनल टूटे हुए और टॉयलेट के कुछ हिस्सों में जंग लगी दिखाई दे रही थी। जियोलॉजिस्ट हिमांशु मुखर्जी ने 2 अक्टूबर को X (formerly Twitter) पर फोटोज शेयर की थीं।

मुखर्जी के अनुसार, ये तस्वीरें ट्रेन नंबर 26901 की हैं, जो साबरमती से वेरावल के बीच चलती है। उन्होंने ट्रेन की हालत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसकी सफाई और देखभाल ठीक से नहीं हो रही है। उन्होंने वेस्टर्न रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन और रेल मंत्रालय को टैग कर मामले पर ध्यान देने की मांग की।

तस्वीरें सामने आने के बाद ट्रेन की सफाई और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। मुखर्जी ने कहा कि वंदे भारत जैसी ट्रेन की ऐसी हालत देखकर उन्हें अच्छा नहीं लगा। साबरमती-वेरावल वंदे भारत मई 2025 में शुरू हुई थी और यह अहमदाबाद को सौराष्ट्र से जोड़ती है।

ये रहा रेलवे का जवाब

सोशल मीडिया पर शिकायत सामने आने के बाद अहमदाबाद के DRM ने इस पर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि रेलवे स्टाफ ने ट्रेन के बताए गए हिस्सों की जांच की और जरूरी सफाई व मरम्मत का काम कर दिया।

  • ट्रेन की जांच हुई: लोकल रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन के डिब्बों का इंस्पेक्शन किया और दिखने वाली कमियों को ठीक किया।
  • पैसेंजर से अपील: रेलवे ने पैसेंजर से भी सफर के दौरान ट्रेन में सफाई रखने और कचरा सही जगह पर डालने की अपील की।

बेंगलुरु से मुंबई जाना होगा आसान, पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन! जाने स्टॉपेज और टाइम टेबल

बेंगलुरु और मुंबई के बीच सफर करने वाले पैसेंजर के लिए नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू होने की तैयारी है। रेलवे बोर्ड ने KSR बेंगलुरु और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के बीच इस ट्रेन को चलाने की मंजूरी दे दी है। ट्रेन के इस महीने शुरू होने की संभावना है।

इन 6 दिन चलेगी ट्रेन

  • यह ट्रेन हफ्ते में छह दिन चलेगी। बेंगलुरु से चलने वाली सर्विस सोमवार को नहीं चलेगी, जबकि मुंबई से बेंगलुरु आने वाली सर्विस मंगलवार को नहीं चलेगी।
  • इस रूट पर दो वंदे भारत स्लीपर रेक लगाए जाएंगे। शुरुआत में उद्घाटन वाली ट्रेन को स्पेशल सर्विस के तौर पर चलाया जा सकता है। इसके बाद इसे रेगुलर शेड्यूल में चलाया जाएगा।

इन स्टेशनों पर रुकेगी वंदे भारत

इस ट्रेन के रूट में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अनंतपुर, गुंटकल, रायचूर, कलबुर्गी, सोलापुर, पुणे और कल्याण स्टेशन पर रुकेगी।

रेलवे के प्लान के मुताबिक सोलापुर और पुणे में ट्रेन के लिए पानी भरने और कोच मेंटेनेंस से जुड़ी फैसिलिटी भी मिलेगी।

अब सिर्फ 16 घंटे में पूरा होगा सफर

बताए गए समय के अनुसार, ट्रेन बेंगलुरु से रात करीब 10 बजे चल सकती है। अगले दिन दोपहर करीब 1:50 बजे यह मुंबई पहुंच सकती है।

वहीं मुंबई से वापसी की ट्रेन रात करीब 10:30 बजे चल सकती है और अगले दिन दोपहर करीब 2:50 बजे बेंगलुरु पहुंच सकती है। रेलवे ने अभी इन टाइम का ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं किया है। ट्रेन की टाइमिंग के हिसाब से दोनों शहरों के बीच सफर करीब 16 घंटे का हो सकता है।

फिलहाल बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत या दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेन नहीं चलती है। दोनों शहरों के बीच रोज चलने वाली सीधी ट्रेन उद्यान एक्सप्रेस है। यह करीब 1,134 किलोमीटर का रेल सफर लगभग 22 घंटे में पूरा करती है। सड़क से दोनों शहरों के बीच दूरी करीब 984 किलोमीटर है और सामान्य तौर पर इस सफर में 15 से 17 घंटे लग सकते हैं। ऐसे में नई स्लीपर ट्रेन से रात में सफर करने वाले पैसेंजर को एक और रेल ऑप्शन मिल सकता है।

Vande Bharat Update: क्या वाराणसी-नई दिल्ली वंदे भारत ट्रेन को सप्ताह में सातों दिन चलाया जाएगा? अब इस नई तैयारी में उत्तर रेलवे

वाराणसी। वंदे भारत से सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। वाराणसी और नई दिल्ली के बीच चलने वाली देश की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस (22435/22436) को अब हफ्ते के सातों दिन चलाने की तैयारी है। उत्तर रेलवे ने दोनों ट्रेनों के ऑफ-डे खत्म करने का प्रपोजल तैयार किया है। इसका मकसद ट्रेनों को पूरे सप्ताह चलाना है, ताकि पैसेंजर को किसी एक दिन सर्विस बंद होने की परेशानी न हो।

अभी यह ट्रेन सप्ताह में 6 दिन चलती है और गुरुवार को इसका संचालन नहीं होता। अगर उत्तर रेलवे के प्रपोजल को मंजूरी मिलती है तो गुरुवार को भी यात्रियों को इस ट्रेन की सर्विस मिल सकेगी।

हफ्ते में एक दिन क्यों रुकती है वंदे भारत?

वाराणसी-नई दिल्ली रूट पर अभी दो वंदे भारत ट्रेनें चलती हैं।

– 22435/22436 – गुरुवार को बंद

– 22415/22416 – मंगलवार को बंद

ये दोनों ट्रेनें प्रयागराज होकर जाती हैं, इसलिए प्रयागराज के यात्रियों को भी इन दो दिनों में वंदे भारत नहीं मिलती। बंद रहने की वजह मेंटेनेंस है।

मेंटेनेंस के लिए तैयार किया गया नया प्लान

गुरुवार को भी ट्रेन चलाने के लिए मेंटेनेंस की समस्या को दूर करना जरूरी था। इसके लिए उत्तर रेलवे ने 20 कोच वाले एक अतिरिक्त रैक के रोटेशन की प्लानिंग बनाई है।

प्लान के मुताबिक, जिस दिन रैक की मेंटेनेंस होगी, उस दिन अतिरिक्त रैक को रूट पर चला दिया जाएगा। इससे मेंटेनेंस भी होता रहेगा और यात्रियों को ट्रेन की सर्विस भी बंद नहीं करनी पड़ेगी।

दिवाली से पहले मिल सकती है हरी झंडी

इस प्रपोजल की समीक्षा उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल में चल रही है। रेलवे के सूत्रों के मुताबिक, त्योहारों के सीजन और दिवाली से पहले इस पर फैसला लिया जा सकता है। मंजूरी मिलते ही वाराणसी-प्रयागराज-नई दिल्ली रूट पर वंदे भारत पूरे हफ्ते दौड़ेगी।

दिवाली-छठ पर नहीं होगी टिकट की मारामारी से राहत देने के लिए उत्तर रेलवे चलाएगा 11 जोड़ी विशेष ट्रेनें, देखिए पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। दिवाली और छठ पर घर जाने वाले पैसेंजर के लिए रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों का इंतजाम किया है। उत्तर रेलवे अलग-अलग रूट पर 11 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाने वाला है। जिससे दिवाली और छठ के दौरान घर जाने वाले पैसेंजर को सफर में आसानी हो सकती है।

वाराणसी-जम्मू के बीच चलेगी स्पेशल ट्रेन

वाराणसी-जम्मू तवी स्पेशल ट्रेन (04610/04609) वीकली चलेगी। जम्मू तवी से यह ट्रेन 1 अक्टूबर से 26 नवंबर तक और वाराणसी से 2 अक्टूबर से 27 नवंबर तक चलेगी। रास्ते में पठानकोट कैंट, जालंधर कैंट, लखनऊ और सुल्तानपुर के साथ ही कई स्टेशनों पर इसका हाल्ट भी होगा। श्री माता वैष्णो देवी कटरा के लिए भी स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन (04604/04603) के 18 ट्रिप लेकर चलेगी। यह कटरा से 4 अक्टूबर से 29 नवंबर और वाराणसी से 5 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलने वाली है।

नई दिल्ली और श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच भी स्पेशल ट्रेन (04081/04082) चलेगी। इसकी 28 ट्रिप होगी। यह ट्रेन नई दिल्ली से 12 से 25 अक्टूबर और कटरा से 13 से 26 अक्टूबर तक रोज चलने वाली है।

बिहार और पूर्वी भारत के लिए भी ट्रेनें

बिहार और पूर्वी भारत जाने वाले पैसेंजर के लिए भी कई स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। शकूरबस्ती-दरभंगा स्पेशल ट्रेन (04098/04097) की सबसे ज्यादा 104 ट्रिप होगी। इसके अलावा श्रीगंगानगर-समस्तीपुर स्पेशल ट्रेन के 14, मालदा टाउन-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन के 16 और न्यू जलपाईगुड़ी-गोमती नगर स्पेशल ट्रेन 18 ट्रिप लगाएगी।

हरिद्वार और प्रयागराज के लिए भी ट्रेनें

उत्तर रेलवे ने हरिद्वार और प्रयागराज रूट पर भी स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। जबलपुर-हरिद्वार-जबलपुर स्पेशल ट्रेन (01703/01704) के 10 फेरे होंगे। यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 19 नवंबर तक चलेगी।

इसके साथ ही जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन स्पेशल ट्रेन (01707/01708) भी 10 ट्रिप लगाएगी। वहीं प्रयागराज-हजरत निजामुद्दीन स्पेशल ट्रेन (04183/04184) के 14 ट्रिप लगाएगी। यह ट्रेन 20 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक चलेगी।

RAC-वेटिंग यात्रियों के लिए बड़ी खबर! खाली बर्थ अब खुद होगी अलॉट, TTE के चक्कर खत्म

ट्रेन में खाली बर्थ अब खुद मिलेगी RAC-वेटिंग पैसेंजर्स को, रेलवे ला रहा डिजिटल सिस्टम

ट्रेन में सफर के दौरान खाली होने वाली बर्थ को लेकर रेलवे एक नई डिजिटल व्यवस्था शुरू करने जा रहा है। इससे किसी पैसेंजर के ट्रेन में नहीं चढ़ने पर उसकी खाली बर्थ की जानकारी सिस्टम तक तुरंत पहुंच जाएगी और नियम के अनुसार उसे RAC या वेटिंग लिस्ट वाले पैसेंजर को अलॉट किया जा सकेगा। इससे सीट मिलने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान और साफ होने की उम्मीद है।

अब मोबाइल बता देगा कहां है खाली बर्थ!

नए सिस्टम के बाद पैसेंजर्स को ट्रेन में खाली हुई बर्थ के बारे में पता करने के लिए TTE को ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रेलवे के सिस्टम में खाली बर्थ की जानकारी रियल टाइम में अपडेट होगी। पैसेंजर्स रेल मदद या IRCTC ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि सफर के दौरान किस स्टेशन से किस कोच में कितनी सीटें खाली हुई हैं। इसके बाद RAC और वेटिंग लिस्ट वाले पैसेंजर्स को तय नियम और क्रम के अनुसार बर्थ अलॉट की जा सकेगी। बर्थ मिलने की जानकारी पैसेंजर के मोबाइल पर भी भेजी जा सकेगी।

पहला ट्रायल होगा नई मुंबई से

रेलवे इस नई तकनीक को पहले मुंबई सेंट्रल डिवीजन की कुछ चुनिंदा ट्रेनों में आजमाने की तैयारी कर रहा है। योजना के मुताबिक दिसंबर 2026 तक कुछ TTE को स्मार्ट जैकेट, GPS और कैमरे देकर इसका ट्रायल किया जाएगा। इसके नतीजे देखने के बाद अप्रैल 2027 से इस तकनीक को देश के सभी 17 रेलवे जोनों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है। अगर TTE खाली बर्थ को सिस्टम में अपडेट नहीं करते या चेकिंग के लिए मौजूद नहीं होते हैं, तो पैसेंजर रेल मदद ऐप या 139 पर शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे।

HHT से तुरंत अपडेट होगा डेटा

  • 4G कनेक्टिविटी और GPS ट्रैकिंग: डिवाइस में 4G की सुविधा होगी, जिससे डेटा रियल टाइम में सर्वर तक भेजा जा सकेगा। करीब 5 मीटर तक की सटीकता के साथ TTE की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी।
  • बायोमेट्रिक स्कैनर: फिंगरप्रिंट स्कैनर के जरिए TTE की डिजिटल उपस्थिति दर्ज होगी।
  • 12 घंटे का बैटरी बैकअप: लंबे सफर के दौरान डिवाइस को लगातार इस्तेमाल किया जा सकेगा।
  • मजबूत डिजाइन: HHT को वाटरप्रूफ और डस्टप्रूफ बनाया जा रहा है, ताकि सफर के दौरान इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।

स्मार्ट जैकेट से TTE की सुरक्षा होगी मजबूत

  • GPS डिवाइस और HD बॉडी कैमरा: जैकेट में GPS लगा होगा, जिससे ड्यूटी के दौरान TTE की लोकेशन ट्रैक की जा सकेगी। जैकेट में HD कैमरा लगाया जाएगा, जिससे ड्यूटी के दौरान होने वाली गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकेगा।
  • SOS बटन: किसी इमरजेंसी में TTE एक बटन दबाकर तुरंत मदद के लिए अलर्ट भेज सकेंगे। ट्रेन में किसी पैसेंजर की तबीयत अचानक बिगड़ने पर TTE SOS दबाकर मदद मांग सकेंगे। SOS दबाते ही नजदीकी कंट्रोल रूम और अगले स्टेशन के स्टेशन मास्टर तक इमरजेंसी की जानकारी पहुंचाई जा सकेगी।

रेलवे का अनुमान है कि पूरी व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट जांच की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी हो सकती है और खाली बर्थ के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतों में भी कमी आ सकती है। इसके अलावा, अगर TTE चेकिंग के लिए उपलब्ध नहीं होते या खाली बर्थ को सिस्टम में अपडेट नहीं करते, तो यात्री रेल मदद ऐप या 139 पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

रेलवे का नया डिजिटल अंदाज! स्टेशन नहीं अब मोबाइल पर देखें रेलवे की रील, जानकारी मिलेगी चंद सेकंडों में

रेलवे ने पैसेंजर तक स्पेशल ट्रेनों की जानकारी पहुंचाने का नया तरीका अपनाया है। अब ट्रेन की तारीख, समय, रूट और स्टॉपेज जैसी जरूरी डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर की जाने वाली छोटी रील्स में देखने को मिल रही है। खास बात यह है कि इन वीडियो में सफर से जुड़ी खास जगहों की झलक भी दिखाई जाती है, जिससे पैसेंजर को जानकारी के साथ अपनी ट्रिप की तैयारी करने में भी आसानी होती है।

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चंद सेकेंड्स में ट्रेन की पूरी डिटेल्स

स्पेशल ट्रेनों को लेकर बनाई जा रही रील्स में ट्रेन के ऑपरेशन की तारीख, समय और प्रमुख स्टेशनों की इनफार्मेशन दी जाती है। पैसेंजर वीडियो देखकर जल्दी समझ सकते हैं कि ट्रेन कब और कहां से चलेगी। इससे उन्हें लंबी जानकारी पढ़ने या अलग-अलग जगहों पर ट्रेन की डिटेल ढूंढने में ज्यादा समय नहीं लगाना पड़ेगा।

 

मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स की झलकियां

इन रील्स को सिर्फ ट्रेन की जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया है। वीडियो में ट्रेन के रास्ते में आने वाले प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक जगहों की फोटो और छोटे वीडियो भी शामिल किए जाते हैं। इससे पैसेंजर को रूट का अंदाजा लगाने के साथ यह भी पता चलता है कि सफर के दौरान कौन-कौन सी खास जगहें रास्ते में पड़ सकती हैं।

 

फेसबुक और व्हाट्सऐप से कनेक्शन

रेलवे की ये रील्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और व्हाट्सऐप ग्रुपों जैसे कई प्लेटफॉर्म पर शेयर की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद पैसेंजर तक जानकारी सीधे उनके मोबाइल पर पहुंच जाती है। छोटी वीडियो होने की वजह से इसे देखना और जरूरी जानकारी समझना भी आसान रहता है।

 

इनफार्मेशन के साथ एंटरटेनमेंट भी

रेलवे के पीआर प्रोफेशनल्स इन रील्स को पैसेंजर की पसंद और सोशल मीडिया के मौजूदा ट्रेंड को ध्यान में रखकर तैयार करते हैं। वीडियो को अट्रैक्टिव बनाने के लिए ट्रेंडिंग म्यूजिक और आसान विजुअल्स का इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कानपुर से प्रयागराज होते हुए बेंगलुरु जाने वाली स्पेशल ट्रेन 04132-31 के लिए करीब 38 सेकेंड की रील तैयार की गई है।

रील्स से जानें पसंदीदा स्पेशल ट्रेन

सोशल मीडिया रील्स से सिर्फ नई स्पेशल ट्रेनों की इनफार्मेशन ही नहीं, बल्कि ट्रेन में हुए चेंज और रूट की इनफार्मेशन भी पैसेंजर तक पहुंचाई जा रही है। उदाहरण के लिए प्रयागराज से दादरी के बीच चलने वाली स्पेशल ट्रेन को नारायणपुर बाजार तक बढ़ाया गया है।

 

रेलवे का यह तरीका बदलते समय के साथ पैसेंजर की जरूरतों को समझने की एक अच्छी कोशिश है। आज जब लोग मोबाइल पर कम समय में जानकारी पाना चाहते हैं, ऐसे में आसान तरीके से दी गई जानकारी ज्यादा असरदार हो सकती है। इस तरह की पहल से रेलवे और पैसेंजर के बीच कम्युनिकेशन भी आसान होगा और जरूरी अपडेट लोगों तक पहुंचाने का तरीका और बेहतर बन सकता है।

ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या देशभर में चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन? जिंद-सोनीपत रूट के बाद अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी ये जानकारी

देश में पहली हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन के सफल परिचालन के बाद अब इसे दूसरे रेल रूट्स पर भी चलाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। जिंद-सोनीपत रूट पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत के बाद अब इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्री ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि दूसरे रेल रूट्स पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का फैसला संसाधनों की उपलब्धता, ऑपरेशनल फिजिबिलिटी और दूसरी जरूरी चीजों पर निर्भर करेगा।

संसद में सांसदों ने पूछे थे हाइड्रोजन तकनीक से जुड़े कई सवाल

आपको बता दें कि राज्यसभा में अलग अलग राजनीतिक दलों के सांसदों ने रेलवे की इस नई तकनीक को लेकर कई सवाल उठाए थे। सांसदों ने इसके विकास पर हुए कुल खर्च, देश भर में स्वीकृत और प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं का ब्योरा, इन परियोजनाओं के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता, लागत और ग्रीन हाइड्रोजन ईंधन के लिए विकसित की जा रही घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कैपिसिटी को लेकर रेल मंत्री से जवाब मांगा था।

जिंद-सोनीपत रूट पर दर्ज हुई कॉमर्शियल सर्विस की सक्सेस

सांसदों के सवालों का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च सदन को बताया कि 17 जुलाई 2026 को जिंद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की गई थी। 17 जुलाई से लेकर 3 अगस्त तक 89 किलोमीटर लंबे जिंद-सोनीपत सेक्शन पर इस ट्रेन ने कुल 2492 किलोमीटर की दूरी तय की है। रेल मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय रेलवे में हाइड्रोजन संचालित ट्रेन तकनीक के इस्तेमाल को प्रदर्शित करने के लिए इस हाइड्रोजन ट्रेन को पायलट आधार पर विकसित किया गया है।

जींद में बना डेडिकेटेड प्लांट और सेफ्टी प्रोटोकॉल

रेल मंत्री ने बताया कि इस ट्रेनसेट को हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के लिए हरियाणा के जींद में एक डेडिकेटेड हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। सुरक्षा मानकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही हाइड्रोजन स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की गई है, जिससे निर्धारित सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित हो सके।

पर्यावरण को फायदा: जीरो कार्बन उत्सर्जन

इस तकनीक के फायदों के बारे में बताते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनसेट शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन सुनिश्चित करता है, जिसमें बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जलवाष्प (Water Vapour) ही निकलती है। उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेनसेट फ्यूल सेल तकनीक पर काम करता है। इसमें ट्रैक्शन पावर जेनरेशन के लिए कोई मूविंग पार्ट या पारंपरिक इंजन नहीं होता है। इस वजह से इसके मूवमेंट में शोर भी नहीं होता और ध्वनि प्रदूषण कम होता है। यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे को हाइड्रोजन तकनीक के क्षेत्र में मजबूती से स्थापित करता है।

141 करोड़ रुपये थी इस प्रोजेक्ट की लागत

इस प्रोजेक्ट पर आए खर्च का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को कुल 141 करोड़ रुपये के खर्च से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेनसेट और इसका इंफ्रास्ट्रक्चर प्रायोगिक तौर पर तैयार किया गया है, इसलिए इस चरण में स्थापित ट्रैक्शन सिस्टम के साथ हाइड्रोजन चालित ट्रेनों की लागत की सीधी तुलना करना उचित नहीं है। रेल मंत्री ने इस ट्रेन की प्रमुख विशेषताओं के बारे में भी बताया है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकास पर आधारित है। ब्रॉड-गेज प्लेटफॉर्म पर 10 डिब्बों के साथ यह दुनिया की सबसे लंबी और 2400 किलोवाट क्षमता वाली सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। इसमें 1200 किलोवाट के दो ड्राइविंग पावर कार लगे हैं, जो मिलकर 2400 किलोवाट बिजली पैदा करते हैं, और इसके साथ आठ पैसेंजर कोच जोड़े गए हैं।

क्या अन्य रूटों पर भी चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

फिलहाल भारतीय रेलवे सिर्फ जिंद-सोनीपत सर्किट पर ही पायलट आधार पर इस हाइड्रोजन पावर्ड ट्रेन तकनीक का संचालन कर रहा है। देश के दूसरे हिस्सों में इसके विस्तार को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि अन्य रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने का निर्णय भविष्य में संसाधनों की उपलब्धता, परिचालन संबंधी व्यावहारिकताओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद ही लिया जाएगा।

राजधानी सा आराम, बुलेट जैसी रफ्तार, वंदे भारत ने बदल दिए 6 ट्रेन के रुट!

आज के टाइम में कम समय में लंबी दूरी का सफर करने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस बेहतरीन ऑप्शन है। देश के कई प्रमुख शहरों के बीच चलने वाली ये ट्रेनें हाई स्पीड, मॉडर्न सुविधाओं और कम ट्रैवल टाइम के लिए जानी जाती हैं। ये रही वंदे भारत ट्रेनें जो कुछ ही घंटों में लंबी दूरी तय कर देती हैं।

 

कोयंबटूर-बेंगलुरु सफर

कोयंबटूर-बेंगलुरु कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच ट्रैवल करने वाले ट्रैवलर के लिए सबसे तेज और सहूलियत भरी ट्रेनों में से एक है। यह सुबह 7:25 बजे कोयंबटूर से रवाना होती है और दोपहर 1:45 बजे बेंगलुरु कैंटोनमेंट स्टेशन पहुंच जाती है। करीब 377 किलोमीटर का सफर यह लगभग 6 घंटे 20 मिनट में पूरा करती है। इस ट्रेन के जरिए दोनों शहरों के बीच बिजनेस ट्रिप, ऑफिस मीटिंग और टूरिस्ट पहले की तुलना में काफी आसान और समय बचाने वाला बन गया है।

 

पटना-हावड़ा रूट

पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच चलने वाली सबसे तेज ट्रेनों में शामिल है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे पटना जंक्शन से रवाना होती है और 11:35 बजे हावड़ा स्टेशन पहुंच जाती है। लगभग 532 किलोमीटर की दूरी यह केवल 5 घंटे 35 मिनट में तय करती है। इसकी औसत रफ्तार 78 से 81 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। कम समय में सफर पूरा होने के कारण यह रोज ट्रैवल करने वाले लोगों, बिजनेस ट्रैवलर और स्टूडेंट्स के लिए भी एक बेहतरीन ऑप्शन बन चुकी है।

 

दिल्ली-वाराणसी यात्रा

नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस राजधानी दिल्ली और धार्मिक नगरी वाराणसी के बीच सबसे पॉपुलर हाई-स्पीड ट्रेनों में से एक है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलती है और दोपहर 2 बजे वाराणसी पहुंचती है। करीब 771 किलोमीटर की दूरी यह सिर्फ 8 घंटे में पूरी करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 95 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक है। कम समय में लंबी दूरी तय करने की वजह से यह ट्रेन तीर्थयात्रियों, टूरिस्ट और कामकाजी लोगों के बीच काफी पॉपुलर है।

 

 

मुंबई-गांधीनगर रूट

मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस महाराष्ट्र और गुजरात के बीच तेज रेल कनेक्टिविटी अवेलेबल कराती है। यह सुबह 6:10 बजे मुंबई सेंट्रल से रवाना होती है और दोपहर 12:35 बजे गांधीनगर कैपिटल पहुंच जाती है। करीब 522 किलोमीटर की दूरी यह लगभग 6 घंटे 25 मिनट में तय करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार करीब 81 किमी/घंटा रहती है, जबकि कुछ सेक्शन में यह 130 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चल सकती है। यह ट्रेन दोनों राज्यों के बीच ट्रैवल को पहले की तुलना में ज्यादा तेज, आरामदायक बनाती है।

 

 

जोधपुर-दिल्ली सफर

जोधपुर-दिल्ली कैंटोनमेंट वंदे भारत एक्सप्रेस राजस्थान और राष्ट्रीय राजधानी के बीच तेज़ यात्रा का बेहतर विकल्प है। यह सुबह 5:30 बजे जोधपुर से रवाना होती है और दोपहर 1:30 बजे दिल्ली कैंटोनमेंट स्टेशन पहुंचती है। करीब 606 किलोमीटर का सफर यह लगभग 8 घंटे में पूरा करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार लगभग 75 किमी/घंटा है, जबकि इसकी मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंचती है। इससे पैसेंजर को रोड ट्रैवल की तुलना में कम समय में बिना परेशानी के सफर का एक्सपीरियंस मिलता है।

 

 

मैसूरु-चेन्नई यात्रा

मैसूरु-MGR चेन्नई सेंट्रल वंदे भारत एक्सप्रेस कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच यात्रा करने वालों के लिए मॉडर्न और तेज रेल सर्विस है। यह ट्रेन सुबह करीब 6 बजे मैसूरु से निकलती है और दोपहर 12:45 बजे चेन्नई पहुंच जाती है। लगभग 500 किलोमीटर की दूरी यह 6 घंटे 45 मिनट में तय करती है। इसकी औसत रफ्तार 76 से 79 किमी/घंटा रहती है, जबकि मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। यह ट्रेन दोनों राज्यों के प्रमुख शहरों के बीच फास्ट, सेफ और आरामदायक जर्नी है।

 

सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम रूट

सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम वंदे भारत एक्सप्रेस तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच ट्रैवल को पहले से ज्यादा तेज और बेहतर बनाती है। यह सुबह 5 बजे सिकंदराबाद से रवाना होती है और दोपहर 1:50 बजे विशाखापत्तनम पहुंचती है। लगभग 699 किलोमीटर की दूरी यह 8 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है। ट्रेन की औसत रफ्तार 79 से 82 किमी/घंटा रहती है, जबकि इसकी मैक्सिमम स्पीड 130 किमी/घंटा है। लंबी दूरी तय करने के बावजूद यह ट्रेन कम समय में डेस्टिनेशन तक पहुंचाती है, जिससे पैसेंजर का काफी समय बचता है और जर्नी आसान होती है।