हवाई जहाज को टक्कर देगी चीन की ट्रेन! फ्लाइंग ट्रेन ने मचाया तहलका

चीन तेज रफ्तार वाली ट्रेनों के मामले में लगातार नई टेक्निक पर काम कर रहा है। देश में पहले से ही शंघाई मैग्लेव जैसी तेज ट्रेन चलती है, जो करीब 460 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ती है। अब साइंटिस्ट इससे भी ज्यादा तेज ट्रेन बनाने की तैयारी में जुटे हैं। इसी कड़ी में एक ऐसी ‘फ्लाइंग ट्रेन’ पर काम किया जा रहा है, जिसे फ्यूचर की बेहद तेज ट्रेन कहा जा रहा है।

इस ट्रेन का शुरुआती ट्रायल भी किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि टेस्टिंग के दौरान इसकी स्पीड लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। यानी इसकी स्पीड शंघाई मैग्लेव से काफी ज्यादा है। इतनी हाई स्पीड वाली ट्रैन से कम टाइम में लंबी दुरी तय की जा सकती है। यह टेक्निक अभी टेस्टिंग में है और इसे पैसेंजर के लिए शुरू करने में समय लग सकता है। यदि आगे के ट्रायल सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में ट्रेन से ट्रैवल करने का एक्सपीरियंस बदल सकता है।

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एरोप्लेन जैसी स्पीड

चीन के साइंटिस्ट ऐसी ट्रेन तैयार करने में जुटे हैं, जिसे ‘फ्लाइंग ट्रेन’ कहा जा रहा है। यह आम ट्रेन से काफी अलग होगी और खास टेक्निक की मदद से पटरी के ऊपर चलेगी। शुरुआती टेस्टिंग में इस ट्रेन की करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड है। इतनी तेज स्पीड के कारण यह ट्रेन फ्यूचर में एयर ट्रैवल का एक ऑप्शन बन सकती है।

 

 

बिना पहिये चलेगी ट्रेन

इस ट्रेन को तेज रफ्तार देने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक यानी मैग्नेटिक फाॅर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इस टेक्निक में ट्रेन के पहिए सीधे पटरी के कॉन्टैक्ट में नहीं आते, बल्कि मैग्नेटिक फाॅर्स से ट्रेन पटरी के ऊपर थोड़ी दूरी पर आगे बढ़ती है। इससे पहिए और पटरी के बीच फ्रिक्शन काफी कम हो जाता है। फ्रिक्शन कम होने पर ट्रेन को ज्यादा तेज स्पीड से चलाना आसान होता है।

हवा नहीं रोकेगी रफ्तार

800 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी हाई स्पीड पर ट्रेन के सामने हवा का दबाव एक बड़ी समस्या बन सकता है। इसी वजह से इस ट्रेन के लिए खास ट्यूब या सुरंग तैयार की जा रही है। इस ट्यूब के अंदर से पंप की मदद से हवा को बाहर निकाला जाएगा, जिससे ट्रेन को कम हवा वाले वातावरण में चलने में मदद मिलेगी। हवा का दबाव कम होने से ट्रेन के लिए तेज रफ्तार हासिल करना आसान हो सकता है और सफर के दौरान एनर्जी की बचत भी हो सकती है। चीन के हुबेई में साइंटिस्ट ने करीब एक किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इस टेक्निक का टेस्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रायल में ट्रेन ने सिर्फ 5.3 सेकंड में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। अब साइंटिस्ट इस टेक्निक को और बेहतर बनाने और फ्यूचर में इसकी स्पीड को 1000 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

 

 

टेस्टिंग के लिए तैयार

इस फ्यूचर ट्रेन पर चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (CASIC) काम कर रहा है। इतनी हाई स्पीड वाली ट्रेन के लिए ट्रैक और ट्यूब को स्टैंडर्ड रेलवे ट्रैक की तुलना में कहीं ज्यादा सटीक बनाना जरूरी है। टेस्टिंग के लिए तैयार किए गए करीब एक किलोमीटर लंबे कंक्रीट और स्टील ट्रैक में अलाइनमेंट को सिर्फ 0.5 मिलीमीटर तक रखने की बात कही गई है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती ट्रायल में है टेक्निक सफल हुई तो लंबी दूरी की जर्नी कम टाइम में पूरी हो सकती है।

Business idea: 1 करोड़ की नौकरी छोड़ भारत लौटा इंजीनियर! सिर्फ ₹90,000 से शुरू किया बिजनेस, 6 साल में हासिल किया बड़ा मुकाम

Business idea: अमेरिका में करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर पारिवारिक जीवन, भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसर और कुछ नया करने की चाह लोगों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के युवा उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Qubit Fitness के संस्थापक और CEO विवेक तिरुवेंगदम ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ चेन्नई लौट आए। उस समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। लेकिन उन्होंने इसी रकम से अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

विवेक ने इंस्टाग्राम पर अपनी छह साल की यात्रा साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला अचानक नहीं था। उनका मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं। बल्कि परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना था, जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 11 महीने की बेटी के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर कुछ नया और सार्थक बनाना किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Qubit Fitness की कैसे हुई शुरुआत?

जनवरी 2021 में विवेक ने बिना किसी ऑफिस, निवेशक या टीम के Qubit Fitness की शुरुआत की। उनके पास सिर्फ एक लैपटॉप, अपना समय और 90 हजार रुपये की बचत थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, जो अमेरिका में उनकी सालाना आय की तुलना में काफी कम था।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। समय के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। नए ग्राहक जुड़े, कामकाज बेहतर हुआ और कारोबार बढ़ता गया। भारत लौटने के छह साल बाद विवेक ने वह वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया था।

अपने अनुभव शेयर करते हुए विवेक ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें सिखाया कि लगातार मेहनत, प्रतिभा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। धैर्य का फल देर से मिलता है। लेकिन मिलता जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य के साथ काम करके कमाया गया पैसा अलग तरह की संतुष्टि देता है।

सफलता का श्रेय परिवार को दिया

विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में उनका साथ देने वाले लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के भरोसे और सहयोग की वजह से वह अपने सपने को हकीकत में बदल पाए। सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को लोगों ने खूब सराहा। एक यूजर ने लिखा कि आपकी सफलता के पीछे आपकी अच्छाई और सोच सबसे बड़ी ताकत है।

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वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि आपका ब्रांड और सोच लोगों के लिए प्रेरणा है। परिवार के साथ रहकर आगे बढ़ने का आपका फैसला शानदार है। कई अन्य लोगों ने भी विवेक की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें बधाई दी। विवेक का कहना है कि कभी-कभी विश्वास ही आपका इकलौता बिजनेस प्लान होता है। इस यात्रा ने उन्हें सिखाया कि प्रतिभा से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। उद्देश्यपूर्ण काम से मिलने वाली संतुष्टि अलग ही होती है।

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Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, 30 मीटर नीचे बन रहा BKC स्टेशन, सूरत स्टेशन ने लिया भव्य आकार

Bullet Train Update: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) तेजी से आकार ले रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में इस 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट के दो सबसे चुनौतीपूर्ण स्टेशनों मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) और गुजरात के सूरत स्टेशन पर काम महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। BKC टर्मिनल हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के दक्षिणी शुरुआती पॉइंट के तौर पर काम करेगा। बीकेसी (BKC) स्टेशन जमीन से लगभग 30 मीटर गहराई में बनाया जा रहा है।

BKC में देश के सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशनों में से एक तैयार किया जा रहा है। यह पूरे प्रोजेक्ट का सबसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां खुदाई और नींव (फाउंडेशन) का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है, जिससे स्टेशन के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। वहीं, सूरत स्टेशन का ढांचा और छत का काम पूरा हो चुका है। अब वहां फिनिशिंग का काम बुलेट ट्रेन की रफ्तार से चल रहा है।

क्यों अहम है BKC स्टेशन?

News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई का BKC स्टेशन इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनल होगा। इसे जमीन से करीब 30 मीटर नीचे बनाया जा रहा है। यही वजह है कि इसे पूरी परियोजना के सबसे जटिल निर्माण कार्यों में शामिल किया गया है। स्टेशन के लिए खुदाई और फाउंडेशन से जुड़े प्रमुख काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। अंडरग्राउंड स्टेशन होने के कारण यहां निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग, सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। BKC स्टेशन तैयार होने के बाद मुंबई से बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सूरत स्टेशन का स्ट्रक्चर तैयार, अब इंटीरियर का काम जारी

गुजरात के सूरत में बुलेट ट्रेन स्टेशन का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का मुख्य स्ट्रक्चरल फ्रेम और रूफिंग का काम पूरा हो चुका है। अब यहां फर्श, क्लैडिंग और सीलिंग लगाने समेत अन्य इंटीरियर फिनिशिंग का काम चल रहा है। सूरत स्टेशन का डिजाइन भी खास तरीके से तैयार किया गया है। इसकी वास्तुकला में सूरत की पहचान यानी हीरा काटने और पॉलिश करने के उद्योग से प्रेरणा ली गई है। स्टेशन की डिजाइन के जरिए शहर की कारोबारी और औद्योगिक पहचान को दर्शाने की कोशिश की गई है।

508 किमी लंबा होगा पूरा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत की पहली हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है। करीब 508 किलोमीटर लंबी यह समर्पित रेल लाइन मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगी। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इसके रास्ते में कई प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी शहर इससे जुड़ेंगे।

इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन होंगे

मुंबई (BKC)

ठाणे

विरार

बोइसर

वापी

बिलिमोरा

सूरत

भरूच

वडोदरा

आनंद

अहमदाबाद

साबरमती

320 km प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की उम्मीद है। इस रफ्तार से मुंबई से अहमदाबाद के बीच करीब 508 किलोमीटर की दूरी लगभग 2 घंटे में तय की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी लाइन तैयार होने से पहले इसके कुछ हिस्सों पर चरणबद्ध तरीके से सेवा शुरू की जा सकती है। यानी यात्रियों को पूरे कॉरिडोर के पूरा होने का इंतजार जरूरी नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी। इसके साथ ही भारत के हाई-स्पीड रेल युग की शुरुआत हुई।

हर स्टेशन की डिजाइन में दिखेगी शहर की पहचान

इस प्रोजेक्ट से जुड़े रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के स्टेशनों को केवल परिवहन केंद्र के रूप में नहीं। बल्कि संबंधित शहर की पहचान से जोड़कर तैयार किया जा रहा है। स्टेशनों में आधुनिक वास्तुकला, यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और अलग-अलग परिवहन माध्यमों से कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है। साबरमती स्टेशन को विशेष रूप से एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बुलेट ट्रेन के साथ मेट्रो, BRTS और सामान्य रेलवे को जोड़ा जाएगा। स्टेशन के आसपास के क्षेत्र का विकास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के सिद्धांतों के आधार पर किए जाने की योजना है।

कब शुरू होगी देश की पहली बुलेट ट्रेन?

बुलेट ट्रेन से सफर करने का सपना देख रहे लोगों को अभी करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल सर्विस अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए केवल स्टेशन और ट्रैक ही नहीं, बल्कि ट्रेनों के रखरखाव की अत्याधुनिक व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इस रेलवे कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ट्रेनों की नियमित जांच, मरम्मत और रखरखाव के लिए तीन अत्याधुनिक रोलिंग स्टॉक डिपो बनाए जा रहे हैं। इनमें एक महाराष्ट्र के ठाणे और दो गुजरात के सूरत और साबरमती में होंगे।

ठाणे डिपो में पहली बार इस्तेमाल होंगी ये टेक्नोलॉजी

मुंबई कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनस होने के कारण ठाणे का रोलिंग स्टॉक डिपो बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसे अत्याधुनिक मशीनरी से लैस किया जा रहा है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, यहां कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें भारत में पहली बार इस्तेमाल किए जाने की योजना है। डिपो में हाई-स्पीड ट्रेन सेट की जांच और रखरखाव किया जाएगा। ताकि ट्रेनें नियमित सेवा के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

साबरमती डिपो में छोटी-बड़ी मरम्मत की पूरी व्यवस्था

गुजरात के साबरमती डिपो में ट्रेनों की छोटी और बड़ी दोनों तरह की मरम्मत की सुविधा होगी। यहां इमरजेंसी रिपेयर एरिया, पहियों की री-प्रोफाइलिंग के लिए उपकरण, कोच बॉडी की मरम्मत और बोगी वर्कशॉप बनाई जाएंगी। ट्रेनों की नियमित जांच के लिए विशेष ट्रैक और इंस्पेक्शन रोड भी तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन की नियमित सफाई के लिए ट्रेन-वॉशिंग प्लांट भी लगाए जाएंगे।

पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान

बुलेट ट्रेन के रखरखाव केंद्रों को तैयार करते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा रहा है। डिपो में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज सिस्टम लगाए जाएंगे। ट्रेन धोने में इस्तेमाल होने वाले पानी को अधिक से अधिक दोबारा इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी, जिससे पानी की खपत कम की जा सके।

जापान में ट्रेनिंग ले रहे रेलवे कर्मचारी

बुलेट ट्रेन के संचालन और रखरखाव के लिए भारतीय कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को जापान में सीधे ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इन कर्मचारियों को जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल सिस्टम के संचालन और रखरखाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है। इस तरह मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी केवल ट्रैक और स्टेशनों तक सीमित नहीं है। स्टेशन, डिपो, रखरखाव व्यवस्था, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है।

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Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में जर्जर इमारत गिरने से 9 लोगों की मौत, कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका

Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में गुरुवार रात चार मंजिला इमारत का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई और आशंका है कि मलबे के नीचे कई लोग फंसे हो सकते हैं। फिलहाल, अभी बचाव कार्य जारी है और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीमें और स्थानीय पुलिस मौके पर मौजूद हैं।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इमारत का बड़ा हिस्सा उस समय गिरा जब वहां काम चल रहा था। अधिकारियों ने बताया कि कमजोर और खराब हालत के कारण इमारत को पहले ही खाली करा लिया गया था, लेकिन आशंका है कि कुछ मजदूर हादसे के समय अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए।

NDRF की टीम ने शुरुआत में मलबे से एक महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और इलाज के लिए पास के अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद भी मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने का काम लगातार जारी है।

अधिकारी खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि मलबे के नीचे और भी लोग दबे हो सकते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत की बात कही गई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतता गया, यह संख्या 9 तक पहुंच गई।

देवेंद्र फडणवीस ने दी प्रतिक्रिया

अब इस घटना पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने तुरंत FIR दर्ज करने और सक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने ‘X’ पर एक ट्वीट में कहा, “भिवंडी में इमारत गिरने से हुई लोगों की मौत की घटना बेहद दुखद है। मैं उनके प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। हम इन परिवारों के दुख में शामिल हैं। म्युनिसिपल कमिश्नर को इस मामले में तुरंत FIR दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। घायलों का इलाज किया जा रहा है। मैं ईश्वर से उनके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।”

पीएम मोदी ने मुआवजे का किया ऐलान

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हों।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिल्डिंग की पहचान कोहिनूर अपार्टमेंट के तौर पर हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शहर के नगर निगम ने इसे पहले ही खतरनाक घोषित कर दिया था।

शहर के मेयर नारायण चौधरी ने कहा, “भिवंडी में ऐसी कई इमारतें हैं जिन्हें खतरनाक घोषित किया गया है। हम फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन मैं ऐसी इमारतों में रहने वाले लोगों को सलाह दूंगा कि वे तुरंत इन्हें खाली कर दें।”

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Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कब शुरू होगी? 61% काम पूरा, जानिए पहले किस रूट पर दौड़ेगी

Bullet Train news: भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। 508 किलोमीटर लंबे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को डेवलप करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसने 61 फीसदी से ज्यादा की फिजिकल प्रोग्रेस कर ली है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की जून महीने की रिपोर्ट के मुताबिक इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर अब तक 90966.89 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

पहले किस रूट पर और कब दौड़ेगी पहली बुलेट ट्रेन?

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भारत की पहली बुलेट ट्रेन का पहला कमर्शियल रन अगस्त 2027 में शुरू होगा। यह शुरुआत 100 किलोमीटर लंबे सूरत से वापी खंड के बीच होगी। यह इस पूरे हाई-स्पीड कॉरिडोर का पहला चरण होगा। इसके बाद वापी-अहमदाबाद और ठाणे-अहमदाबाद सेक्शन को चालू किया जाएगा। इसके बाद अंत में पूरा मुंबई-अहमदाबाद रूट चालू होगा। रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पूरे 508 किमी के इस रूट का काम दिसंबर 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।

1.08 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है कॉस्ट

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्र सरकार के प्रगति (PRAGATI) पोर्टल के माध्यम से की जा रही है। वर्तमान में इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये रखी गई है। परियोजना के अंत तक इसकी कुल लागत बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। भारतीय रेलवे लागत में होने वाली इस बढ़ोतरी को बिना जापानी एजेंसी जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से अतिरिक्त कर्ज मांगे खुद ही वहन करेगी। गौरतलब है कि JICA ने इस प्रोजेक्ट के एक बड़े हिस्से के लिए फंडिंग दी है।

ग्राउंड पर कितना हुआ काम?

संसद में पेश आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक इस 508 किलोमीटर के कॉरिडोर पर काम काफी तेजी से चल रहा है। 209 किलोमीटर ट्रैक बेड बनकर तैयार हो चुका है और 190 किलोमीटर तक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन के मस्तूल तैयार किए जा चुके हैं। 452 किलोमीटर पियर्स का काम भी पूरा कर लिया गया है जबकि 356 किलोमीटर के हिस्से में गर्डर बिछाए जा चुके हैं। महाराष्ट्र में घनसोली से शीलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी अंडर-सी टनल का काम चल रहा है। इसमें से 4.8 किलोमीटर टनलिंग का काम पूरा हो चुका है।

सूरत से वापी के बीच के 97 किमी के हिस्से पर नदी पुलों के निर्माण सहित सभी सिविल काम पूरे हो चुके हैं और 86% ट्रैक बेड बिछा दिया गया है। इस पूरे कॉरिडोर का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा एलिवेटेड यानी खंभों पर बनाया जा रहा है जबकि बाकी का हिस्सा टनल, ब्रिज और स्टेशन एरिया का है।

किन 12 स्टेशनों से होकर गुजरेगी बुलेट ट्रेन?

यह हाई-स्पीड कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरता है। इस पूरे रूट पर कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं-

  • मुंबई
  • ठाणे
  • विरार
  • बोईसर
  • वापी
  • बिलिमोरा
  • सूरत
  • भरूच
  • वडोदरा
  • आनंद
  • अहमदाबाद
  • साबरमती

320 किमी/घंटे की रफ्तार, महज 1 घंटे 58 मिनट में सफर पूरा

पूरा प्रोजेक्ट चालू होने के बाद बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ेगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा के समय में भारी कमी आएगी। जानकारी के मुताबिक अगर बुलेट ट्रेन सिर्फ 4 प्रमुख इंटरमीडिएट स्टेशनों पर रुकती है तो मुंबई से अहमदाबाद की दूरी तय करने में 1 घंटा 58 मिनट का समय लगेगा। अगर ट्रेन सभी 12 स्टेशनों पर रुकते हुए चलती है तो इस सफर को पूरा करने में 2 घंटे 17 मिनट का समय लगेगा। ऐसा माना जा रहा है कि यह कॉरिडोर पश्चिम भारत के दो प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जोड़कर रेल यात्रा का रूप बदल देगा।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के पहले सेक्शन के लॉन्चिंग की टाइमलाइन सामने आई, जानिए कब दौड़ेगी देश की पहली Bullet Train

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला हिस्सा अगले साल शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन शुरू होगा। इसके बाद पूरे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को फेज के हिसाब से तरीके से चालू किया जाएगा। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा, “मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। अगले साल सूरत और बिलिमोरा के बीच इसका पहला सेक्शन शुरू किया जाएगा। इसके बाद बाकी हिस्सों को भी अलग-अलग चरणों में शुरू किया जाएगा।”

बुलेट ट्रेन के पहले सेक्शन के लॉन्चिंग की टाइमलाइन

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के बाकी हिस्सों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पहले वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, उसके बाद अहमदाबाद से ठाणे और आखिर में अहमदाबाद से मुंबई तक बुलेट ट्रेन सेवा शुरू की जाएगी। उनका कहना है कि अगले साल से परियोजना के अलग-अलग हिस्से एक-एक करके लोगों के लिए खोले जाएंगे। अश्विनी वैष्णव ने देशभर में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्य की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक 261 रेलवे स्टेशनों का काम पूरा हो चुका है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर काम ट्रेन सेवाएं जारी रखते हुए किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो।

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया के कई देशों में रेलवे स्टेशनों के पुनर्निर्माण के दौरान ट्रेन सेवाएं रोक दी जाती हैं, लेकिन भारत में ऐसा करना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि यहां ट्रेनों का संचालन जारी रखते हुए ही निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशन पर सभी प्लेटफॉर्म के ऊपर एक बड़ा एयर कॉनकोर्स (ऊपरी हॉल) बनाया जा रहा है। यह काम पूरी सावधानी के साथ किया जा रहा है ताकि यात्रियों की सुरक्षा और निर्माण की गुणवत्ता बनी रहे।

हैदराबाद को बनेगा बड़ा हब

हैदराबाद में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर हैदराबाद के विकास में बड़ी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद के लिए तीन हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की योजना दी है। इनमें पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई और हैदराबाद-बेंगलुरु बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शामिल हैं। रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से हैदराबाद हाई-स्पीड रेल का प्रमुख केंद्र बनेगा। साथ ही पूरे क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा और अलग-अलग शहरों की अर्थव्यवस्थाएं आपस में बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगी।

तेलंगाना में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार पर बात करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का राज्य को बड़ा लाभ मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कार्यक्रम के तहत 100 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को बढ़ावा दिया गया है, जिससे तेलंगाना को भी काफी फायदा हुआ है। अश्विनी वैष्णव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने तेलंगाना में रेलवे परियोजनाओं के लिए 5,400 करोड़ रुपये का बजट दिया है। उनके अनुसार, इस निवेश से राज्य में रेलवे के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

Mumbai Bullet Train: बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में बड़ी कामयाबी! भारत की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीन ने मुंबई में शुरू की अंडरग्राउंड टनलिंग

भारत के पहले मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए इस प्रोजेक्ट के तहत मुंबई में अंडरग्राउंड टनलिंग (भूमिगत सुरंग बनाने) का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। एचटी के मुताबिक 5 जुलाई को देश की सबसे बड़ी रेलवे टनल बोरिंग मशीन (TBM) ने विक्रोली से बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन की तरफ जमीन को चीरते हुए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए एक औपचारिक लॉन्च कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

इसकी अध्यक्षता केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव करने वाले थे। मुंबई में मूसलाधार बारिश के चलते जारी किए गए ‘रेड अलर्ट’ के कारण इस औपचारिक कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा लेकिन मशीन ने तय समय पर सुरंग बनाने का अपना काम शुरू कर दिया।

13.6 मीटर व्यास वाली देश की सबसे बड़ी रेलवे TBM

सुरंग बनाने के इस बेहद जटिल काम में 13.6 मीटर व्यास वाली एक विशाल मिक्सशील्ड टीबीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भारत में किसी भी रेलवे टनलिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी टनल बोरिंग मशीनों में से एक है। इस महाकाय मशीन का कुल वजन लगभग 3100 टन है और इसकी लंबाई 96 मीटर है। यह मशीन एक 6 किलोमीटर लंबी सिंगल-ट्यूब सुरंग खोदेगी। इसके भीतर से ही बुलेट ट्रेन की अप और डाउन दोनों लाइनें गुजरेंगी। यह टनल बुलेट ट्रेन रूट के मुंबई में बनाए कुल 21 किलोमीटर लंबे अंडरग्राउंड सेक्शन का हिस्सा है।

जमीन से 56 मीटर नीचे से हुआ लॉन्च, दो तकनीकों का हो रहा इस्तेमाल

रेलवे अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड में से 16 किलोमीटर का हिस्सा घनसोली के सांवली से लेकर बीकेसी) के बीच का है। इसे टनल बोरिंग मशीनों के जरिए खोदा जा रहा है। बाकी 5 किलोमीटर का हिस्सा न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड तकनीक के जरिए पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। इस नई टीबीएम को विक्रोली में जमीन की सतह से 56 मीटर नीचे बनाए गए एक विशाल शाफ्ट से लॉन्च किया गया है। इसने अब बीकेसी की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया है।

क्या है मिक्सशील्ड तकनीक और इसकी खासियतें?

इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल की जा रही मिक्सशील्ड टेक्नोलॉजी को विशेष रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक मिश्रित मिट्टी की स्थिति और उन इलाकों में जहां भूजल का दबाव बहुत अधिक होता है, वहां पूरी सुरक्षा के साथ काम करने में सक्षम है। टनलिंग के दौरान जमीन धंसने या जमीन के ऊपर होने वाली हलचल और व्यवधान को यह तकनीक बिल्कुल न्यूनतम रखती है। इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक तरफ सुरंग की खुदाई करती जाती है और साथ ही साथ प्रीकास्ट कंक्रीट लाइनिंग सेगमेंट्स को अपनी जगह पर फिट भी करती जाती है। इससे निर्माण की गति काफी तेज हो जाती है और सुरक्षा के मानक भी बेहतर होते हैं।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और महापे में बना कास्टिंग यार्ड

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने इस पूरे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए विक्रोली में 56 मीटर गहरा लॉन्च शाफ्ट तैयार किया है। इसके साथ ही वहां स्लरी और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, एक समर्पित पावर सबस्टेशन और अन्य आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है। सुरंग की खुदाई के दौरान आसपास की इमारतों को कोई नुकसान न पहुंचे, इसके लिए बेहद संवेदनशील निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। इनमें सेटलमेंट मार्कर्स, टिल्ट मीटर्स, सीस्मोग्राफ और 3D मॉनिटरिंग टारगेट शामिल हैं, जो पल-पल की रिपोर्ट दर्ज कर रहे हैं। सुरंग की दीवारों को मजबूती देने के लिए जरूरी करीब 77000 प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट्स का निर्माण करने के लिए महापे में 11.17 हेक्टेयर का एक विशाल कास्टिंग यार्ड स्थापित किया गया है।

क्या है इस टनलिंग प्रोजेक्ट की डेडलाइन?

रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई समयसीमा के अनुसार, इस अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। विक्रोली से बीकेसी साल 2027 की शुरुआत तक और विक्रोली से घनसोली को मार्च 2028 तक पूरा किया जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट के लिए शुरू हुई धड़ाधड़ बसें! सुबह 6 बजे से ही पहली सर्विस, देखें 3 बड़े रूट-स्टॉपेज संग टाइमिंग और लास्ट डिपार्चर

Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) आने-जाने वाले यात्रियों को जल्द ही बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी मिलेगी। दरअसल, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) एयरपोर्ट को नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के इलाकों से जोड़ने के लिए नियमित बस सेवा शुरू करने जा रहा है, जैसा कि News18 ने रिपोर्ट किया है।

इन नई सेवाओं का मकसद एयरपोर्ट तक पहुंच आसान बनाना है, जिसके तहत दिन भर तय समय पर बसें चलेंगी।

देखें टाइमिंग और रूट

UPSRTC के मुताबिक, बस सेवाएं सुबह 6 बजे शुरू होंगी, जबकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आखिरी बस रात 11:30 बजे रवाना होगी। रूट के आधार पर बसें हर 15 से 30 मिनट में चलेंगी। नोएडा से एयरपोर्ट के लिए आखिरी बस रात 8 बजे के लिए तय की गई है।

News 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट प्लान में बदलाव के तहत UPSRTC ने परी चौक से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक चलने वाली दो मौजूदा डबल-डेकर बसों का रूट बढ़ा दिया है। इस बढ़े हुए नेटवर्क में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के इलाके भी शामिल होंगे, जैसे इकोटेक-16, गौर सिटी, ग्रेटर नोएडा यूनिवर्सिटी (GNU) और खैरपुर। इससे एयरपोर्ट आने-जाने वाले लोगों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

नई व्यवस्था के तहत, नोएडा से बसें सेक्टर 37 (बोटेनिकल गार्डन) से चलेंगी और परी चौक व यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए एयरपोर्ट तक जाएंगी। ग्रेटर नोएडा से चलने वाली बसें इकोटेक-16, गौर सिटी, चार मूर्ति, सूरजपुर और परी चौक से होते हुए एयरपोर्ट पहुंचेंगी।

मोहन नगर से यात्रा करने वाले यात्री लालकुआं, चार मूर्ति, सूरजपुर, परी चौक, दनकौर और रबूपुरा होते हुए एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) इलाके के मुख्य सेक्टरों और ग्रेटर नोएडा यूनिवर्सिटी से भी सीधी बस सुविधा मिलेगी।

अधिकारियों ने दी जानकारी

अधिकारियों ने बताया कि बस नेटवर्क का विस्तार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की बड़ी कोशिशों का हिस्सा है, क्योंकि यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। नई UPSRTC सेवाओं के अलावा, इस इलाके में पहले से ही 100 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने टर्मिनल तक हर 15 मिनट में चलने वाली एक खास शटल सर्विस भी शुरू की है।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने रूट और बस का समय देख लें ताकि यात्रा में कोई परेशानी न हो।

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आप जो फेमस Red Bull, Sting पीते हैं उनके समेत 6 बड़े ब्रांड्स को मिल गया FSSAI का नोटिस, ऐसा क्या कर दिया?

FSSAI: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने छह बेवरेज (पेय) ब्रांड्स को “एनर्जी ड्रिंक” शब्द के इस्तेमाल और कथित तौर पर गुमराह करने वाले दावों को लेकर नोटिस जारी किए हैं। फूड रेगुलेटर के मुताबिक, “एनर्जी ड्रिंक” या इसी तरह के बेचे जाने वाले दूसरे प्रोडक्ट्स के लिए अभी तक कोई मानक तय नहीं किया गया है।

एक इंस्टाग्राम पोस्ट के अनुसार, “FSSAI ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ होने का दावा करने वाले कई बेवरेज ब्रांड्स को गलत ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले दावों के लिए नोटिस जारी किए हैं।”

जिन ब्रांड्स को नोटिस मिले

ये नोटिस Red Bull, Sting, Monster, Campa Energy, Hell Energy, Adrenaline Rush और Gold Boost  को जारी किए गए हैं। आरोप है कि कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की ब्रांडिंग और दावों के जरिए ग्राहकों को गुमराह कर रही हैं। हालांकि, इन कंपनियों की तरफ से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

नोटिस क्यों जारी किए गए?

FSSAI का कहना है कि भारत में अब तक Energy Drink नाम की कोई आधिकारिक फूड कैटेगरी या उसका कोई अलग मानक तय नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि किसी प्रोडक्ट को सिर्फ Energy Drink कहकर बेचना या उसी नाम से प्रचार करना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। रेगुलेटर का कहना है कि फूड कैटेगरी सिस्टम केवल प्रशासनिक वर्गीकरण के लिए है। इसे प्रोडक्ट का नाम या मार्केटिंग टर्म नहीं बनाया जा सकता।

FSSAI ने प्रोडक्ट के दावों के बारे में क्या कहा?

FSSAI ने कहा है कि किसी भी खाने-पीने के प्रोडक्ट्स पर ऐसे दावे नहीं किए जा सकते जो शरीर या दवा से जुड़े हों (functional या therapeutic claims)। रेगुलेटर के अनुसार, “शरीर और दिमाग को मजबूत करना”, “ध्यान बढ़ाना”, “एनर्जी लेवल बढ़ाना”, “कमजोरी दूर करना” जैसे दावे या ऐसे ही अन्य दावे खाद्य उत्पादों पर करना नियमों के खिलाफ है। ये दावे FSS Act 2006 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार मान्य नहीं हैं।

हाल की कार्रवाई

FSSAI ने हाल के महीनों में गलत ब्रांडिंग और गुमराह करने वाले दावों को लेकर फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। रेगुलेटर ने ग्राहकों से मिली शिकायतों के आधार पर भी कार्रवाई की है और फूड सेफ्टी व रेगुलेटरी नियमों के पालन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी कार्रवाई की जानकारी भी शेयर की है।

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Bullet Train: बुलेट ट्रेन चलाने में भारत का पूरा सहयोग करेगा जापान, प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दिया भरोसा

Bullet Train: जापान ने एक बार फिर भारत के मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन देने का भरोसा दिया है। जापान ने कहा कि वह 2027 तक प्रोजेक्ट के प्राथमिक हिस्सों पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने में पूरा सहयोग करेगा।

यह घोषणा भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने दोनों देशों के बीच चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की।

2027 के लक्ष्य को मिला जापान का समर्थन

संयुक्त बयान के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार भारत के 2027 तक मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के प्राथमिक हिस्से पर कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने के लक्ष्य को पूरी तरह समझती है। इसे पूरा करने के लिए जापान हर जरूरी सहयोग देता रहेगा।

E10 Shinkansen ट्रेन भी चलेगी

दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि इस कॉरिडोर पर अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen बुलेट ट्रेनें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारत-जापान के बीच लंबे समय से चल रही हाई-स्पीड रेल साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।

7,000 किमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के अलावा भारत और जापान ने भविष्य की दूसरी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर भी साथ काम करने पर सहमति जताई।

भारत देशभर में करीब 7,000 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क डेवलप करना चाहता है। प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों को इन नए कॉरिडोर के विकास में भाग लेने का न्योता भी दिया। जापान ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया।

निजी निवेश और नई मोबिलिटी पर फोकस

दोनों देशों ने हाई-स्पीड रेल और अन्य आधुनिक परिवहन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी सहमति जताई। मकसद जापान की एडवांस ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी को भारत के कुशल ह्यूमन रिसोर्स और बड़े बाजार के साथ जोड़ना है।

इसके अलावा नेक्स्ट-जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप पर एक Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर का भी स्वागत किया गया। इसका मकसद भविष्य की मोबिलिटी टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाना है।

मेट्रो और दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी बढ़ेगा सहयोग

संयुक्त बयान में शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग और स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा दोनों प्रधानमंत्रियों ने जापान की मदद से चल रहे चार बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति का भी स्वागत किया।

इनमें मुंबई मेट्रो लाइन-11, बेंगलुरु मेट्रो फेज-3, महाराष्ट्र में स्वास्थ्य और शिक्षा परियोजनाएं और पंजाब में टिकाऊ बागवानी परियोजना शामिल हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़े ऐसे प्रोजेक्ट्स में आगे भी सहयोग जारी रखेंगे।

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