24-कोच वंदे भारत स्लीपर का डिजाइन फाइनल होने की डेट आई सामने, जानिए कब पटरी पर दौड़ेगा स्लीपर वर्जन

Vande Bharat Sleeper Train: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। भारत की वंदे भारत ट्रेन को तैयार करने वाले सुधांशु मणि ने भी इस पहल का स्वागत किया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने चार साल से ज्यादा की देरी के बाद इस ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक फाइनल करने का लक्ष्य रखा है।

चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने चार साल से भी पहले 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के लिए तकनीकी जानकारी जारी की थी। अब ICF ने बताया है कि ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक फाइनल कर लिया जाएगा। इसका पहला प्रोटोटाइप मई या जून 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।

फिलहाल, 16 कोच वाली दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चल रही हैं। इन ट्रेनों को यात्रियों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मिलेंगी यात्रियों की सुविधा वाली कई खूबियां

बता दें कि यह एक आधुनिक ट्रेन है, जिसमें यात्रियों की सुविधा के लिए कई खूबियां हैं। इनमें सेमी-हाई स्पीड, बेहतर कुशनिंग वाली आरामदायक बर्थ, आसानी से आने-जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टिब्यूल, बेहतरीन सस्पेंशन और कम शोर के साथ आरामदायक सफर, और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए डिसइंफेक्टेंट तकनीक शामिल हैं।

मणि ने कहा, “ICF का नवंबर 2026 तक 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का डिजाइन फाइनल करने और 2027 के मध्य तक इसका प्रोटोटाइप तैयार करने का प्लान एक स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है। देर से ही सही, लेकिन यह समय-सीमा बहुत अहम है।”

उन्होंने कहा, “इस समय-सीमा का पालन करने से ICF को अपनी मुख्य डिजाइन और निर्माण क्षमताओं का पूरा उपयोग करने, अधिकतम क्षमता वाली ट्रेनों के जरिए सीमित ट्रैक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और लोगों को रात के सफर का वह प्रीमियम अनुभव देने में मदद मिलेगी, जिसकी वे उम्मीद करते हैं।”

2018 में ही महसूस होने लगी थी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जरूरत: मणि

मणि ने कहा कि 2018 में शुरुआत से ही यह स्पष्ट था कि आगे चलकर वंदे भारत प्लेटफॉर्म के लिए एक स्लीपर वेरिएंट की जरूरत पड़ेगी।

उन्होंने कहा, “दिन के समय चलने वाली चेयर-कार सेवाओं का बाजार एक स्तर पर आकर रुकने ही वाला था, जिससे रात भर चलने वाली ट्रेनें एक जरूरी जरूरत बन गईं। आज की स्थिति से यह बात साबित भी होती है। वंदे भारत की दिन की सेवाओं में से 30 प्रतिशत तक में यात्रियों की संख्या काफी कम रहती है।” उन्होंने कोच बनाने के क्षेत्र में ICF की ऐतिहासिक विरासत की भी तारीफ की।

देरी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में ICF ने 2019 के आखिर तक एक स्लीपर प्रोटोटाइप तैयार करने की योजना बनाई थी, लेकिन वंदे भारत प्रोजेक्ट में लगभग चार साल के ठहराव के कारण यह समय-सीमा पटरी से उतर गई।

वंदे भारत ट्रेन के कोच घटाकर 8 करने पड़े, देरी पर मणि ने उठाए सवाल

मणि ने तर्क दिया कि देरी के कारण एक ऐसा समझौता करना पड़ा जो आदर्श नहीं था: कुछ रूटों पर 16 कोच वाली सामान्य चेयर-कार ट्रेनों को घटाकर 8 कोच वाली ट्रेन सेट कर दिए गए। ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि सरकार द्वारा बताए गए उम्मीद भरे आंकड़ों को पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा, “चूंकि भारतीय रेलवे के रूटों पर बहुत अधिक भीड़ रहती है और ये काफी महंगे संसाधन हैं, इसलिए लंबी ट्रेनों के जरिए लाइन की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना एक अहम प्राथमिकता होनी चाहिए।”

उन्होंने बताया कि विकास की गति बढ़ाने के लिए, भारतीय रेलवे ने निजी क्षेत्र का रुख किया। इसके तहत ‘किनेट रेलवे सॉल्यूशंस’ (रेल विकास निगम लिमिटेड और रूस की TMH का एक संयुक्त उद्यम) को 120 स्लीपर ट्रेनों का ठेका दिया गया, और ‘टाटागढ़’ तथा ‘भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड’ (BHEL) के एक समूह को 80 और रेक (ट्रेन सेट) बनाने का ठेका मिला। लेकिन, अनुबंध और डिजाइन से जुड़ी मंजूरियों में देरी के कारण इन निजी परियोजनाओं में विलंब हुआ। ऐसे में, काम को जल्द शुरू करने के लिए रेलवे ने 10 स्लीपर ट्रेन सेट का एक शुरुआती ऑर्डर दिया। दिलचस्प बात यह है कि यह ऑर्डर ICF को नहीं, बल्कि ‘भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड’ (BEML) को दिया गया।

मणि ने कहा, “देश अब ‘ओवरनाइट’ (रात भर चलने वाली) वंदे भारत सेवाओं के एक नए युग की शुरुआत देख रहा है। BEML द्वारा बनाई गई एक ट्रेन ने कमर्शियल स्लीपर सेवा की सफल शुरुआत की है, जो हावड़ा और कामाख्या के बीच एक महत्वपूर्ण लंबी दूरी के रूट पर चल रही है।”

उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में, ICF की योजना – जिसके तहत नवंबर 2026 तक डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाना है और 2027 के मध्य तक 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया जाना है – एक स्वागत योग्य और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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Imran Khan: एक्टर इमरान खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस, CJP प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे आमिर खान के भांजे

Actor Imran Khan: मुंबई में एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के बाद अमेरिकी नागरिक और बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान इमिग्रेशन जांच के दायरे में आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता किरीट सोमैया ने मशहूर अभिनेता आमिर खान के भांजे इमरान की कथित विदेशी नागरिकता और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। खबरों के अनुसार, इमरान खान से कथित तौर पर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। 10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें इमरान खान भी शामिल थे।

वहां प्रदर्शनकारी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थन में इकट्ठा हुए थे। इस प्रदर्शन में मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी। अभिनेता को उसी शाम रिहा कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अब मुंबई पुलिस द्वारा एक नोटिस जारी किया गया है। एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “मुंबई पुलिस ने आव्रजन और विदेशी नागरिक अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में अमेरिकी नागरिक एवं अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए कहा है।”

इमरान खान को इमिग्रेशन से जुड़ी कार्रवाई का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक, इमरान खान को मुंबई पुलिस ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को एक नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है। मुंबई पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक न होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण इमरान खान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट (प्रवासन अधिनियम) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने आरोप लगाया है कि खान एक अमेरिकी नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास OCI कार्ड है। इसलिए उन्होंने राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लेकर नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने अभिनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों से उन्हें हिरासत में लेने और देश से बाहर भेजने (निर्वासन) पर विचार करने को कहा है।

इमरान खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग

इमरान खान उन प्रदर्शनकारियों में शामिल थे जिन्हें पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से हिरासत में लिया था। मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त मनोज कुमार शर्मा को लिखे पत्र में बीजेपी नेता ने सवाल उठाया कि क्या खान को इस आंदोलन में शामिल होने की कानूनन अनुमति थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में BJP नेता ने इमरान खान को तुरंत देश से बाहर निकालने की मांग की।

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हिरासत में लिए जाने के बाद मुंबई पुलिस के वैन से अभिनेता ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ऐसा लगता है कि मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।” बाद में एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें खान पुलिस अधिकारियों से यह पूछते दिखे, “मैंने क्या किया है? मेरे साथ धक्का-मुक्की क्यों की जा रही है?”

दिवाली-छठ पर घर जाने वालों को रेलवे का तोहफा, दिल्ली-पटना के बीच दौड़ेगी वंदे भारत स्पेशल, जानें टाइम टेबल और रूट

Delhi-Patna Vande Bharat Train: दिवाली और छठ पूजा के दौरान बिहार जाने वाले यात्रियों के लिए सफर करना अब थोड़ा आसान होने वाला है। ऐसा इसिलए क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश जाने वाली ट्रेनों में ज्यादा भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए भारतीय रेलवे ने नई दिल्ली और पटना के बीच 16 कोच वाली वंदे भारत फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन चलाने का ऐलान किया है।

रेलवे के मुताबिक, यह स्पेशल ट्रेन 16 अक्टूबर 2026 से चलनी शुरू होगी, और दोनों दिशाओं में 18-18 फेरे लगाएगी। बता दें कि यह ट्रेन अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन और बक्सर होते हुए चलेगी। वहीं, नई दिल्ली से पटना तक का सफर यह ट्रेन सिर्फ 12 घंटे 55 मिनट में पूरा करेगी।

इस ट्रेन में एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 4,695 रुपये और एसी चेयर कार का किराया 2,615 रुपये तय किया गया है।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्रा के मुताबिक, त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह ट्रेन अक्टूबर और नवंबर में तय तारीखों पर चलाई जाएगी।

ट्रेन चलने की तारीखें

ट्रेन नंबर 02252: नई दिल्ली-पटना वंदे भारत फेस्टिवल स्पेशल

यह ट्रेन पहली बार 16 अक्टूबर 2026 को चलेगी। इसके बाद 21 अक्टूबर से 25 नवंबर 2026 तक हर सोमवार, बुधवार और शनिवार को इसका संचालन किया जाएगा।

ट्रेन नंबर 02251: पटना-नई दिल्ली वंदे भारत फेस्टिवल स्पेशल

वापसी में यह ट्रेन 17 और 19 अक्टूबर 2026 को चलेगी। इसके बाद 22 अक्टूबर से 26 नवंबर 2026 तक यह हर मंगलवार, गुरुवार और रविवार को चलेगी।

टाइम टेबल और रूट

ट्रेन नंबर 02252: नई दिल्ली-पटना

यह ट्रेन सुबह 8:35 बजे नई दिल्ली से रवाना होगी और रात 9:30 बजे पटना जंक्शन पहुंचेगी।

ट्रेन के स्टॉपेज और पहुंचने का समय

स्टेशनपहुंचने का समय
अलीगढ़सुबह 10:21 बजे
कानपुर सेंट्रलदोपहर 1:30 बजे
प्रयागराजदोपहर 3:45 बजे
पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शनशाम 6:00 बजे
बक्सरशाम 7:26 बजे
आरारात 8:10 बजे
पटना जंक्शनरात 9:30 बजे

ट्रेन नंबर 02251: पटना-नई दिल्ली वंदे भारत फेस्टिवल स्पेशल

यह ट्रेन पटना जंक्शन से सुबह 10:00 बजे रवाना होगी और रात 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी।

टाइम टेबल और रूट

स्टेशनपहुंचने का समय
आरासुबह 10:38 बजे
बक्सरसुबह 11:25 बजे
पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शनदोपहर 1:10 बजे
प्रयागराजदोपहर 3:35 बजे
कानपुर सेंट्रलशाम 5:50 बजे
अलीगढ़रात 8:53 बजे
नई दिल्लीरात 11:30 बजे

त्योहारों की भीड़ के दौरान तेज सफर

वंदे भारत फेस्टिवल स्पेशल दिल्ली-पटना का सफर लगभग 12 घंटे 55 मिनट में पूरा करेगी। इससे यात्रियों को साल के सबसे व्यस्त समय में सफर करने का एक तेज और आरामदायक विकल्प मिलेगा।

बता दें कि दीवाली और छठ के दौरान रेगुलर ट्रेनों में भारी भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को देखते हुए, 16 कोच वाली इस हाई-स्पीड सर्विस के शुरू होने से हजारों और यात्रियों को कन्फर्म सीट मिलने की बेहतर उम्मीद है।

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रेलवे की बड़ी तैयारी! जल्द दौड़ेगी 24 कोच वाली लंबी ‘वंदे भारत’ स्लीपर ट्रेन, जानें क्या होगा खास और कब तक होगी शुरू

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे अपनी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत 24 कोच वाली नई ट्रेन बनाई जाएगी, जिसे लंबी दूरी के सफर और रात में यात्रा करने वाले यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इस नई ट्रेन को जून 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

बता दें कि नई ट्रेन में पहले के मुकाबले ज्यादा यात्री सफर कर सकेंगे। इसमें पेंट्री कार यानी खाना तैयार करने और रखने की सुविधा, ज्यादा टॉयलेट और बेहतर इंटीरियर भी दिया जाएगा।

इस नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को तैयार करने की जिम्मेदारी चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) को दी गई है। फैक्ट्री को ऐसी कुल 50 ट्रेनें बनानी हैं। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन का डिजाइन अंतिम चरण में है और इसे अगले एक महीने के अंदर पूरा किए जाने की उम्मीद है।

रिपोर्ट के अनुसार, नई ट्रेन मौजूदा 16-कोच वाले स्लीपर डिजाइन पर आधारित होगी, जिसमें अतिरिक्त कोच और ट्रेन के अंदर मिलने वाली सुविधाओं के लिए कुछ बदलाव किए जाएंगे। ICF ने पहले कहा है कि 24-कोच वाला वर्जन भारत में बनने वाली सबसे लंबी स्लीपर ट्रेन-सेट्स में से एक होगा।

भारतीय रेलवे की 200 से ज्यादा वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें चलाने की तैयारी

भारतीय रेलवे आने वाले सालों में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का बड़ा नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत 200 से ज्यादा स्लीपर ट्रेनें शुरू किए जाने की उम्मीद है। 24 कोच वाली नई ट्रेन भी इसी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद लंबी दूरी का सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और एक ट्रेन में ज्यादा यात्रियों के सफर की व्यवस्था करना है।

इस योजना के तहत फिलहाल तीन बड़ी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। BEML, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) की मदद से 10 स्लीपर ट्रेनें बना रही है। वहीं, भारत और रूस की संयुक्त कंपनी Kinet को 120 ट्रेनें बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, Titagarh और BHEL का कंसोर्टियम 80 ट्रेनें तैयार करेगा। इन परियोजनाओं से अलग, ICF खुद भी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का एक नया वर्जन विकसित कर रही है।

नई 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में पेंट्री कार भी होगी। रिपोर्ट में बताए गए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के दूसरे डिजाइन में यह सुविधा नहीं है। पेंट्री कार की मदद से ट्रेन में खाने को गर्म करने और यात्रियों को परोसने की व्यवस्था की जा सकेगी।

इसके अलावा, ICF ट्रेन के इंटीरियर को बेहतर बनाने पर भी विचार कर रही है। हालांकि, डिजाइन को अंतिम रूप देने का काम अभी जारी है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: कोच और बनावट

वंदे भारत स्लीपर के प्रोटोटाइप में 16 पैसेंजर कोच होंगे, जिनमें 11 AC 3-टियर कोच, चार AC 2-टियर कोच और एक AC फर्स्ट क्लास कोच शामिल हैं।

24-कोच वाले प्रस्तावित वर्जन से यात्रियों की क्षमता बढ़ेगी। बड़ी ट्रेन के हिसाब से टॉयलेट की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है।

स्पीड और यात्रियों के आराम का रखा गया ध्यान

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 160 kmph तक की स्पीड से चलने के लिए डिजाइन किया गया है, और इसकी टेस्टिंग स्पीड 180 kmph है। हालांकि, अभी भारतीय रेलवे का ज्यादातर नेटवर्क इतनी स्पीड पर ट्रेनों को चलाने के लिए तैयार नहीं है।

यूरोपीय ट्रेनों से प्रेरणा लेते हुए, स्लीपर वर्जन में आरामदायक बर्थ होंगी ताकि रात भर के सफर में आराम मिल सके। ऊपर की बर्थ तक पहुंचने के इंतजामों को भी फिर से डिजाइन किया गया है ताकि उन पर चढ़ना आसान हो।

अन्य सुविधाओं में हर यात्री के लिए अलग रीडिंग लाइट, चार्जिंग पॉइंट और रिफ्रेशमेंट टेबल शामिल हैं। इसके अंदरूनी हिस्से में ग्लास-फाइबर-रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (GFRP) पैनल लगाए जाएंगे।

आधुनिक टॉयलेट और ट्रेन के अंदर की सुविधाएं

इस ट्रेन में हवाई जहाजों की तरह आधुनिक बायो-वैक्यूम टॉयलेट होंगे। दिव्यांग यात्रियों के लिए बने टॉयलेट में बच्चों की देखभाल के लिए एक स्टेशन भी होगा।

AC फर्स्ट क्लास कोच में गर्म पानी के साथ शॉवर की सुविधा होगी। रात के समय खास लाइटिंग, विजुअल डिस्प्ले वाला इंटीग्रेटेड अनाउंसमेंट सिस्टम, CCTV कैमरे और मॉड्यूलर पैंट्री यूनिट भी ट्रेन के अंदर दी जाने वाली सुविधाओं का हिस्सा हैं।

वहीं, 24-कोच वाले वर्जन में प्रस्तावित पैंट्री कार से यात्रा के दौरान खाना गर्म करके परोसा जा सकेगा, जिससे ट्रेन में कैटरिंग की सुविधा भी मिल जाएगी।

सुरक्षा सिस्टम और एनर्जी एफिशिएंसी

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भारत में बना ‘कवच’ एंटी-कोलिजन सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम ट्रेनों के बीच टक्कर होने के खतरे को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, ट्रेन में रीजनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे ट्रेन के ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा को दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे बिजली की बचत करने में मदद मिलेगी।

ट्रेन के कोच के बीच अपने आप खुलने और बंद होने वाले दरवाजे लगाए जाएंगे। वहीं, कोच के बीच बंद रास्ते (सील्ड गैंगवे) बनाए जाएंगे, ताकि बाहर की धूल कम अंदर आए और ट्रेन के भीतर तापमान बनाए रखने में मदद मिले।

ट्रेन में सेंट्रलाइज्ड कोच मॉनिटरिंग सिस्टम भी होगा, जिससे कोच की गतिविधियों और जरूरी सिस्टम पर नजर रखी जा सकेगी। किसी आपात स्थिति में यात्री इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए ट्रेन के ड्राइवर से संपर्क कर सकेंगे। इसके अलावा, तय स्टेशनों पर ट्रेन के दरवाजे अपने आप खुलने की व्यवस्था भी होगी।

24 कोच वाली नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के जरिए भारतीय रेलवे यात्रियों को ज्यादा जगह और बेहतर सुविधाएं देने की तैयारी कर रहा है। यह योजना देश में वंदे भारत ट्रेनों के नेटवर्क को बढ़ाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

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Vadodara Bullet Train Update: देश के सबसे बिजी रेल रूट पर सबसे मुश्किल काम पूरा, 8.3 KM के स्ट्रेच में लगी 14 विशाल बीम

वडोदरा। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन परियोजना ने वडोदरा में अपनी सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक को पार कर लिया है। दिल्ली-मुंबई राजधानी मेन लाइन के ऊपर सभी 14 पोर्टल बीम का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।

यह सिर्फ कंस्ट्रक्शन का एक पड़ाव नहीं है, बल्कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को वडोदरा के मौजूदा रेलवे नेटवर्क से इंटीग्रेट करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह काम देश के सबसे व्यस्त रेलवे रूट पर बिना ट्रेनों की आवाजाही को बाधित किए किया गया है।

क्यों अहम है वडोदरा का ये 8.3 KM का हिस्सा?

वडोदरा का यह पूरा स्ट्रेच करीब 8.3 किलोमीटर लंबा है और यह घनी आबादी वाले शहरी और रेलवे इलाके से होकर गुजरता है। यहां बुलेट ट्रेन का रूट भारतीय रेलवे की पांच लाइनों को क्रॉस करता है, जिसमें दो मेन लाइनें शामिल हैं।

सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बुलेट ट्रेन का एलाइनमेंट दिल्ली-मुंबई राजधानी मेन लाइन को तिरछा यानी डायगोनली पार करता है। ऐसे में जरूरी क्लीयरेंस बनाए रखने और मौजूदा रेल सिस्टम के साथ सुरक्षित कनेक्टिविटी के लिए विशेष डिजाइन वाले पोर्टल स्ट्रक्चर की जरूरत थी।

14 पोर्टल बीम कहां लगी ?

NHSRCL के मुताबिक, इन 14 पोर्टल बीम में से 10 बीम वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन और विश्वामित्री रेलवे स्टेशन के बीच सूरत की तरफ लगाए गए हैं। वहीं, 4 बीम वडोदरा रेलवे स्टेशन और छायापुरी रेलवे स्टेशन के बीच अहमदाबाद की तरफ हैं।

ये पोर्टल बीम एक मजबूत स्ट्रक्चरल फ्रेम का काम करेंगे, जिसके ऊपर बुलेट ट्रेन वायाडक्ट का सुपरस्ट्रक्चर बनाया जाएगा।

अब आगे क्या होगा? 

इन बीम के पूरा होने के साथ ही अब इस सेक्शन में वायाडक्ट के इंटीग्रेशन को गति मिलेगी।

– राजधानी मेन लाइन क्रॉसिंग वाले हिस्से पर इन 14 बीम के ऊपर लगभग 40 मीटर लंबे कम्पोजिट गर्डर लगाए जाएंगे।

– बाकी पोर्टल बीम वाली लोकेशंस पर स्पैन-बाय-स्पैन लॉन्चिंग तकनीक से काम आगे बढ़ेगा।

1500 टन वजन, मौके पर ही हुई ढलाई

इन बीम की इंजीनियरिंग भी बेहद खास है। हर पोर्टल बीम का वजन लगभग 1,500 टन है। जगह कम होने और चालू रेलवे लाइनों के बीच काम करने की मजबूरी के कारण इन्हें ‘कास्ट-इन-सीटू’ यानी मौके पर ही ढलाई करके बनाया गया है। पारंपरिक प्रीकास्ट लॉन्चिंग मेथड यहां संभव नहीं था।

हर बीम की लंबाई करीब 37 मीटर, चौड़ाई 4 मीटर और ऊंचाई 4 मीटर है। एक बीम को बनाने में लगभग 590 क्यूबिक मीटर कंक्रीट लगता है, जबकि सिर्फ इसके अंदर लगने वाले स्टील के रीइन्फोर्समेंट केज का वजन ही 55 टन है।

इसे बनाने के लिए हाई-कैपेसिटी क्रेन, हाइड्रोलिक जैक, लंबे बूम वाले कंक्रीट पंप और सटीक सर्वे इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया गया। NHSRCL को इसके लिए भारतीय रेलवे के साथ मिलकर हर चरण की माइक्रो-प्लानिंग करनी पड़ी और कई बार रेलवे ब्लॉक भी लेना पड़ा।

Renault E-Space Concept revives MPV body style for iconic nameplate

Renault E-Space Concept revives MPV body style for iconic nameplate
Renault E-Space Concept revives MPV body style for iconic nameplate

Renault unveiled the E-Space concept at the 2026 Paris Motor Show, hinting at a potential electric MPV comeback for the iconic nameplate. Explicitly pitched as a “real alternative to SUVs and saloons”, the E-Space concept goes back to Renault’s ‘voitures à vivre’ philosophy, which puts the human experience, comfort, and everyday lifestyle at the centre of vehicle design.  

Introduced in 1984, the Renault Espace was Europe’s first MPV and retained this body style till its fourth generation. In 2023, it was transformed into a stretched version of the Austral SUV.

Renault E-Space Concept exterior details

Retro-modern MPV concept has some elements that link it to the previous Espace models

The Renault E-Space concept has an overall clean design, which Renault’s brand design director Alexandre Malval says is “stripped of anything that might distract the eye.”

At the front, it gets U-shaped LED lighting elements on the blanked-off grille. The grille itself features an illuminated Renault logo that appears to float over it. One design cue that links to the original Espace is the heavily raked windscreen, which appears to extend to the bonnet like the French TGV train.

In profile, the E-Space Concept sports huge 24-inch alloy wheels and a large glasshouse that places “natural light at the heart of the concept”. It is 4.70 metres long, 2.02 metres wide and 1.67 metres tall, and Renault says its height- and length-to-width ratios are similar to the original Espace, albeit with shorter overhangs.

At the rear, the rear spoiler appears similar to the roof bars prominent on the 3rd- and 4th-generation Espace. The U-shaped lighting elements mimic the front LED design, and their placement on a gloss-black panel makes the windscreen appear larger.

Renault E-Space Concept interior details

3-row, 6-seater electric MPV aims to maximise interior space and comfort

The E-Space Concept revives Renault’s voitures à vivre philosophy. This approach focuses on the human experience and everyday family life rather than raw performance or luxury, all of which are clearly visible in the electric MPV concept’s cabin. It also brings back the vibrant pop interior colours Renault was known for back in the 70s. 

The concept features an ‘OpenR Panorama’ screen which spans the entire width of the dashboard. Renault says this display will be in the next-generation Rafale and Scenic models. While this expansive display is not touch-enabled, there is a smaller infotainment touchscreen suspended from the dashboard that can be used to control functions such as music and navigation.

The E-Space concept uses a yoke-style steering wheel and a steer-by-wire system, which frees up space for the driver’s footwell due to a missing mechanical steering column. The steering wheel features touch-sensitive buttons to interact with the OpenR display.

It gets 6 seats spread across three rows. There are folding tables mounted on the front-row seatbacks which second-row passengers can use if they do not spin around to face the third row. The second-row seats can also be folded flat to form a table for those in the third row.

With the E-Space concept, Renault appears to be not only considering a return to the model’s MPV roots, but also hopes to replicate the success of its electric revivals of iconic nameplates such as the Twingo, Renault 4 and Renault 5.

Tata, Stellantis formalise pact for Sierra-based Jeep SUV

Tata, Stellantis formalise pact for Sierra-based Jeep SUV
Tata Sierra-based Jeep SUV

Tata Motors Passenger Vehicles (TMPV) and Stellantis have signed a formal agreement to expand their partnership into product technology, platforms and vehicle architecture, formalising plans for a new Jeep SUV based on the Tata Sierra’s ARGOS platform, according to people in the know. Internally codenamed J1J, the Jeep SUV will get both internal combustion engine and electric versions and it is likely to use the same powertrains as the Sierra, say people in the know.

Sierra-based Jeep SUV: platform and production plans 

ARGOS stands for All-Terrain Ready, Omni-Energy and Geometry Scalable. It is TMPV’s modular, multi-energy vehicle architecture, designed to accommodate different vehicle dimensions and powertrain applications, which can open up more opportunities for Stellantis in the future.

While Tata Motors is producing the Sierra at its Sanand factory in Gujarat, production of the Jeep model is likely to take place at the Fiat India Automobiles Ltd (FIAL) joint venture facility in Ranjangaon, Maharashtra. The manufacturing operations are expected to be adapted for the programme over the next 18 months, added a person in the know.

The programme forms part of Stellantis’ wider ambition to sell 100,000 locally produced vehicles globally in 2028 across its Tata and Dongfeng partnership programmes combined, as outlined at its May 2026 Investor Day. The target covers several products. The company is likely to launch the first vehicle in the first half of 2028, say sources.

A dedicated team for the project is currently based out of Pune and will look at adapting the vehicle architecture, including a left-hand-drive version for overseas markets. A range-extender electric vehicle application is also being explored on the platform, although no production decision for the REEV has been finalised, according to people familiar with the engineering work.

An email sent to Tata Motors and Stellantis seeking comment remained unanswered at the time of publication.

The formal agreement builds on a relationship spanning more than two decades. Having collaborated on manufacturing, powertrains and the supply chain, the partners are now extending their cooperation into vehicle development.

Sierra-based Jeep SUV: Different body and cabin

Stellantis is benchmarking its own Jeep Renegade and Compass products for the J1J model development, according to company sources. Its eventual name and final production design are being firmed up.

This clearly indicates that the Jeep will have a different upper body, or top hat, exterior styling and cabin. Changes will extend to the seating package, interior features and equipment. These will distinguish it from the Sierra, while allowing the companies to share the underlying architecture and components.

Much of the platform is expected to be retained, with structural modifications and reinforcements, where required, to accommodate the Jeep body and meet crash and overseas regulatory requirements. Details of Jeep-specific suspension tuning and off-road hardware could not immediately be established. A 4×4 variant is also likely as Jeep’s brand guidelines insist on giving its customers a 4×4 option for all its models. Whilst the electric version of the Sierra already comes with 4×4, the ARGOS platform has been packaged and developed to accommodate a 4×4 ICE drive train as well. In fact, the Jeep partnership could accelerate the launch of a Sierra 4×4 to coincide with launch of the next-gen Jeep SUV. 

Tata Motors sister company Tata Technologies is understood to be involved in engineering execution at Stellantis. The work includes the Jeep-specific body and interior package, left-hand-drive adaptation and changes needed to meet overseas regulations.

According to people familiar with the programme, TMPV will retain ownership of the architecture and license it to Stellantis. Existing Sierra suppliers are expected to support Jeep where components can be shared, with separate sourcing and tooling for model-specific parts.

India development, global markets

Stellantis had disclosed its intention to develop a Tata-based Jeep at its May 21, 2026 Investor Day. Grégoire Olivier, its Asia Pacific chief operating officer, said Tata Motors would provide a competitive platform for a new Jeep vehicle to be developed and assembled in India through the existing joint venture for global markets. 

Olivier had also outlined exports to more than 50 countries across the wider portfolio, including the Dongfeng programmes, the Tata-based Jeep and the existing Citroën Smart Car programme in India. The markets allocated specifically to J1J have not been established.

For Stellantis, Tata’s architecture and supplier base offer a way to reduce development expenditure while adding a new Jeep product. For TMPV, the arrangement could generate licensing revenue and spread platform costs across additional vehicles. Common components could also bring suppliers higher volumes.

The alliance is a much-needed segue for the Jeep brand which has been in India for close to a decade but has been relegated to the fringes of the Indian market with a lack of product action. A licensed modular architecture with the potential for multiple powertrains, 4×4 capability and different wheelbases will open opportunities for more products in a quicker time interval. 

The programme would extend the Ranjangaon venture from manufacturing cooperation to producing a Jeep on Tata’s vehicle architecture. The left-hand-drive version would widen its overseas reach, giving the plant access to demand beyond India and other right-hand-drive markets.

With inputs from Ketan Thakkar 

Kinetic’s Electric Energy by Adil Jal Darukhanawala: Book review

Kinetic's Electric Energy by Adil Jal Darukhanawala: Book review
Kinetic's Electric Energy coffee table book on coffee table

Adil Jal Darukhanawala is a treasure trove of information when it comes to India’s automotive history, and his latest book, Kinetic’s Electric Energy, is a testament to that fact. In the last three decades of the 20th century, Kinetic Engineering was established as a force to be reckoned with under the stewardship of the Firodia family. Adil’s hugely detailed book traces the humble and truly frugal beginnings of the company all the way to today, when a resurgent Kinetic is looking to establish itself as a mainstay in the electric two-wheeler market.

This 170-page book starts off with a brief introduction to the Kinetic Honda DX while tracing the origins of the company with the spectacular moped success that was the Luna. The author goes into copious detail about how the company went to great lengths to ensure its moped transitioned India from pedal power to motorised mobility.

Not only that, chapters like ‘Lunacy on the Luna’ and ‘Beating the Queen – Kinetic Luna takes on the Indian Railways’ outline how Kinetic seized every opportunity to market the Luna. The former speaks about how the company sponsored five young college students – self-christened the Lunatix – on a 90-day, 18,000km journey traversing the length and breadth of the country back in 1982! The latter highlights how four humble Lunas and their gutsy as well as ingenious riders outran the Deccan Queen Mumbai-Pune express train in 1990. 

Kinetic didn’t just rely on its marketing but also its belief in the motto ‘Win on Sunday, sell on Monday’, which proved it was relevant not just in the high-end supersport world of motorcycling but could also ring true for the humble moped as it did in the chapter ‘Satish Apte and the World’s Fastest Luna.’ It documented how a fledgling team from Pune trounced the works team of the Hosur-based manufacturer through steely determination and some spectacularly out-of-the-box thinking. 

A chapter from Kinetic's Electric Energy

From there, we move on to how Kinetic partnered with Honda and opened the floodgates for gearless scooters in India with its novel DX scooter. Even though this partnership didn’t last very long, as detailed in ‘Kinetic & Honda – Unfulfilled Promise’, it cemented Kinetic’s position in the market as a maker of reliable and affordable products. 

This book also highlights the innovative spirit of the company’s leadership when you read about the stillborn but nonetheless revolutionary, hybrid scooter and compact city car concepts. At a time when India’s mobility market was cautiously walking, Kinetic took leaps of faith, and these have been beautifully articulated and illustrated in their respective chapters.

While Kinetic’s business was booming in the 20th century, its 21st century has been more muted between winding down ICE scooter production and the Motoroyale superbike business, which never managed to take off in a big way. However, as you flip through these pages, you’ll learn that with the reincarnated DX electric, Kinetic wants to recapture its magic of yesteryear and take the fight to the leaders’ doorsteps. 

If you are someone with even a passing interest in the automotive arena, especially the events that transpired before the turn of the century and shortly thereafter, Darukhanawala’s latest discourse should surely find a place on your mantelpiece.

छोटे भाई का अंतिम संस्कार मेरा इंतजार कर रहा है, ट्रेन लेट मत करना… पैसेंजर ने की भावुक अपील तो रेलवे ने दिया ये जवाब

अपने किसी करीबी को आखिरी विदाई देना जिंदगी के सबसे मुश्किल पलों में से एक होता है। ऐसे समय में अगर ट्रेन लेट हो जाए, तो परिवार तक समय पर पहुंचने की चिंता और बढ़ जाती है। कुछ ऐसी ही परेशानी का सामना एक यात्री को करना पड़ा, जिसने ट्रेन नंबर 15910, अवध असम एक्सप्रेस के लेट होने पर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय रेलवे से मदद मांगी। यात्री ने बताया कि उसके छोटे भाई की अंतिम यात्रा उसका इंतजार कर रही है और वह समय पर पहुंचना चाहता है। उसकी इस अपील ने रेलवे की समयबद्ध सेवा और यात्रियों की आपात परिस्थितियों से जुड़े सवाल को सामने ला दिया।

‘कृपया ट्रेन को और लेट न करें‘, यात्री ने लगाई गुहार

9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:20 बजे किए गए पोस्ट में यात्री ने भारतीय रेलवे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग करते हुए अपनी परेशानी साझा की। उसने अनुरोध किया कि अवध असम एक्सप्रेस को और देर न हो, क्योंकि उसे अपने छोटे भाई की अंतिम यात्रा में शामिल होना है।

यात्री की अपील का भाव साफ था वह किसी सामान्य काम के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई को आखिरी विदाई देने के लिए समय पर पहुंचना चाहता था। ऐसे संवेदनशील मौके पर ट्रेन की देरी उसके लिए बेहद मुश्किल स्थिति पैदा कर रही थी।

रेलवे ने बताई ट्रेन लेट होने की वजह

यात्री की पोस्ट पर मुरादाबाद मंडल के आधिकारिक अकाउंट @drm_mb ने जवाब दिया। रेलवे के मुताबिक, ट्रेन पिछले मंडल से ही देरी से पहुंची थी। इसके बाद संबंधित रेल सेक्शन में भारी भीड़ और ट्रेनों के एक साथ चलने के कारण भी देरी बढ़ गई।

मंडल ने बताया कि यात्री की शिकायत ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों तक पहुंचा दी गई है। कर्मचारियों से ट्रेन की निगरानी करने और संभव होने पर देरी कम करने की कोशिश करने को कहा गया। रेलवे ने यात्री को जल्द से जल्द गंतव्य तक पहुंचाने का भरोसा भी दिया और हुई असुविधा पर खेद जताया।

RailwaySeva ने भी दिया जवाब, साझा करने को कहा यात्रा का विवरण

इस मामले में रेलवे की आधिकारिक सहायता सेवा RailwaySeva ने भी प्रतिक्रिया दी। उसने यात्री से अनुरोध किया कि वह अपना पीएनआर या यूटीएस नंबर और मोबाइल नंबर निजी संदेश (DM) के जरिए साझा करे, ताकि मामले में तत्काल कार्रवाई की जा सके। रेलवे ने शिकायत दर्ज कराने के लिए RailMadad पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 139 का विकल्प भी बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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दिल्ली से UP-बिहार जाने वालों को मिलेगी राहत? दिवाली-छठ पर चलेगी वंदे भारत स्पेशल, जानें पूरा शेड्यूल

Vande Bharat Special Train: दिवाली और छठ महापर्व के दौरान दिल्ली से उत्तर प्रदेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल, भारतीय रेलवे ने त्योहारों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त ट्रेन चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, उत्तर रेलवे ने नई दिल्ली-पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ट्रेन करीब 994 किलोमीटर का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा कर सकती है। हालांकि, अभी ट्रेन के संचालन को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही इसके चलने की तारीख, समय और अन्य जानकारी साफ होगी।

यूपी के कई स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन

अगर इस वंदे भारत स्पेशल को मंजूरी मिलती है, तो दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन का विकल्प मिल सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक, ट्रेन नई दिल्ली से चलकर अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर रुकेगी। इसके बाद ट्रेन बक्सर और आरा होते हुए पटना पहुंचेगी। यानी दिल्ली से कानपुर, प्रयागराज, अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन काफी काम की हो सकती है।

दीपावली और छठ के दौरान घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाली ट्रेनों में काफी दबाव रहता है। ऐसे में अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है, तो यह वंदे भारत स्पेशल त्योहार के समय यात्रियों को भीड़ से राहत देने और सफर के लिए एक अतिरिक्त विकल्प देने में मदद कर सकती है।

21 अक्टूबर से संचालन का प्रस्ताव, त्योहार में बढ़ेंगे विकल्प

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पहली ट्रेन जोड़ी 02252/02251 को नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक सोमवार, बुधवार और शनिवार को चलाने का प्रस्ताव है। वापसी में पटना से यह ट्रेन 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को चल सकती है। इसके अलावा, 02253/02254 ट्रेन जोड़ी चलाने का भी प्रस्ताव है। मंजूरी मिलने पर त्योहारों के दौरान दिल्ली से यूपी और बिहार जाने वाले यात्रियों को एक अतिरिक्त ट्रेन का विकल्प मिलेगा। हालांकि, अंतिम फैसला रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद ही होगा।

कब-कब चलेगी वंदे भारत स्पेशल?

प्रस्ताव के मुताबिक, वंदे भारत स्पेशल नई दिल्ली से सुबह 8:35 बजे रवाना होकर दोपहर करीब 2:45 बजे प्रयागराज पहुंच सकती है। इसके बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा होते हुए ट्रेन रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचने का प्रस्ताव है।

वापसी में ट्रेन पटना से सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3:35 बजे प्रयागराज और रात करीब 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंच सकती है। मंजूरी मिलने पर यह टाइमिंग दिल्ली और यूपी के बीच सफर करने वालों के लिए एक और विकल्प दे सकती है।

दिल्ली-यूपी सफर के लिए कितना देना होगा किराया

प्रस्ताव के मुताबिक, नई दिल्ली से पटना तक एसी चेयर कार का किराया भोजन सहित करीब 2,575-2,600 रुपये हो सकता है। वहीं, एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया करीब 4,650-4,680 रुपये रहने का अनुमान है।

हालांकि, यह अभी प्रस्तावित किराया है। अंतिम किराया रेलवे बोर्ड की मंजूरी के बाद तय होगा। वहीं, दिल्ली से कानपुर या प्रयागराज तक जाने वालों का किराया अलग होगा, जिसकी सही जानकारी बुकिंग शुरू होने पर IRCTC पर मिलेगी।