एलिवेटेड सड़क प्रोजेक्ट पूरा होने पर पटना से बिहटा का सफर 30 मिनट में पूरा होगा

पटना से बिहटा आने-जाने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। दानापुर से बिहटा के बीच एलिवेटेड सड़क प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है। इसके पूरा होने पर पटना से बिहटा का सफर काफी आसान हो जाएगा। करीब 25 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट में लगभग 17 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा। परियोजना को मध्य 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

देश के सबसे लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर में शामिल

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर स्थानीय और लंबी दूरी के वाहनों के लिए अलग-अलग रास्ता उपलब्ध होगा। स्थानीय वाहन नीचे बनी सर्विस रोड से चलेंगे, जबकि लंबी दूरी के वाहन एलिवेटेड सड़क से निकल सकेंगे। इससे दानापुर-बिहटा मुख्य मार्ग पर जाम का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। यह भारत के सबसे लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर में से एक होगा।

मार्च तक विशुनपुरा तक शुरू हो सकता है एलिवेटेड हिस्सा

पहले चरण में दानापुर से विशुनपुरा तक के एलिवेटेड हिस्से को चालू करने का लक्ष्य मार्च तक रखा गया है। इस हिस्से का करीब 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण में विशुनपुरा से ईएसआईसी, बिहटा तक सड़क को चालू किया जाएगा। इसके साथ ही बिहटा एयरपोर्ट को सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए विशेष सब-वे का निर्माण भी प्रस्तावित है। बिहटा एयरपोर्ट के लिए बनने वाला सब-वे इस परियोजना के अहम हिस्सों में से एक है।

पटना से बिहटा का सफर 20-30 मिनट में पूरा होगा

फिलहाल पटना से बिहटा जाने में यातायात की स्थिति के अनुसार करीब डेढ़ घंटे तक का समय लग जाता है। एलिवेटेड सड़क पूरी तरह चालू होने के बाद यह दूरी करीब 20 से 30 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है। इसका लाभ सिर्फ बिहटा जाने वाले लोगों को नहीं मिलेगा। इस मार्ग से होकर बक्सर और आगे जाने वाले वाहनों को भी तेज कनेक्टिविटी मिलेगी।

बक्सर से आगे पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तक जुड़ाव

परियोजना का असर पटना से आगे की यात्रा पर भी पड़ेगा। दानापुर से बक्सर की करीब 125 किलोमीटर की दूरी लगभग दो घंटे में तय करने का लक्ष्य है। बक्सर में गंगा पार करने के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का ऑप्शन उपलब्ध होगा। इसके जरिए उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों के साथ अयोध्या और दिल्ली की ओर जाने वाली यात्रा आसान हो सकती है।

सात रैंप से जुड़ेगा एलिवेटेड कॉरिडोर

एलिवेटेड सड़क पर वाहनों के चढ़ने और उतरने के लिए कुल सात रैंप बनाए जाने हैं। इनमें से चार रैंप दानापुर रेलवे स्टेशन के आसपास होंगे। ताकि हर तरफ से आने वाले लोग इस फोर लेन एलिवेटेड सड़क पर चढ़ सकें। दो रैंप नेउरा बाईपास के पास बनाए जा रहे हैं। वहीं बिहटा एयरपोर्ट के आसपास एक रैंप के साथ टनल की व्यवस्था की जानी है। इससे अलग-अलग स्थानों से आने वाले वाहन जरूरत के अनुसार एलिवेटेड सड़क पर चढ़ सकेंगे और अपने गंतव्य के अनुसार नीचे उतर सकेंगे।

बिहटा औद्योगिक क्षेत्र को भी मिलेगा फायदा

बिहटा में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र को भी इस सड़क परियोजना का लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क मिलने से औद्योगिक क्षेत्र तक माल और लोगों की आवाजाही आसान होगी। पटना की ओर से बिहटा आने-जाने वाले वाहनों को भी मुख्य मार्ग पर लंबे जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

(पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट)

Darjeeling में पहले होटल का जश्न, 7% उछल पड़ा इस होटल कंपनी का शेयर

Lemon Tree Share Price: देश की दिग्गज हॉस्पिटैलिटी कंपनियों में शुमार लेमन ट्री होटल्स के शेयर आज कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में भी चमक गए। शुरुआती कारोबार में आज सेंसेक्स (Sensex) लाल हो गया तो निफ्टी (Nifty) भी फिसलकर 22500 के करीब आ गया। वहीं दूसरी तरफ लेमन ट्री के शेयर 7% से अधिक उछल पड़े। ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी ने पश्चिम बंगाल में विस्तार करते हुए मशहूर हिल स्टेशन दार्जीलिंग में 65 कमरों वाला अपना पहला होटल खोलने का ऐलान किया है। इस ऐलान पर निवेशक चहक उठे। अभी इसके शेयर बीएसई पर 6.24% की मजबूती के साथ ₹110.75 पर है। इंट्रा-डे में यह 7.05% की बढ़त के साथ ₹111.60 तक पहुंच गया था।

दार्जीलिंग में Lemon Tree के पहले होटल की क्या है खास बात

लेमन ट्री होटल्स ने Keys Prima by Lemon Tree Hotels, Darjeeling की ओपनिंग का ऐलान किया है।

यह दार्जीलिंग में लेमन ट्री ग्रुप का पहला होटल है।

इसे लेमन ट्री होटल्स के पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कार्नेशन होटल्स मैनेज करेगी।

यह होटल ओल्ड कचहरी रोड पर है।

कंपनी की तरफ से एक्सचेंज फाइलिंग में दी गई डिटेल्स के मुताबिक इसमें 65 कमरे हैं।

इसमें बार और फिटनेस सेंटर की भी सुविधा है।

इस होटल में 100 मेहमानों तक की व्यवस्था के लिए एक आउटडोर लॉन भी है।

यह होटल बागडोगरा एयरपोर्ट से करीब 70 किमी, दार्जीलिंग रेलवे स्टेशन से 2.5 किमी और लोकल बस स्टेशन से 1.7 किमी दूरी पर स्थित है।

दार्जीलिंग में अहम आकर्षण की बात करें तो यहां टाइगर हिल पर सनराइज, जू, हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, तेनजिंग रॉक, जापानीज टेंपल और पीस पगोडा, रॉक गार्डेन, टी गार्डेन, रोपवे और बतासिया लूप हैं।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

लेमन ट्री होटल्स के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल बीएसई पर 6 अक्टूबर 2025 को यह ₹174.25 पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 5 महीने में यह 42.78% टूटकर 16 मार्च 2026 को ₹99.70 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Roopa Screen IPO Listing: लिस्ट होते ही अपर सर्किट और पैसा डबल, ₹64 के शेयरों ने मचाया धमाल

Moneyview IPO Listing: 63% प्रीमियम पर लिस्ट ₹34 का शेयर, आईपीओ को मिली थी 102 गुना बोली

कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट! NSE को SEBI की हरी झंडी, अब इस सिग्नल का है इंतजार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत में पहली बार चली LNG ट्रेन! गुजरात को मिली 1542 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट्स की सौगात

गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन पर रविवार को रेलवे के लिए एक खास शुरुआत हुई।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की पहली LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही उन्होंने साबरमती में 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की कई रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ भी किया। इसमें लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम और रेलवे लाइन के दोहरीकरण से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में रेलवे सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने दिखाई हरी झंडी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-समाखियाली रेल मार्ग पर स्वदेशी ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली की भी शुरुआत की है। इसके साथ ही वे LNG से चलने वाली भारत की पहली ट्रेन और WAG-12 इलेक्ट्रिक इंजन को हरी झंडी दिखाई है। इन रेलवे परियोजनाओं में साबरमती में WAG-12 लोकोमोटिव के रखरखाव के लिए शेड का उद्घाटन भी हुआ। इसके अलावा कुछ रेल मार्गों पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जाएगा, जबकि साबरमती-सरखेज रेलवे लाइन को डबल करने का काम भी किया जाएगा। इन कामों से रेलवे की सुविधाओं और संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल समेत कई बड़े नेता और अधिकारी मौजूद रहेंगे।

ट्रेनों के बीच टक्कर का खतरे को कम करेगी ‘कवच’

इस प्रोजेक्ट के तहत अहमदाबाद डिवीजन के 404 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क पर ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली लगाई जाएगी। करीब 411 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में अहमदाबाद-पालनपुर का 157 किलोमीटर और अहमदाबाद-समाखियाली का 247 किलोमीटर रेल मार्ग शामिल है। इससे ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। ‘कवच’ सिस्टम ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बनाया गया है। यह ट्रेनों के बीच टक्कर का खतरा कम करने, तेज रफ्तार पर नियंत्रण रखने और ड्राइवर की गलती से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करता है। स्वदेशी तकनीक पर आधारित इस सिस्टम से ट्रेन संचालन को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।

LNG तकनीक से कम खर्च होगा ईंधन

इस कार्यक्रम में देश की पहली LNG से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत की गई। इसके लिए साबरमती के इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में दो पावर कारों में डीजल और LNG से चलने वाला सिस्टम लगाया गया। इस तकनीक से ट्रेन में करीब 40 प्रतिशत डीजल की जगह LNG का इस्तेमाल किया जा सकेगा। LNG तकनीक से रेलवे में ईंधन खर्च कम होने के साथ प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

कब तक पूरा होगा काम

साबरमती में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड में 300 हाई-पावर इलेक्ट्रिक इंजनों की देखभाल की सुविधा होगी। करीब 12,000 हॉर्सपावर क्षमता वाले WAG-12 इलेक्ट्रिक इंजन भारी और लंबी मालगाड़ियों को खींचने के लिए तैयार किए गए हैं। वहीं, साबरमती-सरखेज रेल लाइन के 21 किलोमीटर हिस्से को डबल करने पर करीब 313.27 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस काम को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लगेगा ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम

साबरमती-कलोल-भांडू मोतीदौ और साबरमती-सानंद-जखवाड़ा के 122.57 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर करीब 118.83 करोड़ रुपये की लागत से ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद मिलेगी और रेल यातायात भी ज्यादा सुचारु हो सकेगा। इन रेलवे परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य गुजरात में रेल यात्रा को ज्यादा सुरक्षित और बेहतर बनाना है।

Agra Metro: क्या 10 अक्टूबर से आगरा में चलना शुरू होगी मेट्रो? 5 नए स्टेशनों पर सर्विस शुरू करने को लेकर आया ये अपडेट

26 सितम्बर, आगरा: आदित्य मुदगल की रिपोर्ट की मुताबिक, आगरा में मेट्रो सेवा का विस्तार होने जा रहा है। पहले कॉरिडोर के तहत मनकामेश्वर स्टेशन से ISBT तक पांच नए स्टेशन तैयार हो चुके हैं। इनमें SN मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी, RBS कॉलेज और ISBT स्टेशन शामिल हैं। इन सभी स्टेशनों पर ट्रैक, सिग्नल और पैसेंजर से जुड़ी सभी सुविधाओं की जांच भी पूरी हो चुकी है।

यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर पंचानन मिश्रा ने बताया कि पांचों स्टेशनों पर मेट्रो चलाने की तैयारी पूरी है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब सेवा शुरू करने की तारीख का इंतजार है। ISBT तक मेट्रो चलाने के लिए 10 अक्टूबर 2026 की तारीख प्रस्तावित की गई है।

लोगों को मेट्रो शुरू होने का इंतजार

शहरवासियों को इन पांच नए स्टेशनों पर मेट्रो चलने का बेसब्री से इंतजार है क्योंकि मेट्रो शुरू होने से रोज सफर करने वाले लोगों को आसानी होगी। कंस्ट्रक्शन में कई जगह जाम की परेशानी होती थी, लेकिन मेट्रो सेवा शुरू होने से रोड ट्रैफिक कम हो सकता है। इससे पॉल्यूशन भी कम होगा। मेट्रो शुरू होने से लोग बिना जाम में फंसे अपने ऑफिस, कॉलेज के साथ और भी जगह आसानी से पहुंच सकेंगे।

नए स्टेशनों से बढ़ेगी कनेक्टिविटी, टूरिस्ट और स्टूडेंट्स को भी फायदा

पांचों स्टेशनों के शुरू होने से शहर के कई इलाके मेट्रो से कनेक्ट हो जायेंगे। SN मेडिकल कॉलेज, राजा की मंडी रेलवे स्टेशन और ISBT जाने वाले लोगों को सफर में आसानी होगी। आगरा मेट्रो का पहला कॉरिडोर ताज पूर्वी गेट से सिकंदरा तक करीब 14 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 13 स्टेशन बनाए जाने हैं।

ISBT से शहर के बड़े इलाकों तक मेट्रो चलने से आगरा आने वाले टूरिस्ट का सफर भी आसान होगा है और रोड पर जाम की वजह से होने वाली परेशानी भी कम हो सकती है। SN मेडिकल कॉलेज आने वाले पेशेंट के लिए भी मेट्रो एक आसान सफर बन सकती है। वहीं RBS कॉलेज आने-जाने वाले स्टूडेंट्स और फैकल्टी को भी सफर में आसानी होगी।

₹2 लाख/वर्ग मीटर जमीन, 12-20 हजार/वर्ग फीट बिक रहे फ्लैट? समझिए ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी के पास प्रॉपर्टी को क्यों लग रहे पंख

ग्रेटर नोएडा का बोड़ाकी और उसके आसपास का क्षेत्र आने वाले समय में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में आकार लेता दिख रहा है। रेलवे स्टेशन, इंटरनेशनल बस अड्डा और लगभग 600 एकड़ में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की वजह से इस इलाके के रियल एस्टेट बाजार में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। बुनियादी ढांचे के इस बड़े विस्तार से आसपास के सेक्टरों में जमीन, आवासीय फ्लैट और कमर्शियल प्रॉपर्टी की मांग और कीमतों में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है।

बोड़ाकी बनेगा NCR का प्रमुख ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब

दादरी के पास बोड़ाकी में स्थित मौजूदा रेलवे हॉल्ट को एक आधुनिक मल्टी-मॉडल रेलवे टर्मिनल (ग्रेटर नोएडा टर्मिनल) के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के तैयार होने से गौतमबुद्ध नगर के लाखों यात्रियों की ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या गाजियाबाद जाने की मजबूरी समाप्त हो जाएगी। प्रस्तावित स्टेशन में 12 प्लेटफॉर्म होंगे, साथ ही बड़ी संख्या में यार्ड और लूप लाइनें तैयार की जाएंगी। दावों के मुताबिक यहां वंदे भारत और राजधानी जैसी लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन और रखरखाव की अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। भविष्य में पूर्वांचल की दिशा में जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनों का संचालन यहां से जोड़े जाने की संभावना है।

कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए इस टर्मिनल को ‘नमो भारत’ रैपिड रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा, बोड़ाकी में लगभग 14 एकड़ क्षेत्र में एक आधुनिक बस अड्डा, वर्कशॉप और सीएनजी स्टेशन स्थापित करने की योजना है। स्टेशन परिसर में होटल, प्रमुख फूड चेन और कमर्शियल स्पेस भी विकसित किए जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र सिर्फ एक स्टेशन न रहकर बड़ा ट्रांसपोर्ट और बिजनेस हब बनेगा।

600 एकड़ में फैलेगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब

SVG Realty के चेयरमैन व डायरेक्टर और रियल एस्टेट एक्सपर्ट अंकुर मित्तल बताते हैं कि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के समीप लगभग 600 एकड़ क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की योजना है। इसमें वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लोकल ट्रेन और लंबी दूरी की रेल कनेक्टिविटी जैसी इंटिग्रेटेड सुविधाएं शामिल होंगी।

इन सुविधाओं के विकसित होने से केवल आम यात्रियों को ही सहूलियत नहीं मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार, बड़े कारोबार और कमर्शियल गतिविधियों के मौके पैदा होंगे। इसी वजह से बोड़ाकी और इसके आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है।

जमीन के रेट: डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रेटर नोएडा में जमीन की उपलब्धता और सेक्टरों के विकास की स्थिति के हिसाब से रेट्स में अंतर देखा जा रहा है। विकसित सेक्टर की बात करें तो अथॉरिटी के प्लॉटों की कीमतें लगभग 2 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई हैं। सेमी-डेवलप सेक्टर में भी जमीन के दाम लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास देखे जा रहे हैं। किसानों के सेमी-कमर्शियल प्लॉट की कीमत 1 लाख रुपये से लेकर 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर के आसपास बताई जा रही है।

बालाजी होम्स के रियल एस्टेट एक्सपर्ट संजय कुमार के मुताबिक, बोड़ाकी जंक्शन के पास स्थित इटा, ओमिक्रॉन और म्यू प्रमुख सेक्टरों में शामिल हैं, जहां विकास के काम तेजी से चल रहे हैं। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे और रेलवे जंक्शन के कारण इन सेक्टरों में प्रॉपर्टी की कीमतें करीब 1.5 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर तक बताई जा रही हैं।

12 हजार से 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट पहुंचे फ्लैट्स के दाम

टाटा, गोदरेज और हीरो रियल्टी जैसे देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स इस क्षेत्र में अपने प्रोजेक्ट्स ला चुके हैं। नए लॉन्च हो रहे आवासीय प्रोजेक्ट्स में फ्लैटों के रेट 12 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट से शुरू होकर लग्जरी सेगमेंट में 20 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट तक पहुंच रहे हैं। कामकाजी वर्ग और निवेशकों के बीच स्टूडियो अपार्टमेंट्स की मांग में भी इजाफा हुआ है। कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में 500 से 600 वर्ग फीट के स्टूडियो अपार्टमेंट तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी दरें 10 हजार रुपये से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट के बीच हैं।

अल्फा से बोड़ाकी तक कमर्शियल कॉरिडोर में तेजी

अल्फा से बोड़ाकी के बीच करीब 5 किलोमीटर के दायरे में कमर्शियल गतिविधियों की मांग काफी बढ़ी है। ग्राउंड फ्लोर रिटेल स्पेस 30,000 रुपये से 35,000 रुपये प्रति वर्ग फीट, अपर फ्लोर कमर्शियल स्पेस करीब 20,000 रुपये प्रति वर्ग फीट और ऑफिस स्पेस 12,000 रुपये से 13,000 रुपये प्रति वर्ग फीट तक जा रहे हैं।

रेलवे कनेक्टिविटी, रैपिड रेल, लॉजिस्टिक्स हब और बस अड्डे जैसी बड़ी विकास परियोजनाओं के चलते बोड़ाकी और आसपास के सेक्टरों का रियल एस्टेट मार्केट इस समय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हालांकि यहां ये भी समझना जरूरी है कि किसी भी प्रॉपर्टी का अंतिम मूल्य उसकी सटीक लोकेशन, प्रोजेक्ट की स्थिति और मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर करता है।

(ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

नोएडा-ग्रेटर नोएडा वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! दिल्ली-आनंद विहार नहीं अब यहां से पकड़ पाएंगे पूर्वांचल की ट्रेन, जल्द बनेगा रेलवे स्टेशन

उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर को लेकर बड़ी खबर आ रही है। यूपी के गौतम बुद्ध नगर में जल्द ही रेल कनेक्टिविटी का विस्तार होने वाला है। ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी स्टेशन (Bodaki) में बन रहा रेलवे टर्मिनल इस पूरे इलाके के लिए बड़ा परिवहन केंद्र बनने वाला है। इस परियोजना के लिए 46 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन चिन्हित किया गया है। इस रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसकी खास बात ये है कि इस टर्मिनल को नमो भारत रैपिड रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। इसके तैयार होने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा के यात्रियों को ट्रेन पकड़ने के लिए दिल्ली या गाजियाबाद पर निर्भरता कम हो सकती है।

नए टर्मिनल से नोएडा-ग्रेटर नोएडा की रेल कनेक्टिविटी कई बड़े शहरों से बेहतर हो सकती है। यहां से लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर, पटना, रांची और कोलकाता जैसे शहरों के लिए ट्रेन सेवाएं बढ़ने की संभावना है। इससे दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

ग्रेटर नोएडा में बनेगा नया टर्मिनल

ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी में नया रेलवे टर्मिनल बनाया जा रहा है। यह मौजूदा रेलवे हॉल्ट के पास और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी से करीब 3 किलोमीटर दूर होगा। स्टेशन के लिए 46 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन तय की गई है और इसे विशेष रेलवे प्रोजेक्ट का दर्जा मिला है, ताकि काम तेजी से पूरा हो सके। यहां 12 प्लेटफॉर्म और 63 यार्ड व लूप लाइनें बनाई जाएंगी। इस टर्मिनल से रोजाना 100 से ज्यादा ट्रेनों के संचालन और रखरखाव की सुविधा होगी। स्टेशन की इमारत दो मंजिला होगी, जिसमें रेलवे सुविधाओं के साथ होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी व्यावसायिक सुविधाएं भी होंगी।

Bodaki Railway Terminal

बनाया जाएगा मेट्रो स्टेशन

बोड़ाकी टर्मिनल को सिर्फ रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक्वा लाइन के डिपो स्टेशन से बोड़ाकी तक करीब 2.6 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन बनाई जा रही है। इस रूट पर जनपद और बोड़ाकी स्टेशन प्रस्तावित हैं। साथ ही जेवर एयरपोर्ट को भी बोड़ाकी से नमो भारत और मेट्रो के जरिए जोड़ने की योजना है। प्रस्तावित करीब 72 किलोमीटर लंबे रैपिड रेल कॉरिडोर के जरिए गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी मिलने की योजना है।

इस नेटवर्क से बोड़ाकी को दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर से भी जोड़ा जा सकेगा। टर्मिनल को कई बड़े एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 12.5 एकड़ में नया बस अड्डा बनाया जाएगा, जिससे यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद बस और मेट्रो की सुविधा आसानी से मिल सकेगी।

पड़ोसी के WiFi कनेक्शन से की जेईई की तैयारी, मुंबई के स्लम में पले अभिषेक अब आईआईटी दिल्ली से कर रहे बीटेक

Vande Bharat Depot: टाटानगर में बनेगा वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो, जानिए ₹383 करोड़ के प्रोजेक्ट से क्या बदलेगा

Vande Bharat Depot: बीजेपी सांसद विद्युत बरन महतो ने शुक्रवार को बताया कि रेलवे बोर्ड ने जमशेदपुर के टाटानगर रेलवे स्टेशन पर वंदे भारत ट्रेन कोच के लिए 383.78 करोड़ रुपये के मेंटेनेंस डिपो को मंज़ूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट से स्टेशन के मौजूदा मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और हाई-स्पीड ट्रेन ऑपरेशन के लिए सपोर्ट मजबूत होगा।

महतो ने कहा कि रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट) सुमित कुमार ने एक औपचारिक सूचना के जरिए यह मंज़ूरी दी। यह डिपो लोको कॉलोनी इलाके में टाटानगर के मौजूदा कोचिंग डिपो का विस्तार करके बनाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि इस सुविधा से मेंटेनेंस क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।

महतो ने बताया कि साउथ ईस्टर्न रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन द्वारा जमा किए गए टेक्निकल प्रपोजल की रेलवे बोर्ड द्वारा समीक्षा के बाद इस प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दी गई। इस सुविधा में वंदे भारत चेयर कार और स्लीपर रेक के टेक्निकल इंस्पेक्शन, रूटीन मेंटेनेंस और जल्दी धुलाई के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा।

अभी वंदे भारत एक्सप्रेस सर्विस टाटानगर से बिहार में पटना और ओडिशा में बेरहामपुर के लिए चलती हैं। प्रस्तावित डिपो इन ट्रेनों के लिए खास मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगा और भविष्य में टाटानगर से हाई-स्पीड सर्विस के विस्तार में मदद कर सकता है।

रोजगार और क्षमता में बढ़ोतरी

महतो ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के मौके पैदा होंगे और इलाके में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से ट्रेनों के रखरखाव और संचालन से जुड़ी सेवाओं को भी मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा स्टेशन पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए महतो ने ‘पीएम गति शक्ति’ योजना के तहत टाटानगर में चार और प्लेटफॉर्म और एक लूप लाइन बनाने का प्रस्ताव दिया है। 482 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर अभी रेलवे बोर्ड विचार कर रहा है।

एआई का भारत में मजाक चल रहा है

वह तो भला हो गलगोटिया वालों का कि उन्होंने भारत में हुए एआई समिट में चीन का रोबोटिक कुत्ता अपना आविष्कार बता कर पेश कर दिया, जिस पर पूरी दुनिया में हंसी उड़ी अन्य़था उस सम्मेलन के बाद तो भारत को एआई में विश्वगुरू घोषित किए जाने की तैयारी थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भारत का एआई समिट दो कारणों से चर्चा में रहा। एक चीन के रोबोटिक कुत्ते को भारत की एक यूनिवर्सिटी द्वारा अपना कह कर बताने। दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एआई के दिग्गजों के हाथ उठा कर चुनावी रैली जैसा प्रदर्शन करने के कारण।

वह तस्वीर दुनिया भर में वायरल हुई थी। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो आमोदेई दोनों को मोदी के जोर देने पर एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाना पड़ा, जबकि दोनों एक दूसरे से बात करना तक पसंद नहीं करते। दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाते समय बहुत असहज दिख भी रहे थे। लेकिन मोदी को उसकी परवाह नहीं थी। उन्हें तो दिखाना था कि वे दुनिया के एआई दिग्गजों के साथ मिल कर भारत में एआई क्रांति का ऐलान कर रहे हैं।

खैर, उसके बाद भारत में एआई की चर्चा दूसरे ही संदर्भों में होने लगी। उस समय जो मजाक बना उसके बाद मान लिया गया कि एआई से मजाक ही बन सकता है। तभी भारत में एआई का इस्तेमाल राजनीतिक दल एक दूसरे का मजाक बनाने, एक दूसरे को कमजोर बताने और एक दूसरे को अपमानित करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका में भी भले प्रौद्योगिकी के दिग्गज एआई के क्षेत्र में बड़े काम कर रहे हैं और इसकी प्रगति को लेकर चिंतित भी हैं। लेकिन वहां भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता एआई का इस्तेमाल अपना मजाक बनवाने और दूसरे का मजाक बनाने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप ने एआई से बना कर दर्जनों मीम्स सोशल मीडिया में शेयर किए। किसी में वे ग्रीनलैंड पर कब्जा कर रहे होते हैं तो किसी में कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बना रहे होते हैं तो किसी में ईरान को नष्ट कर रहे दिखते हैं। एआई का जैसा इस्तेमाल राष्ट्रपति ट्रंप कर रहे हैं वैसी ही इस्तेमाल भारत के नेता भी कर रहे हैं। सिर्फ एआई का ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत में ऐसे ही कामों के लिए किया जा रहा है।

भारत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का भी ऐसा ही इस्तेमाल है तो फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन आदि का भी इसी तरह का इस्तेमाल हो रहा है। सभी पार्टियों ने सैकड़ों या हजारों फर्जी अकाउंट बना रखे हैं। भाजपा के तो ‘भाजपा इजराइल’ और ‘भाजपा फिलस्तीन’ के नाम से भी अकाउंट बने हैं। हालांकि पार्टी कहेगी कि इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। लेकिन असल में वहां से वह काम सारे काम हो रहे हैं, जो पार्टी अपने आधिकारिक हैंडल से नहीं कर सकती है। वहां जिस तरह का ऑफेंसिव कंटेंट डाला जाता है, उसकी इजाजत किसी भी सभ्य समाज में नहीं हो सकती है। बात बात में कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश देने वाली सरकार इन मामलों में चुप रहती है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा ऐसा कर रही है। भाजपा का स्केल थोड़ा बड़ा है। वैसे भी आजकल प्रधानमंत्री अपने लगभग हर भाषण में स्केल और स्पीड की बात कर रहे हैं। तो विपक्षी पार्टियों के लिए अपमानजनक कंटेंट तैयार करके सोशल मीडिया में उसे शेयर करने के मामले में भी भाजपा की स्पीड और स्केल बड़ा है। लेकिन कांग्रेस और दूसरी पार्टियां भी पीछे नहीं हैं। अगर भाजपा समर्थकों के हैंडल से सोनिया गांधी से मिलती जुलती शक्ल वाली महिला की तस्वीर और वीडिया बना कर बार बाला नाम से पोस्ट किया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी से मिलते जुलते शक्ल वाले व्यक्ति को वडनगर रेलवे स्टेशन पर जेबतराशी करते दिखाया जा रहा है। भाजपा समर्थकों की ओर से अखिलेश यादव को टोंटी चोरी के रूप में दिखाया जा रहा है तो सपा समर्थक अखिलेश को हीरो और योगी आदित्यनाथ को विलेन बता कर फिल्मी अंदाज में पेश कर रहे हैं।

भारत के नेताओं के लिए एआई का कोई सार्थक या सकारात्मक इस्तेमाल नहीं है। यह प्रचार सामग्री तैयार करने और विपक्ष के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा अपमानजनक कंटेंट तैयार करने में इस्तेमाल हो रहा है। पहले पार्टियों के कार्यकर्ता हाथ से पोस्टर और बैनर तैयार करते थे। तब उनमें सार्थक और समय की वास्तविकताओं को बताने वाले नारे लिखे होते थे। बाद में प्रिटिंग प्रेस में पोस्टर, बैनर छपने लगे। तब पोस्टर के साथ प्रेस का नाम लिखना होता था। इसलिए कोई प्रेस वाला अपमानजनक सामग्री नहीं छापता था। बाद में कंप्यूटर ने इस काम को बहुत आसान बना दिया। कंप्यूटर से तैयार करके बिना प्रिटिंग प्रेस गए अपने प्रिंटर से पोस्टर, पैम्फलेट आदि बनाए जाने लगे। तब नेताओं के लिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालना बहुत आसान हो गया। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एआई ने मिल कर इस काम को बहुत बड़े स्तर पर पहुंचा दिया है। अब आइडिया भी एआई जेनरेट कर रहा है, तस्वीरें और वीडियो भी वही तैयार कर रहा है और उससे कंटेंट भी वही बना रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट बना कर उस पर एआई से तैयार कंटेंट शेयर करना और उसे वायरल कराना आज की राजनीति का और प्रचार का भी सबसे बड़ा सत्य है। भारत में कम से कम नेता और पार्टियां एआई का इस्तेमाल इसके लिए ही कर रही हैं।

Vande Bharat Patna: गुड न्यूज! गोरखपुर-पटना के बीच दौड़ेगी ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस! गोपालगंज-मशरख रूट से जोड़ने की मांग, जानें- सबकुछ

Vande Bharat Gorakhpur-Patna News: बिहार में रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करने को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बुधवार (16 सितंबर) को दिल्ली में रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने बिहार से जुड़ी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ समेत कई ट्रेनों को चलाने को लेकर अपनी मांगों को सामने रखा। इनमें पटना-थावे इंटरसिटी के समय में बदलाव, यात्रा समय कम करने, गोरखपुर-पटना के बीच वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग की। इसके साथ ही गोपालगंज-मशरख के रास्ते नई रेल कनेक्टिविटी विकसित करने की भी मांग प्रमुख रही।

सुबह 5 बजे पटना से चले इंटरसिटी

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्री ने राजधानी पटना-थावे इंटरसिटी के समय में बदलाव का प्रस्ताव रखा। उन्होंने मांग की है कि इस प्रमुख ट्रेन को पटना जंक्शन से सुबह 5 बजे रवाना किया जाए। जबकि थावे जंक्शन से शाम 7 बजे वापसी के लिए चलाया जाए।

फिलहाल, पटना-थावे इंटरसिटी पटना से दोपहर 12:10 बजे रवाना होती है। जबकि शाम 7 बजे थावे पहुंचती है। वापसी के दौरान ये ट्रेन 8:05 बजे थावे से चलकर सुबह 3:20 बजे पटना पहुंचती है। मंत्री ने ट्रेन की यात्रा अवधि कम करने की भी मांग की है, ताकि यात्रियों को अधिक सुविधा मिल सके।

गोरखपुर-पटना के बीच ‘वंदे भारत’ चलाने की मांग

मुलाकात के दौरान मिथिलेश तिवारी ने गोरखपुर से पटना के बीच वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्तावित कनेक्टिविटी में गोरखपुर-गोपालगंज-मशरख होते हुए पटना को जोड़ने की बात कही गई है। इससे इस क्षेत्र के ट्रेन यात्रियों को तेज रेल सेवा मिलने के साथ-साथ गोपालगंज और आसपास के इलाकों की पटना तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

सिधवलिया में ‘ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस’ के ठहराव की मांग

शिक्षा मंत्री ने ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस का सिधवलिया स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित करने की भी मांग की है। इसके अलावा ‘अमृत भारत स्टेशन’ योजना के तहत बैकुंठपुर और सिधवलिया रेलवे स्टेशनों के विकास का मुद्दा भी रेल राज्य मंत्री के सामने रखा गया। स्टेशनों के विकास से यात्रियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और क्षेत्र में रेल सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया।

दिघवा दुबौली में ROB-RUB निर्माण तेज करने की मांग

इस बैठक में दिघवा दुबौली में रोड ओवर ब्रिज (ROB) और रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण कार्य को भी जल्द पूरा करने की मांग उठाई गई। मंत्री ने इन परियोजनाओं में तेजी लाने का आग्रह किया, ताकि स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों को आवागमन में राहत मिल सके।

रेल कनेक्टिविटी से जुड़े कई मुद्दे एक साथ उठे

मिथिलेश तिवारी ने बैठक में क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी, ट्रेनों के समय में सुधार, नए रूट्स पर तेज रेल सेवा, स्टेशनों के विकास और जरूरी रेल प्रोजेक्ट्स को और रफ्तार देने से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता से उठाया। बताया जा रहा है कि अब इन प्रस्तावों पर रेल मंत्रालय की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर बिहार के लोगों की नजर बनी रहेगी।

ये भी पढ़ें- Who is Bushra Bano: इंशाअल्लाह-जजाकअल्लाह कहने को लेकर क्यों घेरा जा रहा है? IPS बुशरा बानो कौन हैं, जानिए इनकी पूरी कहानी

लखनऊ से शुरू ‘भारत टैक्सी’ को यूपी के सभी 75 जिलों तक ले जाएगी योगी सरकार

लखनऊ से शुरू ‘भारत टैक्सी’ को यूपी के सभी 75 जिलों तक ले जाएगी योगी सरकार

Yogi Adityanath

Bharat Taxi Scheme: प्रदेश के लोगों की यात्रा सुविधा में अब बड़ी क्रांति आने वाली है। इसके तहत डबल इंजन सरकार प्रदेशवासियों को बड़ी सुविधा देने जा रही है। लखनऊ-कानपुर में सक्रिय ‘भारत टैक्सी’ मॉडल जल्द ही अन्य जिलों में पहुंचाने की तैयारी है। आने वाले समय में इस सुविधा को सभी 75 जिलों तक पहुंचाया जाएगा। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के जरिये इस सुविधा को शहर से गांवों तक पहुंचाने की योजना है। योगी सरकार जल्द ही प्रदेश वासियों को इस सुविधा की सौगात देगी। खास बात ये है कि इसमें बाइक, ऑटो और कैब तीनों तरह की सुविधाएं मिलेंगी

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस सहकारी टैक्सी मॉडल को प्रदेशव्यापी स्वरूप देने की तैयारी है। खास बात यह होगी कि यात्रियों के लिए जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग वाला विकल्प होगा, जबकि चालकों को कारोबार में हिस्सेदार बनाने की अवधारणा है। शहरों के साथ इस मॉडल को गांवों तक पहुंचाया जाएगा।

 

‘भारत टैक्सी’ मॉडल को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचाने की योजना है। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब जिले के अंदर और एक जिले से दूसरे जिले तक आवागमन, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, एयरपोर्ट, अस्पताल, बाजार या किसी अन्य स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को स्थानीय परिवहन विकल्प की जरूरत पड़ती है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में एक समान टैक्सी विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में भारत टैक्सी मॉडल को विस्तार देने से आम यात्रियों के लिए सुविधा का दायरा बढ़ जाएगा।

सभी 75 जिलों में बढ़ेगा टैक्सी का विकल्प

लखनऊ से शुरू हुए मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक ले जाने की तैयारी का सीधा मतलब है कि टैक्सी सेवा को केवल राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय जिलास्तर तक पहुंचाने का प्रयास होगा। इससे छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को भी संगठित टैक्सी सेवा का एक अतिरिक्त विकल्प मिल जाएगा।

पीक टाइम में किराये की चिंता से मिलेगी राहत

यात्रियों के लिए इस मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नो-सर्ज प्राइसिंग है। टैक्सी की मांग बढ़ने पर किराये में अचानक होने वाली वृद्धि यात्रियों के बजट को प्रभावित करती है। ऐसे में नो-सर्ज व्यवस्था आम लोगों को किराये में अचानक उछाल से अलग एक विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश है। यानी यात्रा के लिए टैक्सी चुनने वाले व्यक्ति के सामने ऐसा मॉडल होगा जिसमें पीक डिमांड के आधार पर किराये में सर्ज लगाने की व्यवस्था नहीं होगी। यह खासतौर पर उन यात्रियों के लिए उपयोगी साबित होगी, जिन्हें जरूरी काम से भीड़भाड़ वाले समय में यात्रा करनी पड़ती है।

जीरो कमीशन से चालकों की कमाई बढ़ाने पर फोकस

भारत टैक्सी मॉडल में सुविधा केवल यात्री तक सीमित नहीं है। टैक्सी चलाने वाले सारथियों को भी व्यवस्था में हिस्सेदारी देने की अवधारणा इसका अहम हिस्सा है। जीरो कमीशन मॉडल में चालक की कमाई से प्रति-यात्रा प्लेटफार्म कमीशन काटने के बजाय सहकारी व्यवस्था के जरिये उसे कारोबार से जोड़ने का प्रयास है।

 

टैक्सी चलाने वाला व्यक्ति केवल सेवा देने वाला चालक न रहकर कारोबार में हिस्सेदार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। यात्री के लिए इसका महत्व इसलिए भी है कि मजबूत और टिकाऊ चालक नेटवर्क किसी भी टैक्सी सेवा की उपलब्धता और निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण होता है।

गांवों तक पहुंचेगी ‘अपनी टैक्सी’

इस योजना का दायरा केवल जिला मुख्यालयों तक सीमित रखने की तैयारी नहीं है। PACS यानी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के जरिये भारत टैक्सी मॉडल को गांवों तक पहुंचाने की योजना है। ग्रामीण क्षेत्रों में टैक्सी या कैब के विकल्प सीमित होने की स्थिति में यह व्यवस्था लोगों के लिए स्थानीय परिवहन का नया माध्यम बन सकती है। अस्पताल, बाजार, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे या जिला मुख्यालय तक आने-जाने वाले लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर टैक्सी उपलब्धता बढ़ने की संभावना है।
 

इसके साथ ही गांवों में वाहन संचालन से जुड़े स्थानीय स्वरोजगार के अवसर भी विकसित होंगे। सहकारी संस्थाओं के नेटवर्क से परिवहन सेवा को जोड़ने का उद्देश्य इसी व्यापक पहुंच को मजबूत करना है।

एक मॉडल, दो तरफ सुविधा

भारत टैक्सी का प्रस्तावित विस्तार यात्रियों और सारथियों, दोनों को साथ लेकर चलने वाला मॉडल है। एक ओर जनता के लिए टैक्सी सेवा का नया विकल्प, जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग है, तो दूसरी ओर चालक को कारोबार में हिस्सेदारी देने की व्यवस्था है। योगी सरकार की पहल का बड़ा फोकस अब इस मॉडल को लखनऊ से निकालकर प्रदेश के 75 जिलों और गांवों तक पहुंचाने पर है। जल्द ही राजधानी से लेकर छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक टैक्सी सेवा के विकल्प का दायरा बढ़ जाएगा।

राजधानी से गांव तक यात्रा का सुरक्षित और बेहतर विकल्प

आम जनता के नजरिये से इसका सबसे बड़ा महत्व यही है कि यात्रा के लिए एक और बेहतर और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हो जाएगा। किराये में पारदर्शिता, नो-सर्ज प्राइसिंग और सेवा की पहुंच बढ़ने से यात्रियों को अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्प चुनने का अवसर मिलेगा। ‘भारत टैक्सी’ के विस्तार से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को परिवहन का नया और बेहतर विकल्प मिलेगा।