इन पहाड़ों में मिलेगा ऐसा सुकून, शिमला-मसूरी की भीड़ भी भूल जाएंगे!

उत्तर भारत के पहाड़ों में छुट्टियां बिताने का नाम आते ही सबसे पहले शिमला, मसूरी और नैनीताल जैसी जगहों का ख्याल आता है। इन जगहों की खूबसूरती देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन छुट्टियों के समय यहां बढ़ती भीड़, ट्रैफिक और महंगे होटल कई बार सफर का मजा थोड़ा कम कर देते हैं। ऐसे में यदि आप शोर-शराबे से दूर किसी शांत पहाड़ी जगह पर कुछ दिन सुकून से बिताना चाहते हैं, तो कुछ कम मशहूर जगहों की ट्रिप कर सकते हैं।

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई ऐसे छोटे-छोटे पहाड़ी ठिकाने हैं, जहां प्रकृति की खूबसूरती के साथ आपको शांत माहौल भी मिलेगा। यहां देवदार और चीड़ के जंगल, ठंडी हवा, पहाड़ों के सुंदर नजारे और आराम से समय बिताने का मौका मिलता है।

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शोजा, हिमाचल प्रदेश

जिभी के पास बसा शोजा एक शांत और खूबसूरत पहाड़ी गांव है। यहां चारों तरफ घने जंगल, लकड़ी के बने घर और सुंदर पहाड़ी रास्ते देखने को मिलते हैं। यहां बड़े टूरिस्ट सेंटर जैसी भीड़ नहीं होती, इसलिए आप आराम से घूमने का मजा ले सकते हैं। शोजा में रहकर आप शांत माहौल का मजा ले सकते हैं और साथ ही जिभी के कैफे व आसपास की मशहूर जगहों पर भी घूम सकते हैं।

 

 

 

मशोबरा, हिमाचल प्रदेश

शिमला से करीब 11 किलोमीटर दूर मशोबरा उन लोगों के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है, जो शिमला के पास रहकर भी भीड़ से बचना चाहते हैं। यहां देवदार और चीड़ के पेड़ों से घिरे रास्ते और शांत माहौल आपको काफी सुकून देंगे। यहां पुराने समय की खूबसूरत बिल्डिंग और आरामदायक रहने की जगहें भी मिलती हैं। पहाड़ों में शांति से समय बिताने के लिए मशोबरा एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

 

 

 

पंगोट, उत्तराखंड

नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर पंगोट एक छोटा और शांत पहाड़ी गांव है। यहां आपको भीड़भाड़ वाले मार्केट की जगह हरे-भरे जंगल और पहाड़ों के सुंदर नजारे देखने को मिलेंगे। यह जगह पक्षी देखने के शौकीन लोगों को पसंद आती है। यहां जंगल की पगडंडियों पर घूमने, पहाड़ों को देखने और शांत होमस्टे में रहने का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है। प्रकृति के करीब कुछ दिन बिताने के लिए पंगोट अच्छा डेस्टिनेशन है।

लैंडोर, उत्तराखंड

मसूरी से करीब 5 किलोमीटर दूर लैंडोर एक शांत और खूबसूरत जगह है। यहां पुराने घर, चीड़ के पेड़ों से घिरी सड़कें और पहाड़ों के सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं। यहां छोटे कैफे और शांत घूमने की जगहें भी हैं। यदि आप मसूरी घूमना चाहते हैं, लेकिन वहां की ज्यादा भीड़ से बचना चाहते हैं, तो लैंडोर में ठहरना बेहतर साबित हो सकता है।

 

 

 

कनाताल, उत्तराखंड

मसूरी और धनौल्टी के पास कनाताल एक शांत पहाड़ी जगह है। यहां चारों तरफ हरियाली, जंगल और सेब के पेड़ दिखाई देते हैं। मौसम साफ होने पर दूर से हिमालय की बर्फीली चोटियों के नजारे भी देखे जा सकते हैं। यहां आप ट्रेकिंग कर सकते हैं, नेचर के बीच घूम सकते हैं या बस शांत माहौल में आराम कर सकते हैं। मसूरी और धनौल्टी की भीड़ से दूर कुछ दिन बिताने के लिए कनाताल अच्छा ऑप्शन है।

 

 

 

एक ट्रिप में दो तरह का मजा

इन शांत पहाड़ी जगहों की सबसे अच्छी बात यह है कि ये कई मशहूर हिल स्टेशनों के पास ही हैं। इसलिए आपको घूमने के लिए किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है। दिन में आप शिमला, मसूरी, नैनीताल या जिभी जैसी पॉपुलर डेस्टिनेशन की सैर कर सकते हैं और शाम को भीड़ से दूर अपने शांत डेस्टिनेशन पर लौट सकते हैं। इस तरह एक ही ट्रिप में आपको मशहूर जगहों और पहाड़ों का सुकून एक साथ मिल जाता है।

अस्पताल में मरीज सो रहे थे, तभी कैंपस में आ गया तेंदुआ, CCTV फुटेज देख सहमे लोग

Darjeeling Leopard: पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग हिल स्टेशनों में खूबसूरत वादियों से घिरा हुई है। दार्जिलिंग भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक हिल डेस्टिनेशन्स में से एक है। वहीं इन दिनों दार्जिलिंग का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दार्जिलिंग सदर अस्पताल के पास एक बड़ा तेंदुआ अस्पताल परिसर में घुस आया था। नाइट ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और हेल्थ वर्कर अचानक आए तेंदुए को देखकर डर गए। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई।

CCTV में रिकॉर्ड हुई घटना

दार्जिलिंग सदर अस्पताल में रात के वक्त एक तेंदुआ अस्पताल परिसर में आ गया। उस समय अस्पताल में मरीज सो रहे थे और नाइट ड्यूटी पर कर्मचारी मौजूद थे। बताया जा रहा कि, तेंदुआ काफी बड़ा था और कुछ देर तक अस्पताल के कैंपस में घूमता रहा। अचानक तेंदुए के पहुंचने से अस्पताल के कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया। अस्पताल परिसर में तेंदुए के घूमने की पूरी घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में तेंदुआ देर रात कैंपस के अंदर बिना किसी जल्दबाजी के घूमता नजर आया।

तेंदुआ देख घबरा गए स्वास्थ्यकर्मी

अस्पताल के अंदर जंगली जानवर को देखकर नाइट ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी घबरा गए और सभी सतर्क हो गए। स्थानीय लोगों और अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि हाल के दिनों में अस्पताल परिसर में तेंदुए के इस तरह आने की कोई दूसरी घटना सामने नहीं आई है। उनके लिए भी यह घटना काफी हैरान करने वाली रही। अस्पताल के आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है।

नौकरी का रिजेक्शन मिला तो उम्मीदवार ने कंपनी को ही कर दिया रिजेक्ट, जवाब हुआ वायरल

भारत का अनोखा गांव, जहां बादलों की गड़गड़ाहट और कोहरे के बीच आसमान से गिरते हैं परिंदे!

असम की डिमा हसाओ पहाड़ियों में बसा जटिंगा गांव अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ एक रहस्यमयी घटना के लिए भी दुनियाभर में जाना जाता है। हर साल मानसून के अंत में यहां पक्षियों से जुड़ी एक ऐसी घटना देखने को मिलती है, जिसने सालों से साइंटिस्ट, बर्ड स्पेशलिस्ट और टूरिस्ट का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। आइए जानते हैं आखिर क्या है जटिंगा का रहस्य और यहां कैसे पहुंचा जा सकता है:

 

शांत पहाड़ी गांव, लेकिन एक रहस्यमयी पहचान

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सालभर जटिंगा हरे-भरे जंगलों, पहाड़ियों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य टूरिस्ट को अट्रैक्ट करता है, लेकिन सितंबर और अक्टूबर के महीनों में यह गांव एक अनोखी घटना की वजह से चर्चा में आ जाता है।

 

 

 

हर साल देखने को मिलती है अनोखी घटना

Assam's Jatinga Sheds 'Birds' Suicide Site' Tag But Faces Other Challenges

मानसून के अंत में शाम के समय कुछ पक्षी अचानक नीचे आने लगते हैं और पेड़ों, घरों या जमीन से टकरा जाते हैं। यह घटना कुछ घंटों तक ही देखने को मिलती है और खास बात यह है कि यह केवल गांव के एक छोटे से इलाके तक सीमित रहती है।

 

 

 

किन पक्षियों पर पड़ता है असर?

Picture a quiet village called Jatinga in Assam, India. It's a peaceful place with beautiful scenery, but it's known for something very strange. From August to November, a weird thing happens here:

इस घटना में शामिल पक्षियों की कई प्रजातियां दर्ज की गई हैं। इनमें किंगफिशर, ड्रोंगो, बगुले, बिटर्न, बी-ईटर और पिट्टा जैसे पक्षी शामिल हैं। एक्सपर्ट के अनुसार इनमें ज्यादातर यंग और दिन में एक्टिव रहने वाले पक्षी होते हैं।

 

 

 

लोककथाओं में छिपी रहस्य की कहानी

पेड़ पर पक्षी फोटो - मुफ्त उच्च-गुणवत्ता वाले फोटो डाउनलोड करें | Magnific (पहले Freepik था)

पहले यहां के लोग इस घटना को अलौकिक शक्तियों से जोड़कर देखते थे। गांव में कई पीढ़ियों से ऐसी कहानियां सुनाई जाती रही हैं कि आसमान से आने वाली रहस्यमयी शक्तियां पक्षियों को अपनी ओर खींच लेती हैं। हालांकि समय के साथ इन मान्यताओं की जगह साइंटिफिक रिसर्च ने ले ली।

 

 

 

वैज्ञानिक क्या मानते हैं?

Nature Beyond | Jatinga

पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि घना कोहरा, कम ऊंचाई वाले बादल, तेज हवाएं और अर्टिफिशियल लाइट मिलकर पक्षियों के दिशा-ज्ञान को एफेक्ट कर सकती हैं। कुछ शोध चुंबकीय बदलाव की संभावना भी बताते हैं, लेकिन अब तक कोई एक कारण पूरी तरह साबित नहीं हो पाया है।

 

 

 

क्या पक्षी सच में सुसाइड करते हैं?

पेड़ पर पक्षी फोटो - मुफ्त उच्च-गुणवत्ता वाले फोटो डाउनलोड करें | Magnific (पहले Freepik था)

साइंटिस्ट का कहना है कि इसे पक्षियों की ग्रुप सुसाइड कहना सही नहीं होगा। अवेलेबल रिसर्च के अनुसार पक्षी किसी कारण से डिस्ट्रैक्ट होकर अपनी दिशा खो बैठते हैं, जिसके चलते यह घटना होती है। इसकी असली कारण पर अब भी स्टडी जारी है।

 

 

 

जटिंगा कैसे पहुंचें?

A Trip to Jatinga Village from Kaziranga National Park | Kaziranga National Park News | Kaziranga National Park Blog

जटिंगा, असम के डिमा हसाओ जिले में है और हाफलोंग से करीब 9 किलोमीटर दूर है। यहां पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गुवाहाटी का लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। रेल से आने वाले ट्रैवलर हाफलोंग हिल स्टेशन तक पहुंच सकते हैं, जबकि हाफलोंग से टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। विजिट के दौरान फारेस्ट डिपार्टमेंट के रेगुलेशन और लोकल रेजिडेंट के इंस्ट्रक्शन को फॉलो करना जरूरी है।

कौन सा है भारत का सबसे महंगा बोर्डिंग स्कूल? जहां पढ़ाई के साथ दुनिया की भी होती है सैर

स्कूल का नाम सुनते ही क्लासरूम और किताबें याद आ जाती है, लेकिन भारत में एक ऐसा बोर्डिंग स्कूल भी है, जहां पढ़ाई के साथ हर दिन हिमालय के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते है। उत्तराखंड के मसूरी में वुडस्टॉक स्कूल अपनी शानदार लोकेशन और पहचान के कारण दुनियाभर में पॉपुलर है।

 

हिमालय की गोद में कैंपस (Himalayan Location)

यह स्कूल मसूरी में हिमालय की वादियों के बीच है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत माहौल स्टूडेंट को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का मौका देता है।

 

इतिहास और प्रकृति का संगम (Heritage & Nature)

वुडस्टॉक स्कूल की पहचान सिर्फ उसकी पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसकी बिल्डिंग, हरियाली और शांत माहौल से भी है। यही वजह है कि यह भारत के सबसे खास बोर्डिंग स्कूलों में गिना जाता है।

दुनियाभर में पहचान (Global Recognition)

वुडस्टॉक स्कूल को दुनिया के सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया गया है। इसकी शानदार लोकेशन और हिस्टोरिक कैंपस ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

 

 

170 साल से ज्यादा पुराना इतिहास (Rich History)

करीब 172 साल पुराने इस स्कूल की शुरुआत एक छोटे इंस्टिट्यूट से हुई थी। समय के साथ यह भारत के इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में शामिल हो गया।

वर्ल्ड-क्लास पढ़ाई (International Education)

यहां इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) पढ़ाया जाता है, जो दुनिया की कई बड़ी यूनिवर्सिटी में मान्य है। पढ़ाई के साथ स्टूडेंट के डेवलपमेंट पर भी ध्यान दिया जाता है।

दुनियाभर के छात्र (Diverse Community)

स्कूल में कई देशों के छात्र पढ़ते हैं। अलग-अलग कल्चर के बीच पढ़ाई करने से बच्चों को नई सोच बनाने का मौका मिलता है।

किताबों से आगे की सीख (Beyond Classroom)

यहां सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स, म्यूजिक, थिएटर, आउटडोर एक्टिविटी, पर्यावरण संरक्षण और भी कई एक्टिविटीज पर भी ध्यान दिया जाता है।