Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करने वाले दो संदिग्धों की तस्वीर आई सामने, पुलिस ने जब्त की हमले में इस्तेमाल हुई बाइक

Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना में शामिल हमलावरों की पहली तस्वीर सामने आई है। रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई इस घटना के बाद, जांचकर्ता हमलावरों की गतिविधियों का पता लगाने में जुटे हैं। घटनास्थल के पास ली गई इस तस्वीर में दो व्यक्ति सफेद शर्ट पहने दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से एक ने ‘प्यूमा’ (Puma) लोगो वाली काली टोपी पहनी हुई है। पुलिस इन दोनों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है।

इस बीच, पुलिस ने हमले में इस्तेमाल किए गए दोपहिया वाहन को जब्त कर लिया है, जिसे आरोपी भागने से पहले अंधेरी रेलवे स्टेशन पर छोड़ गए थे।

CCTV खंगालने में जुटी मुंबई पुलिस

शुरुआती जांच से पता चला है कि यह वाहन मुंबई में रजिस्टर्ड है। जांचकर्ता इसके इतिहास का पता लगाने के लिए इसके रजिस्ट्रेशन विवरण, नंबर प्लेट, और चेसिस व इंजन नंबरों की जांच कर रहे हैं। वहीं, गोलीबारी के बाद आरोपी कहां गए और किस रास्ते से फरार हुए, इसका पता लगाने के लिए भी पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों हमलावरों के साथ एक तीसरा साथी भी था, जो मोटरसाइकिल से मौके पर पहुंचा था।

वीडियो में दिखे तीन हमलावर, एक ने चलाईं कई गोलियां

घटनास्थल के वीडियो में एक हमलावर कई राउंड गोलियां चलाता दिखाई दे रहा है। वहीं, दूसरा भी गोली चलाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। हालांकि, वीडियो से यह साफ नहीं है कि उसकी बंदूक से गोली चली थी या नहीं। इस दौरान तीसरा साथी मोटरसाइकिल पर इंतजार करता दिख रहा है, ताकि वारदात के बाद तीनों वहां से जल्दी फरार हो सकें।

इसके बाद फुटेज में तीनों आदमी मोटरसाइकिल पर भागते हुए और हमले के बाद मौके से गायब होते हुए दिखाई देते हैं।

बता दें कि यह घटना तब हुई जब 36 वर्षीय अभिनेता टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल मैच खेलने के बाद वहां से निकल रहे थे। फिलहाल, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के साथ काम करने वालों को नई धमकियां दी हैं।

हमले में ड्राइवर और ऑटो चालक घायल

गौरतलब है कि इस हमले में टाइगर तो सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर फिरदौस और चौहान नाम के एक ऑटो-रिक्शा चालक घायल हो गए।

बता दें कि जब गाड़ी पर हमला हुआ था उस दौरान उनका ड्राइवर घायल हो गया, जिसके बाद टाइगर ने उसे पीछे बैठाकर गाड़ी चलाकर खुद अस्पताल ले गए।

फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए 15 टीमें बनाई हैं, जिनमें मुंबई क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल हैं। जांचकर्ता इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं, जबकि एक फोरेंसिक टीम ने बैलिस्टिक सबूत जुटाए हैं और गाड़ी की जांच की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुल कितनी गोलियां चलाई गईं।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को जांच में तेजी लाने के दिए निर्देश

घटना के बाद, गृह विभाग संभाल रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती और श्रॉफ से बात की। उन्होंने पुलिस को जांच में तेजी लाने और आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया, साथ ही अभिनेता को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

वहीं हमले के कुछ ही समय बाद, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अभिनेता से उनके घर पर मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बताया कि श्रॉफ के दाहिने हाथ पर गनपाउडर से जलने के निशान हैं।

मीडिया से बात करे हुए, शिंदे ने इस घटना को गंभीर बताया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का संकल्प लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मुंबई में किसी भी गिरोह या व्यक्ति को गैंगवार फिर से शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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Kolkata Durga Puja Stampede: कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल में आखिर कैसे मची अफरा-तफरी? भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत, 25 घायल

Kolkata Durga Puja Stampede: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम उत्तर कोलकाता में स्थित चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में बारिश के बीच अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ मच गई। इसमें कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 25 अन्य लोग घायल हो गए। गिरिश पार्क थाना क्षेत्र स्थित सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल के एग्जिट गेट पर अचानक भगदड़ मच गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को तत्काल बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा है।

शाम करीब 7:40 बजे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, यह घटना 17 अक्टूबर की शाम करीब 7:40 बजे हुई। उस समय दुर्गा पूजा पंडाल में दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। पंडाल के एग्जिट गेट पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इसी दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। बताया जा रहा है कि बाहर निकलने के रास्ते पर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने से हालात बिगड़े। हालांकि, भगदड़ के पीछे की परिस्थितियों और घटना के सटीक कारणों को लेकर डिटेल्स जानकारी का इंतजार है।

कैसे मची भगदड़?

घटना का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उत्तर कोलकाता के चोरबागान में सामुदायिक दुर्गा पूजा के आयोजकों की एक घोषणा के बाद श्रद्धालुओं के बीच अचानक भीड़ बढ़ गई, जिससे यह दुखद हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि घटना की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा, “घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार पूजा आयोजकों द्वारा लाउडस्पीकर पर की गई एक घोषणा के कारण यह घटना हुई।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि चोरबागान दुर्गा पूजा आयोजित करने वाले क्लब के पदाधिकारियों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि मृतकों में से दो के परिजनों के अनुसार पंडाल परिसर में निजी सुरक्षा कर्मियों द्वारा सीटी बजाए जाने के कारण पंडाल में एंट्री के लिए इंतजार कर रहे लोगों में अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, बारिश शुरू होते ही पंडाल के बाहर इंतजार कर रही भीड़ अचानक आगे बढ़ी। इस दौरान कुछ लोग सड़क पर गिर गए, जिससे भगदड़ मच गई। प्रशासन ने घटना के बाद भीड़भाड़ वाले कई दुर्गा पूजा आयोजनों को अस्थायी रूप से अपने पंडाल बंद करने की सलाह दी है। कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए करीब 3,500 पंडाल लगाए गए हैं।

सीएम ने कहा कि यह घटना कुछ हद तक बारिश के कारण हुई। पूजा समिति द्वारा अंदर की गई व्यवस्थाओं में भी कुछ कमियां थीं। कोलकाता पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर रही है। जो भी लापरवाही का दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि हम कलकत्ता हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज की अध्यक्षता में एक जांच समिति (फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी) बनाएंगे। फिर सरकार उसकी सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई करेगी।

अमित शाह पहुंचे कोलकाता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार शाम को कोलकाता पहुंचे थे। उनका रविवार को दुर्गा पूजा पंडालों का दौरा करने का कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि भगदड़ की घटना के मद्देनजर वह अपने निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर रहे हैं। आज वह हादसे में घायल लोगों से मुलाकात करेंगे। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति की खबर सुनकर उन्हें गहरा सदमा लगा है।

सीएम अधिकारी और राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने भी सरकारी अस्पताल का दौरा किया। चोरबागान दुर्गा पूजा हाल के वर्षों में काफी लोकप्रिय हुई है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यह पूजा चित्तरंजन एवेन्यू से सटी एक संकरी सड़क पर आयोजित की जाती है।

हादसे के बाद बंद किया गया पूजा पंडाल

भगदड़ की घटना के बाद प्रशासन ने सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया। मौके पर पुलिस और इमरजेंसी टीमें तैनात रहीं। अधिकारी घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने और स्थिति का आकलन करने में लगे हैं।

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भारी भीड़ बनी हादसे की वजह?

शुरुआती जानकारी के अनुसार, पंडाल के एग्जिट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होना भगदड़ की प्रमुख वजह रही। भीड़ के अचानक बढ़े दबाव के कारण लोग अफरा-तफरी में फंस गए। हालांकि, घटना के सटीक कारणों और सुरक्षा इंतजामों की भूमिका को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने आनी बाकी है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान घायलों को उपचार उपलब्ध कराने, भीड़ को नियंत्रित करने और घटना से संबंधित तथ्यों को जुटाने पर है। इस हादसे ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ मैनेजमेंट और सुरक्षित निकास व्यवस्था की अहमियत को एक बार फिर सामने ला दिया है।

‘वह बस वहां से गुजर रहे थे’: CEC-विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आरोपों पर इमरान खान के वकीलों का जवाब

Imran Khan Controversy: बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान की कानूनी टीम ने अब उन दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। टीम का कहना है कि वह बस उस इलाके से गुजर रहे थे। यह स्पष्टीकरण तब आया है जब अधिकारियों ने अभिनेता – जो अमेरिकी नागरिक हैं और जिनके पास ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्ड है – को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया है।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, खान के वकीलों ने इस दावे को चुनौती दी है कि उन्होंने उस विरोध प्रदर्शन में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई थी।

वहीं, विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर यह विवाद तब और अहम हो गया, जब ‘फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस’ (FRRO) ने उन्हें देश छोड़ने का नोटिस जारी किया।

इस घटनाक्रम ने अभिनेता के आव्रजन (इमिग्रेशन) दर्जे और भारत में विदेशी नागरिकों की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े नियमों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अगस्त क्रांति मैदान में क्या हुआ?

10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान में जुटे या वहां पहुंचने की कोशिश कर रहे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। ये लोग कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी।

पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों में इमरान खान भी शामिल थे। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पुलिस वैन के अंदर की अपनी एक तस्वीर शेयर की और कैप्शन लिखा, “लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।”

वहीं, बीजेपी नेता किरीट सोमैया के पुलिस से संपर्क करने के बाद, उस जगह पर अभिनेता की मौजूदगी विवाद का विषय बन गई। सोमैया ने सवाल उठाया कि विदेशी नागरिक होने के बावजूद, अभिनेता ने एक राजनीतिक प्रदर्शन में कैसे हिस्सा लिया। सोमैया ने खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि प्रदर्शन में उनकी भागीदारी से यह सवाल उठता है कि क्या उन्होंने विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों पर लागू नियमों का पालन किया है। इसके बाद खान को 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया गया, जिससे यह विवाद और गहरा गया।

अब अभिनेता के वकीलों ने प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी को लेकर लगाए गए आरोपों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि अभिनेता प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले रहे थे, बल्कि वे बस उस इलाके से गुजर रहे थे।

इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए क्यों कहा गया है?

‘जाने तू… या जाने ना’ और ‘डेल्ही बेली’ जैसी फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले इमरान खान, अमेरिका के नागरिक हैं और उनके पास OCI कार्ड है। हालांकि, OCI का दर्जा पात्र विदेशी नागरिकों को कुछ शर्तों के साथ भारत आने और यहां रहने की अनुमति देता है, लेकिन इससे उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिल जाती।

नागरिकता अधिनियम के तहत, OCI कार्ड धारकों को वे राजनीतिक अधिकार नहीं मिलते जो भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं; इनमें वोट देने या चुनाव लड़ने का अधिकार शामिल है। अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाले संवैधानिक संरक्षण – जिनमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने का अधिकार शामिल है – विशेष रूप से केवल भारतीय नागरिकों को ही दिए गए हैं।

हालांकि, भारत में विदेशी नागरिकों के राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल होने को लेकर कानूनी स्थिति इतनी सीधी नहीं है कि उन पर पूरी तरह से रोक हो। इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत सरकार को भारत में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी और उनके आचरण को नियंत्रित करने के व्यापक अधिकार मिले हैं। लेकिन इस कानून में स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा गया है कि विदेशी नागरिकों या OCI कार्डधारकों के प्रदर्शन में शामिल होने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

ऐसे में इमरान खान के मामले में यह जानना अहम है कि उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस किन कानूनी आधारों पर जारी किया गया है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके खिलाफ कार्रवाई किस वजह से की गई।

वकीलों ने अपने दावे के समर्थन में CCTV फुटेज मांगी

इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिया है कि वे घटना के दिन उनकी गतिविधियों का पता लगाने के लिए उस इलाके की CCTV फुटेज मांगेंगे। वकीलों का कहना है कि फुटेज से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभिनेता वहां प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे या सिर्फ उस इलाके से गुजर रहे थे।

अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन ने ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कहा, “पुलिस इलाके की CCTV फुटेज निकलवाए, सब कुछ साफ हो जाएगा।”

बचाव पक्ष के मुताबिक, खान नाना चौक से गुजर रहे थे, तभी पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण रास्ता रुक गया और मीडिया के लोग उनके पास आ गए। वकीलों ने शिकायतकर्ता के उस आरोप को चुनौती दी है, जिसमें दावा किया गया है कि अभिनेता ने प्रदर्शन में उसी तरह हिस्सा लिया था, जैसा शिकायत में बताया गया है।

बता दें कि हिरासत में लिए जाने से कुछ समय पहले मीडिया से बात करते हुए, खान ने वहां अपनी मौजूदगी के बारे में एक अलग ही बात कही थी। उन्होंने कहा, “मैं यहां एक नागरिक के तौर पर हूं, एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही की आजादी पर रोक क्यों लगाई जा रही है, और लोगों की आवाज को क्यों दबाया जा रहा है।”

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OpenAI ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाला गिरफ्तार:TV के पीछे रिकॉर्डर लगाया था, AI की मदद से सऊदी नागरिक की पहचान

अमेरिका की AI कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को स्थित ऑफिस में जासूसी की कोशिश का मामला सामने आया है। कंपनी के एक कर्मचारी पर अधिकारियों की गोपनीय बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपाने का आरोप है। कंपनी ने अपने AI मॉडल की मदद से आरोपी की पहचान की, जिसके बाद FBI ने सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान को गिरफ्तार कर लिया। टॉयलेट पेपर में छिपाकर लगाया था रिकॉर्डर OpenAI के मुताबिक, 30 सितंबर को कंपनी के कर्मचारियों को सुरक्षा जांच के दौरान यह डिवाइस मिला था। यह अंगूठे के आकार का था। इसे सैन फ्रांसिस्को स्थित कंपनी के ऑफिस में एक कॉन्फ्रेंस रूम के टीवी के पीछे USB पोर्ट में लगाया गया था। डिवाइस को टॉयलेट पेपर में छिपाया गया था। इसमें माइक्रोफोन, अलग किया जा सकने वाला कैमरा सेंसर और डेटा स्टोर करने के लिए माइक्रो SD कार्ड था। कंपनी के मुताबिक, इसे 28 सितंबर के आसपास लगाया गया था। डिवाइस में मौजूद डेटा एन्क्रिप्टेड था, इसलिए उसकी रिकॉर्डिंग नहीं सुनी जा सकी। AI चैटबॉट से भी मदद ली थी अमेरिकी जांचकर्ताओं का आरोप है कि अलफोजान ने डिवाइस लगाने की तैयारी पहले से की थी। उसने एक प्रोडक्टिविटी टूल के जरिए कंपनी की इमारतों, मीटिंग रूम, अधिकारियों के आने-जाने के समय और बाहरी साझेदारों के साथ होने वाली बैठकों की जानकारी हासिल की। जांचकर्ताओं के मुताबिक, 24 से 30 सितंबर के बीच उसने अपनी पत्नी से जुड़े AI चैटबॉट अकाउंट का इस्तेमाल कर डिवाइस बनाने, उसे लगाने, ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच करने, छिपाने और दूर से एक्सेस करने के बारे में सवाल पूछे थे। जिस कॉन्फ्रेंस रूम में डिवाइस लगाया गया था, वहां OpenAI के अधिकारी गोपनीय मुद्दों पर चर्चा करते थे। शिकायत के मुताबिक, CCTV फुटेज में अलफोजान कई तारीखों पर उस कमरे के आसपास दिखाई दिया, जबकि उसे वहां जाने या उन बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। दूसरे कमरे में भी रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला जांचकर्ताओं के मुताबिक, 5 अक्टूबर को CCTV फुटेज में अलफोजान कॉन्फ्रेंस रूम में जाकर टीवी के पीछे देखते हुए नजर आया। उसी दिन उसने एक दूसरे कमरे में अपना बैग छोड़ दिया था। OpenAI के सुरक्षा कर्मचारियों ने बैग की जांच की तो उसमें अलफोजान का वॉलेट, पहचान पत्र और पहले डिवाइस जैसा एक दूसरा एन्क्रिप्टेड रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। आरोप है कि बाद में अलफोजान ने अपना बैग वापस लिया और शिकायत की कि उसका कुछ सामान गायब है। हालांकि, उसने दूसरे रिकॉर्डिंग डिवाइस का जिक्र नहीं किया। दोष साबित होने पर 5 साल तक की जेल 35 साल के अलफोजान सऊदी अरब के नागरिक हैं और अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की अनुमति रखते हैं। वे जुलाई 2025 में OpenAI से जुड़े थे। उन्हें 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और मंगलवार को पहली बार संघीय अदालत में पेश किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, दोष साबित होने पर उन्हें 5 साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर (करीब 2.3 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है। OpenAI ने नौकरी से निकाला, डेटा चोरी के सबूत नहीं OpenAI ने कहा कि फिलहाल उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि अलफोजान ने कंपनी के AI मॉडल के मूल डेटा, सोर्स कोड या ग्राहकों की जानकारी तक गलत तरीके से पहुंच बनाई या उसे बाहर भेजा। कंपनी ने घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अलफोजान वेंचर कैपिटल फर्म राएद वेंचर्स में भी वेंचर पार्टनर हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, OpenAI में वे इंजीनियरिंग लीड थे और AI एजेंट्स तथा डेटा प्लेटफॉर्म पर काम करते थे। इससे पहले वे मेटा, माईक्रोसॉफ्ट और SAP में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।

OpenAI ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाला गिरफ्तार:TV के पीछे रिकॉर्डर लगाया था, AI की मदद से सऊदी नागरिक की पहचान

अमेरिकी कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाले कर्मचारी को FBI ने गिरफ्तार कर लिया है। कर्मचारी ने कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपा दिया था। डिवाइस मिलने के बाद OpenAI ने AI मॉडल के जरिए आरोपी को पकड़ा। इसके बाद उसे 9 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी की पहचान सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान के रूप में हुई है। टॉयलेट पेपर में छिपाकर लगाया था रिकॉर्डर कंपनी के मुताबिक अलफोजान ने 28 सितंबर को USB पोर्ट में रिकॉर्डर लगाया था। इसे छिपाने के लिए टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था। 2 दिन बाद कर्मचारियों को सुरक्षा जांच के दौरान यह डिवाइस मिला था। डिवाइस में माइक्रोफोन, कैमरा सेंसर और डेटा स्टोर करने के लिए माइक्रो SD कार्ड था। डिवाइस में रिकॉर्डिंग इन्क्रिप्टेड थी, इसलिए उसे सुना नहीं जा सका है। AI चैटबॉट से डिवाइस बनाने में मदद ली FBI अधिकारियों का आरोप है कि अलफोजान ने डिवाइस लगाने की तैयारी पहले से कर रखी थी। उसने कंपनी के मीटिंग रूम, अधिकारियों के आने-जाने के समय और दूसरी कंपनियों के साथ होने वाली बैठकों की जानकारी जुटाई थी। उसने अपनी पत्नी के AI चैटबॉट अकाउंट पर कई सवाल पूछे थे। इनमें डिवाइस कैसे बनाना है, उसे कहां और कैसे लगाना है, उससे आवाज रिकॉर्ड हो रही है या नहीं, उसे कैसे छिपाना है और दूर से उसका इस्तेमाल कैसे करना है, जैसे सवाल शामिल थे। जिस मीटिंग रूम में यह डिवाइस लगाया गया था, वहां OpenAI के अधिकारी कंपनी से जुड़े अहम मामलों पर चर्चा करते थे। CCTV फुटेज में अलफोजान को कई दिनों तक कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास देखा गया। जबकि उसे वहां जाने या उन बैठकों में शामिल होने की इजाजत नहीं थी। दोष साबित होने पर 5 साल तक की जेल 35 साल के अलफोजान अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की अनुमति रखता है। वह जुलाई 2025 में OpenAI से जुड़ा था। 9 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद मंगलवार को अलफोजान को पहली बार फेडरव कोर्ट में पेश किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, दोष साबित होने पर उन्हें 5 साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर (करीब 2.3 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है। OpenAI ने नौकरी से निकाला, डेटा चोरी के सबूत नहीं OpenAI ने कहा कि फिलहाल उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि अलफोजान ने कंपनी के AI मॉडल के मूल डेटा, सोर्स कोड या ग्राहकों की जानकारी तक गलत तरीके से पहुंच बनाई या उसे बाहर भेजा। कंपनी ने घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अलफोजान वेंचर कैपिटल फर्म राएद वेंचर्स में भी वेंचर पार्टनर हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, OpenAI में वे इंजीनियरिंग लीड था और AI एजेंट्स और डेटा प्लेटफॉर्म पर काम करता था। इससे पहले अलफोजान मेटा, माईक्रोसॉफ्ट और जर्मनी की एक सॉफ्टवेयर कंपनी SAP में भी काम कर चुका है। उसने MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Delhi Protest: दिल्ली में CJP प्रदर्शन से पहले वकीलों की हिरासत पर बवाल, SCAORA और SCBA ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत से की ये अपील

सुप्रीम कोर्ट के पास शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के लिए जुटे वकीलों को हिरासत में लिए जाने की खबर ने न्यायिक व्यवस्था और विरोध-प्रदर्शन की आजादी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में लॉयर एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन (LAFC) ने भी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA), सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) और बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर शनिवार (10 अक्टूबर) को दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों पर चिंता जताई है।

CJI सूर्यकांत से दखल देने की अपील

10 अक्टूबर को जारी एक प्रेस रिलीज में LAFC ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन ने कहा कि हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उन्हें कानूनी मदद दी जाए और जिन वकीलों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

एसोसिएशन ने कहा, “शांतिपूर्ण विरोध का जवाब ताकत, गोपनीयता या अंधाधुंध हिरासत से नहीं दिया जा सकता।” साथ ही, एसोसिएशन ने कानून के मुताबिक जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

इसके साथ ही LAFC ने हिरासत में लिए गए हर वकील के नाम, उनके ठिकाने, सुरक्षा और उन्हें हिरासत में लेने के कानूनी आधार की जानकारी मांगी। एसोसिएशन ने उन वकीलों को रिहा करने की मांग की जिन्हें हिरासत में लेने का कोई ठोस और कानूनी आधार नहीं था। इसके अलावा, उन्हें वकील, परिवार के सदस्यों और जरूरी मेडिकल मदद तक पहुंच देने की भी मांग की।

पुलिस कार्रवाई से जुड़े सबूत सुरक्षित रखने की मांग

एसोसिएशन ने विरोध-प्रदर्शन, कथित बल प्रयोग और उसके बाद की हिरासत से जुड़े CCTV फुटेज, बॉडी-कैमरा रिकॉर्डिंग, पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड, हिरासत रजिस्टर और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने की मांग की। एसोसिएशन ने बल प्रयोग की खबरों—खासकर महिला वकीलों के खिलाफ—की एक तय समय-सीमा वाली, स्वतंत्र जांच की भी मांग की, और जहां भी गैर-कानूनी कार्रवाई साबित हो, वहां जवाबदेही तय करने और उचित राहत देने की बात कही।

प्रदर्शन करने पर वकीलों को परेशान न किया जाए

LAFC ने यह भी मांग की है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी वकील के खिलाफ बदले की भावना से FIR दर्ज न की जाए। वकीलों को डराने-धमकाने या उनके पेशेवर काम पर असर डालने वाली कार्रवाई से भी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

इसके अलावा, एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास भविष्य में होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाने की मांग की है, ताकि प्रदर्शन करने वालों के अधिकारों और सुरक्षा का ध्यान रखा जा सके।

इस बीच, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों और लोगों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को तुरंत हटाने की मांग की। एसोसिएशन ने मौजूदा हालात को “अघोषित इमरजेंसी” करार देते हुए कहा कि ये हालात इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाते हैं।

प्रस्ताव में कहा गया, “यह तय किया गया है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन पर लगाई गई मौजूदा पाबंदियों को तुरंत हटाया जाए। लोगों की आवाजाही पर लगाई गई सभी पाबंदियां भी फौरन हटाई जाएं, क्योंकि ये मौजूदा सरकार की असंवैधानिक और गैर-कानूनी गतिविधियां हैं।”

एसोसिएशन ने बताया कि यह प्रस्ताव 10 अक्टूबर को हुई एक आपातकालीन बैठक में सर्वसम्मति से पास किया गया। साथ ही, एसोसिएशन ने इस प्रस्ताव की एक कॉपी बॉम्बे बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्षों को भेजने का भी फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र लिखकर वकीलों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया है। एसोसिएशन ने कहा कि ऐसी खबरें सामने आई हैं कि पुलिस ने वरिष्ठ और युवा वकीलों के साथ-साथ महिला वकीलों को भी हिरासत में लिया। आरोप है कि हिरासत में लेने वाले कुछ पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी पर बैज भी नहीं लगा रखे थे।

एसोसिएशन ने हिरासत में लिए गए लोगों के ठिकाने का पता बताने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें वकीलों व परिवार के सदस्यों से मिलने की सुविधा देने की मांग की। साथ ही, यह भी कहा कि अगर हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

इसी तरह, SCBA ने भी CJI से अनुरोध किया कि वे अधिकारियों के साथ इस मामले पर बात करें, हिरासत में लिए गए वकीलों का पता लगाएं और हिरासत में लेने की परिस्थितियों व कथित बल प्रयोग की जांच करें। इस प्रस्ताव पर मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने हस्ताक्षर किए।

ये मांगें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रस्तावित “जंतर-मंतर 2.0” प्रदर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सामने आई हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया है, जिन पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और ‘विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया’ (Special Intensive Revision process) से जुड़े आरोप हैं।

मेट्रो पर लगी पाबंदियों को लेकर अवमानना ​​याचिका

इसके अलावा, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

10 अक्टूबर को सुबह 8.17 बजे डायरी नंबर 63801/2026 के तहत दायर इस याचिका में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा को प्रतिवादी बनाया गया है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 129 और ‘कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971’ की धारा 12 का हवाला दिया गया है।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कोर्ट के इस स्पष्टीकरण के बावजूद कि सेवाओं को रेगुलेट किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, मेट्रो स्टेशन के गेट बंद रखे गए। बता दें कि 9 अक्टूबर को CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा था कि “मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई जाएगी” और अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे ट्रांसपोर्ट से जुड़े नियमों का प्रचार करें और चार दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट सौंपें।

लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया गया

ANI के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने एहतियाती उपायों के तहत समूहों में आ रहे लगभग 500 लोगों को हिरासत में लिया और आपराधिक बैकग्राउंड वाले करीब 50 लोगों को पकड़ा। बता दें कि नई दिल्ली को 20 जोन में बांटा गया था और स्टेडियमों में डिटेंशन सेंटर बनाए गए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कनॉट प्लेस में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या लगभग 200 थी।

मुंबई से आने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और तीन अन्य वकीलों को बिना कारण बताए हिरासत में ले लिया गया। पार्टी ने गुरुग्राम स्थित आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की।

सुरक्षा के लिए RAF और CRPF की तैनाती

सुरक्षा व्यवस्था में रैपिड एक्शन फोर्स, दिल्ली पुलिस पिंक फोर्स और CRPF शामिल थे। साथ ही मोहन एस्टेट में ड्रोन, मजबूत बैरिकेड्स और स्पाइक स्ट्रिप्स भी तैनात किए गए थे। इस दौरान CJP ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों के लिए 12-सूत्रीय एडवाइजरी जारी कर हिंसा, तोड़फोड़, आगजनी, नफरत फैलाने वाले भाषण और अफवाहों से बचने, आपातकालीन रास्तों को खाली रखने, कानूनी निर्देशों का पालन करने और हिरासत में लिए जाने पर कानूनी सहायता लेने का आग्रह किया है।

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जिम बना अखाड़ा! बागपत में युवक ने नॉनस्टॉप जड़े 32 थप्पड़, CCTV वीडियो वायरल

जिम में लोग फिटनेस सुधारने, ताकत बढ़ाने और खुद को स्वस्थ रखने पहुंचते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के बागपत में एक जिम का माहौल उस वक्त बदल गया, जब दो लोगों के बीच हुई कहासुनी मारपीट में बदल गई। मामला इतना बढ़ा कि जिम के अंदर शुरू हुई लड़ाई सड़क तक पहुंच गई। वहां मौजूद लोग कसरत करने के बजाय झगड़ा रोकने की कोशिश करते नजर आए। अब घटना का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बागपत के अग्रवाल मंडी टटीरी इलाके में हुई, जो बागपत कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एक्सरसाइज के बीच शुरू हुई बहस, देखते ही देखते बढ़ा तनाव

रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय जिम में कई लोग अपनी कसरत कर रहे थे। इसी दौरान दो लोगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बहस बढ़ी तो दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई।

CCTV फुटेज में दोनों को जिम के अंदर व्यायाम करने वाले उपकरणों के आसपास लड़ते देखा जा सकता है। इस दौरान कुछ लोग बीच में आकर उन्हें अलग करने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। हालांकि, विवाद का अंत जिम के भीतर नहीं हुआ।

जिम से बाहर निकली लड़ाई, सड़क पर भी चले हाथ

बताया गया कि एक पक्ष के लोगों ने कथित तौर पर अपने साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद जिम के बाहर सड़क पर दोनों पक्षों के बीच दोबारा भिड़ंत हो गई। वहां भी लोग झगड़ा शांत कराने की कोशिश करते नजर आए।

इस घटनाक्रम ने आसपास मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। जिस विवाद को बातचीत से सुलझाया जा सकता था, वह कथित तौर पर कई लोगों के बीच झड़प में बदल गया। हालांकि, झगड़े की शुरुआत किस बात से हुई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या रही, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

CCTV फुटेज वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बागपत पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, केस दर्ज कर संबंधित थाने को जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

वृंदावन में दर्दनाक हादसा, पानी की टंकी में सफाई करने उतरे 4 छात्रों की जहरीली गैस से मौत, जांच में जुटी पुलिस

Mathura News: मथुरा के वृंदावन में मंगलवार रात एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। दरअसल यहां पर स्थित एक आवासीय संस्कृत गुरुकुलम में पानी की टंकी साफ करने उतरे चार छात्रों की संदिग्ध जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं, एक अन्य छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बता दें कि यह घटना चैतन्य विहार 2 स्थित पाणिनि संस्कृत गुरुकुल में रात करीब 10 बजे हुई। मरने वाले छात्रों की पहचान 22 साल के मनु कटारे, 19 साल के विशु शर्मा, 16 साल के आर्यन पांडे और 17 साल के देवांश शर्मा के तौर पर हुई है। पांचवें छात्र, रुद्राक्ष, को बचा लिया गया और उसका इलाज चल रहा है।

पुलिस ने दी जानकारी

पुलिस के मुताबिक, टंकी से बदबू आने के बाद छात्र उसमें उतरे थे। एक छात्र सबसे पहले अंदर गया लेकिन बाहर नहीं आया। इसके बाद उसे बचाने की कोशिश में चार अन्य छात्र भी अंदर गए, लेकिन वे भी बेहोश हो गए।

गुरुकुलम में मौजूद लोगों ने काफी मशक्कत के बाद पांचों छात्रों को टंकी से बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने चार छात्रों को मृत घोषित कर दिया। वहीं, रुद्राक्ष को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में बेहतर निगरानी और इलाज के लिए उसे दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक, रुद्राक्ष होश में है और बात भी कर पा रहा है।

SSP ने बताया कैसे हुआ पूरा हादसा

मथुरा के SSP श्लोक कुमार ने बताया कि यह घटना एक आवासीय संस्थान में हुई, जहां छात्र रहते और पढ़ते हैं। “टैंक से बदबू आ रही थी और छात्र उसे साफ करने के लिए उसमें उतरे थे।

जब पहला छात्र बाहर नहीं आया, तो चार अन्य छात्र अंदर गए। वे भी बाहर नहीं आए और बाद में उन्हें बचाया गया,” उन्होंने कहा। पुलिस ने शवों को मुर्दाघर भेज दिया है और मृतकों के परिवारों से संपर्क कर रही है। घटनाक्रम का पता लगाने के लिए परिसर में लगे CCTV फुटेज की भी जाँच की जा रही है।

इस संस्थान में 200 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं और लगभग 100 छात्र अभी परिसर में ही रहते हैं। यहां कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होती है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद गुरुकुल चलाने वाला व्यक्ति परिसर से चला गया। पुलिस ने कहा कि पीड़ितों के परिवारों की शिकायत के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

12 फीट गहरी टंकी में उतरे थे पांच छात्र

डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा, “स्कूल परिसर में पानी का एक सबमर्सिबल टैंक था जो लगभग 12 फीट गहरा था। उससे बदबू आ रही थी और गुरुकुल के पांच बच्चे उसे साफ करने के लिए टैंक में उतरे। जहरीली गैस की वजह से चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि एक बच्चा पूरी तरह सुरक्षित बच गया। इस बात की विस्तृत जांच की जा रही है कि यह हादसा कैसे और क्यों हुआ और गुरुकुल कौन चला रहा था। मुख्यमंत्री ने भी इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया है। यह बेहद दुखद घटना है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी।”

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नोएडा के DLF मॉल में घी, रिफाइंड ऑयल चुराते पकड़ी गई महिला, बिना पैसे दिए फरार होना चाहती थी महिला

नोएडा के सेक्टर 18 स्थित DLF मॉल ऑफ इंडिया के एक स्टोर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला पर कथित तौर घी और रिफाइंड कुकिंग ऑयल चुराने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो में एक महिला को मॉल की सिक्योरिटी टीम ने पकड़ रखा है और उसे लेकर जा रही है। बताया जा रहा है कि महिला मॉल के स्टोर से बिना चीजों का भुगतान किए सामान लेकर जाते हुए पकड़ी गई है। हालांकि, पुलिस और मॉल मैनेजमेंट ने यह कन्फर्म नहीं किया है कि महिला ने कोई सामान चुराया है।

लगभग 30 सेकंड के इस वीडियो में दो महिला सिक्योरिटी गार्ड कथित चोरी की आरोपी महिला को स्टोर के अंदर रोककर ले जाते हुए नजर आ रही हैं। महिला को बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढकते हुए देखा जा सकता है। घटना के दौरान, स्टोर के एक कर्मचारी को उस पर सामान चुराने का आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ कई दावे किए गए हैं कि महिला लगभग एक महीने से स्टोर आ रही थी और कथित तौर पर कई बार बिना पेमेंट किए घी और रिफाइंड ऑयल ले गई थी। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उसकी गतिविधियां स्टोर के CCTV कैमरों में कैद हो गई थीं।

हालांकि, इन आरोपों को सपोर्ट करने वाला कोई CCTV फुटेज वायरल वीडियो के साथ शेयर नहीं किया गया है। वीडियो में भी महिला को कोई सामान चुराते या बिना पेमेंट किए स्टोर से जाते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो के चर्चा में आने के बाद, सेक्टर 20 पुलिस से जानकारी मांगी गई। पुलिस ने कहा कि उनकी शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला ने स्टोर से लिए गए सामान के लिए पेमेंट किया था। अधिकारियों ने कहा कि मॉल मैनेजमेंट ने भी पुलिस को यही जानकारी दी। पुलिस ने कहा, “महिला ने सामान के लिए पेमेंट किया था। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप साबित नहीं हुए हैं।”

इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर कई तरह के रिएक्शन आए हैं, कई यूजर्स ने इस घटना को शेयर और कमेंट किया है। खबर है कि इसे 100 से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है। पुलिस ने कहा कि फुटेज से अभी सिर्फ यह पता चलता है कि महिला को सिक्योरिटी वालों ने रोका था और स्टोर के एक कर्मचारी ने उस पर चोरी का आरोप लगाया था। महिला को किन हालात में रोका गया और स्टोर के अंदर क्या हुआ, यह सिर्फ वायरल वीडियो से पक्के तौर पर पता नहीं लगाया जा सकता। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तब तक साबित सच नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि उनके पीछे सबूत न हों।

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Noida News: ‘मैं डिप्रेशन में हूं…’; नोएडा के सुपरनोवा बिल्डिंग की 43वीं मंजिल से कूदकर युवक ने दी जान, छलांग लगाने का दर्दनाक वीडियो वायरल

Noida suicide case: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थित सुपरनोवा बिल्डिंग के एक अपार्टमेंट की बालकनी से शनिवार (3 अक्टूबर) को एक युवक ने कूदकर अपनी जान दे दी। सेक्टर 94 में स्थित सुपरनोवा बिल्डिंग की 43वीं मंजिल से कूदने से ठीक पहले 28 साल के युवक ने कथित तौर पर AC रिपेयर करने वाले कर्मचारियों की एक टीम से कहा कि वह डिप्रेशन में है। मृतक की पहचान गुरुग्राम के मानेसर में IMT व्यू CGHS के टॉवर A के रहने वाले विनय कुमार जैन के बेटे संभव जैन के तौर पर हुई है। गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, जैन एक दिन के लिए सेक्टर 94 की स्पायर बिल्डिंग में अकेले आए थे।

यह घटना शनिवार सुबह सेक्टर 126 पुलिस स्टेशन के इलाके में हुई। पुलिस के अनुसार, जैन बालकनी की रेलिंग से लटके हुए थे। तभी पास के फ्लैट में काम कर रहे AC रिपेयर करने वाले कर्मचारियों की टीम ने उन्हें देखा। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों ने उनसे बात करने और उन्हें रेलिंग से पीछे हटने के लिए मनाने की कोशिश की। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान जैन ने उनसे कहा, “मैं डिप्रेशन में हूं।” इसके बाद वह बालकनी से कूद गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

घटना का एक वीडियो भी ऑनलाइन सामने आया है। फुटेज में जैन को बालकनी की रेलिंग से लटके हुए देखा जा सकता है। कुछ ही पल बाद वह बिल्डिंग से नीचे गिर जाते हैं। इस दौरान मौके पर कुछ लोग मौजूद थे। आत्महत्या से पहले युवक ने उनसे कहा, “नहीं गिर रहा सर…” और फिर अचानक उसने छलांग लगा दी। AC मैकेनिकों ने बचाने की पूरी कोशिश की। लेकिन वह सफल नहीं हो सके। घटना केयरटेकर के कैमरे में कैद हो गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद, सेक्टर 126 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जानकारी जुटाई। पुलिस ने बताया कि कानूनी कार्रवाई पूरी हो चुकी है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस अधिकारियों और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सबूत इकट्ठा किए। जांच के हिस्से के तौर पर बिल्डिंग और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है।

वीडियो वायरल हुआ

घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है। फुटेज में जैन बालकनी की रेलिंग से लटके हुए दिख रहे हैं और नीचे से लोगों की प्रतिक्रियाएं सुनी जा सकती हैं। कुछ ही पल बाद वह बिल्डिंग से नीचे गिर जाते हैं। तब से यह वीडियो ऑनलाइन काफी शेयर किया जा रहा है।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने घटना के समय बिल्डिंग के पास मौजूद लोगों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं को पता चला कि जैन मानसिक तनाव में थे। उनके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है। पुलिस ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।