Tiger Shroff Firing Case: टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करने वाले दो संदिग्धों की तस्वीर आई सामने, पुलिस ने जब्त की हमले में इस्तेमाल हुई बाइक

Tiger Shroff Firing Case: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना में शामिल हमलावरों की पहली तस्वीर सामने आई है। रविवार शाम मुंबई के जुहू इलाके में हुई इस घटना के बाद, जांचकर्ता हमलावरों की गतिविधियों का पता लगाने में जुटे हैं। घटनास्थल के पास ली गई इस तस्वीर में दो व्यक्ति सफेद शर्ट पहने दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से एक ने ‘प्यूमा’ (Puma) लोगो वाली काली टोपी पहनी हुई है। पुलिस इन दोनों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी तक इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है।

इस बीच, पुलिस ने हमले में इस्तेमाल किए गए दोपहिया वाहन को जब्त कर लिया है, जिसे आरोपी भागने से पहले अंधेरी रेलवे स्टेशन पर छोड़ गए थे।

CCTV खंगालने में जुटी मुंबई पुलिस

शुरुआती जांच से पता चला है कि यह वाहन मुंबई में रजिस्टर्ड है। जांचकर्ता इसके इतिहास का पता लगाने के लिए इसके रजिस्ट्रेशन विवरण, नंबर प्लेट, और चेसिस व इंजन नंबरों की जांच कर रहे हैं। वहीं, गोलीबारी के बाद आरोपी कहां गए और किस रास्ते से फरार हुए, इसका पता लगाने के लिए भी पुलिस CCTV फुटेज खंगाल रही है।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों हमलावरों के साथ एक तीसरा साथी भी था, जो मोटरसाइकिल से मौके पर पहुंचा था।

वीडियो में दिखे तीन हमलावर, एक ने चलाईं कई गोलियां

घटनास्थल के वीडियो में एक हमलावर कई राउंड गोलियां चलाता दिखाई दे रहा है। वहीं, दूसरा भी गोली चलाने की कोशिश करता नजर आ रहा है। हालांकि, वीडियो से यह साफ नहीं है कि उसकी बंदूक से गोली चली थी या नहीं। इस दौरान तीसरा साथी मोटरसाइकिल पर इंतजार करता दिख रहा है, ताकि वारदात के बाद तीनों वहां से जल्दी फरार हो सकें।

इसके बाद फुटेज में तीनों आदमी मोटरसाइकिल पर भागते हुए और हमले के बाद मौके से गायब होते हुए दिखाई देते हैं।

बता दें कि यह घटना तब हुई जब 36 वर्षीय अभिनेता टाइगर श्रॉफ एक फुटबॉल मैच खेलने के बाद वहां से निकल रहे थे। फिलहाल, लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के साथ काम करने वालों को नई धमकियां दी हैं।

हमले में ड्राइवर और ऑटो चालक घायल

गौरतलब है कि इस हमले में टाइगर तो सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर फिरदौस और चौहान नाम के एक ऑटो-रिक्शा चालक घायल हो गए।

बता दें कि जब गाड़ी पर हमला हुआ था उस दौरान उनका ड्राइवर घायल हो गया, जिसके बाद टाइगर ने उसे पीछे बैठाकर गाड़ी चलाकर खुद अस्पताल ले गए।

फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए 15 टीमें बनाई हैं, जिनमें मुंबई क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल हैं। जांचकर्ता इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं, जबकि एक फोरेंसिक टीम ने बैलिस्टिक सबूत जुटाए हैं और गाड़ी की जांच की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कुल कितनी गोलियां चलाई गईं।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस को जांच में तेजी लाने के दिए निर्देश

घटना के बाद, गृह विभाग संभाल रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती और श्रॉफ से बात की। उन्होंने पुलिस को जांच में तेजी लाने और आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया, साथ ही अभिनेता को भरोसा दिलाया कि उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

वहीं हमले के कुछ ही समय बाद, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अभिनेता से उनके घर पर मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बताया कि श्रॉफ के दाहिने हाथ पर गनपाउडर से जलने के निशान हैं।

मीडिया से बात करे हुए, शिंदे ने इस घटना को गंभीर बताया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का संकल्प लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि मुंबई में किसी भी गिरोह या व्यक्ति को गैंगवार फिर से शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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MP incident: ग्वालियर में आधी रात को मौत बनकर दौड़ा बेकाबू ट्रक, शीतला माता मंदिर के पास 13 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत,कई घायल

Gwalior incident: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में रविवार (18 अक्टूबर) तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई। जबकि 40 अन्य घायल हो गए। हादसा शीतला माता मंदिर के पास उस समय हुआ, जब श्रद्धालु मंदिर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान धान से लदा एक बेकाबू ट्रक पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ते हुए श्रद्धालुओं के बीच जा घुसा और करीब 50 से अधिक लोगों को कुचल दिया। इसके बाद ट्रक मंदिर के गेट और बाहरी दीवार से टकरा गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

रात करीब 1:30 बजे हुआ हादसा

हमारे सहयोगी न्यूज 18 के मुताबिक, यह दर्दनाक दुर्घटना रविवार तड़के करीब 1:30 बजे हुई। ट्रक छिनोर की तरफ से आ रहा था और उसमें धान लदा हुआ था। बताया जा रहा है कि सड़क के एक ढलान वाले हिस्से पर ट्रक चालक वाहन पर कंट्रोल खो बैठा। इस रास्ते पर भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी।

ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) धर्मवीर सिंह के मुताबिक, ट्रक पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ा और अचानक अनियंत्रित होकर नीचे की ओर आ गया। रास्ते पर मौजूद श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। इसके बाद ट्रक मंदिर के बाहरी गेट और दीवार से टकरा गया।

40 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया, 13 की मौत

हादसे के बाद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि दुर्घटना के बाद कुल 40 से अधिक लोगों को अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से 13 की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक, पांच से छह घायलों की हालत गंभीर बताई गई है। कुछ लोगों को फ्रैक्चर समेत गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अन्य घायलों का भी उपचार जारी है। हादसे में मौके पर तैनात दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

नवरात्रि के दौरान लगाई गई थी बैरिकेडिंग

ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि दुर्घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस और अन्य वाहनों को मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सड़क पर पुलिस चेकपॉइंट और बैरियर लगाए गए थे। इसके बावजूद प्रतिबंधित रास्ते पर ट्रक कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है। कलेक्टर के अनुसार, यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वाहन बैरिकेडिंग पार करके अंदर कैसे आया और किस वजह से अनियंत्रित हुआ।

ट्रक की तकनीकी जांच के निर्देश

हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की टीम को ट्रक की तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वाहन में कोई तकनीकी खराबी थी या दुर्घटना के पीछे कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। कलेक्टर ने बताया कि घायलों की स्थिति का आकलन करने के लिए अस्पताल में मेडिकल टीमें सीटी स्कैन और एक्स-रे कर रही हैं। इन जांचों के आधार पर आगे का इलाज तय किया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया आंखों देखा हाल

हादसे में घायल हुए एक व्यक्ति के भाई ने बताया कि दुर्घटना अचानक हुई। ट्रक काफी तेज रफ्तार से लोगों की ओर आया। प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, ट्रक जरूरत से ज्यादा लदा हुआ दिखाई दे रहा था। उसने मंदिर के पास टकराने से पहले सड़क किनारे की कुछ दुकानों तथा लोगों को भी अपनी चपेट में ले लिया। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हादसा रात करीब एक बजे हुआ। उसने कुछ लोगों को मौके पर ही दम तोड़ते देखा। उसके भाई को भी चोटें आई हैं। उसने कहा कि दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल था।

जांच में जुटा प्रशासन

फिलहाल, ग्वालियर प्रशासन और पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच के प्रमुख पॉइंट में प्रतिबंधित सड़क पर ट्रक की एंट्री, बैरिकेडिंग पार करने की परिस्थितियां और वाहन के अनियंत्रित होने की वजह शामिल हैं। इस हादसे ने नवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और भारी वाहनों की आवाजाही पर निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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महिला आरक्षण का भी भरोसा

एसआईआर और परिसीमन के बाद भाजपा के चुनाव जीतने के भरोसे का एक आधार महिला आरक्षण की तैयारियां हैं। हालांकि नरेंद्र मोदी सरकार ने महिला आरक्षण का दांव 2034 के चुनाव के लिए रखा था। तभी 2023 में महिला आऱक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन कानून को पास करते समय उसमें जनगणना और परिसीमन की शर्त जोड़ दी गई। लेकिन 2024 के चुनाव नतीजों के बाद अब सरकार को बेचैनी है कि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों 2024 के चुनाव में ही लागू किया जाएगा। अगर परिसीमन का फैसला होता है और सीटों की संख्या बढ़ा कर साढ़े आठ सौ की जाती है तो उसमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 33 फीसदी आरक्षण के अलावा भी अनारक्षित सीटों पर महिलाओं को टिकट मिलेगी। सो, महिला सदस्यों की संख्या 40 फीसदी तक जा सकती है।

पिछले एक दशक से ज्यादा समय के अपने शासन में नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को एक अलग और स्वतंत्र वोट समूह के रूप में तैयार करने और उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए कई काम किए हैं। यह भी ध्यान रखने की बात है कि पिछले दो दशक में महिलाओं की स्वतंत्र कांस्टीट्यूएंसी विकसित हुई है। अलग अलग राज्यों के नेताओं ने भी इसके लिए काम किया। बिहार में नीतीश कुमार, मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, दिल्ली में अरविंद केजरीवाल आदि की मिसाल दी जा सकती है। राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को अपने साथ जोडऩे के लिए काम किए। शौचालय की योजना से लेकर लखपति दीदी तक कई योजनाएं चलाई गईं।

लोकसभा और राज्यों के चुनाव के बाद पोस्ट इलेक्शन डेटा एनालिसिस में सीएसडीएस और अन्य एजेंसियों ने महिला वोट का जो आकलन किया है उसका निष्कर्ष यह है कि महिलाएं मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को अपेक्षाकृत थोड़ा ज्यादा वोट करती हैं। महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत भी हर चुनाव के साथ बढ़ रहा है। यह भी माना जा रहा है कि महिलाएं जाति के बंधन से निकल कर वोट कर रही हैं। तीन तलाक को अवैध करने के फैसले के बाद यह भी दावा किया जाता है कि मुस्लिम महिलाओं के भी कुछ वोट भाजपा को मिलते हैं।

अब भारतीय जनता पार्टी को ऐसा लग रहा है कि अगर इस समय लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू कर दिया जाए तो कम से कम एक चुनाव में तो महिलाओं का वोट थोक में हासिल किया जा सकता है। हालांकि यह भाजपा और नरेंद्र मोदी सरकार की सदिच्छा है, जो हो सकता है कि पूरी नहीं भी हो। कई बार इस तरह के दांव उलटा पड़ जाते हैं। कांग्रेस जब केंद्र में थी तब उसने 2014 के चुनाव से ठीक पहले आंध्र प्रदेश का विभाजन यह सोच कर किया था कि इससे 10 साल की एंटी इन्कम्बैंसी खत्म होगी और अगर आंध्र में नहीं तो नए राज्य तेलंगाना में तो कांग्रेस जरूर जीत जाएगी। लेकिन अगले दो चुनाव तक वह तेलंगाना तो नहीं ही जीती, आंध्र प्रदेश से साफ अलग हो गई। तीन चुनाव से आंध्र में कांग्रेस का खाता नहीं खुल रहा है।

बहरहाल, भाजपा और नरेंद्र मोदी एसआईआर के बाद परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में हैं। इससे भरोसा बना है कि 2029 हर हाल में जीतेंगे। विपक्ष महिला आरक्षण के समर्थन में है। लेकिन उसकी कई पार्टियां आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर महिला आरक्षण के भीतर एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण नहीं मिला तो संभव है कि लोकसभा और विधानसभाओं में इन जातीय समूहों का प्रतिनिधित्व कम हो। अगर यह मुद्दा बनता है तो भाजपा को लेने के देने पड़ सकते हैं। वैसे भाजपा अब कांग्रेस व अन्य प्रादेशिक पार्टियों से ज्यादा जातीय मामलों की चैंपियन बन गई है। हिदुत्व से ज्यादा भाजपा नेता अब जाति की बात कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी को ओबीसी और एससी, एसटी का नया मसीहा बनाया जा रहा है।

4 वजहों से Sensex में 766 प्वाइंट्स की रिकवरी, 25 सितंबर के बाद Nifty फिर 23100 के पार

Share Market Rally: वैल्यू बाइंग और आईटी सेक्टर में खरीदारी के दम पर शुरुआती उठा-पटक से उबरते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तर से शानदार रिकवरी की। दिन के निचले स्तर से सेंसेक्स 766 प्वाइंट्स ऊपर चढ़ा तो निफ्टी भी फिर 23100 के पार पहुंच गया। इससे पहले निफ्टी ने आखिरी बार 25 सितंबर को 23100 का लेवल छुआ था और इसी के पार बंद भी हुआ था। ब्रोडर लेवल पर भी तेज रिकवरी हुई है। निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी की गिरावट से उबरते हुए फ्लैट हो गया तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी की गिरावट से रिकवर होते हुए ग्रीन जोन में पहुंच गया।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:39 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 398.14 प्वाइंट्स यानी 0.54% की बढ़त के साथ 74,713,75 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 131.35 प्वाइंट्स यानी 0.57% के उछाल के साथ 23,128.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 765.79 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,778.78 और निफ्टी दिन के निचले स्तर से 236.05 प्वाइंट्स उबरते हुए 23,149.85 तक पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स 302.62 प्वाइंट्स गिरकर 74,012.99 और निफ्टी 83.55 प्वाइंट्स फिसलकर 22,913.80 तक आ गया।

Share Market Rally: ये है वजह

वैल्यू बाइंग

मार्केट में शुरुआती गिरावट का निवेशकों ने फायदा उठाते हुए खरीदारी की, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

IT Sector ने खींच लिया ऊपर

आईटी सेक्टर ने मार्केट को आज शानदार तरीके से सपोर्ट दिया और निफ्टी आईटी फिलहाल 3% से अधिक मजबूत है। साथ ही बैंकिंग शेयरों ने भी शानदार वापसी की और मार्केट को सपोर्ट किया। निफ्टी पीएसयू बैंक शुरुआती गिरावट से उबरते हुए आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी बढ़त है। निफ्टी मेटल तो 1% से अधिक ऊपर चढ़ गया और निफ्टी फार्मा भी ग्रीन है। हालांकि निफ्टी एफएमसीजी अभी भी आधे फीसदी कमजोर है।

कच्चे तेल में गिरावट

सैंक्शन लगे देशों से तेल की सप्लाई पर अमेरिकी प्रतिबंधों के ढील की संभावना पर कच्चा तेल नरम पड़ा, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिसलकर प्रति बैरल $105 के करीब आ गया।

टेक्निकल रीजन

एनालिस्ट्स के मुताबिक जब तक निफ्टी 22,900 के ऊपर है, मार्केट में तेजी की गुंजाइश रहेगी। बजाज ब्रोकरिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि निफ्टी अब 23000-23100 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 23500 की तरफ बढ़ सकता है। वहीं अगर इस रेजिस्टेंस के ऊपर निफ्टी टिक नहीं पाता है तो 22,500-23,100 की रेंज में कंसालिडेशन दिख सकता है। पबित्रों के मुताबिक जब तक निफ्टी 22,500 के पार है, नियर टर्म में इसमें पुलबैक रैली आ सकती है।

कोटक नियो के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि इंट्रा-डे में मार्केट आउटलुक पॉजिटिव है और गिरावट पर खरीदारी तो रैली पर सेलिंग की स्ट्रैटेजी अपनाई जा सकती है। श्रीकांत का कहना है कि निफ्टी/सेंसेक्स के लिए नीचे की तरफ 22,875/74,000 और 22,800/73,700 अहम सपोर्ट जोन हैं तो दूसरी तरफ ऊपर की तरफ 23,100–23,200/74,500–74,800 अहम रेजिस्टेंस एरिया हैं। हालांकि श्रीकांत का यह भी कहना है कि अगर मार्केट 22,800/73,700 के नीचे आता है तो सेंटिमेंट बदल सकता है और ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजिशन से बाहर निकल सकते हैं।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शिवराज धरने पर बैठ गए!

Shivraj Singh Chauhan

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अपनी पार्टी की राज्य सरकार से ठन गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उनका विवाद अब खुल कर सामने आ गया है। दोनों एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। यह मामला बहुत दिन से चल रहा था लेकिन पिछले दिनों जब नए संगठन महामंत्री चंद्रशेखर भोपाल गए और पार्टी नेताओं के साथ बैठक की तब मामला मीडिया में आ गया। वहां शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कलेक्टर फोन नहीं उठाते हैं। इस पर चंद्रशेखर ने दोनों समझाया और सारी गुटबाजी तीन महीने में खत्म करने को कहा।

लेकिन उसके बाद मामला और तेज हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चुनाव जिताने वाली ‘लाड़ली बहना’ योजना पर ही सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना पर बहुत खर्च हो रहा है और राज्य की वित्तीय हालत बिगड़ रही है। ध्यान रहे शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना की शुरुआत की थी। इसके बाद एक दिन मामला और आगे बढ़ा, जब शिवराज सिंह चौहान अपने चुनाव क्षेत्र के बुधनी गांव में एक दर्जन आदिवासी परिवारों का घर तोड़े जाने के खिलाफ धरने पर बैठ गए। वन विभाग इन लोगों का घर तोड़ रहा है, जिसे शिवराज सिंह चौहान ने ‘जुल्म की पराकाष्ठा’ कहा है। यह पार्टी के भीतर सिर्फ अनुशासन की कमी दिखाने का मामला नहीं है। यह सत्ता का संघर्ष है। शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते उनको भी उमा भारती और दूसरे नेताओं का ऐसा विरोध झेलना पड़ा था। दिल्ली में मदनलाल खुराना सीएम पद से हटाए जाने से इतने आहत थे कि एक बार वे भी अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे।

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

Samajwadi Party Rebel MLAs: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले अमेठी में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेठी जनपद के गौरीगंज स्थित मंगलम भवन के सामने मैदान में आयोजित एक विशाल राजनीतिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण कर ली है। अमेठी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी भारी संख्या में दिग्गज नेताओं ने दल-बदल किया है।

​समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी

​भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी मंगलवार को पहली बार अमेठी पहुंचीं। उनकी अगुवाई और मौजूदगी में यह बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से पंकज चौधरी (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष), ​अमरपाल मौर्य (पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष), ​दारा सिंह चौहान (यूपी सरकार के मंत्री) तथा कई अन्य सांसद, विधायक और स्थानीय वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। 

कौन हैं भाजपा में शामिल होने वाले सपा विधायक?

  • ​राकेश प्रताप सिंह : गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के सपा विधायक। पार्टी विरोधी गतिविधियों और रामचरितमानस विवाद के बाद सपा ने इन्हें निष्कासित कर दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने खुलकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी का समर्थन किया था और गौरीगंज से अयोध्या तक राम मंदिर पदयात्रा भी निकाली थी।
  • ​अभय सिंह (अभय प्रताप सिंह) : गोसाईगंज (अयोध्या) से विधायक हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह और पिता भगवान बख्श सिंह समेत भारी संख्या में समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।
  • ​विनोद चतुर्वेदी : जालौन के कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक, जो अपने कई समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।

​क्या कहा राकेश प्रताप सिंह ने?

​सपा से निष्कासित और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने पर स्पष्ट कहा कि वे ‘राष्ट्र और राम’ के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इन तीनों ही विधायकों ने पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था।

​राजनीतिक समीकरण और आगे की राह

​यह पूरा घटनाक्रम अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीतकर सदन पहुंचे इन तीनों कद्दावर विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाना, समाजवादी पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका है। वहीं, आगामी 2027 के चुनावों से पहले इस बड़े फेरबदल से भाजपा की ज़मीनी पकड़ कितनी मजबूत होती है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल अमेठी का यह सियासी घटनाक्रम राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने थामा कांग्रेस का दामन

उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बुधवार विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत की मौजूदगी में चकराता, सहसपुर, विकास नगर से कई लोगों ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने वालों में पूर्व प्रत्याशी विधानसभा चकराता दर्शन लाल डोभाल, सेवानिवृत्त आईजी पुलिस अनन्तराम चौहान, कैप्टन ताजवर सिंह नेगी, कैप्टन नारायण सिंह रावत, कैप्टन गंगा सिंह, कैप्टन हीरा बल्लभ पांडे, कैप्टन सोबन सिंह, जितेंद्र सिंह, शशांक भट्ट आदि प्रमुख हैं।

श्री गोदियाल ने इस अवसर पर कहा कि आज देश एवं प्रदेश की जनता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जनविरोधी नीतियों, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार तथा बिगड़ती कानून व्यवस्था से त्रस्त है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार के शासनकाल में बेरोजगार नौजवान रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों से प्रदेश की मातृशक्ति स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही है तथा किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सरकार की नीतियों से परेशान हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में भारी अन्तर है। प्रदेश की जनता ने जिस विश्वास और उम्मीद के साथ भाजपा को सत्ता सौंपी थी, सरकार उन अपेक्षाओं पर खरी उतरने में पूरी तरह विफल रही है। विकास के नाम पर केवल घोषणाएं की जा रही हैं, जबकि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता भाजपा सरकार के कुशासन से मुक्ति चाहती है। प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं तथा सरकार जनसमस्याओं के समाधान के बजाय प्रचार-प्रसार और राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नाकामियों से जनता में भारी आक्रोश है और आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदेश की जनता भाजपा को सत्ता से बेदखल कर कांग्रेस की सरकार बनाने का मन बना चुकी है।

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चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सिंह ने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देशभर में लोकतंत्र, संविधान और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए निरन्तर संघर्ष कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा और जनहित के मुद्दों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। इसी का परिणाम है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता कांग्रेस की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं को संगठन में पूरा सम्मान दिया जाएगा तथा उनके राजनीतिक एवं सामाजिक अनुभवों का लाभ पार्टी संगठन को मजबूत बनाने में लिया जाएगा।

प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। प्रदेश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पलायन जैसे ज्वलन्त मुद्दों पर सरकार के पास कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब भाजपा के खोखले वादों और झूठी घोषणाओं से ऊब चुकी है तथा कांग्रेस की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी पूरी एकजुटता एवं मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवार में नए नेताओं के शामिल होने से पार्टी का जनाधार और अधिक मजबूत होगा तथा भाजपा सरकार के विरुद्ध चल रहे जनसंघर्ष को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर विधायक लखपत सिंह बुटोला, प्रदेश उपाध्यक्ष लालचन्द शर्मा, अभिषेक सिंह, राजेन्द शाह, नवीन जोशी, विनोद चौहान, प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह, अमेन्द्र बिष्ट, अखिलेश उनियाल, प्रशांत खंडूरी, नरेशानन्द नौटियाल आदि पार्टी नेता उपस्थित रहे।

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Share Market Fall: डे-हाई से Sensex टूटा 600 प्वाइंट्स, Nifty आया 22600 के नीचे

Share Market Fall: घरेलू स्टॉक मार्केट में आज मिला-जुला रुझान दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी रेड से ग्रीन और ग्रीन से रेड जोन में झूलने लगे। एक तरफ विदेशी निवेशकों की बिकवाली सुस्त होने और टैक्सेशन में राहत की उम्मीद इसे ऊपर ले जाने की कोशिश में है तो दूसरी तरफ मुनाफावसूली और तेल की महंगाई इसे नीचे खींच रही। हालांकि शुरुआती सुस्ती के बाद सेंसेक्स डे-हाई से 600 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22600 के नीचे आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रौनक है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की बढ़त है।

फिलहाल 01:07 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 313.37 प्वाइंट्स यानी 0.43% की गिरावट के साथ 72,720.41 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 116.45 प्वाइंट्स यानी 0.51% की फिसलन के साथ 22,605.50 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 161.48 प्वाइंट्स चढ़कर 73,195.26 तक पहुंचा था लेकिन शुरुआती हल्की उठा-पटक के बाद यह एक तरफ फिसलता चला गया और डे-हाई से प्वाइंट्स टूटकर 616.51 प्वाइंट्स गिरकर 72,578.75 तक आ गया तो दूसरी तरफ निफ्टी भी पहले 36.00 प्वाइंट्स चढ़कर 22,757.95 तक पहुंचा जिससे यह 199.00 प्वाइंट्स फिसलकर 22,558.95 तक आ गया।

किन वजहों से मार्केट आ रहा नीचे

मुनाफावसूली

एक कारोबारी दिन पहले मार्केट में शानदार रौनक रही। सेंसेक्स और निफ्टी डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक मजबूत हुए। ऐसे में ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली से मार्केट पर दबाव बना और यह नीचे फिसलने लगा।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली

एक कारोबारी दिन पहले 13 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने लगातार 13वें दिन खरीदारी से अधिक बिकवाली की। 13 अक्टूबर मंगलवार को FIIs ने करीब ₹1305 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की।

तेल की कीमतों में उछाल

हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच लड़ाई ने सप्लाई की चिंताएं बढ़ाई हैं और कच्चे तेल में उबाल आया तो मार्केट में इसकी आंच महसूस हुई। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रू़ड उछलकर प्रति बैरल $107 के करीब पहुंच गया।

India VIX में उछाल

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX में उछाल से मार्केट पर दबाव बढ़ा है। फिलहाल यह 2.33% की तेजी के साथ 14.45 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

किन वजहों से मार्केट को मिल रहा सपोर्ट

LTCG और STT पर सरकार के नजरिए से सपोर्ट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर सभी पक्षों की राय सुनना चाहेगी। इसने मार्केट में जोश भर दिया। वित्त मंत्री ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा कि बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार किन सुझावों पर विचार करेगी।

RBI की कोशिशों से FIIs की बिकवाली सुस्त

विदेशी निवेशकों ने लगातार 13वें दिन घरेलू मार्केट में बिकवाली की। हालांकि जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी को रोकने के लिए आरबीआई के उपायों से पिछले दो ट्रेडिंग सेशन में रुपये में 1.5% की मजबूती आई है, जिससे मार्केट में FIIs की बिकवाली को काफी कम करने में मदद मिली है।

टेक्निकल वजह

एनालिस्ट्स के मुताबिक बुलिश रुझान के लिए निफ्टी को 22,750 के पार जाना होगा। कोटक नियो के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि निफ्टी/सेंसेक्स के लिए 22,480/72,500 अहम सपोर्ट लेवल है और ऊपर की तरफ 22,850/73,500 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर रहा है। श्रीकांत के मुताबिक 22,850/73,500 के ऊपर सफल ब्रेकआउट के बाद मार्केट 23,000/74,000 की तरफ बढ़ सकता है लेकिन अगर नीचे की तरफ 22,480/72,500 का लेवल टूटटा है तो बिकवाली की आंधी चल सकती है।

चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि नियर टर्म में आउटलुक पॉजिटिव है लेकिन उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक पिछले कारोबारी सत्र में जबरदस्त रिकवरी से मार्केट का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली इस दबाव भी डाल रही है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से मार्केट को सपोर्ट मिल रहा है लेकिन बीच-बीच में प्रॉफिट बुकिंग से मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कई नेताओं के प्रयास जारी हैं

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता संसदीय बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं। जिनको संगठन में या सरकार में जगह मिल गई है वे भी प्रयास कर रहे हैं। कई मुख्यमंत्री इस कोशिश में लगे हैं तो कई केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी प्रयास कर रहे हैं। हालांकि संसदीय बोर्ड को लेकर अब पहले वाली बात नहीं है। पहले इसका सदस्य होने का मतलब था कि आप शीर्ष नेतृत्व हैं। लेकिन पिछली बार जो बदलाव हुए थे उसमें जिन नए लोगों को शामिल किया गया था उनमें एक बीएस येदियुरप्पा को छोड़ कर कोई अपने राज्य के भी शीर्ष 10 नेताओं में होने का दावा नहीं कर सकता। संसदीय बोर्ड का सदस्य बन जाने के बाद भी उनका राजनीतिक कद जस का तस रहा था। वैसे तो अब भाजपा के पदाधिकारियों या केंद्रीय मंत्रियों की भी हैसियत पहले वाली नहीं रह गई है। लेकिन भाजपा के जो नेता अपने दम पर बड़े हैं वे जरूर अपना कद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

तभी इस बात की बहुत चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस संसदीय बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं। दोनों अपने अपने स्तर पर जोर लगा रहे हैं। सीएम रहते शिवराज सिंह चौहान संसदीय बोर्ड के सदस्य बने थे। लेकिन उसके बाद किसी सीएम को मौका नहीं मिला है। हालांकि जरूरी नहीं है कि दो सबसे मजबूत मुख्यमंत्रियों में से किसी को जगह मिले। हो सकता है कि रेखा गुप्ता शामिल हो जाएं, जिससे महिला औ मुख्यमंत्री दोनों कोटा पूरा हो जाए। वैसे शुभेंदु अधिकारी, हिमंत बिस्वा सरमा और नायब सिंह सैनी के नाम की भी चर्चा है। यह भी संभव है कि पर्ची के जरिए सीएम बने किसी नेता को शामिल कर लिया जाए।

बहरहाल, आदिवासी के तौर पर असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नाम की चर्चा है। संगठन महामंत्री के अलावा एक और महामंत्री इसमें शामिल हो सकता है। विनोद तावड़े सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। दलित चेहरे के तौर पर यूपी, बिहार का कोई जाटव या रविदास समाज का नेता हो सकता है। केंद्रीय मंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान और पीयूष गोयल की चर्चा हो रही है। अल्पसंख्यक के रूप में पंजाब से किसी सिख नेता को भी जगह मिलने की चर्चा है।

MP News: ‘मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है’; अपनी ही सरकार पर क्यों बरसे शिवराज सिंह चौहान?

MP News: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार (11 अक्टूबर) को वन विभाग और जिला प्रशासन पर अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के आदिवासी बहुल कोसमी गांव में गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ने, फसलें नष्ट करने और कुएं को मिट्टी से भरने का आरोप लगाया। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के इस गांव में हुई इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कोसमी पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पूरे मामले पर कड़ा आक्रोश जताया। चौहान ने कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। सीहोर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री अपनी ही सरकार पर हमलावर नजर आए।

‘अन्याय की पराकाष्ठा हुई है’

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है। सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थी, वहां बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। उनके घर गिरा दिए गए। उनके घर के नीचे उनकी फसल दबा दी गई। उनकी मेहनत कुचल दी गई। उनके वर्षों पुराने घर थे, आज तबाह कर दिए गए। जिन्होंने ऐसा किया वे हृदयहीन हैं, संवेदनशून्य हैं… ये अन्याय की अति है। उन्हें भगवान भी माफ नहीं करेगा। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की हर संभव प्रयास करेंगे। मैं मुख्यमंत्री के सामने भी ये सारी स्थिति रखूंगा।”

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, “आदिवासियों की मेहनत तबाह कर दी गई, उन्हें बेघर कर दिया गया। इनके पास कुछ नहीं बचा। जमीन के टुकड़े के अलावा इनके पास कुछ नहीं था। वन विभाग के लोगों ने भी ये किया है, ये जुल्म की पराकाष्ठा है। अगर उनके अपने बच्चे, मां और पत्नी को इस तरह रोना पड़े, तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा?” उन्होंने कहा कि हम ये सभी बातें मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे। इनके हितों के लिए, इन्हें न्याय दिलाने के लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कोसमी चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी के अंतर्गत आता है। शिवराज जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब वह विधानसभा में बुधनी का प्रतिनिधित्व करते थे। वन विभाग और जिला प्रशासन ने कुछ महीने पहले भी इस प्रकार की कार्रवाई की कोशिश की थी तब चौहान ने अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रविवार को यह कार्रवाई की गई। शिवराज के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने घटनास्थल से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी दी जानकारी

उन्होंने प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर गरीब परिवारों के घर तोड़े जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे। बयान के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे। साथ ही, जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।” शिवराज ने गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ने, उनकी फसलें नष्ट होने और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

अधिकारियों पर भड़के

चौहान ने मौके पर वन विभाग और प्रशासन के किसी भी बड़े अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कार्रवाई में केवल घर ही नहीं टूटे, बल्कि पीड़ित परिवारों की आजीविका पर भी चोट पहुंची है। मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस प्रकरण को शिवराज और मोहन यादव की आपसी खींचतान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चक्कर में गांव के गरीब पिस रहे हैं।

कांग्रेस का रिएक्शन

कांग्रेस नेता सिंघार ने कोसमी में की गई कार्रवाई का एक वीडियो शेयर करते हुए X पर एक पोस्ट में कहा, “मोहन-मामा की आपसी खींचतान में उजड़ रहे आदिवासी परिवार।” उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र सीहोर के ग्राम कोसमी में बरेला आदिवासी समुदाय के परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं और उनके मकान तोड़े जा रहे हैं। सिंघार ने आरोप लगाया, “BJP सरकार की आपसी खींचतान के कारण गरीब आदिवासी परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।”

वहीं, मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने X पर लिखा, “श्री शिवराज जी! आपके शब्द ‘शपथ-पत्र’ हैं! सबूत हैं कि मप्र ‘बेलगाम’ हो गया है! लेकिन, बयान ही काफी नहीं है! जनता के सामने आना चाहिए कि आदिवासी परिवारों को उजाड़ने वाला ‘नरपिशाच’ कौन है? ये सरकारी अत्याचारी कहां से नियंत्रित एवं संचालित हो रहे हैं?”

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कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, “मप्र यह भी जानना चाहता है, क्या भाजपा की आंतरिक सियासत में इतनी अदावत हो चुकी है कि पूर्व मुख्यमंत्री की हर बात को नजरअंदाज करना, मौजूदा मुख्यमंत्री का धर्म बन गया है? बहरहाल, पीड़ित परिवारों को BJP नेताओं की बात, बयान, बवाल से कोई लेना देना नहीं! उन्हें पुनर्वास मिले, मुआवजा मिले! यह विश्वास भी मिले, दोषी को दंड जरूर मिलेगा!”