Video: ऑफिस में जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ सकता है भारी? महिला ने बताया क्यों बचाकर रखें 20% एनर्जी

कॉर्पोरेट दुनिया में मेहनती और हमेशा उपलब्ध रहने वाले कर्मचारी को अक्सर जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन क्या हर दिन जरूरत से ज्यादा काम करना आगे चलकर आपके लिए ही परेशानी बन सकता है? इसी सवाल को लेकर एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि अगर कर्मचारी लगातार तय समय से पहले काम पूरा करते हैं या ऑफिस के बाद भी मैसेज का जवाब देते रहते हैं, तो धीरे-धीरे मैनेजमेंट उसी प्रदर्शन को सामान्य मानने लगता है। जो काम कभी अतिरिक्त प्रयास था, वही बाद में रोज की अपेक्षा बन सकता है। उन्होंने कर्मचारियों को अपनी पूरी ऊर्जा हर दिन खर्च करने के बजाय कुछ हिस्सा बचाकर रखने की सलाह दी।

उनके मुताबिक, यह काम से बचने की बात नहीं है, बल्कि मुश्किल दिनों के लिए खुद को तैयार रखने का तरीका है। सोशल मीडिया पर उनकी इस सोच को लेकर कई लोगों ने सहमति जताई और अपने ऑफिस अनुभव भी साझा किए।

‘आज जल्दी काम किया तो कल भी उतनी ही उम्मीद होगी’

इंस्टाग्राम पर अव्रीन ने एक वीडियो शेयर कर कर्मचारियों को काम और निजी जिंदगी के बीच सीमाएं तय करने की सलाह दी। उन्होंने समझाया कि अगर कोई कर्मचारी छह घंटे में पूरा होने वाला काम सिर्फ तीन घंटे में खत्म कर देता है, तो मैनेजर भविष्य में उसी काम को तीन घंटे में पूरा होने वाला मान सकते हैं। यानी एक बार दिखाई गई अतिरिक्त तेजी आगे चलकर रोज की अपेक्षा बन सकती है।

रात 10 बजे जवाब दिया तो रोज की उम्मीद?

अव्रीन ने ऑफिस के मैसेज का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी कभी-कभार रात 10 बजे Teams पर जवाब देता है, तो इससे दूसरों को यह लग सकता है कि वह उस समय भी उपलब्ध रहता है। उनका कहना है कि कॉर्पोरेट माहौल में एक अनकही धारणा बन सकती है आपका सबसे अच्छा प्रदर्शन ही धीरे-धीरे आपका सामान्य प्रदर्शन मान लिया जाता है।

‘80% दो, 20% अपने लिए बचाकर रखो’

महिला ने कर्मचारियों को हर दिन अपना पूरा दम लगाने के बजाय अपनी ऊर्जा का कुछ हिस्सा बचाकर रखने की सलाह दी। उनके मुताबिक, इसका मतलब काम में लापरवाही करना नहीं है। बल्कि जरूरी यह है कि कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता को हर दिन का न्यूनतम मानक न बनने दें। बची हुई ऊर्जा उन दिनों काम आ सकती है, जब तबीयत खराब हो, निजी जिंदगी में कोई परेशानी चल रही हो या ऑफिस में अचानक कोई जरूरी स्थिति पैदा हो जाए।

ज्यादा मेहनत और लापरवाही में फर्क

अव्रीन ने साफ किया कि उनकी सलाह जिम्मेदारियों से बचने या जानबूझकर काम धीमा करने की नहीं है। उनका फोकस वर्कप्लेस बाउंड्रीज पर है। उनके मुताबिक, कभी-कभार अतिरिक्त मेहनत करना ठीक है, लेकिन अगर वही हर दिन की अपेक्षा बन जाए तो कर्मचारी पर लगातार दबाव बढ़ सकता है।

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सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘बात तो सही है’

अव्रीन की पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके विचारों से सहमति जताई। कुछ लोगों ने कहा कि ऑफिस में सीमाएं तय करना जरूरी है, जबकि कई ने अपने अनुभव भी साझा किए।

एक यूजर ने लिखा कि वर्कप्लेस पर सीमाएं बनाना बेहद जरूरी है। दूसरे ने कहा कि यह बात बिल्कुल सही है। एक अन्य यूजर ने कॉर्पोरेट लाइफ को समझाने वाला अनुभव बताया।

एक कर्मचारी ने अपने मैनेजर का उदाहरण देते हुए लिखा कि लंबे समय तक 10 घंटे से ज्यादा काम करने के बावजूद उसे सामान्य काम का हिस्सा माना जाने लगा। इसके बाद उसने तय ऑफिस टाइम खत्म होते ही काम बंद करना शुरू कर दिया।

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फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 4 पायलट क्यों थे:कैप्टन ने गेट खोला तो कॉकपिट में घुसे, विमान संभाला; 5 सेकेंड और लगते तो क्रैश हो जाता

फ्लाईदुबई की दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाइट में कुल 4 पायलट सवार थे। उड़ान के दौरान को-पायलट ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गए। हमले के बाद कैप्टन ने जैसे-तैसे कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद विमान में बैठे 2 अन्य पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान की कमान संभाली। उन्होंने बोइंग 737 मैक्स 8 को सुरक्षित सऊदी अरब में उतारा। एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर विमान को संभालने में करीब 5 सेकेंड और लग जाते तो वह ऐसी स्थिति में पहुंच सकता था, जहां उसे दोबारा ऊपर लाना और क्रैश होने से बचाना संभव नहीं होता। अब सबसे बड़ा सवाल है कि 3.5 घंटे की इस फ्लाइट में 2 अतिरिक्त पायलट आखिर क्यों मौजूद थे… विमान में अतिरिक्त पायलट का होना आम नहीं एयरलाइंस छोटी फ्लाइट में सिर्फ इस डर से अतिरिक्त पायलट नहीं बैठातीं कि अगर मुख्य पायलटों को कुछ हो गया तो दूसरा पायलट काम संभाल लेगा। यानी इस फ्लाइट में 4 पायलट होने का मतलब यह नहीं था कि एयरलाइन ने जानबूझकर 2 पायलटों को इमरजेंसी बैकअप के तौर पर भेजा था। रिटायर्ड एयरलाइन कैप्टन और एविएशन सेफ्टी सलाहकार जॉन कॉक्स के मुताबिक, किसी छोटी फ्लाइट में सिर्फ संभावित देरी से निपटने के लिए अतिरिक्त पायलट रखना आम तरीका नहीं है। पायलटों की ट्रेनिंग और सैलरी पर काफी खर्च होता है, 2 की जगह 4 पायलट रखने पर कंपनी का खर्च बढ़ता है। इसलिए एयरलाइंस जरूरत के मुताबिक ही क्रू रखती हैं। फ्लाईदुबई विमान में 2 अतिरिक्त पायलट होने की 2 वजहें पहली वजह जॉन कॉक्स के मुताबिक दोनों पायलटों को शायद उनकी अगली फ्लाइट के लिए जरूरी जगह पर भेजा जा रहा था। पायलटों को अक्सर ऐसी फ्लाइट में भेजा जाता है, जिसे वे खुद नहीं उड़ा रहे होते। उन्हें उनकी अगली ड्यूटी वाली जगह तक पहुंचाने के लिए ऐसा किया जाता है। एविएशन इंडस्ट्री में इसे ‘डेडहेडिंग’ कहते हैं। फ्लाईदुबई ने बताया कि विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलट कंपनी के ड्यूटी पर तैनात क्रू का हिस्सा थे। ऐसे पायलट कंपनी के काम से यात्रा करते हैं, इसलिए उन्हें ड्यूटी पर माना जाता है और उन्हें वेतन मिलता है। वे शराब नहीं पी सकते, जबकि यूनिफॉर्म पहनना जरूरी नहीं होता। दूसरी वजह एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक वजह यह भी हो सकती है कि तेल अवीव से दुबई लौटने वाली फ्लाइट के लिए दूसरे क्रू की जरूरत हो। पायलट की ड्यूटी सिर्फ उड़ान के समय से नहीं गिनी जाती। एयरपोर्ट पहुंचने के साथ उनका ड्यूटी टाइम शुरू हो जाता है। ऐसे में ज्यादा देरी या लंबे रूट के कारण वे तय ड्यूटी सीमा पूरी कर सकते हैं। इसे ‘टाइमिंग आउट’ कहते हैं, जिसके बाद पायलट विमान नहीं उड़ा सकते। मौजूदा क्रू की कानूनी ड्यूटी सीमा पूरी होने पर उन्हें जरूरी आराम देना पड़ता है। ऐसे में वापसी की उड़ान के लिए दूसरे पायलटों को पहले ही वहां भेजा जा सकता है। फ्लाईदुबई ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन दोनों पायलटों को इस फ्लाइट में क्यों भेजा गया था। एक्सपर्ट बोले- इमरजेंसी में भी विमान का उड़ते रहना बड़ी बात रिटायर्ड कैप्टन रिचर्ड लेवी ने क्रू और यात्रियों की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर का कॉकपिट का दरवाजा खोल पाना और इमरजेंसी सिग्नल भेजना बेहद अहम था। लेवी के मुताबिक, विमान का पिछला हिस्सा टूट जाने के बावजूद वह उड़ने की स्थिति में बना रहा। इतनी गंभीर स्थिति के बाद भी विमान का सुरक्षित रूप से उड़ते रहना असाधारण था। अतिरिक्त पायलट से फायदा- क्रू और शेड्यूल संभालना आसान एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट सैली लीव्सली के मुताबिक, इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के चलते उड़ानों में देरी हो सकती है। ऐसे माहौल में अतिरिक्त पायलट होने से क्रू की कमी और फ्लाइट शेड्यूल को संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि फ्लाईदुबई की इस फ्लाइट में अतिरिक्त पायलट किसी खास सुरक्षा चेतावनी के चलते रखे गए थे। ——————- यह खबर भी पढ़ें… भारतीय पायलट पर हमले के आरोपी का नाम हमाम अल-हमामी:दावा- अलकायदा से प्रभावित था, कट्टरपंथी सोच के चलते ओमान एयर से निकाला गया इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल-हमामी के रूप में हुई है। वह ओमान का रहने वाला है। पूरी खबर पढ़ें…

Capt Smit Machchhar: सलमान खान, संजय दत्त से लेकर रणवीर सिंह तक, कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के कायल हुए बॉलीवुड स्टार्स

Capt Smit Machchhar: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हवा में हुई डरावनी घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार हिम्मत की मिसाल बनकर उभरे हैं। उनके काम की हर तरफ तारीफ हो रही है, जिसमें कई भारतीय एक्टर और बॉलीवुड सेलिब्रिटी भी शामिल हैं। आर माधवन, अनन्या पांडे, जाह्नवी कपूर, विजय देवरकोंडा, रवि किशन, परेश रावल, रवीना टंडन, सोनम कपूर और कंगना रनौत जैसे लोगों ने कैप्टन की बहादुरी और सूझबूझ की खुलकर तारीफ की है।

भारतीय सेलिब्रिटी ने स्मित मच्छर को ‘असली हीरो’ कहा

इस घटना पर प्रतिक्रिया देने वाले पहले स्टार्स में आर माधवन शामिल थे। पायलट के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट को शेयर करते हुए एक्टर ने लिखा, “एक असली हीरो के जल्द ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं।” विजय देवरकोंडा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “भगवान आपकी रक्षा करे और आप पर कृपा बनाए रखे, कैप्टन। आपने जिस स्थिति का सामना किया और जो किया, वह अविश्वसनीय है। उस फ्लाइट में मौजूद बाकी सभी लोगों के साथ भी।” रश्मिका मंदाना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज में लिखा, “क्या हिम्मत है। अपनी जान बचाने की लड़ाई लड़ते हुए भी अपने आस-पास के सभी लोगों की जान के बारे में सोचना। मेरे पास शब्द नहीं हैं… आपके लिए हिम्मत और जल्द ठीक होने की कामना करती हूं। कैप्टन स्मित। हमें आप पर बहुत गर्व है।”

एक्टर-नेता रवि किशन ने पायलट को “अपने काम के प्रति अटूट निष्ठा, अदम्य साहस और असाधारण समझदारी” की मिसाल बताया और कहा कि उनके काम गर्व और प्रेरणा का स्रोत हैं। संजय दत्त ने कहा, “कैप्टन स्मित मच्छार को दिल से सलाम। इतने बड़े डर के माहौल में भी आपने इतनी सारी जिंदगियों को बचाने की हिम्मत दिखाई। आपके जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।”

परेश रावल ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए 1994 की फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के नाना पाटेकर के मशहूर डायलॉग का जिक्र किया। मच्छार के सरनेम का मज़ा लेते हुए रावल ने लिखा, “नाना पाटेकर का मशहूर डायलॉग याद आ रहा है- एक मच्छर आदमी को…!”

अनन्या पांडे, जाह्नवी कपूर, रवीना टंडन, सोनम कपूर और शरवरी ने मच्छार को सलाम किया और उन्हें “असली हीरो” कहा। कंगना रनौत ने भी उन्हें सपोर्ट दिया है और मच्छार के उस खुलासे का जिक्र किया कि संकट के समय उन्होंने हनुमान जी की प्रार्थना की थी।

शमिता शेट्टी, रिद्धिमा कपूर साहनी और शेफ कुणाल कपूर भी उन हस्तियों में शामिल थे जिन्होंने समर्थन के पोस्ट साझा किए। सलमान खान ने अपने खास संदेश में अपना मशहूर डायलॉग “इट्स डन ब्रो” कहा, जबकि रणवीर सिंह ने मच्छार को “कैप्टन करेजियस” (साहसी कैप्टन) कहा।

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कैप्टन स्मित मच्छार के साथ क्या हुआ?

घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुई। इजराइली अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, जब विमान सऊदी अरब के ऊपर उड़ रहा था, तब मच्छार के ओमान के को-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट के अंदर उन पर हमला किया और चाकू से हमला किया। स्थिति गंभीर हो गई क्योंकि विमान 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार कॉकपिट के दरवाजे का रिलीज मैकेनिज्म चालू करने और उसे खोलने में कामयाब रहे।

इस कदम से केबिन क्रू और यात्रियों को कॉकपिट में घुसने और हमलावर पर काबू पाने में मदद मिली। यात्रियों के तौर पर यात्रा कर रहे फ्लाईदुबई के दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने फिर विमान को नियंत्रित करने में मदद की। प्लेन का रास्ता बदला गया और उसे सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

मच्छार को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। वे अपनी चोटों से उबर रहे हैं। 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कॉल में उन्होंने उन डरावने पलों का जिक्र किया और बताया कि दरवाजा खोलने में कामयाब होने से पहले ही उन्हें पता चल गया था कि विमान नीचे गिर रहा है।

रिटायरमेंट के बाद भी भरी रहेगी जेब! रिटायर्ड राम स्वार्थ सिंह से जानिए तनावमुक्त और अमीर रहने का 3 स्टेप फॉर्मूला

यदि आप रिटायरमेंट के बाद के लिए अभी प्लानिंग नहीं करेंगे तो बाद में दिक्कत हो सकती है। अगर आप खुद प्लानिंग नहीं कर सकते तो एक्सपर्ट से जान लें कि रिटायरमेंट से पहले किस प्रकार से प्लानिंग करनी चाहिए। इससे रिटायरमेंट के बाद आपकी जिंदगी खुशनुमा माहौल में बीतेगी। अक्सर लोग रिटायरमेंट के नाम से घबरा जाते हैं, लेकिन सही प्लानिंग से यह जीवन का सबसे सुनहरा दौर बन सकता है। ऐसे ही एक रिटायर्ड अधिकारी राम स्वार्थ सिंह ने अपनी सफल प्लानिंग के बारे में बताया।

लक्ष्य तय करना सबसे जरूरी है

राम स्वार्थ सिंह बताते हैं कि मेरे कई लक्ष्य थे और लायबिलिटीजी भी थीं। इसमें एक लड़की और एक लड़के की शादी करनी की जिम्मेदारी शामिल थी। एक जमीन थी शहर में जिस पर मकान नहीं बना था। मैंने सोचा सबसे पहले यह तीन काम करना है। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट से पहले ही उन्होंने अपने तीन मुख्य लक्ष्य तय कर लिए थे।

सही जगह इनवेस्टमेंट करना होगा

सिंह ने कहा, “रिटायरमेंट के बाद यह तीनों काम सफलतापूर्वक पूरे किए। उसके बाद कुछ पैसे उन्होंने LIC और फिक्स डिपॉजिट में इन्वेस्टमेंट किया। वे कहते हैं, “मैंने इस तरीके से प्लानिंग की थी की थी कि लड़की की शादी मैंने अच्छे से की। लड़के की भी शादी बहुत धूमधाम से की। शहर में जो जमीन मेरी खाली पड़ी थी उस पर मैंने दो फ्लोर का मकान भी बनाया। कुछ जमीन भी मैंने खरीदी।”

नौकरी के पहले दिन से प्लानिंग जरूरी

एक्सपर्ट्स के अनुसार, रिटायरमेंट प्लानिंग की शुरुआत नौकरी के पहले दिन से ही कर देनी चाहिए। रिटायरमेंट प्लानिंग के 3 सुनहरे नियम हैं। सबसे पहले लक्ष्य तय करें। बच्चों की शादी, मकान, जैसे बड़े खर्चों के लिए पहले से तैयार रहें। निवेश में विविधता का ख्याल रखें। सारा पैसा एक जगह न लगाएं।

निवेश अलग-अलग एसेट में करना होगा

FD, LIC, म्यूचुअल फंड और जमीन में बांटकर निवेश करें। आखिरी नियम यह है कि कर्ज मुक्त रहें। कोशिश करें कि रिटायरमेंट से पहले सारे लोन खत्म हो जाएं। राम स्वार्थ सिंह की कहानी बताती है कि अगर समय रहते सही योजना बनाई जाए तो रिटायरमेंट के बाद भी जिंदगी आराम और सुकून से कटती है।

Video: पेरिस से मुंबई आते ही लगा बड़ा झटका! 23 साल के निको ने बताईं वो 3 बातें जो कोई नहीं बताता

पेरिस जैसी दुनिया की मशहूर सिटी से मुंबई आकर नई जिंदगी शुरू करना 23 साल के निको के लिए किसी एडवेंचर से कम नहीं है। फ्रांस से करीब 7 हजार किलोमीटर दूर मुंबई पहुंचे निको यहां नई नौकरी के साथ एक बिल्कुल अलग माहौल को समझने में जुटे हैं। शुरुआत के कुछ हफ्तों में उन्हें शहर की कई ऐसी बातें देखने को मिलीं, जिनकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की थी। कभी पांच किलोमीटर का सफर ट्रैफिक की वजह से लंबा हो जाता है, तो कभी गर्मी, चाय और लोकल खाने का अनुभव उन्हें मुंबई के और करीब ले आता है।

नई भाषा सीखने से लेकर नए लोगों से मिलने और शहर के अलग-अलग हिस्सों को घूमने तक, निको हर दिन कुछ नया अनुभव कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्हें मुंबई पसंद आने लगी है। सोशल मीडिया पर शेयर किए उनके अनुभव अब लोगों का ध्यान खींच रहे हैं।

5 किलोमीटर की दूरी भी लग सकती है लंबी

मुंबई आने के बाद निको को सबसे पहले जिस चीज ने चौंकाया, वह थी शहर की दूरी और ट्रैफिक। उनके मुताबिक, यहां पांच किलोमीटर की दूरी का मतलब यह जरूरी नहीं कि सफर जल्दी पूरा हो जाएगा। ट्रैफिक की वजह से छोटी दूरी तय करने में भी काफी समय लग सकता है। यही वजह है कि अब निको को अपनी दिनचर्या और काम की प्लानिंग पहले से अलग तरीके से करनी पड़ती है।

अब दिन की प्लानिंग में ट्रैफिक और चाय भी शामिल

मुंबई में रहने के बाद निको की रोजमर्रा की जिंदगी भी बदल गई है। अब उन्हें कहीं जाने से पहले ट्रैफिक का ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा गर्मी, चाय और अच्छा खाना भी उनकी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

उनके लिए शहर की यही छोटी-छोटी बातें मुंबई को पेरिस से बिल्कुल अलग बनाती हैं।

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7 हजार किलोमीटर दूर आकर शुरू की नई जिंदगी

निको ने बताया कि वह पेरिस से करीब 7 हजार किलोमीटर दूर आकर मुंबई में एक नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं। नई नौकरी, नए दोस्त, नई भाषा और नया माहौल सबकुछ उनके लिए नया है। उन्होंने अपने अनुभव को शेयर करते हुए बताया कि 23 साल की उम्र में उन्हें लगभग हर चीज खुद समझनी पड़ रही है। कभी रास्ता भटक जाते हैं, तो कभी हिंदी सीखने की कोशिश करते हैं।

मुंबई से होने लगा प्यार

मुंबई में कुछ हफ्ते बिताने के बाद निको को एक और एहसास हुआ, जिसकी शायद उन्होंने शुरुआत में उम्मीद नहीं की थी। उन्हें धीरे-धीरे यह शहर पसंद आने लगा।

वह कहते हैं कि कई बार उन्हें खुद हैरानी होती है कि आखिर वह मुंबई कैसे पहुंच गए। लेकिन यही अनिश्चितता इस पूरे अनुभव को उनके लिए खास भी

गणपति उत्सव से लेकर समुद्र तक, सब एक्सप्लोर कर रहे निको

मुंबई आने के बाद निको ने शहर को सिर्फ काम के नजरिए से नहीं देखा। उन्होंने गणेश विसर्जन के नजारे देखे, शहर के अलग-अलग इलाकों में घूमे और समुद्र किनारे भी समय बिताया।

इसके अलावा वह स्थानीय खाना और मुंबई की अलग-अलग चीजों को भी आजमा रहे हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वह इन अनुभवों की झलक लगातार शेयर कर रहे हैं।

‘कभी-कभी सबसे सही फैसला अजीब लगता है’

निको का मानना है कि जिंदगी में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जिन्हें घर बैठे समझाना मुश्किल होता है, लेकिन वही फैसले बाद में सबसे यादगार अनुभव बन जाते हैं। पेरिस से मुंबई आने का उनका फैसला भी कुछ ऐसा ही है। फिलहाल वह शहर की भाषा, रास्तों और जिंदगी को समझ रहे हैं और उनकी मुंबई वाली कहानी अभी शुरू ही हुई है।

70 हजार की सरकारी नौकरी छोड़ने के लिए दिए 2 लाख रुपये, आखिर ऐसा क्या हुआ कि मधुरिमा ने उठाया ये कदम?

Top Trades For Monday: सोमवार को इन शेयरों में बनेगा बंपर कमाई का मौका, इनसे न चूके नजर

Top Trades For Monday : महात्मा गांधी जयंती के कारण आज,2 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाज़ार बंद हैं और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दोनों के प्रमुख सेगमेंट में ट्रेडिंग बंद रहेगी। NSE और BSE पर मार्केट की गतिविधियां सोमवार 5 अक्तूबर को फिर से शुरू होंगी। उधर 1 अक्टूबर को काफी उतार-चढ़ाव वाले सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। यह लगातार चौथा सेशन था जब इनमें गिरावट देखी गई और निफ्टी 22,400 के आसपास बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ।

अब सवाल ये है कि लंबे वीकेंड के बाद सोमवार 5 अक्टूबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल और किन शेयरों में हो सकती है कमाई? आइए इस पर जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि इक्विटी में हालिया गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल वजहों से आई है। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए यह छोटा कारोबारी हफ़्ता मुश्किल भरा रहा। ग्लोबल हालात बिगड़ने से घरेलू निवेशकों से मिला सपोर्ट बेअसर हो गया और बेंचमार्क इंडेक्स एक अहम साइकोलॉजिकल लेवल से नीचे आ गए। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और फेड के और सख्त कदम उठाने की उम्मीदों के चलते US ट्रेजरी यील्ड दो दशक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई। इससे इंडिया-US यील्ड का अंतर कम हुआ और रुपया कमजोर हुआ। पूरे हफ्ते FIIs ने बिकवाली की। जबकि DIIs की लगातार खरीदारी ने इस बिकवाली की काफी भरपाई होती जिससे गिरावट की रफ़्तार तो कम हुई लेकिन वह पूरी तरह रुकी नहीं। आगे बाजार की नजर RBI की पॉलिसी पर रहोगी। रुपये को सपोर्ट करने और इंपोर्टेड महंगाई को काबू में रखने के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद मजबूत हो रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अगर वेस्ट एशिया में तनाव कम होता है,तो मार्केट में एक रिलीफ़ रैली आ सकती है। तब तक,इन्वेस्टर्स को सोच-समझकर निवेश करना चाहिए और ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी अर्निंग का आउटलुक साफ हो और बैलेंस शीट मजबूत हो। वहीं,लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स मार्केट की कमजोरी का फायदा उठाकर धीरे-धीरे अच्छी कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं।

सोमवार को इस शेयरों पर रहे नजर

prakashgaba.com के प्रकाश गाबा की पिक

प्रकाश गाबा की सीमेंस एनर्जी में खरीदारी की सलाह है। इस स्टॉक में उनकी 3250 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 3400 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

manasjaiswal.com के मानस जायसवाल की टॉप पिक

मानस जायसवाल की आरईसी पर एक सेल रेमेंडेशन है। उनका कहना है कि कल इस शेयर में एक फ्रेश ब्रेकडाउन देखने को मिला। एक दिन के पॉज के बाद कल इसमें वापस लोअर टॉप लोअर बॉटम बनने लगे। इसके फ्यूचर में बिकवाली करने की राय रहेगी। 287 रुपए के आसपास के प्राइस चल रहे हैं। 292 रुपए के स्टॉप लॉस से इसमें बिकवाली करेंगे। REC के फ्यूचर में 276 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है। चाहें तो 285 रुपए वाला पुट ऑप्शन जो 8 रुपए पर ट्रेड हो रहा है। वहां पर खरीदारी करें। 5.5 रुपए का स्टॉप लॉस लगा लें। इसमें 15 रुपए के टारगेट्स मिल सकते हैं।

www.sethamit.com के अमित सेठ की पसंद

इनकी बैंक ऑफ इंडिया के फ्यूचर्स में बिकवाली की सलाह है। यह स्टॉक 200 डेमा के नीचे ट्रेड कर रहा है। वीकली चार्ट पर इसका 134-135 रुपए का स्विंग सपोर्ट भी कल ब्रेक हो गया है। इसमें प्रीवियस लो भी ब्रेक किया है। लगभग 128 रुपए का इसका प्राइस। फ्यूचर्स में इसे शॉर्ट करें, टारगेट रहेगा 123 रुपए का,स्टॉप लॉस रखेंगे 130 रुपए पर।

मिरे एसेट शेयरखान (Mirae Asset Sharekhan) के सोमिल मेहता की पसंद

सोमिल मेहता का कहना है कि PNB में बिकवाली की सलाह होगी। इसमें लो टॉप लो बॉटम फॉर्मेशंस बनने शुरू हुए हैं। यह शेयर 20, 40 और 200 डेली मूविंग एवरेज के नीचे चला गया है। अब इसमें एक मीडियम टर्म डाउन ट्रेंड शुरू हुआ है। ऐसे में PNB में बिकवाली की सलाह होगी।। यहां पर शॉर्ट टर्म नजरिए से 114 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 100 रुपए के टारगेट के लिए बिकवाली करेंगे।

राकेश बंसल वेंचर्स के राकेश बंसल की पसंद

इनकी हिंडाल्को में बिकवाली की सलाह है। 944 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ,900 रुपए के टारगेट के लिए इस शेयर में बिकवाली करें। उनका कहना है कि हिंडाल्को में कल 935 रुपए की नेक लाइन टूटी है। यह बाजार वहीं है कि जहां पर नेकलाइन टूटी है वहां पर बिकवाली करो। ऐसे में इस शेयर में बिकवाली करके पैसा बन सकता है।

EQUINOX रिसर्च एंड एडवाइजर्स के पंकज रांदड़ की पसंद

पंकज रांदड़ का कहना है कि कल के सेशन में इटरनल में क्लीन ब्रेकडाउन देखने मिला है। आरएसआई भी नेगेटिव जा रहा है। इस शेयर में शॉर्ट करने की सलाह है। इस शेयर में 312.50 के आसपास, 317.80 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 305 रुपए के टारगेट के लिए बिकवाली की सलाह है।

जेएम फाइनेंशियल के आशीष चतुरमोहता की टॉप पिक

आशीष चतुरमोहता ने कहा की बाजार में इस समय बहुत चैलेंजिंग माहौल बना हुआ है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड, इंटरेस्ट रेट में बढ़त, क्रूड और डॉलर इंडेक्स की तेजी है बाजार को काफी परेशआन रही है। ऐसे में हमें खास थीम्स पर ही फोकस करने की जरूरत है। ब्रॉडर मार्केट्स अभी भी थोड़ा एवॉइड करना चाहिए। इस समय लंबे नजरिए से स्पेस थीम काफी अच्छी दिख रही है। स्पेस एक बहुत बढ़िया थीम हो जिसको प्ले किया जा सकता है। 2016 में इंडिया में प्राइवेट स्पेस सेक्टर में स्पेस टेक्नोलॉजी पर का करने वाली इक्का-दुक्का कंपनियां ही थीं। आज 2026 में इस सेगमेंट में 400 कंपनियां हैं जो स्पेस टेक्नोलॉजी में काम कर रही हैं। इस स्पेस में करीब करीब 40 से 45 अरब डॉलर की अपॉर्च्युनिटी आने वाले चार पांच सालों में देखने को नजर आएगी। इस सेगमेंट में एक बड़ी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

इसको प्ले करने के लिए हमें लगता है आईनोक्स इंडिया एक ऐसी कंपनी होगी जो कि क्रायोजिक केन्स गैसेस के अंदर में काम कर रही है और स्पेस एक्स के साथ इसकी काफी अच्छी ऑर्डर बुक भी बनी हुई है। ये कंपनी आगे काफी अच्छी ग्रोथ कर सकती है। टेक्निकली भी देखेंगे तो स्टॉक लगातार और कल भी 20 डे मूविंग एवरेज को क्रॉस करता दिखा। यह 50 डे एवरेज के ऊपर सपोर्ट ले रहा है। इस स्टॉक ने 2040-2050 पर एक अच्छा बेस बना लिया है। अगर स्टॉक यह बेस होल्ड करता है तो इसमें मीडियम टर्म में 2500 रुपए तक की तेजी देखने को नजर आ सकती है। लेकिन, क्योंकि बाजार का माहौल खराब है, इसलिए अभी थोड़ा सा अक्यूमुलेट कीजिए। एक साथ पोजीशन बनाने के बजाय स्टॉक में धीरे-धीरे अलग-अलग प्राइस पर पोजीशन बनानी चाहिए ताकि अगर बाजार में कोई गिरावट भी हो तो उसका एडवांटेज देखने को मिल सकता है।

 

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Drishyam The Conclusion Movie Review: और बेहतरीन हो सकता था विजय सलगांवकर फेयरवेल…..

फिल्म- दृश्यम द कन्क्लूजन

निर्देशक- अभिषेक पाठक

कलाकार- अजय देवगन, श्रिया सरन, तब्बू, प्रकाश राज, रजत कपूर, जयदीप अहलावत

रेटिंग-3/5

Drishyam The Conclusion Movie Review: फाइनली लंबे इंतजार के बाद अजय देवगन की पॉपुलर फ्रैंचाइजी का आखिरी पार्ट ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ रिलीज हो गया है। फिल्म ने रिलीज के पहले से काफी बज बनाया हुआ है। वहीं एंडवांस बुकिंग में भी अच्छा कलेक्शन किया हुआ है। लेकिन क्या वाकई फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरी है, चलिए आपको बताते हैं।

फिल्म की कहानी

पार्ट वन से शुरू हुआ विजय सलगांवकर और पुलिस के बीच का खेल पार्ट 2 में बेहद इंट्रेस्टिंग हो जाता है। दूसरे पार्ट की कहानी ऐसे मोड़ पर खत्म होती है, जहां से दर्शकों का पार्ट 3 के लिए इंतजार चरम पर होता है। हर कोई जानने को बेताब था कि आखिरकार विजय का राज पुलिस के सामने खुल पाता है या फिर से वह बच जाएगा। वहीं विजय इस बार खुद नियति के भरोसे होता है। आर या पार…..। स्टोरी ‘दृश्यम 2’ की कहानी को आगे बढ़ाती हैं। ‘दृश्यम 3’ देखने से पहले पिछली फिल्मों की कहानी पता होना बेहद जरूरी है, वरना ये सिर के ऊपर जाएगी।

कहानी बेटे समीर को खोने और उसके कातिल को सजा न दिला पाने वाली पूर्व आईजी मीरा देशमुख यानी तब्बू के खुदखुशी करने से शुरू होती है। अपनी पत्नी को बुरे हाल में देखकर उसके पति महेश देशमुख यानी रजत कपूर बेटे के केस को री-ओपन करने की रिक्वेस्ट करता हैं। केस खुलने के बाद कहानी में एंट्री होती हैं क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर सिंह तोमर यानी जयदीप अहलावत की।

तोमर अपने आप को ‘शनि’ बताता है। राजवीर की पैनी नजरें विजय सलगांवकर और उसके परिवार पर गड़ी हैं। विजय का पूरा परिवार फिर से पुलिस, केस, कोर्ट के चक्कर में फंसने लगते हैं। पुलिस के पास विजय के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए नए सबूत के साथ ही गवाह भी हैं। वहीं एक भी केस न हारने वाला वकील इंद्रजीत शेट्टी यानी प्रकाश राज का साथ भी है। अब ‘2 अक्टूबर को क्या हुआ था?’ के साथ-साथ ’23 जुलाई को किस जुर्म को अंजाम दिया गया?’ और विजय सलगांवकर इस बच पाता है या नहीं इन सब सवालों के जवाब के लिए आपको फिल्म को देखना होगा।

भागती हुई फिल्म की कहानी

इस बार कहानी कहने में अभिषेक पाठक ने थोड़ी जल्दबाजी कर दी है। अपने अंत तक पहुंचने में विजय काफी भागता हुआ नजर आता है। फिल्म ने ‘फैमिली मैन’ विजय को लगभग पूरी तरह से साइड कर दिया है। फिल्म के पहले हिस्से में श्रिया सरन और विजय की दोनों बेटियों (इशिता दत्ता और मृणाल जाधव) को बेहद कम स्क्रीन स्पेस और डायलॉग मिले हैं। यही बात कहानी को कमजोर करती है। ओरिजिनल ‘दृश्यम’ को इतना असरदार उसके परिवार ने बनाया था। विजय सिर्फ पुलिस को चकमा देने वाला आदमी नहीं था, वह एक ऐसा पति और पिता भी था जो अपने परिवार की हर तरह से सुरक्षा करता है। उसकी आम और प्यारी छोटी सी दुनिया ने ही उसके असाधारण कामों को और भी ज्यादा दिलचस्प बना दिया था। इस बार फिल्म सिर्फ विजय पर फोकस करती है। कहीं न कही जितनी जरूरत नहीं थी उससे ज्यादा तनाव के माहौल को क्रिएट किया गया है। मोटामोटी कहें तो फिल्म इससे बेहतरीन फेयलवेल डिजर्व करती थी।

कैसा है क्लाइमेक्स?

इस बार में सस्पेंस उम्मीद से कम है और ड्रामेबाजी ज्यादा है। क्लाइमेक्स आपको बहुत ज्यादा इंप्रेस नहीं कर पाता है। जैसे-जैसे फिल्म अपने क्लाइमेक्स की ओर जाती है, इसमें जबरदस्ती वाला ड्रामा देखने को मिलता है, जो आपको बड़े खुलासे के लिए थोड़ा उत्सुक बनाता है। लेकिन जब यह समझ आता है कि विजय जैसा स्कूल ड्रॉपआउट अपनी चालाकी को कैसे अंजाम देता है, तो फिल्म पूरी तरह से बेहद आम सी हो जाती है। वह शानदार प्लानिंग जिसने कभी हमें विजय के दिमाग़ की तारीफ करने पर मजबूर किया था, वह यहां आकर न के बराबर हो जाती है।

कलाकार

काम के मामले में अजय देवगन शानदार हैं इसमे कतई शक नहीं किया जा सकता है। अपनी आंखों से एक्टिंग करने के लिए मशहूर उन्होंने फिल्म में भी इसका जादू दिखाया हैं। नंदिनी के रोल में श्रिया सरन को अपनी छाप छोड़ने के लिए बस एक ही सीन मिला है। जयदीप अहलावत राजवीर के रोल में शानदार हैं। टॉप लॉयर इंद्रजीत शेट्टी के रोल में प्रकाश राज ठीक हैं। अमर मोहिले का बैकग्राउंड स्कोर ने फिल्म की शान को बरकरार रखा है।

फिल्म देखें या नहीं

‘दृश्यम: द कंक्लूजन’ में दर्शकों के लिए एक फिल्म कम और यादों का खजाना ज्यादा है। फ्रैंचाइजी को लोगों ने बहुत प्यार दिया। फिल्म बढ़िया है, लेकिन थोड़ा और शानदार तरीके से पेश की जा सकती थी। फिल्म को सिनेमाघरों में एक बार देखने जाना चाहिए। आखिर विजय के साथ क्या होता आपको भी तो जानना है।

Stock Market Crash: शेयर बाजार में लगातार 8 हफ्ते की गिरावट, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट रही। 25 साल में पहली बार बाजार इतनी लंबी गिरावट की लकीर में है। इस हफ्ते चारों कारोबारी सत्रों में बाजार गिरा और Nifty के 50 में से 45 शेयर नुकसान में रहे। BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया।

ऐसे माहौल में बाजार एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को अलग-अलग रणनीति बताई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी पूरे बाजार में निवेश करने के बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टर पर फोकस करना बेहतर हो सकता है।

बॉटम-अप स्ट्रैटेजी पर फोकस

Marcellus Investment Managers के को-फाउंडर प्रमोद गुब्बी का कहना है कि मौजूदा बाजार बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग के लिए ज्यादा बेहतर है। यानी पूरे बाजार की चाल का अनुमान लगाने के बजाय मजबूत कंपनियों और बेहतर संभावनाओं वाले शेयरों को चुनने पर फोकस करना चाहिए।

उन्होंने निवेशकों को एसेट एलोकेशन पर भी ध्यान देने की सलाह दी। गुब्बी के मुताबिक इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और कमोडिटी में पैसा बांटना पोर्टफोलियो का जोखिम कम कर सकता है। हालांकि, इसका अनुपात निवेशक के लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से तय होना चाहिए।

बाजार में राहत की उम्मीद

JM Financial Services के डायरेक्टर और हेड ऑफ टेक्निकल, डेरिवेटिव्स राहुल शर्मा के मुताबिक बाजार कई संकेतकों पर ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुका है। RSI, India VIX और FII के लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो जैसे संकेतक दबाव दिखा रहे हैं।

शर्मा ने Nifty में 22,000-22,182 के स्तर को अहम बताया है। उनके मुताबिक यहां से राहत की तेजी आ सकती है। ऐसी स्थिति में Nifty में 500-800 अंकों की उछाल भी देखने को मिल सकती है।

घबराहट में बन सकता है बॉटम

DRChoksey Finserv के देवेन चोकसी कहना है कि बाजार में इस समय कैपिटुलेशन जैसी स्थिति है। मतलब कि बहुत से निवेशक घबराकर बिकवाली कर रहे हैं। इसी के चलते कुछ मजबूत शेयर भी दबाव में आ गए हैं।

उनका मानना है कि इससे बाजार में पैनिक बॉटम बन सकता है। ऐसे में उन कंपनियों में मौके बन सकते हैं, जिनके कारोबार और फंडामेंटल पर बिकवाली का असर नहीं पड़ा है। चोकसी की नजर Nifty में 21,800 के नीचे और 22,800-23,200 के ऊपर के स्तर पर है।

कंज्यूमर और फाइनेंशियल सेक्टर पर नजर

IKIGAI Asset Manager के फाउंडर और CIO पंकज तिबरेवाल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, होम इम्प्रूवमेंट और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियों पर नजर रख रहे हैं। उनके मुताबिक लंबे समय बाद B2C कंपनियां आकर्षक दिख रही हैं।

तिबरेवाल के मुताबिक फाइनेंशियल सेक्टर भी अब बेहतर दिख रहा है। खासकर प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अर्निंग्स ग्रोथ शुरू होने के संकेत हैं। इसके अलावा मेटल, माइनिंग और एग्रो कमोडिटीज में भी उन्हें मजबूत साइकिल की उम्मीद है।

क्या धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए?

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक बाजार में हालिया बिकवाली की बड़ी वजह ग्लोबल फैक्टर हैं। बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर पर है। कच्चा तेल भी महंगा बना हुआ है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ी है।

नायर का कहना है कि अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और इन चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। वहीं, छोटी अवधि के निवेशक फिलहाल इंतजार कर सकते हैं।

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