Top Trades For Monday: सोमवार को इन शेयरों में बनेगा बंपर कमाई का मौका, इनसे न चूके नजर

Top Trades For Monday : महात्मा गांधी जयंती के कारण आज,2 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाज़ार बंद हैं और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दोनों के प्रमुख सेगमेंट में ट्रेडिंग बंद रहेगी। NSE और BSE पर मार्केट की गतिविधियां सोमवार 5 अक्तूबर को फिर से शुरू होंगी। उधर 1 अक्टूबर को काफी उतार-चढ़ाव वाले सेशन में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। यह लगातार चौथा सेशन था जब इनमें गिरावट देखी गई और निफ्टी 22,400 के आसपास बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 पर बंद हुआ।

अब सवाल ये है कि लंबे वीकेंड के बाद सोमवार 5 अक्टूबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल और किन शेयरों में हो सकती है कमाई? आइए इस पर जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड में रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि इक्विटी में हालिया गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल वजहों से आई है। भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए यह छोटा कारोबारी हफ़्ता मुश्किल भरा रहा। ग्लोबल हालात बिगड़ने से घरेलू निवेशकों से मिला सपोर्ट बेअसर हो गया और बेंचमार्क इंडेक्स एक अहम साइकोलॉजिकल लेवल से नीचे आ गए। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और फेड के और सख्त कदम उठाने की उम्मीदों के चलते US ट्रेजरी यील्ड दो दशक के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई। इससे इंडिया-US यील्ड का अंतर कम हुआ और रुपया कमजोर हुआ। पूरे हफ्ते FIIs ने बिकवाली की। जबकि DIIs की लगातार खरीदारी ने इस बिकवाली की काफी भरपाई होती जिससे गिरावट की रफ़्तार तो कम हुई लेकिन वह पूरी तरह रुकी नहीं। आगे बाजार की नजर RBI की पॉलिसी पर रहोगी। रुपये को सपोर्ट करने और इंपोर्टेड महंगाई को काबू में रखने के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद मजबूत हो रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अगर वेस्ट एशिया में तनाव कम होता है,तो मार्केट में एक रिलीफ़ रैली आ सकती है। तब तक,इन्वेस्टर्स को सोच-समझकर निवेश करना चाहिए और ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी अर्निंग का आउटलुक साफ हो और बैलेंस शीट मजबूत हो। वहीं,लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स मार्केट की कमजोरी का फायदा उठाकर धीरे-धीरे अच्छी कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं।

सोमवार को इस शेयरों पर रहे नजर

prakashgaba.com के प्रकाश गाबा की पिक

प्रकाश गाबा की सीमेंस एनर्जी में खरीदारी की सलाह है। इस स्टॉक में उनकी 3250 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 3400 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

manasjaiswal.com के मानस जायसवाल की टॉप पिक

मानस जायसवाल की आरईसी पर एक सेल रेमेंडेशन है। उनका कहना है कि कल इस शेयर में एक फ्रेश ब्रेकडाउन देखने को मिला। एक दिन के पॉज के बाद कल इसमें वापस लोअर टॉप लोअर बॉटम बनने लगे। इसके फ्यूचर में बिकवाली करने की राय रहेगी। 287 रुपए के आसपास के प्राइस चल रहे हैं। 292 रुपए के स्टॉप लॉस से इसमें बिकवाली करेंगे। REC के फ्यूचर में 276 रुपए तक के टारगेट्स पॉसिबल है। चाहें तो 285 रुपए वाला पुट ऑप्शन जो 8 रुपए पर ट्रेड हो रहा है। वहां पर खरीदारी करें। 5.5 रुपए का स्टॉप लॉस लगा लें। इसमें 15 रुपए के टारगेट्स मिल सकते हैं।

www.sethamit.com के अमित सेठ की पसंद

इनकी बैंक ऑफ इंडिया के फ्यूचर्स में बिकवाली की सलाह है। यह स्टॉक 200 डेमा के नीचे ट्रेड कर रहा है। वीकली चार्ट पर इसका 134-135 रुपए का स्विंग सपोर्ट भी कल ब्रेक हो गया है। इसमें प्रीवियस लो भी ब्रेक किया है। लगभग 128 रुपए का इसका प्राइस। फ्यूचर्स में इसे शॉर्ट करें, टारगेट रहेगा 123 रुपए का,स्टॉप लॉस रखेंगे 130 रुपए पर।

मिरे एसेट शेयरखान (Mirae Asset Sharekhan) के सोमिल मेहता की पसंद

सोमिल मेहता का कहना है कि PNB में बिकवाली की सलाह होगी। इसमें लो टॉप लो बॉटम फॉर्मेशंस बनने शुरू हुए हैं। यह शेयर 20, 40 और 200 डेली मूविंग एवरेज के नीचे चला गया है। अब इसमें एक मीडियम टर्म डाउन ट्रेंड शुरू हुआ है। ऐसे में PNB में बिकवाली की सलाह होगी।। यहां पर शॉर्ट टर्म नजरिए से 114 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 100 रुपए के टारगेट के लिए बिकवाली करेंगे।

राकेश बंसल वेंचर्स के राकेश बंसल की पसंद

इनकी हिंडाल्को में बिकवाली की सलाह है। 944 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ,900 रुपए के टारगेट के लिए इस शेयर में बिकवाली करें। उनका कहना है कि हिंडाल्को में कल 935 रुपए की नेक लाइन टूटी है। यह बाजार वहीं है कि जहां पर नेकलाइन टूटी है वहां पर बिकवाली करो। ऐसे में इस शेयर में बिकवाली करके पैसा बन सकता है।

EQUINOX रिसर्च एंड एडवाइजर्स के पंकज रांदड़ की पसंद

पंकज रांदड़ का कहना है कि कल के सेशन में इटरनल में क्लीन ब्रेकडाउन देखने मिला है। आरएसआई भी नेगेटिव जा रहा है। इस शेयर में शॉर्ट करने की सलाह है। इस शेयर में 312.50 के आसपास, 317.80 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 305 रुपए के टारगेट के लिए बिकवाली की सलाह है।

जेएम फाइनेंशियल के आशीष चतुरमोहता की टॉप पिक

आशीष चतुरमोहता ने कहा की बाजार में इस समय बहुत चैलेंजिंग माहौल बना हुआ है। बढ़ती बॉन्ड यील्ड, इंटरेस्ट रेट में बढ़त, क्रूड और डॉलर इंडेक्स की तेजी है बाजार को काफी परेशआन रही है। ऐसे में हमें खास थीम्स पर ही फोकस करने की जरूरत है। ब्रॉडर मार्केट्स अभी भी थोड़ा एवॉइड करना चाहिए। इस समय लंबे नजरिए से स्पेस थीम काफी अच्छी दिख रही है। स्पेस एक बहुत बढ़िया थीम हो जिसको प्ले किया जा सकता है। 2016 में इंडिया में प्राइवेट स्पेस सेक्टर में स्पेस टेक्नोलॉजी पर का करने वाली इक्का-दुक्का कंपनियां ही थीं। आज 2026 में इस सेगमेंट में 400 कंपनियां हैं जो स्पेस टेक्नोलॉजी में काम कर रही हैं। इस स्पेस में करीब करीब 40 से 45 अरब डॉलर की अपॉर्च्युनिटी आने वाले चार पांच सालों में देखने को नजर आएगी। इस सेगमेंट में एक बड़ी अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

इसको प्ले करने के लिए हमें लगता है आईनोक्स इंडिया एक ऐसी कंपनी होगी जो कि क्रायोजिक केन्स गैसेस के अंदर में काम कर रही है और स्पेस एक्स के साथ इसकी काफी अच्छी ऑर्डर बुक भी बनी हुई है। ये कंपनी आगे काफी अच्छी ग्रोथ कर सकती है। टेक्निकली भी देखेंगे तो स्टॉक लगातार और कल भी 20 डे मूविंग एवरेज को क्रॉस करता दिखा। यह 50 डे एवरेज के ऊपर सपोर्ट ले रहा है। इस स्टॉक ने 2040-2050 पर एक अच्छा बेस बना लिया है। अगर स्टॉक यह बेस होल्ड करता है तो इसमें मीडियम टर्म में 2500 रुपए तक की तेजी देखने को नजर आ सकती है। लेकिन, क्योंकि बाजार का माहौल खराब है, इसलिए अभी थोड़ा सा अक्यूमुलेट कीजिए। एक साथ पोजीशन बनाने के बजाय स्टॉक में धीरे-धीरे अलग-अलग प्राइस पर पोजीशन बनानी चाहिए ताकि अगर बाजार में कोई गिरावट भी हो तो उसका एडवांटेज देखने को मिल सकता है।

 

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ISRO Roadmap: 2028 तक लॉन्च होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल, इसरो का मून प्लान जानिए

ISRO Roadmap Bharatiya Antariksh Station:  चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब स्पेस टेक्नोलॉजी के एक नए और महत्वाकांक्षी युग में प्रवेश करने की तैयारी में है। भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब सिर्फ रॉकेट लॉन्चिंग और उपग्रह भेजने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका मुख्य फोकस अब मानव अंतरिक्ष उड़ान (ह्यूमन स्पेसफ्लाइट), भारत का अपना स्पेस स्टेशन, चंद्रमा से मिट्टी व पत्थरों के सैंपल वापस लाना और साल 2040 तक चांद पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजने पर है।

IIT दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ISRO के चेयरमैन और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ वी नारायणन ने भारत के भावी अंतरिक्ष रोडमैप, आगामी बड़े मिशनों और इस क्षेत्र में हो रहे ऐतिहासिक बदलावों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की।

440 से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप कर रहे हैं काम

भारत के स्पेस सेक्टर में सबसे बड़ा बदलाव सरकारी संस्थानों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप की बढ़ती भागीदारी है। डॉ नारायणन के कहा कि 2020 में स्पेस सेक्टर रिफॉर्म्स के बाद देश में करीब 440 स्पेस स्टार्टअप चल रहे हैं। कंपनियों को सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल, स्पेस एप्लीकेशन और दूसरी नई टेक्नोलॉजी से जुड़े एरिया में काम करने के मौके बढ़े हैं। नतीजतन भारत का प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम भी ISRO के बड़े मिशन के साथ-साथ डेवलप हो रहा है।

भारत ने खुद डेवलप किया क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी

स्पेस सेक्टर में भारत की आत्मनिर्भरता का एक उदाहरण देते हुए डॉ नारायणन ने क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में भारत को यह टेक्नोलॉजी नहीं दी गई थी। इसके बाद ISRO ने इस टेक्नोलॉजी को देश में ही डेवलप करने पर काम किया। भारत ने अब तीन क्रायोजेनिक प्रोपल्शन सिस्टम डेवलप कर लिए हैं। इसका मतलब है कि भारत ने अब एक ऐसी टेक्नोलॉजी में अपनी क्षमताएं डेवलप कर ली हैं जिसके लिए पहले दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। यह क्षमता भविष्य के बड़े और भारी स्पेस मिशन के लिए भी बहुत जरूरी होगी।

अब चंद्रयान-4 की तैयारी

23 अगस्त 2023 भारत के स्पेस प्रोग्राम के लिए एक अहम दिन था। चंद्रयान-3 ने चांद के साउथ पोलर रीजन के पास सक्सेसफुली सॉफ्ट-लैंडिंग की। इसके बाद ISRO अब चांद के सैंपल धरती पर वापस लाने की दिशा में काम कर रहा है। डॉ नारायणन ने चंद्रयान-4 को इस बड़े लक्ष्य से जोड़ा और बताया कि इसका मकसद चांद के सैंपल निकालकर उन्हें धरती पर वापस लाना है। इसके अलावा भारत ने स्पेस में डॉकिंग टेक्नोलॉजी को सक्सेसफुली दिखाया। इस टेक्नोलॉजी को भविष्य के स्पेस स्टेशन और दूसरे मुश्किल मिशन के लिए बहुत जरूरी माना जाता है।

गगनयान के बाद भारतीय स्पेस स्टेशन

भारत का अगला बड़ा कदम इंसानों को स्पेस में भेजना है। ISRO गगनयान मिशन के तहत इंसानों को स्पेसफ्लाइट भेजने की तैयारी कर रहा है। अभी बिना पायलट वाली उड़ानों के जरिए मिशन की तैयारियों को आगे बढ़ा रहा है। भारत अपना भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भी डेवलप कर रहा है। डॉ. नारायणन के मुताबिक, स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक लॉन्च करने का प्लान है। आने वाले सालों में दूसरे मॉड्यूल भी जोड़े जाएंगे। इसका लक्ष्य 2035 तक इसे डेवलप करना है। यह भारत के लिए न सिर्प एक साइंटिफिक मिशन होगा बल्कि स्पेस में लंबे समय तक रिसर्च और टेक्नोलॉजी करने की क्षमता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

2040 तक चंद्रमा पर इंसान भेजने का प्लान

ISRO का रोडमैप सिर्फ लूनर मिशन तक ही खत्म नहीं होता है। भारत 2040 तक चांद पर ह्यूमन मिशन की दिशा में भी काम कर रहा है। इसके अलावा वीनस मिशन और नेक्स्ट-जेनरेशन लॉन्च व्हीकल पर भी काम चल रहा है। डॉ नारायणन ने कहा कि ISRO एक नेक्स्ट-जेनरेशन लॉन्च व्हीकल पर काम कर रहा है जो लो अर्थ ऑर्बिट में 30,000 किलोग्राम तक वजन ले जा सकता है। पार्शियली रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल सिस्टम पर भी काम चल रहा है।

स्पेस इकोनॉमी के लिए क्यों अहम है यह मिशन?

डॉ नारायणन ने कहा कि गगनयान, स्पेस स्टेशन, चंद्रयान-4, और भविष्य के बड़े लॉन्च व्हीकल सिर्फ साइंटिफिक उपलब्धियां नहीं हैं। वे प्राइवेट कंपनियों के लिए नई टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और काम के नए एरिया भी शुरू कर सकते हैं।जैसे-जैसे स्पेस मि न की संख्या और कॉम्प्लेक्सिटी बढ़ेगी वैसे ही लॉन्च सिस्टम, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस कम्युनिकेशन, डेटा और दूसरे स्पेस एप्लीकेशन से जुड़े एरिया में भी एक्टिविटी बढ़ेगी। यही वजह है कि स्पेस सेक्टर में सुधारों के बाद भारत में स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या को अहम माना जा रहा है। आने वाले सालों में ISRO के सरकारी मिशन के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों की भूमिका कैसे बढ़ती है, यह भारत की स्पेस इकॉनमी के विकास के लिए बहुत जरूरी होगा।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

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Solar Industries India में 25% तक उछाल का दम! ICICI Securities ने दी खरीद की सलाह

एक्सप्लोसिव बनाने वाली कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया ने हाल ही में घोषणा की कि वह दक्षिण अफ्रीका की ओम्निया होल्डिंग्स को लगभग 1.36 अरब डॉलर की पूरी तरह कैश वाली डील में खरीदेगी। कंपनी की स्टेप डाउन सब्सिडियरी सोलर SA इनवेस्टमेंट्स प्रोपराइटरी लिमिटेड और सब्सिडियरी सोलर ओवरसीज मॉरीशस लिमिटेड ने इसके लिए ओम्निया होल्डिंग्स के साथ एक डेफिनिटिव एग्रीमेंट साइन किया है। इस डेवलपमेंट के बाद सोलर इंडस्ट्रीज के​ लिए ICICI Securities का व्यू सामने आया है।

ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 23,500 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। यह बीएसई पर शेयर के मौजूदा भाव 18830 रुपये से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है। सोलर इंडस्ट्रीज की इस नई डील के लिए अभी रेगुलेटर्स और ओम्निया के शेयरधारकों की मंजूरी लिया जाना बाकी है।

सोलर इंडस्ट्रीज को उम्मीद है कि इस विस्तार से अफ्रीका में माइनिंग से होने वाली कमाई वित्त वर्ष 2028 से कई गुना बढ़ जाएगी। यह खरीद 2027 की शुरुआत या मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है। सोलर इंडस्ट्रीज माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, डिफेंस और स्पेस सेक्टर के लिए इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव और इनीशिएटिंग सिस्टम बनाती है। कंपनी की दुनिया भर में 40 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं।

Solar Industries India पर ब्रोकरेज के तर्क

ICICI Securities का कहना है कि ओम्निया होल्डिंग्स में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने से सोलर इंडस्ट्रीज को माइनिंग एक्सप्लोसिव्स और ब्लास्टिंग के लिए पहले से स्थापित इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलेगी। इससे कंपनी का एक्सप्लोसिव्स का मौजूदा मजबूत कारोबार और बढ़ेगा। सोलर इंडस्ट्रीज इस 1.36 अरब डॉलर के कैश बायआउट के लिए कर्ज और इंटरनल फंडिंग का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। कंपनी को उम्मीद है कि दोनों कंपनियों के मिलने से वित्त वर्ष 2027-28 में 330–340 अरब रुपये का रेवेन्यू और 65 अरब रुपये का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) हासिल होगा।

ICICI Securities का अनुमान है कि डील पूरी होने पर सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया का कर्ज बढ़कर 110–120 अरब रुपये के पीक पर पहुंच जाएगा। ब्रोकरेज ने यह भी उम्मीद जताई कि यह डील वित्त वर्ष 2029 से ही सोलर इंडस्ट्रीज की प्रति शेयर अर्निंग बढ़ाने लगेगी।

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ओम्निया होल्डिंग्स के बारे में

ओम्निया होल्डिंग्स लिमिटेड एक ग्लोबल, डायवर्सिफाइड केमिकल कंपनी है जो माइनिंग, एग्रीकल्चर और केमिकल एप्लीकेशन इंडस्ट्रीज को केमिकल्स और स्पेशलाइज्ड सर्विस व सॉल्यूशंस की सप्लाई करती है। इसकी मौजूदगी 23 से ज्यादा देशों में है। यह 70 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स के जरिए 40 से ज्यादा देशों में कस्टमर्स को सर्विस देती है। कंपनी के शेयर जोहान्सबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और A2X मार्केट्स सिक्योरिटीज एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं। सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया के साथ ट्रांजेक्शन कंप्लीट होने के बाद ओम्निया, जोहान्सबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और A2X मार्केट्स सिक्योरिटीज एक्सचेंज से डीलिस्ट हो जाएगी।

Solar Industries India का शेयर 2026 में अब तक 55 प्रतिशत मजबूत

कंपनी का मार्केट कैप 1.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 73.15 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर एक सप्ताह में 15 प्रतिशत नीचे आया है। वहीं 6 महीनों में 37 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 55 प्रतिशत उछला है। 2 साल में 75 प्रतिशत और 3 साल में 300 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। 5 साल में करीब 870 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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ISRO Privatisation: निजीकरण की खबरों को ISRO ने ‘बेबुनियाद’ बताया, कहा- हमारी अहमियत बनी रहेगी

ISRO Privatisation: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने निजीकरण की खबरों को खारिज किया है। एजेंसी ने ऐसी अटकलों को ‘बेबुनियाद और गलत’ बताया। ISRO ने कहा कि स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ रही है। लेकिन इससे उसकी भूमिका कम नहीं होगी।

ISRO देश में एडवांस्ड स्पेस रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का मुख्य संस्थान बना रहेगा। राष्ट्रीय और रणनीतिक मिशन भी उसके पास रहेंगे। अंतरिक्ष विज्ञान, खोज और महत्वपूर्ण स्पेस टेक्नोलॉजी पर भी ISRO काम करता रहेगा।

निजी कंपनियों की एंट्री क्यों बढ़ रही है?

भारत अपने स्पेस सेक्टर में ज्यादा कंपनियों को जोड़ रहा है। इसमें प्राइवेट कंपनियां, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थान और सरकारी कंपनियां शामिल हैं।

ISRO के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि एजेंसी की अहमियत घट रही है। मकसद पूरे स्पेस इकोसिस्टम को बड़ा बनाना है। इससे ISRO को ज्यादा जटिल और नई तकनीकों पर ध्यान देने का मौका मिलेगा। ISRO ने कहा कि बदलाव उसकी भूमिका में नहीं, बल्कि पूरे स्पेस सेक्टर के आकार और काम करने के तरीके में है।

ISRO अब किन कामों पर ज्यादा ध्यान देगा?

ISRO का फोकस अब अगली पीढ़ी की तकनीकों पर और बढ़ेगा। इसमें अत्याधुनिक रिसर्च, मानव अंतरिक्ष उड़ान और नए लॉन्च सिस्टम शामिल हैं। डीप स्पेस और दूसरे ग्रहों से जुड़े मिशन भी अहम रहेंगे। रणनीतिक तकनीकों पर भी ISRO काम करता रहेगा।

इसके अलावा कम्युनिकेशन, नेविगेशन और अर्थ ऑब्जर्वेशन के लिए एडवांस्ड पेलोड बनाए जाएंगे। सेंसर और प्रोपल्शन सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर भी काम जारी रहेगा।

मच्योर टेक्नोलॉजी बनाएगा प्राइवेट सेक्टर

जो तकनीक पूरी तरह तैयार हो चुकी है, उसका बड़े स्तर पर उत्पादन निजी कंपनियां और सरकारी कंपनियां कर सकती हैं। इसमें मच्योर लॉन्च व्हीकल, नियमित तौर पर बनने वाले सैटेलाइट और दूसरे स्थापित सिस्टम शामिल हैं।

ISRO पहले ही कई तकनीकों को इंडस्ट्री को ट्रांसफर कर चुका है। एजेंसी ने साफ किया कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मतलब यह नहीं है कि वह उस क्षेत्र से हट रही है।

इसका मकसद बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ाना है। इससे कमर्शियलाइजेशन और इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। कंपनियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

ISRO की भूमिका क्या रहेगी?

ISRO के पास मुख्य वैज्ञानिक और रणनीतिक जिम्मेदारियां रहेंगी। वहीं, इंडस्ट्री को तैयार तकनीकों को बड़े स्तर पर बनाने की जिम्मेदारी ज्यादा मिल सकती है। इससे ISRO अपने वैज्ञानिकों और संसाधनों को एडवांस्ड रिसर्च पर लगा सकेगा। दूसरी तरफ, निजी कंपनियां निवेश और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाएंगी।

ISRO ने इस मॉडल को ‘ISRO-led national space ecosystem’ बताया है। यानी ISRO की भूमिका खत्म नहीं हो रही है। बल्कि स्पेस सेक्टर में ज्यादा कंपनियों के आने के साथ उसका फोकस और ज्यादा एडवांस्ड मिशन पर होगा।

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