HDFC Bank में आ सकती है जोरदार तेजी! Emkay ने 74% तक उछाल का अनुमान दिया

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank के शेयर में सोमवार को दबाव रहा। शुरुआती तेजी के बावजूद शेयर 2% से ज्यादा गिरकर ₹704.55 पर बंद हुआ। इस बीच Emkay Research ने बैंक के शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹1,225 का टारगेट दिया है। यानी मौजूदा भाव से करीब 74% की तेजी की गुंजाइश है।

ब्रोकरेज का कहना है कि लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन के बाद HDFC Bank का वैल्यूएशन अब आकर्षक दिख रहा है। अगर नए नेतृत्व में कारोबार सुधरता है और FPI आउटफ्लो कम होता है, तो शेयर में री-रेटिंग हो सकती है।

नेतृत्व का संकट अब पीछे

HDFC Bank में नेतृत्व को लेकर बना लंबा असमंजस अब खत्म हो गया है। RBI ने 1 अक्टूबर को अनूप बागची को बैंक का नया MD और CEO बनाने की मंजूरी दी थी। उनका तीन साल का कार्यकाल 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा।

Emkay का मानना है कि बागची की नियुक्ति से बैंक के निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा लौट सकता है। बागची का ICICI Bank Group में लंबा अनुभव रहा है। उनका नेतृत्व का तरीका ज्यादा दखल देने वाला नहीं है। वह बड़े रणनीतिक मुद्दों पर फोकस करते हैं और टीम को काम करने की आजादी देने में भरोसा रखते हैं।

HDFC Bank के लिए टारगेट

ब्रोकरेजरेटिंगटारगेट प्राइस
संभावित तेजी

Emkay ResearchBuy₹1,22574%
Motilal OswalBuy₹92531%
PL CapitalBuy₹95035%
ICICI SecuritiesBuy₹92030.60%

अब बैंक के सामने क्या चुनौती है?

नए MD के सामने कई अहम काम होंगे। सबसे पहले वरिष्ठ प्रबंधन में स्थिरता लानी होगी। इसके साथ ही डिपॉजिट ग्रोथ को फिर रफ्तार देनी होगी।

नई ब्रांचों की प्रोडक्टविटी सुधारना भी जरूरी होगा। बैंक को टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्षमता मजबूत करनी होगी। इसके अलावा मिस-सेलिंग जैसे पुराने मामलों से जुड़े प्रोसेस में भी सुधार करना होगा।

लोन और डिपॉजिट ग्रोथ पर नजर

Emkay को HDFC Bank के कारोबार में आगे सुधार की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने FY27 में लोन ग्रोथ 16% और डिपॉजिट ग्रोथ 17.1% रहने का अनुमान लगाया है। FY28 और FY29 में लोन ग्रोथ 18% रहने का अनुमान है।

FY27 में बैंक का नेट प्रॉफिट करीब ₹86,189 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके बाद FY28 में यह करीब ₹99,738 करोड़ और FY29 में करीब ₹1.22 लाख करोड़ पहुंच सकता है।

HDFC बैंक पर बाकी ब्रोकरेज की राय

मोतीलाल ओसवाल ने भी HDFC Bank पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके साथ ही ₹925 का टारगेट प्राइस दिया है। यह 31.3% की तेजी की संभावना दिखाता है।

HDFC Bank के लिए PL Capital ने टारगेट प्राइस ₹950 रखा है, जो करीब 34.9% की तेजी दिखाता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, अब बैंक के सामने बैलेंस शीट ग्रोथ, डिपॉजिट, NIM और क्रेडिट कॉस्ट से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर करने की जिम्मेदारी होगी।

ICICI Securities ने ₹920 का टारगेट दिया है। यह टारगेट करीब 30.6% की तेजी दिखाता है। रिपोर्ट में बागची की नियुक्ति को बैंक के लिए नया दौर शुरू होने वाला कदम बताया गया है।

HDFC Bank के शेयरों का हाल

HDFC बैंक का शेयर सोमवार को 2.31% की गिरावट के साथ 704.55 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शुरुआत हरे निशान में हुई और स्टॉक पिछले बंद स्तर से करीब 2% उछल गया। लेकिन फिर मुनाफावसूली हावी हो गई।

पिछले 6 महीने में स्टॉक 8.62% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 27% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। बैंक का मार्केट कैप 5.40 लाख करोड़ रुपये है।

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HDFC Bank News: अनूप बागची के MD और CEO बनने से निवेशक खुश, HDFC बैंक का ADR 5% उछला

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC बैंक के ADR में करीब 5% की तेजी आई। RBI ने अनूप बागची को बैंक का नया MD और CEO बनाने की मंजूरी दे दी है। इसकी वजह से HDFC बैंक के ADR में तेजी दिखी है। यह अमेरिका में ट्रेड होने वाली सिक्योरिटीज हैं, जो HDFC Bank के भारतीय शेयरों को रिप्रेजेंट करती हैं। यह शुरुआती कारोबार में 23.55 डॉलर के हाई पर पहुंच गई, जो पिछले बंद के मुकाबले करीब 5.42% की तेजी दिखाती है।

बागची 27 अक्टूबर 2026 से जिम्मेदारी संभालेंगे। मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। उन्होंने अगले कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं मांगी थी। बागची का कार्यकाल तीन साल का होगा। वह 26 अक्टूबर 2029 तक MD और CEO रहेंगे। हालांकि, इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी।

निवेशकों को संबोधित कर सकते हैं बागची 

HDFC Bank 17 अक्टूबर को दूसरी तिमाही के नतीजे जारी करेगा। माना जा रहा है कि इसी दौरान बागची और शशिधर जगदीशन निवेशकों को संबोधित कर सकते हैं। Moneycontrol को एक सूत्र ने बताया था कि इससे बैंक में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

ICICI Group में 30 साल से ज्यादा का अनुभव

अनूप बागची को ICICI Group में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने रिटेल और MSME बैंकिंग से लेकर कॉर्पोरेट बैंकिंग, ट्रेजरी और मार्केट्स में काम किया है। इसके अलावा वह क्रेडिट पॉलिसी और डेटा एनालिटिक्स से जुड़े काम भी संभाल चुके हैं।

बागची ICICI Bank में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके हैं। वहां उन्होंने होलसेल बैंकिंग, ट्रांजैक्शन बैंकिंग और मार्केट्स का काम देखा। वह ICICI Securities के MD और CEO भी रह चुके हैं। फिलहाल बागची 2023 से ICICI Prudential Life के MD और CEO हैं।

ICICI Prudential Life में उत्तराधिकारी की तलाश

बागची के HDFC Bank जाने की संभावना पहले से ही काफी ज्यादा मानी जा रही थी। इसके चलते ICICI Bank ने अपनी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के लिए उत्तराधिकारी की तैयारी शुरू कर दी थी। ICICI Group में आमतौर पर बैंक के सीनियर अधिकारियों को ग्रुप की सब्सिडियरीज की जिम्मेदारी दी जाती है। हालांकि, इस बार बैंक बाहर से भी किसी अधिकारी को ला सकता है।

एक अधिकारी के मुताबिक ICICI Bank के बोर्ड में मौजूद कुछ होलटाइम डायरेक्टर्स अभी नए हैं। इनमें से कुछ को संदीप बख्शी के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में बागची की जगह भरने के लिए बैंक अपने बोर्ड के बाहर से भी किसी नाम पर विचार कर सकता है।

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Abakkus AMC IPO: सुनील सिंघानिया की कंपनी आईपीओ लाने को तैयार, OFS में 1.5 करोड़ शेयर बिकेंगे

Abakkus AMC IPO: दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया की अगुवाई वाली Abakkus Asset Manager Limited ने IPO की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने IPO के लिए SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया है।

कंपनी का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें प्रमोटर Abakkus Expert Professional करीब 1.5 करोड़ शेयर बेचेंगे। यानी इस इश्यू से मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी। शेयर बेचने वाले प्रमोटर को इसका फायदा मिलेगा।

IPO के लिए Axis Capital, ICICI Securities, IIFL Capital और JM Financial को लीड मैनेजर बनाया गया है।

FY26 में ₹796 करोड़ रहा रेवेन्यू

वित्त वर्ष 2025-26 में Abakkus Asset Manager का रेवेन्यू ₹796 करोड़ रहा। इस दौरान कंपनी का PAT यानी नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹327 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से इक्विटी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का है। Abakkus चार प्रमुख वर्टिकल में काम करती है। कंपनी का कारोबार चार प्रमुख सेगमेंट में फैला है। इनमें अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट, ऑफशोर इन्वेस्टमेंट, प्राइवेट इक्विटी और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

PMS में ₹18,538 करोड़ का AUM

DRHP में दी गई ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक Abakkus भारत के डिस्क्रिशनरी PMS सेगमेंट में AUM के लिहाज से चौथे नंबर पर थी। कंपनी का AUM ₹18,538 करोड़ था। इस सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी 5.3% थी।

कंपनी ने बताया कि ₹12,500 करोड़ से ज्यादा AUM वाले टॉप सात ऑपरेशनल प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में वह सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी थी। डिस्क्रिशनरी PMS का QAAUM छह साल में बढ़कर करीब ₹20,000 करोड़ हो गया।

दो इक्विटी स्ट्रैटेजी में ₹5,000 करोड़ से ज्यादा

Abakkus के पास दो डिस्क्रिशनरी इक्विटी स्ट्रैटेजी हैं। दोनों में QAAUM ₹5,000 करोड़ से ज्यादा है।

ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक डिस्क्रिशनरी PMS प्रोवाइडर्स के बीच Abakkus का क्लाइंट बेस देश में दूसरा सबसे बड़ा था।

म्यूचुअल फंड कारोबार में भी तेज ग्रोथ

Abakkus ने म्यूचुअल फंड कारोबार में भी तेजी से विस्तार किया है। कंपनी के मुताबिक, 1 अप्रैल 2002 के बाद शुरू हुए AMCs में वह इक्विटी कैटेगरी की म्यूचुअल फंड स्कीम्स में ₹10,000 करोड़ AUM तक पहुंचने वाली सबसे तेज कंपनियों में शामिल है।

कंपनी ने यह आंकड़ा म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के सिर्फ आठ महीने में हासिल किया।

2018 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

Abakkus की शुरुआत 2018 में सुनील बनवारीलाल सिंघानिया ने की थी। उनके पास एसेट मैनेजमेंट और इक्विटी निवेश का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है।

सिंघानिया 2003 से 2017 तक Nippon Life India Asset Management में Investment – Equity फंक्शन के इक्विटीज के ग्लोबल हेड रह चुके हैं।

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HDFC Bank News: नए MD और CEO के लिए 3 बड़ी संभावनाएं, अब RBI के फैसले पर टिकी नजर

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank के नए MD और CEO को लेकर फैसला अब करीब आता दिख रहा है। बैंक के बोर्ड ने RBI को दो नाम भेजे हैं। इनमें डिप्टी MD कैजाद भरूचा और ICICI Prudential Life Insurance के MD और CEO अनूप बागची का नाम शामिल है। दोनों के नाम तीन साल के कार्यकाल के लिए भेजे गए हैं।

मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। RBI फिलहाल दोनों नामों पर विचार कर रहा है। ऐसे में नेतृत्व बदलाव को लेकर तीन संभावनाएं चर्चा में हैं।

कैजाद भरूचा बन सकते हैं नए CEO

पहली संभावना बैंक के अंदर से ही नए CEO की नियुक्ति की है। कैजाद भरूचा 1995 से HDFC Bank से जुड़े हैं। 2014 में वह बैंक के होल-टाइम डायरेक्टर बने और 2023 से डिप्टी MD हैं।

वह रिटेल एसेट्स, मॉर्गेज, कॉरपोरेट बैंकिंग, बिजनेस बैंकिंग और रूरल बैंकिंग जैसे कारोबार देखते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति से बैंक के मौजूदा सिस्टम और कारोबार की अच्छी समझ रखने वाला नेतृत्व जारी रह सकता है।

हालांकि, उनके मामले में RBI के 15 साल के एग्रीगेट टेन्योर नियम का मुद्दा है। होल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर उनका पिछला कार्यकाल भी इसमें गिना जाता है। इसलिए पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी।

अनूप बागची की भी दावेदारी

दूसरी संभावना बाहरी उम्मीदवार की है। अनूप बागची फिलहाल ICICI Prudential Life Insurance के MD और CEO हैं। इससे पहले वह ICICI Bank में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ICICI Securities के MD और CEO रह चुके हैं।

उनके पास रिटेल, MSME, कॉरपोरेट बैंकिंग, ट्रेजरी और फाइनेंशियल सर्विसेज का लंबा अनुभव है। RBI फिलहाल उनकी उम्मीदवारी की जांच कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने उनकी उम्मीदवारी पर IRDAI और ICICI Bank से भी फीडबैक मांगा है। इसकी वजह पिछले करीब तीन साल से उनका मेनस्ट्रीम बैंकिंग से बाहर होना बताया गया है।

भरूचा CEO और बागची DMD?

तीसरी संभावना दोनों को बैंक की टॉप लीडरशिप में जगह देने की है। इस स्थिति में भरूचा CEO बन सकते हैं, जबकि बागची डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (DMD) की भूमिका में आ सकते हैं।

ऐसा होने पर भरूचा अपने मौजूदा अनुभव के साथ बैंक की कमान संभालेंगे। वहीं बागची को HDFC Bank के कारोबार और कामकाज को समझने का समय मिल सकता है। आगे चलकर वह CEO की भूमिका संभाल सकते हैं।

बैंक के लिए क्यों अहम है फैसला?

नए CEO को बड़े मर्जर के बाद तैयार हुई HDFC Bank की बैलेंस शीट के साथ काम करना होगा। डिपॉजिट ग्रोथ, फंडिंग कॉस्ट, नेट इंटरेस्ट मार्जिन, लोन ग्रोथ और रिटर्न जैसे मुद्दे बैंक के लिए अहम रहेंगे।

अभी अंतिम फैसला RBI को करना है। इसलिए फिलहाल भरूचा, बागची या दोनों की भूमिका वाली तीनों संभावनाएं खुली हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Solar Industries India में 25% तक उछाल का दम! ICICI Securities ने दी खरीद की सलाह

एक्सप्लोसिव बनाने वाली कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया ने हाल ही में घोषणा की कि वह दक्षिण अफ्रीका की ओम्निया होल्डिंग्स को लगभग 1.36 अरब डॉलर की पूरी तरह कैश वाली डील में खरीदेगी। कंपनी की स्टेप डाउन सब्सिडियरी सोलर SA इनवेस्टमेंट्स प्रोपराइटरी लिमिटेड और सब्सिडियरी सोलर ओवरसीज मॉरीशस लिमिटेड ने इसके लिए ओम्निया होल्डिंग्स के साथ एक डेफिनिटिव एग्रीमेंट साइन किया है। इस डेवलपमेंट के बाद सोलर इंडस्ट्रीज के​ लिए ICICI Securities का व्यू सामने आया है।

ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 23,500 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है। यह बीएसई पर शेयर के मौजूदा भाव 18830 रुपये से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है। सोलर इंडस्ट्रीज की इस नई डील के लिए अभी रेगुलेटर्स और ओम्निया के शेयरधारकों की मंजूरी लिया जाना बाकी है।

सोलर इंडस्ट्रीज को उम्मीद है कि इस विस्तार से अफ्रीका में माइनिंग से होने वाली कमाई वित्त वर्ष 2028 से कई गुना बढ़ जाएगी। यह खरीद 2027 की शुरुआत या मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है। सोलर इंडस्ट्रीज माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन, डिफेंस और स्पेस सेक्टर के लिए इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव और इनीशिएटिंग सिस्टम बनाती है। कंपनी की दुनिया भर में 40 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं।

Solar Industries India पर ब्रोकरेज के तर्क

ICICI Securities का कहना है कि ओम्निया होल्डिंग्स में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने से सोलर इंडस्ट्रीज को माइनिंग एक्सप्लोसिव्स और ब्लास्टिंग के लिए पहले से स्थापित इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म तक पहुंच मिलेगी। इससे कंपनी का एक्सप्लोसिव्स का मौजूदा मजबूत कारोबार और बढ़ेगा। सोलर इंडस्ट्रीज इस 1.36 अरब डॉलर के कैश बायआउट के लिए कर्ज और इंटरनल फंडिंग का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। कंपनी को उम्मीद है कि दोनों कंपनियों के मिलने से वित्त वर्ष 2027-28 में 330–340 अरब रुपये का रेवेन्यू और 65 अरब रुपये का EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) हासिल होगा।

ICICI Securities का अनुमान है कि डील पूरी होने पर सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया का कर्ज बढ़कर 110–120 अरब रुपये के पीक पर पहुंच जाएगा। ब्रोकरेज ने यह भी उम्मीद जताई कि यह डील वित्त वर्ष 2029 से ही सोलर इंडस्ट्रीज की प्रति शेयर अर्निंग बढ़ाने लगेगी।

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ओम्निया होल्डिंग्स के बारे में

ओम्निया होल्डिंग्स लिमिटेड एक ग्लोबल, डायवर्सिफाइड केमिकल कंपनी है जो माइनिंग, एग्रीकल्चर और केमिकल एप्लीकेशन इंडस्ट्रीज को केमिकल्स और स्पेशलाइज्ड सर्विस व सॉल्यूशंस की सप्लाई करती है। इसकी मौजूदगी 23 से ज्यादा देशों में है। यह 70 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स के जरिए 40 से ज्यादा देशों में कस्टमर्स को सर्विस देती है। कंपनी के शेयर जोहान्सबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और A2X मार्केट्स सिक्योरिटीज एक्सचेंज पर लिस्टेड हैं। सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया के साथ ट्रांजेक्शन कंप्लीट होने के बाद ओम्निया, जोहान्सबर्ग स्टॉक एक्सचेंज और A2X मार्केट्स सिक्योरिटीज एक्सचेंज से डीलिस्ट हो जाएगी।

Solar Industries India का शेयर 2026 में अब तक 55 प्रतिशत मजबूत

कंपनी का मार्केट कैप 1.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 73.15 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर एक सप्ताह में 15 प्रतिशत नीचे आया है। वहीं 6 महीनों में 37 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 55 प्रतिशत उछला है। 2 साल में 75 प्रतिशत और 3 साल में 300 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। 5 साल में करीब 870 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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Lenskart Block Deal: पीयूष बंसल की कंपनी में प्लेटिनम जैस्मीन बेच सकती है ₹2047 करोड़ के शेयर

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में लगभग ₹2,047.4 करोड़ की ब्लॉक डील होने वाली है। CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्लेटिनम जैस्मीन ए 2018 ट्रस्ट ₹682.45 प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर शेयर बेच सकती है। जानकारी के अनुसार, यह फ्लोर प्राइस लेंसकार्ट के पिछले क्लोजिंग प्राइस से 3.5% कम है। इस ऑफर का साइज लेंसकार्ट की कुल इक्विटी का लगभग 1.7% है। ट्रांजेक्शन की वैल्यू लगभग ₹2,047.4 करोड़ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लॉक डील के जरिए बेचे गए शेयरों पर 90 दिन का लॉक-अप पीरियड लागू होगा, यानि इस दौरान इन शेयरों को आगे नहीं बेचा जा सकेगा। लेंसकार्ट में जून 2026 तिमाही के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 17.53 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

इस साल अगस्त में सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब (केमैन) लिमिटेड ने लेंसकार्ट में 2.58% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेची थी। 4.5 करोड़ शेयर ₹2,887.87 करोड़ में बेचे गए थे। खरीदारों में सोसाइटे जेनरल ओडीआई, गोल्डमैन सैक्स, मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड, वैनगार्ड ग्रुप, मॉर्गन स्टेनली, SBI म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया, HDFC म्यूचुअल फंड जैसे कई घरेलू और वैश्विक निवेशक शामिल थे।

जून में सॉफ्टबैंक ने बेचे थे ₹2873 करोड़ के शेयर

जून में भी सॉफ्टबैंक समूह ने SVF II लाइटबल्ब (केमैन) के जरिए लेंसकार्ट में 3.25% हिस्सेदारी बेची थी। उस वक्त 5,65,00,000 शेयर बेचे गए थे और ट्रांजेक्शन की वैल्यू ₹2,873.30 करोड़ रही थी। व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड (MF), मिरे एसेट MF, कोटक MF, केनरा रोबेको MF, ICICI प्रूडेंशियल MF, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, सोसाइटी जेनरल, मेट्जलर एसेट मैनेजमेंट, गोल्डमैन सैक्स, फिडेलिटी, कॉप्थॉल मॉरीशस इनवेस्टमेंट, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड, और डेंडाना इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) लिमिटेड खरीदार रहे थे।

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Lenskart का शेयर साल 2026 में अब तक 60% चढ़ा

लेंसकार्ट के शेयर की कीमत BSE पर वर्तमान में ₹706.60 है। कंपनी का मार्केट कैप ₹1.2 लाख करोड़ है। शेयर साल 2026 में अब तक 60% चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 40% उछली है। शेयर की कीमत ₹2 है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। टारगेट प्राइस 800 रुपये प्रति शेयर दिया है। अगस्त महीने में जेफरीज ने लेंसकार्ट स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी थी। टारगेट प्राइस बढ़ाकर 680 रुपये प्रति शेयर कर दिया था। ICICI Securities ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ 750 रुपये का टारगेट दिया है। सिटी ने 650 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। HSBC ने स्टॉक के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 575 रुपये प्रति शेयर दिया है।

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HDFC Bank CEO Race: अब रेस में सिर्फ 2 नाम, कौन बनेगा HDFC बैंक का नया बॉस?

HDFC Bank CEO Race: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank के अगले MD और CEO की तलाश अब आखिरी दौर में पहुंच गई है। रेस में सिर्फ दो नाम बचे हैं। इनमें पहले डिप्टी MD कैजाद एम. भरूचा हैं। और दूसरे ICICI Prudential Life के MD और CEO अनूप बागची।

CNBCTV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भरूचा इंटरनल कैंडिडेट हैं। यानी वह पहले से HDFC Bank में हैं। वहीं बागची एक्सटर्नल कैंडिडेट हैं। उन्हें बैंक के बोर्ड ने शॉर्टलिस्ट किया है। इस बारे में अनूप बागची और HDFC Bank को भेजे गए सवालों का खबर छपने तक जवाब नहीं मिला था।

HDFC Bank में CEO की तलाश क्यों?

बैंक के मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का दूसरा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में खत्म हो रहा है। उन्होंने दोबारा इस पद पर आने की इच्छा नहीं जताई है।

बोर्ड ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश भी की थी। लेकिन अब बैंक नए CEO की तलाश में आगे बढ़ चुका है।

कैजाद भरूचा कौन हैं

कैजाद भरूचा 1995 से HDFC Bank के साथ हैं। उन्हें बैंकिंग का 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह 2014 से बैंक के बोर्ड में होल-टाइम डायरेक्टर हैं। अप्रैल 2023 में उन्हें डिप्टी MD बनाया गया था।

भरूचा ने बैंक में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने कॉरपोरेट बैंकिंग, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल एसेट्स जैसे कारोबार देखे हैं। यानी बैंक के कामकाज को वह अंदर से जानते हैं। अगर उन्हें CEO बनाया जाता है, तो बैंक को अंदर से ही नया नेतृत्व मिल जाएगा। इससे कामकाज में निरंतरता बनी रह सकती है।

लेकिन उनके सामने एक दिक्कत भी है। भरूचा 2014 से बैंक के बोर्ड में होल-टाइम डायरेक्टर हैं। उनके 13 साल से ज्यादा पूरे हो चुके हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, होल-टाइम डायरेक्टर का कुल कार्यकाल 15 साल तक हो सकता है। इसमें MD और CEO भी शामिल हैं।

ऐसे में भरूचा की मौजूदा पात्रता 2029 तक ही रह सकती है। अगर वह CEO बनते हैं, तो करीब तीन साल ही इस पद पर रह पाएंगे। अगर बैंक उन्हें इसके बाद भी पूरा कार्यकाल देना चाहता है, तो RBI से छूट लेनी पड़ सकती है।

अनूप बागची की दावेदारी

दूसरे दावेदार अनूप बागची हैं। वह अभी ICICI Prudential Life के MD और CEO हैं। बागची को बैंकिंग, कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने रिटेल, MSME और कॉरपोरेट बैंकिंग में काम किया है। इसके अलावा ट्रेजरी और क्रेडिट पॉलिसी का भी अनुभव है।

बागची ICICI Group के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह इससे पहले ICICI Securities के MD और CEO रह चुके हैं। वह ICICI Bank के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रहे हैं।

उनका अनुभव सिर्फ बैंकिंग तक सीमित नहीं है। कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस की भी उन्हें अच्छी समझ है। यही वजह है कि वह HDFC Bank के लिए मजबूत बाहरी उम्मीदवार माने जा रहे हैं।

अब RBI की मंजूरी का इंतजार

नए MD और CEO का फैसला सिर्फ HDFC Bank का बोर्ड नहीं करेगा। इसके लिए रेगुलेटरी मंजूरी भी जरूरी है। इसमें RBI की मंजूरी सबसे अहम होगी। अब असली सवाल यह है कि बैंक किसे चुनता है।

एक तरफ कैजाद भरूचा हैं। उन्हें HDFC Bank के कामकाज की अंदर से अच्छी समझ है। दूसरी तरफ अनुप बागची हैं। उनके पास बैंकिंग के साथ कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस का भी अनुभव है।

निवेशकों की नजर अब बोर्ड के अंतिम फैसले और RBI की मंजूरी पर रहेगी। यही दोनों चीजें HDFC Bank के शेयर के लिए आगे बड़ा ट्रिगर बन सकती हैं।

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Lenskart Share Price: मोतीलाल ओसवाल बुलिश, दिख रहा 17% तक उछाल का दम; खरीद की दी सलाह

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस पर मोतीलाल ओसवाल बुलिश है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। टारगेट प्राइस 800 रुपये प्रति शेयर दिया है। यह BSE पर शेयर की वर्तमान कीमत 681.75 रुपये से 17 प्रतिशत ज्यादा है। लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। ब्रोकरेज का कहना है कि लिस्टिंग के बाद से शेयर की कीमत में करीब 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह शानदार परफॉर्मेंस मुख्य रूप से कमाई की अच्छी रफ्तार की वजह से है।

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि कंपनी का स्टोर इकोनॉमिक्स बेहतरीन है। एक नया स्टोर 10 महीने से भी कम समय में अपनी लागत वसूल कर लेता है, जबकि स्टोर का EBITDA मार्जिन 33 प्रतिशत से ज्यादा है। इस क्षेत्र में संगठित कंपनियों की ओर से प्रतिस्पर्धा अभी सीमित है और चश्मे के बाजार में आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है। कंपनी मजबूत फ्री कैश फ्लो (FCF) भी क्रिएट कर रही है। इन सब चीजों को देखते हुए ब्रोकरेज को उम्मीद है कि लेंसकार्ट स्टोर खोलने की रफ्तार बढ़ाएगी। वित्त वर्ष 2029 तक भारत में इसके स्टोर्स की संख्या 4,500 तक पहुंच जाएगी। लेंसकार्ट सॉल्यूशंस ने जून 2026 तिमाही के दौरान 132 नए स्टोर खोले। इसके बाद इसके एक्टिव स्टोर्स की कुल संख्या बढ़कर 3,459 हो गई है।

ब्रोकरेज ने भारत में ज्यादा स्टोर खोले जाने और भारत व इंटरनेशनल दोनों जगह बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज की वजह से लेंसकार्ट के​ लिए FY27-28E के कंसोलिडेटेड प्री-IND AS EBITDA अनुमान को 4 प्रतिशत/8 प्रतिशत बढ़ा दिया है। FY26-29E के दौरान रेवेन्यू की CAGR (कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट) 27 प्रतिशत, प्री-Ind AS EBITDA CAGR 46 प्रतिशत और एडजस्टेड शुद्ध मुनाफे की CAGR 59 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

Lenskart का शेयर इस साल अब तक 55 प्रतिशत चढ़ा

लेंसकार्ट का मार्केट कैप 1.18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर साल 2026 में अब तक 55 प्रतिशत चढ़ा है। 3 महीनों में कीमत 35 प्रतिशत उछली है। दूसरे ब्रोकरेज की बात करें तो अगस्त महीने में जेफरीज ने लेंसकार्ट स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी। टारगेट प्राइस बढ़ाकर 680 रुपये प्रति शेयर कर दिया। ICICI Securities ने ‘बाय’ रेटिंग के साथ 750 रुपये का टारगेट दिया है। सिटी ने 650 रुपये प्रति शेयर के टारगेट प्राइस के साथ ‘न्यूट्रल’ रेटिंग बरकरार रखी है। HSBC ने स्टॉक के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 575 रुपये प्रति शेयर दिया है।

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जून तिमाही में मुनाफा 269 प्रतिशत बढ़ा

लेंसकार्ट का अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 269.24 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद 221.84 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 43.3 प्रतिशत बढ़कर 2,714.18 करोड़ रुपये हो गया। भारत से रेवेन्यू 30.7 प्रतिशत बढ़कर 1,531 करोड़ रुपये रहा, जबकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से रेवेन्यू सालाना आधार पर 38 प्रतिशत बढ़कर 1,203 करोड़ रुपये हो गया।

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Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है शेयर

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) का ₹650 करोड़ का IPO 20 अगस्त को खुला था। अभी तक यह 21.69 गुना भर चुका है। इसमें 24 अगस्त को भी पैसे लगाए जा सकेंगे। उसके बाद अलॉटमेंट 25 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 28 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं। स्टॉक मार्केट में कंपनी की शुरुआत धांसू रहने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर 107 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। मतलब कि IPO निवेशकों को तगड़ा मुनाफा हो सकता है।

लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग डे पर सच हो जाएं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। Tempsens Instruments IPO के लिए प्राइस बैंड ₹285-₹300 प्रति शेयर और लॉट साइज 50 शेयर है। IPO में ₹95 करोड़ के 32 लाख नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही प्रमोटर्स और मौजूदा शेयरहोल्डर्स की ओर से ₹555 करोड़ के 1.85 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है।

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) लिमिटेड एक थर्मल इंजीनियरिंग कंपनी और खास तरह के केबल बनाने वाली कंपनी है। यह कस्टमाइज्ड टेंपरेचर सेंसिंग सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और खास तरह के केबल की डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है। कंपनी के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं। कंपनी कॉन्टैक्ट और नॉन कॉन्टैक्ट टेंपरेचर सेंसर बनाती है।

किस कैटेगरी में अब तक कितना सब्सक्रिप्शन

IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा अभी तक 3.31 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 52.98 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 18.73 गुना और कर्मचारियों के लिए रिजर्व हिस्सा 28.93 गुना भर चुका है। IPO के लिए ICICI Securities Ltd और JM Financial बु​क रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल सॉल्यूशंस को लेकर पूंजीगत खर्च के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। IPO की ओपनिंग से पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹194.55 करोड़ जुटाए। IPO में ₹1.5 करोड़ के शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। बाकी ​बचे हिस्से में से 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Tempsens Instruments की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 19 प्रतिशत बढ़कर ₹455.86 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹71 करोड़ रहा। ​एक साल पहले रेवेन्यू ₹382.47 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹62.56 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 के दौरान टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स पर ₹77.95 करोड़ की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Atomberg IPO: बिजली की कम खपत वाले पंखे बनाने वाली एटमबर्ग नए शेयरों से जुटा सकती है ₹450 करोड़, जानिए पूरा प्लान

Atomberg IPO: एटमबर्ग टेक्नोलॉजीज आईपीओ में नए शेयरों से 450 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। कंपनी के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) भी होगा। इसके जरिए कुछ पुराने इनवेस्टर्स 7.65 करोड़ शेयर बेच सकते हैं। कंपनी आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल बिजनेस की ग्रोथ और बैलेंसशीट मजबूत करने के लिए करेगी।

2012 में हुई थी कंपनी की शुरुआत 

Atomberg Technologies की शुरुआत 2012 में हुई थी। इसका हेडक्वार्टर मुंबई है। कंपनी फैंस सहित कई दूसरे इलेक्टिकल प्रोडक्ट्स बनाती है, जिनमें बिजली का काफी कम इस्तेमाल होता है। इसके सिलिंग पंखों ने मार्केट में बड़े बदलाव लाए हैं। कंपनी ने ICICI Securities, Avendus Capital और IIFL Capital Services को बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स नियुक्त किया है।

आईपीओ में ऑफर फॉर सेल भी होगा

कंपनी के आईपीओ में कई पुराने इनवेस्टर्स को अपने शेयर्स बेचने का मौका मिलेगा। इनमें A91 Partners शामिल है, जिसने अपने इमर्जिंग फंड I के जरिए निवेश किया है। यह आईपीओ में सबसे ज्यादा 3.77 करोड़ शेयर बेचेगी। टेमासेक की V-Sciences Investments 1.22 करोड़ शेयर बेचेगी, जबकि Jungle Ventures अपने JV4 के जरिए 99.5 लाख शेयर बेचेगी।

कई शुरुआती निवेशकों को तगड़ा मुनाफा

एटमबर्ग का आईपीओ कई शुरुआती निवेशकों को मोटा मुनाफा कमाने का मौका देगा। सबसे ज्यादा मुनाफा Survam को हो सकता है, जिसने सिर्फ 6.64 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर कंपनी के शेयरों में निवेश किया था। Steadvies ने प्रति शेयर 60.60 रुपये की कीमत पर कंपनी के शेयरों में निवेश किया था। V-Sciences ने प्रति शेयर 59.68 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर निवेश किया था, जबकि A91 ने सिर्फ प्रति शेयर 9.02 रुपये की कीमत पर निवेश किया था।

कंपनी आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल यहां करेगी

Survam को अपने रिटर्न पर Steadview के मुकाबले करीब 9.1 गुना ज्यादा मुनाफा मिल सकता है। इसका मतलब है कि जिन निवेशकों ने जितनी कम कीमत पर शेयरों में निवेश किया था, उन्हें उतना ज्यादा मुनाफा होगा। कंपनी ने कहा है कि वह नए शेयर इश्यू करने से मिले 450 करोड़ रुपये में से 150 करोड़ का इस्तेमाल ब्रांड को मजबूत बनाने के लिए करेगी। 100 करोड़ का निवेश रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए करेगी। 90 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी।

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बीते तीन वित्त वर्ष से कंपनी लॉस में है

पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर्स में से हर ईयर में कंपनी को लॉस हुआ है। FY26 में कंपनी का लॉस बढ़कर 148.9 करोड़ रुपये हो गया। यह FY25 में 117.4 करोड़ रुपये और FY24 में 199.1 करोड़ रुपये था। इसका ऑपरेटिंग कैश फ्लो FY26 में निगेटिव हो गया। कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग और आरएंडडी ऑपरेशंस सिर्फ पुणे के आसपास केंद्रित है। यह एक रिस्क है।