Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को रेलवे से ₹134 करोड़ का ऑर्डर मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी GPT Infraprojects Limited को रेलवे से ₹134.11 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट कंपनी की सब्सिडियरी Alcon Builders and Engineers Private Limited को पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने दिया है।

रेलवे ट्रैक पर लगाया जाएगा सिग्नलिंग सिस्टम

इसके तहत रेलवे ट्रैक पर सिग्नलिंग सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम ट्रेनों की आवाजाही को सुरक्षित और बेहतर बनाने में मदद करता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और डिजिटल एक्सल काउंटर भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा, कुछ स्टेशनों पर पहले से लगे सिस्टम में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।

इन चार रूट पर होगा काम

यह काम पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के चार रूट पर होगा। इनमें नागदा-उज्जैन-ताजपुर, फंदा-संत हिरदाराम नगर, उज्जैन-कर्च्छा और मांगलियागांव-इंदौर के बीच के डबल रेलवे ट्रैक शामिल हैं। कंपनी को यह काम शुरू होने की तय तारीख से 548 दिनों के भीतर पूरा करना है।

₹5,651 करोड़ की हुई ऑर्डर बुक

इस ऑर्डर के बाद GPT Infraprojects की बकाया ऑर्डर बुक ₹5,651 करोड़ पर पहुंच गई है। यानी कंपनी के पास अभी इतने रुपये के काम पूरे करने बाकी हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2027 में अब तक उसे ₹1,478 करोड़ के नए ऑर्डर मिल चुके हैं।

शेयर में इस साल 15% की तेजी

GPT Infraprojects का शेयर शुक्रवार को करीब 1% की बढ़त के साथ 125.99 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में इसने 10.95% का रिटर्न दिया है। इस साल अब तक शेयर लगभग 15% चढ़ चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 1.59 हजार करोड़ रुपये है।

पुल और रेलवे स्लीपर भी बनाती है कंपनी

GPT Infraprojects इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े काम करती है। इसमें पुल, रोड ओवरब्रिज और रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम लगाने जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी रेलवे ट्रैक पर इस्तेमाल होने वाले कंक्रीट स्लीपर भी बनाती है। भारत के साथ-साथ अफ्रीका में भी इसका कारोबार है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पश्चिम बंगाल, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और घाना में हैं।

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Stocks to Buy: ब्रोकरेज ने टाटा स्टील समेत 5 शेयरों को खरीदने की सलाह दी, 45% तक तेजी की उम्मीद

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ब्रोकरेज कुछ स्टॉक्स पर बुलिश हैं। 5 शेयरों पर अलग-अलग ब्रोकरेज ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस के आधार पर इनमें करीब 24% से 41% तक तेजी की गुंजाइश दिख रही है। लिस्ट में बैंकिंग, स्टील, टेक्सटाइल, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर के शेयर शामिल हैं।

Shriram Finance

एनबीएफसी कंपनी Shriram Finance पर Motilal Oswal ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने ₹1,220 का टारगेट दिया है। शेयर का मौजूदा भाव ₹983.50 है। इस स्तर से करीब 24% तेजी की गुंजाइश बनती है। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनी का ग्रोथ फोकस अब कमर्शियल व्हीकल से आगे बढ़कर कई सेगमेंट में फैल रहा है।

Tata Steel

स्टील कंपनी Tata Steel पर Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस ₹240 है, जबकि शेयर फिलहाल ₹185.69 पर है। इस भाव से करीब 29% की तेजी की संभावना बनती है। Nomura को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में घरेलू स्टील कीमतों में बढ़ोतरी से टाटा स्टील को फायदा मिलेगा।

कंपनीब्रोकरेजटारगेट प्राइसतेजी की गुंजाइश
Shriram FinanceMotilal Oswal₹1,22024%
Tata SteelNomura₹24029%
Yatharth HospitalsChoice Institutional Equities₹1,35032%
Sanathan TextilesEmkay₹67533%
Dr Reddy’s LaboratoriesNomura₹1,74041%

Yatharth Hospitals

हेल्थकेयर कंपनी Yatharth Hospitals पर Choice Institutional Equities ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का टारगेट ₹1,350 है और शेयर ₹1,024 पर है। यानी मौजूदा भाव से करीब 32% रिटर्न मिल सकता है। कंपनी की एडवेंट इंटरनेशनल के साथ रणनीतिक साझेदारी और अधिग्रहण योजनाओं से 30% से ज्यादा ऑर्गेनिक ग्रोथ की उम्मीद जताई गई है।

Sanathan Textiles

टेक्सटाइल कंपनी Sanathan Textiles पर Emkay ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। शेयर का मौजूदा भाव ₹509 है, जबकि टारगेट प्राइस ₹675 रखा गया है। इस हिसाब से करीब 33% की तेजी मुमकिन है। ब्रोकरेज के मुताबिक पंजाब प्लांट में क्षमता विस्तार और नई मशीनरी से कंपनी की ग्रोथ को बढ़ावा मिल सकता है।

Dr Reddy’s Laboratories

फार्मा कंपनी Dr Reddy’s Laboratories पर Nomura ने ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। शेयर ₹1,232.70 पर है और टारगेट प्राइस ₹1,740 है। इस भाव से करीब 41% उछाल दिख सकता है। बायोलॉजिक्स प्लांट की USFDA मंजूरी और बायोसिमिलर Abatacept की मंजूरी कंपनी के लिए अहम ट्रिगर हैं। मंजूरी मिलने पर कंपनी पहली लहर में Abatacept को 50 से ज्यादा देशों में लॉन्च करने की योजना बना रही है।

Railway Stocks: रेलवे की सरकारी कंपनियों ने पकड़ी तेज रफ्तार, 20% भागा IRCON इंटरनेशनल

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Railway Stocks: रेलवे की सरकारी कंपनियों ने पकड़ी तेज रफ्तार, 20% भागा IRCON इंटरनेशनल

Railway Stocks : बुधवार के ट्रेडिंग सेशन में रेलवे की सरकारी कंपनियों में तेज रफ्तार बनी हुई है। IRCON, RVNL समेत कई रेलवे शेयरों में 2 से 14 फीसदी की तेजी देखी जा रही है। यह तेजी भारी वॉल्यूम के साथ आई है। IRCON इंटरनेशनल के शेयर 20 प्रतिशत बढ़कर 122.96 रुपये के एक महीने के हाई पर पहुंच गए। दोपहर में ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग के कारण कुछ बढ़त गंवाने के बाद भी यह शेयर 14 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रहा था। दोपहर तक IRCON इंटरनेशनल के कुल 626.02 लाख शेयरों का कारोबार हुआ,जिनका कुल कारोबारी मूल्य 732.20 करोड़ रुपये था। पिछले चार सेशन में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट के बाद स्टॉक में बढ़त हुई है।

इस बीच,इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन के शेयरों में 2 प्रतिशत तक की बढ़त हुई। दोपहर 2 बजे तक कंपनी के 6 लाख से ज़्यादा शेयरों का कारोबार हुआ,जिनकी कुल वैल्यू 28.05 करोड़ रुपये थी। कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के शेयरों में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त देखी गई। वहीं, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन के शेयरों में दबाव दिखा और उनमें गिरावट आई।

रेलवे शेयरों में आज तेज रफ्तार बनी हुई है। लेकिन पिछले 1 साल में ये शेयर 30-40% टूटे है। रेलवे शेयरों में आज रिबाउंड के साथ ये शेयर 2-14% तक चढ़े हैं। शेयर। इन कंपनियों की ऑर्डरबुक मजबूत है। इससे इनकी आय विजिबिलिटी भी बेहतर हुई है, जिसका असर इन शेयरों पर देखने को मिल रहा है।

रेलवे शेयरों में गिरावट

रेलवे शोयरों की 1 साल की चाल पर नजर डालें तो IRCON ने 1 साल में 32% निगेटिव रिटर्न दिया है। यह शेयर अपने 52 वीक हाई से 37 फीसदी नीचे दिख रहा है। वहीं, RVNL ने 1 साल में 39% निगेटिव रिटर्न दिया है। यह शेयर अपने 52 वीक हाई से 48 फीसदी नीचे दिख रहा है। RailTel ने 1 साल में 26% निगेटिव रिटर्न दिया है। यह शेयर अपने 52 वीक हाई से 31 फीसदी नीचे दिख रहा है। IRFC ने 1 साल में 35% निगेटिव रिटर्न दिया है। यह शेयर अपने 52 वीक हाई से 41 फीसदी नीचे दिख रहा है। Titagarh Rail ने 1 साल में 4% निगेटिव रिटर्न दिया है। यह शेयर अपने 52 वीक हाई से 14 फीसदी नीचे दिख रहा है।

रेलवे कंपनियों की ऑर्डर बुक

सरकारी रेलवे कंपनियों की ऑर्डर बुक काफी मजबूत है। RVNL के पास 93,000 करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं। वहीं, IRCON के पास 23,366 करोड़ रुपए के और Titagarh Rail के पास 26,635 करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं। RailTel के पास 11,747 करोड़ रुपए के ऑडर्र हैं। वहीं, RITES के पास 9,450 करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं।

 

 

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Banks vs NBFCs: 5 वजहों से बैंकिंग शेयरों की चमक फीकी, एनबीएफसी ने मारी बाजी

Banks vs NBFCs: लोन बुक में बढ़ोतरी, एसेट क्वालिटी की मजबूती बने रहने और बैड लोन के रिकॉर्ड निचले स्तर के आस-पास होने के बावजूद बड़े बैकों के शेयर निवेशकों को लुभा नहीं पा रहे। वहीं नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज (NBFC) को लेकर निवेशकों की काफी दिलचस्पी दिख रही है। सैमको सिक्योरिटीज के सीईओ और फाउंडर जिमीत मोदी का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि बैंकों का मैनेजमेंट खराब है बल्कि बैंकिंग सेक्टर के हालात बदल गए हैं। उन्होंने इसके पीछे की पांच अहम वजह बताई है, जिसके बारे में नीचे दिया जा रहा है।

घट रहे बैंकों के रिटर्न

बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरहोल्डर्स का रिटर्न अब कम हो रहा तो दिग्गज एनबीएफसी में RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) बढ़ रहा है। लंबे समय तक बैंकों का RoE मजबूत बना रहा क्योंकि उनके पसा बड़ा डिपॉजिट बेस था, जिसके दम पर वे शेयरहोल्डर्स के निवेश की तुलना में अधिक लोन बांट पाते थे तो दूसरी तरफ एनबीएफसी को यह सुविधा नहीं थी और उन्हें अपनी पूंजी पर निर्भर रहना पड़ता था। हालांकि अब लेंडिंग मार्जिन कम होने से अधिक लेवरेज का असर बैंकों के RoE पर निगेटिव दिखने लगा तो बेहतर मार्जिन और कम लेवरेज वाली NBFCs का रिटर्न बेहतर बना हुआ है।

रेपो-लिंक्ड लोन ने बढ़ाई बैंकों की दिक्कत

फरवरी 2025 से आरबीआई ने रेपो रेट में 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। बैंकों के लगभग 60% लोन इसी रेट से जुड़े होते हैं तो रेपो रेट कम होने से इनकी ब्याज दर लगभग तुरंत कम हो गईं। वहीं डिपॉजिट के मामले में स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि इनकी दरें तभी बदलती हैं, जब वे मैच्योर होते हैं, जिसमें आमतौर पर छह से बारह महीने लगते हैं। ऐसे में बैंकों की इनकम पहले घटी, जबकि लागत बाद में कम हुई। वहीं नॉन-बैंक लेंडर्स यानी NBFCs के मामले में स्थिति बिल्कुल उल्टी रही। उनके अधिकतर लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, जैसे- ऑटो, गोल्ड और SME लोन। ऐसे में उनकी इनकम कम नहीं हुई और लोन के लिए फंड जुटाने की लागत कम हो गई। इस तरह रेपो रेट में कटौती का असर बिल्कुल अलग-अलग दिखा और इसने मार्जिन में फर्क डाल दिया।

कमजोर हो रही बैंकों की डिपॉजिट

दशकों तक बैंकों को कम लागत वाली सेविंग्स डिपॉजिट मिल जा रही थी लेकिन अब स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड जैसे मार्केट से जुड़े प्रोडक्ट्स में पैसा जाने लगा तो बैंकों का डिपॉजिट्स बेस कमजोर पड़ा। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक परिवारों की बचत का बैंकों में जमा हिस्सा FY12 में 57.9% से घटकर FY25 में 35.2% रह गया। ऐसे में बैंकों के लिए बॉन्ड्स और CD (सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट) इत्यादि की जरूरत बढ़ने लगी जिनकी फंडिंग लागत मार्केट से जुड़ी है। एनबीएफसी भी इसी तरीके से पैसे जुटाते हैं।

कुछ एरिया में बैंकों से आगे NBFC

पिछले कुछ महीनों में बैंकों की लोन ग्रोथ एनबीएफसी की तुलना में अधिक रफ्तार से बढ़ी लेकिन इस ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा बड़े कॉरपोरेट से जुड़ा है, जहां मार्जिन कम है और कीमत बॉन्ड मार्केट से तय होती है। इसके अलावा एनबीएफसी को भी बैंकों का लोन तेजी से बढ़ रहा है। एनबीएफसी की बात करें तो गोल्ड लोन, पुरानी गाड़ियों से जुड़े लोन, अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़े लोन और छोटे बिजनेसेज के लोन के मामले में यह आगे है। इन सेगमेंट में सही फैसला लेने, स्थानीय जानकारी और लोन वसूली की क्षमता की जरूरत होती है, और NBFC ने इन मामलों में बढ़त हासिल कर ली है।

लीडरशिप में बदलाव

प्राइवेट बैंकों के चीफ एग्जीक्यूटिव का एक कार्यकाल तय होता है, जिस पर आरबीआई मंजूरी लेनी होती है। चूंकि कई लीडरशिप कार्यकाल एक ही समय के आसपास तय किए गए थे, इसलिए अब उनमें से कई लगभग एक साथ खत्म हो रहे हैं। इस वजह से 2026 में प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंकों में बड़ी संख्या में लीडरशिप में बदलाव हो रहे हैं। लीडरशिप में बदलाव से बड़े फैसलों में देरी हो सकती है। नए सीईओ के पद संभालने तक बैंक कई अहम फैसलों को टाल सकते हैं तो नए सीईओ भी आते ही तुरंत आक्रामक तौर पर काम करने लगें, ऐसा जरूरी भी नहीं। बैंकिंग स्टेबिलिटी के लिए ये नियम जरूरी हैं, लेकिन लीडरशिप में बदलाव के समय बैंकों को लेकर निवेशक अधिक सतर्क होने लगते हैं।

क्या करना चाहिए निवेशकों को

निवेशकों की पसंद में बदलाव स्टॉक मार्केट में भी दिखने लगा है। एक साल में निफ्टी बैंक 3.51% मजबूत हुआ है लेकिन निफ्टी फाइनेंशिल सर्विसेज 2.5% कमजोर हुआ है। हालांकि अगर निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में से बैंकों को निकाल दें तो यह एक साल में 6.77% मजबूत हुआ। जिमीत मोदी के मुताबिक जहां बैंकों का क्रेडिट मॉडल काम नहीं कर पा रहा, वहां एनबीएफसी की मौजूदगी इसकी कमाई को सपोर्ट दे रही। हालांकि उनका यह भी मानना है कि इसमें अधिकतर फायदा साइक्लिकल है और इसमें बदलाव हो सकता है। बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रक्चरल है। अब आम लोग अपनी बचत बैंकों की बजाय मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में डाल रहे हैं। जिमीत के मुताबिक ऐसे समय में निवेशकों को सिर्फ लोन ग्रोथ की बजाय बैंकों के लोन यील्ड और कम लागत वाले डिपॉजिट के हिस्से पर ध्यान देना चाहिए।

Railway Stocks: इस रेलवे पीएसयू को मिला ₹405 करोड़ का काम, अब 21 सितंबर को शेयरों पर रहेगी नजर

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IRB Infrastructure: अगस्त में टोल रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹807 करोड़, शेयरों पर रहेगी नजर

IRB Infrastructure: टोल और हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर कंपनी IRB Infrastructure Developers Ltd ने अगस्त 2026 के टोल रेवेन्यू के आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी का ग्रॉस टोल रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 25% बढ़कर ₹807 करोड़ पहुंच गया। अगस्त 2025 में यह ₹646 करोड़ था।

प्रमुख टोल एसेट्स का प्रदर्शन

IRB MP Expressway का टोल रेवेन्यू अगस्त 2026 में बढ़कर ₹172.1 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹144.7 करोड़ था। वहीं, IRB Golconda Expressway का रेवेन्यू ₹73.7 करोड़ से बढ़कर ₹87.9 करोड़ हो गया।

IRB Ahmedabad Vadodara Super Express Tollway ने अगस्त में ₹80.3 करोड़ का टोल रेवेन्यू दर्ज किया। पिछले साल इसी महीने यह ₹69.1 करोड़ था। IRB Lalitpur Tollway का रेवेन्यू भी ₹36.1 करोड़ से बढ़कर ₹43.5 करोड़ हो गया।

इसके अलावा, IRB Tumkur Chitradurga Tollway का टोल रेवेन्यू ₹34.9 करोड़ से बढ़कर ₹38.4 करोड़ रहा। Udaipur Tollway का रेवेन्यू ₹26.3 करोड़ से बढ़कर ₹28.8 करोड़ हो गया।

नए एसेट्स से भी मिला योगदान

अगस्त 2026 में तीन ऐसे एसेट्स रहे, जिनका पिछले साल का तुलनात्मक आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। IRB Harihara Corridors Tollway ने ₹41.7 करोड़, IRB Chandibhadra Tollway ने ₹20 करोड़ और Meerut Budaun Expressway ने ₹22.6 करोड़ का टोल रेवेन्यू दर्ज किया।

कुछ एसेट्स में रेवेन्यू घटा

सभी प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। IRB Kota Tollway का टोल रेवेन्यू ₹7.1 करोड़ से घटकर ₹6.3 करोड़ रह गया। Hapur Moradabad Tollway का रेवेन्यू ₹28.9 करोड़ से घटकर ₹22.3 करोड़ रहा।

वहीं, Kishangarh Gulabpura Tollway का टोल रेवेन्यू मामूली गिरावट के साथ ₹23 करोड़ से ₹22.5 करोड़ रह गया।

28 हाईवे एसेट्स का पोर्टफोलियो

कंपनी के मुताबिक, IRB Group के पास 13 राज्यों में 28 रेवेन्यू जेनरेटिंग हाईवे एसेट्स हैं। इन एसेट्स की कुल वैल्यू करीब ₹94,000 करोड़ है। रोजाना करीब 15 लाख व्हीकल इन हाईवे एसेट्स से गुजरते हैं।

कंपनी अपनी एसेट चर्न स्ट्रैटेजी के जरिए FY2029 तक एसेट बेस को बढ़ाकर करीब ₹1.4 लाख करोड़ करने की योजना बना रही है।

कंपनी ने क्या कहा?

IRB Infrastructure Developers के डिप्टी CEO अमिताभ मुराका ने कहा कि अगस्त में मजबूत टोल रेवेन्यू कंपनी के एसेट्स पर लगातार ट्रैफिक ग्रोथ को दिखाता है। ट्रैफिक बढ़ने के साथ FY27 की शुरुआत में लागू किए गए टैरिफ रिविजन से भी रेवेन्यू को सपोर्ट मिला है।

उन्होंने कहा कि मजबूत GDP ग्रोथ से आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। गणेश फेस्टिवल के साथ फेस्टिव सीजन भी शुरू हो चुका है। ऐसे में आने वाले महीनों में ट्रैफिक का पॉजिटिव मोमेंटम जारी रहने की उम्मीद है।

शेयर का हाल

IRB Infrastructure Developers का शेयर बुधवार को BSE पर 0.94% की गिरावट के साथ ₹19.07 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 9.84% गिरा है। इसका मार्केट कैप 11.50 हजार करोड़ रुपये है।

Railway Stocks: ₹20804 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट मंजूर, इन रेलवे स्टॉक्स को मिल सकता है फायदा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

AI के अलावा भी उभरते बाजारों में मौके, भारत को मिल सकता है फायदा: BNP Paribas

AI से जुड़े शेयरों में तेजी ने दुनियाभर के बाजारों का ध्यान खींचा है। लेकिन अब तस्वीर थोड़ी बदल रही है। निवेश के मौके सिर्फ AI तक सीमित नहीं रह गए हैं। उभरते बाजारों में दूसरी कंपनियों में भी कमाई के अनुमान बेहतर हो रहे हैं। इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है।

यह कहना है BNP Paribas Asset Management के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट और इन्वेस्टमेंट इनसाइट्स सेंटर के को-हेड डेनियल मॉरिस (Daniel Morris) का।

इमर्जिंग मार्केट्स पर ओवरवेट BNP Paribas

मॉरिस के मुताबिक, BNP Paribas इमर्जिंग मार्केट्स यानी उभरते बाजारों को लेकर ओवरवेट है। यहां सिर्फ AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई के अनुमान बेहतर नहीं हो रहे हैं। नॉन-टेक कंपनियों के लिए भी तस्वीर सुधर रही है।

उनके मुताबिक, इससे उभरते बाजारों में निवेश के मौके ज्यादा संतुलित हो रहे हैं। भारत इस तस्वीर में नॉन-टेक हिस्से की तरफ नजर आता है। उन्होंने कहा कि AI और नॉन-टेक दोनों में मौकों का यह संतुलन पहले से बेहतर है।

भारत को मिल सकता है फायदा

मॉरिस ने कहा कि अगर उभरते बाजारों में निवेश बढ़ता है तो भारत को इसका फायदा मिल सकता है।

उनके मुताबिक, वैश्विक निवेश का माहौल भी बदल रहा है। पिछले साल निवेशकों का फोकस काफी हद तक अमेरिका पर था। अब तस्वीर ज्यादा संतुलित दिख रही है। अमेरिका के अलावा जापान और उभरते बाजारों में भी निवेश के मौके नजर आ रहे हैं।

जापान में भी बदल रहा निवेश का गणित

जापान में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ रही है। इसका असर वहां के घरेलू निवेशकों के फैसलों पर पड़ सकता है। जापानी निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी के बजाय अपने देश के सरकारी बॉन्ड खरीद सकते हैं। इससे येन कैरी ट्रेड में कुछ कमी आ सकती है। जापान का अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में लगा पैसा भी कुछ हद तक वापस घरेलू बाजार में जा सकता है।

हालांकि, मॉरिस को इससे अमेरिकी ट्रेजरी बाजार में बड़ी उथल-पुथल की उम्मीद नहीं है। उनके मुताबिक, इसे बाजार में पैसे के एक हिस्से के दूसरी जगह जाने के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने इसे रीबैलेंसिंग बताया है।

मजबूत येन का जापानी शेयरों पर असर

मजबूत येन का जापानी शेयर बाजार पर मिला-जुला असर हो सकता है। कमजोर येन का फायदा जापानी कंपनियों को लंबे समय से मिलता रहा है।

खासकर निर्यात पर निर्भर कंपनियों को कमजोर येन से फायदा होता है। विदेशी निवेशकों को भी जापानी शेयरों में तेजी के साथ करेंसी से फायदा मिल सकता है। ऐसे में येन मजबूत होने पर जापानी कंपनियों और विदेशी निवेशकों के लिए यह फायदा कुछ कम हो सकता है।

Railway Stocks: ₹20804 करोड़ के 8 प्रोजेक्ट मंजूर, इन रेलवे स्टॉक्स को मिल सकता है फायदा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।