Ghaziabad-Sitapur Rail Project: पश्चिमी यूपी को बड़ी सौगात! गाजियाबाद से सीतापुर के बीच 403 KM की बिछेगी नई रेल लाइन, हापुड़ को भी होगा बड़ा फायदा

Ghaziabad–Sitapur Rail Project: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा बल मिला है। गाजियाबाद से हापुड़ होते हुए सीतापुर तक करीब 406 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की प्रस्तावित योजना अब सर्वे के चरण में पहुंच गई है। इस महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट का फाइनल सर्वे फिलहाल जारी है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,926 करोड़ रुपये बताई गई है। रेलवे की ओर से एक RTI के जवाब में दी गई जानकारी सामने आने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों में नई रेल कनेक्टिविटी की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

इसी साल 18 अप्रैल को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गाजियाबाद और सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी दी थी। उम्मीद है कि इससे रेलवे की क्षमता काफी बढ़ेगी, सेवा की विश्वसनीयता में सुधार होगा और देश के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक पर भीड़ कम होगी। यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद-सीतापुर सेक्शन दिल्ली-गुवाहाटी हाई-डेंसिटी नेटवर्क का एक अहम हिस्सा है।

अभी यह अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है। इसका इस्तेमाल 168% तक पहुंच गया है। अगर विस्तार नहीं किया गया, तो इसके 207% तक बढ़ने का अनुमान है। दो नई अतिरिक्त लाइनों का मकसद इस रुकावट को दूर करना और यात्री एवं मालगाड़ियों की आवाजाही को आसान बनाना है।

फाइनल सर्वे का काम जारी

प्रस्तावित रेल लाइन गाजियाबाद को हापुड़ के रास्ते सीतापुर से जोड़ेगी। फिलहाल रेलवे इस रूट से जुड़े अंतिम सर्वे का काम कर रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना के तकनीकी और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का आकलन किया जाएगा। करीब 406 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को बेहतर रेल नेटवर्क से जोड़ने की संभावना है।

हापुड़ और आसपास के क्षेत्रों को बड़ा फायदा

इस परियोजना से सबसे अधिक उम्मीद हापुड़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में दिखाई दे रही है। नई रेल लाइन बनने से इन इलाकों के लोगों को आवागमन के लिए अतिरिक्त रेल संपर्क मिल सकता है।बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों के साथ-साथ व्यापार और माल परिवहन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है।

₹14,926 करोड़ की है प्रस्तावित परियोजना

प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14,926 करोड़ रुपये है। हालांकि, अभी यह योजना सर्वे के चरण में है। इसलिए निर्माण कार्य शुरू होने से पहले आगे की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। रेलवे के RTI जवाब से यह स्पष्ट हुआ है कि परियोजना को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। वर्तमान में फाइनल सर्वे किया जा रहा है।

पश्चिमी यूपी की रेल कनेक्टिविटी को मिल सकता है नया विकल्प

गाजियाबाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण शहर है। जबकि हापुड़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख जिला है। ऐसे में गाजियाबाद-हापुड़-सीतापुर के बीच नया रेल संपर्क तैयार होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिल सकती है। नई रेल लाइन भविष्य में यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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साथ ही, मौजूदा रेल रूट्स पर दबाव कम करने और ट्रेनों के संचालन के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, इस परियोजना को लेकर सबसे अहम पड़ाव फाइनल सर्वे का पूरा होना है। इसके बाद परियोजना के निर्माण और आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

अब होर्मुज की टेंशन खत्म! रूस ने चली ऐसी चाल कि भारत तक बिना समुद्र पार किए पहुंचेगा माल, मॉस्को से नई दिल्ली तक बनेगी रेल लाइन?

Russia-India Rail Link: रूस अब भारत के साथ तेल कारोबार समेत अन्य व्यापार बढ़ाने के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बेहद महत्वाकांक्षी विकल्प तलाश रहा है। रूस ने मॉस्को से भारत तक मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते एक ओवरलैंड रेलवे कनेक्शन की संभावनाओं पर विचार शुरू करने का संकेत दिया है। अगर यह विचार जमीन पर उतरता है, तो रूस से भारत तक सामान पहुंचाने के लिए एक ऐसा वैकल्पिक रूट तैयार हो सकता है, जो कई महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) को दरकिनार करते हुए सीधे जमीन के रास्ते हिंद महासागर क्षेत्र तक पहुंच बनाएगा।

‘The Chenab Times’ के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कथित तौर पर इस तरह के रेलवे कनेक्शन की संभावना की विस्तृत जांच की वकालत की है। रूसी न्यूज एजेंसी TASS के अनुसार, Marat Khusnullin ने हिंद महासागर तक पहुंच बनाने वाले रेल रूट की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करने की बात कही है। इस कदम का मकसद भारत और रूस के बीच व्यापार के रास्तों में विविधता लाना। साथ ही समुद्री चोकपॉइंट्स (संकरे समुद्री रास्तों) से जुड़े जोखिमों को कम करना है।

समुद्री रास्तों के जोखिम से परेशान रूस?

इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री रूट में बढ़ती अस्थिरता और वहां पैदा होने वाले जोखिमों को माना जा रहा है। खुसनुलिन ने कथित तौर पर बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री रास्तों से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया। उनका संकेत था कि अगर भारत तक पहुंचने वाला कोई वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध हो सकता है, तो उसकी जांच की जानी चाहिए।

हाल के वर्षों में समुद्री मार्गों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और सुरक्षा संकट के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। ऐसे में रूस के लिए जमीन के रास्ते भारत और हिंद महासागर तक पहुंच बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

कहां-कहां से गुजरेगी प्रस्तावित रेल लाइन?

सबसे चौंकाने वाली बात इस संभावित रूट को लेकर है। प्रस्तावित अवधारणा के तहत रेल कॉरिडोर को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कई संवेदनशील देशों से होकर भारत तक लाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

संभावित रूट में ये देश शामिल हो सकते हैं:-

रूस-तुर्कमेनिस्तान-ईरान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत…

हालांकि, अभी यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह कोई अंतिम रूप से मंजूर रेलवे प्रोजेक्ट नहीं है। रूस की तरफ से फिलहाल इसकी व्यवहार्यता और संभावित रूट की जांच की बात सामने आई है। अभी तक परियोजना की लागत, फंडिंग मॉडल, सटीक रेल रूट, निर्माण एजेंसियों या पूरा होने की समयसीमा को लेकर कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

भारत के लिए क्यों अहम है ये प्रोजेक्ट?

भारत के लिए इस प्रोजेक्ट का महत्व काफी ज्यादा है। भारत और रूस के बीच लंबे समय से ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत लगातार महसूस की जाती रही है। अगर रूस से भारत तक एक मजबूत ओवरलैंड रेल नेटवर्क तैयार होता है, तो दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे रूस से भारत आने वाले ऊर्जा उत्पाद, कच्चा माल, मशीनरी, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति के लिए नए विकल्प पैदा हो सकते हैं।

INSTC के साथ जुड़ सकता है यह विचार

रूस लंबे समय से भारत तक पहुंच के लिए वैकल्पिक उत्तर-दक्षिण व्यापार रूट्स को बढ़ावा देने में रुचि रखता है। इसी व्यापक रणनीति में इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसी परियोजनाओं को महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रस्तावित रेल कनेक्शन इस तरह के उत्तर-दक्षिण संपर्क को एक नई दिशा दे सकता है। खासकर अगर मध्य एशिया, ईरान और दक्षिण एशिया के बीच रेल नेटवर्क को आपस में प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके। इससे रूस को भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य तेजी से बढ़ते बाजारों तक भी पहुंच मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।

पाकिस्तान बना सबसे बड़ी चुनौती

योजना सुनने में जितनी बड़ी है, इसे जमीन पर उतारना उतना ही मुश्किल हो सकता है। प्रस्तावित रूट्स जिन देशों से होकर गुजरता है, उनमें से प्रत्येक के सामने अलग-अलग राजनीतिक, सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां हैं। अफगानिस्तान में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता एक बड़ी चुनौती है। वहीं, पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों को देखते हुए भारत तक रेल लाइन पहुंचाने के लिए जटिल राजनयिक और सुरक्षा समझौतों की आवश्यकता होगी। इसके अलावा पहाड़ी और कठिन भौगोलिक इलाकों में रेल लाइन का निर्माण अपने आप में बहुत महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

ईरान क्यों बन सकता है सबसे अहम कड़ी?

इस प्रस्ताव में ईरान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। ईरान पहले से ही रूस और भारत के बीच वैकल्पिक व्यापार रूट्स की रणनीति में अहम स्थान रखता है। रूस के लिए ईरान के जरिए हिंद महासागर तक पहुंच बनाना समुद्री चोकपॉइंट्स पर निर्भरता कम करने का रास्ता हो सकता है। यही कारण है कि भारत, रूस और ईरान के बीच परिवहन संपर्क को मजबूत करने वाली परियोजनाओं को आने वाले वर्षों में रणनीतिक महत्व मिल सकता है।

रूस के निर्माण क्षेत्र में भी बड़ी क्षमता

इसी संदर्भ में खुसनुलिन ने रूस के निर्माण क्षेत्र को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संकेत दिया कि अगर कम से कम पांच साल के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो रूस का निर्माण क्षेत्र हर साल अतिरिक्त 1 ट्रिलियन रूबल तक के निवेश को absorb करने में सक्षम है। इससे संकेत मिलता है कि रूस अपने परिवहन और बुनियादी ढांचे के विस्तार को केवल विदेश नीति के नजरिए से नहीं बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साधन के तौर पर भी देख रहा है।

क्या बदल सकता है पूरा क्षेत्रीय व्यापार समीकरण?

अगर कभी यह रेल कॉरिडोर वास्तविकता बनता है, तो इसका असर सिर्फ रूस और भारत तक सीमित नहीं रहेगा। यह मध्य एशिया को दक्षिण एशिया से जोड़ सकता है, ईरान को एक बड़े ट्रांजिट हब के रूप में मजबूत कर सकता है और भारत को यूरोप तथा रूस से आने वाले माल के लिए एक अतिरिक्त जमीनी संपर्क दे सकता है। साथ ही, रूस के लिए यह अपने व्यापार को ऐसे समुद्री मार्गों से दूर diversify करने का साधन बन सकता है, जहां युद्ध, राजनीतिक तनाव या भू-राजनीतिक संकट के कारण कभी भी व्यवधान पैदा हो सकता है।

अभी सपना, लेकिन रणनीतिक संकेत बेहद बड़ा

फिलहाल, मॉस्को से भारत तक इस प्रस्तावित रेल लाइन को घोषित और मंजूर प्रोजेक्ट नहीं माना जा सकता। क्योंकि इसकी आधिकारिक घोषणा से पहले सुरक्षा, लागत, फंडिंग और संबंधित देशों की राजनीतिक सहमति जैसे कई सवाल अभी बाकी हैं। लेकिन रूस द्वारा इस विकल्प पर सार्वजनिक रूप से विचार किए जाने का संकेत अपने आप में महत्वपूर्ण है।

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मॉस्को साफ तौर पर अपने व्यापारिक रास्तों को ज्यादा सुरक्षित और एशिया केंद्रित बनाने की कोशिश कर रहा है। इस रणनीति में भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण बाजार और रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है। अगर रूस-भारत के बीच मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के रास्ते ऐसा ओवरलैंड कॉरिडोर वास्तव में बन पाया, तो यह सिर्फ एक रेलवे लाइन नहीं होगी। बल्कि यूरेशिया के व्यापार समीकरण को बदलने वाला नया संपर्क रूट्स साबित हो सकता है।