NEET PG 2026 Re-Exam: अधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड करें नीट पीजी री-एग्जाम एडमिट कार्ड, जानें डाउनलोड करने के स्टेप्स

NEET PG 2026 Re-Exam: नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने नीट पीजी 2026 री-एग्जामिनेशन के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। नीट पीजी 2026 री-एग्जाम 5 सितंबर, 2026 को होंगे। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए योग्य उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट natboard.edu.in से अपने हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं।

यह री-एग्जामिनेशन उन उम्मीदवारों के लिए किया जा रहा है जिन्हें खास तौर पर इसमें शामिल होने के लिए योग्य माना गया है। परीक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल होने से पहले अपने हॉल टिकट पर दिए गए विवरण को ध्यान से देख लेना चाहिए। बता दें, नीट पीजी 2026 री-एग्जाम iON डिजिटल जोन iDZ सीतापुरा सेंटर्स, जयपुर, राजस्थान (TC नंबर 41682 और 41683) में परीक्षा देने वाले 2,445 परीक्षार्थियों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस परीक्षा केंद्र की आंतरिक पावर सप्लाई बाधित होने की वजह से इस केंद्र पर परीक्षा पूरा नहीं हो सकी। इसलिए एनबीईएमएस ने इन परीक्षार्थियों के लिए नीट पीजी 2026 री-एग्जाम कराने की घोषणा की थी। इससे पहले नीट पीजी 2026 री-एग्जाम का आयोजन देश के 339 शहरों में बनाए गए 1111 परीक्षा केंद्रों पर 30 अगस्त, 2026 को किया था।

मेडिकल बोर्ड द्वारा यह परीक्षा 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई थी, जिसमें 2,65,980 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया था। इनमें से लगभग 2,63,535 कैंडिडेट्स की परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हुई। इस परीक्षा के लिए 2,73,096 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था। हालांकि, 2,445 के लिए यह परीक्षा तकलीफदेह साबित हुई। यह परीक्षार्थी पहुंचे थे।

नीट पीजी 2026 री-एग्जामिनेशन एडमिट कार्ड कैसे डाउनलोड करें

कैंडिडेट अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

  • आधिकारिक एनबीईएमएस वेबसाइट natboard.edu.in पर जाएं।
  • होमपेज पर, नीट पीजी 2026 री-एग्जामिनेशन एडमिट कार्ड का लिंक ढूंढें।
  • जरूरी लॉगिन क्रेडेंशियल डालें।
  • ‘सबमिट’ बटन पर क्लिक करें।
  • नीट पीजी 2026 री-एग्जाम एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखेगा।
  • हॉल टिकट डाउनलोड करें और भविष्य के लिए एक कॉपी रख लें।

एडमिट कार्ड पर दी गई जानकारी

नीट पीजी 2026 री-एग्जाम एडमिट कार्ड में कैंडिडेट का नाम, नीट पीजी रोल नंबर, एप्लीकेशन नंबर, जन्म तिथि, कैटेगरी, फोटो और सिग्नेचर जैसी जरूरी जानकारी होगी।

इसमें परीक्षा की तारीख, एग्जाम सेंटर का नाम और पता, सेंटर कोड, रिपोर्टिंग टाइम और आखिरी एंट्री टाइम भी लिखा होगा। एडमिट कार्ड पर नीट पीजी 2026 एडवाइजरी और जरूरी निर्देश भी होंगे जिनका कैंडिडेट को परीक्षा के दिन पालन करना होगा।

GATE 2027 Registration: आईआईटी मद्रास ने शुरू किया गेट 2027 के लिए रजिस्ट्रेशन, जानें कौन कर सकता और कौन नहीं कर सकता अप्लाई

गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर

गन्ने के खेत से विदेशी बाजार तक पहुंची यूपी की एक्सपोर्ट चेन, निर्यात नीति ने बदली तस्वीर

Yogi Farmer

उत्तर प्रदेश में निर्यात की बढ़ती रफ्तार अब केवल विदेशी बाजारों तक पहुंचने वाली बोतलों और उत्पादों की कहानी नहीं रह गई है। इसकी शुरुआत गन्ने के खेत, शीरा और अनाज से होकर उद्योगों तक पहुंच रही है और वहां से पैकेजिंग, भंडारण व परिवहन के रास्ते विदेशी बाजार तक जा रही है। योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 ने इस पूरी एक्सपोर्ट चेन को नई गति दी है।

 

वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रथम तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में प्रदेश के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 प्रतिशत रही – इस तरह प्रदेश की वृद्धि राष्ट्रीय औसत की दोगुनी से भी अधिक रही। वहीं मात्रा की दृष्टि से प्रदेश का निर्यात 163 प्रतिशत बढ़ा। सबसे अहम उपलब्धि यह रही कि यूपी ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की।

बस्ती के शीरे से विदेशी बाजार तक पहुंची कमाई

निर्यात की इस बढ़ती श्रृंखला में कृषि उत्पादों की भूमिका भी अहम है। बस्ती से 25 हजार क्विंटल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। शीरा भिन्न शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए यह अर्जन उपरोक्त आंकड़ों से अतिरिक्त है। यानी खेतों में तैयार होने वाले कृषि उत्पाद अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रसंस्करण के बाद सीधे वैश्विक बाजार का हिस्सा बन रहे हैं। निर्यात बढ़ने के साथ अप्रैल-जुलाई 2026 के मध्य यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को भी पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं, जो करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है।

नई इकाइयों से बढ़ा निवेश, बंद प्लांट भी हुए सक्रिय

निर्यात की बढ़ती संभावनाओं ने प्रदेश में नए निवेश के साथ पुरानी औद्योगिक क्षमता को भी सक्रिय किया है। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। वहीं एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद पड़ी इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए भी आवेदन किया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, रैडिको खेतान भी अन्य राज्यों से अपने सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रही है।

127.8 लाख अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा यूपी का निर्यात 

अप्रैल-जून 2026 में देश से करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 127.8 लाख डॉलर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 87.9 लाख डॉलर था। यानी महज एक साल में प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल की। राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी भी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई और प्रदेश महाराष्ट्र एवं पंजाब के बाद देश में तीसरे स्थान पर है। प्रदेश ने तिमाही के प्रत्येक माह में वृद्धि दर्ज की।

कृषि से पैकेजिंग तक दिख रहा असर

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात में वृद्धि का असर केवल आबकारी इकाइयों तक सीमित नहीं है। उद्योग की पिछली कड़ी गन्ना, शीरा और अनाज जैसे कृषि उत्पादों से जुड़ी है, जबकि आगे कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन जैसे अनेक क्षेत्र जुड़े हैं। उत्पादन और निर्यात बढ़ने के साथ इन सभी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं। इस तरह निर्यात नीति ने खेत से लेकर फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक यूपी की एक व्यापक एक्सपोर्ट चेन को गति देने का काम किया है।

 

Shivani Mehrotra: ‘उम्र के साथ सपने धुंधले नहीं पड़ते’; 43 साल की शिवानी ने हौसलों से फतह की यूरोप की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एल्ब्रुस पर फहराया तिरंगा

Who is Shivani Mehrotra: कुछ सपने उम्र के साथ धुंधले नहीं पड़ते, बल्कि जिम्मेदारियों के बीच और मजबूत होते जाते हैं। इसका जीवंत उदाहरण 43 साल की शिवानी मेहरोत्रा हैं, जिन्होंने 18 वर्षीय बेटी की परवरिश, परिवार की जिम्मेदारियां एवं रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अपने पर्वतारोहण के जुनून को कभी पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर लगातार अपने हौसले तथा हदों को परखती रहीं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की निवासी शिवानी मेहरोत्रा की शादी 24 साल की उम्र में लखनऊ में हुई और अब वह अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती हैं। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी रूस स्थित ‘माउंट एल्ब्रुस’ पर तिरंगा फहराकर इस दिन को अपने लिए यादगार बना दिया।

‘हौसले की परीक्षा थी’

शिवानी ने रूस से भारत लौटने के दौरान न्यूज एजेंसी पीटीआई से फोन पर कहा कि 15 अगस्त को चोटी तक पहुंचना जितना शरीर की ताकत का इम्तिहान था। उतना ही मन के हौसले की भी परीक्षा थी।उन्होंने कहा, उम्र सिर्फ एक नंबर भर है। असली ताकत लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और उसे पाने के लिए जरूरी अनुशासन में होती है।”

शिवानी के लिए पर्वतारोहण अपने सपनों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की कहानी भी है। वह अपने माता-पिता, पति, बेटी और दोस्तों को अपनी ताकत मानती हैं। शिवानी बताती हैं कि खासकर 40 वर्ष की उम्र पार कर चुकी महिला पर्वतारोहियों और ट्रेकर की संख्या बहुत कम है।

शिवानी ने कहा, “मुझे पहाड़ों पर 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं बहुत कम ही दिखाई देती हैं।” उन्होंने कहा, “मेरे परिवार ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे यह करने का साहस दिया।” वह अपने पर्वतारोहण अभियानों का खर्च भी काफी हद तक अपनी बचत से उठाने की कोशिश करती हैं।

कैसे हुआ पहाड़ों से लगाव?

शिवानी ने बताया कि पहाड़ों से उनका लगाव 2019 में गहरा हुआ, जब उन्होंने अपनी सबसे करीबी दोस्त के साथ ‘माउंट एवरेस्ट’ आधार शिविर तक ट्रेकिंग की योजना बनाई थी। एक यात्रा की वह छोटी-सी योजना कब जुनून में बदल गई, उन्हें खुद पता नहीं चला। इसके बाद कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और हिमालय के कई हिस्से उनकी मंजिल बनते चले गए।

इसके बाद शिवानी ने ‘फ्रेंडशिप पीक’ और ‘माउंट किलिमंजारो’ जैसी कठिन चोटियों पर भी चढ़ाई की। कैलाश से जुड़े पांच प्रमुख पर्वत अभियानों में से चार वह अब तक पूरा कर चुकी हैं। हालांकि, उनका सबसे बड़ा सपना अभी बाकी है ‘माउंट एवरेस्ट’ फतह करना। साथ ही दुनिया की सातों सबसे ऊंची चोटियों पर भारतीय तिरंगा फहराना।

दुबई होते हुए पहुंचीं रूस

‘माउंट एल्ब्रुस’ अभियान के लिए शिवानी ने आठ अगस्त को मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की। दुबई होते हुए वह रूस के मिनरल्नी वोडी पहुंचीं। 10 दिन के इस अभियान का आयोजन रूस की ‘चतुर टूर्स’ नामक कंपनी ने किया था। शिखर पर मौसम के अचानक बदलने की आशंका को देखते हुए अभियान में एक अतिरिक्त दिन भी रखा गया था।

खराब मौसम ने चढ़ाई को और कठिन बना दिया। तेज बर्फबारी, बारिश, कड़ाके की ठंड और ऊंचाई की चुनौती के बीच दल ने अंतिम चढ़ाई से पहले खुद को मौसम और ऊंचाई के अनुकूल बनाने के लिए कई अभ्यास चढ़ाइयां कीं। इनमें करीब 3,000, 4,000 और 4,700 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना शामिल था।

“रुकना नहीं है, चलते रहना है…”

शिखर पर पहुंचने वाले दिन दल ने रात करीब दो बजे चढ़ाई शुरू की। इस दौरान अंधेरा से लेकर जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, भारी सामान और कम ऑक्सीजन लेवल तक… हर कदम मुश्किल था। लेकिन शिवानी के भीतर एक ही बात गूंजती रही- “रुकना नहीं है, चलते रहना है।” करीब साढ़े चार घंटे की कठिन चढ़ाई के बाद उन्होंने शिखर पर कदम रखा।

उन्होंने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर छोटे से छोटा काम भी मुश्किल हो जाता है। 5,000 मीटर के बाद ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होने लगता है। बर्फीले मौसम से बचाव के लिए भारी भरकम कपड़ों और जूतों में लगे कांटेदार उपकरणों के साथ एक-एक कदम बढ़ाना भी शरीर के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

‘सेल्फ-अरेस्ट’ तकनीकों की ट्रेनिंग भी ली

इस अभियान में शिवानी ने खुद को बचाने की तकनीक का ट्रेनिंग भी लिया। बर्फ पर फिसलने की स्थिति में खुद को रोकना और आपात स्थिति में सही तरीके से प्रतिक्रिया देना इसका हिस्सा था। शिवानी ने कहा कि चढ़ाई का आखिरी पड़ाव अक्सर शरीर से ज्यादा मन के हौसले की परीक्षा लेता है।

उन्होंने कहा, “पहले की यात्राओं में जहां मुझे लगता था कि अब मैं इससे आगे नहीं जा सकती, वहीं मैंने सीखा कि असल शुरुआत तो वहीं से होती है।” शिखर पर पहुंचते ही वह घुटनों के बल बैठ गईं। उन्होंने पहाड़, अपने दोस्तों और उन पर विश्वास जताने वालों के प्रति आभार जताया।

उस पल को याद करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने माउंट एल्ब्रुस के सामने सिर झुकाया और कहा-धन्यवाद।” उनके लिए यह चोटी उस बड़े सपने की एक सीढ़ी थी, जिसे वह अभी पूरा करना चाहती हैं।

फिटनेस पर काफी ध्यान देती हैं शिवानी

शिवानी फिटनेस पर भी बहुत ध्यान देती हैं। वह फुल मैराथन, हाफ मैराथन के अलावा 50 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी कर चुकी हैं। कोरोना वायरस महामारी के दौरान उन्होंने योग को अपनाया। बाद में उन्होंने एडवांस्ड योग इंस्ट्रक्टर और थेरेपिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लिया। करीब छह वर्षों से वह योग सिखा रही हैं। इनमें गर्भावस्था से पहले और बाद की महिलाओं तथा कैंसर रोगियों के लिए विशेष योग कार्यक्रम भी शामिल हैं।

कैसी है दिनचर्या?

उनकी दिनचर्या भी उनके संकल्प जैसी ही सख्त है। वह तड़के करीब साढ़े तीन बजे उठती हैं और योग, जिम में कसरत, दौड़ तथा पर्वतारोहण की तैयारी करती हैं। खान-पान को लेकर भी वह बेहद अनुशासित रहती हैं। शिवानी के लिए पर्वतारोहण सिर्फ किसी निश्चित ऊंचाई तक पहुंचने का नाम नहीं है।

Shivani Mehrotra

वह कहती हैं, “मैं नहीं मानती कि ऊंचाई के आधार पर कोई चोटी कम या ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। हर पहाड़ अपने साथ एक अलग अनुभव लाता है और हर पहाड़ सम्मान मांगता है।” अब उनकी नजर नेपाल की ऊंचाई वाली चोटियों पर है। यह तैयारी उन्हें अपने सबसे बड़े लक्ष्य माउंट एवरेस्ट तक ले जाएगी।

पैसे की चुनौती आई सामने

उन्होंने विश्वास के साथ कहा, “एवरेस्ट मेरा मुख्य लक्ष्य है। मुझे इसे करना ही है।” हालांकि, इस सपने की राह में पैसे भी बड़ी चुनौती है। एवरेस्ट अभियान पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों का खर्च भी कई लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

ये भी पढ़ें- VIDEO: प्रयागराज में मां गंगा ने कराया ‘लेटे हनुमान जी’ को महास्नान! गर्भगृह तक पहुंचा नदी का पानी; वीडियो वायरल

शिवानी ने अब तक अपने योग पेशे से हुई बचत से ही अधिकांश अभियानों का खर्च उठाया है। उन्होंने कहा, “मैं यह अपने दम पर करना चाहती हूं।” इस उम्र में भी शिवानी के कदम रुके नहीं हैं। उनका कहना है, “अगर आपने मन में ठान लिया है कि आपको कुछ हासिल करना है, तो आप उसे कर सकते हैं। बस अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना होता है।”

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! 7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस को मिली मंजूरी, इन शहरों के बीच दौड़ेंगी ट्रेनें

7 new Amrit Bharat Trains: रेलवे बोर्ड ने देश भर में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सात नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को मंजूरी दी है। इन ट्रेनों का मकसद खास तौर पर कम और कम-मध्यम आय वाले ग्रुप के यात्रियों को यात्रा का सस्ता विकल्प देना है। इन सेवाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यात्रा आरामदायक हो और किराया प्रीमियम ट्रेन सेवाओं के मुकाबले कम और आम लोगों की पहुंच में हो।

बता दें कि ये प्रस्तावित ट्रेनें उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के शहरों को आपस में जोड़ेंगी और कई रूट लंबी दूरी तय करेंगे। यहाँ प्रस्तावित सेवाओं और उनके तय स्टॉप की जानकारी दी गई है:

धनबाद-कोयंबटूर अमृत भारत एक्सप्रेस

यह ट्रेन धनबाद से कोयंबटूर के बीच चलेगी और रास्ते में कई प्रमुख शहरों और स्टेशनों पर रुकेगी। इसके प्रस्तावित स्टॉपेज हैं:

धनबाद जंक्शन, NSC बोस जंक्शन गोमो, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा, गया, अनुग्रह नारायण रोड, डेहरी ऑन सोन, सासाराम, भभुआ रोड, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंद्रपुर, बल्लारशाह, सिरपुर कागजनगर, मंचेरियल, पेड्डापल्ली, वारंगल, महबूबाबाद, खम्मम, विजयवाड़ा, ओंगोल, नेल्लोर, गुडूर, रेणिगुंटा, तिरुत्तनी, काटपाड़ी, जोलारपेट्टई, सेलम, इरोड और तिरुप्पुर।

प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20436/20435) को भी मंजूरी दे दी है।

प्रस्तावित साप्ताहिक सेवा प्रयागराज, सतना, जबलपुर, इटारसी, भुसावल और कल्याण में रुकेगी।

प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस

प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20437/20438) को भी साप्ताहिक सेवा के रूप में मंजूरी दी गई है।

यह ट्रेन प्रयागराज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बयाना, हिंडौन सिटी, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, कोटा, रामगंज मंडी, भवानी मंडी, रतलाम, वडोदरा और उधना पर रुकेगी।

सुबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेल मंत्रालय ने सुबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 14121/14122) को मंजूरी दे दी है।

यह ट्रेन सप्ताह में एक बार चलेगी। इसके प्रस्तावित स्टॉपेज सुबेदारगंज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, खंडवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण और ठाणे होंगे।

गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15095/15096) को भी सप्ताह में एक बार चलाने की मंजूरी दी है।

इसके प्रमुख स्टॉपेज गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बुढ़वल, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली होंगे।

गोरखपुर-बांद्रा अमृत भारत एक्सप्रेस

एक और साप्ताहिक ट्रेन गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15085/15086) होगी।

यह ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा फोर्ट, बयाना, गंगापुर सिटी, कोटा, भवानी मंडी, शामगढ़, रतलाम, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी, पालघर, बोरीवली और बांद्रा टर्मिनस पर रुकेगी।

चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस

सातवीं मंजूर की गई ट्रेन चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22075/22076) है।

इसके प्रस्तावित स्टॉपेज चारलापल्ली, काजीपेट, पेड्डापल्ली, मंचेरियल, बल्लारशाह, चंद्रपुर, नागपुर, बैतूल, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, पोखरायन, कानपुर सेंट्रल, ऐशबाग, लखनऊ सिटी, गोमतीनगर, बाराबंकी, गोंडा और गोरखपुर होंगे।

इन 7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से कई राज्यों के बड़े शहरों और कस्बों के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए किफायती किराए में एक और विकल्प मिलेगा।

यह भी पढ़ें: ‘क्या आपको लगता है आप भगवान हैं?’ MCA परिसर में 5 रेस्टोरेंट पर कार्रवाई को लेकर बॉम्बे HC ने FDA को लगाई फटकार

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में फिर एक्टिव हुआ मानसून, इन 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम बारिश के साथ कुछ जगहों पर भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दरअसल, निचले क्षोभमंडल में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण और बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से मानसूनी प्रवाह बढ़ा है। इसके चलते अगले कुछ दिनों में पूर्वी यूपी में बारिश की गतिविधियां तेज रह सकती हैं। वहीं, पश्चिमी यूपी में अगस्त के बाकी दिनों में मानसूनी गतिविधियां सीमित रहने के बाद सितंबर के शुरुआती सप्ताह में बारिश बढ़ने की संभावना है।

पूर्वी यूपी में भारी बारिश का अलर्ट

IMD के मुताबिक, 30 अगस्त तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। 29 अगस्त से 30 अगस्त की सुबह तक भारी बारिश की ज्यादा संभावना वाले जिलों में चित्रकूट, प्रयागराज, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बस्ती, गोंडा, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, सुल्तानपुर, अयोध्या और अंबेडकर नगर शामिल हैं।

इसके बाद 30 से 31 अगस्त के दौरान सोनभद्र और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

31 अगस्त को इन जिलों में बारिश का ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार, 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच चित्रकूट, कौशाम्बी, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर और जौनपुर समेत आसपास के इलाकों में भारी बारिश की संभावना है।

यानी अगले कुछ दिनों में खासतौर पर पूर्वी यूपी के जिलों में बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।

2 सितंबर को पश्चिमी यूपी में भी बढ़ेगा बारिश का असर

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, 2 सितंबर को पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इससे पहले 29 अगस्त से 1 सितंबर तक पश्चिमी यूपी के लिए भारी बारिश की अलग चेतावनी नहीं है, लेकिन कई जगहों पर बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

जलभराव और अचानक नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा

मौसम विभाग ने भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों और सुरंगों में जलभराव की आशंका जताई है। इसके अलावा मौसमी नदियों और नालों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही, कच्ची सड़कों पर फिसलन और कम दृश्यता के कारण यातायात भी प्रभावित हो सकता है।

वहीं, लोगों को अचानक बाढ़ की आशंका वाले इलाकों से दूर रहने और सुरक्षित या पक्के मकानों में रहने की सलाह दी गई है। नदियों और मौसमी नालों के आसपास भी सावधानी बरतने को कहा गया है।

किसानों के लिए भी अलर्ट

भारी बारिश और जलभराव का असर फसलों पर भी पड़ सकता है। IMD ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और बारिश के दौरान कुछ कृषि कार्यों से बचने की सलाह दी है। गन्ना, धान, मक्का, अरहर, मूंगफली, तिल, दलहन और सब्जियों जैसी फसलों में ज्यादा नमी से नुकसान और रोग बढ़ने की आशंका जताई गई है।

यह भी पढ़ें: कल का मौसम: IMD ने इस इलाके में भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग दी, यूपी-बिहार संग कई राज्यों में 30 अगस्त को बारिश का तांडव

भारत में बनाओ, दुनिया भर में बेचो! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी कंपनियों को दिया बड़ा ऑफर, GIFT City का भी जिक्र, समझिए पूरी तैयारी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ग्लोबल निवेशकों और कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस के साथ-साथ टेक्नोलॉजी और इनोवेशन सेंटर स्टैबलिश करने का ओपन ऑफर दिया है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर गईं वित्त मंत्री ने शिकागो में टॉप इन्वेस्टर्स और बिजनेस लीडर के साथ एक हाई लेवल बिजनेस राउंडटेबल में यह बात कही। उन्होंने ग्लोबल पार्टनर्स से अपील की कि वे भारत की विशाल प्रतिभा और अवसरों का फायदा उठाते हुए देश में कोडेवलपमेंट और कोप्रोडक्शन करें। इससे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रोडक्ट्स और कैपेसिटी को डेवलप करें।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक शिकागो में भारत के महावाणिज्य दूतावास द्वारा यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के सहयोग से आयोजित इस बैठक में वित्त मंत्री ने भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि, देश में चल रहे रिफॉर्म्स की स्पीड और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट को लेकर डिटेल में बात की है।

भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, ग्लोबल प्लेटफॉर्म समझें

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत में निवेश का अवसर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह अपने विशाल पैमाने, विकास दर, इंजीनियरिंग प्रतिभा, आधुनिक बुनियादी ढांचे और पिछले एक दशक में हुए सुधारों से काफी व्यापक इंपैक्ट रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ एक कंज्यूमर मार्केट के रूप में न देखें बल्कि इसे दुनिया के लिए मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने एक मजबूत प्लेटफॉर्म के रूप में देखें।

इस बैठक का मैं एजेंडा भारत में निर्माण करें — भारत के लिए और दुनिया के लिए (Manufacture in India — for India and for the world) था। इसमें एआई, डिजिटल, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और हाई एंड टेक्नोलॉजी में अवसरों पर चर्चा हुई।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI में नए मौके

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे यूपीआई, डिजिलॉकर, ओएनडीसी और इंडिया स्टैक ने आबादी के स्तर पर कई बड़े और सफल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं। उन्होंने कहा कि अब अगला बड़ा अवसर एआई, इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे हाई वैल्लूर बिजनेस तैयार करने में है। भारत में बनाए गए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स तेजी से ग्लोबल इनोवेशन के सेंटर बनते जा रहे हैं।

गिफ्ट सिटी तेजी से बन रहा इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर

पीटीआई के मुताबिक वित्त मंत्री ने गुजरात की गिफ्ट सिटी (GIFT City) का खास जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर के रूप में तेजी से उभर रहा है। जून 2026 तक गिफ्ट सिटी में 1250 से अधिक रजिस्टर्ड संस्थाएं काम कर रही हैं। सीतारमण ने बताया कि गिफ्ट सिटी बैंकिंग, फंड मैनेजमेंट, रीइंश्योरेंस, एयरक्राफ्ट एंड शिप लीजिंग, सस्टेनेबल फाइनेंस और दूसरी क्रॉस बॉर्डर फाइनेंशियल सर्विसेज में काफी संभावनाएं देता है। उन्होंने ग्लोबल इंस्टीट्यूशन से आग्रह किया वो भी इसे भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में एंट्री के गेटवे के रूप में इस्तेमाल करें।

ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ एक बड़े बाजार के रूप में स्केल देता है, बल्कि एक लॉन्गटर्म इनवेस्टमेंट और ऑपरेशनल प्लेटफ़ॉर्म भी ऑफर करता है। उत्पादन-जुड़े प्रोत्साहन (PLI) जैसी टारगेटेड नीतिगत पॉलिसी स्कीम के जरिए अब भारत का ध्यान सिर्फ पार्ट्स को असेंबल करने तक सीमित नहीं है बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और हाई एंड टेक्नोलॉजी तैयार करने पर भी है। क

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, एग्रीकल्चर और डिफेंस सेक्टर पर जोर

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स, रेलवे का मॉडर्नाइजेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और हाई-स्पीड रेल सहित इंफ्रास्ट्रक्चर का काफी तेजी विस्तार हो रहा है। ये सब मिलकर लॉन्गटर्म इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टमेंट के मौके बना रहे हैं। नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) इनमें हिस्सेदारी लेने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स को एक कमर्शियल प्लेटफॉर्म दे रहा है।

भारत का एग्रीकल्चर बेस, बढ़ती इनकम और बदलता कंजंशन पैटर्न फूड प्रोसेसिंग, ऑटोमेशन, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और कोल्ड चेन क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘iDEX’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत ड्रोन, ऑटोनोमस सिस्टम और हाई एंड टेक्नोलॉजी में तेजी से कैपेसिटी बिल्डिंग कर रहा है।

आपको बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके बाद न्यूयॉर्क का दौरा भी करेंगी।

‘आंखों के सामने कार बही, लगा अब हमारी बारी है’:लोग बोले- जिस पुल से आए, वो डूब गया; नेपाल से रेस्क्यू 106 भारतीयों की आपबीती

‘काठमांडू से निकलते ही हमें अंदाजा हो गया था कि हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। पानी का फ्लो अचानक तेजी से बढ़ गया था। हमारी गाड़ी से करीब 500 मीटर की दूरी पर देखते ही देखते एक कार पानी के तेज बहाव में बह गई। उस मंजर को देखकर हम लोग घबरा गए थे।’ उस वक्त लगा कि अब हम लोगों की बारी है। हमारी गाड़ी भी पानी में बह सकती है। हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा बचकर यहां तक पहुंच पाएंगे। भगवान और बिहार सरकार ने ही हमारी जान बचाई है।’ नेपाल से रेस्क्यू किए गए भारतीयों ने ये बातें बताईं। 106 लोगों को शुक्रवार शाम बिहार सरकार की मदद से सुरक्षित सीतामढ़ी लाया गया। इसके बाद इन्हें बस की मदद से देर रात पटना भेजा गया। वहां से ट्रेन की मदद से सुरक्षित उनके राज्य महाराष्ट्र भेजा गया। नेपाल में भीषण बाढ़ से अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत और 2500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बिहार के भी कई लोग शामिल हैं। नेपाल से बिहार लौटे भारतीयों ने क्या बताया? दो दिन उन्होंने किन हालात में गुजारे? अपनी आंखों के सामने उन्होंने क्या-क्या देखा? अब भी उनके मन में किस बात का डर है? पढ़िए नेपाल की आंखों देखी… नेपाल से सही सलामत लोग सीतामढ़ी पहुंचे, 3 फोटोज… ‘बचने की उम्मीद छोड़ चुके थे’ नेपाल घूमने और पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए गए महाराष्ट्र के करीब 106 यात्रियों का ग्रुप काठमांडू से भारत लौट आया। उन्हें अंदाजा नहीं था कि ये दो दिन उनकी जिंदगी के सबसे खौफनाक पलों में बदल जाएंगे। जब वे काठमांडू से बिहार आ रहे थे तो रास्ते में अचानक पानी का बहाव तेज हो गया था। सड़कें टूट चुकी थीं। नदियां उफान पर थीं। जिस पुल को पार कर वे बिहार की सीमा में दाखिल हुए, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। हालांकि, बिहार प्रशासन की मदद से सभी लोग सुरक्षित बचाए लिए गए। इस बीच दैनिक भास्कर की टीम ने सभी सुरक्षित भारतीयों से बात की। नागपुर के रहने वाले योगेश गावंडे ने बताया, ‘नेपाल से बिहार में प्रवेश करने के लिए जिस पुल को हमने पार किया, उस समय उसका आधे से ज्यादा हिस्सा पानी में डूबा हुआ था। पानी लगातार बढ़ रहा था और बहाव बेहद तेज था। डर के बीच हम लोगों ने किसी तरह पुल पार किया, लेकिन इसके करीब आधे घंटे बाद हमें खबर मिली की पानी का लेवल और बढ़ गया है। जिस पुल को हमने क्रॉस किया, वो पूरी तरह डूब चुका है।’ योगेश ने ये भी कहा कि जब हम नेपाल में फंसे थे, तब सच में लग रहा था कि हम बचेंगे भी या नहीं। सुरक्षित निकल पाएंगे, इसकी कोई उम्मीद नहीं थी। अगर कुछ देर वहां और रुकते तो शायद ही आज जिंदा होते। भारत सरकार ने हमारा बहुत साथ दिया। सरकार ने हमें वहां से सुरक्षित निकाला, इंडिया लाए और फिर हमारे घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके लिए बिहार के CM सम्राट चौधरी का बहुत-बहुत धन्यवाद। ‘महाराष्ट्र और बिहार अलग-अलग नहीं, हम सब भारतीय हैं’ योगेश ने कहा, बिहार प्रशासन और यहां के लोगों के व्यवहार से हमें बहुत अच्छा लगा। हम सभी भारतीय हैं। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र अलग है और बिहार अलग। हम सब एक ही देश के हैं। आज यहां आकर यह बात और ज्यादा महसूस हो रही है कि मुश्किल वक्त में पूरा भारत एक साथ खड़ा होता है। हम लोगों का ग्रुप 19 अगस्त को महाराष्ट्र से नेपाल पहुंचा था। सबसे पहले हम लोग पोखरा गए, वहां से मुक्तिनाथ और फिर काठमांडू पहुंचे थे। इसी दौरान ग्लेशियर से आई तबाही और बाढ़ के कारण कई रास्ते पूरी तरह टूट गए और बंद हो गए। इसके चलते हमलोग भारत वापस नहीं आ पा रहे थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तत्काल मदद की गई और नेपाल से भारत तक पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था कराई गई। ’50 सीटर बस पहाड़ में फंसी, छोटी गाड़ियों से निकाला’ पुणे निवासी नारायण रेशमा बाजपेयी ने बताया, हम लोगों का ग्रुप करीब 50 सीटर बस से नेपाल गया था। शुरुआत के 7-8 दिन यात्रा सामान्य रही, लेकिन वापसी के समय रास्ते बंद होने लगे। 50 सीटर बस के लिए पहाड़ी और टूटे हुए रास्तों से आगे बढ़ना संभव नहीं था। इसके बाद स्थानीय स्तर पर मदद मांगी गई। छोटी गाड़ियों की व्यवस्था की गई। इन्हीं छोटी गाड़ियों से यात्रियों को आगे निकाला गया। जिस जगह बाद में सबसे ज्यादा तबाही हुई, उसी जगह से हम लोग एक दिन पहले ही निकल चुके थे। इस वजह से हमने तबाही का सबसे भयानक रूप सामने से नहीं देखा, लेकिन वापसी के दौरान रास्तों की हालत देखकर हमें खतरे का अंदाजा हो गया था। काठमांडू में दो दिनों तक बिना खाए रहे लोग आशा पांडे ने बताया, हमलोग 2 दिनों से बहुत ही मुश्किल में थे। भूखे-प्यासे सिर्फ जान की परवाह कर रहे थे। समझ में नहीं आ रहा था कि कब और कैसे इस भयानक तबाही से निकल पाएंगे।’ एक अन्य यात्री सरला ने बताया, ‘नेपाल से निकलकर जब हम लोग भारतीय सीमा तक पहुंचे तो यहां प्रशासन और स्थानीय लोगों ने हमारी काफी मदद की। हमें बॉर्डर से आगे लाने, गाड़ी तक पहुंचाने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई। प्रशासन की ओर से पहले नाश्ता और भोजन कराया गया। रहने की भी व्यवस्था की गई। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘आज राखी का दिन है और ऐसा लग रहा है कि हमें यहां भाई मिल गए। हमारी बहुत बड़ी मदद हुई है। जिस तरह से प्रशासन और लोगों ने हमारा साथ दिया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।’ सरला की मौसेरी बहन निर्मला पांडे ने बताया, हम लोग नेपाल घूमने गए थे, लेकिन अचानक आई बाढ़ के कारण वहां फंस गए। इस बीच मेरी मां की तबीयत बिगड़ गई। नेपाल के हालात को देखकर वे घबरा गईं और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। फिलहाल, उनका इलाज नेपाल के काठमांडू के एक अस्पताल में चल रहा है। वहां की सरकार और मेरा भाई उनका ध्यान रख रहे हैं।’ ये सभी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में नौकरी करते हैं। ‘नेपाल बॉर्डर पर यात्रियों को रिसीव किया, खाना दिया, आगे की व्यवस्था की’ आपदा के ADM बृज किशोर पांडेय ने कहा, भारत से नेपाल घूमने गए ये यात्री बाढ़ की तबाही में फंस गए थे। 28 अगस्त को करीब 3 बजे दोपहर में मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग से सूचना मिली कि नेपाल से कुछ भारतीय बिहार बॉर्डर पर आ रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने बॉर्डर पर पहुंचकर यात्रियों को रिसीव किया। गाड़ी नहीं होने पर प्रशासन ने अपने साधनों से उन्हें थाने तक पहुंचाया। थाने पहुंचने पर यात्रियों को नाश्ता, फल, पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया। एक-दो यात्रियों ने कमजोरी और चक्कर की शिकायत की, जिनकी डॉक्टरों ने जांच की। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। प्रशासन के अनुसार करीब 110 यात्री लौट रहे थे, जिनमें कुछ निजी साधनों से आगे निकल गए। फिलहाल 106 यात्रियों का ग्रुप प्रशासन के पास पहुंचा है। सभी को उनकी जरूरत के मुताबिक मदद देने के साथ पटना आने-जाने की व्यवस्था भी की गई। महाराष्ट्र के CM ने सीतामढ़ी सांसद से किया कॉन्टैक्ट सभी यात्रियों ने गुरुवार, 27 अगस्त को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साधा था। इसके बाद फडणवीस ने तुरंत सीतामढ़ी सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को पूरी स्थिति बताई। सांसद देवेश ठाकुर ने गुरुवार रात काठमांडू सांसद संदीप राणा से कॉन्टैक्ट किया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह विशेष बसों की व्यवस्था कर सभी को वहां से रवाना किया गया। रास्ते में दो बसें बदलकर तीर्थयात्री किसी तरह सीतामढ़ी के भिट्ठामोड़ सीमा पहुंचे। यहां सीतामढ़ी जिला प्रशासन की टीम पहले से मुस्तैद थी। सीमा पर पुपरी एसडीओ गौरव कुमार, सीओ सतीश कुमार, बीडीओ कर्मवीर कुमार प्रभाकर, आरओ ब्रजेश मिश्र और भिट्ठा थानाध्यक्ष दीपक पटेल सहित अधिकारियों ने सभी का स्वागत किया। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. लालू कुमार की देखरेख में सभी का हेल्थ चेकअप कराया गया। सभी को खाना खिलाया और आराम करने की व्यवस्था की। महाराष्ट्र की महिलाओं ने सीतामढ़ी SDM के साथ मनाई राखी ——————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल में तबाही के बीच बचा रहा घर:कई फीट तक पानी और मलबे से घिरा; बालकनी में खड़े 3 लोगों की जान बची, VIDEO नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा:36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन

बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बाढ़ से 160 मौतें, 844 लापता:33 शव 150km दूर मिले; भूकंप नहीं, पहाड़ खिसकने से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका

नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ में 160 लोगों की मौत हो गई। नेपाल में 157 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई, जबकि 844 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ में 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए। बाढ़ का पानी करीब 30 फीट तक ऊपर आ गया था। तेज बहाव में घर, गाड़ियां और सरकारी ढांचे बह गए। शुरुआत में माना जा रहा था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था, लेकिन अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा था। इसी लैंडस्लाइड से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। इसके बाद ल्हेंदे नदी से पानी और मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में पहुंचा, जिससे बाढ़ आई। बहाव इतना तेज था कि लोगों और मलबे को करीब 150 किलोमीटर दूर चितवन तक बहा ले गया, जहां अब तक 33 शव बरामद किए गए हैं। राहतकर्मी खराब मौसम और टूटे रास्तों के बीच मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे कई श्रद्धालु भी बाढ़ की चपेट में आ गए। नेपाल में लापता लोगों में 466 विदेशी और 113 नेपाली शामिल हैं, जिनमें 133 भारतीय और 37 NRI भी हैं। भास्कर नॉलेजः कैसे आई बाढ़, कितना असर और भारत पर इम्पैक्ट बाढ़ की वजह को लेकर 3 आशंकाएं 1. लैंडस्लाइड से नदी का रास्ता रुका: यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) की जांच में पता चला कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर चीन की ल्हेंदे नदी में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसककर गिरा। इससे नदी का बहाव रुका और पानी-मलबा जमा होने के बाद अचानक तेज बहाव आया। इस घटना से 5.2 तीव्रता के भूकंप जितनी ऊर्जा पैदा हुई थी। ल्हेंदे का पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया, जिससे बाढ़ आ गई। 2. भूकंप से ग्लेशियल फटने की आशंका: नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में बताया कि सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया और करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इससे आशंका जताई जा रही है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल आउटबर्स्ट हुआ होगा। 3. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट: एक संभावना यह भी है कि बर्फ और मलबे से नदी का रास्ता रुकने के बाद अस्थायी झील बनी और उसका पानी अचानक बाहर निकला। विशेषज्ञ अभी यह जांच रहे हैं कि क्या इस घटना में ग्लेशियल झील भी फूटी थी। बारिश को फिलहाल वजह नहीं माना जा रहा है, क्योंकि नेपाल के जल विज्ञान एवं मौसम विभाग के मुताबिक बाढ़ से पहले रसुवा में भारी बारिश नहीं हुई थी। नदी किनारे रहने वालों को खतरा बरकरार नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने चेतावनी दी है कि भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के इलाकों में खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। चीन की ओर नदी के रास्ते में बनी झील अभी पूरी तरह खाली नहीं हुई है। लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है। नेपाल में पिछले साल भी भोटेकोशी नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई थी। नेपाल-चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल भी बह गया था। भारत में कहां-कितना असर होगा भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी से होते हुए गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। यूपी के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है। खबर से जुड़े पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें:खतरे में 6 प्रदेश, ग्लेशियल लेक अचानक कैसे फट जाती हैं

26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं। ———— ये खबरें भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट