नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़:कई पुल-घर बहे, गांवों में पानी भरा, 4 लापता; 45 दिन पहले आई बाढ़ में 1455 मौतें हुईं

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में कई घर और पुल बह गए। चार लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कुछ उपकरण भी बह गए। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यार नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया। रॉयटर्स के मुताबिक, 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भुस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें… SMS भेजकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का समय मिल सकता है। उप्रेती के मुताबिक, प्रशासन ने लोगों को SMS भेजकर अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है।

नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़:कई पुल-घर बहे, 4 लापता; लैंडस्लाइड से स्यारी नदी का रास्ता बंद, बिहार में भी खतरा

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में कई घर और पुल बह गए। चार लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कई मशीनें भी बह गईं। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यारी नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया। इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भूस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ से जुड़ी 4 तस्वीरें… अब मैप से समझें कहां हुआ हादसा बिहार में भी बाढ़ का खतरा बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने से बिहार में भी खतरा बढ़ सकता है। यह नदी आगे त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं। SMS भेजकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का समय मिल सकता है। उप्रेती के मुताबिक, प्रशासन ने लोगों को SMS भेजकर अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है। पहाड़ी इलाकों में बिना बारिश के भी बाढ़ का खतरा नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आने का खतरा बना रहता है। पहाड़ से मिट्टी और पत्थर खिसककर जब नदी या नाले का रास्ता रोक देते हैं, तो पानी एक जगह जमा होने लगता है। कुछ समय बाद जब मिट्टी और पत्थरों की रुकावट टूटती है, तो जमा पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। इससे नदी के किनारे बसे गांवों में अचानक बाढ़ आ जाती है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा भी बहाकर ले जाता है। इससे घर, सड़कें और पुल टूट सकते हैं। ऐसी बाढ़ आने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसी इलाके में बारिश हुई हो। पहाड़ के ऊपरी हिस्से में जमा पानी अचानक नीचे आने से दूर बसे गांवों में भी तबाही मच सकती है। 45 दिन पहले आई बाढ़ से भारी तबाही नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। चीन के तिब्बत से लगी सीमा के पास शुरू हुई इस बाढ़ का असर भोटेकोशी नदी और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। अचानक आए तेज पानी ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली बनाने वाली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती दिनों में सैकड़ों शव बरामद किए गए थे और बड़ी संख्या में लोग लापता थे। बाद में 5 अक्टूबर को नेपाल सरकार ने बताया कि इस बाढ़ में कम से कम 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 5000 लोग अब भी लापता हैं। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया। बाढ़ से 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी तबाह हुए। इसके बाद राहत और बचाव अभियान के साथ प्रभावित लोगों को दोबारा बसाने की तैयारी शुरू की गई। ——————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में फ्लोरिडा के तट से टकराया इसायस तूफान अमेरिका के मेक्सिको की खाड़ी से लगे तटीय इलाकों में शुक्रवार को इसायस तूफान टकराया। फ्लोरिडा और अलबामा में 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Nepal Earthquake: पहले बाढ़ ने मचाई तबाही, अब नेपाल में आया भूकंप, काठमांडू तक महसूस किए गए झटके

Nepal Earthquake:  नेपाल में मंगलवार देर रात एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर ऑफ सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से करीब 143 किलोमीटर नीचे था। भूकंप के झटके राजधानी काठमांडू समेत आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। वहीं इस घटना में अब तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की जानकारी सामने नहीं आई है। ये घटना ऐसे समय हुई जब नेपाल हाल ही में आई भीषण बाढ़ से उबर रहा है। करीब दो हफ्ते पहले आई बाढ़ में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर सामने आई थी। वहीं हजारों से ज्यादा अब भी लापता है।

इसी दौरान तिब्बत में भी भूकंप की जानकारी सामने आई। यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के अनुसार, तिब्बत में आए भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 35 किलोमीटर नीचे बताया गया है।

 

नेपाल में बाढ़ ने मचाई तबाही

नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए हिमस्खलन से हुई थी। इसके बाद भोटेकोशी नदी में अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा आ गया, जिससे बाढ़ की स्थिति बन गई। तेज बहाव ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाली सेना के मुताबिक, अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में करीब 121 लोगों के फंसे होने की जानकारी मिली है। वहीं, प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की भी खबर है।

भारत में बढ़ी चिंता

नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद भारत के कई राज्यों में भी चिंता बढ़ गई है। बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम में बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पटना के गांधी घाट और पंडारक में पानी उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) के निशान से ऊपर पहुंच गया है। प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का ‘सदी का बांध’ बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?

नेपाल तबाही के बावजूद नहीं माना चीन : ब्रह्मपुत्र पर 14 लाख करोड़ का 'सदी का बांध' बनाने की ज़िद, भारत के पूर्वोत्तर पर बड़ा संकट?

China Brahmaputra Dam

China Brahmaputra Dam: तिब्बत के 'ग्रेट बैंड' (Great Bend) क्षेत्र में यारलुंग ज़ंगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) के निचले प्रवाह पर चीन द्वारा 60 गीगावाट (GW) क्षमता की 'यारलुंग ज़ंगबो लोअर रीचेस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट' का निर्माण भारत की सामरिक और जल सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

14 लाख करोड़ (1.2 ट्रिलियन युआन) की लागत से बनने वाली यह परियोजना न केवल दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत ढांचा (विश्व प्रसिद्ध 'थ्री गॉर्जियस डैम' से तीन गुना बड़ा) है, बल्कि यह सीधे भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम की जीवन रेखा को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
परियोजना की पूरी इनसाइड स्टोरी

 

China Brahmaputra Dam

 

 'ग्रेट बैंड' (बड़ा मोड़) पर इंजीनियरिंग की बिसात

यह विशाल बांध ब्रह्मपुत्र नदी के उस हिस्से पर बनाया जा रहा है जिसे “ग्रेट बैंड” (Great Bend) कहा जाता है। यहाँ से नदी एक तीखा मोड़ लेते हुए तेजी से भारत के अरुणाचल प्रदेश की ओर गिरती है।

  • रन-ऑफ-द-रिवर का दावा : यद्यपि चीन इसे 'रन-ऑफ-द-रिवर' परियोजना बता रहा है, लेकिन इसमें न्यिंगची के ऊपरी क्षेत्र मेनलिंग में एक विशाल जलाशय (Reservoir) का निर्माण शामिल है।
  • 40 किमी लंबी सुरंग : नदी के पानी को लगभग 40 किलोमीटर लंबी विशाल सुरंग के माध्यम से मोड़कर 5 पावरहाउस संचालित किए जाएंगे, जिसके बाद पानी पुनः निचले प्रवाह में मिल जाएगा।
  • जांगमू बांध का अनुभव : चीन पहले ही मध्य प्रवाह पर जांगमू बांध बना चुका है, जिससे तिब्बत की 26% बिजली मांग पूरी होती है।

भारत की 3 मुख्य चिंताएं और सामरिक कोण

चीन की इस ज़िद से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और असम) के लिए गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है:

  1. जल प्रवाह और जलाशय का नियंत्रण : ऊपरी इलाके मेनलिंग में जलाशय बनने से चीन के पास ब्रह्मपुत्र के पानी को रोकने या अचानक छोड़ने की चाबी आ जाएगी। सूखे के मौसम में पानी रोका जा सकता है और मानसून में अचानक छोड़कर निचले इलाकों में कृत्रिम बाढ़ लाई जा सकती है।
  2. पारिस्थितिकी व भूकंपीय जोखिम: यह पूरा हिमालयी बेल्ट अत्यधिक संवेदनशील टेकटोनिक प्लेट्स (Seismic Zone V) पर स्थित है। हाल ही में नेपाल-चीन सीमा पर आए हिमस्खलन इस बात का प्रमाण हैं। इतने बड़े पैमाने पर टनलिंग और निर्माण से भूस्खलन व बांध टूटने का खतरा कई गुना बढ़ जाएगा।
  3. डेटा साझाकरण में अनिश्चितता: यद्यपि दोनों देशों के बीच 'विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र' (Expert-Level Mechanism) मौजूद है, लेकिन सीमा तनाव के दौरान चीन द्वारा हाइड्रोलॉजिकल डेटा (जल-विज्ञान आंकड़े) देना निलंबित कर दिया जाता है, जिससे भारत समय पर बाढ़ की अग्रिम चेतावनी जारी करने में असमर्थ हो जाता है।

भारत की जल सुरक्षा पर मुख्य प्रभाव (Water Security Impact)

(A) 'वाटर वेपन' (Water Weapon) या कृत्रिम नियंत्रण का खतरा
यद्यपि बीजिंग इसे पर्यावरण-अनुकूल 'रन-ऑफ-द-रिवर' (Run-of-the-river) परियोजना बताता है, लेकिन इसमें तिब्बत के न्यिंगची स्थित मेनलिंग में एक विशाल जलाशय (Reservoir) और 40 किलोमीटर लंबी सुरंग शामिल है।

  • सूखे के मौसम में पानी का कम होना : शीत ऋतु या शुष्क मौसम (Lean Season) में चीन यदि जलाशय में पानी रोकता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में पानी का प्राकृतिक प्रवाह 20% से 30% तक घट सकता है, जिससे कृषि, पेयजल और मत्स्य पालन संकट में आ जाएंगे।
  • आकस्मिक डिस्चार्ज और कृत्रिम बाढ़ : मानसून के दौरान चीन द्वारा बिना पूर्व चेतावनी भारी मात्रा में पानी छोड़ने पर असम के मैदानी इलाकों में अचानक विनाशकारी बाढ़ (Flash Floods) आ सकती है।

(B) हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझाकरण में अनिश्चितता
भारत और चीन के बीच जल-विज्ञान संबंधी डेटा (पानी का बहाव और स्तर) साझा करने का समझौता है। लेकिन पूर्व के अनुभवों (जैसे 2017 के डोकलाम विवाद) में देखा गया है कि सीमा पर राजनीतिक या सैन्य तनाव के दौरान चीन अचानक डेटा रोक देता है। विश्वसनीय पूर्व चेतावनी के अभाव में भारत की आपदा प्रबंधन एजेंसियां समय पर कार्रवाई करने में असमर्थ हो जाती हैं।

China Brahmaputra Dam

(A) अरुणाचल प्रदेश : सियांग नदी का बिगड़ता स्वरूप

  • ब्रह्मपुत्र जब अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसे सियांग (Siang) कहा जाता है।
  • ऊपरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर टनलिंग और ब्लास्टिंग के कारण नदी के पानी में अत्यधिक गाद (Silt/Sediment) और मलबे की मात्रा बढ़ जाएगी, जिससे पानी पीने योग्य नहीं रहेगा और स्थानीय जलीय जीव नष्ट हो जाएंगे।
  • चीन के नियंत्रण से सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक जलस्तर के उतार-चढ़ाव से नदी तटबंधों का कटाव (Soil Erosion) तेज होगा।

(B) असम : ब्रह्मपुत्र घाटी की जैव-विविधता पर प्रहार

  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान पर खतरा : काजीरंगा का अनूठा पारिस्थितिकी तंत्र ब्रह्मपुत्र के प्राकृतिक जल चक्र और बाढ़ पर निर्भर है। पानी के अप्राकृतिक प्रवाह से एक-सींग वाले गैंडों और दुर्लभ वनस्पतियों के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा।
  • माजुली द्वीप का अस्तित्व संकट में: दुनिया के सबसे बड़े नदी द्वीप 'माजुली' (Majuli) का क्षेत्र पहले से ही कटाव के कारण घट रहा है। बांध से होने वाले अनियमित प्रवाह से माजुली का बचा हुआ हिस्सा भी जलमग्न होने या कटने के कगार पर पहुंच सकता है।

पारिस्थितिकीय और भूगर्भीय जोखिम (Ecological & Seismic Hazards)

  1. अत्यधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र (Seismic Zone V): 'ग्रेट बैंड' हिमालयन सिंटैक्सिस (Himalayan Syntaxis) पर स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं। यहां 7+ तीव्रता के भूकंप आने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
  2. बांध टूटने (Dam Failure) का भयानक खतरा : यदि भूकंप या लैंडस्लाइड के कारण चीन का यह विशाल बांध या जलाशय क्षतिग्रस्त होता है, तो लाखों क्यूसेक पानी अरुणाचल और असम को जलमग्न कर देगा, जिससे लाखों इंसानी जानें जा सकती हैं।

भारत का जवाबी और रणनीतिक एक्शन प्लान

चीन के इस 'जल-घेराबंदी' (Water Encirclement) का मुकाबला करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति तेज कर दी है:

  • अरुणाचल प्रदेश में 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' (Siang Upper Multipurpose Project): भारत सरकार अरुणाचल में 11 GW क्षमता वाले विशाल बांध के निर्माण की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली बनाना नहीं, बल्कि चीन द्वारा अचानक छोड़े गए पानी को बफर के रूप में स्टोर करना और सूखे के दौरान पानी का प्रवाह बनाए रखना है।
  • अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक दबाव : भारत, बांग्लादेश के साथ मिलकर (जो ब्रह्मपुत्र का तीसरा सबसे बड़ा प्रभावित देश है) ट्रांस-बाउंड्री नदियों पर बहुपक्षीय संधि और तीसरे पक्ष की निगरानी (Third-party inspection) के लिए वैश्विक कूटनीतिक दबाव बढ़ा रहा है।
  • सैटेलाइट आधारित निगरानी : भारत की अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) और सैन्य उपग्रह तिब्बत में यारलुंग ज़ंगबो के प्रवाह, टनल निर्माण और जलाशयों में पानी के स्तर पर 24×7 रियल-टाइम निगरानी रख रहे हैं।

चीन का आधिकारिक पक्ष

दूसरी ओर, चीनी विदेश मंत्रालय का दावा है कि बीजिंग एक ज़िम्मेदार रुख अपना रहा है। चीन का तर्क है कि यह परियोजना पूरी नदी घाटी में बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन में मददगार साबित होगी तथा इससे भारत या बांग्लादेश जैसे निचले प्रवाह वाले देशों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

9 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे संजय साह, ‘हरे कृष्णा’ के जाप ने बचाई जान, जन्माष्टमी पर मिला नया जीवन

9 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे संजय साह, 'हरे कृष्णा' के जाप ने बचाई जान, जन्माष्टमी पर मिला नया जीवन

sanjay shah rescue operation

नेपाल के त्रिशूली में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद फंसे दो मजदूरों को 9 दिन बाद सुरक्षित निकाल लिया गया है। 'हरे कृष्णा' का जाप करने वाले फोरमैन संजय साह ने जन्माष्टमी के दिन जीवन मिलने की रोमांचक कहानी साझा की है। ALSO READ: नेपाल में चमत्कार; बाढ़ के 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकाले गए 2 लोग, अभी भी फंसे हैं सैकड़ों वर्कर
 

मधेस प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कर्मचारी संजय साह ने बताया कि इन नौ दिनों के हर एक पल में उन्होंने मौत को बहुत करीब से देखा, लेकिन उनका भरोसा नहीं डगमगाया।

संजय शाह पर थी सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी

संजय साह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फोरमैन के तौर पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि आपदा के वक्त जब अफरा-तफरी मची और बाकी लोग जान बचाकर भागने लगे, तब भी वे कंट्रोल रूम में ही डटे रहे। उनके कंधों पर सबकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी। उन्होंने साथी कर्मचारियों से तुरंत वहां से भागने का आग्रह किया, लेकिन जब तक वे सुरक्षित बाहर निकल पाते, तब तक मेरे लिए बाहर निकलने के रास्ते बंद हो चुके थे और बहुत देर हो चुकी थी।

 

अंधेरी और बंद सुरंग के भीतर फंसे होने के दौरान संजय ने उम्मीद नहीं छोड़ी। उन्होंने बताया कि पिछले नौ दिनों से वे लगातार 'हरे कृष्णा' महामंत्र का जाप कर रहे थे। उनका अटूट विश्वास था कि उन्हें बचाने कोई जरूर आएगा। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मिला जीवनदान

कुदरत का करिश्मा देखिए कि लगातार 'हरे कृष्णा' का जाप करने वाले संजय साह को ठीक कृष्ण जन्माष्टमी के पवित्र दिन पर ही सुरंग से जीवित बाहर निकाला गया। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के दिन मिले इस जीवनदान को हर कोई किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं मान रहा है।

 

लगातार एक हफ्ते से ज्यादा समय तक चले मैराथन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, संजय साह की हालत बिल्कुल स्थिर है और उन्हें किसी प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है। एहतियात के तौर पर उन्हें त्रिशूली के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

 

हालांकि, संजय के मुताबिक, सुरंग के और अंदर, विशेषकर पावरहाउस के आसपास कुछ और लोग भी फंसे हो सकते हैं, क्योंकि आपदा के समय हर कोई वक्त रहते बाहर निकलने में सफल नहीं हो पाया था। फिलहाल, प्रशासन यहां राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है।

नेपाल के दार्चुला में भारी लैंडस्लाइड, निचले इलाकों में अलर्ट:त्रिशूली से 3 और भारतीयों का रेस्क्यू; बाढ़ में अबतक 1300 की मौत, 5 हजार लापता

नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का रास्ता बंद हो गया। निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 26 अगस्त की बाढ़-लैंडस्लाइड के बाद से राहत-बचाव कार्य जारी है। त्रिशूली बाजार इलाके से 5 साल का बच्चे समेत तीन भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 275 अब भी लापता हैं। वहीं, शुक्रवार को बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। 40 लोग अब भी फंसे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 900 मजदूर लापता हैं। इनमें लगभग 500 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल में अब तक करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला है। फिलहाल 5300 से ज्यादा लोग लापता हैं। खबर को अपडेट किया जा रहा है।

नेपाल के दार्चुला में लैंडस्लाइड, निचले इलाकों में अलर्ट:त्रिशूली से 3 और भारतीयों का रेस्क्यू; बाढ़ में अबतक 1300 की मौत, 5 हजार लापता

नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का रास्ता बंद हो गया। निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है। नदी का प्रवाह प्रभावित होने से आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। वहीं, 26 अगस्त की बाढ़-लैंडस्लाइड के बाद से राहत-बचाव कार्य जारी है। त्रिशूली बाजार इलाके से 5 साल का बच्चे समेत तीन भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को बताया कि अब तक 169 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है, जबकि 275 अब भी लापता हैं। इससे पहले शुक्रवार को बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। 40 लोग अब भी फंसे हैं। बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में करीब 900 मजदूर लापता हैं। इनमें लगभग 500 के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। नेपाल में अब तक करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला है। फिलहाल 5300 से ज्यादा लोग लापता हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ से 32,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। नेपाल आपदा से जुड़ी 3 तस्वीरें… चीन से 1,907 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंचे विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन से 1,907 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। चीन के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अब कोई भारतीय यात्री फंसा नहीं है। भारत ने 7 विमानों से भेजी 95 टन राहत सामग्री विदेश मंत्रालय के अनुसार, 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से भारत ने नेपाल को करीब 95 टन राहत सामग्री भेजी है। यह सामग्री 7 विमानों के जरिए पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अगस्त को नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से बात कर हरसंभव मदद का भरोसा दिया था। इसके कुछ घंटे बाद भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी थी। भारत ने राहत-बचाव के लिए 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें 30 सुरंग बचाव विशेषज्ञ, 19 फोरेंसिक विशेषज्ञ और 5 सदस्यीय मेडिकल टीम शामिल है। भारतीय टीमें नेपाल के अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। नेपाल में 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज क्षतिग्रस्त स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से मुख्य रूप से मध्य नेपाल में 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर पक्की सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। भारत ने कहा है कि वह नेपाल सरकार की जरूरत के अनुसार आगे भी मदद जारी रखेगा। इसके तहत फोरेंसिक किट, बेली ब्रिज और अन्य जरूरी सामग्री भेजने की योजना है।

नेपाल की टनल से 9 दिन बाद जिन संजय शाह को निकाला गया क्या वो मंत्र के सहारे जिंदा रहे?

नेपाल में आई तबाही के असर अब तक वहां दिख रहा है। इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 2000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वहीं इस भीषण तबाही के बीच ऐसी भी कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को हौसला मिल रहा है। ऐसी ही कहानी नेपाल के एक पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह की सामने आई है। संजय साह को नौ दिनों बाद टनल से रेस्क्यू किया गया है।

कमाल की है संजय साह की कहानी 

बता दें कि, पावर प्लांट में काम करने वाले संजय साह के सामने उस वक्त मुश्किल फैसला था, जब प्लांट के पास पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिर गया। वह चाहते तो अपनी जान बचाने के लिए वहां से निकल सकते थे, लेकिन उन्होंने रुककर दूसरे लोगों की मदद करने का फैसला किया। करीब नौ दिन तक बर्फ, पत्थरों और मलबे के बीच फंसे रहने के बाद शुक्रवार को संजय और एक अन्य कर्मचारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस बचाव से इस बड़ी आपदा के बाद लापता लोगों की तलाश कर रही टीमों को भी नई उम्मीद मिली है।

टनल से नौ दिन बाद किया गया रेस्क्यू

नेपाल के अधिकारियों की ओर से जारी किए गए एक वीडियो में 30 वर्षीय संजय साह स्ट्रेचर पर लेटे नजर आए। उनके चेहरे पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था। उन्होंने सेना के अधिकारियों को बताया, “मैं टनल के कंट्रोल रूम में था। आमतौर पर वहां चार से छह लोग रहते हैं, लेकिन उस दिन करीब 40 से 45 लोग मौजूद हो सकते थे। मेरी जिम्मेदारी सभी की जान बचाना थी। जब इतना बड़ा हादसा हुआ, तब मेरा वहां से भागना सही नहीं होता।”

लगातार किया मंत्रों का जाप

उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें ऊपर पहाड़ पर हादसा होने की जानकारी मिली, उन्होंने सुरंग में मौजूद लोगों को तुरंत सतर्क किया और बाहर निकलने के लिए कहा। हालांकि, खुद बाहर जाने का मौका उन्हें नहीं मिल पाया और जब तक उन्होंने निकलने की कोशिश की, तब तक रास्ता बंद हो चुका था। अधिकारियों के मुताबिक, त्रिशूली नदी के किनारे बने छह हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में करीब 900 लोगों के फंसे होने की आशंका है। साह ने बताया कि उन्होंने सुरंग में बिताए उन नौ दिनों के दौरान हिम्मत बनाए रखने के लिए मंत्रों का जाप किया।

फिलहाल हॉस्पिटल में कराया गया भर्ती 

सुरंग के अंदर तीन-चार अन्य मजदूरों से संपर्क बनाए रखा और बताया कि कुछ लोग अभी भी पहाड़ के अंदर फंसे हो सकते हैं। साह और उनके साथ बचाए गए कबीर महारजन, जो मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं, इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से सुरक्षित निकाले गए पहले मजदूर हैं। हादसे के कुछ घंटे बाद कुछ मजदूर दूसरी सुरंग से बाहर निकलने में सफल रहे थे। नेपाली सेना की ओर से जारी वीडियो में साह को एक मजदूर की पीठ पर ले जाकर बाहर लाते हुए देखा गया, इस दौरान उनका चेहरा मिट्टी और कीचड़ से भरा हुआ था। बचाए गए संजय साह और कबीर महारजन को इलाज के लिए काठमांडू के एक आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां दोनों को आईसीयू में रखा गया है।

 

भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से 42 MW बिजली 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदी जाएगी। इसके लिए 25 साल का करार हुआ है। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। 2 सितंबर को बीजिंग में हुए इस समझौते का बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। बांग्लादेश ने भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति जताई थी भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इसका विरोध किया। इसके बाद भारत ने शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी होगी कम अमीनबाजार का प्रोजेक्ट सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। इसमें ढाका के कचरे का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से कचरे की समस्या कम करने के साथ बिजली भी पैदा होगी। बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी और पावर कट की समस्या से जूझ रहा है। देश के सामने विदेशी मुद्रा का संकट भी है। बांग्लादेश के पावर सेक्टर में चीन का दखल बढ़ रहा चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। वह तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमीनबाजार का वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट भी इसी बढ़ती भागीदारी का हिस्सा है। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक ढाका के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट से म्यांमार को बिजली सप्लाई करने की तैयारी है। इस तरह अमीनबाजार प्रोजेक्ट का इस्तेमाल बांग्लादेश की बिजली जरूरत के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए:दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा रूस-यूक्रेन युद्ध में ब्लैक सी अब जंग का बड़ा मोर्चा बन गया है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से ज्यादा जहाजों को निशाना बनाया है। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल बाढ़ में अबतक 1068 लोगों की मौत:4600 से ज्यादा की तलाश जारी; एक लड़की ने 17 रिश्तेदारों को खोया; चीन के 100 नागरिक लापता

नेपाल में बाढ़ के एक हफ्ते बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। आपदा में लापता लोगों की तलाश के बावजूद कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। कई इलाकों में कीचड़ और मलबा जमा होने से राहत कार्य मुश्किल बना हुआ है। 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अब तक 1,068 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 400 के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं। करीब 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 500 विदेशी नागरिक हैं। नेपाल में सड़क और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई चीनी नागरिक लापता हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में करीब 100 चीनी नागरिकों का अब तक पता नहीं चला है। नेपाल और चीन के प्रभावित परिवारों की मांग है कि उनके परिजनों की सही और स्पष्ट जानकारी दी जाए। एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। बाढ़ प्रभावित बिदुर में विस्थापित परिवार अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी दोबारा बाढ़ आने का डर सता रहा है। नेपाल त्रासदी की 4 तस्वीरें… नेपाल के 5 लोगों के शव यूपी में मिले उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से मिले नेपाल के पांच नागरिकों के शव मंगलवार को सोनौली सीमा पर सौंपे गए। ये लोग नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बह गए थे। शव नेपाल पुलिस को सौंपे गए। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष हैं। नेपाल में शव जलाने की बजाय दफनाए जा रहे नेपाल में बाढ़ के बाद सैकड़ों अज्ञात शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि शवों के अवशेष सुरक्षित रहें और DNA जांच से पहचान कर परिजनों को सौंपे जा सकें। दरअसल, पानी और कीचड़ में लंबे समय तक दबे रहने से शवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है। कई शव पानी में फूल गए हैं और तेजी से सड़ रहे हैं। इससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। दूसरी तरफ शवगृह और अस्थायी केंद्र भी शवों से भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। यही वजह है कि अज्ञात शवों को सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा है।