मेरठ के चर्चित ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड मामले में दोषी मुस्कान और साहिल को सजा-ए-मौत

मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में दोषी करार दी गयी उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को एक स्थानीय अदालत ने फांसी की सजा सुनायी है।

जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में बुधवार को सजा पर सुनवाई के बाद दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनायी गयी।

उन्होंने बताया कि गत 30 सितंबर को सौरभ राजपूत हत्याकांड मामले में दोषी करार दिये गये साहिल और मुस्कान जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत के समक्ष पेश हुए, जिसके बाद सजा पर बहस और दोषियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए सुनवाई हुई।

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चौबे ने बताया कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने दोनों से पूछा कि वे सजा के संबंध में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं। जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान और साहिल को अलग-अलग पेश किया गया और दोनों ने अपना पक्ष रखा।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सुनवाई संक्षिप्त रही। उन्होंने बताया कि अदालत ने दोनों से विभिन्न बिंदुओं पर सवाल किए, जिनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े सवाल भी शामिल थे। हालांकि, उन्होंने सवालों का विस्तृत ब्योरा साझा करने से इनकार किया।

अभियोजन के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में की गई थी। आरोप था कि मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या की और शव के टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में डालकर उसे सीमेंट से सील कर दिया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाह और साक्ष्य पेश किए और करीब 126 तारीखों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था।

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बिहार नाव हादसा: लापता लोगों की तलाश जारी

वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से कम से कम 13 बच्चों की मौत की घटना के एक दिन बाद बुधवार को लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि हादसे में जिन बच्चों की मौत हुई उनकी उम्र 15 वर्ष से कम थी। नाव पर 20 से अधिक लोग सवार थे।

उन्होंने ने बताया कि मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल हैं। बुधवार को अब तक कोई और शव बरामद नहीं हुआ है।

यह हादसा मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे उस समय हुआ जब रामपुर श्यामचंद गांव के निवासी नदी के पार एक गांव में भोज में शामिल होने जा रहे थे।

सिंह ने  राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है। छह लोगों को बचा लिया गया है।’’

जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। नाव जिसके नाम पर पंजीकृत है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि सूर्यास्त के बाद नावों के परिचालन पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह हादसा हुआ।

सिंह ने कहा, “नाव के मालिक, संचालक और ऐसी घटनाओं को रोकने एवं निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमें बताया गया है कि यह नाव पहले भी परिचालित होती रही थी। इस लापरवाही से सख्ती से निपटा जाएगा।”

नावों की कमी होने संबंधी दावों को खारिज करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यदि नाव या संपर्क सड़क की मांग की जाती है, तो प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा, क्योंकि यह एक अस्थायी जल क्षेत्र है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की आठ नौकाएं काम कर रही हैं। प्रशासन इलाके में एसडीआरएफ के दो स्थानीय केंद्र स्थापित करने की भी योजना बना रहा है।

मृतकों की पहचान मीरा कुमारी, निशु कुमारी, अनीशा कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, मोहन कुमार, अमृता कुमारी, अंकिता कुमारी, पिंकी कुमारी, नमन कुमार, सिकी कुमारी, भोनू कुमारी और सोनम कुमारी के रूप में हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि सूचना के अनुसार हादसे में एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत हुई है।

इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में जिलाधिकारी फूट-फूटकर रो रही एक महिला को गले लगाकर सांत्वना देती नजर आ रही हैं।

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राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के उपनिरीक्षक जय दीप नारायण सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि क्षतिग्रस्त नाव को नदी से निकाल लिया गया है और तलाश अभियान जारी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक सतीश कुमार यादव और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधान परिषद सदस्य अशरफ अंसारी समेत कई स्थानीय नेता घटनास्थल पर पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और क्षेत्र के लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने भी एनएमसीएच पहुंचकर हादसे में बचाए गए लोगों से मुलाकात की।

पासवान ने संवाददाताओं से कहा, “मैं कल रात से ही जिला प्रशासन के संपर्क में हूं। मैं शोकसंतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा हूं। इन लोगों ने मुझे वह सब कुछ बनाया है, जो मैं आज हूं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, मैं यहां रहूंगा।”

उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता एवं राघोपुर के विधायक तेजस्वी यादव ने मंगलवार रात एक वीडियो संदेश में कहा था कि वह नयी दिल्ली से लौटने के बाद अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे।

वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में विपक्ष के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली गए थे।

हादसे के बाद गांव के लोगों ने प्रशास पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

स्थानीय निवासी रवि कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘नाव की हालत जर्जर थी। हमने कई बार इसे बदलने की मांग की थी, लेकिन हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।’’

राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने हादसे में मारे गए प्रत्येक बच्चे के परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई है। इसके अतिरिक्त, कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत प्रत्येक मृतक के परिवार को तीन-तीन हजार रुपये तथा मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मृतकों के अभिभावकों को 20-20 हजार रुपये दिए गए हैं।

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ओमान के सोहर में टैंकर पर ड्रोन हमले में लापता दो भारतीय नाविकों की तलाश जारी, 9 सदस्य बचाए गए

ओमान के तट पर सोहर एंकरेज में निकारागुआ के झंडे वाले टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ था। इस टैंकर पर 11 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। इनमें से 9 नाविकों को बचा लिया गया, जबकि 2 नाविक लापता बताए जा रहे हैं। इनके लिए खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह हमला MT पेट्रो डॉल्फिन पर 11 अक्टूबर को हुआ था।

रविवार को X पर एक पोस्ट में, सोनोवाल ने कहा कि टैंकर पर सोहर एंकरेज में हमला हुआ था। उन्होंने पुष्टि की कि स्थानीय कोस्ट गार्ड सक्रिय रूप से सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा था। सोनोवाल ने अपने X पोस्ट में कहा, “11 अक्टूबर को, 11 भारतीय नाविकों को ले जा रहे टैंकर MT पेट्रो डॉल्फिन पर सोहर एंकरेज में ड्रोन हमला हुआ था।” “हालांकि हमारे नौ भारतीय क्रू मेंबर को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है और वे सुरक्षित हैं, दो भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं।”

सोनोवाल ने कहा, “लोकल कोस्ट गार्ड सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन एक्टिव रूप से कर रहा है। हम सभी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार कोऑर्डिनेट कर रहे हैं ताकि चल रहे रेस्क्यू कामों में पूरी तरह से मदद मिल सके और यह पक्का किया जा सके कि हमारे लापता लोगों को सुरक्षित रूप से ढूंढने के लिए हर मुमकिन कदम उठाया जाए।” मस्कट में भारतीय दूतावास ने भी कन्फर्म किया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से दो लापता बताए गए हैं। दूतावास ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।

X पर एक पोस्ट में, दूतावास ने कहा, “एम्बेसी निकारागुआ के झंडे वाले टैंकर MT PETRO DOLPHIN से जुड़ी स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है।” अधिकारी ने बताया, “जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से दो लापता बताए गए हैं। एम्बेसी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।” यह घटनाक्रम खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों और इंटरनेशनल जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच हुआ है।

11 अक्टूबर को एक अलग घटना में, मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला टैंकर M/T वल्थेरा, जिसमें 11 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय एक अनजान चीज से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई।

Saudi-Houthi War Video: सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों का फिर बड़ा हमला! रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले में भारतीय की मौत, 10 अन्य इंडियन घायल

अफ्रीकी देश जिबूती के पास नाव डूबी, 109 की मौत:116 लापता, 350 लोग सवार थे; इथियोपिया के 80 से ज्यादा नागरिक बचाए गए

अफ्रीकी देश जिबूती के तट के पास प्रवासियों से भरी नाव डूबने से 109 लोगों की मौत हो गई, जबकि 116 लोग लापता हैं। नाव में करीब 350 लोग सवार थे। हादसे में 80 से ज्यादा लोगों को बचा लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संस्था (IOM) के मुताबिक, सभी जीवित बचे लोग इथियोपिया के नागरिक हैं। हादसा 8 और 9 अक्टूबर की दरमियानी रात जिबूती के ओबॉक शहर के उत्तर में हुआ। IOM के मुताबिक, हादसे के बाद अब तक 109 शव बरामद किए गए हैं। इनमें 52 पुरुष, 42 महिलाएं और 15 बच्चे शामिल हैं। बच्चों में 9 लड़कियां और 6 लड़के हैं। जिबूती से यमन से जा रही थी नाव हादसे में बचे लोगों ने बताया कि नाव जिबूती से यमन जा रही थी। इसी दौरान वह समुद्र में पलट गई। लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए IOM की टीमें जिबूती के अधिकारियों के साथ काम कर रही हैं। जिबूती में IOM के मिशन प्रमुख एलेक्जेंडर कोइसाक ने कहा कि यह जानमाल का बेहद दुखद नुकसान है। उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने लोगों को खोया है या अब भी उनकी खबर का इंतजार कर रहे हैं। बेहतर जिंदगी की तलाश में खतरनाक समुद्री रास्ता अपनाते हैं लोग IOM के मुताबिक, गरीबी, असुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर के कारण कई लोग रोजगार और बेहतर जिंदगी की तलाश में यह खतरनाक समुद्री रास्ता अपनाते हैं। प्रवासी जिबूती से बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट पार करके यमन पहुंचने की कोशिश करते हैं। इसके बाद उनका लक्ष्य खाड़ी देशों तक पहुंचना होता है। इस रास्ते पर समुद्र में नाव डूबने और जान जाने का खतरा बना रहता है। IOM ने कहा कि मध्य पूर्व में अस्थिरता के बावजूद लोग बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में यह जोखिम भरी यात्रा कर रहे हैं।

नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़:कई पुल-घर बहे, गांवों में पानी भरा, 4 लापता; 45 दिन पहले आई बाढ़ में 1455 मौतें हुईं

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में कई घर और पुल बह गए। चार लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कुछ उपकरण भी बह गए। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यार नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया। रॉयटर्स के मुताबिक, 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भुस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें… SMS भेजकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का समय मिल सकता है। उप्रेती के मुताबिक, प्रशासन ने लोगों को SMS भेजकर अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है।

नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़:कई पुल-घर बहे, 4 लापता; लैंडस्लाइड से स्यारी नदी का रास्ता बंद, बिहार में भी खतरा

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में कई घर और पुल बह गए। चार लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कई मशीनें भी बह गईं। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यारी नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया। इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भूस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ से जुड़ी 4 तस्वीरें… अब मैप से समझें कहां हुआ हादसा बिहार में भी बाढ़ का खतरा बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने से बिहार में भी खतरा बढ़ सकता है। यह नदी आगे त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है। ऐसे में अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार में गंडक किनारे बसे इलाकों पर असर पड़ सकता है। इनमें पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि नेपाल में आई बाढ़ से बिहार में जलस्तर बढ़ेगा या नहीं। SMS भेजकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का समय मिल सकता है। उप्रेती के मुताबिक, प्रशासन ने लोगों को SMS भेजकर अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है। पहाड़ी इलाकों में बिना बारिश के भी बाढ़ का खतरा नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आने का खतरा बना रहता है। पहाड़ से मिट्टी और पत्थर खिसककर जब नदी या नाले का रास्ता रोक देते हैं, तो पानी एक जगह जमा होने लगता है। कुछ समय बाद जब मिट्टी और पत्थरों की रुकावट टूटती है, तो जमा पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। इससे नदी के किनारे बसे गांवों में अचानक बाढ़ आ जाती है। बाढ़ का पानी अपने साथ बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा भी बहाकर ले जाता है। इससे घर, सड़कें और पुल टूट सकते हैं। ऐसी बाढ़ आने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसी इलाके में बारिश हुई हो। पहाड़ के ऊपरी हिस्से में जमा पानी अचानक नीचे आने से दूर बसे गांवों में भी तबाही मच सकती है। 45 दिन पहले आई बाढ़ से भारी तबाही नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। चीन के तिब्बत से लगी सीमा के पास शुरू हुई इस बाढ़ का असर भोटेकोशी नदी और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। अचानक आए तेज पानी ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली बनाने वाली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शुरुआती दिनों में सैकड़ों शव बरामद किए गए थे और बड़ी संख्या में लोग लापता थे। बाद में 5 अक्टूबर को नेपाल सरकार ने बताया कि इस बाढ़ में कम से कम 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जबकि 5000 लोग अब भी लापता हैं। करीब 13,795 लोगों को बचाया गया। बाढ़ से 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भी तबाह हुए। इसके बाद राहत और बचाव अभियान के साथ प्रभावित लोगों को दोबारा बसाने की तैयारी शुरू की गई। ——————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में फ्लोरिडा के तट से टकराया इसायस तूफान अमेरिका के मेक्सिको की खाड़ी से लगे तटीय इलाकों में शुक्रवार को इसायस तूफान टकराया। फ्लोरिडा और अलबामा में 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल के हिमलुंग हिमाल चोटी पर हिमस्खलन में और शव निकाले गए, मरने वालों आंकड़ा 15 हुआ

नेपाल में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी पर हुए हिमस्खलन को लेकर दुखद जानकारी सामने आई है। नेपाल नेशनल माउंटेन गाइड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने गुरुवार को इस प्राकृतिक घटना में मरने वालों की संख्या बढ़ने की जानकारी दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हिमलुंग हिमाल चोटी के रास्ते पर हुए एवलांच में मारे गए लोगों में से आठ और लोगों की लाशें गुरुवार को बरामद की गईं। इससे मरने वालों की संख्या 15 हो गई, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है।

नेपाल के मनांग जिले के नार फू इलाके में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर एवलांच आया। इससे टेंट दब गए, जहां सपोर्टिंग स्टाफ और माउंटेन गाइड समेत 16 लोग शरण लिए हुए थे। नेपाल नेशनल माउंटेन गाइड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि गुरुवार को पहाड़ से आठ लाशें बरामद की गईं। रविवार और सोमवार को पहाड़ से दो-दो लाशें बरामद की गईं, जबकि बुधवार को तीन लाशें बरामद की गईं।

लापता वर्कर्स और गाइड्स को ढूंढने के लिए 14 लोगों का एक बचाव दल तैनात किया गया था, जो आमतौर पर क्लाइंबिंग एक्सपीडिशन को लॉजिस्टिक और दूसरी मदद देते हैं। हिमालयन हॉलिडेज और इमेजिन नेपाल ट्रेक एंड एक्सपीडिशन के करीब दो दर्जन नेपाली हाई-एल्टीट्यूड वर्कर्स और गाइड्स क्लाइंबिंग सीजन की तैयारी के लिए करीब दो हफ्ते पहले काठमांडू से हिमलुंग हिमाल गए थे।

वे चढ़ाई के रास्ते पर काम कर रहे थे और बेस कैंप तैयार कर रहे थे। रविवार को नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश और बर्फबारी के बीच हिमस्खलन हुआ, जिससे लैंडस्लाइड और बाढ़ भी आई है। यह ऐसे समय में हुआ है जब नेपाल अगस्त में आई भयानक बाढ़ से अभी भी उबर रहा है, जिसमें 1,450 से ज्यादा लोग मारे गए थे और लगभग 5,000 लोग लापता हैं।

इससे पहले, क्षेत्र के पुलिस उपाधीक्षक शैलेंद्र थापा ने बताया कि बर्फ के ढेर में दबे टेंट से 10 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। बर्फ हटाकर लापता लोगों की तलाश के दौरान दो शव बरामद किए गए थे। बाकी के लापता लोगों की तलाश हेलीकाप्टर से की जा रही है लेकिन इस क्षेत्र में खराब मौसम की वजह से लापता लोगों की तलाश में बाधा आ रही थी।

Noorullah Noori statement: ‘इस्लामिक अमीरात चाहे तो दो दिन में पेशावर पर फहरा सकता है अपना झंडा’, तालिबान मंत्री नूरुल्लाह नूरी ने पाकिस्तान को चेताया

चीन में लाइबेरिया के झंडे वाले जहाज में आग:20 की मौत, 5 लापता, शिप की मरम्मत का काम चल रहा था

चीन के किंगदाओ शहर में गुरुवार को मरम्मत के लिए खड़े लाइबेरिया के झंडे वाले मालवाहक जहाज में अचानक आग लग गई। हादसे में 20 लोगों की मौत हो गई। 5 लोग अब भी लापता हैं। जहाज पर कुल 42 लोग मौजूद थे इनमें से 12 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, आग सुबह करीब 11 बजे बेइहाई शिपयार्ड में लगी। उस समय जहाज पर मरम्मत का काम चल रहा था। करीब साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर 2:30 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। आग लगने की वजह पता नहीं चल पाई है। शी जिनपिंग ने दिए जांच के आदेश हादसे के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने को भी कहा है। शी ने अधिकारियों से ऐसे हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा जांच करने को कहा है। चीनी प्रधानमंत्री ली च्यांग ने भी फंसे लोगों को निकालने और घायलों को बेहतर इलाज देने पर जोर दिया। सरकारी कंपनी CSSC के अधीन है शिपयार्ड जिस शिपयार्ड में यह हादसा हुआ, वह सरकारी कंपनी चाइना स्टेट शिपबिल्डिंग कॉरपोरेशन (CSSC) के अधीन है। CSSC चीन की सबसे बड़ी जहाज निर्माण कंपनियों में से एक है और दुनिया की प्रमुख शिपबिल्डिंग कंपनियों में भी शामिल है। किंगदाओ का बेइहाई शिपबिल्डिंग शिपयार्ड नए जहाज बनाने के साथ-साथ पुराने जहाजों की मरम्मत भी करता है। यहां बड़े मालवाहक जहाजों के अलावा दूसरे समुद्री जहाजों के निर्माण और मरम्मत की सुविधा है। शिपयार्ड में 30 हजार और 20 हजार टन क्षमता वाले जहाजों के निर्माण के लिए बर्थ मौजूद हैं। इसके अलावा यहां 20 हजार टन तक के जहाजों के निर्माण और मरम्मत की सुविधा भी है। शिपयार्ड में मल्टी-पर्पज वर्क वेसल, तेल टैंकर और 40 हजार टन तक के ड्राई बल्क कैरियर जैसे जहाज भी बनाए जाते हैं। जहाज पर आग लगने से जुड़ा 1 महीने में दूसरा हादसा करीब एक महीने में चीन के दो अलग-अलग शिपयार्ड में जहाज से जुड़े गंभीर हादसे हुए हैं। 13 अगस्त को फुजियान के फुआन में जहाज में आग में आग लग गई थी। आग बुझाने के लिए रेस्क्यू टीम पहुंची और बचाव अभियान शुरू किया। इसी दौरान करीब 45 मिनट बाद अचानक जोरदार विस्फोट हो गया। हादसे में एक बचावकर्मी की मौत हो गई, जबकि 11 लोग घायल हुए। —————————————-
यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश सेना का चीनी टैंक फायरिंग अभ्यास में फटा:2 सैनिकों की मौत, एक अधिकारी गंभीर; हादसे की वजह अभी साफ नहीं
बांग्लादेश के चटगांव में बुधवार को सेना के फायरिंग अभ्यास के दौरान चीन में बना टाइप 59 टैंक फट गया। हादसे में टैंक के अंदर मौजूद दो सैनिकों की मौत हो गई। एक सैन्य अधिकारी गंभीर रूप से घायल है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

नेपाल तबाही के बाद इंटरनेशनल मीडिया पहली बार तिब्बत पहुंचा:चीनी विदेश मंत्रालय ने दौरा कराया, बाढ़ हादसे में अब तक 5000 लोग लापता

चीन के अधिकारियों ने रविवार को बताया कि नेपाल सीमा पर भूस्खलन से तबाह हुए ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग से 12 और शव बरामद किए गए हैं। यहां सैकड़ों लापता लोगों की तलाश जारी है। नेपाल की तरफ 26 अगस्त को एक हिमनद टूटने के बाद सुनामी जैसी तेज लहर में पानी, कीचड़ और मलबा बहकर आया था। इस आपदा में सीमा के दोनों तरफ 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है और 5,000 से ज्यादा लोग लापता हैं। चीन की तरफ शनिवार तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी और 519 लोग लापता थे। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। लापता लोगों में 49 भारतीय नागरिक हैं। चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से रविवार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए पहली बार दौरा आयोजित किया गया। रॉयटर्स और अन्य समाचार एजेंसियों ने संकरी नदी घाटी में बने इस लैंड पोर्ट का दौरा किया। खबर अपडेट हो रही है…

नेपाल के मलबे में जिंदगी के निशान तलाशने की आखिरी कोशिश! अपने 36 लापता नागरिकों को बचाने ऑस्ट्रेलिया ने भेजी हाई-टेक ‘ड्रोन फौज’

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारत सहित कई देश नेपाल की मदद के लिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास कर रहे हैं और मलबों में फंसे लोगों को निकालने के लिए सर्च अभियान चला रहे हैं। इसी क्रम में ऑस्ट्रेलिया के आपदा राहत विशेषज्ञ भी लोगों की तलाश में शामिल होने के लिए शुक्रवार को नेपाल के लिए रवाना हुए। वहीं, इस भयानक आपदा के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अपने 36 लापता नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

बता दें कि 26 अगस्त को ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने के बाद नेपाल में आई अचानक बाढ़ में अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक, लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि नेपाल सरकार के अनुरोध पर 15 सदस्यों वाली ‘ऑस्ट्रेलियाई आपदा सहायता प्रतिक्रिया टीम’ को तैनात किया गया है। इस टीम में ज्यादातर सदस्य राज्य की आपातकालीन सेवाओं के ड्रोन पायलट हैं।

ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी ने दी जानकारी

न्यू साउथ वेल्स फायर एंड रेस्क्यू के कमिश्नर जेरेमी फ्यूट्रेल ने शुक्रवार को सिडनी एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा, “हमें अभी भी उम्मीद है कि कुछ जगहों पर लोग जीवित हो सकते हैं और उम्मीद है कि यह टीम ऐसे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकेगी।”

उन्होंने कहा, “इस टीम में मुख्य रूप से हमारे खास ड्रोन के पायलट शामिल हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ड्रोन हैं जो हवा से बड़े इलाकों का सर्वे कर सकते हैं और ऐसी तंग जगहों पर भी जा सकते हैं जहां बचाव कर्मियों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

जेरेमी फ्यूट्रेल ने आगे कहा, “हम जो मदद दे रहे हैं, वह नेपाली अधिकारियों के अनुरोध पर दी जा रही है। इसके तहत उन्हें ऐसे कई साधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनसे उन्हें वाकई मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा, इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस के 7 विशेषज्ञ भी शनिवार को नेपाल पहुंचेंगे। ये विशेषज्ञ आपदा में मारे गए या लापता लोगों की पहचान करने में मदद करेंगे।

19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद 

बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने गुरुवार को इनकी तैनाती की घोषणा की थी। विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि 19 ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी पहले से ही नेपाल में मौजूद हैं, जिनमें कॉन्सुलर अधिकारी, मानवीय सहायता से जुड़े पुलिसकर्मी और रक्षा व पुलिस के जवान शामिल हैं।

गौरतलब है कि नेपाल के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते कहा था कि उन्हें विशेष और तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत है।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है, लेकिन चीन की सीमा के पास बचाव कार्य जारी है।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लापता ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के कुछ रिश्तेदार भी खुद तलाश करने के लिए नेपाल गए हैं।

ऑस्ट्रेलिया के ट्रेजरर जिम चाल्मर्स ने शुक्रवार को बताया कि 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि रात भर में दो लोगों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

उन्होंने ABC न्यूज ब्रेकफास्ट को बताया, “हमें उन 36 ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों के बारे में अभी भी बहुत चिंता है जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है।”

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