अजय राय की छुट्टी! कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को सौंपी यूपी की कमान, जानिए कौन हैं ये, क्यों बनाया गया इन्हें अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया है। कांग्रेस आलाकमान ने अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाते हुए उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल की नेता और वरिष्ठ विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया है। लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और लगातार तीन बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचने वाली आराधना मिश्रा को यह जिम्मेदारी सौंपकर कांग्रेस ने प्रदेश में अपने पारंपरिक वोट बैंक और महिला नेतृत्व दोनों को एक साथ साधने का बड़ा राजनीतिक दांव खेला है।

कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’? जानिए पारिवारिक और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में जन्मी आराधना मिश्रा ‘मोना’ उत्तर प्रदेश के दिग्गजों में गिने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। प्रमोद तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मिसाल माना जाता है। प्रमोद तिवारी ने प्रतापगढ़ जिले की ऐतिहासिक रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतकर रिकॉर्ड कायम किया था। आराधना मिश्रा की शुरुआती और उच्च शिक्षा प्रयागराज में ही हुई। उन्होंने 1997 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन किया और मानवाधिकार विषय की पढ़ाई भी पूरी की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक वह एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं और उनकी कुल घोषित संपत्ति लगभग 34.1 करोड़ रुपये है। इसमें 6.1 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 28 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल है।

त्रिस्तरीय पंचायत से विधानमंडल तक: ऐसा रहा राजनीतिक सफर

आराधना मिश्रा को राजनीति विरासत में जरूर मिली, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत धरातल से की। उन्होंने वर्ष 2001 से लगातार तीन कार्यकाल के लिए ब्लॉक प्रमुख के रूप में काम किया और स्थानीय निकायों में काम करने का लंबा अनुभव हासिल किया। वह ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत मनरेगा की उत्तर प्रदेश राज्य निगरानी एवं सतर्कता समिति की सदस्य भी मनोनीत की गईं। इसके अलावा 2012 के विधानसभा चुनाव में वह कांग्रेस की मीडिया कैंपेन कमेटी की सक्रिय सदस्य रहीं।

वर्ष 2014 में जब उनके पिता प्रमोद तिवारी राज्यसभा के लिए चुने गए, तब रामपुर खास सीट पर हुए उपचुनाव में आराधना मिश्रा ने जीत दर्ज कर पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में कदम रखा। वर्ष 2017 की प्रचंड बीजेपी लहर में भी उन्होंने रामपुर खास सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। वह उन चुनिंदा 7 कांग्रेस विधायकों में शामिल थीं जो उस चुनाव में जीत दर्ज कर पाए थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने फिर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार को 14000 से अधिक वोटों से हराकर लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।

2019 से संभाल रही हैं विधानमंडल दल की नेता की कमान

आराधना मिश्रा ‘मोना’ की सांगठनिक क्षमता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने अक्टूबर 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। इसके बाद से वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के भीतर कांग्रेस की मुख्य रणनीतिकार बनी हुई हैं। इसके अलावा वह ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रमुख पैनलों की सदस्य हैं और राष्ट्रीय टीवी बहसों में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखती रही हैं।

क्यों बनाया गया उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस द्वारा आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कई अहम रणनीतिक और राजनीतिक समीकरण काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं का एक बड़ा प्रभाव रहा है। आराधना मिश्रा एक प्रमुख और स्थापित ब्राह्मण चेहरा हैं। कांग्रेस लंबे समय से अपने पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है, ऐसे में उन्हें कमान सौंपना एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

महिला नेतृत्व को बढ़ावा

कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर लगातार जोर देती रही है। आराधना मिश्रा राज्य की अग्रिम पंक्ति की महिला नेताओं में शामिल हैं। इसके अलावा प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में प्रमोद तिवारी का मजबूत जनाधार रहा है। आराधना मिश्रा ने उस विरासत को न सिर्फ संभाला है बल्कि तीन बार लगातार चुनाव जीतकर अपनी खुद की मजबूत जनस्वीकार्यता भी साबित की है। ब्लॉक स्तर से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक काम करने का उनका लंबा अनुभव पार्टी संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में मददगार साबित हो सकता है। कांग्रेस आलाकमान को उम्मीद है कि आराधना मिश्रा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पार्टी एक नए उत्साह और मजबूत रणनीति के साथ जमीन पर उतरेगी।

शराब बनाने वाली इस कंपनी के शेयरों को लग सकते हैं पंख, ब्रोकरेज फर्म ने दी खरीदने की सलाह

रेडिको खेतान के शेयरों में 25 सितंबर को तेजी दिखी। इसकी वजह ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल की रिपोर्ट है। ब्रोकरेज फर्म ने रेडिको खेतान के शेयरों पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बनाए रखी है। इससे शुक्रवार को शेयरों में तेजी दिखी। यह शेयर 1.20 फीसदी चढ़कर 4,535 रुपये पर बंद हुआ।

कंपनी की ग्रोथ प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से ज्यादा रह सकती है

जेएम फाइनेंशियल ने अपनी रिपोर्ट में रेडिको खेतान के शेयरों में 16 फीसदी तक तेजी की उम्मीद जताई है। उसने कहा है कि कंपनी के लिए FY27 की शुरुआत अच्छी रही है। प्रीमियम और इससे ऊपर के सेगमेंट में कंपनी की ग्रोथ प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से ज्यादा रह सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने FY26 से FY29 के बीच कंपनी के वोदका बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा CAGR रहने की उम्मीद जताई है।

इन प्रोडक्ट्स की अच्छी बिक्री से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाइट स्पिरिट्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। साथ ही इनोवेशन और फ्लेवर-आधारित लॉन्चेज से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण बाजारों में अच्छी ग्रोथ की उम्मीद है, जिससे कुल ग्रोथ को मजबूती मिलेगी। 8पीएम प्रीमियम ब्लैक की सेल्स में रिकवरी है। आफ्टर डार्क की सेल्स अच्छी बनी हुई है। कंपनी के लग्जरी पोर्टफोलियो की डिमांड भी बढ़ी है।

कॉस्ट में इजाफा का कंपनी पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर

जेएम फाइनेंशियल को उम्मीद है कि नए पैकेजिंग में लॉन्च होने के बाद 8PM Premium Black की ग्रोथ 20-25 फीसदी रह सकती है। After Dark को तेलंगाना में एंट्री का फायदा मिलेगा। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) और पैकेजिंग पर आने वाला खर्च बढ़ा है। लेकिन, कंपनी बेहतर प्रोडक्ट मिक्स से बढ़े खर्च को संभाल सकती है।

जेएम फाइनेंशियल ने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाया

जेएम फाइनेंशियल ने इन वजहों से रेडिको खेतान के शेयरों के टारगेट प्राइस को 4,955 रुपये से बढ़ाकर 5,190 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी के लग्जरी पोर्टफोलियो वॉल्यूम ग्रोथ 25 फीसदी से ज्यादा रह सकती है। इसमें इनोवेशन और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क के विस्तार का हाथ होगा। कंपनी को रॉयल रणथम्बोर, रामपुर सिंगल माल्ट और जैसलमेर जिन का सपोर्ट मिलेगा।

यह भी पढ़ें: Whirlpool of India : स्टॉक 7% भागा, क्या प्रमोटर सच में कर रही एग्जिट? कंपनी ने शेयर बाजारों को दिया जवाब 

कमजोर बाजार में भी शेयरों का प्रदर्शन शानदार 

रेडिको खेतान का शेयर उन शेयरों में शामिल है, जिनका कमजोर बाजार में भी शानदार प्रदर्शन रहा है। यह शेयर बीते छह महीनों में 65 फीसदी चढ़ा है। इस दौरान निफ्टी में 0.71 फीसदी गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 1.83 फीसदी कमजोर हुआ है। इससे रेडिको खेतान के शेयरों के स्ट्रेंथ के बारे में पता चलता है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

UP Weather Update: यूपी में अगले कुछ घंटे आसमान से होगी आफत की बारिश! IMD का इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। मानसून की विदाई से पहले बादल एक बार फिर जमकर बरसने वाले हैं। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने 25 सितंबर 2026 को जारी पूर्वानुमान में प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। आईएमडी के मुताबिक, 25 और 27 सितंबर को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। इसके साथ ही आंधी जैसी तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। बारिश से लोगों को उमसभरी गर्मी से राहत मिलेगी।

मौसम विभाग के मुताबिक, 28 और 29 सितंबर को प्रदेश में कहीं-कहीं बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं इन दोनों दिनों के लिए मौसम विभाग ने कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

इन शहरों में होगी ज्यादा बारिश

मौसम विभाग के अनुसार, 25 सितंबर को सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं बांदा, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या, सीतापुर, बस्ती, सुल्तानपुर समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। वहीं 26 सितंबर को भी उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं लखनऊ, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, मुरादाबाद, संभल और बदायूं समेत कई जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान है।

कई जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा

यूपी के कई जगहों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। लगातार बारिश के चलते कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड का खतरा है। आजमगढ़, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, बहराइच, सीतापुर, बांदा, चित्रकूट समेत कई जिलों में मध्यम जोखिम बताया गया है। ऐसे में निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर जलभराव और कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है।

27 सितंबर को भी बारिश और तेज हवा

27 सितंबर को बारिश का असर कुछ कम हो सकता है, लेकिन कई जिलों में भारी बारिश का खतरा बना रहेगा। श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश की संभावना है। इन इलाकों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं के झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। मौसम विभाग ने लोगों को बारिश और गरज-चमक के दौरान घर में रहने, पेड़ों के नीचे न जाने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। जलभराव वाली सड़कों और नालों से भी दूर रहने को कहा गया है।

लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

मौसम विभाग ने किसानों को भी बारिश के दौरान खेतों में जलभराव से बचाने के लिए पानी की निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी है। फसल के हिसाब से अलग-अलग सावधानियां बताई गई हैं। खासकर गन्ना, अरहर, मक्का, धान, मूंगफली, तिल और सब्जियों की फसलों पर ज्यादा बारिश का असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने वाला है। 26 सितंबर को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इन दिनों कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, तेज हवाओं, बिजली गिरने और कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बताया गया है।

UP IMD Rain Alert: यूपी में 4 दिन तक होगी आफत वाली मूसलाधार बारिश! इन जिलों में 60 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

UP IMD Rain Alert: उत्तर प्रदेश में अगले चार दिनों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लखनऊ के पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 से 27 सितंबर के बीच UP के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होगी। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। इनके झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने बिजली गिरने और तेज हवाओं को लेकर भी चेतावनी जारी की है।

आज से बदलेगा मौसम, इन जिलों में भारी बारिश की आशंका

मौसम विभाग के मुताबिक, 24 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। इस दौरान कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है। तेज सतही हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। इस दौरान झोंकों में इनकी गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

24 सितंबर को प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और अंबेडकर नगर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

25 सितंबर को बढ़ेगा बारिश का असर

25 सितंबर को मौसम और एक्टिव हो सकता है। बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या समेत आसपास के इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

वहीं, प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, कानपुर, उन्नाव, लखनऊ, अंबेडकर नगर समेत कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है।

इस दौरान गरज-चमक के साथ तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग ने बताया कि हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। जबकि झोंकों में गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

26 सितंबर को भी नहीं मिलेगी राहत

  • 26 सितंबर को बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और बाराबंकी में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
  • इसके अलावा आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, कुशीनगर, महराजगंज, हरदोई, लखनऊ, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं समेत कई इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।
  • इस दिन भी गरज-चमक और बिजली के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाएं चलने की संभावना है। झोंकों में हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

27 सितंबर को पश्चिमी यूपी की ओर बढ़ेगा असर

  • 27 सितंबर को बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, संभल और बदायूं में भारी बारिश की संभावना है।
  • इस दौरान देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, बिजनौर, अमरोहा और मुरादाबाद समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

28 सितंबर से राहत के संकेत

  • मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 28 सितंबर को किसी विशेष चेतावनी का उल्लेख नहीं है। हालांकि कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी रह सकती है। यानी लगातार कई दिनों की बारिश के बाद मौसम में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।

बिजली और तेज हवाओं को लेकर भी अलर्ट

  • बारिश के साथ सबसे बड़ी चिंता आकाशीय बिजली और तेज हवाओं को लेकर है। 24 से 27 सितंबर के बीच कई जिलों में मेघगर्जन और वज्रपात के साथ 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की झोंकेदार हवाओं की संभावना जताई गई है।
  • तेज हवाओं से पेड़, कमजोर ढांचे, कच्चे मकान और झोपड़ियां प्रभावित हो सकती हैं। बिजली व्यवस्था और सड़क यातायात पर भी असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है।

बारिश से इन इलाकों में बढ़ सकता है जलभराव

  • भारी बारिश के कारण निचले इलाकों और अंडरपास में पानी भरने, स्थानीय नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश की स्थिति में कमजोर और पुरानी इमारतों को भी नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। सड़क और रेल यातायात पर भी स्थानीय स्तर पर असर पड़ने की संभावना है।
  • मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले इलाकों, उफनते नालों और नदियों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी है। भारी बारिश के दौरान वाहन चलाते समय दृश्यता कम होने और सड़क पर फिसलन को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

किसानों के लिए भी खास सलाह

  • लगातार बारिश और तेज हवाओं का असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। गन्ना, धान, मक्का, अरहर, मूंगफली, तिल, उड़द-मूंग और सब्जियों समेत कई फसलों में जलभराव और तेज हवा से नुकसान की आशंका है।
  • किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने और तेज हवाओं के दौरान सिंचाई रोकने की सलाह दी गई है। केले, पपीते और आम के नए पौधों को सहारा देने तथा लंबी फसलों को गिरने से बचाने के उपाय करने को कहा गया है।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

  • मौसम विभाग के अनुसार, आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़, जलस्रोत और बिजली का संचालन करने वाली वस्तुओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है। तेज बारिश या गरज-चमक के दौरान सुरक्षित पक्के भवन के अंदर रहना बेहतर है।
  • बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और जलभराव वाली सड़कों या पुलों को पार करते समय विशेष सावधानी बरतें।

ये भी पढ़ें- नोएडा में उद्योगों की नई लहर! 19 औद्योगिक प्लॉट पर लगी ₹238 करोड़ की बोली, हजारों नौकरियों के खुलेंगे रास्ते

Onion Prices: बंगाल में 35 रुपये किलो के भाव से 1400 मिट्रिक टन प्याज बेचा जा चुका, 24 सितंबर को अब कोलकाता पहुंच रही कांदा एक्सप्रेस

Onion Prices: त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले पश्चिम बंगाल में प्याज की सप्लाई बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने बड़ी मात्रा में प्याज कोलकाता और आसपास के जिलों तक पहुंचाने का इंतजाम किया है। इसके लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ ट्रेन, जिसमें ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ (PSF) के बफर स्टॉक से प्याज भरा है, 24 सितंबर 2026 को कोलकाता पहुंचेगी। इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में NAFED और NCCF की मोबाइल वैन के जरिए, लगभग 1,400 MT प्याज पहले ही ₹35 प्रति किलो के भाव पर बांटे जा चुके हैं। यह प्याज मुख्य रूप से सड़क के रास्ते पहुंचाया गया था। अब ‘कांदा एक्सप्रेस’ के आने से प्याज की अतिरिक्त मात्रा को ज्यादा तेजी और आसानी से अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और त्योहारों के सीजन में कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

कांदा एक्सप्रेस से आने वाले प्याज को कोलकाता और आसपास के जिलों में बांटने की योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ खुदरा कीमतों पर भी असर डालना है। कोलकाता में फिलहाल 25 से ज्यादा जगहों पर प्याज की खुदरा बिक्री की जा रही है। इनमें कोले मार्केट, मेचुआ मंडी, मानिकतला मार्केट, रामपुरिया मार्केट और श्याम बाजार मार्केट जैसे बड़े बाजार शामिल हैं।

सरकार ‘सुफल बांग्ला’ के जरिए बफर स्टॉक वाले प्याज की रिटेल बिक्री की संभावना पर भी विचार कर रही है। इससे ग्राहकों को प्याज खरीदने के लिए और जगहें मिलेंगी और इस पहल की पहुंच भी बढ़ेगी।

कोलकाता जाने वाली ‘कांदा एक्सप्रेस’, सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत हाइब्रिड रेल-और-रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का इस्तेमाल करके PSF बफर स्टॉक से प्याज़ को धीरे-धीरे बाज़ार में उतारा जा रहा है। NAFED और NCCF के जरिए बफर स्टॉक को बाजार में पहुंचाने का काम 24 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था, और बाजार की जरूरतों के हिसाब से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार सप्लाई भेजी जा रही है।

अब तक बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई देश के 100 से ज्यादा शहरों में की जा चुकी है। सरकार प्याज को बड़े स्तर पर पहुंचाने के लिए रेल और सड़क, दोनों माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है। इससे अलग-अलग राज्यों और शहरों की जरूरत के हिसाब से समय पर प्याज पहुंचाने में मदद मिल रही है।

प्याज की बढ़ी हुई सप्लाई का असर अब इसकी कीमतों पर भी दिखने लगा है। पिछले एक हफ्ते में 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज के खुदरा दाम स्थिर रहे या कम हुए हैं। इससे पता चलता है कि बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने के बाद कई जगहों पर इसकी उपलब्धता बेहतर हुई है।

पिछले एक हफ्ते में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज की कीमतों में कमी आई है, उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं।

सरकार मुख्य खपत वाले बाजारों में प्याज की उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। उपलब्धता बेहतर करने और मौसम के कारण कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए, जरूरत के हिसाब से बफर स्टॉक से प्याज जारी किया जा रहा है। आने वाले त्योहारों के मौसम समेत स्थानीय ज़रूरतों के आधार पर अलग-अलग बाजारों में और सप्लाई भेजे जाने की संभावना है।

सरकार देश के बड़े प्याज बाजारों में इसकी उपलब्धता और कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक से प्याज बाजार में भेजा जा रहा है, ताकि इसकी सप्लाई बनी रहे और त्योहारों के सीजन में कीमतों पर ज्यादा दबाव न पड़े।

आने वाले दिनों में भी स्थानीय जरूरत के हिसाब से देश के अलग-अलग बाजारों में प्याज की अतिरिक्त सप्लाई भेजी जा सकती है। खासकर आने वाले त्योहारों के दौरान प्याज की उपलब्धता बनाए रखने पर सरकार का फोकस रहेगा।

यह भी पढ़ें: दिल्ली से मानसून की विदाई! सामान्य तारीख से 2 दिन पहले हुआ रवाना, जानिए इस बार कैसी रही बारिश

Viral Video: सड़क पर अचानक लेट गया 200 किलो का Tiger, 30 Safari Jeeps को करना पड़ा इंतजार

राजस्थान के रणथंभौर में बाघ दिखना अपने आप में किसी लॉटरी लगने जैसा माना जाता है। पर्यटक घंटों जंगल की पगडंडियों पर घूमते हैं, झाड़ियों के बीच नजरें गड़ाए रहते हैं और कैमरा तैयार रखते हैं कि कब अचानक जंगल का राजा सामने आ जाए। लेकिन इस बार पर्यटकों को बाघ की तलाश नहीं करनी पड़ी। बाघ खुद ऐसी जगह आकर लेट गया कि दर्जनों सफारी गाड़ियों को वहीं रुकना पड़ा। जंगल की सड़क पर आराम फरमा रहे बाघ ने ऐसा ‘ट्रैफिक जाम’ लगाया कि करीब 30 सफारी जिप्सियां उसके उठने का इंतजार करती रहीं। खास बात ये थी कि बाघ को न गाड़ियों की कतार से कोई परेशानी थी और न पर्यटकों की मौजूदगी से।

वो सड़क पर बिल्कुल बेफिक्र होकर आराम करता रहा। दूसरी तरफ गाड़ियों में बैठे लोग इस अनोखे नजारे को कैमरों में कैद करने में जुटे रहे। यानी इस बार सफारी में पर्यटक बाघ देखने नहीं, बल्कि बाघ के उठने का इंतजार करने पहुंचे थे।

सड़क को ही बना लिया आरामगाह

रणथंभौर के जंगल में एक बाघ ने सफारी ट्रैक को अपना आराम करने का ठिकाना बना लिया। करीब 200 किलो वजन का यह जंगल का राजा सड़क के बीचों-बीच आराम से लेट गया। उसके आसपास एक-दो नहीं, बल्कि करीब 30 सफारी जिप्सियां खड़ी हो गईं। वाहनों में बैठे पर्यटक भी समझ गए कि इस वक्त हॉर्न बजाने या जल्दबाजी दिखाने का कोई मतलब नहीं। सबकी निगाहें उस बाघ पर टिक गईं और कैमरे रिकॉर्डिंग मोड में आ गए।

30 जिप्सियां खड़ी रहीं, साहब को नींद आती रही

इस अनोखे नजारे को एलेना नाम की एक पर्यटक ने कैमरे में कैद किया और बाद में इंस्टाग्राम पर शेयर किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि बाघ सड़क पर बेफिक्र होकर पड़ा है, जबकि पीछे सफारी गाड़ियों की लंबी कतार लगी है। एलेना ने इस दृश्य को मजेदार अंदाज में ‘ट्रैफिक जाम, लेकिन टाइगर वाला’ बताया। जंगल में मौजूद लोगों के लिए ये किसी आम ट्रैफिक जाम से बिल्कुल अलग अनुभव था यहां रास्ता किसी इंसान ने नहीं, बल्कि जंगल के सबसे ताकतवर जानवर ने रोक रखा था।

घर की बिल्ली जैसा किया स्ट्रेच

काफी देर आराम करने के बाद आखिरकार बाघ की नींद खुली। उसने पहले धीरे-धीरे शरीर उठाया और फिर लंबी अंगड़ाई ली। उसका यह अंदाज देखकर एलेना को अपनी पालतू बिल्ली की याद आ गई। इसके बाद बाघ बिना किसी जल्दबाजी के सड़क से उठा और जंगल की ओर बढ़ गया। उसके हटते ही सफारी वाहनों को आगे बढ़ने का रास्ता मिल गया।

चार सफारी में दिखे तीन बाघ

एलेना के मुताबिक, यह उनकी रणथंभौर यात्रा का तीसरा बाघ था। उन्होंने चार सफारी के दौरान तीन बाघ देखने की बात कही। हालांकि, बाकी दर्शन की तुलना में सड़क के बीचों-बीच आराम फरमाते इस बाघ की मुलाकात उनके लिए सबसे यादगार बन गई। उन्होंने इसे जिंदगी में एक बार होने वाला अनुभव बताया। उनका कहना था कि सफारी पर जाना हमेशा बाघ दिखने की गारंटी नहीं देता। ऐसे में जब जंगल का बाघ खुद आपके सामने आकर रास्ता रोक दे, तो वह नजारा किसी रोमांचक सरप्राइज से कम नहीं।

सोशल मीडिया पर छा गया ‘टाइगर ट्रैफिक जाम‘

एलेना द्वारा शेयर किया गया वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे 6.25 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है। लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि इतने वाहनों की मौजूदगी के बावजूद बाघ कितनी बेफिक्री से सड़क पर आराम करता रहा। किसी ने उसके व्यवहार की तुलना घर की बिल्ली से की, तो किसी ने इसे जंगल की असली जिंदगी की झलक बताया।

एक जैसे फिंगरप्रिंट और रेटिना! जुड़वां बहनों का आधार कार्ड बनाने में छूटे पसीने, जानिए रामपुर DM अजय द्विवेदी ने कैसे सुलझाया ये केस

एक जैसे फिंगरप्रिंट और रेटिना! जुड़वां बहनों का आधार कार्ड बनाने में छूटे पसीने, जानिए रामपुर DM अजय द्विवेदी ने कैसे सुलझाया ये केस

रामपुर की तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के लिए एक जैसी शक्ल-सूरत सिर्फ पारिवारिक समानता नहीं, बल्कि पहचान की बड़ी उलझन बन गई। दोनों बहनों की जिंदगी में एक ऐसा वक्त आया, जब खुद को अलग-अलग साबित करना भी आसान नहीं रहा। मामला इतना पेचीदा था कि एक जरूरी सरकारी दस्तावेज बन गया, जबकि दूसरी बहन के लिए वही प्रक्रिया बार-बार रुकती रही। परिवार ने इसे दूर करने के लिए कई कोशिशें कीं, लेकिन हर बार तकनीकी दिक्कत सामने आ गई। इस परेशानी का असर सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं था, बल्कि बच्ची से जुड़े जरूरी काम भी प्रभावित होने लगे।

आखिरकार मामला स्थानीय स्तर से निकलकर उच्च स्तर तक पहुंचा और कई हफ्तों की कोशिश के बाद रास्ता निकला। ये कहानी सिर्फ दो जुड़वां बहनों की नहीं, बल्कि उस परिवार के इंतजार, चिंता और राहत की भी है, जिसने अपनी ही बेटी की पहचान को सिस्टम के सामने साबित करने के लिए लंबी जद्दोजहद की।

एक बहन की पहचान बनी, दूसरी की फाइल अटक गई

रामपुर नगर के खारी कुआं मोहल्ले में रहने वाले जुबैर इलियास की जुड़वां बेटियां तुबा और खिजरा हैं। दोनों का पहचान पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो शुरुआत में सब सामान्य रहा। एक बच्ची का पंजीकरण हो गया। मुश्किल तब सामने आई, जब दूसरी बेटी का नामांकन कराया गया। बायोमीट्रिक प्रणाली ने उसके डेटा को पहले से दर्ज रिकॉर्ड से अत्यधिक मिलता-जुलता पाया। सिस्टम ने इसे डुप्लीकेट नामांकन की आशंका माना और आवेदन आगे बढ़ने से रोक दिया। परिवार के लिए यह महज तकनीकी दिक्कत नहीं थी। पहचान पत्र न होने से बच्ची के स्कूल प्रवेश और सरकारी योजनाओं से जुड़े जरूरी काम प्रभावित होने लगे।

जुड़वां बहनों की समानता बनी सिस्टम की चुनौती

आम तौर पर बायोमीट्रिक प्रणाली किसी व्यक्ति की अलग पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसके शारीरिक डेटा का इस्तेमाल करती है। लेकिन तुबा और खिजरा के मामले में दोनों के बीच मौजूद जैविक समानता ने यही व्यवस्था चुनौती के सामने खड़ी कर दी।

एक तरफ सिस्टम सुरक्षा के लिहाज से किसी संभावित डुप्लीकेट रिकॉर्ड को स्वीकार नहीं कर रहा था, दूसरी तरफ परिवार के सामने यह साबित करने की चुनौती थी कि दोनों बच्चियां अलग-अलग व्यक्ति हैं। यही वह मोड़ था, जहां एक तकनीकी समस्या धीरे-धीरे पूरे परिवार की चिंता बन गई।

जनता दर्शन में पहुंची फरियाद, डीएम ने बनाया रास्ता

कई स्तरों पर प्रयास के बावजूद जब समाधान नहीं निकला तो जुबैर इलियास ने रामपुर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन में अपनी समस्या जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के सामने रखी। मामले को सामान्य दस्तावेजी शिकायत मानने के बजाय प्रशासन ने इसे बायोमीट्रिक पहचान से जुड़ी तकनीकी समस्या के रूप में लिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन कराया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने यूआईडीएआई अधिकारियों से संपर्क किया और पूरे मामले का विवरण, जरूरी दस्तावेज तथा सत्यापन रिपोर्ट मुख्यालय भेजी।

जब मामला पहुंचा दिल्ली के तकनीकी विशेषज्ञों तक

चूंकि समस्या बायोमीट्रिक डी-डुप्लीकेशन प्रणाली से जुड़ी थी, इसलिए इसे यूआईडीएआई मुख्यालय, नई दिल्ली भेजा गया। वहां उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रशासन की ओर से भेजे गए सत्यापन दस्तावेजों की तकनीकी जांच की गई। सामान्य व्यवस्था में किसी नए नामांकन का बायोमीट्रिक डेटा पहले से मौजूद रिकॉर्ड से बहुत अधिक मेल खाने पर सिस्टम उसे संभावित डुप्लीकेट मानकर रोक देता है। इस मामले में भी यही हुआ था। लेकिन जिला प्रशासन के सत्यापन और विशेष अनुरोध के बाद मामले को असाधारण परिस्थिति के तौर पर लिया गया। जरूरी सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद तकनीकी स्तर पर विशेष समाधान निकाला गया।

तीन महीने बाद खत्म हुआ इंतजार

तकनीकी समाधान के बाद दूसरी बच्ची का नामांकन सफल हो सका। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब तीन महीने लगे। इस दौरान जिला प्रशासन और यूआईडीएआई अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। आखिरकार वह दिन भी आया, जब तुबा और खिजरा दोनों के अलग-अलग पहचान पत्र जारी हो गए।

दो बहनें, दो पहचान और परिवार के चेहरे पर सुकून

पहचान पत्र हाथ में आने के बाद जुबैर इलियास अपनी दोनों बेटियों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके लिए ये कार्ड सिर्फ सरकारी दस्तावेज नहीं थे, बल्कि उस लंबे इंतजार के खत्म होने का प्रमाण थे जिसमें एक छोटी-सी तकनीकी अड़चन ने परिवार को महीनों परेशान रखा। तुबा और खिजरा की कहानी यह भी बताती है कि तकनीक जहां पहचान को आसान और सुरक्षित बनाने का काम करती है, वहीं असाधारण मामलों में मानवीय हस्तक्षेप और संवेदनशील प्रशासनिक कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी हो सकती है।

50 mph से ज्यादा की रफ्तार से गोता लगा समंदर को चीरती ये चिड़िया कौन है? इस गजब क्लिक पर फोटोग्राफर को मिला बड़ा अवॉर्ड