छत पर सोलर पैनल लगते ही जीरो हुआ बिजली बिल! जानिए बिहार की उमा और रीना की पूरी स्टोरी

बिजली बिल डराने के बजाय राहत देने लगे, तो इससे बेहतर क्या होगा! बिहार में सौर ऊर्जा की बढ़ती पहुंच के बीच समस्तीपुर की उमा कुमारी और पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाए और अब बिजली बिल में बड़ी राहत का लाभ उठा रही हैं। उमा को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आर्थिक मदद मिली, तो रीना का कहना है कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनका दो हजार रुपये तक पहुंचने वाला बिजली बिल अब शून्य आ रहा है।

छत पर सोलर, घर में बचत की रोशनी

बिजली की बढ़ती जरूरतों के बीच रूफटॉप सोलर आम परिवारों के लिए बचत का एक ऑप्शन बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर परिवारों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है। वहीं, सोलर प्लांट लगवाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार सरकारी सब्सिडी भी दी जाती है।

योजना के तहत एक किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान है। नेट मीटरिंग की सुविधा से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने का विकल्प भी मिल सकता है।

समस्तीपुर की उमा ने लगवाया तीन किलोवाट का सोलर प्लांट

समस्तीपुर के आजाद नगर, मोहनपुर रोड की रहने वाली उमा कुमारी ने अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया है। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में बिजली विभाग से सहयोग मिला और प्लांट भी जल्द स्थापित हो गया। सबसे खास बात यह रही कि उन्हें सोलर प्लांट लगने के करीब 15 दिन बाद ही सब्सिडी की राशि मिल गई।

उमा कुमारी बताती हैं कि सोलर पैनल लगवाने के बाद उन्हें काफी संतुष्टि मिली। सब्सिडी की रकम समय पर खाते में आने से उनका भरोसा भी बढ़ा। उनके लिए यह सिर्फ छत पर सोलर पैनल लगवाने का फैसला नहीं था, बल्कि बिजली खर्च को कम करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम था।

बिहार सरकार ने दिया अलग से सब्सिडी

उमा की मानें तो पहले उन्हें बिजली बिल में 240 रुपये का फिक्स चार्ज देना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा के बाद उनका बिजली बिल शून्य आने लगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री बिजली योजना के तहत 20 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने की जानकारी मिली और यह राशि भी उन्हें प्राप्त हो गई।

उमा कहती हैं कि सोलर प्लांट पर सब्सिडी मिलने और बिजली बिल शून्य होने से उन्हें काफी खुशी हुई। उनके अनुभव में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से घर के बिजली खर्च को लेकर बड़ी राहत मिली है।

पूर्णिया की रीना का भी बिजली बिल शून्य

पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी भी घरेलू बिजली खर्च में राहत की मिसाल है। सोलर पैनल लगवाने से पहले रीना के घर का बिजली बिल हर महीने करीब 1,500 से 2,000 रुपये तक आता था। अब उनके मुताबिक, बिजली बिल शून्य आ रहा है।

रीना बताती हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में सभी बिजली उपकरण चल रहे हैं। उन्हें सोलर प्लांट पर कुल 98 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है। उनके लिए यह बदलाव आर्थिक बचत के साथ-साथ बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हुआ है। साथ ही रूफटॉप गार्डन को भी छाया मिल गया।

क्या आपके घर की छत भी बन सकती है बचत का जरिया?

उमा और रीना के अनुभव बताते हैं कि रूफटॉप सोलर सही क्षमता और योजना के तहत लगाया जाए, तो घरेलू बिजली खर्च कम करने में मदद कर सकता है। सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे परिवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक योजना पोर्टल पर पात्रता, सब्सिडी, पंजीकृत विक्रेता और इंस्टॉलेशन से जुड़ी शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए। इस तरह आपके घर की छत भी खर्च बचाने का जरिया बन सकता है।

बिहार से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

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कितने भक्तों के भरोसे 2029 की जीत?

सवाल है भाजपा के पास ऐसे कितने करोड़ वोट हैं जो कुछ भी हो जाए, मोदी के नाम पर ही वोट देंगे? महंगाई बढ़े, बेरोजगारी बढ़े, रुपया गिरे, नौजवान सड़कों पर उतरें, मुसलमान नाराज हों, दलित और आदिवासी बिदकें, तब भी जिनका वोट नहीं बदलेगा। क्या ऐसे मतदाता बीस करोड़ हैं? पच्चीस करोड़ हैं? या तीस करोड़? पिछले तीन चुनावों का हिसाब देखें। 2014 में भाजपा को 31.34 प्रतिशत वोट मिले थे। 2019 में यह बढ़कर 37.7 प्रतिशत हुआ। फिर 2024 में घटकर 36.56 प्रतिशत रह गया। एनडीए को इन तीन चुनावों में क्रमशः लगभग 38.5, 45.4 और 43.8 प्रतिशत वोट मिले। मतलब 2019 के मुकाबले 2024 में भाजपा और एनडीए, दोनों का वोट प्रतिशत घटा। भाजपा की सीटें 303 से घटकर 240 हो गईं। बावजूद इस ट्रेंड के अमित शाह को 2029 में जीत का पक्का भरोसा है!

सवाल है क्या उन्हें लगता है कि भाजपा के 2024 के लगभग 23.6 करोड़ मतदाता अब स्थायी मोदी भक्त बन चुके हैं? या एनडीए के लगभग 28.3 करोड़ वोटों में कोई कमी संभव नहीं? लेकिन इन संख्याओं में तो सब तरह के मतदाता हैं। हिंदुत्व के पक्के समर्थक हैं तो सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी। जाति के हिसाब से वोट देने वाले हैं तो स्थानीय उम्मीदवार के कारण भाजपा को चुनने वाले भी। कुछ मोदी के नाम पर वोट देते हैं तो कुछ विपक्ष को पसंद नहीं करने के कारण। इनमें से कितने ऐसे हैं जो हर परिस्थिति में भाजपा को ही वोट देंगे?

ऐसी ही एक दूसरी गणित भी है। 2014 में भाजपा ने महज 31.34 प्रतिशत वोटों से लोकसभा में अपने दम पर बहुमत बनाया था। यानी सौ वोट डालने वालों में लगभग 69 ने भाजपा को वोट नहीं दिया, फिर भी उसे पूर्ण बहुमत मिला। 2019 में 37.7 प्रतिशत वोटों से 303 सीटें मिलीं। और 2024 में 36.56 प्रतिशत वोटों पर 240 सीटें। अंतर सिर्फ वोट प्रतिशत का नहीं था। वोट कहां पड़े, किस सीट पर विपक्ष बंटा, कहां उम्मीदवार मजबूत था, कहां गठबंधन बना, इन बातों से सीटों का गणित बदला और हमेशा बदलता है।

यहीं 2029 में मोदी-शाह की जीत का असली सूत्र याकि रहस्य है। भाजपा को देश के पचास प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिलना जरूरी नहीं। उसे उन निर्वाचन क्षेत्रों में पर्याप्त वोट चाहिए जहां से लोकसभा की बहुमत वाली संख्या बनती है। इसलिए संभव है कि देश में असंतोष बढ़े, कई सामाजिक समूहों में नाराजगी हो, नौजवान आंदोलन करें, फिर भी पार्टी विशेष का चुनावी आधार बना रहे। हालांकि इसमें यह भी खतरा है कि राष्ट्रीय वोट प्रतिशत में मामूली गिरावट से दर्जनों सीटें हाथ से निकल जाएं। जैसे 2024 में भाजपा का अनुभव था।

फिलहाल जेनरेशन ज़ेड का भौकाल मुखर है। नौजवानों में आज कितने मोदी समर्थक हैं और कितने विरोधी? मुसलमानों, दलितों और आदिवासियों में कितने भाजपा को वोट देते हैं? पर इन्हें एक साथ जोड़कर कोई मोदी विरोधी आबादी नहीं बनाई जा सकती। जेनरेशन ज़ेड में भी मोदी समर्थक हैं। दलितों और आदिवासियों में भी भाजपा को वोट मिले हैं। लेकिन यह भी सच है कि एक ही मतदाता युवा भी हो सकता है, दलित भी और किसी आंदोलन का समर्थक भी। इसलिए इन समूहों की आबादी जोड़कर भाजपा विरोधी वोटों की संख्या निकालना संभव ही नहीं।

तो अमित शाह ने कैसे हिसाब लगाया हुआ होगा? मेरा मानना है कि वे भाजपा के प्रतिबद्ध वोटों पर निर्भर नहीं रहते। वह बूथवार वोट हिसाब के पारखी हैं। समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने से लेकर उम्मीदवार, गठबंधन और स्थानीय सामाजिक समीकरणों का हिसाब रखते हैं। अब इस सबके साथ मतदाता सूचियों के एसआईआर, परिसीमन और महिला आरक्षण की संभावनाएं भी हैं। इसलिए राहुल गांधी, कांग्रेस और विपक्ष के लिए जीवन-मरण का स्वाभाविक सवाल है कि 2029 का चुनाव आखिर किन मतदाता सूचियों, किन निर्वाचन क्षेत्रों और किन नियमों के अंतर्गत होगा?

कैसे? आखिर जब चुनावी जीत का अंतर कई जगह कुछ हजार वोटों का हो, तब मतदाताओं के नाम कटने या जुड़ने से ही चुनावी मुकाबला तय होता है। पश्चिम बंगाल उदाहरण है। दो-चार, दस लाख नहीं, लाखों (39 लाख) वैध दस्तावेजी सबूतों के बावजूद वोट डालने के अधिकार से वंचित किया गया। ऐसा चुनाव आयोग, ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट सभी के बावजूद हुआ।

तो नरेंद्र मोदी-अमित शाह के 2029 में चुनाव जीतने के अडिग विश्वास का कारण सत्ता का ऐसा दुरुपयोग और अहंकार क्या नहीं है? यदि 2024 के 23.6 करोड़ भाजपा वोटों को भक्तों की स्थायी संख्या भी मान लें तब भी इनके बूते जीत संभव नहीं है जब तक वोट सूची ईमानदार न हो। 2029 में कितने करोड़ नए या पुराने वोटर मतदान करने के पात्र रहेंगे? कितने कटेंगे, और कितने बंगाल की तरह लटकाए रखे जाएंगे, उससे अधिक तय होगा?

सो, भाजपा को 2029 में कितने करोड़ लोग पसंद करते हैं, से अधिक महत्त्वपूर्ण होगा कि उसने सीटवार अपने वोट कितने करवाए हुए हैं? और यह काम ज्ञानेश कुमार की कमान के चुनाव आयोग के जरिए चुटकियों में संभव बना रहेगा।

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंत्रिमंडल और राज्यसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा, जानिए कौन हैं ये, क्यों उठाया ऐसा कदम?

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहते हैं।  वहीं ऐसी खबरें है कि, दिवाली से पहले केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कभी भी फेरबदल हो सकता है। सरकारी सूत्रों ने CNN-NEWS18 को बताया कि, इस दौरान कम से कम छह मंत्री पद खाली होने की संभावना है। वहीं मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नियम के चलते उनके मंत्रिपद छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पिछले ढाई साल से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के बीच में होने वाला बड़ा बदलाव होगा।

एल. मुरुगन ने दिया इस्तीफा

केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहते हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद छोड़ चुके हैं। इन इस्तीफों के बाद केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें और तेज हो गई हैं। हाल ही में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा को राज्यसभा के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया, क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। वहीं, केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है।

एल. मुरुगन ने किया पोस्ट 

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और तमिलनाडु की सेवा करना मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे से लेकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जिम्मेदारी निभाने तक का सफर मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। अब मैं दोबारा जमीनी स्तर पर लौटकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहता हूं। मेरा लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में बीजेपी को और मजबूत बनाना है। मेरे लिए सबसे पहले देश, फिर पार्टी और आखिर में मैं खुद हूं।” तमिलनाडु के रहने वाले मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था।

 

केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई बैठकें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने और कामकाज को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। इससे पहले भी मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उस समय सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया था। उन्होंने बताया था कि सरकार की प्राथमिकता संसद के बजट सत्र से जुड़े कामों पर थी।

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LPG Price 11 October 2026: दिल्ली से पटना तक LPG के ताजा भाव जारी, चेक करें नई कीमतें

LPG Price 11 October 2026: रसोई गैस सिलेंडर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बुकिंग से पहले अपने शहर के नए रेट जरूर जान लें। अक्टूबर महीने में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल राहत बरकरार है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर महंगा हो गया है। 1 अक्टूबर 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों के खर्च पर पड़ सकता है।

वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है। आइए जानते हैं दिल्ली, मुंबई, पटना समेत प्रमुख शहरों में आज घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर कितने रुपये में मिल रहा है।

घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के आज के भाव

शहर के अनुसार LPG सिलेंडर की कीमत अलग-अलग हो सकती है। नीचे दी गई तालिका में प्रमुख शहरों के घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम एक साथ दिए गए हैं।

शहरघरेलू सिलेंडर (14.2 किलो)कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो)
दिल्ली₹942.00₹2,810.00
नोएडा₹939.50₹2,747.50
गुरुग्राम₹951.00₹2,828.00
मुंबई₹912.50₹2,764.00
कोलकाता₹945.00₹2,954.00
चेन्नई₹950.00₹2,983.00
पटना₹1,000.00₹3,100.50
रांची₹1,010.50₹2,988.00
जयपुर₹945.50₹2,839.00

नोट: ये कीमतें उपलब्ध दरों पर आधारित हैं। बुकिंग से पहले संबंधित तेल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या गैस वितरक से अपने शहर का ताजा रेट जरूर जांच लें।

अक्टूबर में कमर्शियल सिलेंडर क्यों हुआ महंगा?

तेल कंपनियों ने 1 अक्टूबर 2026 को 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 62.50 रुपये की बढ़ोतरी की थी। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है, जहां खाना बनाने के लिए कमर्शियल सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी ओर, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में इस दौरान कोई नया बदलाव नहीं किया गया। इससे घरों में खाना बनाने के खर्च पर तत्काल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा।

अलग-अलग शहरों में LPG के दाम क्यों बदलते हैं?

गैस सिलेंडर की खुदरा कीमत तय होने में कई कारक अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमत, आयात लागत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन खर्च और स्थानीय कर शामिल हैं। इसी वजह से दिल्ली, मुंबई, पटना और रांची जैसे शहरों में सिलेंडर की कीमत एक जैसी नहीं होती।

भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर गैस की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमतों में बदलाव संबंधित फैसलों पर निर्भर करता है।

LPG सब्सिडी का लाभ किन उपभोक्ताओं को मिलता है?

सरकारी योजनाओं के तहत पात्र उपभोक्ताओं को घरेलू LPG सिलेंडर पर सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। सब्सिडी की पात्रता और मिलने वाली राशि योजना के नियमों के अनुसार तय होती है। इसलिए सभी उपभोक्ताओं का वास्तविक खर्च एक जैसा होना जरूरी नहीं है।

सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को अपनी पात्रता और बैंक खाते में सब्सिडी की स्थिति की जांच करनी चाहिए। बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन से संबंधित किसी भी अनिवार्य प्रक्रिया के लिए भी अपनी गैस कंपनी या आधिकारिक सरकारी सूचना से पुष्टि करना बेहतर है।

सिलेंडर बुक करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

गैस बुक करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप घरेलू या कमर्शियल में से सही श्रेणी का सिलेंडर बुक कर रहे हैं। इसके अलावा, अपने शहर का लागू रेट, सब्सिडी की पात्रता और गैस वितरक की ओर से बताई गई अंतिम राशि भी जांच लें। इससे बिल को लेकर भ्रम नहीं रहेगा और आप अपने मासिक बजट की बेहतर योजना बना सकेंगे।

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यूपी का शख्स मुंबई में नाई का काम करके हर महीने कमाता है करीब 1 लाख रुपये, हफ्ते में 6 दिन करता है मेहनत

भारत में सरकारी नौकरी को अक्सर सुरक्षित भविष्य और अच्छी जिंदगी की गारंटी माना जाता है। लेकिन मुंबई में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी एक नाई की कहानी इस सोच से अलग नजर आती है। दावा है कि वह महीने में करीब 1 लाख रुपये कमाता है। दिलचस्प बात यह है कि इतनी कमाई के बावजूद वह एंट्री-लेवल सरकारी नौकरी मिलने पर भी अपना मौजूदा काम छोड़ना नहीं चाहता।

लेखक और फंड मैनेजर हर्ष गुप्ता मधुसूदन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस नाई के साथ हुई बातचीत साझा की। उनकी पोस्ट के मुताबिक, नाई हफ्ते में छह दिन सुबह से रात तक काम करता है। यात्रा के बुनियादी खर्च निकालने के बाद उसकी मासिक कमाई करीब एक लाख रुपये बताई गई है।

मेहनत और आजादी को मानता है अपनी सबसे बड़ी पूंजी

हर्ष के मुताबिक, बातचीत के दौरान नाई ने कहा कि काम करने और मेहनत करने वालों के लिए अवसरों की कमी नहीं है। वह अपने काम को पसंद करता है और इसमें मिलने वाली आजादी उसके लिए अहम है। यही वजह है कि वह सरकारी नौकरी के बजाय अपना मौजूदा काम जारी रखना चाहता है।

उसकी कहानी ने रोजगार को लेकर एक दिलचस्प सवाल खड़ा किया है क्या अच्छी कमाई और संतुष्टि के लिए सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता है? हालांकि, एक व्यक्ति का अनुभव पूरे रोजगार बाजार की तस्वीर नहीं बताता।

आजमगढ़ से लखनऊ तक का सफर हुआ आसान, विकास से खुश है परिवार

बातचीत में उत्तर प्रदेश के विकास का जिक्र भी आया। हर्ष के अनुसार, नाई ने बताया कि पहले उसके गांव से लखनऊ पहुंचने में 7-8 घंटे लगते थे। अब बेहतर सड़कों के कारण उतने ही समय में आना-जाना संभव हो गया है, वह भी रास्ते में चाय और खाने के लिए रुकने के बाद।

नाई ने देश में हुए विकास कार्यों पर खुशी जताई। उसने बताया कि गांव में उसके परिवार को कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है, हालांकि शहर में ऐसा लाभ नहीं मिला।

टैक्स भरने पर गर्व, बेटे की पढ़ाई पर भी ध्यान

इस कहानी का एक और पहलू उसकी पारिवारिक जिंदगी है। हर्ष के मुताबिक, नाई की कमाई से टैक्स कटता है और वह गर्व के साथ इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल करता है। कई बार उसे रिफंड भी मिलता है।

उसका एक छोटा बेटा है, जिसे वह निजी प्री-स्कूल में पढ़ाता है। उसकी पत्नी भी कमाई में योगदान देती थी, लेकिन फिलहाल बच्चे की देखभाल के लिए काम से ब्रेक पर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, क्या हर किसी के लिए ऐसे अवसर हैं?

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने नाई की मेहनत और आत्मनिर्भरता की तारीफ की। वहीं, कुछ ने सवाल उठाया कि क्या एक नाई के लिए हर महीने एक लाख रुपये कमाना आम बात है। कुछ लोगों ने इस कमाई के दावे की तुलना दूसरे शहरों में नाइयों की आमदनी से भी की।

दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने कहा कि एक व्यक्ति की सफलता को देश में रोजगार की पूरी स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने शिक्षित युवाओं के रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए।

हर्ष ने अपनी पोस्ट के अंत में व्यंग्य करते हुए लिखा कि उनका मन नाई से कहने का हुआ कि वह भारत और अपनी जिंदगी को लेकर इतनी सकारात्मक सोच छोड़कर सोशल मीडिया पर देश की नाकामियों के बारे में पढ़े, लेकिन वह ऐसा कह नहीं सके।

इस कहानी का असली पहलू यही है कि जहां कुछ लोग सरकारी नौकरी को सफलता मानते हैं, वहीं कुछ के लिए अपने काम में कमाई, संतुष्टि और आजादी ज्यादा मायने रखती है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव : धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

श्री धामी कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी तथा सरकार और जनता के बीच सेतु हैं। वे स्थानीय समस्याओं को बेहतर समझते हैं और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से काम करने और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा लाभ पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में सशक्त किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर से प्रारंभ जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, जनसुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करे, ताकि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिले।

उन्होंने कहा कि हर पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। ग्राम सभाओं में लोगों के सुझाव लिए जाएं और कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा हो। पंचायत प्रतिनिधि यह भी देखें कि योजनाओं का लाभ वास्तव में किन परिवारों तक पहुंच रहा है। कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत की गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत का उद्देश्य कामकाज को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। विकास कार्यों की संख्या से अधिक उनका प्रभाव मायने रखता है। सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

श्री धामी ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों तथा स्थानीय बाजारों की सफाई को कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी इस कार्य के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और गांवों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग कर पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित उत्तराखण्ड का संकल्प साकार होगा। पंचायतराज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास की तमाम योजनाएं पंचायतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचती हैं। पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से गांवों में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, बहादराबाद ब्लॉक प्रमुख आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, विभिन्न ग्राम पंचायत से आये हुए ग्राम प्रधान एवं जनप्रतिनिधि सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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तमिलनाडु में दुल्हनों पर बरसेगी सौगात, सोने का सिक्का और सिल्क साड़ी देगी सरकार! जानें क्या है अन्नन सीर योजना

तमिलनाडु, 6 अक्टूबर 2026: तमिलनाडु सरकार ने नई दुल्हनों के लिए ‘अन्नन सीर’ योजना लागू करने को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने 812 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। योजना के तहत पात्र दुल्हनों को 8 ग्राम सोने का सिक्का और एक सिल्क साड़ी दी जाएगी।

योजना में परिवार की सालाना आय सीमा में भी बदलाव किया गया है। पहले 5 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों को इसका लाभ देने की बात कही गई थी। अब इस सीमा को घटाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है।

जानें क्या है अन्नन सीर योजना?

  • अन्नन सीर योजना तमिलनाडु सरकार की एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सहायता करना है।
  • योजना के तहत पात्र दुल्हनों को 8 ग्राम का 22 कैरेट सोने का सिक्का दिया जाएगा।
  • इसके अलावा लाभार्थी दुल्हनों को एक सिल्क साड़ी भी दी जाएगी।
  • योजना का नाम तमिल परंपरा में बड़े भाई द्वारा बहन की शादी में दिए जाने वाले उपहार ‘सीर’ की परंपरा से जुड़ा है।

आय सीमा में भी अब हुआ बदलाव

पहले इस योजना के लिए ₹5 लाख तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों को पात्र बनाने का वादा किया गया था। हालांकि, अब सरकार ने पात्रता के लिए आय सीमा को घटाकर ₹2.5 लाख प्रति वर्ष कर दिया है।

इस बदलाव के बाद ₹2.5 लाख से अधिक और ₹5 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे।

दूसरी कल्याणकारी योजनाओं से समानता

गौरतलब है कि अन्नन सीर योजना तमिलनाडु में हाल ही में शुरू की गई नवजात शिशुओं के लिए कल्याणकारी योजना ‘थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ से काफी मिलती-जुलती है। यह योजना मुख्यमंत्री विजय द्वारा शुरू की गई थी।

इस योजना के जरिए तमिलनाडु सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है। 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी जैसी सहायता से शादी के खर्च का बोझ कम करने का लक्ष्य है। हालांकि, ₹5 लाख से घटाकर ₹2.5 लाख की गई आय सीमा के कारण अब यह योजना पहले के मुकाबले कम परिवारों तक पहुंच पाएगी।

बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पीड़ित परिवारों से जमीन पर बैठकर की बात

बालाघाट में बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पीड़ित परिवारों से जमीन पर बैठकर की बात

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को बालाघाट में हुई बच्चों की मौत के मामले में पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। राहुल गांधी ने परिवारजनों के साथ जमीन पर बैठकर बातचीत की और स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, मुआवजा, मनरेगा तथा वन अधिकार कानून से जुड़े मुद्दों के साथ जमीनी स्थिति की जानकारी ली। 

 

परिवारों से बातचीत के बाद मीडिया से चर्चा में राहुल गांधी ने कहा कि क्षेत्र में बीमारी और कुपोषण के कारण कई बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में सरकार की ओर से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं का पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है।

मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा बहुत बच्चे मरे हैं। मुआवजा तक नहीं मिला है। आधे लोगों को मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने सरकार से वन अधिकार कानून के तहत पात्र लोगों को जमीन के पट्टे देने और मनरेगा को प्रभावी ढंग से संचालित करने की मांग की।

 

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की जमीन, वन अधिकार और पट्टे से जुड़े मामले हैं तथा अस्पताल और स्कूल जैसी सुविधाओं की जरूरत है। राहुल गांधी ने सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो योजनाओं के तहत पात्रता है तो उसे दोनों योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए।

 

राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए प्रदेश में पूरा गर्वेमेंट फैलियर होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष और कांग्रेस पार्टी की ओर से वे इन मुद्दों को उठाएंगे।

 

राहुल गांधी ने कहा वह लोकसभा में पूरा मुद्दा उठाएंगे। उन्होंने काह कि  सिर्फ इनका ही नहीं, सारे के सारे आदिवासियों के साथ जो किया जा रहा है, मैं इसका मुद्दा उठाऊंगा।

 

राहुल गांधी ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि कांग्रेस आदिवासी समुदाय को वनवासी नहीं बल्कि आदिवासी कहती है और उनके अनुसार उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा जमीन पर अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इन परिवारों की मदद की जाएगी।

 

 

SBI Safe Schemes: बिना कोई रिस्क के बैंक FD से ज्यादा रिटर्न! बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 बेस्ट स्कीम्स

SBI Safe Savings Schemes: देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), अपने ग्राहकों को एफडी के अलावा ऐसी कई स्मॉल सेविंग्स और सरकारी बचत योजनाएं पेश करता है, जहां आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी सामान्य बैंक एफडी की तुलना में ज्यादा मिलता है।

अगर आप शेयर बाजार के जोखिम से दूर रहकर गारंटीड और टैक्स-फ्री या टैक्स-एफिशिएंट रिटर्न कमाना चाहते हैं, तो एसबीआई के जरिए मिलने वाली ये 3 सरकारी योजनाएं बेहतरीन विकल्प हैं। आइए जानते हैं इन 3 सबसे सेफ स्कीम्स की ब्याज दरों, शर्तों और मिलने वाले फायदों के बारे में।

1. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SBI SCSS): वरिष्ठ नागरिकों के लिए सबसे बड़ा सहारा

अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे अधिक है, तो साधारण एफडी कराने के बजाय एसबीआई के जरिए सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम(SCSS) में निवेश करना एक बेहतरीन विकल्प है।

एफडी से ज्यादा ब्याज: जहां एसबीआई सामान्य 5-वर्षीय एफडी पर वरिष्ठ नागरिकों को करीब 7.05% ब्याज दर देता है, वहीं SCSS में 8.20% की गारंटीड ब्याज दर मिलती है।

तिमाही आय: इसमें जमा राशि पर हर 3 महीने (अप्रैल, जुलाई, अक्टूबर और जनवरी) में ब्याज का भुगतान सीधे आपके एसबीआई बचत खाते में कर दिया जाता है।

अधिकतम निवेश: इस योजना में अधिकतम ₹30 लाख तक जमा किए जा सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत इसमें किए गए निवेश पर ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट भी मिलती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना (SBI SSY): बेटियों के भविष्य के लिए 100% टैक्स-फ्री रिटर्न

अगर आपके घर में 10 वर्ष से कम उम्र की बेटी है, तो एसबीआई शाखा या YONO ऐप के जरिए खोला गया सुकन्या समृद्धि अकाउंट बैंक एफडी के मुकाबले कहीं बेहतर रिटर्न देता है।

धमाकेदार रिटर्न: वर्तमान में इस योजना पर सरकार 8.20% सालाना की दर से चक्रवृद्धि ब्याज दे रही है।

EEE टैक्स स्टेटस: यह योजना Exempt-Exempt-Exempt (EEE) श्रेणी में आती है। इसका मतलब है कि इसमें जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम 100% टैक्स-फ्री होती है।

निवेश की सीमा: एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम ₹250 से लेकर अधिकतम ₹1.5 लाख तक जमा किए जा सकते हैं।

3. पब्लिक प्रोविडेंट फंड (SBI PPF): बिना किसी रिस्क के लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन

लॉन्ग-टर्म फाइनेंशियल गोल्स या रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड(PPF) देश की सबसे पसंदीदा और सुरक्षित योजनाओं में से एक है।

सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न: इसमें मिलने वाला 7.10% सालाना ब्याज (जो कि सालाना आधार पर कंपाउंड होता है) सामान्य 5 से 10 साल की बैंक एफडी (6.05% – 6.45%) से काफी बेहतर है।

टैक्स फ्री मैच्योरिटी: सुकन्या योजना की तरह PPF भी पूरी तरह से EEE कैटेगरी में आता है, यानी इस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट पूरी तरह से इनकम टैक्स से मुक्त होता है।

फ्लेक्सिबिलिटी: इसे 15 साल की लॉक-इन अवधि के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में जितनी बार चाहें आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें न्यूनतम ₹500 से निवेश शुरू किया जा सकता है।

बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 सबसे सेफ स्कीम्स

बच्चे, बूढ़े और जवान तीनों के लिए ये है SBI की 3 सबसे सेफ स्कीम्स

एसबीआई में कैसे करें इन स्कीम्स में अप्लाई?

इन तीनों ही योजनाओं में निवेश करना बेहद आसान है:

ऑनलाइन माध्यम: अगर आप SBI के इंटरनेट बैंकिंग या YONO SBI ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो बिना ब्रांच गए ‘E-Services / Govt Schemes’ सेक्शन में जाकर PPF या सुकन्या खाता खोल सकते हैं।

ऑफलाइन माध्यम: आप अपनी नजदीकी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शाखा में आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो और आवश्यक न्यूनतम राशि के साथ जाकर तुरंत खाता खुलवा सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इन 5 सरकारी योजनाओं में करें निवेश, पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज भी मिलेगा; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Small Savings Schemes: पैसा निवेश करने के लिए हर किसी को शेयर बाजार का जोखिम पसंद नहीं होता। खासकर जब बात बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या भविष्य के लिए जमा की गई रकम की हो।

ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की कई स्मॉल सेविंग स्कीमें हैं। इनमें पैसा तय नियमों के तहत लगाया जाता है और ब्याज दर सरकार तय करती है। PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी योजनाएं इसी कैटेगरी में आती हैं।

1. PPF

PPF यानी Public Provident Fund लंबे समय के निवेश के लिए है। इसका मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं तो साल में ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख होगी।

मौजूदा 7.1% ब्याज दर को मानें तो 15 साल बाद यह रकम मोटे तौर पर ₹16 लाख के आसपास हो सकती है। यानी करीब ₹7 लाख ब्याज से जुड़ सकते हैं। असल रकम जमा करने की तारीख और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना

अगर बेटी के भविष्य के लिए पैसा जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना एक विकल्प है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। इसमें हर महीने ₹3,000 जमा करने पर सालाना ₹36,000 निवेश होगा। 15 साल में कुल जमा रकम ₹5.40 लाख होगी।

अगर मौजूदा ब्याज दर के आसपास रिटर्न बना रहता है, तो 21 साल की मैच्योरिटी अवधि में यह रकम करीब ₹17 लाख तक पहुंच सकती है। यहां ध्यान रखें कि सुकन्या की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए इसे एक अनुमान के तौर पर देखें।

3. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए SCSS यानी Senior Citizens Savings Scheme है। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहने वालों के लिए यह विकल्प देखा जा सकता है।

मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। ऐसे में अगर कोई ₹10 लाख जमा करता है तो सालाना ब्याज करीब ₹82,000 बैठेगा। ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, यानी करीब ₹20,500 हर तिमाही। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹4.10 लाख बनता है, अगर पूरी अवधि में यही दर बनी रहे।

4. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट

NSC यानी National Savings Certificate उन लोगों के लिए है जो एक तय अवधि के लिए पैसा लगाकर ब्याज कमाना चाहते हैं। मौजूदा ब्याज दर 7.7% है और इसकी अवधि 5 साल है।

अगर आप ₹5 लाख NSC में लगाते हैं तो 5 साल बाद रकम करीब ₹7.23 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹2.23 लाख ब्याज से जुड़ेंगे। NSC का ब्याज सालाना कंपाउंड होता है।

5. किसान विकास पत्र

KVP यानी Kisan Vikas Patra में निवेश रकम तय अवधि में दोगुनी होती है। मौजूदा ब्याज दर 7.5% है और इस दर पर रकम 115 महीने यानी करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी होती है।

इस हिसाब से अगर आप ₹3 लाख KVP में लगाते हैं तो मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹6 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹3 लाख का ब्याज मिलेगा। KVP में मैच्योरिटी अवधि उस समय लागू दर के आधार पर तय होती है।

किसके लिए कौन सी स्कीम?

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो PPF पर विचार किया जा सकता है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देख सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहिए तो SCSS पर नजर डाल सकते हैं।

वहीं तय अवधि के लिए रकम लगानी है तो NSC या KVP जैसे विकल्प आजमाए जा सकते हैं। इन योजनाओं में बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर सीधे आपके निवेश पर नहीं पड़ता।

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नोट: इन सभी छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा दरें जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।