Jailer 2 Box Office Day 5: रजनीकांत की फिल्म ने सोमवार की कमाई का रिकॉर्ड बनाया, 500 करोड़ी बनने के करीब ‘जेलर’

Jailer 2 Box Office Day 5: साउथ सुपरस्टार रजनीकांत का जलवा बॉक्स ऑफिस पर बरकरार है। उनकी फिल्म ‘जेलर 2’ ने सोमवार के दिन भी कमाई का धाकड़ रिकॉर्ड अपने नाम किया। रजनीकांत की लेटेस्ट फिल्म बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा चल रही है। इसकी रफ्तार अब भी धीमी नहीं हुई है। बड़े ओपनिंग वीकेंड के बाद भी, जेलर 2 ने सोमवार को भी दर्शकों को खींचना जारी रखा। नेल्सन दिलीपकुमार के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने सोमवार को भारत में करीब 49.50 करोड़ रुपये की कमाई की।

ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क के मुताबिक, इससे सिर्फ पांच दिनों में इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 477.75 करोड़ रुपये हो गया। आसान शब्दों में कहें तो, जेलर 2 अब दुनिया भर में 500 करोड़ रुपये के आंकड़े से सिर्फ 22 करोड़ रुपये दूर है। इस फिल्म ने किसी तमिल फिल्म द्वारा पहले सोमवार को सबसे बड़े कलेक्शन का नया रिकॉर्ड भी बनाया है। फिल्म ने सोमवार को भारत में 49.50 करोड़ रुपये की कमाई की, जिसने विजय की लियो को पीछे छोड़ दिया, जिसने 2023 में अपने पहले सोमवार को 39.50 करोड़ रुपये कमाए थे।

रजनीकांत की पिछली फिल्म, जेलर, 27.30 करोड़ रुपये के साथ लिस्ट में तीसरे नंबर पर है। विजय की बिगिल 22.80 करोड़ रुपये के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि मणिरत्नम की पोन्नियिन सेलवन: पार्ट 1 22.35 करोड़ रुपये के साथ पांचवें नंबर पर है।

फिल्म का ओपनिंग डे सबसे बड़ा दिन था, जब इसने भारत में 16,599 शो में 59.70 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। दूसरे दिन कलेक्शन घटकर 37.10 करोड़ रुपये रह गया, लेकिन वीकेंड में इसमें तेजी आई। सिर्फ पांच दिनों में, जेलर 2 इस साल की दो और बड़ी भारतीय रिलीज, बॉर्डर 2 और हनुमान अंश से भी आगे निकल गई है। यह फिल्म अब तक की सबसे बड़ी तमिल फिल्मों की लिस्ट में भी ऊपर चढ़ रही है।

इसके अगले टारगेट में पोन्नियिन सेलवन : पार्ट 1 है, जिसने दुनिया भर में 488 करोड़ रुपये कमाए, और कुली, जिसने 518 करोड़ रुपये कमाए। उसके बाद, यह लियो को 605 करोड़ रुपये और जेलर को 609 करोड़ रुपये का टारगेट दे सकती है। जेलर 2 में, रजनीकांत टाइगर मुथुवेल पांडियन का रोल कर रहे हैं, जो एक मूर्ति-स्मगलिंग रैकेट की जांच करते हैं। कास्ट में विद्या बालन, एसजे सूर्या, राम्या कृष्णन, मिथुन चक्रवर्ती और सूरज वेंजरामूडू भी हैं। मोहनलाल, शिवा राजकुमार और ऋतिक रोशन गेस्ट रोल में हैं।

नेल्सन दिलीपकुमार ने फिल्म लिखी और डायरेक्ट की है। आर निर्मल एडिटिंग के इंचार्ज हैं, अनिरुद्ध रविचंदर ने म्यूजिक दिया है, और विजय कार्तिक कन्नन सिनेमैटोग्राफर हैं।

छत पर सोलर पैनल लगते ही जीरो हुआ बिजली बिल! जानिए बिहार की उमा और रीना की पूरी स्टोरी

छत पर सोलर पैनल लगते ही जीरो हुआ बिजली बिल! जानिए बिहार की उमा और रीना की पूरी स्टोरी

बिजली बिल डराने के बजाय राहत देने लगे, तो इससे बेहतर क्या होगा! बिहार में सौर ऊर्जा की बढ़ती पहुंच के बीच समस्तीपुर की उमा कुमारी और पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाए और अब बिजली बिल में बड़ी राहत का लाभ उठा रही हैं। उमा को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आर्थिक मदद मिली, तो रीना का कहना है कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनका दो हजार रुपये तक पहुंचने वाला बिजली बिल अब शून्य आ रहा है।

छत पर सोलर, घर में बचत की रोशनी

बिजली की बढ़ती जरूरतों के बीच रूफटॉप सोलर आम परिवारों के लिए बचत का एक ऑप्शन बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर परिवारों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है। वहीं, सोलर प्लांट लगवाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार सरकारी सब्सिडी भी दी जाती है।

योजना के तहत एक किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान है। नेट मीटरिंग की सुविधा से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने का विकल्प भी मिल सकता है।

समस्तीपुर की उमा ने लगवाया तीन किलोवाट का सोलर प्लांट

समस्तीपुर के आजाद नगर, मोहनपुर रोड की रहने वाली उमा कुमारी ने अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया है। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में बिजली विभाग से सहयोग मिला और प्लांट भी जल्द स्थापित हो गया। सबसे खास बात यह रही कि उन्हें सोलर प्लांट लगने के करीब 15 दिन बाद ही सब्सिडी की राशि मिल गई।

उमा कुमारी बताती हैं कि सोलर पैनल लगवाने के बाद उन्हें काफी संतुष्टि मिली। सब्सिडी की रकम समय पर खाते में आने से उनका भरोसा भी बढ़ा। उनके लिए यह सिर्फ छत पर सोलर पैनल लगवाने का फैसला नहीं था, बल्कि बिजली खर्च को कम करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम था।

बिहार सरकार ने दिया अलग से सब्सिडी

उमा की मानें तो पहले उन्हें बिजली बिल में 240 रुपये का फिक्स चार्ज देना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा के बाद उनका बिजली बिल शून्य आने लगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री बिजली योजना के तहत 20 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने की जानकारी मिली और यह राशि भी उन्हें प्राप्त हो गई।

उमा कहती हैं कि सोलर प्लांट पर सब्सिडी मिलने और बिजली बिल शून्य होने से उन्हें काफी खुशी हुई। उनके अनुभव में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से घर के बिजली खर्च को लेकर बड़ी राहत मिली है।

पूर्णिया की रीना का भी बिजली बिल शून्य

पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी भी घरेलू बिजली खर्च में राहत की मिसाल है। सोलर पैनल लगवाने से पहले रीना के घर का बिजली बिल हर महीने करीब 1,500 से 2,000 रुपये तक आता था। अब उनके मुताबिक, बिजली बिल शून्य आ रहा है।

रीना बताती हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में सभी बिजली उपकरण चल रहे हैं। उन्हें सोलर प्लांट पर कुल 98 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है। उनके लिए यह बदलाव आर्थिक बचत के साथ-साथ बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हुआ है। साथ ही रूफटॉप गार्डन को भी छाया मिल गया।

क्या आपके घर की छत भी बन सकती है बचत का जरिया?

उमा और रीना के अनुभव बताते हैं कि रूफटॉप सोलर सही क्षमता और योजना के तहत लगाया जाए, तो घरेलू बिजली खर्च कम करने में मदद कर सकता है। सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे परिवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक योजना पोर्टल पर पात्रता, सब्सिडी, पंजीकृत विक्रेता और इंस्टॉलेशन से जुड़ी शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए। इस तरह आपके घर की छत भी खर्च बचाने का जरिया बन सकता है।

बिहार से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

Urmi Sinha IPS Story: मुंगेर की बेटी बनी देश की पहली सबसे कम उम्र की IPS, महज 21 साल की उम्र में यूपीएससी क्रैक कर रचा इतिहास

जापान ने मंगल के चांद फोबोस के लिए भेजा स्पेसक्राफ्ट:2031 तक वहां से मिट्टी लाएगा; मिशन सफल हुआ तो इतिहास में पहली बार होगा

जापान ने आज 20 अक्टूबर को मंगल ग्रह के सबसे बड़े चांद ‘फोबोस’ के लिए मिशन लॉन्च किया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए करीब 5 टन का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन का मकसद फोबोस पर लैंड करना, वहां की मिट्टी-धूल के नमूने जुटाना और उन्हें साल 2031 तक धरती पर वापस लेकर आना है। मंगल के दोनों चांद फोबोस और डीमॉस पर आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। मंगल या उसके चांद से मिट्टी का एक टुकड़ा भी अब तक धरती पर नहीं लाया जा सका है। अगर जापान यह कर लेता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। स्पेसक्राफ्ट मंगल पर अगले साल पहुंचेगा, 2031 में वापस लौटेगा सतह पर गेंद की तरह कुछ देर उछलता रहेगा रोवर फोबोस पर उतरने वाले रोवर का नाम ‘इडेफिक्स’ है। यह एक छोटे माइक्रोवेव ओवन जितना बड़ा है और इसमें 4 पहिए लगे हैं। फोबोस पर ग्रैविटी बहुत ही कम है, इसलिए रोवर सतह पर गिरते ही गेंद की तरह कुछ मिनट तक उछलता रहेगा और फिर जाकर टिकेगा। अगर यह उल्टा गिरता है, तो खुद को सीधा कर लेगा। पर एक बार इसके सोलर पैनल खुल गए, तब यह खुद सीधा नहीं हो पाएगा। किसी गड्ढे या ढीली मिट्टी में फंसने से बचने के लिए यह बहुत संभलकर महज 1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की धीमी चाल से चलेगा। रोवर 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा इडेफिक्स रोवर करीब 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा। उसका काम मुख्य लैंडर के लिए एक सुरक्षित जगह तलाशना है, ताकि लैंडर किसी रेतीले दलदल या नुकीले पत्थरों में न फंसे। सुरक्षित जगह मिलने पर चार पैरों वाला लैंडर सतह पर उतरेगा। वह वहां सिर्फ 2 घंटे रुकेगा। ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी-पत्थर बटोरेगा और फौरन अंतरिक्ष में लौट जाएगा। दो सवालों का जवाब तलाश रहे वैज्ञानिक 1. क्या यह चांद मंगल से किसी उल्कापिंड के टकराने के बाद टूटे टुकड़ों से बना? 2. यह अंतरिक्ष में भटकता हुआ कोई एस्टेरॉयड था, जिसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया? इसके अलावा, फोबोस की धूल में मंगल के पुराने कण भी मिल सकते हैं। इससे एक ही बार में मंगल और उसके चांद दोनों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रह कैसे बने और क्या वहां कभी जीवन पनपने के हालात थे। रूस फोबोस पर जाने की 3 बार कोशिश कर चुका रूस ने फोबोस पर जाने के लिए 3 बार कोशिश की, लेकिन तीनों ही मिशन फेल हो गए। जापान का भी पिछला मंगल मिशन नाकाम रहा था, हालांकि उसने दो बार एस्टेरॉयड से नमूने लाकर अपनी काबिलियत साबित की है। नासा के भी मंगल से जुड़े कई मिशन पहले असफल हो चुके हैं। चीन-अमेरिका भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में इस रेस में चीन भी शामिल है। चीन 2028 में मंगल की सतह से सैंपल लाने का मिशन शुरू करेगा और वह भी 2031 तक सैंपल लाने का टारगेट बना रहा है। उधर अमेरिका का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर 30 से ज्यादा ट्यूब्स में मिट्टी भर चुका है, लेकिन उसे धरती पर लाया जायेगा यह तय नहीं है।

जापान ने मंगल के चांद फोबोस के लिए भेजा स्पेसक्राफ्ट:2031 तक वहां से मिट्टी लाएगा; मिशन सफल हुआ तो इतिहास में पहली बार होगा

जापान ने आज 20 अक्टूबर को मंगल ग्रह के सबसे बड़े चांद ‘फोबोस’ के लिए मिशन लॉन्च किया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए करीब 5 टन का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन का मकसद फोबोस पर लैंड करना, वहां की मिट्टी-धूल के नमूने जुटाना और उन्हें साल 2031 तक धरती पर वापस लेकर आना है। जापान का पिछला मंगल मिशन नाकाम रहा था, हालांकि उसने दो बार एस्टेरॉयड से नमूने लाकर काबिलियत साबित की है। मंगल के दोनों चांद फोबोस और डीमॉस पर आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। मंगल या उसके चांद से मिट्टी का एक टुकड़ा भी अब तक धरती पर नहीं लाया जा सका है। अगर जापान यह कर लेता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। स्पेसक्राफ्ट मंगल पर अगले साल पहुंचेगा, 2031 में वापस लौटेगा सतह पर गेंद की तरह कुछ देर उछलता रहेगा रोवर फोबोस पर उतरने वाले रोवर का नाम ‘इडेफिक्स’ है। यह एक छोटे माइक्रोवेव ओवन जितना बड़ा है और इसमें 4 पहिए लगे हैं। फोबोस पर ग्रैविटी बहुत ही कम है, इसलिए रोवर सतह पर गिरते ही गेंद की तरह कुछ मिनट तक उछलता रहेगा और फिर जाकर टिकेगा। अगर यह उल्टा गिरता है, तो खुद को सीधा कर लेगा। पर एक बार इसके सोलर पैनल खुल गए, तब यह खुद सीधा नहीं हो पाएगा। किसी गड्ढे या ढीली मिट्टी में फंसने से बचने के लिए यह बहुत संभलकर महज 1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की धीमी चाल से चलेगा। रोवर 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा इडेफिक्स रोवर करीब 100 दिनों तक फोबोस पर घूमेगा। उसका काम मुख्य लैंडर के लिए एक सुरक्षित जगह तलाशना है, ताकि लैंडर किसी रेतीले दलदल या नुकीले पत्थरों में न फंसे। सुरक्षित जगह मिलने पर चार पैरों वाला लैंडर सतह पर उतरेगा। वह वहां सिर्फ 2 घंटे रुकेगा। ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम से 10 ग्राम मिट्टी-पत्थर बटोरेगा और फौरन अंतरिक्ष में लौट जाएगा। दो सवालों का जवाब तलाश रहे वैज्ञानिक 1. क्या यह चांद मंगल से किसी उल्कापिंड के टकराने के बाद टूटे टुकड़ों से बना? 2. यह अंतरिक्ष में भटकता हुआ कोई एस्टेरॉयड था, जिसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया? इसके अलावा, फोबोस की धूल में मंगल के पुराने कण भी मिल सकते हैं। इससे एक ही बार में मंगल और उसके चांद दोनों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रह कैसे बने और क्या वहां कभी जीवन पनपने के हालात थे। चीन-अमेरिका भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में इस रेस में चीन भी शामिल है। चीन 2028 में मंगल की सतह से सैंपल लाने का मिशन शुरू करेगा और वह भी 2031 तक सैंपल लाने का टारगेट बना रहा है। उधर अमेरिका का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर 30 से ज्यादा ट्यूब्स में मिट्टी भर चुका है, लेकिन उसे धरती पर लाया जायेगा यह तय नहीं है।

Q2 Results: सोलर कंपनी का मुनाफा 30% फिसला, मार्जिन में भी गिरावट; फोकस में रहेगा स्टॉक

Waaree Renewable Q2 Results: सोलर कंपनी Waaree Renewable Technologies के रेवेन्यू में सितंबर तिमाही के दौरान अच्छी बढ़त हुई। लेकिन कंपनी का मुनाफा घट गया। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट 30% गिरकर ₹82 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹116 करोड़ था।

दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू 36.53% बढ़कर ₹1,057.84 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹775 करोड़ था। हालांकि, EBITDA सिर्फ 1.3% बढ़कर ₹160 करोड़ हुआ। इसका असर EBITDA मार्जिन पर भी पड़ा। यह 20% से घटकर 15% रह गया।

पहली छमाही में कैसा रहा प्रदर्शन?

अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच वारी रिन्यूएबल का रेवेन्यू 43.84% बढ़कर ₹1,982.09 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी अवधि में यह ₹1,377.97 करोड़ था। EBITDA भी 21.04% बढ़कर ₹333.46 करोड़ पहुंच गया।

हालांकि, नेट प्रॉफिट में बढ़त नहीं हुई। यह पिछले साल के ₹202.75 करोड़ से घटकर ₹200.44 करोड़ रह गया। कंपनी के मुताबिक, अधिग्रहण से जुड़े खर्च और नए कारोबार के अलग-अलग प्रॉफिट मार्जिन का असर मुनाफे पर पड़ा है।

महाराष्ट्र में लगाएगी सोलर प्लांट

वारी रिन्यूएबल के बोर्ड ने महाराष्ट्र के वर्धा में 35 मेगावाट पीक क्षमता वाला सोलर प्लांट लगाने को मंजूरी दी है। इसकी AC क्षमता 25 मेगावाट होगी। कंपनी इस प्लांट से बिजली बनाएगी और बेचेगी।

कंपनी की अधूरी ऑर्डर बुक ₹5,500 करोड़ से ज्यादा है। यानी इतने मूल्य के प्रोजेक्ट अभी पूरे होने बाकी हैं। इसके अलावा, 34.6 GWp से ज्यादा के सोलर प्रोजेक्ट्स की बोली पाइपलाइन भी है। बैटरी स्टोरेज और बिजली ट्रांसमिशन कारोबार में भी कंपनी को अवसर दिख रहे हैं।

नए कारोबार पर भी नजर

Waaree Renewable अपने EPC और बिजली ट्रांसमिशन कारोबार को बढ़ाना चाहती है। कंपनी सोलर प्रोजेक्ट्स के रखरखाव से जुड़ी सेवाओं का भी विस्तार करेगी।

इसके लिए ड्रोन से सोलर पैनल की जांच, डेटा के जरिए खराबी का पहले पता लगाने और भूमिगत बिजली केबल में गड़बड़ी पहचानने जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है।

नतीजों से पहले सोमवार, 19 अक्टूबर को NSE पर Waaree Renewable का शेयर 0.44% गिरकर ₹833.40 पर बंद हुआ।

IREDA Q2 Results: सरकारी कंपनी को ₹552 करोड़ मुनाफा, NPA में सुधार; शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver vs Gold Prices: सोने के मुकाबले चांदी में ज्यादा गिरावट, शिखर से 50% टूटी; अब आगे कैसी रहेगी चाल?

Silver vs Gold Prices: सोना और चांदी दोनों पिछले कुछ महीनों से दबाव में हैं। हालांकि, हालिया गिरावट में चांदी को ज्यादा नुकसान हुआ है। चांदी में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 29 जनवरी को 121 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद यह करीब 50% टूट चुकी है। इसके मुकाबले सोना अपने शिखर से करीब 25% नीचे है। यानी हालिया गिरावट में चांदी पर सोने के मुकाबले दोगुना दबाव पड़ा है।

हालांकि लंबी अवधि की तस्वीर अलग है। पिछले एक साल में चांदी ने 23.80% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 3.81% रहा। पांच साल में चांदी 167.71% और सोना 138.77% चढ़ा। दस साल में भी चांदी ने 249.72% रिटर्न दिया, जबकि सोने का रिटर्न 233.98% रहा।

Silver vs Gold: अलग-अलग अवधि में रिटर्न

अवधिचांदी का रिटर्नसोने का रिटर्नबेहतर प्रदर्शन
1 महीना-8.14%-3.83%सोना
6 महीने-20.14%-12.19%सोना
इस साल अब तक-16.53%-3.14%सोना
1 साल0.2380.0381चांदी
5 साल1.67711.3877चांदी
10 साल2.49722.3398चांदी

सोर्स: TradingView, 9 अक्टूबर तक। 

चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?

सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव आता है। इसकी बड़ी वजह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में भी होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में इसकी मांग रहती है। इसलिए ग्लोबल इकोनॉमी की रफ्तार धीमी होने की आशंका चांदी पर ज्यादा असर डालती है।

Augmont की चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रेनीशा चैनानी के मुताबिक, चांदी में पहले तेज तेजी आई थी। इसके बाद निवेशकों की बिकवाली और मार्जिन बढ़ने से गिरावट तेज हुई। सोलर सेक्टर में चांदी की खपत घटने की आशंका भी कीमतों पर दबाव बना रही है।

सोने को केंद्रीय बैंकों का सहारा

सोने को दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से सपोर्ट मिलता है। पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा है। चांदी को इस तरह का संस्थागत सहारा नहीं मिलता।

इसके अलावा, चांदी का बाजार सोने के मुकाबले छोटा है। इसलिए कम मात्रा में बिकवाली भी इसकी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है।

चांदी की कीमतों पर आगे क्या असर पड़ेगा?

J.P. Morgan ने चांदी की औसत कीमत का अनुमान 84 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 70 डॉलर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर सेक्टर में मांग घटने से चांदी की खपत प्रभावित हो सकती है। Silver Institute ने भी 2026 में इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से चांदी की मांग में करीब 10% गिरावट का अनुमान लगाया है।

अहर महंगाई, ऊंची बॉन्ड यील्ड और कमजोर औद्योगिक मांग का दबाव बना रहा, तो चांदी में और गिरावट मुमकिन है। वहीं, इन परिस्थितियों में सुधार आने पर चांदी में तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।

Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

टाटा की कंपनी की फ्लोटिंग सोलर सेगमेंट में एंट्री, नॉर्वे की कंपनी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में करेगी टेस्टिंग

Tata Power Floating Solar: टाटा पावर ने नॉर्वे की रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी ओशन सन के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां भारत में फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी का टेस्ट करेंगी।

इसके लिए महाराष्ट्र के मुलशी जलाशय में करीब 300 kWp का पायलट प्रोजेक्ट लगाया जाएगा। यह जलाशय टाटा पावर का है।

फ्लोटिंग सोलर क्या होता है

फ्लोटिंग सोलर यानी पानी की सतह पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल होते हैं। इसमें जमीन पर पैनल लगाने के बजाय किसी जलाशय, झील या तालाब की सतह पर पैनल लगाए जाते हैं।

इससे जमीन की जरूरत कम होती है। और खाली पड़ी पानी की सतह का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है।

पायलट प्रोजेक्ट में क्या जांच की जाएगी?

इस पायलट में टेक्नोलॉजी की परफॉर्मेंस देखी जाएगी। साथ ही इसकी भरोसेमंद क्षमता और लागत भी जांची जाएगी। कंपनियां यह भी देखेंगी कि भारत में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। इसके लिए इसकी तुलना मौजूदा फ्लोटिंग सोलर सिस्टम से की जाएगी।

तुलना में बिजली उत्पादन, क्षमता का इस्तेमाल और इंस्टॉलेशन का समय देखा जाएगा। ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जरूरत, लागत और पूरे प्रोजेक्ट की कारोबारी व्यवहार्यता भी जांची जाएगी।

बाकी फ्लोटिंग सोलर से अलग कैसे?

आमतौर पर फ्लोटिंग सोलर सिस्टम में पैनल को पानी पर तैराने के लिए पॉन्टून का इस्तेमाल होता है। कई पॉन्टून को आपस में जोड़कर एक स्ट्रक्चर बनाया जाता है। ओशन सन की टेक्नोलॉजी इससे अलग है। इसमें सोलर पैनल एक पतली हाइड्रो-इलास्टिक मेम्ब्रेन पर लगाए जाते हैं। यह मेम्ब्रेन सीधे पानी की सतह पर तैरती है।

पायलट से मिलने वाले डेटा से इस टेक्नोलॉजी की असली क्षमता समझने में मदद मिलेगी। इसके बाद भारत में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की संभावना देखी जाएगी।

भारत में 102 GW से ज्यादा क्षमता

टाटा पावर के मुताबिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के अनुमान के अनुसार भारत में फ्लोटिंग सोलर की क्षमता 102 GWp से ज्यादा है।

टाटा पावर के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा ने कहा कि इनोवेशन कंपनी के लिए काफी अहम है। कंपनी क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को तेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ओशन सन के साथ साझेदारी से ग्लोबल टेक्नोलॉजी को भारत में लाकर उसकी वास्तविक परिस्थितियों में जांचने का मौका मिलेगा।

इंडिया-EFTA समिट में हुआ समझौता

टाटा पावर और ओशन सन के बीच समझौता दूसरे इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट के दौरान हुआ। इसमें भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

टाटा पावर का शेयर 7 अक्टूबर को 344.80 रुपये पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें 1.95% की गिरावट रही।

Senco Gold Q2 Update: ज्वेलरी कंपनी का रेवेन्यू 31% बढ़ा, स्टोर का नेटवर्क 215 तक पहुंचा

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Diwali 2026 Dates: कब मनाया जाएगा दिवाली का त्योहार? जानें दिवाली से लेकर चित्रगुप्त पूजा तक की सही तारीख और पूजा मुहूर्त

Diwali 2026 Dates: हिंदू धर्म में दिवाली का पर्व विशेष स्थान रखता है। यह पूरे साल में आने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। लोग इसके लिए काफी पहले से तैयारियां करते हैं। दिवाली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है। यह पांच दिनों का त्योहार है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और चित्रगुप्त पूजा या भाई दूज के साथ संपन्न होता है। घर, बाजार, आस-पड़ोस हर तरफ इस त्योहार की तैयारियों की धूम रहती है। आइए जानें इस साल ये पंच दिवसीय पर्व कब से शुरू होगा और किस दिन मनाई जाएगी दिवाली? दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिवाली 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक अमावस्या तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को दिन में 11 बजकर 27 मिनट पर होगा और यह तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के आधार पर दिवाली का त्योहार 8 नवंबर दिन रविवार को है।

दिवाली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

8 नवंबर को दिवाली की लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त 1 घंटा 56 मिनट का रहेगा। आप शाम में 05 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 07 बजकर 50 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजा विधि विधान से कर सकते हैं।

आयुष्मान योग में मनेगी दिवाली

इस बार की दिवाली पर आयुष्मान् योग बन रहा है, जो पूरे दिन रहेगा। दिवाली पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर 9 नवंबर को 03:03 ए एम तक मान्य है। उसके बाद से सौभाग्य का प्रारंभ होगा। आयुष्मान् योग व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है। दिवाली पर स्वाति नक्षत्र है, जो प्रात:काल से लेकर पूरी रात तक है।

धनतेरस 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाते हैं। इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट तक है। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 7 नवंबर को है, लेकिन धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। उस दिन ही प्रदोष व्रत की पूजा भी होगी। 6 नवंबर को धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम में 6 बजकर 02 मिनट से शाम 7 बजकर 57 मिनट तक है।

दिवाली कैलेंडर 2026

6 नवंबर, शुक्रवार : धनतेरस, धन त्रयोदशी

7 नवंबर, शनिवार : काली चौदस, हनुमान पूजा

8 नवंबर, रविवार : दिवाली, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा

10 नवंबर, मंगलवार : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट

11 नवंबर, बुधवार : भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

IIT कानपुर बनाएगा देश का पहला ‘सन सिम्युलेटर’, ऐसे परखे जाएंगे सोलर पैनल

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी कानपुर देश की पहली ऐसी सुविधा विकसित करने जा रहा है, जहां कृत्रिम रूप से सूर्य की रोशनी तैयार कर फोटोवोल्टिक सिस्टम की जांच की जा सकेगी। संस्थान ने बेंगलुरु की नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के साथ समझौता किया है। इस परियोजना में आईआईटी कानपुर के रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क फाउंडेशन (टेक्नोपार्क) की सदस्य कंपनी इनवेरिएंस ऑटोमेशन भी सहयोग करेगी। इसके तहत कंसंट्रेटेड फोटोवोल्टिक (सीपीवी) सिस्टम के लिए देश का पहला सन सिम्युलेटर विकसित किया जाएगा। इससे सीपीवी मॉड्यूल को बाजार में उतारने से पहले उनकी क्षमता और गुणवत्ता की जांच देश में ही हो सकेगी।

सूरज की रोशनी जैसी होगी कृत्रिम रोशनी

इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है। सन सिम्युलेटर ऐसी तकनीक है, जिसमें प्रयोगशाला के अंदर सूर्य की रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार की जाती हैं। इससे मौसम या दिन के समय पर निर्भर हुए बिना सोलर सिस्टम का परीक्षण किया जा सकता है। अभी सीपीवी सिस्टम के परीक्षण के लिए देश में इस स्तर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नई सुविधा तैयार होने के बाद उत्पादन के अंतिम चरण में ही मॉड्यूल की क्षमता और गुणवत्ता को परखा जा सकेगा।

आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसी तकनीक और परीक्षण सुविधाओं की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्थान का प्रयास है कि शोध को प्रयोगशाला तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे उद्योग के साथ जोड़कर वास्तविक उपयोग तक पहुंचाया जाए। यह परियोजना सौर ऊर्जा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और देश में ही परीक्षण की क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छोटे सेल, ज्यादा क्षमता वाला सीपीवी सिस्टम

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने बताया कि सीपीवी सिस्टम सामान्य सोलर पैनल से अलग तरीके से काम करता है। इसमें लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और ज्यादा क्षमता वाले सोलर सेल पर केंद्रित किया जाता है। इन सेल में अर्धचालक की कई परतें होती हैं और हर परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को इस्तेमाल करती है।

उन्होंने बताया कि सीपीवी में सोलर सेल पैनल के करीब 0.1 प्रतिशत हिस्से में ही होते हैं। यानी सेल के लिए जरूरी जगह सामान्य सोलर तकनीक की तुलना में काफी कम हो जाती है। हालांकि ऐसी तकनीक के लिए तेज और सीधी धूप वाले इलाके ज्यादा उपयुक्त होते हैं।

2070 के नेट जीरो लक्ष्य में मददगार

प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कहा कि भारत ने वर्ष 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है और इसे हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाना होगा। इसके लिए केवल सोलर पैनल बनाना ही नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और क्षमता जांचने की देश में मजबूत व्यवस्था भी जरूरी है। सीपीवी सिम्युलेटर इसी दिशा में काम करेगा।

नेक्स पीवी एनर्जी सिस्टम के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर ने कहा कि देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सोलर सेल के उत्पादन और परीक्षण की क्षमता को भी बढ़ाना जरूरी है। देश में सीपीवी सिम्युलेटर उपलब्ध होने से बड़े स्तर पर उत्पादन के दौरान गुणवत्ता जांच आसान होगी और सीपीवी तकनीक को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

वाराणसी को 30 साल बाद नई टाउनशिप की सौगात! आनंद काशी योजना में नवरात्रि से शुरू हो सकती है प्लॉट की बुकिंग,VDA की पूरी स्कीम जानिए

पहली बार पृथ्वी के चक्कर लगाएगा स्टारशिप:26 सैटेलाइट्स भी छोड़ेगा; सबसे ताकतवर रॉकेट का 14वां टेस्ट आज

इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स दुनिया के सबसे ताकतवर रॉकेट ‘स्टारशिप’ की 14वीं टेस्ट उड़ान के लिए तैयार है। यह पहली बार होगा जब स्टारशिप को पृथ्वी की ऑर्बिट में भेजा जाएगा। इसकी लॉन्चिंग सोमवार, 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार शाम 5:45 बजे से होगी। इससे पहले की सभी टेस्ट उड़ानों में रॉकेट को सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक ही सीमित रखा गया था ताकि सुरक्षा बनी रहे और ज्यादा से ज्यादा डेटा जुटाया जा सके। अब स्टारशिप को पृथ्वी की कक्षा में भेजने का मकसद इसे ऐसा रॉकेट बनाना है, जिसे तेजी से दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा) और सुपर हैवी बूस्टर (निचला हिस्सा) को कलेक्टिवली ‘स्टारशिप’ कहा जाता है। इस व्हीकल की ऊंचाई 403 फीट है। 10 घंटे का सफर, पृथ्वी के लगाएगा 6 चक्कर इस मिशन में स्टारशिप जमीन से लगभग 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ेगा। करीब 10 घंटे लंबे इस सफर में यह पृथ्वी के 6 चक्कर पूरे करेगा। मिशन खत्म होने के बाद रॉकेट चिली देश के पास प्रशांत महासागर में सुरक्षित पानी पर लैंड यानी स्प्लैशडाउन करेगा। पहली बार स्पेस में छोड़े जाएंगे 26 नए स्टारलिंक सैटेलाइट्स इस उड़ान से पहली बार नई तकनीक वाले 26 ‘स्टारलिंक V3’ सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे जा रहे हैं। इनसे पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड और नेटवर्क काफी बेहतर हो जाएगा। इस नए मॉडल का सिर्फ एक सैटेलाइट ही नेटवर्क में 1 टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) की डेटा क्षमता जोड़ देगा, यानी इस अकेले मिशन से कुल 26 Tbps की क्षमता जुड़ जाएगी, जो कि फॉल्कन 9 रॉकेट से भेजे जाने वाले छोटे सैटेलाइट्स के मुकाबले लगभग 10 गुना ज्यादा है। रॉकेट से अलग होते ही ये सैटेलाइट अपने एंटीना और सोलर पैनल खोल लेंगे और रेडियो तरंगों व लेजर के जरिए जमीन तथा बाकी सैटेलाइट्स से संपर्क साधेंगे। इसके बाद वे अपने छोटे इंजनों की मदद से तय कक्षा में पहुंच जाएंगे और सभी शुरुआती जांचों के बाद इंटरनेट सर्विस देना शुरू कर देंगे। 3 सैटेलाइट्स में कैमरे लगे हैं, स्टारशिप की करेंगे निगरानी इस मिशन में शामिल 3 सैटेलाइट्स को खास तौर पर बदला गया है। इनमें हाई-टेक कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे अंतरिक्ष में स्टारशिप की ‘हीटशील्ड’ यानी गर्मी से बचाने वाली बाहरी परत को स्कैन करेंगे और तस्वीरें सीधे जमीन पर मौजूद वैज्ञानिकों को भेजेंगे। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि धरती पर लौटते वक्त स्टारशिप की हीटशील्ड कितनी सुरक्षित रहती है, ताकि भविष्य में रॉकेट को लॉन्च पैड पर वापस सुरक्षित उतारा जा सके। अब स्टारशिप के पहले हुए 11 टेस्ट के बारे में जानें…. 13वां टेस्ट: पहली बार पानी में सुरक्षित तैरता दिखा स्टारशिप स्टारशिप की 13वीं टेस्ट उड़ान में अपर स्टेज ने हिंद महासागर में लैंड किया, जबकि इसके बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में लैंडिंग की। यह पहली बार था जब हमने पूरे स्टारशिप को सुरक्षित पानी में उतारा। लैंडिंग के दौरान स्टारशिप अपनी ‘बेली-फ्लॉप’ स्थिति से सीधा हुआ और पानी पर लंबवत उतरा। इसके बाद यह धीरे-धीरे एक तरफ झुककर समुद्र में तैरने लगा।
12वां टेस्ट: इंजन फेल होने के बाद भी हिंद महासागर में लैंडिंग ‘स्टारशिप’ का 12वां टेस्ट सफलताओं और नाकामियों का मिला-जुला सफर रहा था। इसमें स्टारशिप के नए और बड़े वर्जन (V3) का इस्तेमाल पहली बार किया गया था। टेक्सास के दक्षिणी छोर पर स्थित ‘स्टारबेस’ लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरने के बाद इंजन में खराबी आ गई। इस कारण रॉकेट के नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा था। इसके बावजूद लगभग एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। इस टेस्ट को भारतीय समय के अनुसार 23 मई की सुबह लॉन्च किया गया।
11वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 11वां टेस्ट 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से किया गया था। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था, जिसमें सुपर हैवी बूस्टर की अमेरिका की खाड़ी में वॉटर लैंडिंग कराई गई। वहीं स्टारशिप की हिंद महासागर में वॉटर लैंडिंग कराई गई। इस फ्लाइट का मकसद भविष्य में रॉकेट को उड़ान भरने वाली जगह पर वापस लाने से जुड़े टेस्ट करना था। 10वां टेस्ट: पहली बार आठ डमी सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़े स्टारशिप का 10वां टेस्ट 27 अगस्त 2025 को किया गया था, जो कामयाब रहा था। रॉकेट को सुबह 5:00 बजे टेक्सास के बोका चिका से लॉन्च किया गया। ये टेस्ट 1 घंटे 6 मिनट का था। इस मिशन में स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट को अंतरिक्ष में छोड़ने से लेकर इंजन चालू करने जैसे सभी ऑब्जेक्टिव पूरे हुए। स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी हैं। इनका इस्तेमाल स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमता को परखने के लिए किया जाता है। 29 जून स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था इससे पहले ये टेस्ट 29 जून 2025 को होना था, लेकिन स्टैटिक फायर टेस्ट के दौरान स्टारशिप में ब्लास्ट हो गया था। इस टेस्ट में रॉकेट को जमीन पर रखकर उसके इंजन को चालू किया जाता है, ताकि लॉन्च से पहले सब कुछ ठीक हो, ये चेक किया जा सके। टेस्ट के दौरान रॉकेट के ऊपरी हिस्से में अचानक विस्फोट शुरू हुआ। देखते ही देखते पूरा रॉकेट आग के गोले में बदल गया था। नौवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ने कंट्रोल खो दिया 28 मई 2025 को हुए 9वें टेस्ट में लॉन्चिंग के करीब 30 मिनट बाद स्टारशिप ने कंट्रोल खो दिया था, जिस कारण पृथ्वी के वातावरण में एंटर करने पर ये नष्ट हो गया था। ये लगातार तीसरी बार था जब स्टारशिप आसमान में ही नष्ट हुआ था। हालांकि, बूस्टर ने अमेरिका की खाड़ी में हार्ड लैंडिंग की। आठवां टेस्ट: बूस्टर लैंड हो गया था, लेकिन शिप ब्लास्ट हो गई थी स्टारशिप का आठवां टेस्ट भारतीय समयानुसार 7 मार्च 2025 को हुआ था। लॉन्चिंग के 7 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया। लेकिन 8 मिनट बाद शिप (ऊपरी हिस्सा) के छह इंजनों में से 4 ने काम करना बंद कर दिया जिससे शिप ने कंट्रोल खो दिया। इसके बाद ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम ने शिप को ब्लास्ट कर दिया। गिरते मलबे की वजह से मियामी, ऑरलैंडो, पाम बीच और फोर्ट लॉडरडेल के हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित हुईं थी। सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया; लेकिन स्पेसक्राफ्ट आसमान में ही ब्लास्ट हुआ 17 जनवरी 2025 को भी स्टारशिप का सातवां टेस्ट पूरी तरह से कामयाब नहीं रहा था। लॉन्चिंग के 8 मिनट बाद बूस्टर (निचला हिस्सा) अलग होकर वापस लॉन्च पैड पर आ गया था, लेकिन शिप (ऊपरी हिस्सा) में ऑक्सीजन लीक से ब्लास्ट हो गया था। छठा टेस्ट: लॉन्चपैड पर उतरने में दिक्कत दिखी तो पानी पर लैंड कराया, ट्रम्प भी मौजूद रहे स्टारशिप का छठा टेस्ट 20 नवंबर 2024 को सुबह 03:30 बजे किया गया था। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी टेस्ट देखने के लिए स्टारबेस पहुंचे थे। इस टेस्ट में बूस्टर को लॉन्च करने के बाद वापस लॉन्चपैड पर कैच किया जाना था, लेकिन सभी पैरामीटर ठीक नहीं होने के कारण इसे पानी में लैंड कराने का फैसला लिया गया। स्टारशिप के इंजन को स्पेस में फिर से चालू किया गया। इसके बाद हिंद महासागर में लैंडिंग हुई। पांचवां टेस्ट: पहली बार बूस्टर को लॉन्चपैड पर कैच किया था स्टारशिप का पांचवां टेस्ट 13 अक्टूबर 2024 को किया गया था। इस टेस्ट में पृथ्वी से 96 Km ऊपर भेजे गए सुपर हैवी बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाया गया, जिसे मैकेजिला ने पकड़ा। मैकेजिला दो मेटल आर्म हैं जो चॉपस्टिक्स की तरह दिखाई देती हैं। वहीं स्टारशिप की पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंट्री कराकर हिंद महासागर में कंट्रोल्ड लैंडिंग कराई गई। स्टारशिप ने जब पृथ्वी के वातावरण में एंट्री की तब उसकी रफ्तार 26,000 किलोमीटर प्रति घंटे थी और तापमान 1,430°C तक पहुंच गया था। चौथा टेस्ट: स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पानी में लैंडिंग हुई स्टारशिप का चौथा टेस्ट 6 जून 2024 को हुआ था, जो सक्सेसफुल रहा था। 1.05 घंटे के इस मिशन को बोका चिका से शाम 6.20 बजे लॉन्च किया गया था। इसमें स्टारशिप को स्पेस में ले जाया गया, फिर पृथ्वी पर वापस लाकर पानी पर लैंड कराया गया। टेस्ट का मेन गोल यह देखना था कि स्टारशिप पृथ्वी के वातावरण में एंट्री के दौरान सर्वाइव कर पाता है या नहीं। टेस्ट के बाद कंपनी के मालिक इलॉन मस्क ने कहा था, ‘कई टाइल्स के नुकसान और एक डैमेज्ड फ्लैप के बावजूद स्टारशिप ने समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग की।’ तीसरा टेस्ट: रीएंट्री के बाद स्टारशिप से संपर्क टूटा था ये टेस्ट 14 मार्च 2024 को हुआ था। स्पेसएक्स ने बताया था कि स्टारशिप रीएंट्री के दौरान सर्वाइव नहीं कर पाया, लेकिन उसने उड़ान के दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। वहीं इलॉन मस्क ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल आधा दर्जन स्टारशिप उड़ान भरेंगे। स्टारशिप ने ऑर्बिट में पहुंचने के बाद पेलोड डोर को खोला और बंद किया। रॉकेट के भीतर दो टैंकों के बीच कई टन तरल ऑक्सीजन को मूव किया। स्टारशिप की पृथ्वी के वातावरण में रीएंट्री कराई गई, लेकिन संपर्क टूट गया। दूसरा टेस्ट: स्टेज सेपरेशन के बाद खराबी आ गई थी स्टारशिप का दूसरा टेस्ट 18 नवंबर 2023 को शाम करीब 6:30 बजे किया गया था। लॉन्चिंग के करीब 2.4 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप का सेपरेशन हुआ। बूस्टर को वापस पृथ्वी पर लैंड होना था, लेकिन 3.2 मिनट बाद 90 Km ऊपर यह फट गया। वहीं स्टारशिप तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ गया। करीब 8 मिनट बाद पृथ्वी से 148 Km ऊपर स्टारशिप में भी खराबी आ गई, जिस कारण उसे नष्ट करना पड़ा। फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम के जरिए इसे नष्ट किया गया था। दूसरे टेस्ट में रॉकेट और स्टारशिप को अलग करने के लिए पहली बार हॉट स्टैगिंग प्रोसेस का इस्तेमाल किया गया था, जो पूरी तरह सक्सेसफुल रही थी। सभी 33 रैप्टर इंजनों ने भी लॉन्च से सेपरेशन तक ठीक से फायर किया था। पहला टेस्ट: लॉन्चिंग के 4 मिनट बाद विस्फोट हो गया था 20 अप्रैल 2023 को स्टारशिप का पहला ऑर्बिटल टेस्ट किया गया था। इस टेस्ट में बूस्टर 7 और शिप 24 को लॉन्च किया गया था। उड़ान भरने के 4 मिनट बाद ही मेक्सिको की खाड़ी के पास 30 किलोमीटर ऊपर स्टारशिप में विस्फोट हो गया था। स्टारशिप के फेल होने के बाद भी इलॉनमस्क और एम्प्लॉइज खुशी मना रहे थे। ऐसा इसलिए क्योंकि रॉकेट का लॉन्च पैड से उड़ना ही बड़ी सफलता थी। मस्क ने लॉन्चिंग से दो दिन पहले कहा था- सफलता शायद मिले, लेकिन एक्साइटमेंट की गारंटी है। स्पेसएक्स ने कहा था- सेपरेशन स्टेज से पहले ही इसका एक हिस्सा अचानक अलग हो गया, जबकि यह तय नहीं था। इस तरह के एक टेस्ट के साथ हम जो सीखते हैं, उससे सफलता मिलती है। आज का टेस्ट हमें स्टारशिप की रिलायबिलिटी में सुधार करने में मदद करेगा। टीमें डेटा को रिव्यू करना जारी रखेंगीं और अगले फ्लाइट टेस्ट की दिशा में काम करेंगीं।