छत पर सोलर पैनल लगते ही जीरो हुआ बिजली बिल! जानिए बिहार की उमा और रीना की पूरी स्टोरी

बिजली बिल डराने के बजाय राहत देने लगे, तो इससे बेहतर क्या होगा! बिहार में सौर ऊर्जा की बढ़ती पहुंच के बीच समस्तीपुर की उमा कुमारी और पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगवाए और अब बिजली बिल में बड़ी राहत का लाभ उठा रही हैं। उमा को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आर्थिक मदद मिली, तो रीना का कहना है कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनका दो हजार रुपये तक पहुंचने वाला बिजली बिल अब शून्य आ रहा है।

छत पर सोलर, घर में बचत की रोशनी

बिजली की बढ़ती जरूरतों के बीच रूफटॉप सोलर आम परिवारों के लिए बचत का एक ऑप्शन बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर परिवारों को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है। वहीं, सोलर प्लांट लगवाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार सरकारी सब्सिडी भी दी जाती है।

योजना के तहत एक किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये और तीन किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर अधिकतम 78 हजार रुपये की केंद्रीय सब्सिडी का प्रावधान है। नेट मीटरिंग की सुविधा से अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने का विकल्प भी मिल सकता है।

समस्तीपुर की उमा ने लगवाया तीन किलोवाट का सोलर प्लांट

समस्तीपुर के आजाद नगर, मोहनपुर रोड की रहने वाली उमा कुमारी ने अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगवाया है। उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में बिजली विभाग से सहयोग मिला और प्लांट भी जल्द स्थापित हो गया। सबसे खास बात यह रही कि उन्हें सोलर प्लांट लगने के करीब 15 दिन बाद ही सब्सिडी की राशि मिल गई।

उमा कुमारी बताती हैं कि सोलर पैनल लगवाने के बाद उन्हें काफी संतुष्टि मिली। सब्सिडी की रकम समय पर खाते में आने से उनका भरोसा भी बढ़ा। उनके लिए यह सिर्फ छत पर सोलर पैनल लगवाने का फैसला नहीं था, बल्कि बिजली खर्च को कम करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम था।

बिहार सरकार ने दिया अलग से सब्सिडी

उमा की मानें तो पहले उन्हें बिजली बिल में 240 रुपये का फिक्स चार्ज देना पड़ता था। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा के बाद उनका बिजली बिल शून्य आने लगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री बिजली योजना के तहत 20 हजार रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलने की जानकारी मिली और यह राशि भी उन्हें प्राप्त हो गई।

उमा कहती हैं कि सोलर प्लांट पर सब्सिडी मिलने और बिजली बिल शून्य होने से उन्हें काफी खुशी हुई। उनके अनुभव में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से घर के बिजली खर्च को लेकर बड़ी राहत मिली है।

पूर्णिया की रीना का भी बिजली बिल शून्य

पूर्णिया की रीना कुमारी की कहानी भी घरेलू बिजली खर्च में राहत की मिसाल है। सोलर पैनल लगवाने से पहले रीना के घर का बिजली बिल हर महीने करीब 1,500 से 2,000 रुपये तक आता था। अब उनके मुताबिक, बिजली बिल शून्य आ रहा है।

रीना बताती हैं कि सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में सभी बिजली उपकरण चल रहे हैं। उन्हें सोलर प्लांट पर कुल 98 हजार रुपये की सब्सिडी मिली है। उनके लिए यह बदलाव आर्थिक बचत के साथ-साथ बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हुआ है। साथ ही रूफटॉप गार्डन को भी छाया मिल गया।

क्या आपके घर की छत भी बन सकती है बचत का जरिया?

उमा और रीना के अनुभव बताते हैं कि रूफटॉप सोलर सही क्षमता और योजना के तहत लगाया जाए, तो घरेलू बिजली खर्च कम करने में मदद कर सकता है। सोलर पैनल लगवाने की योजना बना रहे परिवारों को आवेदन से पहले आधिकारिक योजना पोर्टल पर पात्रता, सब्सिडी, पंजीकृत विक्रेता और इंस्टॉलेशन से जुड़ी शर्तों की जानकारी लेनी चाहिए। इस तरह आपके घर की छत भी खर्च बचाने का जरिया बन सकता है।

बिहार से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

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बिहार बाढ़ में मसीहा बने खान सर, सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ लोग बोले- सलाम!

बिहार में बाढ़ की स्थिति ने कई इलाकों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घरों और आसपास के इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों को रोज की जरूरतों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे समय में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इसी बीच शिक्षक और यूट्यूबर खान सर भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच दिखाई दे रहे है।

खान सर बिहार के जाने-माने शिक्षक और यूट्यूबर हैं, जो आसान और बोलचाल की भाषा में पढ़ाने के अपने तरीके के लिए काफी पॉपुलर हैं। वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं। पटना में उनका कोचिंग संस्थान भी है, जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं।

नाव से बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे खान सर

खान सर बाढ़ प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए नाव से सफर कर रहे है। बताया जा रहा है कि राहत से जुड़े कामों के दौरान टीम के साथ कांटेक्ट बनाए रखने के लिए वॉकी-टॉकी का भी इस्तेमाल किया गया। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की गई। बाढ़ की वजह से कई जगह रास्ते बंद हैं, इसलिए लोगों तक पहुंचने के लिए नाव की मदद ली जा रही है।

खान सर के काम से प्रभावित हुई जनता

खान सर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो देखकर कुछ यूजर्स ने कहा कि मुश्किल समय में लोगों के बीच पहुंचकर मदद करना अच्छी बात है। वहीं कुछ लोगों ने राहत के कामों को सोशल मीडिया पर दिखाने को लेकर सवाल भी उठाए। कुछ यूजर्स का कहना था कि ऐसे समय में पूरा ध्यान जरूरतमंद लोगों की मदद पर होना चाहिए।

मदद के प्रयास की कई लोगों ने की तारीफ

कई लोगों ने खान सर के इस प्रयास की तारीफ भी की। कुछ यूजर्स ने कहा कि वह सिर्फ एक शिक्षक ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय लोगों की मदद करने की कोशिश भी कर रहे हैं। कमेंट्स में उनके शिक्षा से जुड़े काम और जरूरतमंद बच्चों की मदद का भी जिक्र किया गया। लोगों का कहना था कि कोई अपने लेवल पर दूसरों की मदद कर रहा है, तो उसकी इस कोशिश को भी सराहना चाहिए।

बिहार में बाढ़ से कई इलाकों के लोग परेशान हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के मुताबिक करीब 49.74 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया समेत कई जिले प्रभावित हैं। इन इलाकों में लोगों तक खाना, पानी और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के साथ उन्हें सुरक्षित जगहों पर ले जाने का काम किया जा रहा है।

बाढ़ जैसे मुश्किल समय में सबसे जरूरी है कि लोगों को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें खाना, पानी व दूसरी जरूरी चीजें मिलती रहें। अगर हर कोई अपनी क्षमता के हिसाब से थोड़ा-सा भी मदद का हाथ बढ़ाए, तो जरूरतमंद लोगों के लिए काफी सहारा बन सकता है। छोटी-सी मदद भी किसी के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की ‘घास ट्रेन’, सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ

Bihar Train News: बिहार के खगड़िया जिले में जब बाढ़ दस्तक देती है, तो एक खास पैसेंजर ट्रेन इलाके में चर्चा का विषय बन जाती है। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, हालांकि इंडियन रेलवे के रिकॉर्ड में इस ट्रेन का नाम ‘समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर’ है। लेकिन स्थानीय लोग इसे प्यार से ‘घास ट्रेन’ भी कहते हैं। बाढ़ के मुश्किल दिनों में यह ट्रेन सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम नहीं करती। बल्कि सैकड़ों पशुपालकों और उनके मवेशियों के लिए ‘लाइफलाइन’ बन जाती है।

जब हर तरफ पानी भर जाता है तब सैकड़ों पशुपालक सुबह-सुबह इस पैसेंजर ट्रेन में सवार होकर सूखे इलाकों की ओर जाते हैं। वे चिलचिलाती धूप में अपने मवेशियों के लिए हरा चारा काटते हुए दिन बिताते हैं। फिर शाम को वे सभी भारी बंडलों के साथ रेलवे स्टेशन लौट आते हैं।

बाढ़ में मवेशियों के सामने चारे का संकट

रिपोर्ट के मुताबिक, खगड़िया के मानसी प्रखंड के निचले इलाकों में हर साल बाढ़ का पानी भर जाता है। इस दौरान धमसारा घाट, मटिहानी और रोहियार जैसे गांवों के आसपास के बड़े हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। खेत और चरागाह पानी में डूब जाते हैं। पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मवेशियों के लिए हरे चारे का इंतजाम करना होती है। मवेशियों पर निर्भर परिवारों के लिए उन्हें भूखा रखना संभव नहीं होता। ऐसे में पशुपालक रोजाना बाढ़ प्रभावित इलाके से बाहर निकलकर सूखे एरिया का रुख करते हैं, जहां उन्हें हरा चारा मिल सके।

सुबह ट्रेन में सवार होते हैं सैकड़ों पशुपालक

सुबह होते ही बड़ी संख्या में पशुपालक इस पैसेंजर ट्रेन में सवार हो जाते हैं। उनका मकसद किसी शहर में खरीदारी या काम के लिए जाना नहीं, बल्कि अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाना होता है। ट्रेन उन्हें उन इलाकों तक पहुंचाने में मदद करती है जहां बाढ़ का असर कम है। और वहां हरा चारा उपलब्ध है।

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वहां पहुंचने के बाद पशुपालक दिनभर तेज धूप और गर्मी के बीच खेतों और खुले इलाकों से हरी घास काटते हैं। यह उनके लिए रोज का संघर्ष है। लेकिन अपने मवेशियों को बचाए रखने के लिए वे इस मेहनत को मजबूरी के साथ-साथ जिम्मेदारी के तौर पर भी निभाते हैं।

शाम होते ही ट्रेन का नजारा हो जाता है बिल्कुल अलग

दिनभर चारा काटने के बाद शाम को यही पशुपालक भारी-भारी गठरियों और बोरियों के साथ स्टेशन लौटते हैं। इसके बाद जब ट्रेन फकीया की ओर वापस रवाना होती है, तो इसका नजारा किसी आम पैसेंजर ट्रेन जैसा नहीं रहता। ट्रेन के दरवाजों से लेकर शौचालयों तक, लगभग हर जगह हरा चारा नजर आता है। डिब्बों में बड़ी-बड़ी गठरियां और बोरियां रखी होती हैं। उनके बीच बैठकर पशुपालक अपने घरों की ओर लौटते हैं।

इसी वजह से पड़ा नाम ‘घास ट्रेन’

स्थानीय लोगों के बीच यह ट्रेन धीरे-धीरे इतनी मशहूर हो गई कि इसका आधिकारिक नाम पीछे छूट गया और इसे ‘घास ट्रेन’ के नाम से पहचान मिलने लगी। न्यूज 18 के मुताबिक, बाढ़ के दौरान जब गांवों में पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो जाता है, तब यही ट्रेन पशुपालकों को सूखे इलाकों तक पहुंचाने और वहां से चारा वापस लाने का जरिया बनती है।

पशुपालकों और मवेशियों दोनों के लिए जीवनरेखा

फकीया इलाके के पशुपालकों के लिए यह ट्रेन महज एक यात्री ट्रेन नहीं है। बाढ़ जैसे कठिन हालात में यह उनके परिवार और मवेशियों दोनों को संभालने में अहम भूमिका निभाती है। एक तरफ जहां देश में ‘वंदे भारत’ और ‘राजधानी एक्सप्रेस’ जैसी ट्रेनों की रफ्तार और सुविधाओं की चर्चा होती है।

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वहीं, बिहार के इस बाढ़ प्रभावित इलाके में एक साधारण पैसेंजर ट्रेन अपनी अलग ही वजह से लोगों के लिए बेहद खास है। इसीलिए हर साल बाढ़ के मौसम में जब यह ट्रेन हरे चारे की गठरियों से भरकर लौटती है, तो लोग इसे फिर उसी प्यार और सम्मान से ‘घास ट्रेन’ कहकर पुकारते हैं।

भारत का होकर भी ये अनोखा शहर, जो 16 अगस्त को मनाता है स्वतंत्रता दिवस!

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन एक ऐसा शहर भी है, जहां आज़ादी का जश्न 16 अगस्त को मनाने की परंपरा है। इसके पीछे चार वीर स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान जुड़ा है, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी।

 

अनोखी परंपरा

जहां पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं बिहार के बक्सर जिले का डुमरांव 16 अगस्त को भी उतने ही उत्साह के साथ यह दिन मनाता है। यहां लोग झंडा फहराते हैं, शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी पूरे सम्मान के साथ जारी है। उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने आजादी की लड़ाई को नई ताकत दी।

 

ब्रिटिश शासन के कब्जा

साल 1942 में महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था, जिसके बाद पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन तेज हो गया। इसी आंदोलन के दौरान डुमरांव के हजारों लोग तिरंगा लेकर पुलिस थाने की ओर बढ़े। उनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के कब्जे वाली इमारत पर तिरंगा फहराकर आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देना था। इस आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 

वीरों का बलिदान

जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो अंग्रेज पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं। इस गोलीबारी में कपिल मुनि, गोपाल कहार, रामदास सोनार और रामदास लोहार शहीद हो गए। कई अन्य लोग भी घायल हुए, लेकिन लोगों का हौसला नहीं टूटा। अपने साथियों के बलिदान के बावजूद आंदोलन जारी रहा और आखिरकार प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा फहराकर अपने संकल्प को पूरा किया।

 

शहीद स्मारक

देश आजाद होने के बाद जिस पुलिस थाने में यह घटना हुई थी, उसे चारों शहीदों की याद में स्मारक में बदल दिया गया। यह स्मारक आज भी लोगों को आजादी की लड़ाई और उन वीरों के बलिदान की याद दिलाता है। हर साल 16 अगस्त को यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को नमन करते हैं। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि भारत की आजादी लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

 

सरकारी सम्मान

डुमरांव की इस ऐतिहासिक परंपरा को समय के साथ सरकारी मान्यता भी मिली। बिहार सरकार ने वर्ष 2015 में 16 अगस्त को होने वाले इस आयोजन को आधिकारिक पहचान दी। इसके बाद इस दिन होने वाले कार्यक्रमों को और अधिक महत्व मिला। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद स्मारक पर चारों वीरों की प्रतिमाओं का अनावरण किया, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रख सकें।

Independence Day 2026: भारत का अनोखा शहर! जहां 15 अगस्त की सुबह नहीं, 14 अगस्त की रात ही फहराया जाता है तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस भारत के लिए गर्व और भावनाओं से जुड़ा खास दिन है। हर साल 15 अगस्त को देशभर में तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया जाता है। लेकिन बिहार के पूर्णिया शहर में इस मौके को मनाने का अंदाज बाकी जगहों से बिल्कुल अलग है। यहां लोग 15 अगस्त की सुबह का इंतजार नहीं करते, बल्कि 14 अगस्त की आधी रात को ही तिरंगा फहराते हैं। यह परंपरा आजादी मिलने के उस ऐतिहासिक पल से जुड़ी है, जब भारत ने रात 12 बजे के बाद स्वतंत्रता की घोषणा सुनी थी।

पूर्णिया का यह अनोखा जश्न दशकों पुरानी कहानी और स्वतंत्रता सेनानियों की भावनाओं को आज भी जीवित रखता है। यही वजह है कि हर साल रात के समय झंडा चौक पर बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और उस गौरवशाली पल को याद करते हैं।

आधी रात को मिली थी आजादी की खबर

यह परंपरा कोई नई शुरुआत नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें आजादी की उस ऐतिहासिक रात से जुड़ी हैं। 14 अगस्त 1947 की रात पूरा देश उस पल का इंतजार कर रहा था, जब भारत ब्रिटिश शासन से मुक्त होने वाला था। ऑल इंडिया रेडियो पर स्वतंत्रता की घोषणा का प्रसारण हुआ और रात 12 बजकर 1 मिनट पर देश ने आजादी की खबर सुनी।

पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी ने रचा था इतिहास

जब पूरा देश उस ऐतिहासिक पल का गवाह बन रहा था, तब पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह ने सुबह होने का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने दो साथियों रामरतन शाह और शमशुल हक के साथ रात में ही शहर के बीचों-बीच पहुंचकर तिरंगा फहराया। आज जिस जगह को ‘झंडा चौक’ के नाम से जाना जाता है, वहीं पहली बार उस रात आजादी का झंडा लहराया गया था।

तिरंगा फहरते ही गूंज उठा था पूरा इलाका

बताया जाता है कि जैसे ही झंडा ऊपर उठा, वहां मौजूद लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। उस पल आजादी सिर्फ रेडियो पर सुनाई देने वाली खबर नहीं रही, बल्कि लोगों के सामने एक ऐसा एहसास बन गई जिसे वे अपनी आंखों से देख और महसूस कर सकते थे।

आज भी कायम है 14 अगस्त की आधी रात वाली परंपरा

दशकों बाद भी पूर्णिया के लोग इस ऐतिहासिक परंपरा को निभा रहे हैं। हर साल 14 अगस्त की रात झंडा चौक पर लोग इकट्ठा होते हैं और उसी समय तिरंगा फहराते हैं, जब देश को पहली बार आजादी मिली थी। जब पूरा भारत 15 अगस्त की सुबह स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं पूर्णिया कुछ घंटे पहले ही उस गौरवशाली पल को याद कर लेता है।

झंडा चौक बना आजादी की यादों का प्रतीक

आज झंडा चौक सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि इतिहास की उस रात का प्रतीक बन चुका है। ये जगह याद दिलाती है कि आजादी का जश्न केवल एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के संघर्ष और भावनाओं से जुड़ा एक ऐतिहासिक एहसास है।

आखिरी बार बेटियों का इंतजार करते रहे कारोबारी पिता, लेकिन अर्थी को मिला सिर्फ Video Call का सहारा, ₹5100 ट्रांसफर कर तोड़ा खून का रिश्ता

India Weather Today: बिहार समेत इन 12 राज्यों में IMD ने भारी बारिश का अलर्ट दिया, मुंबई-राजस्थान में ‘ऑरेंज अलर्ट’

India Weather Update Today (23 June): देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार तेज होने के साथ ही मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 23 जून के लिए देशव्यापी मौसम बुलेटिन जारी करते हुए बड़ा अलर्ट घोषित किया है। मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के कारण आज बिहार समेत देश के 12 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मुंबई और राजस्थान के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है। आइए जानते हैं आज देश के अलग-अलग हिस्सों में कैसा रहने वाला है मौसम का हाल।

मुंबई और राजस्थान के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

मुंबई (IMD Mumbai Warning): मुंबई के लिए विशेष तौर पर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां गरज-चमक के साथ मध्यम से तीव्र दौर की बारिश होने और 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की प्रबल आशंका है। प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।

राजस्थान में महातूफान की आशंका: आज पूरे राजस्थान में 50-60 किमी/घंटे की रफ्तार से विनाशकारी थंडरस्क्वाल चलने का अलर्ट है, जिसकी रफ्तार बढ़कर 70 किमी/घंटे तक भी पहुंच सकती है।

बिहार समेत इन 12 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी वेदर बुलेटिन के मुताबिक आज देश के 12 राज्यों/क्षेत्रों में मूसलाधार मानसूनी बारिश होने वाली है:-

बेहद भारी बारिश: असम और मेघालय में मानसून का सबसे रौद्र रूप दिखेगा, जहां भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी आज मूसलाधार बारिश का कहर जारी रहने वाला है।

भारी बारिश वाले अन्य 10 राज्य

बिहार और ओडिशा: कल मानसून के आगे बढ़ने के बाद आज इन दोनों राज्यों में भारी बारिश का दौर शुरू हो रहा है।

कोंकण व गोवा और मध्य महाराष्ट्र: पश्चिमी तट से सटे इन इलाकों में भारी मानसूनी बारिश होगी।

दक्षिण भारत: तटीय कर्नाटक, केरल व माहे और तेलंगाना में भारी बारिश का कड़ा अनुमान है।

पूर्वोत्तर भारत: अरुणाचल प्रदेश के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के अलग-अलग हिस्सों में भारी वर्षा की चेतावनी है।

दिल्ली-NCR समेत देश के 21 राज्यों में आंधी-तूफान और बिजली का कहर

देश के एक बहुत बड़े हिस्से में आज तेज आंधी-पानी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार वाली हवाओं और गरज-चमक के साथ इन राज्यों में मौसम खराब रहेगा।

हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश (उत्तराखंड समेत) और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और गंगीय पश्चिम बंगाल, गुजरात रीजन, कोंकण एवं गोवा, पूरे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिल नाडु, पुडुचेरी व कराइकल और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के साथ हिमाचल प्रदेश और आंतरिक कर्नाटक में 30-40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना है।

विदर्भ में हीटवेव और गर्म रात का टॉर्चर जारी

जहां एक तरफ देश का बड़ा हिस्सा मानसून की फुहारों से भीग रहा है। वहीं कुछ इलाकों में गर्मी का टॉर्चर अभी भी बरकरार है। विदर्भ के कुछ हिस्सों में आज भीषण से अत्यधिक भीषण लू की स्थिति बनी रहेगी। इसके साथ ही यहां रातें भी बेहद असहज और गर्म रहने वाली हैं। पूर्वी यूपी, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के अलग-अलग पॉकेट्स में आज भी लू का असर देखने को मिलेगा।