नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

हिमालय की तबाही भारत की चौखट तक पहुँच गई।
नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद त्रिशूली और नारायणी नदियों में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा, जो गंडक नदी के रास्ते बिहार पहुँचा।

वाल्मीकिनगर में इंजीनियरों ने 57 साल पुराने गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए, और करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया, ताकि अचानक बढ़े पानी के दबाव को संभाला जा सके।

हालांकि, निचले इलाकों के कई गांवों में बाढ़ आई और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाना पड़ा।
फिर भी, इस पुराने Engineering Marvel ने बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई।

Gandak barrage protecting Bihar from Nepal floods, how Gandak Barrage controls floodwaters in Bihar, Nepal flood impact on Bihar Gandak River, Gandak Barrage Valmikinagar flood control Bihar flood protection from Nepal floodwaters.

Music Vine: CKSFLC4KFG1IEXTB

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

यह भी पढ़ें: Bihar Mystery Fish: नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अजीब मछलियां, इनको खाते ही हो रहीं बड़ी दिक्कतें! सरकार ने अब ये बताया

Bihar Mystery Fish: नेपाल की बाढ़ के साथ बिहार पहुंची अजीब मछलियां, इनको खाते ही हो रहीं बड़ी दिक्कतें! सरकार ने अब ये बताया

Bihar Mystery Fish: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार की नदियों में सीमा पार से बहकर आ रही अज्ञात और अजीब किस्म की मछलियों ने हड़कंप मचा दिया है। बाढ़ के पानी के साथ आई इन मछलियों को खाने के बाद लोगों के बीमार पड़ने की खबरें सामने आ रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने अडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसी मछलियों को खाने से से बचने की सख्त हिदायत दी है।

मछलियां क्यों बन रही हैं खतरनाक और बीमारी की क्या है वजह?

मत्स्य विभाग के मुताबिक बाढ़ के दौरान मछलियां तालाबों, झीलों, नदियों और जलाशयों से निकलकर पानी के तेज बहाव के साथ लंबी दूरी तय करती हैं। इस दौरान ये मछलियां कीचड़, गंदे नाले, सड़े-गले शवों और दूसरे हानिकारक प्रदूषकों के लगातार संपर्क में रहती हैं। इस वजह से ये मछलियां हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और खतरनाक केमिकल से संक्रमित हो जाती हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्यावरण सामान्य न हो जाए और साफ मछलियां उपलब्ध न हों, तब तक बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों का सेवन बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।

सरकार की अपील और लक्षण दिखने पर क्या करें?

बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने नागरिकों से सुरक्षा के मद्देनजर कई दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। कहा गया है कि किसी भी अनजानी या अजीब दिखने वाली मछली को खाने के लिए इस्तेमाल न करें। बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को न खरीदें, न बेचें और न ही भोजन के रूप में इस्तेमाल करें। बिना विभागीय जांच और वेरिफिकेशन के किसी भी अनजान मछली को खाने लायक न समझें।

अगर ऐसी मछली खाने के बाद उल्टी, दस्त/डायरिया, पेट दर्, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं तो तुरंत अस्पताल जाएं या डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही ये भी कहा गया है कि ऐसी असामान्य मछलियां दिखने पर तुरंत जिला मत्स्य अधिकारी या स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें।

पश्चिमी चंपारण में जागरूकता अभियान

अनजान मछलियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन सक्रिय हो गया है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी चंपारण की जिला मत्स्य अधिकारी नूतन ने बताया कि क्षेत्र में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल की बाढ़ से आ रही मछलियां अत्यधिक संक्रामक हैं और इनमें कई बीमारियां फैली हुई हैं। इनको खाने से पेट में तेज दर्द, उल्टी और पेचिश जैसे गंभीर लक्षण उभर रहे हैं। प्रशासन की ओर से विक्रेताओं को ऐसी मछलियां न बेचने और आम जनता को इन्हें न खरीदने व न खाने की सलाह दी जा रही है।

उधर नेपाल पुलिस ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक निर्देश जारी कर अपने नागरिकों से बाढ़ के पानी में बहकर आई मछलियों और अन्य नदी आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन न करने का अनुरोध किया है।

नेपाल में बाढ़ से 1127 लोगों की मौत, बिहार में अलर्ट

नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ की वजह से नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। शवों के बरामद होने का सिलसिला अभी भी जारी है। नेपाल की नदियों में जलस्तर बढ़ने की वजह से निचले इलाकों में स्थित बिहार में हाई अलर्ट जारी है।

यह भी पढ़ें: राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, ऑपरेशन सिंदूर से भी रहा है नाता

Bihar Teacher Recruitment 4.0: 21 सितंबर से शुरू होंगे बिहार टीआरई 4 के लिए आवेदन? सरकार ने बढ़ाए म्यूजिक टीचर के पद

Bihar Teacher Recruitment 4.0: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने जल्द ही स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण (TRE-4.0) की शुरुआत कर सकता है। आयोग ने मंगलवार शाम को बताया कि चौथे चरण की स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन 21 सितंबर से शुरू हो सकता है। बिहार टीआरई 4.0 के लिए आवेदन की शुरुआत एक औपचारिक संशोधित विज्ञापन जारी होने और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में जरूरी बदलावों के बाद हो सकता है।

यह अपडेट बीपीएससी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध था। ट्वीट में लिखा है, “एडवरटाइजमेंट नंबर-14/2026, चौथे फेज के स्कूल टीचर रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (TRE-4.0) के तहत, स्कूल टीचर के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया, संशोधित विज्ञापन और ऑनलाइन आवेदन में जरूरी बदलावों के बाद, तारीख-21.09.2026 से शुरू होने की संभावना है।”

बीपीएससी टीआरई भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग स्कूल स्तर पर 32388 टीचिंग पद शामिल होंगे। कुल वैकेंसी में से, क्लास 1 से 5 के लिए 3,847 पोस्ट, क्लास 6 से 8 के लिए 8,563, क्लास 9 और 10 के लिए 3,877, और क्लास 11 और 12 के लिए 16,101 पोस्ट तय की गई हैं।

राज्य भर के सरकारी स्कूलों में 32,388 टीचर पदों को भरने के उद्देश्य से बीपीएससी टीआरई 4.0 आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले, 31 अगस्त को, बीपीएससी ने टीआरई 4.0 के लिए आवेदन प्रक्रिया को टालने का ऐलान किया था। जबकि आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होने वाला था।

आधिकारिक रिलीज में कहा गया था, “शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत 1 सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण के स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4.0) के तहत स्कूल शिक्षकों के कुल 32,388 खाली पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रोसेस में बदलाव की वजह से टाल दिए गए हैं। इस विज्ञापन से जुड़ी तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी।” शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक राज्य के ढेरों उम्मीदवार कई मुख्य मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। इसमें एग्जाम पैटर्न में बदलाव और नेगेटिव मार्किंग लागू करना शामिल था। विरोध कर रहे उम्मीदवारों से बातचीत के बाद, राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की कि टीआरई 4.0 एक ही चरण में आयोजित किया जाएगा।

टीआरई 4.0 की वैकेंसी बढ़ाई गई

राज्य सरकार ने उम्मीदवारों की म्यूजिक टीचर के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग के बाद, पदों की संख्या 111 बढ़ा दी।

IBPS RRB Recruitment 2026: 13000 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए आईबीपीएस ने जारी किया नोटिफिकेशन, आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन शुरू

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया ‘नो-ईटिंग’ अलर्ट!

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया 'नो-ईटिंग' अलर्ट!

Bihar no eating fish alert

Bihar no eating fish alert: नेपाल में हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर दिखाई दे रहा है। नेपाल की नदियों से बहकर विशालकाय और असामान्य वजन वाली मछलियां उत्तर बिहार की गंडक (Gandak River) और कोसी नदियों में पहुंच गई हैं।

 

स्थानीय लोग और मछुआरे इन विशाल मछलियों को पकड़ने के लिए नदियों के किनारे जुट रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन मछलियों को पकड़ने और खाने पर सख्त रोक लगा दी है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

गंडक नदी में अचानक कैसे आईं ये विशाल मछलियां?

नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी, त्रिशूली और गंडकी नदी प्रणालियों में भीषण फ्लैश फ्लड आया।

  • नेपाल के हैचरी और प्राकृतिक जलाशयों से बहाव : नेपाल के ऊपरी इलाकों में स्थित बड़े मत्स्य पालन केंद्रों (Fish Farms/Hatcheries) और प्राकृतिक झीलों के तटबंध बाढ़ में बह गए।
  • तेज बहाव के साथ भारत में प्रवेश : भारी पानी के बहाव और गाद (Sedimentation) के साथ 10 किलो से लेकर 40-50 किलो तक की विशालकाय मछलियां बहकर बिहार के वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के मैदानी इलाकों में आ गईं।

प्रशासन क्यों कर रहा है इन मछलियों को खाने से मना?

विशालकाय मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में इन्हें खाने की होड़ मच गई है, लेकिन प्रशासन और जिला मत्स्य अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण निम्नलिखित हैं:

 

(A) पानी में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं का मिश्रण (Heavy Metal Contamination)

नेपाल में आई बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चट्टानों, खदानों के मलबे और औद्योगिक कचरे को बहाकर लाई है। गंडक नदी में बहकर आ रही मछलियों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा अत्यधिक होने की आशंका है, जो मानव शरीर के लिए विषैले साबित हो सकते हैं।

 

(B) दूषित और सड़ी हुई मछलियों का खतरा (Bacterial Contamination)

बाढ़ के तीव्र बहाव में दम घुटने (Oxygen Depletion) और पत्थरों से टकराने के कारण कई मछलियां रास्ते में ही मर चुकी थीं या घायल हो गई थीं। पानी में पड़े रहने से इनमें ई-कोलाई (E-coli) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक जीवाणु पनप चुके हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से:

  • फूड पॉइज़निंग (Food Poisoning)
  • पेट में गंभीर संक्रमण और उल्टी-दस्त
  • लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

(C) एलियन/इन्वेंसिव स्पीशीज (Invasive Species) का खतरा

प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि नेपाल के हैचरी से बहकर आई कुछ मछलियां 'सकर-माउथ कैटफिश' (Sucker-mouth Catfish) या 'थाई मांगुर' जैसी विदेशी नस्ल की हो सकती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से विषाक्तता होती है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और एडवाइजरी

  • नदी घाटों पर धारा 144 व पुलिस बल : वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में लोगों को पानी के पास जाने और जाल बिछाने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • बाजारों में बिक्री पर रोक : स्थानीय बाजारों में नेपाल से बहकर आई संदिग्ध मछलियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
  • सैंपलिंग और लैब जांच: मत्स्य विभाग ने इन मछलियों के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे हैं, ताकि पानी और मछली में किसी भी प्रकार के टॉक्सिन (विष) की पुष्टि की जा सके।

नेपाल की बाढ़ से आई ये विशाल मछलियां पहली नजर में भले ही एक अवसर लग रही हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने तक इन मछलियों का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और नदी से पकड़ी गई संदिग्ध मछलियों को खाने से पूरी तरह परहेज करें।

Delhi SIR List: दिल्ली की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कटे 47 लाख नाम! अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं तो जानिए 30 सितंबर तक कैसे करें आवेदन

Delhi SIR List: दिल्ली के मतदाताओं के लिए वोटर लिस्ट से जुड़ी यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप दिल्ली में मतदाता हैं तो सबसे पहले यह सुनिश्चित कर लें कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम दर्ज है या नहीं। इसके लिए दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO Delhi) की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम मिल जाता है तो फिलहाल आपको कोई दूसरा कदम उठाने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर नाम लिस्ट में नहीं है तो उसे शामिल कराने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर अप्लाई करना होगा।

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत सोमवार (31 अगस्त) को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 1.45 करोड़ वोटरों में से 47 लाख से अधिक लोगों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, वे 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवाने का अनुरोध कर सकते हैं। फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी की जाएगी।

वोटर अपना नाम कैसे चेक कर सकते हैं?

वोटर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) और चुनाव आयोग के पोर्टल के जरिए ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम चेक कर सकते हैं:-

EPIC (वोटर ID) नंबर से खोजें: राज्य के तौर पर दिल्ली चुनकर और EPIC नंबर एवं कैप्चा कोड डालकर नाम खोजा जा सकता है।

मोबाइल नंबर से खोजें: दिल्ली और अपनी पसंद की भाषा चुनने के बाद, चुनाव आयोग के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालकर नाम देखा जा सकता है।

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम न हो तो क्या करें?

अगर किसी वोटर या निवासी का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। योग्य लोग 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच दावा (क्लेम) करके अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। इसके लिए उन्हें तय डिक्लेरेशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ फॉर्म-6 जमा करना होगा। जिन लोगों ने अपना घर स्थायी रूप से बदल लिया है और अपना नाम नए निर्वाचन क्षेत्र में ट्रांसफर करवाना चाहते हैं, वे अपने नए पते वाले इलाके में फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

सबसे पहले ऐसे चेक करें अपना नाम

वोटर लिस्ट में नाम चेक करने के लिए दिल्ली के चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाना होगा। वहां नाम देखने के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:-

विकल्प 1: EPIC नंबर से करें सर्च

अगर आपके पास वोटर आईडी का EPIC नंबर है तो उसके जरिए अपना नाम खोज सकते हैं। इसके लिए संबंधित जानकारी भरनी होगी और दिल्ली का राज्य/क्षेत्र चुनकर अपना EPIC नंबर दर्ज करना होगा। इसके अलावा मतदाता अपने व्यक्तिगत विवरण के जरिए भी नाम खोज सकता है। इसके लिए सामान्य तौर पर ये जानकारियां मांगी जा सकती हैं:-

नाम

वोटर आईडी में दर्ज रिश्तेदार का नाम

जन्म तिथि

उम्र

लिंग

विधानसभा क्षेत्र

मोबाइल नंबर के जरिए भी रजिस्टर्ड मतदाता की जानकारी खोजने का विकल्प दिया गया है। सर्च करने के बाद सिस्टम पर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मतदाता के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी वाला पेज दिखाई देगा, जिसे प्रिंट भी किया जा सकता है।

विकल्प 2: वोटर लिस्ट की PDF में नाम खोजें

दूसरे विकल्प के तहत जारी वोटर लिस्ट की PDF डाउनलोड करके उसमें अपना नाम खोजा जा सकता है। इसके लिए राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र और लिस्ट की भाषा जैसी जानकारी चुननी होगी। इसके बाद संबंधित बूथ की वोटर लिस्ट की PDF तैयार होगी। इस PDF में अपना नाम और अन्य डिटेल्स खोजे जा सकते हैं।

अगर ड्राफ्ट लिस्ट में नाम मिल गया तो?

अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद है तो फिलहाल किसी और कार्रवाई की जरूरत नहीं है। हालांकि अपने नाम के साथ दर्ज डिटेल्स जैसे नाम, पता और अन्य मतदाता संबंधी जानकारी को ध्यान से जांच लेना बेहतर है।

अगर नाम नहीं है तो घबराएं नहीं

अगर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आपका नाम नहीं दिखाई देता है तो आपके पास उसे शामिल कराने का मौका है। दी गई जानकारी के अनुसार ऐसे मतदाता 31 अगस्त से 30 सितंबर के बीच नाम शामिल कराने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके लिए अपने स्थानीय BLO (Booth Level Officer) से संपर्क करना होगा।

नाम जोड़ने के लिए Form 6 भरना होगा

अगर किसी पात्र वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो उसे फॉर्म- 6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करना होगा। Form 6 के साथ निर्धारित घोषणा पत्र (Declaration Form) और जरूरी सहायक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। यानी केवल अप्लाई करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पता बदल गया है तो Form 8

अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में है लेकिन आपने अपना निवास स्थान बदल लिया है, तो इसके लिए Form 8 का इस्तेमाल किया जाएगा। Form 8 के जरिए विधानसभा क्षेत्र के अंदर या किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में निवास स्थान बदलने की स्थिति में आवश्यक बदलाव कराया जा सकता है। इसी फॉर्म के जरिए मतदाता डिटेल्स में सुधार के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

गलत जानकारी होने पर भी ध्यान दें

अगर वोटर लिस्ट में नाम तो है लेकिन नाम, व्यक्तिगत डिटेल्स या अन्य जानकारी में किसी तरह की गड़बड़ी है, तो उसे भी नजरअंदाज न करें। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत संबंधित सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। बताई गई प्रक्रिया के मुताबिक, नाम या अन्य डिटेल्स में गलतियां पाए जाने पर निर्वाचन आयोग संबंधित लोगों को नोटिस भी भेज सकता है।

ये भी पढ़ें- Bihar-Jharkhand MoU: अमित शाह की मौजूदगी में बिहार और झारखंड के बीच खत्म हुआ 25 साल पुराना सोन जल विवाद, क्या था ये विवाद और क्या हुआ समझौता?

एक नजर में पूरी प्रक्रिया

  • नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में है तो फिलहाल कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाएं।
  • अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो स्थानीय BLO से संपर्क करें और निर्धारित अवधि में दावा करें।
  • नया नाम जोड़ना है तो Form 6 जमा करें और उसके साथ जरूरी दस्तावेज लगाएं।
  • पता बदलना/डिटेल्स में सुधार करना है तो Form 8 के जरिए आवेदन करें।
  • फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को जारी किया जाएगा।

नेपाल बाढ़: त्रासदी से पहले टीचर ने बजाई ‘खतरे की घंटी’! तुरंत खाली कराई स्कूल, बसें रुकवाईं और बचा ली 1,643 बच्चों की जान

Nepal Floods: पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर से अचानक आई भयंकर बाढ़ ने कुछ ही मिनटों में तबाही मचाकर रख दी। पानी, बर्फ, चट्टानों और कीचड़ की करीब 9 मीटर ऊंची लहर ने उत्तर-मध्य नेपाल की त्रिशूली घाटी में कई गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयावह स्थिति के बीच एक टीचर और प्रिंसिपल की सूझबूझ ने 1,643 बच्चों की जान बचा ली। 47 वर्षीय अंग्रेजी टीचर एवं प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बिना किसी आधिकारिक आदेश का इंतजार किए ऐसे फैसले लिए, जिनसे स्कूल में एक बड़ी त्रासदी टल गई।

न्यूज 18 के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल में करीब 900 बच्चे मौजूद थे। वहीं, करीब 700 अन्य बच्चे पैदल या बसों से स्कूल पहुंचने के रास्ते में थे। इसी दौरान राजेंद्र दवाड़ी को ऊपर की तरफ करीब पांच मील दूर बेत्रावती में रहने वाले अपने एक दोस्त का फोन आया। दोस्त ने घबराई हुई आवाज में बताया कि नदी ने उनके गांव को तबाह कर दिया है। पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ रहा है।

उसने दवाड़ी से तुरंत भागने को कहा। शुरुआत में दवाड़ी को लगा कि स्कूल की तीन मंजिला कंक्रीट की इमारत सुरक्षित है। स्कूल नदी के तल से करीब 60 मीटर ऊंचाई पर था। लेकिन कुछ ही सेकंड बाद एक घबराया हुआ अभिभावक स्कूल पहुंचा और बताया कि पानी असामान्य गति से बढ़ रहा है। फिर दवाड़ी ने एक पल भी बर्बाद नहीं किया।

तुरंत बजाई स्कूल की घंटी

उन्होंने किसी सरकारी आदेश का इंतजार नहीं किया। तुरंत स्कूल की घंटी बजाई और सभी को क्लासेस खाली कराने का निर्देश दे दिया। टीचर्स बच्चों को तेजी से सुरक्षित स्थान की ओर निकालने लगे। इसी दौरान दवाड़ी ने स्कूल की ओर आ रही बसों को फोन करना शुरू किया। इन बसों में करीब 80-80 बच्चे सवार थे। दवाड़ी ने लगभग सभी बस चालकों से संपर्क कर लिया और उन्हें तत्काल वापस लौटने का निर्देश दिया। लेकिन एक बस ऐसी थी, जिसके ड्राइवर से संपर्क नहीं हो सका। तभी दवाड़ी की नजर उस बस पर पड़ी।

बस लोहे के पुल से होकर स्कूल की तरफ आ रही थी। उधर स्कूल परिसर में पानी तेजी से घुस रहा था। दवाड़ी ने बस चालक को दूर से ही चिल्लाकर और हाथों से इशारा करके वापस लौटने को कहा। ड्राइवर ने तुरंत बस को पीछे करना शुरू किया। बस किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंच गई। इसके कुछ ही पल बाद वह पुल तेज बहाव के कारण नदी में ढह गया। अगर बस कुछ सेकंड और आगे बढ़ जाती, तो उसमें सवार करीब 80 बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी।

घबराई बच्ची को बाइक से पहुंचाया सुरक्षित स्थान

बाढ़ का पानी बढ़ता देख बच्चे पैदल ही ऊंचाई वाले स्थानों की ओर भागने लगे। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। इसी दौरान एक छोटी बच्ची को तेज घबराहट का दौरा पड़ा और वह आगे नहीं बढ़ पा रही थी। स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसकी मदद की और उसे मोटरसाइकिल के पीछे बैठाकर ढलान की ओर सुरक्षित ऊंचाई तक पहुंचाया।

राजेंद्र दवाड़ी की तेजी से लिए गए फैसलो जैसे स्कूल खाली कराने, बसों को वापस बुलाने और आखिरी बस को पुल पार करने से रोकने वाले एक्शन ने उस दिन एक बेहद बड़ी त्रासदी को टाल दिया। एक टीचर की समय पर दिखाई गई समझदारी और साहस ने 1,643 बच्चों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया।

ये भी पढ़ें-Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की ‘घास ट्रेन’, सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ

Indian Railways timing: भारतीय रेलवे ने 2 ‘वंदे भारत’ ट्रेनों की टाइमिंग बदली, सफर से पहले चेक करें नया शेड्यूल

Indian Railways timing: भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट जारी किया है। ‘वाराणसी-रांची’ और ‘वाराणसी-देवघर’ रूट पर चलने वाली दो ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ ट्रेनों के समय में बदलाव किया गया है। हमारे सहयोगी ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, दोनों ट्रेनों की नई टाइमिंग 2 सितंबर 2026 से लागू होगी।

ऐसे में इन ट्रेनों से यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से पहले नया शेड्यूल जरूर देख लेना चाहिए। दोनों वंदे भारत ट्रेनों के वाराणसी से रवाना होने के समय में 10-10 मिनट की कटौती की गई है। इसलिए 2 सितंबर के बाद यात्रा करने वाले यात्रियों को पुराने समय के आधार पर स्टेशन पहुंचने से बचना चाहिए।

‘वाराणसी-रांची वंदे भारत’ की टाइमिंग बदली

ट्रेन नंबर 20888/20887 वाराणसी-रांची-वाराणसी ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ का संचालन दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मार्च 2024 को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। यह देश की 49वीं ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ थी। 18 मार्च 2024 से इसका नियमित परिचालन शुरू हुआ।

यह ट्रेन मंगलवार को छोड़कर सप्ताह के बाकी सभी दिन चलती है। वाराणसी से रांची के बीच करीब 536 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन लगभग 7 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है। रास्ते में ट्रेन पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम, गया, कोडरमा, हजारीबाग रोड, पारसनाथ, बोकारो स्टील सिटी और मुरी जैसे रेलवे स्टेशनों पर रुकती है।

नई टाइमिंग इस प्रकार है:-

  • फिलहाल ट्रेन नंबर 20888 वाराणसी से शाम 4:05 बजे रवाना होती है। अब 2 सितंबर से यह ट्रेन शाम 3:55 बजे वाराणसी से रवाना होगी। यानी इसके डिपार्चर टाइमिंग में 10 मिनट का बदलाव किया गया है।
  • हालांकि, वाराणसी के आगे ट्रेन के शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा। इस ट्रेन में यात्रियों के लिए AC चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा है। वाराणसी से रांची तक एसी चेयर कार का किराया 1,470 रुपये, जबकि एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 2,695 रुपये है।

वाराणसी-देवघर वंदे भारत भी 10 मिनट पहले चलेगी

  • रेलवे ने ट्रेन नंबर 22500 वाराणसी-देवघर वंदे भारत एक्सप्रेस के समय में भी बदलाव किया है। इसका नया टाइमटेबल भी 2 सितंबर 2026 से लागू होगा।
  • अभी यह ट्रेन वाराणसी से सुबह 6:20 बजे रवाना होती है। अब यह सुबह 6:10 बजे रवाना होगी। यानी यात्रियों को अब ट्रेन पकड़ने के लिए 10 मिनट पहले स्टेशन पहुंचना होगा।
  • भारतीय रेलवे के मुताबिक, वाराणसी के बाद दूसरे स्टेशनों पर ट्रेन की टाइमिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

ये भी पढ़ें- Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की ‘घास ट्रेन’, सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ

Bihar Train News: बाढ़ में डूबे गांव तो मवेशियों के लिए दौड़ी बिहार की ‘घास ट्रेन’, सुबह निकलते हैं किसान, शाम को लौटते हैं गठरियों के साथ

Bihar Train News: बिहार के खगड़िया जिले में जब बाढ़ दस्तक देती है, तो एक खास पैसेंजर ट्रेन इलाके में चर्चा का विषय बन जाती है। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, हालांकि इंडियन रेलवे के रिकॉर्ड में इस ट्रेन का नाम ‘समस्तीपुर-सहरसा पैसेंजर’ है। लेकिन स्थानीय लोग इसे प्यार से ‘घास ट्रेन’ भी कहते हैं। बाढ़ के मुश्किल दिनों में यह ट्रेन सिर्फ यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम नहीं करती। बल्कि सैकड़ों पशुपालकों और उनके मवेशियों के लिए ‘लाइफलाइन’ बन जाती है।

जब हर तरफ पानी भर जाता है तब सैकड़ों पशुपालक सुबह-सुबह इस पैसेंजर ट्रेन में सवार होकर सूखे इलाकों की ओर जाते हैं। वे चिलचिलाती धूप में अपने मवेशियों के लिए हरा चारा काटते हुए दिन बिताते हैं। फिर शाम को वे सभी भारी बंडलों के साथ रेलवे स्टेशन लौट आते हैं।

बाढ़ में मवेशियों के सामने चारे का संकट

रिपोर्ट के मुताबिक, खगड़िया के मानसी प्रखंड के निचले इलाकों में हर साल बाढ़ का पानी भर जाता है। इस दौरान धमसारा घाट, मटिहानी और रोहियार जैसे गांवों के आसपास के बड़े हिस्से जलमग्न हो जाते हैं। खेत और चरागाह पानी में डूब जाते हैं। पशुपालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मवेशियों के लिए हरे चारे का इंतजाम करना होती है। मवेशियों पर निर्भर परिवारों के लिए उन्हें भूखा रखना संभव नहीं होता। ऐसे में पशुपालक रोजाना बाढ़ प्रभावित इलाके से बाहर निकलकर सूखे एरिया का रुख करते हैं, जहां उन्हें हरा चारा मिल सके।

सुबह ट्रेन में सवार होते हैं सैकड़ों पशुपालक

सुबह होते ही बड़ी संख्या में पशुपालक इस पैसेंजर ट्रेन में सवार हो जाते हैं। उनका मकसद किसी शहर में खरीदारी या काम के लिए जाना नहीं, बल्कि अपने मवेशियों के लिए चारा जुटाना होता है। ट्रेन उन्हें उन इलाकों तक पहुंचाने में मदद करती है जहां बाढ़ का असर कम है। और वहां हरा चारा उपलब्ध है।

Clipboard11news

वहां पहुंचने के बाद पशुपालक दिनभर तेज धूप और गर्मी के बीच खेतों और खुले इलाकों से हरी घास काटते हैं। यह उनके लिए रोज का संघर्ष है। लेकिन अपने मवेशियों को बचाए रखने के लिए वे इस मेहनत को मजबूरी के साथ-साथ जिम्मेदारी के तौर पर भी निभाते हैं।

शाम होते ही ट्रेन का नजारा हो जाता है बिल्कुल अलग

दिनभर चारा काटने के बाद शाम को यही पशुपालक भारी-भारी गठरियों और बोरियों के साथ स्टेशन लौटते हैं। इसके बाद जब ट्रेन फकीया की ओर वापस रवाना होती है, तो इसका नजारा किसी आम पैसेंजर ट्रेन जैसा नहीं रहता। ट्रेन के दरवाजों से लेकर शौचालयों तक, लगभग हर जगह हरा चारा नजर आता है। डिब्बों में बड़ी-बड़ी गठरियां और बोरियां रखी होती हैं। उनके बीच बैठकर पशुपालक अपने घरों की ओर लौटते हैं।

इसी वजह से पड़ा नाम ‘घास ट्रेन’

स्थानीय लोगों के बीच यह ट्रेन धीरे-धीरे इतनी मशहूर हो गई कि इसका आधिकारिक नाम पीछे छूट गया और इसे ‘घास ट्रेन’ के नाम से पहचान मिलने लगी। न्यूज 18 के मुताबिक, बाढ़ के दौरान जब गांवों में पशुओं के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो जाता है, तब यही ट्रेन पशुपालकों को सूखे इलाकों तक पहुंचाने और वहां से चारा वापस लाने का जरिया बनती है।

पशुपालकों और मवेशियों दोनों के लिए जीवनरेखा

फकीया इलाके के पशुपालकों के लिए यह ट्रेन महज एक यात्री ट्रेन नहीं है। बाढ़ जैसे कठिन हालात में यह उनके परिवार और मवेशियों दोनों को संभालने में अहम भूमिका निभाती है। एक तरफ जहां देश में ‘वंदे भारत’ और ‘राजधानी एक्सप्रेस’ जैसी ट्रेनों की रफ्तार और सुविधाओं की चर्चा होती है।

ये भी पढ़ें- IMD Weather forecast: कल का मौसम: 5 सितंबर तक इन राज्यों में आफत की बारिश का अलर्ट, यूपी से उत्तराखंड तक मूसलाधार बरसात की चेतावनी

वहीं, बिहार के इस बाढ़ प्रभावित इलाके में एक साधारण पैसेंजर ट्रेन अपनी अलग ही वजह से लोगों के लिए बेहद खास है। इसीलिए हर साल बाढ़ के मौसम में जब यह ट्रेन हरे चारे की गठरियों से भरकर लौटती है, तो लोग इसे फिर उसी प्यार और सम्मान से ‘घास ट्रेन’ कहकर पुकारते हैं।

Heavy Rain Alert: कहीं भारी बारिश तो कहीं लैंडस्लाइड का खतरा! IMD ने इन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट

Weather Alert: देशभर में मौसम का मिजाज एक बार फिर बिगड़ने वाला है। देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां तेज होने वाली है, जिससे आने वाले दिनों में कई राज्यों में मौसम करवट ले सकता है। मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, पूर्वी भारत में बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, वहीं पश्चिम बंगाल के आसपास के क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय हो रहा है, वहीं ओडिशा के पास कम दबाव का क्षेत्र बनने से आसपास के इलाकों में बारिश बढ़ सकती है। इन मौसमी परिस्थितियों के कारण कई राज्यों में बादल छाए रहने और अलग-अलग जगहों पर बारिश होने के आसार हैं

आईएमडी ने आज दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल समेत 16 राज्यों के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में भारी बारिश के साथ 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में बारिश से भूस्खलन और नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा है। कुछ जगहों पर ओले भी गिर सकते हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनी मानने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

इन राज्यों में होगी तेज बारिश

मानसून की सक्रियता के चलते देश के कई राज्यों में मौसम बिगड़ने के आसार हैं। मौसम विभाग ने 30 अगस्त को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में तेज बारिश और आंधी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में भी बारिश के कारण परेशानी बढ़ सकती है। वहीं झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु में भी कई जगहों पर जोरदार बारिश होने की संभावना है। खासतौर पर पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है, जिससे लोगों को जलभराव और अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

कैसा होगा दिल्ली का मौसम

दिल्ली में मौसम एक बार फिर बदलता हुआ नजर आ सकता है। राजधानी के कई हिस्सों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। बारिश के दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं, जिनकी रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। दिल्ली में अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। लोगों को बारिश और तेज हवा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार में 30 अगस्त को मौसम खराब रहने की संभावना है। यूपी के कई जिलों में तेज बारिश के साथ आंधी चल सकती है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।