देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी! 30 बैंक लॉकरों की जांच में जुटी SIT, सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

Ram Mandir Chanda Chori Case: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़ी जांच अब केवल दस्तावेजों की पड़ताल तक सीमित नहीं रह गई है। विशेष जांच दल (SIT) ने मामले में संपत्तियों और बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सभी 30 बैंक लॉकरों में रखी सामग्री का सत्यापन किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लॉकरों में वास्तव में कितनी और कौन-कौन सी वस्तुएं मौजूद हैं। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि क्या उनका डिटेल्स राम मंदिर ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज इन्वेंट्री से मेल खाता है या नहीं।

‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच टीम ने मंगलवार (26 अगस्त) को भी अपनी कार्रवाई जारी रखी। पूरी प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्ड किया जा रहा है। लॉकर खोलने से लेकर उसमें रखी प्रत्येक वस्तु की जांच तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। टीम वस्तुओं की पहचान, उनकी संख्या, उपलब्धता और स्थिति की पुष्टि करने के साथ-साथ संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड से उनका मिलान कर रही है।

रिकॉर्ड और वास्तविक सामान का होगा मिलान

फोरेंसिक सत्यापन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज सामान और लॉकरों में वास्तव में मौजूद सामान में कोई अंतर तो नहीं है। टीम प्रत्येक वस्तु को रिकॉर्ड में दर्ज विवरण से क्रॉस-चेक कर रही है।

जांच के दौरान केवल सामान की गिनती ही नहीं की जा रही, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वस्तु किस रिकॉर्ड में दर्ज है और मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। इस पूरी प्रक्रिया के आधार पर एक विस्तृत फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

हर सामान का बनाया जा रहा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड

जांच की खास बात यह है कि प्रत्येक वस्तु के सत्यापन के दौरान ऑडियो-वीडियो साक्ष्य भी तैयार किया जा रहा है। सामान का डिटेल्स, उसकी पहचान, रिकॉर्ड में उसकी एंट्री और मौके पर उसकी मौजूदगी को डिजिटल तरीके से दर्ज किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, इन डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जा रहा है, ताकि भविष्य में न्यायिक कार्यवाही के दौरान उनकी प्रामाणिकता पर सवाल न उठे। इस तरह जांच टीम केवल कागजी रिकॉर्ड पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बल्कि भौतिक साक्ष्यों का भी डिजिटल दस्तावेज तैयार कर रही है।

पेन ड्राइव में सुरक्षित होंगे जांच के दस्तावेज और वीडियो

फोरेंसिक सत्यापन के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। जांच से जुड़े दस्तावेजों और वीडियो साक्ष्यों को एक पेन ड्राइव में संकलित कर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करने की भी तैयारी की जा रही है। इससे जांच में सामने आए भौतिक साक्ष्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेगा।

सितंबर के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट?

सूत्रों के अनुसार, SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। संभावना जताई जा रही है कि जांच टीम सितंबर के पहले सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर सकती है। वहीं, 2 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक भी प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी बैठक के आसपास SIT अपनी अंतिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में सौंप सकती है।

फिलहाल, 30 बैंक लॉकरों की फोरेंसिक जांच को इस मामले की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इस सत्यापन से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में दर्ज संपत्तियों और वास्तविक रूप से मौजूद सामान के बीच कोई अंतर है या नहीं। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा भी तय हो सकती है।

आरोपियों पर BNS की गलत धाराएं लगाने का वकील का दावा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में आरोपियों की ओर से पेश वकील ने मंगलवार को विशेष अदालत में दावा किया कि पुलिस ने मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गलत धाराओं के तहत की है। आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह ने कहा कि मामले में चोरी और गबन, दोनों की धाराएं लगाई गई हैं। जबकि ये दोनों धाराएं एक साथ लागू नहीं हो सकतीं। सिंह ने अयोध्या के विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में यह दलील दी।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कथित चोरी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसके बाद FIR दर्ज की गई। साथ ही मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया। पुलिस ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए।

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सिंह ने यह भी दलील दी है कि पुलिस ने आरोपियों को लोक सेवक के रूप में पेश किया है। जबकि राम मंदिर ट्रस्ट लोक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने लगाई गई धाराओं में आरोपियों को लोक सेवक बताया और उन पर सार्वजनिक संपत्ति के गबन का आरोप लगाया। सिंह ने बताया कि अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख तय की है।