Braj Mohan Ram: ‘ओडिशा में भी BJP को मजबूत करूंगा’; शपथ ग्रहण से पहले नए राज्यपाल के बयान पर बवाल, जानिए कौन हैं बृज मोहन राम

Braj Mohan Ram: ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल और झारखंड से तीन बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम पदभार संभालने से पहले ही विवादों में घिर गए हैं। ओडिशा की विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) नेराम के इस कथित बयान पर निराशा जताई है कि ‘पद संभालने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।’ एक और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे BJP का असली चेहरा सामने आ गया है। विपक्षी पार्टियों ने मांग की है कि राम को वापस बुलाया जाए।

BJD ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें राम राज्यपाल का पद संभालने के बाद अपनी आगे की कार्ययोजना के बारे में बात करते हुए नजर आ रहे हैं। BJD ने एक बयान में कहा, “पीटीआई के वीडियो में उनकी बातें सुनकर हमें हैरानी हुई, जिसमें वह फिर से कहते हैं कि वह BJP को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। हम इस टिप्पणी की निंदा करते हैं क्योंकि यह टिप्पणी इस तथ्य को दरकिनार करती है कि राज्यपाल पार्टी की राजनीति से ऊपर होते हैं।”

पूर्व सीएम नवीन पटनायक भड़के

ओडिशा के पूर्व सीएम और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने उम्मीद जताई कि वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे। ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “ओडिशा के लोग पार्टी का काम करने के लिए मनोनीत राज्यपाल के उत्साह को देख रहे हैं। उम्मीद है कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ उन्हें ओडिशा के लोगों की सेवा करने का जोश और शक्ति देंगे, जिससे वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखते हुए निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।” उन्होंने पोस्ट में राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया।

कांग्रेस का भी बीजेपी पर हमला

इस बीच, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने X पर एक पोस्ट में कहा, “राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष रूप से संविधान का पालन करना है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के चुनावी हितों को आगे बढ़ाना।” उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों को दलीय राजनीति से ऊपर रहना चाहिए। BJP नेता और तीन बार सांसद रह चुके राम को सोमवार को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राम के बयान पर ओडिशा BJP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बृज मोहन राम ने क्या कहा?

नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने कहा कि वह गरीबों के लिए काम करेंगे। साथ ही बुनियादी मुद्दों के समाधान पर ध्यान देंगे और लोगों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। राम ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ओडिशा तरक्की करे और लोगों को कोई परेशानी न हो। इस दौरान रिपोर्टर ने उनसे काम करने के तरीके को लेकर एक सवाल किया जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं नहीं देखेंगे… वहां (ओडिशा) भी क्या स्थिति है तो वहां भी हम जोड़ेंगे। वहां भी मोर्चा का अपना संगठन है। उसको एक्टिव करके आप अपने बीजेपी के पास में वोट कैसे आए इस पर चिंता करेंगे।” उनके इसी बयान पर सियासी बवाल मच गया है।

बाद में दी सफाई

ओडिशा में ‘बीजेपी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करूंगा’ वाले कथित बयान पर गुरुवार (15अक्टूबर ) को सफाई देते हुए नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने कहा था कि मैं सबके साथ मिलकर काम करूंगा। अब मैं दलीय राजनीति से ऊपर उठ चुका हूं। लेकिन जिस पार्टी से मैं जुड़ा रहा हूं, वह मेरी पूंजी है। उस पार्टी के लिए मेरे मन में हमेशा लगाव और प्रेम रहेगा। लेकिन मैं किसी खास पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा। हम सबके हैं, सब हमारे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं सबके साथ मिलकर इसे निभाऊंगा। शुरुआत में थोड़ा तालमेल बिठाने में समय लगेगा। लेकिन मैं ऐसा कर लूंगा… मैं संवैधानिक पद की मर्यादा के दायरे में रहकर काम करूंगा। एक राजनेता और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बीच फर्क होता है। इसलिए, मुझे इस बात का ध्यान रखते हुए काम करना होगा।”

कौन हैं बृज मोहन राम?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के पलामू जिला निवासी बृज मोहन राम को 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया। वह हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे, जिन्होंने तीन जनवरी 2025 को पदभार संभाला था। राम ने अविभाजित बिहार में 1996, 1998 और 1999 में तीन बार पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य के तौर पर सेवाएं दीं। ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था।

लातेहार से राज्यपाल का सफर

यह क्षेत्र अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से संबंधित बीएस कॉलेज, लोहरदगा से ग्रेजुएट की पढ़ाई की। मीडिया रिपोर्ट्स में उनका पेशा कृषि बताया जाता है। उनके राजनीतिक जीवन की खास बात यह है कि उन्होंने ऐसे दौर में राजनीति में अपनी पहचान बनाई, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था। उस समय पलामू और लातेहार जैसे क्षेत्र अविभाजित बिहार का हिस्सा थे।

विधायक से सांसद बनने और फिर लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहने के बाद राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय है। उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन स्थानीय क्षेत्र से जुड़ा रहा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। उस समय बिहार की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों और BJP के विस्तार का दौर चल रहा था।

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ब्रज मोहन राम ने वर्ष 1991 में अविभाजित बिहार की राजनीति में चुनावी सफलता हासिल की। वह भगवा पार्टी के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। फिर 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। राम की राजनीतिक पहचान में सामाजिक प्रतिनिधित्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने 1996 से 1998 के बीच रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। बाद के वर्षों में भी वह BJP के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय करने में अपनी भूमिका का उल्लेख करते रहे। हाल ही में राज्यपाल नियुक्त होने के बाद उन्होंने कहा कि झारखंड में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय बनाने में उनका योगदान रहा है।

अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले राहुल, प्रियंका

नई दिल्ली। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार की शाम को इंडिया गेट पर जाकर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की और उनके प्रति अपना समर्थन जताया। गौरतलब है कि उत्तराखंड की अंकिता भंडारी एक होटल में रिसेप्शनिस्ट थी, जहां उसे एक वीआईपी को सर्विस देने से मना कर दिया था, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस हत्या में शामिल कथित वीआईपी का नाम सामने नहीं आया।

न्याय के लिए अंकिता भंडारी के माता-पिता इंडिया गेट पर धरना दे रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की है कि सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए और इसे रद्द किया जाए। गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त किया गया था। हालांकि उनका नाम आधिकारिक रूप से कभी सामने नहीं आया है। लेकिन अंकिता का परिवार उन पर सवाल उठाता रहा है।

INDIA Bloc Protest: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार की लड़ाई, INDIA गठबंधन आज सुप्रीम कोर्ट तक करेगा मार्च

INDIA Bloc Protest: INDIA गठबंधन सोमवार, 12 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में एक नया विरोध प्रदर्शन करने जा रहा है। यह विरोध चुनाव में कथित गड़बड़ियों, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से हस्तक्षेप करने की मांग करने की योजना बनाई थी। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पहल की अगुवाई करेंगे।

हालांकि, CJI ने विपक्ष के नेताओं की मुलाकात की मांग को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है, इसलिए उन्हें याचिका दायर करके अदालत का रुख करना चाहिए।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, नेताओं को ईमेल के जरिए एक विस्तृत जवाब भेजा गया, जिसमें इस फैसले के पीछे की वजहें बताई गई थीं। इस जवाब में कहा गया कि इन आरोपों पर प्रशासनिक स्तर पर बात करने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया के जरिए बेहतर ढंग से विचार किया जा सकता है।

बता दें कि यह प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने, भारी सुरक्षा तैनाती और हिंसा के आरोपों के एक दिन बाद हो रहा है।

वहीं, कांग्रेस ने प्रस्तावित आंदोलन को देखते हुए अपने सांसदों से सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने को कहा है।

राहुल गांधी ने केंद्र पर युवाओं को दबाने का आरोप लगाया

INDIA गठबंधन के अगले दौर के विरोध प्रदर्शनों की घोषणा करते हुए, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए पिछले प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं ने छात्रों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की थी।

शनिवार को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट किए, जिसमें उन्होंने ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दिल्ली पुलिस पर “गुंडागर्दी” करने और RSS-BJP कार्यकर्ताओं को प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की छूट देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “अमित शाह की दिल्ली पुलिस ने न केवल खुद गुंडागर्दी की है, बल्कि RSS-BJP के असली गुंडों को महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा करने के लिए खुली छूट और बढ़ावा भी दे रही है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘मोगैंबो’ (फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में अमरीश पुरी का निभाया मशहूर विलेन का किरदार) कहकर संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि युवाओं को दबाने की कोशिशों से उनका गुस्सा और बढ़ेगा।

12 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा एक बार फिर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी, यह आवाज पूरे देश में गूंजेगी – पहले से कहीं ज्यादा जोरदार तरीके से।”

गांधी ने प्रधानमंत्री पर चुनावी गड़बड़ियों और असहमति की आवाज को दबाकर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाया।

दिल्ली के हालात के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा, “आज नई दिल्ली में यह नजारा देखने को मिला: पूरा शहर बंद है, इंटरनेट बंद कर दिया गया है, और पुलिस व बीजेपी के गुंडे छात्रों की पिटाई कर रहे हैं।”

राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री को घेर लिया है और कहा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर कथित तौर पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा, “आज जिन युवाओं और छात्रों पर हमला हुआ, उन्हें न्याय मिलेगा और हमलावरों को माकूल जवाब दिया जाएगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।

CJI ने INDIA ब्लॉक के नेताओं की मुलाकात की अपील ठुकराई

बता दें कि विपक्षी नेताओं ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत से मिलने की योजना बनाई थी। वे उनसे मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इसमें कथित ‘वोट चोरी’, वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी चिंताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दखल देने की अपील की जानी थी।

हालांकि, CJI ने यह कहते हुए मुलाकात की अपील ठुकरा दी कि यह मामला पहले से ही अदालत में विचाराधीन है। उन्होंने नेताओं को सलाह दी कि वे याचिका के जरिए अदालत का दरवाजा खटखटाएं।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें चुनावी प्रक्रिया को लेकर ऐसी ही चिंताएं जताई गई थीं।

दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद INDIA ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन

यह प्रस्तावित मार्च शनिवार को दिल्ली में की गई कड़ी सुरक्षा कार्रवाई के बाद हो रहा है, जब अधिकारियों ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया था।

विपक्षी नेताओं और CJP समर्थकों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेना गैर-कानूनी था, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए एहतियातन गिरफ्तारियां की गई थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को कई जगहों पर करीब 7,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था और बाद में उन सभी को रिहा कर दिया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों में AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, CPI(M) नेता पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार शामिल थे।

कार्यकर्ताओं के आरोपों के मुताबिक, CJP के नेता अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी विमान से उतारने के बाद हिरासत में लिया गया था।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 50,000 रुपये का बेल बॉन्ड और जमानतदार का बॉन्ड जमा करने के बाद तीनों को रिहा कर दिया गया।

हालांकि, तीनों नेताओं ने अपनी हिरासत को गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आशुतोष रंका ने कहा, “हम कोई खतरनाक अपराधी नहीं हैं; हम विरोध करने के लिए नरेंद्र मोदी या अमित शाह के घर नहीं जा रहे हैं। तय जगह पर विरोध करने से शांति भंग नहीं होती।”

सौरव दास ने SIR के मुद्दे पर राजनीतिक एकजुटता की अपील करते हुए कहा: “विचारधारा से परे, सभी राजनीतिक दलों को SIR के मुद्दे पर एकजुट होना चाहिए। अगर वोट देने का अधिकार छीन लिया जाता है, तो यह किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को सामान्य सेवाएं जारी रखने का निर्देश दिया

विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगाई गई पाबंदियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। यह नोटिस मेट्रो और ट्रेन सेवाओं के संबंध में कोर्ट के निर्देशों के कथित उल्लंघन पर अवमानना ​​की कार्यवाही की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि दिल्ली मेट्रो अपने सामान्य शेड्यूल के अनुसार चले और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से नहीं रोका जाना चाहिए।

बता दें कि दिल्ली मेट्रो ने रविवार को सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर दिया, हालांकि मुख्य रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग अभी भी जारी थी।

प्रदर्शनकारी कई जगहों पर इकट्ठा हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस की बसों में बैठाकर ले जाते हुए भी देखा गया।

जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे लोगों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) जैसे छात्र संगठनों के सदस्य भी शामिल थे। इन सभी को हिरासत में लिया गया।

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राष्ट्रपति से मिले विपक्षी नेता

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों के 10 सांसदों का एक दल शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला। विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहा है। राष्ट्रपति से विपक्षी पार्टियों के नेताओं की मुलाकात रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। विपक्षी नेताओं ने पहले कहा था कि सांसदों और अन्य लोगों का करीब तीन सौ लोगों का एक समूह राष्ट्रपति से मिलना चाहता है। लेकिन बाद में चुनिंदा नेता राष्ट्रपति से मिले।

इससे पहले विपक्षी सांसद और अन्य नेता संसद भवन से मार्च करते हुए रायसीना हिल्स पर स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। इस बीच प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षाकर्मियोंसे बहस हो गई, जिसके बाद वे सांसदों के साथ विजय चौक पर ही धरने पर बैठ गईं। बहरहाल, राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई नेता मार्च में शामिल हुए। ममता बनर्जी भी मार्च में शामिल थीं और राष्ट्रपति से मिलीं। ‘सेव डेमोक्रेसी’ का बैनर लेकर विपक्षी सांसदों ने मार्च किया।

राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने से पहले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इस बैठक में राहुल ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 14 अगस्त 1947 को दिया भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा, ‘एक नई उम्मीद जन्म ले रही है और लंबे समय से संजोया गया सपना साकार हो रहा है। उम्मीद है कि यह सितारा कभी अस्त न हो और यह उम्मीद कभी निराश न हो’।

इससे पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘हम आगे क्या कदम उठाएंगे, इसकी जानकारी आपको देंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। परसों तक हम अपने फैसले के मुताबिक आगे बढ़ते रहेंगे’। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन रोक दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है। लोकतांत्रिक देश में आंदोलन और जुलूस होते रहेंगे। सरकार को इन्हें उसी तरह संभालना चाहिए। लेकिन यह सरकार पूरी तरह तानाशाही तरीके से काम कर रही है’।

राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के बाद राहुल गांधी बोले- उन्होंने ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज नहीं किया, सबूत मांगे

राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात के बाद राहुल गांधी बोले- उन्होंने 'वोट चोरी' के आरोपों को खारिज नहीं किया, सबूत मांगे

rahul gandhi

INDIA गठबंधन के नेताओं ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को खारिज नहीं किया, बल्कि उनसे सबूत देने को कहा। राहुल गांधी ने कहा कि वे सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। विपक्षी नेताओं ने चुनाव में कथित अनियमितताओं की जांच और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी उठाई।

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राहुल गांधी के मुताबिक, विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाया गया। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 

राहुल गांधी बोले- पूरे देश को पता है कि ‘वोट चोरी’ हुई

 

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि यह बैठक उनके लिए काफी असाधारण रही। उन्होंने बताया कि विपक्ष ने ज्ञापन में चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं विस्तार से रखीं।

 

राहुल गांधी के अनुसार, राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों का सीधे तौर पर खंडन नहीं किया, लेकिन उनसे चुनाव में कथित गड़बड़ी के सबूत मांगे। राहुल गांधी ने कहा कि उनके अनुसार चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ के सबूत पूरे देश में चर्चा का विषय हैं और विपक्ष अलग-अलग राज्यों के चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगा रहा है।

 

उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव में धांधली के आरोपों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित सबूतों और आधिकारिक जांच के नतीजों को देखना जरूरी होगा।

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ममता बनर्जी बोलीं- राष्ट्रपति ने जांच का भरोसा दिया

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा।

 

ममता बनर्जी के मुताबिक, राष्ट्रपति ने मामले की जांच करने और दिए गए विवरणों को देखने की बात कही। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने सबूत उपलब्ध कराने को कहा है और विपक्ष की ओर से संबंधित सामग्री भेजने की बात कही गई है। ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर उचित ध्यान देना जरूरी है।

 

खरगे ने की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग

 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया।

 

खरगे के मुताबिक, विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने कथित वोट चोरी के मामलों के सबूत मांगे हैं और विपक्षी दल फिलहाल संबंधित प्रमाण जुटा रहे हैं। खरगे ने कहा कि विपक्ष उपलब्ध सामग्री राष्ट्रपति को सौंपेगा।

 

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कदमों से लोकतंत्र को नुकसान पहुंच रहा है। ये खरगे के राजनीतिक आरोप हैं। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और मामले की पड़ताल करने तथा संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श करने की बात कही।

 

प्रियंका गांधी ने मेट्रो बंद करने के कदम पर उठाया सवाल

 

दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले मेट्रो सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “इसे ही डर कहते हैं।” विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी मांगें दोहराईं। उनकी प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच का मुद्दा शामिल है।

 

अब सबूतों और आगे की कार्रवाई पर नजर

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष ने कहा है कि वह कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े सबूत और अन्य विवरण सौंपेगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष कौन-से दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत करता है और संबंधित संवैधानिक संस्थाएं इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करती हैं।

दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना के चीफ जस्टिस अब होंगे सुप्रीम कोर्ट में जज, केंद्र ने जारी किया तीनों की नियुक्ति का नोटिफिकेशन

नई दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में जज के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में सोमवार को केंद्र सरकार ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। यह अधिसूचना न्याय विभाग की तरफ से जारी की गई थी।

राष्ट्रपति डॉ द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये नियुक्तियां की हैं। इस कदम से शीर्ष अदालत और मजबूत होगा, जिसकी मंजूर संख्या 38 है। इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 28 सितंबर को हुई मीटिंग में पदोन्नति की सिफारिश के कुछ दिनों बाद हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रमुख भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत हैं। उन्होंने कॉलेजियम की बैठक में तीनों की पदोन्नति की सिफारिश की थी।

अभी सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की वर्किंग स्ट्रेंथ है, नए जजों के शपथ लेने के बाद इन नियुक्तियों से इसकी प्रभावी स्ट्रेंथ 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत जजों की मंजूरी वाली संख्या 38 है। सुप्रीम कोर्ट अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के बाद हाल ही में मंजूरी वाली संख्या 34 से बढ़ाई गई थी।

नए नियुक्त जजों के बारे में

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय : जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय जनवरी 2025 से दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। इससे पहले वे बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं, और जुलाई 2023 में उन्होंने अपना पद संभाला था। जस्टिस उपाध्याय को 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रमोट किया गया था और वे अगस्त 2013 में परमानेंट जज बने थे।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह : जस्टिस अपरेश कुमार सिंह झारखंड, त्रिपुरा और तेलंगाना से बहुत ज्यादा न्यायिक अनुभव लेकर आए हैं। उन्हें जनवरी 2012 में झारखंड हाई कोर्ट का जज प्रमोट किया गया था और जनवरी 2014 में उन्हें परमानेंट जज के तौर पर कन्फर्म किया गया था।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल : सुनीता अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली तीसरी महिला जज होंगी। उन्हें 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया था और 2013 में वह परमानेंट जज बन गईं। उन्होंने जुलाई 2023 में गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। जस्टिस अग्रवाल ने बेंच में आने से पहले सिविल साइड में प्रैक्टिस की और 1990 में एडवोकेट के तौर पर एनरोल हुईं।

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कोई कानून से ऊपर नहीं… सेलिब्रिटी और स्टार्स के लिए FDA चीफ तुकाराम मुंढे ने फिर कह दी सीरियस बात

22 सितंबर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर फिल्म आर्टिस्ट की जिम्मेदारी पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि पॉपुलर आर्टिस्ट का युवाओं की सोच पर गहरा असर होता है। उनके मुताबिक, एक सच्चे स्टार को समाज में अच्छी सोच और पॉजिटिविटी फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।

तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष

राष्ट्रपति की अपील के बाद तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि आर्टिस्ट का लोगों पर असर होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कानून का उल्लंघन करें। उन्होंने आर्टिस्ट से कहा कि उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसे उत्पादों या आदतों का प्रचार नहीं करना चाहिए, जो लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

महाराष्ट्र में जारी हो चुके हैं नोटिस

मुंडे ने बताया कि महाराष्ट्र में FDA पहले ही कुछ ऐसे आर्टिस्ट को नोटिस जारी कर चुका है। उन्होंने बताया कि जब किसी पॉपुलर चेहरे का इस्तेमाल खाने-पीने या दूसरे उत्पादों के प्रचार के लिए किया जाता है, तो उसके स्वास्थ्य से जुड़े असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किए थे। आर्टिस्ट ने विमल इलायची का विज्ञापन किया था। FDA का कहना था कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन का है। जिसके कारण आर्टिस्ट के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई की गई थी।

मुंडे ने कहा कि किसी आर्टिस्ट की पॉपुलैरिटी उसे कानून से ऊपर नहीं बनाती। उनके मुताबिक, कलाकारों को भी दूसरे लोगों की तरह कानून का पालन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनके प्रचार का लोगों की पसंद और आदतों पर असर पड़ सकता है। खासकर खाने-पीने की चीजों के प्रचार में लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को भारतीय सिनेमा की शीर्ष हस्तियों को वर्ष 2024 के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया और इस दौरान दिग्गज कन्नड़ अभिनेता अनंत नाग को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया, जबकि यामी गौतम, ममूटी और कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। आदित्य सुहास जांभले द्वारा निर्देशित फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी और मंगलवार को गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की भव्य पृष्ठभूमि में आयोजित इस समारोह ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

अभिनेता से निर्देशक बने रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार मिला, जबकि राजकुमार पेरियासामी को तमिल फिल्म ‘अमरन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार मिला।

यामी गौतम को फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में अपने दमदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। वहीं, ममूटी और कार्तिक आर्यन ने क्रमशः ‘ब्रह्मयुगम’ और ‘चंदू चैंपियन’ में अपने अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार साझा किया।

सुमिरा रॉय द्वारा निर्देशित एवं निर्मित ‘भंगार’ को सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला, जिसे रॉय ने प्राप्त किया। संजीव श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति से हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का पुरस्कार प्राप्त किया।

सच्चाना नामीदास को तमिल फिल्म ‘महाराजा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार मिला, जबकि रोपाश्री वर्काडी को कन्नड़ फिल्म ‘मिथ्या’ के लिए दूसरी सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।

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अभिषेक जैन द्वारा निर्देशित ‘मारण’ को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया। तेलुगु फिल्म ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-02’ को सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन का पुरस्कार मिला, जबकि बंडरेड्डी सुकुमार को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार दिया गया।

आर कलाईवन्नन को तमिल फिल्म ‘अमरन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार मिला। मनोज मुंतशिर को फिल्म ‘मैदान’ के गीत ‘जाने दो’ के लिए सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार मिला। बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा को ‘भक्षक’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला।

अभय जोधपूरकर को मराठी फीचर फिल्म ‘घरत गणपति’ के ‘नवसाची गौरी माझी’ गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का पुरस्कार मिला, जबकि वैकोम विजयलक्ष्मी को मलयालम फिल्म ‘एआरएम’ के ‘अंगू वाना कोनिलु’ गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का पुरस्कार दिया गया।

शाश्वत सचदेव को ‘आर्टिकल 370’ के गानों के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन का पुरस्कार मिला, जबकि जी वी प्रकाश कुमार को ‘अमरन’ के ‘बैकग्राउंड म्यूजिक’ के लिए सम्मानित किया गया।

‘आर्टिकल 370’ को कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले, जिनमें सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन शामिल हैं। विजय गांगुली को ‘स्त्री 2’ के ‘आज की रात’ गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी का पुरस्कार मिला। इन पुरस्कारों के जरिए भारतीय सिनेमा में फीचर फिल्मों, गैर-फीचर फिल्मों और सिनेमा पर लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान और उपलब्धियों को सम्मानित किया जाता है।

Pic Credit : UNI

गुजरात के एकता नगर में सजेगा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का मंच

गुजरात के एकता नगर में सजेगा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का मंच

national film award

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर में होगा, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कलाकारों को सम्मानित करेंगी। यह समारोह इसलिए भी खास है क्योंकि मंगलवार को इसके इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। 70 साल के इतिहास में यह समारोह दूसरी बार दिल्ली से बाहर आयोजित हो रहा है। ALSO READ: गुजरात सरकार की अटल सुशासन पुरस्कार योजना, अधिकारियों को मिलेगा सम्मान

 

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय पुरस्कारों की अगली शृंखला के लिए देश के बाकी राज्यों में भी इस आयोजन को लेकर जाने की कार्ययोजना पर काम कर रहा है। इससे पहले केवल एक बार यह आयोजन 1971 में चेन्नई में हुआ था। मंत्रालय के अनुसार भारतीय सिनेमा अनेकता में एकता का प्रतीक है, इसलिए इस बार एकता के प्रतीक स्थल एकता नगर, गुजरात को चुना गया है। 

 

अभिनेता कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैपियन’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ के लिए अभिनेता रणदीप हुड्डा को सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलेगा। फिल्म ‘अमरन’ के लिए म्यूजिक कंपोजर जीवी प्रकाश को सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए पुरस्कार मिलना है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात में Ease of Doing Business पर जोर, Single Window व्यवस्था से निवेश को आसान बनाने की कोशिश

 

इस समारोह में शामिल होने कई फिल्मी सितारे गुजरात पहुंच चुके हैं। मंगलवार को वह केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी देखने पहुंचे। 

बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

बिहार की चार फिल्मी हस्तियों को वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के लिए 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह खास होने जा रहा है। बिहार से जुड़ी चार फिल्मी हस्तियों अभिनेता संजय मिश्रा, निर्देशक कमलेश के. मिश्र, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवाड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगी। दरभंगा निवासी अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। ‘भक्षक’ की कहानी चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है। गोपालगंज निवासी निर्देशक कमलेश के. मिश्र और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। देशभक्ति पर आधारित यह फिल्म 1925 के ऐतिहासिक ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी वर्ष पर काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। फिल्म में काकोरी की ऐतिहासिक घटना और उससे जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य, संकल्प और उनके अमिट योगदान को रेखांकित किया गया है।

कमलेश के. मिश्र की फ़िल्म को पहले भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुका हैं। उनकी फ़िल्म ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ के लिए गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कथन का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मकार कमलेश मिश्र की पहली निर्देशित फीचर फिल्म ‘आज़मगढ़’ है, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने मुख्य नेगेटिव भूमिका निभाई है। यह फिल्म आतंकवाद के विषय पर आधारित है। अपनी फिल्मों में विशेष दृष्टिकोण से इतिहास और रिसर्च को प्रमुख स्थान देते हैं। हाल ही में उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों पर ‘दिल्ली दंगे…जलने और दोषारोपण की कहानी’ ( दिल्ली राइट्स- अ टेल ऑफ बर्न एंड ब्लेम) डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जो तब काफ़ी चर्चित हुई थी। उनकी पहली शोर्ट फ़िल्म “किताब” ने वैश्विक ख्याति अर्जित की। काकोरी के निर्माता जसविंदर सिंह दिल्ली से और मिंटी मिश्रा बिहार के गोपालगंज की हैं। यह फ़िल्म उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से बनी है। बिहार के दरभंगा के रहने वाले संजय मिश्रा देश के प्रसिद्ध अभिनेता हैं।

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तीन दशक से भी ज्यादा समय से अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रभावशाली अभिनय उनकी पहचान है। 1995 में फिल्म ओह डार्लिंग! ये है इंडिया! से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। ‘आंखों देखी ‘ (2015) और ‘वध’ (2022) में उन्हें उम्दा अभिनय के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिल चुका है। सीतामढ़ी निवासी पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए स्वर्ण कमल प्रदान किया जाएगा। वह करीब ढाई दशक से दिल्ली में पत्रकारिता और फिल्मों पर लेखन कर रहे हैं। वह मुंबई में भी फिल्मों की रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री श्रीवास्तव की सिनेमा पर कई पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें ‘समय सिनेमा और इतिहास’, ‘सिनेमा की समानांतर दुनिया’ और ‘आपातकाल का सिनेमा’ प्रमुख हैं।

उन्होंने ‘माधुरी’ पत्रिका के संस्थापक संपादक अरविंद कुमार से स्वर्णिम दौर के सिनेमा पर लंबी बातचीत भी की है, जिसे वह सिनेमाई अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। फिल्मकार कमलेश के मिश्र ने ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल किसी फिल्म या फिल्मकार का सम्मान नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और संवेदनाओं को ईमानदारी से सामने रखने वाले रचनात्मक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति है। श्री मिश्र ने कहा कि वह इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं। काकोरी रेल एक्शन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था और फिल्म के माध्यम से इस ऐतिहासिक घटना को उचित महत्व के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाना उनका उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्माण पूरी निष्ठा के साथ किया गया है। उन्होंने निर्माता जसविंदर सिंह, मिंटी मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार तथा फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और तकनीशियनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पुरस्कार सामूहिक प्रयास और समर्पण की सफलता है। कमलेश के मिश्र ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के माध्यम से काकोरी के वीर क्रांतिकारियों की स्मृति और उनके बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने यह सम्मान सभी अमर शहीदों को समर्पित किया। मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी जैसी ऐतिहासिक घटना पर फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना इस पूरी यात्रा को और विशेष बना देता है।

मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी रेल एक्शन स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है और काकोरी के अमर क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान को आज की पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि काकोरी के माध्यम से इतिहास की महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित घटना को प्रमुखता से सामने लाने का छोटा-सा प्रयास किया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से निर्मित फिल्म के मुख्य निर्माता जसविंदर सिंह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लेखक-निर्देशक कमलेश के मिश्र और पूरी टीम के समर्पण ने इस प्रयास को सार्थक बनाया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना भी बड़ी बात है।

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