‘तब आप Gen Z नहीं हैं’, CJP के सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र पूछ कोर्ट ने की दिलचस्प टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट में CJP से जुड़े नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अदालत में चली सुनवाई और तीखी टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका को वापस ले लिया है। आपको बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उम्र को लेकर एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर आपकी उम्र इतनी है, तो तब आप Gen Z नहीं हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी चेतन शर्मा और वकील आशीष दीक्षित पेश हुए, जबकि सौरव दास और अन्य की तरफ से वकील अभिक चिमनी ने पैरवी की। गौरतलब है कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली में प्रदर्शन से जुड़े मामलों के बाद अपनी हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। यह सुनवाई स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर हो रही है, जिसमें दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाई गई थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई और वकीलों की दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील अभिक चिमनी ने एसईएम के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल यह कहा कि उन्होंने राज्य का पक्ष सुन लिया है और शांति भंग होने की आशंका है, लेकिन इस आशंका के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताए गए हैं। उन्होंने यह भी दलील दी कि अगर वह इस आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करते हैं, तो एसईएम के समक्ष सुनवाई के दौरान उनके जमानती को किसी नए आधार पर खारिज किया जा सकता है। इस पर अदालत ने सवाल किया कि क्या पहले दिए गए बॉन्ड का उल्लंघन होने की आशंका पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं है? कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह निवारक हिरासत (Preventive Detention) का मामला है, तो इसके खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) दाखिल की जा सकती है। कोर्ट ने वकील से पूछा कि क्या वे दो उचित जमानती भी पेश नहीं कर सकते?

‘तब आप Gen Z नहीं हैं’ – अदालत की दिलचस्प टिप्पणी

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब अदालत ने वकील चिमनी से दोनों याचिकाकर्ताओं की उम्र के बारे में पूछा। वकील ने जवाब दिया कि उनकी उम्र 27 और 31 वर्ष है। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, ‘तब आप Gen Z नहीं हैं।’ इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि मिलेनियल्स किस उम्र के लोगों को कहा जाता है।

बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था पर कोर्ट की कड़ी चिंता

अदालत ने प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता इस प्रदर्शन में सबसे आगे हैं। जब आप वहां जाकर बैरिकेड तोड़ते हैं, तो इस बात की पूरी आशंका रहती है कि पीछे 10-20 अन्य लोग भी ऐसा ही करने लगें, जिन पर आपका नियंत्रण नहीं होता। अदालत ने अन्य देशों का उदाहरण देते हुए बड़ी टिप्पणी की कि हमने दूसरे देशों में भी देखा है कि शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से होती है, लेकिन बाद हालात कहां पहुंच जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि आप बिना अनुमति के वहां गए और बैरिकेड तोड़ा, ऐसे में यहां आखिर क्या हो रहा है? जब शांति और कानून-व्यवस्था भंग होने की आशंका होती है, तब यह सवाल भी प्रासंगिक हो जाता है कि संबंधित लोग कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है।

‘लोग वही रहते हैं, मुद्दा बदल जाता है’

अदालत ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, जिसमें बच्चे भी शामिल थे, लेकिन अब मुद्दा बदल गया है। कोर्ट ने कहा कि ‘लोग वही रहते हैं, लेकिन मुद्दा बदल जाता है।’ जब मजिस्ट्रेट शांति भंग होने की आशंका के सवाल पर विचार करता है, तो ये सभी पहलू सामने आते हैं। इसके अलावा जब ‘रेजीम चेंज’ जैसी बातें सामने आती हैं, जो कि बैलेट के जरिए होनी चाहिए, तब ये सारे सवाल विचारणीय बन जाते हैं। फिलहाल हाईकोर्ट इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जमानतों से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई कर रहा है।

कानपुर के 42 पार्कों की बदलेगी सूरत! ओपन जिम, बच्चों के झूले और हरियाली से लैस होंगे पार्क

Amitabh Bachchan: दिल्ली HC ने अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स मामले में दिया बड़ा निर्देश, कहा- व्यक्तिगत रूप से पेश हों एक्टर

Amitabh Bachchan: अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े मामले में एक नया मोड़ आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बिग बी से कहा है कि अगर वह इस केस को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने अमिताभ बच्चन और दूसरे पक्षों को 16 नवंबर तक अपना समझौता फाइनल करने का समय दिया है।

यह निर्देश तब दिया गया जब उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे कुछ प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) के साथ किसी समझौते पर पहुंच गए हैं। 2022 में कोर्ट ने एक ‘एक्स-पार्टे’ (एकतरफा) आदेश के जरिए अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की थी। उनके वकील ने जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए और समय मांगा था, लेकिन अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगर समझौता फाइनल नहीं होता है और अमिताभ बच्चन केस को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा।

HT की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- “समय दे दिया गया है। मामले को 16.11.2026 को लिस्ट किया जाए। अगर समझौता नहीं होता है या समझौता अधूरा रहता है और वादी किसी भी दावे या मुद्दे पर मुकदमा आगे बढ़ाना चाहता है तो उसे सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा। इससे कोर्ट को ‘कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908’ के ‘ऑर्डर X नियम 2’ और ‘ऑर्डर V नियम 3’, तथा ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023’ की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।”

बिग बी के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) के मामले के बारे में

2022 में, मशहूर वकील हरीश साल्वे ने बच्चन की ओर से हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने अपने नाम, तस्वीर, आवाज़ और व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं की सुरक्षा की मांग की थी। जस्टिस नवीन चावला ने कहा, “वादी को अपूरणीय नुकसान और क्षति होने की संभावना है। कुछ गतिविधियां उन्हें बदनाम भी कर सकती हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए एकतरफा अंतरिम आदेश (ex parte ad interim order) पारित किया जाता है।”

जस्टिस चावला ने आगे कहा-“इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वादी (बच्चन) एक मशहूर हस्ती हैं और कई विज्ञापनों में भी दिखाई देते हैं। वादी इस बात से नाराज हैं कि प्रतिवादी उनकी अनुमति या अधिकार के बिना अपने सामान और सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए उनकी सेलिब्रिटी हैसियत का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिकायत पर विचार करने के बाद मेरी राय है कि प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है और सुविधा का संतुलन भी उनके पक्ष में है।”

मुकदमे में कहा गया था कि मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपर्स अमिताभ बच्चन के नाम का इस्तेमाल गैर-कानूनी तरीके से लॉटरी चलाने के लिए कर रहे थे, जबकि अन्य लोग उनकी तस्वीर वाली टी-शर्ट बेच रहे हैं।

अमिताभ बच्चन के बारे में और जानकारी

अमिताभ बच्चन ने 1969 में ‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, जिसमें उन्होंने कवि अनवर अली की भूमिका निभाई थी। इसके बाद के वर्षों में वे ‘रेशमा और शेरा’, ‘परवाना’, ‘संयोग’ और ‘बंसी बिरजू’ जैसी फिल्मों में नजर आए, जिनमें से कई व्यावसायिक रूप से असफल रहीं। ‘आनंद’ (1971) और ‘बॉम्बे टू गोवा’ (1972) में उनके अभिनय ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया जिन पर नजर रखी जानी चाहिए।

दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना के चीफ जस्टिस अब होंगे सुप्रीम कोर्ट में जज, केंद्र ने जारी किया तीनों की नियुक्ति का नोटिफिकेशन

नई दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में जज के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में सोमवार को केंद्र सरकार ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। यह अधिसूचना न्याय विभाग की तरफ से जारी की गई थी।

राष्ट्रपति डॉ द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये नियुक्तियां की हैं। इस कदम से शीर्ष अदालत और मजबूत होगा, जिसकी मंजूर संख्या 38 है। इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 28 सितंबर को हुई मीटिंग में पदोन्नति की सिफारिश के कुछ दिनों बाद हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रमुख भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत हैं। उन्होंने कॉलेजियम की बैठक में तीनों की पदोन्नति की सिफारिश की थी।

अभी सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की वर्किंग स्ट्रेंथ है, नए जजों के शपथ लेने के बाद इन नियुक्तियों से इसकी प्रभावी स्ट्रेंथ 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत जजों की मंजूरी वाली संख्या 38 है। सुप्रीम कोर्ट अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के बाद हाल ही में मंजूरी वाली संख्या 34 से बढ़ाई गई थी।

नए नियुक्त जजों के बारे में

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय : जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय जनवरी 2025 से दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। इससे पहले वे बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं, और जुलाई 2023 में उन्होंने अपना पद संभाला था। जस्टिस उपाध्याय को 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रमोट किया गया था और वे अगस्त 2013 में परमानेंट जज बने थे।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह : जस्टिस अपरेश कुमार सिंह झारखंड, त्रिपुरा और तेलंगाना से बहुत ज्यादा न्यायिक अनुभव लेकर आए हैं। उन्हें जनवरी 2012 में झारखंड हाई कोर्ट का जज प्रमोट किया गया था और जनवरी 2014 में उन्हें परमानेंट जज के तौर पर कन्फर्म किया गया था।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल : सुनीता अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली तीसरी महिला जज होंगी। उन्हें 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया था और 2013 में वह परमानेंट जज बन गईं। उन्होंने जुलाई 2023 में गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। जस्टिस अग्रवाल ने बेंच में आने से पहले सिविल साइड में प्रैक्टिस की और 1990 में एडवोकेट के तौर पर एनरोल हुईं।

कल का मौसम: दिल्ली-NCR, पंजाब और यूपी में आंधी का अलर्ट! वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से 6 अक्टूबर को इन इलाकों में बदलेगा मौसम

प्रदर्शनकारी पहलवानों से लड़कर एशियाड पहुंचे सुजीत ने जीता गोल्ड मेडल (Video)

एशियाई खेलों में अपने चयन को लेकर कानूनी लड़ाई के तीन साल बाद, सुजीत कलकल ने एशियाई खेलों का चैंपियन बनकर एक शानदार सफर पूरा किया। स्वदेश पहुंचने पर उनका एयपोर्ट पर जोरदार स्वागत हुआ।उन्होंने पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा फ़ाइनल में ताजिकिस्तान के वर्ल्ड मेडलिस्ट अब्दुलमजीद कुदिएव को 10-9 से हराकर ज़बरदस्त वापसी की।

मैच खत्म होने में दो मिनट से भी कम समय बचा था और सुजीत 2-9 से पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 23 साल के सुजीत ने लगातार हमले किए और तेज़ी से तीन ‘टेकडाउन’ करके अंकों का अंतर कम किया। जब 11 सेकंड बचे थे, तब भी कुदिएव एक अंक से आगे थे, लेकिन सुजीत ने एक आखिरी ‘टेकडाउन’ हासिल कर लिया। इन दो अंकों ने उन्हें 10-9 से आगे कर दिया और खेलों की सबसे रोमांचक वापसी में से एक को पूरा किया।

8 साल बाद कुश्ती में भारत का पहला गोल्ड मेडल

यह 2018 के बाद एशियाई खेलों में कुश्ती में भारत का पहला गोल्ड मेडल था। सुजीत पुरुषों की 65 किग्रा फ्रीस्टाइल का खिताब जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए; उनसे पहले ओलंपिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त (2014) और बजरंग पूनिया (2018) ने यह खिताब जीता था।इस जीत के साथ ही उस सफर का सुखद अंत हुआ, जिसकी शुरुआत तीन साल पहले निराशा के साथ हुई थी।

सुजीत ने 2022 के एशियाई खेलों (जो आखिरकार 2023 में हुए) के लिए 65 किग्रा कैटेगरी में ट्रायल की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। खेल मंत्रालय द्वारा रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया की मान्यता रद्द किए जाने के बाद भारतीय कुश्ती का कामकाज देख रही एड-हॉक कमेटी ने बजरंग पूनिया को सीधे टीम में एंट्री दे दी थी।

सुजीत ने महिला पहलवान अंतिम पंघाल के साथ मिलकर इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। अंतिम आखिरकार टीम में जगह बनाने और ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहीं, जबकि विनेश फोगाट को बिना ट्रायल के 53 किग्रा कैटेगरी में सीधे एंट्री दी गई। हालांकि, सुजीत को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।

किस्मत का खेल देखिए, तीन साल पहले बजरंग हार गए थे, जिससे 65 किग्रा कैटेगरी में भारत का दबदबा खत्म हो गया था। बजरंग के 2018 में गोल्ड जीतने से पहले योगेश्वर ने 2014 में गोल्ड मेडल जीता था।

Fortis का दावा, Daiichi-Singh Brothers विवाद से कोई लेना-देना नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दी ऑडिट को मंजूरी

Fortis Healthcare News: हेल्थकेयर सेक्टर की दिग्गज कंपनी फोर्टिस हेल्थकेयर का कहना है कि दाइची सैंक्यो (Daiichi Sankyo) और सिंह ब्रदर्स (मलविंदर मोहन सिंह और शिविंदर मोहन सिंह) के बीच चल रहे कानूनी विवाद में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। फोर्टिस का अपने बचाव में मुख्य रूप से कहना है कि इस विवाद में वह पूरी तरह बाहरी पक्ष है और सिंह ब्रदर्स की फोर्टिस में अपनी हिस्सेदारी खत्म करने या इधर-उधर किए जाने में कंपनी की कोई भूमिका नहीं थी। कंपनी ने यह दलील सुप्रीम कोर्ट में दी और इसके बारे में आज 27 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया।

क्या कहना है सुप्रीम कोर्ट का और वहां कैसे पहुंचा मामला

दिल्ली हाई कोर्ट ने 31 अगस्त के अपने आदेश में फोर्टिस का फोरेंसिक ऑडिट कराने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। हालांकि 25 सितंबर को कोर्ट ने फोर्टिस की SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) का निपटारा करते हुए फोरेंसिक ऑडिट को आगे बढ़ाने की अनुमति दी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में जो कुछ भी कहा यानी जो भी टिप्पणी की, वह सिर्फ यह तय करने के लिए थी कि ऑडिट होना चाहिए या नहीं और अब ऑडिट स्वतंत्र रूप से किया जाएगा, जिस पर हाईकोर्ट की टिप्पणी का कोई असर नहीं होगा।।

क्या है Fortis की दलील

फोर्टिस का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने उस पर कोई देनदारी या जुर्माना नहीं लगाया है और न ही यह दाईची सैंक्यो और सिंह ब्रदर्स के बीच चल रहे आर्बिट्रेशन प्रोसिडिंग्स यानी कानूनी मामले में कभी पक्षकार रही है। फोर्टिस का कहना है कि वह एक लिस्टेड कंपनी है और उसके पास प्रमोटर्स के शेयरों के लेन-देन को कंट्रोल करने की कोई शक्ति ही नहीं थी। फोर्टिस का यह भी कहना है कि पुराने प्रमोटर्स के शेयरों के लेन-देन से कोई पैसा भी नहीं मिला।

फोर्टिस का कहना है कि जब सिंह ब्रदर्स की शेयरहोल्डिंग 1% से कम हो गई और उन्होंने मार्च 2018 तक बोर्ड से इस्तीफा दे दिया, तो इंस्टीट्यूशनल शेयरहोल्डर्स ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को नियुक्त किया। इसके बाद इंडिपेंडेंट बोर्ड ने जून 2018 में एक नया इन्वेस्टर खोजने और उसे शामिल करने के लिए कॉम्पिटिटिव बिडिंग प्रोसेस शुरू किया।

कंपनी के अनुसार उसके मौजूदा प्रमोटर शेयरहोल्डर और IHH हेल्थकेयर बरहाद ग्रुप की नॉर्दर्न टीके वेंचर प्राइवेट लिमिटेड ने नवंबर 2018 में इसमें इक्विटी शेयरों के नए इश्यू के जरिए निवेश किया था और इसे लेकर पहले ही CCI, SEBI, स्टॉक एक्सचेंजों और शेयरहोल्डर्स समेत सभी कानूनी और रेगुलेटरी मंजूरियां ले ली गई थीं। फोर्टिस का कहना है कि यह ट्रांजैक्शन तब हुआ जब सिंह ब्रदर्स का कंपनी के साथ कोई संबंध नहीं रह गया था और इसमें उनसे शेयरों का ट्रांसफर शामिल नहीं था। फिलहाल कंपनी ने भरोसा जताया है कि स्वतंत्र तरीके से फोरेंसिक ऑडिट में ये तथ्य सही साबित होंगे।

Cars24 IPO के लिस्टिंग की तैयारी, अप्रैल तक फाइल होगा ड्राफ्ट, अभी गुजर रही इस लंबे प्रोसेस से

थार-स्कॉर्पियो और XUV 7XO होगा और महंगा! M&M इस साल चौथी बार बढ़ाएगी दाम!

National Herald Case: सोनिया और राहुल गांधी ने दिल्ली HC में ED की याचिका को दी चुनौती, बताया ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’

National Herald Case: नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। दोनों नेताओं ने कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस चुनौती का विरोध किया है, जिसमें एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी है।

18 सितंबर को दाखिल अलग-अलग लेकिन काफी हद तक एक जैसे जवाबों में, कांग्रेस नेताओं ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि एजेंसी, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत के आधार पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) का केस नहीं बना सकती।

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में 12 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

गांधी परिवार ने ED की कार्रवाई के कानूनी आधार पर उठाए सवाल

दाखिल किए गए जवाबों के मुताबिक, गांधी परिवार का कहना है कि ED की कार्रवाई को सही नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह मामला पुलिस में दर्ज FIR के बजाय सुब्रमण्यम स्वामी की 2013 की निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी।

गांधी परिवार का तर्क है कि PMLA में ED की कार्रवाई का आधार “निजी शिकायत” बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। उनका कहना है कि स्वामी की शिकायत उन कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करती जो एजेंसी के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की कार्रवाई शुरू करने के लिए जरूरी हैं।

उनकी दलीलें PMLA की धारा 5(1) पर केंद्रित हैं। जवाबों में कहा गया है कि यह प्रावधान उन स्थितियों में कार्रवाई की इजाजत देता है जिनमें CrPC की धारा 173 के तहत पुलिस की अंतिम रिपोर्ट शामिल हो, या फिर किसी अधिकृत अधिकारी की शिकायत हो जो ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (सूचीबद्ध अपराध) की जांच कर रहा हो।

बचाव पक्ष का कहना है कि कोई निजी व्यक्ति ऐसी जांच नहीं कर सकता और जांच करने के लिए मजिस्ट्रेट को मिली शक्तियां इस कानूनी जरूरत को दरकिनार नहीं कर सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र

गांधी परिवार ने ‘विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का भी हवाला दिया है।

उनका तर्क है कि इस फैसले के अनुसार, PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने के लिए ‘शेड्यूल्ड ऑफेंस’ (अनुसूचित अपराध) का रजिस्ट्रेशन जरूरी है। जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि ED ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ‘निजी शिकायत’ के जिक्र का इस्तेमाल तो किया है, लेकिन उसके व्यापक संदर्भ पर ध्यान नहीं दिया है।

बचाव पक्ष ने उस लंबी अवधि की ओर भी इशारा किया है, जिसके दौरान स्वामी ने कथित तौर पर अदालत के सामने सबूत पेश नहीं किए। जवाबों के अनुसार, इसे इस बात के संकेत के तौर पर बताया गया कि निजी शिकायत को कार्यवाही का आधार मानने में क्या मुश्किलें आती हैं।

ED के अपने पुराने रिकॉर्ड का दिया हवाला

गांधी परिवार ने ED के पुराने रिकॉर्ड और बातचीत का हवाला देकर अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की है।

उनके जवाबों में जनवरी और अगस्त 2015 में जारी एजेंसी के टेक्निकल सर्कुलर, 2013 में सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन के सामने दी गई जानकारी और 2024 में राइट टू इन्फॉर्मेशन (RTI) के तहत मिले जवाब का जिक्र है।

बचाव पक्ष का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि ED ने पहले यह रुख अपनाया था कि PMLA के तहत कार्रवाई शुरू करने से पहले FIR जरूरी है।

जवाबों में ED द्वारा जून 2021 में दर्ज ECIR का भी जिक्र है, जो स्वामी की शिकायत के सात साल बाद दर्ज की गई थी। बचाव पक्ष ने कहा कि ECIR को ट्रायल कोर्ट के सामने सितंबर 2025 में ही पेश किया गया, जब कोर्ट ने एजेंसी को इसे रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था।

नई FIR और ट्रायल कोर्ट का आदेश

जवाबों में 3 अक्टूबर, 2025 को दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग द्वारा दर्ज की गई FIR का भी जिक्र है। हालांकि, गांधी परिवार की दलीलों के अनुसार, ED ने ट्रायल कोर्ट को बताया था कि वह इस FIR पर निर्भर नहीं है।

हाई कोर्ट के सामने यह विवाद ट्रायल कोर्ट के उस फैसले से पैदा हुआ है जिसमें उसने ED की प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अभियोजन शिकायत) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। दलीलों के मुताबिक, दिसंबर के आदेश में कहा गया था कि इस शिकायत पर कानूनी तौर पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

गांधी परिवार ने इस बात पर जोर दिया है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला कानूनी और अधिकार-क्षेत्र से जुड़े उन मुद्दों पर आधारित था, जो ‘प्रेडिकेट-ऑफेंस’ (मूल अपराध) के लिए FIR न होने से संबंधित थे। उनका कहना है कि निचली अदालत ने मुख्य आरोपों पर उनके गुण-दोष के आधार पर कोई फैसला नहीं सुनाया।

ED 24 घंटे के अंदर हाई कोर्ट पहुंची

बचाव पक्ष ने उस तेजी पर भी सवाल उठाए हैं जिसके साथ ED हाई कोर्ट पहुंची।

जवाबों के मुताबिक, एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के 24 घंटे के अंदर अपनी रिविजन याचिका दायर की। गांधी परिवार ने इस रफ्तार को “बिजली की गति” बताया और तर्क दिया कि ऐसा लगता है कि इस कार्रवाई में एजेंसी पर आम तौर पर लागू होने वाली आंतरिक मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया है।

उन्होंने हाई कोर्ट से ED की रिविजन याचिका को खारिज करने का भी आग्रह किया है और इसे “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” बताया है।

क्या है नेशनल हेराल्ड केस?

नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 2013 में की गई एक शिकायत से हुई थी। इस शिकायत में Associated Journals Ltd (AJL) के अधिग्रहण को लेकर कथित साजिश के आरोप लगाए गए थे। बता दें कि AJL ही नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती है।

यह शिकायत ‘यंग इंडियन’ से भी जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास सबसे ज्यादा शेयर हैं। आरोप AJL की उन संपत्तियों से जुड़े हैं जिनकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है, और साथ ही ‘यंग इंडियन’ के जरिए किए गए 50 लाख रुपये के लेन-देन से भी जुड़े हैं।

वहीं, इस मामले में ED ने अप्रैल 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत दर्ज की। ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद एजेंसी दिल्ली हाई कोर्ट गई।

इस मामले में शामिल अन्य लोगों और संस्थाओं में सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

यह भी पढ़ें: Onion prices: फिर रुलाने की तैयारी में प्याज के भाव, सब्सिडी के बावजूद मेट्रो शहरों में आसमान छू रहे प्याज के दाम

Patanjali Foods share Price : स्टॉक में रैली जारी, चार कारोबारी सत्रों में करीब 15% भागा शेयर, जानिए मैनेजमेंट की राय

Patanjali Foods Share Price : सोमवार, 21 सितंबर को भी पतंजलि फूड्स के शेयरों की हालिया तेजी जारी है। आज इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली है। कंपनी के मैनेजमेंट ने FY27 में ग्रोथ की संभावनाओं (खासकर FMCG और खाने के तेल के सेक्टर में) को लेकर उम्मीद जताई है और साथ ही मजबूत फ्री कैश फ्लो का अनुमान भी लगाया है। शुरूआती कारोबार में यह शेयर 6.5 प्रतिशत बढ़कर 390.75 रुपये पर पहुंच गया। जिससे पिछले चार सेशन में इसकी कुल बढ़त लगभग 15 प्रतिशत हो गई है। इस रिकवरी के बावजूद,पतंजलि फूड्स में 2026 में अब तक लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट आई है,जबकि निफ्टी 50 में इसी अवधि में 10.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग 42,300 करोड़ रुपये है।

FY27 में FMCG बिज़नेस में 18-20% ग्रोथ की उम्मीद

पतंजलि फूड्स के CEO संजीव अस्थाना ने CNBC-TV18 के साथ हुई बातचीत में कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि FY27 में उसका FMCG बिजनेस 18-20 प्रतिशत बढ़ेगा,जबकि फूड्स बिजनेस के 8-10 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। खाने के तेल के बिजनेस में 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की उम्मीद है। अस्थाना ने कहा कि कंपनी को FY27 के अपने लक्ष्य पूरे करने का भरोसा है और उम्मीद है कि इस अवधि में कंपनी 700-800 करोड़ रुपये का फ्री कैश फ्लो जेनरेट करेगी।

कंज्यूमर डिमांड को लेकर मैनेजमेंट की राय मिलीजुली

कंज्यूमर डिमांड को लेकर मैनेजमेंट की राय मिली-जुली है। अस्थाना ने कहा कि शहरी इलाकों में डिमांड मजबूत बनी हुई है और फेस्टिव सीज़न के अच्छे रहने की उम्मीद है। लेकिन खराब मॉनसून की वजह से कंपनी ग्रामीण इलाकों में डिमांड को लेकर उतने उत्साहित नहीं है। खाने के तेल की सप्लाई की स्थिति भी एक चिंता का विषय है। अस्थाना के मुताबिक,भारत में सूरजमुखी तेल का 90 फीसदी से ज्यादा इंपोर्ट अभी अटका हुआ है,जिससे सप्लाई एक बड़ी समस्या बन गई है।

अस्थाना ने यह भी कहा कि कंपनी के फ़ूड बिजनेस से जुड़ा कोई रेगुलेटरी मुद्दा नहीं है और प्रमोटरों की 38 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले कोई लोन नहीं लिया गया है।

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन के बाद मैनेजमेंट ने नया आउटलुक जारी किया है। Q1 FY27 में पतंजलि फूड्स का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 86% बढ़कर 335.7 करोड़ रुपये हो गया,जबकि कंपनी की कामकाजी आय 29% बढ़कर 11,337.5 करोड़ रुपये रही। EBITDA 69% बढ़कर 543.3 करोड़ रुपये हो गया और EBITDA मार्जिन एक साल पहले के 3.7% से बढ़कर 4.8% पर रह। जून तिमाही कंपनी की लगातार चौथी तिमाही थी जिसमें रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज किया गया।

कानूनी राहत मिलने से भी आया जोश

हाल ही में स्टॉक में आई तेजी के साथ-साथ पतंजलि ग्रुप को कानूनी राहत भी मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से जुड़े इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल के सात आदेशों को रद्द कर दिया है और प्रक्रिया में पाई गई कमियों और ट्रिब्यूनल द्वारा मामलों को संभालने के तरीके की आलोचना की है।

 

 

Market Trend : बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी, अनुज सिंघल से जाने टाटा ग्रुप के शेयरों में क्या करें, क्या हो कमाई की रणनीति

डूसू चुनाव से पहले हिंसा, हाई कोर्ट नाराज

नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन यानी डूसू के चुनाव से पहले बड़ी हिंसा हुई है। इसे लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने इस पर रिपोर्ट मांगी है और नाराजगी जताते हुए कहा कि वह चुनाव रद्द कर सकती है। हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा, ‘लोकतंत्र को अपराधियों का समाज नहीं बनाया जा सकता’। अदालत ने इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन, दिल्ली पुलिस और सरकार से शुक्रवार तक रिपोर्ट मांगी है।

हाई कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर उठाए गए कदमों से वह संतुष्ट नहीं हुआ, तो वोटों की गिनती और नतीजों के ऐलान पर रोक लगा दी जाएगी। असल में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव से पहले बुधवार रात नॉर्थ कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच झड़प हुई थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई  ने एक दूसरे से जुड़े लोगों पर अलग अलग जगहों पर हमला करने के आरोप लगाए।

गौरतलब है कि डूसू चुनाव के लिए 16 सितंबर को प्रचार खत्म हो चुका है। मतदान शुक्रवार, 18 सितंबर को होगा और वोटों की गिनती 19 सितंबर को होगी। बहरहाल, बुधवार की रात को दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस में खूब मारपीट होने और तोड़फोड़ की खबर है। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई के लोगों ने उसके एक सदस्य पर हमला किया। दूसरी ओर एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि मोतीलाल नेहरू कॉलेज के बाहर उसके आदिवासी छात्र सदस्य पर एबीवीपी से जुड़े लोगों ने हमला किया।

Celina Jaitly: ‘मेरा दिल टूट गया है…’, गुजर चुके बेटे को याद कर सेलिना जेटली ने जाहिर की अंतिम इच्छा

Celina Jaitly: सेलिना जेटली ने गुरुवार को अपने दिवंगत बेटे शमशेर के जन्मदिन पर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट शेयर करके उन्हें याद किया। एक्ट्रेस ने ऑस्ट्रिया की अपनी यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो शेयर किया और कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह कब वापस आ पाएंगी, इसलिए वह अपने लिए एक याद संजोकर रखना चाहती थीं।

अपनी पोस्ट में, सेलिना ने एक “मां” के तौर पर अपनी इच्छा के बारे में बात की। अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मेरी इच्छा है कि जब मेरी ज़िंदगी अपने स्वाभाविक अंत तक पहुंचे, तो मेरा अंतिम संस्कार मेरे देश भारत में हो और मेरी अस्थियां ऑस्ट्रिया में मेरे बेटे शमशेर के साथ विसर्जित की जाएं। एक मां की इच्छा उस बच्चे के करीब रहने की है जिसे वह ज़्यादा देर तक अपनी गोद में नहीं रख पाई।”

अपने दिवंगत बेटे को सीधे संबोधित करते हुए, सेलिना ने उन हालात के बारे में लिखा जिनकी वजह से उन्होंने वह वीडियो रिकॉर्ड किया था। उन्होंने कहा, “उस यात्रा के दौरान मैं तुम्हारे भाइयों से नहीं मिल पाई। मम्मी का दिल टूट गया है, मेरे बेटे, लेकिन मम्मी मज़बूत हैं। मैं तुम्हारे भाइयों के लिए आगे बढ़ती रहती हूं और जीती रहती हूं, तुम चारों को अपने दिल में बसाए हुए।” उन्होंने आगे कहा, “आज, तुम्हारा जन्म आर्थू के साथ हुआ था। उसके कुछ ही समय बाद तुम हमें छोड़कर चले गए, लेकिन तुमने मुझे कभी नहीं छोड़ा।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने आर्थू की आंखों में तुम्हारे लिए तड़प देखी है और उसकी बातों में उसे महसूस किया है। मेरा मानना ​​है कि तुम उस पर नज़र रखते हो। और किसी तरह, इन सबके बीच, मुझे लगता है कि तुम मुझ पर भी नज़र रखे हुए हो।”

एक्ट्रेस ने आगे कहा, “मैंने अपने परिवार के साथ ज़िंदगी बनाने के लिए अपना देश, अपने माता-पिता, अपना काम और अपनी जानी-पहचानी हर चीज़ छोड़ दी। आज, कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है कि मुझे शब्दों और कागज़ात के ज़रिए यह बताना होगा कि माँ बनने के बाद से मेरे हर साँस में क्या बसा है। एक माँ अपनी ज़िंदगी भर का प्यार अदालत के सामने कैसे रख सकती है?”

सेलिना ने शमशेर से इस बात के लिए माफ़ी भी मांगी कि उन्हें अपने भाइयों से खुद बात करने के बजाय रिकॉर्डिंग के ज़रिए अपनी भावनाएं बतानी पड़ रही हैं। मेरे प्यारे बेटे, मुझे माफ़ करना कि मुझे यह बात रिकॉर्डिंग के ज़रिए कहनी पड़ रही है। काश मैं तुम्हारे भाइयों से सीधे बात कर पाती और उन्हें खुद याद दिला पाती मम्मी हमेशा यहीं हैं। मेरा प्यार तुमसे कभी दूर नहीं हुआ। इसे पाने के लिए तुममें से किसी को कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। यह हमेशा के लिए तुम्हारा है। जन्मदिन मुबारक हो, मेरे प्यारे शमशेर और मेरे प्यारे आर्थू।

सेलिना की शादी ऑस्ट्रिया के बिज़नेसमैन और होटल मालिक पीटर हाग से हुई है। मार्च 2012 में उनके जुड़वां बेटों का जन्म हुआ। 2017 में वे फिर से जुड़वां बेटों के माता-पिता बने, लेकिन बच्चों में से एक, शमशेर की जन्म के कुछ ही समय बाद दिल की बीमारी के कारण मौत हो गई। नवंबर 2025 में, सेलिना ने मुंबई की एक अदालत में अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा कानून के तहत मामला भी दर्ज कराया। उन्होंने भावनात्मक, शारीरिक, यौन और मौखिक शोषण का आरोप लगाया और खबरों के मुताबिक 50 करोड़ रुपये के हर्जाने के साथ-साथ 10 लाख रुपये का मासिक गुजारा भत्ता और बच्चों की कस्टडी की मांग की।

सेलिना अपने परिवार से जुड़े कानूनी मामलों में भी शामिल रही हैं। उनके भाई, मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत जेटली को सितंबर 2024 में UAE में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक कथित मामले में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद सेलिना ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया, जिसने नवंबर 2025 में विदेश मंत्रालय को उनके भाई को कानूनी मदद देने का निर्देश दिया।

Urban Company Share Price: केंट RO हटाएगी Native वॉटर प्योरिफायर की बुराई वाले विज्ञापन, शेयर 7% तक उछला

होम सर्विसेज देने वाली अर्बन कंपनी के शेयरों में 24 अगस्त को अच्छी तेजी है। BSE पर शेयर की कीमत शुरुआती कारोबार में पिछले बंद भाव से 6.8 प्रतिशत तक उछलकर 169.45 रुपये के हाई तक गई। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 25900 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इस उछाल की अहम वजह है- कंपनी और केंट RO सिस्टम के बीच हुए विवाद का नतीजा और UBS की ओर से ‘बाय’ रेटिंग के साथ शुरू किया गया कवरेज। दरअसल अर्बन कंपनी ने केंट RO सिस्टम के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि और अपमानजनक प्रचार का केस दायर किया था।

कंपनी का आरोप था कि Kent RO के विज्ञापनों और सोशल मीडिया कंटेंट में उसके ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर्स के बारे में गलत और गुमराह करने वाले दावे किए गए। मुकदमेबाजी के बाद केंट ने कहा है कि वह ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर के बारे में अपमानजनक विज्ञापन हटा लेगी।

Urban Company ने शेयर बाजारों को बताया है कि उसने 11 अगस्त को यह केस दायर किया था। आरोप लगाया कि Kent RO का विज्ञापन कैंपेन उसके ‘Native’ M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro वॉटर प्योरिफायर की दो साल की फिल्टर लाइफ और दो साल की सर्विस लाइफ वाली खूबियों को निशाना बना रहा है। Kent RO के विज्ञापनों में इन खूबियों को “मार्केटिंग का हथकंडा” बताया गया और दावा किया गया कि ग्राहकों के लिए ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर का इस्तेमाल असुरक्षित और जोखिम भरा है।

12 अगस्त को हुई हाई कोर्ट में सुनवाई

इस मामले की सुनवाई 12 अगस्त को हाई कोर्ट में हुई। Kent RO से कहा गया कि वह 15 दिनों के अंदर विवादास्पद विज्ञापन और सोशल मीडिया कंटेंट हटा ले। इसके बाद Kent RO ने कहा कि वह केस से जुड़े विज्ञापनों को हटा लेगी और ऐसे ही या मिलते-जुलते दावे करने वाले दूसरे विज्ञापन या प्रमोशनल कंटेंट नहीं चलाएगी।

अर्बन कंपनी भारत, UAE, सिंगापुर और सऊदी अरब में एक मल्टी कैटेगरी होम सर्विस प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है। इसके प्लेटफॉर्म पर क्लीनिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिक वर्क, अप्लायंसेज रिपेयर, ब्यूटी ट्रीटमेंट और मसाज थेरेपी जैसी सर्विसेज मिलती हैं। इसका InstaHelp वर्टिकल बुकिंग के 10-15 मिनट के अंदर सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने और खाना बनाने के लिए लोग मुहैया कराने जैसी सर्विसेज देता है।

Lenskart Block Deal: एक झटके में बिके 4.5 करोड़ शेयर, कीमत फिसली

UBS ने Urban Company पर दी ‘बाय’ रेटिंग

अर्बन कंपनी 17 सितंबर 2025 को ​लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,900.24 करोड़ रुपये का था। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 19.02 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ब्रोकरेज फर्म UBS ने इस शेयर पर कवरेज शुरू किया है और इसे “बाय” रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस 180 रुपये प्रति शेयर रखा है। मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक की रेटिंग को “अंडरवेट” से डबल अपग्रेड कर सीधा “ओवरवेट” कर दिया है। टारगेट प्राइस 128 रुपये से बढ़ाकर 165 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी को कंसोलिडेटेड बेसिस पर 92.12 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। एक साल पहले कंपनी 6.94 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी। जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 43.85 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 528.34 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।