Nifty Outlook: 21 अक्टूबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? क्रूड समेत ये बड़े फैक्टर करेंगे तय

Nifty Outlook: शेयर बाजार में जैसे ही रिकवरी की उम्मीद बनती है, कोई नई परेशानी सामने आ जाती है। सोमवार को भी ऐसा ही हुआ। AI से जुड़ी बिकवाली का दबाव कम हुआ था। बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई थी। IT कंपनियों के मिले-जुले नतीजों से बाजार को संभलने की उम्मीद थी। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने फिर चिंता बढ़ा दी।

दशहरा की छुट्टी के बाद बुधवार, 21 अक्टूबर को बाजार खुलेगा। इस बार उसके सामने महंगे तेल की चुनौती होगी। ब्रेंट क्रूड करीब 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इसके अलावा, बड़ी टेक कंपनियों के नतीजे भी आने शुरू होंगे। बाजार की नजर इन नतीजों पर रहेगी।

इसी दिन Jio Platforms का IPO भी सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। ₹30,213 करोड़ के इस इश्यू को एंकर निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब देखना होगा कि रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशक इसमें कितनी दिलचस्पी दिखाते हैं।

तिमाही नतीजों पर भी रहेगी नजर

कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करेंगे। सोमवार को Urban Company और Himadri Specialty Chemicals के नतीजों में मामूली कमी को भी निवेशकों ने पसंद नहीं किया। इसका असर दोनों कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के रूप में दिखा।

बुधवार को बाजार Bajaj Finance, L&T Technology Services, Hindustan Zinc, IREDA, Piramal Finance और Sobha समेत कई कंपनियों के तिमाही नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। इनके नतीजों सोमवार को बाजार बंद होने के बाद आए थे।

इसके अलावा Eternal, KEI Industries, M&M Finance, Mahindra Holidays, SRF और Vishal Mega Mart के नतीजे भी आने हैं। Indian Hotels और Aditya Birla Sun Life AMC के नतीजों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Nifty के लिए 22,800 का स्तर अहम

Religare Broking के अजीत मिश्रा के मुताबिक, सोमवार की गिरावट के बाद Nifty अपने 20-दिन के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA के करीब पहुंच गया है। यह स्तर 22,900 है। इसके नीचे 22,550 से 22,750 का दायरा अगला अहम सपोर्ट हो सकता है। वहीं, बाजार में तेजी लौटने पर 23,200 से 23,300 के स्तर पर रुकावट आ सकती है।

HDFC Securities के विनय रजानी का कहना है कि बाजार में गिरावट के बावजूद तेजी से जुड़े इंडिकेटर और ऑसिलेटर अभी कमजोर नहीं पड़े हैं। उनके मुताबिक, Nifty के लिए 22,800 का स्तर अहम है। यहां 20-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज यानी SMA और पिछला स्विंग हाई, दोनों सपोर्ट दे रहे हैं।

विनय रजानी के मुताबिक, Nifty इस स्तर के आसपास संभलकर फिर तेजी पकड़ सकता है। हालांकि, अगर इंडेक्स 22,500 के नीचे चला जाता है, तो तेजी की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहना होगा।

Bank Nifty में 55,500 का सपोर्ट अहम

Bank Nifty भी 55,500 के करीब बंद हुआ है। यह इसका अहम सपोर्ट स्तर है। अगर यहां से लगातार बिकवाली होती है, तो इंडेक्स 55,000 और फिर 54,500 तक गिर सकता है। वहीं, बाजार में रिकवरी होने पर 56,000 का स्तर पहली बड़ी चुनौती होगा।

LKP Securities के वत्सल भुवा के मुताबिक, सोमवार की गिरावट के बावजूद Bank Nifty अपने 20-दिन के मूविंग एवरेज और 55,200 के अहम सपोर्ट के ऊपर बंद हुआ। उनके अनुसार, तेजी की वापसी की पुष्टि तभी होगी, जब इंडेक्स लगातार 56,000 के ऊपर बंद होने लगेगा।

जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक इस तेजी को गिरावट के बाद की रिकवरी के तौर पर ही देखना चाहिए। वत्सल भुवा ने यह भी कहा कि अगर इंडेक्स 55,000 के नीचे जाता है, तो निवेशकों को अपनी लॉन्ग पोजीशन पर दोबारा नजर डालनी करनी चाहिए।

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Urban Company Share Price : कमजोर नतीजों के बाद आज 8.75% टूटा शेयर, जानिए क्या है ब्रोकरेज की राय

Urban Company Share Price : दूसरी तिमाही में अर्बन कंपनी के नतीजे कमजोर रहे हैं। नतीजों के बाद शेयर में बड़ा एक्सिडेंट दिखा है। सोमवार को इंट्राडे में अर्बन कंपनी के शेयरों में लगभग 8% की भारी गिरावट आई। कंपनी द्वारा सितंबर तिमाही के कंसोलिडेटेड नेट लॉस में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी की रिपोर्ट जारी करने के बाद यह शेयर दबाव में आ गया है। फिलहाल NSE पर अर्बन कंपनी के शेयर 13.82 रुपए यानी 8.74 फीसदी की गिरावट के साथ 144.30 रुपए पर दिख रहे हैं।

इस होम सर्विसेज प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 182.48 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया है। जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह नुकसान 59.33 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कामकाजी आय सालाना आधार पर 41.4% बढ़कर 537.29 करोड़ रुपये रही है, जो वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 FY26) में 380.03 करोड़ रुपये थी। डिलीवर किए गए ऑर्डर्स की संख्या 15.1 मिलियन तक पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 103% की बढ़त दिखाता है। जबकि नेट ट्रांजैक्शन वैल्यू (NTV) 39% बढ़कर 1,432 करोड़ रुपये हो गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अर्बन कंपनी पर अपनी ‘बाय’ (खरीदने की) रेटिंग बरकरार रखी है और इसके टारगेट प्राइस को लगभग 5.3% बढ़ाकर 190 रुपये से 200 रुपये कर दिया है।

ब्रोकरेज का कहना है कि अर्बन कंपनी (UC) ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (2QFY27) में अच्छा प्रदर्शन किया है। इसमें इंडिया कंज्यूमर सर्विसेज (इंस्टाहेल्प को छोड़कर) (ICS) का NTV, एक ऊंचे बेस के बावजूद, सालाना आधार पर 26.3% बढ़ा है, जबकि इंटरनेशनल NTV में सालाना आधार पर 66.9% की ग्रोथ हुई है। एमके ने आगे कहा कि UC के हर सेगमेंट में विकास की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि इनका लोकल नेटवर्क मजबूत है, कोर बिजनेस में इसका एकाधिकार (मोनोपोली) है और अन्य इंटरनेट कंपनियों की तुलना में इसका मार्जिन भी अधिक है।

जमकर कैश होने के बावजूद कंपनी क्यों जुटा रही है फंड?

स्नैबिट अब कंपनी का बड़ा कंपिटीटर बन रहा है। स्नैबिट भी अब तकरीबन अर्बन कंपनी जैसे ही आंकड़े डिलिवर कर रहा है। इसका मतलब है कि इस इंडस्ट्री में बड़ा कंपिटीशन होगा। इससे निपटने के लिए बोर्ड से इक्विटी के जरिए 2500 करोड़ रुपए जुटाने को मंजूरी दी है। इस बीच अर्बन कंपनी के मैनेजमेंट कमेंट्री में कहा गया है कि Q3FY28 में Adj. EBITDA के ब्रेकइवन की उम्मीद है। FY31 में Adj. EBITDA 1,000 करोड़ रुपए के पार जाना संभव है। बोर्ड से नई कैटेगरी रेसिडेंशियल एयर कंडिशनर्स को मंजूरी दी है।

कंपनी की फंड जुटाने की योजना पर बात करते हुए एमके (Emkay) ने कहा कि 25 अरब रुपये तक की यह फंड जुटाने की योजना कोर और नेटिव (Native) ग्रोत, इंस्टाहेल्प (InstaHelp) के ग्रोथ, और चुनिंदा अधिग्रहणों (acquisitions) में मदद करेगी।

ब्रोकरेज ने आगे कहा कि फंड जुटाने से निवेश क्षमता मजबूत होती है, हालांकि पूंजी का इस्तेमाल और इक्विटी डाइल्यूशन (dilution) ऐसे पहलू हैं जिनका वैल्युएशन के समय ध्यान रखना होगा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही के लिए अपने कंसोलिडेटेड एडजस्टेड EBITDA ब्रेक-ईवन के अनुमान और वित्त वर्ष 2031 के लिए 10 अरब रुपये के लक्ष्य को बरकरार रखा है।

 

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बेंगलुरु में Urban Company की सर्विस पर विवाद, पत्नी की अंगूठी चोरी होने के आरोप पर कंपनी का आया जवाब

ऑनलाइन ऐप से घर की सफाई के लिए प्रोफेशनल बुलाना आजकल आम बात है, लेकिन अगर इसी दौरान घर से कोई कीमती सामान गायब हो जाए तो भरोसे पर सवाल उठना लाजिमी है। बेंगलुरु के एक विज्ञापन पेशेवर ने Urban Company की क्लीनिंग सर्विस को लेकर ऐसा ही आरोप लगाया है। उनका दावा है कि घर की सफाई के दौरान उनकी पत्नी की शादी की सोने की अंगूठी गायब हो गई। मामला तब और चर्चा में आ गया, जब उन्होंने बताया कि पुलिस ने अंगूठी शहर से करीब 100 किलोमीटर दूर से बरामद की। इस घटना के बाद कंपनी की ग्राहक सेवा और ऑनलाइन बुकिंग वाली घरेलू सेवाओं की जवाबदेही पर बहस छिड़ गई है।

प्रीमियम क्लीनिंग सर्विस बुक की, फिर गायब हुई अंगूठी

बेंगलुरु के विज्ञापन पेशेवर शुभम मजूमदार ने LinkedIn पर अपना अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, उन्होंने Urban Company की InstaHelp सेवा के तहत घर की सफाई के लिए ‘Gold Expert’ कैटेगरी बुक की थी। इसी दौरान उनकी पत्नी की शादी की सोने की अंगूठी गायब हो गई।

मजूमदार ने आरोप लगाया कि सर्विस के लिए आए कर्मचारी ने अंगूठी चुराई। हालांकि, यह उनका आरोप है और मामले में किसी की दोषसिद्धि की जानकारी सामने नहीं आई है।

कंपनी से शिकायत की, लेकिन जवाब से नहीं हुए संतुष्ट

मजूमदार के मुताबिक, उन्होंने अंगूठी गायब होने की जानकारी तुरंत ऐप के जरिए कंपनी को दी। ग्राहक सहायता टीम ने उन्हें बताया कि कंपनी की रिकवरी टीम मामले की जांच करेगी और इसमें चार से पांच दिन लग सकते हैं।

उनका दावा है कि एक दिन बीतने के बाद भी कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कंपनी के शिकायत अधिकारी से संपर्क कर मामले की जानकारी और संबंधित कर्मचारी का विवरण मांगा। लेकिन मजूमदार के अनुसार, उन्हें संतोषजनक जवाब मिलने के बजाय सामान्य तरह का संदेश मिला।

उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी गई, जबकि वह पहले ही पुलिस से संपर्क कर चुके थे।

100 किलोमीटर दूर से मिली अंगूठी, Uber भी करनी पड़ी बुक

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात अंगूठी की बरामदगी को लेकर सामने आई। मजूमदार ने दावा किया कि पुलिस ने अंगूठी बेंगलुरु से करीब 100 किलोमीटर दूर एक जगह से बरामद की। उनके मुताबिक, पुलिस को वहां तक पहुंचाने के लिए उन्हें इंटरसिटी Uber बुक करनी पड़ी।

शिकायत के बीच आया सर्विस रेटिंग का मैसेज

मजूमदार ने कंपनी के ऑटोमेटेड मैसेज के स्क्रीनशॉट भी साझा किए। उनका कहना था कि अंगूठी गायब होने की शिकायत के बीच कंपनी ने उनसे सर्विस को रेट करने और रिव्यू देने के लिए संदेश भेज दिया। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

Urban Company ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए उनसे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर निजी संदेश में साझा करने को कहा, ताकि मामले की जांच की जा सके। इस पर मजूमदार ने सवाल उठाया कि जब शिकायत पहले से दर्ज है, तो दोबारा जानकारी क्यों मांगी जा रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस घटना के बाद कुछ लोगों ने कंपनी की ग्राहक सेवा पर सवाल उठाए, जबकि कुछ यूजर्स ने ग्राहकों को कीमती सामान सुरक्षित रखने की सलाह दी। फिलहाल, यह मामला घरेलू सेवाओं में भरोसे, सुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा में है।

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यूपी का शख्स मुंबई में नाई का काम करके हर महीने कमाता है करीब 1 लाख रुपये, हफ्ते में 6 दिन करता है मेहनत

भारत में सरकारी नौकरी को अक्सर सुरक्षित भविष्य और अच्छी जिंदगी की गारंटी माना जाता है। लेकिन मुंबई में काम करने वाले उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ निवासी एक नाई की कहानी इस सोच से अलग नजर आती है। दावा है कि वह महीने में करीब 1 लाख रुपये कमाता है। दिलचस्प बात यह है कि इतनी कमाई के बावजूद वह एंट्री-लेवल सरकारी नौकरी मिलने पर भी अपना मौजूदा काम छोड़ना नहीं चाहता।

लेखक और फंड मैनेजर हर्ष गुप्ता मधुसूदन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस नाई के साथ हुई बातचीत साझा की। उनकी पोस्ट के मुताबिक, नाई हफ्ते में छह दिन सुबह से रात तक काम करता है। यात्रा के बुनियादी खर्च निकालने के बाद उसकी मासिक कमाई करीब एक लाख रुपये बताई गई है।

मेहनत और आजादी को मानता है अपनी सबसे बड़ी पूंजी

हर्ष के मुताबिक, बातचीत के दौरान नाई ने कहा कि काम करने और मेहनत करने वालों के लिए अवसरों की कमी नहीं है। वह अपने काम को पसंद करता है और इसमें मिलने वाली आजादी उसके लिए अहम है। यही वजह है कि वह सरकारी नौकरी के बजाय अपना मौजूदा काम जारी रखना चाहता है।

उसकी कहानी ने रोजगार को लेकर एक दिलचस्प सवाल खड़ा किया है क्या अच्छी कमाई और संतुष्टि के लिए सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता है? हालांकि, एक व्यक्ति का अनुभव पूरे रोजगार बाजार की तस्वीर नहीं बताता।

आजमगढ़ से लखनऊ तक का सफर हुआ आसान, विकास से खुश है परिवार

बातचीत में उत्तर प्रदेश के विकास का जिक्र भी आया। हर्ष के अनुसार, नाई ने बताया कि पहले उसके गांव से लखनऊ पहुंचने में 7-8 घंटे लगते थे। अब बेहतर सड़कों के कारण उतने ही समय में आना-जाना संभव हो गया है, वह भी रास्ते में चाय और खाने के लिए रुकने के बाद।

नाई ने देश में हुए विकास कार्यों पर खुशी जताई। उसने बताया कि गांव में उसके परिवार को कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है, हालांकि शहर में ऐसा लाभ नहीं मिला।

टैक्स भरने पर गर्व, बेटे की पढ़ाई पर भी ध्यान

इस कहानी का एक और पहलू उसकी पारिवारिक जिंदगी है। हर्ष के मुताबिक, नाई की कमाई से टैक्स कटता है और वह गर्व के साथ इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल करता है। कई बार उसे रिफंड भी मिलता है।

उसका एक छोटा बेटा है, जिसे वह निजी प्री-स्कूल में पढ़ाता है। उसकी पत्नी भी कमाई में योगदान देती थी, लेकिन फिलहाल बच्चे की देखभाल के लिए काम से ब्रेक पर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, क्या हर किसी के लिए ऐसे अवसर हैं?

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने नाई की मेहनत और आत्मनिर्भरता की तारीफ की। वहीं, कुछ ने सवाल उठाया कि क्या एक नाई के लिए हर महीने एक लाख रुपये कमाना आम बात है। कुछ लोगों ने इस कमाई के दावे की तुलना दूसरे शहरों में नाइयों की आमदनी से भी की।

दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने कहा कि एक व्यक्ति की सफलता को देश में रोजगार की पूरी स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने शिक्षित युवाओं के रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए।

हर्ष ने अपनी पोस्ट के अंत में व्यंग्य करते हुए लिखा कि उनका मन नाई से कहने का हुआ कि वह भारत और अपनी जिंदगी को लेकर इतनी सकारात्मक सोच छोड़कर सोशल मीडिया पर देश की नाकामियों के बारे में पढ़े, लेकिन वह ऐसा कह नहीं सके।

इस कहानी का असली पहलू यही है कि जहां कुछ लोग सरकारी नौकरी को सफलता मानते हैं, वहीं कुछ के लिए अपने काम में कमाई, संतुष्टि और आजादी ज्यादा मायने रखती है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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Sugar Price: भाव में आ सकती है नरमी, सरकार ने विदेश भेजी जाने वाली चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की मंजूरी दी

भारत में चीनी की कमी को देखते हुए रिफाइनर करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में बेच सकते हैं। यह चीनी पहले विदेश भेजी जानी थी। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।

यह स्टॉक करीब एक हफ्ते के भीतर घरेलू बाजार में आ सकता है। इतनी चीनी देश की करीब पांच दिन की कुल खपत के बराबर है। इससे हाल में तेजी से बढ़ी चीनी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

इस साल चीनी की कमी क्यों हुई?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। लेकिन इस साल उत्पादन उम्मीद से कम रहने का अनुमान है। कई प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में बारिश सामान्य नहीं रही। फसलों में बीमारी का असर भी पड़ा है।

दूसरी तरफ अब देश में त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। अगस्त के आखिर से जनवरी तक चीनी की खपत आमतौर पर काफी बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर पैकेज्ड फूड तक में चीनी की मांग बढ़ती है। यानी इस समय बाजार में चीनी की जरूरत बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव है।

सरकार ने दो बड़े फैसले लिए

सरकार ने हाल में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए दो कदम उठाए हैं। पहला, 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी गई है।

दूसरा, रिफाइनर्स को कुछ ऐसी रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है, जिसे पहले एक्सपोर्ट के लिए रखा गया था। अब इसी फैसले के तहत करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आ सकती है।

चीनी के दाम में पहले ही आई नरमी

सरकार के कदम का असर कीमतों पर दिखने लगा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक, देश में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत पिछले हफ्ते ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

अब कीमत घटकर करीब ₹54 से ₹55 प्रति किलो रह गई है। 20 अगस्त को ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की घोषणा के बाद बाजार में राहत देखने को मिली है। नाइकनावरे का कहना है कि सरकार के समय पर उठाए गए कदमों से कीमतों में और नरमी आ सकती है। इससे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को राहत मिलेगी।

कितना इंपोर्ट हो सकता है?

सरकार ने भले ही 10 लाख टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, लेकिन पूरा कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम है। Bloomberg ने पांच ट्रेडर्स, एनालिस्ट्स और मिलर्स से बातचीत के आधार पर अनुमान लगाया है कि अक्टूबर के अंत तक करीब 3 लाख से 6 लाख टन चीनी का इंपोर्ट हो सकता है।

घरेलू कीमतों में नरमी आने से मिलर्स और रिफाइनर्स के लिए ज्यादा चीनी इंपोर्ट करने का फायदा कम हो गया है। इसलिए पूरा 10 लाख टन कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम बताई जा रही है।

ब्राजील से चीनी आने तक मिलेगी राहत

जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में एक्सपोर्ट वाली चीनी उतारने से फिलहाल राहत मिल सकती है। बाद में भारत को इंपोर्ट की जरूरत फिर भी पड़ेगी। इसका मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखना है, जब तक ब्राजील से चीनी की खेप भारत पहुंचना शुरू नहीं हो जाती।

भारत में रिफाइनर्स को Advance Authorisation के तहत कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री इंपोर्ट करने की अनुमति भी है। हालांकि, प्रोसेसिंग के बाद इस चीनी को तय नियमों के तहत एक्सपोर्ट करना होता है।

Urban Company Share: BofA ने रेटिंग घटाई, शेयर में तीन दिन की तेजी पर भी ब्रेक लगा

Urban Company Share: BofA ने रेटिंग घटाई, शेयर में तीन दिन की तेजी पर भी ब्रेक लगा

Urban Company Share: टेक्नोलॉजी से जुड़े होम-सर्विस प्लेटफॉर्म Urban Company के शेयर में बुधवार को गिरावट आई। इसके साथ लगातार तीन दिन से चल रही तेजी भी थम गई। इसकी वजह है ग्लोबल ब्रोकरेज Bank of America यानी BofA की नई रिपोर्ट।

BofA ने Urban Company की रेटिंग ‘न्यूट्रल’ से घटाकर ‘अंडरपरफॉर्म’ कर दी है। ब्रोकरेज को शेयर की मौजूदा कीमत ज्यादा लग रही है। कंपनी को घाटा भी हो रहा है। ऊपर से Instant Help कारोबार में मुकाबला बढ़ रहा है।

शेयर 0.69% गिरा

बुधवार को NSE पर Urban Company का शेयर 0.69% गिरकर ₹168.12 पर बंद हुआ। हालांकि, इससे पहले तीन कारोबारी दिनों में शेयर करीब 16% चढ़ चुका था।

जून तिमाही के नतीजों के बाद शेयर करीब 30% ऊपर जा चुका था। इसी तेजी के बाद BofA ने अपना रुख बदला है। ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट ₹155 रखा है। यानी मौजूदा भाव से करीब 8% नीचे जाने का अनुमान है।

Instant Help कारोबार चिंता बढ़ा रहा

BofA की सबसे बड़ी चिंता Urban Company का Instant Help कारोबार है। कंपनी इस सेगमेंट में तेजी से पैसा लगा रही है। लेकिन अभी यहां घाटा काफी बढ़ गया है।

ब्रोकरेज का मानना है कि इस कारोबार में मुकाबला और बढ़ेगा। इससे कंपनी की कमाई पर दबाव आ सकता है। Urban Company को Snabbit और Pronto जैसी कंपनियों से टक्कर मिल रही है। दोनों ने हाल में पैसा भी जुटाया है। इसका मतलब है कि मुकाबला आगे और तेज हो सकता है।

InstaHelp का घाटा 13 गुना बढ़ा

InstaHelp का EBITDA घाटा तेजी से बढ़ा है। FY26 की पहली तिमाही में यह करीब ₹10 करोड़ था। FY27 की पहली तिमाही में घाटा बढ़कर करीब ₹130 करोड़ हो गया। यानी कंपनी इस कारोबार को तेजी से बढ़ाने के लिए पैसा लगा रही है। लेकिन फिलहाल इसका असर मुनाफे पर नहीं दिख रहा है।

BofA ने इसी वजह से Urban Company के कमाई अनुमान भी घटाए हैं। FY28 के लिए अब उसे प्रति शेयर ₹0.73 का घाटा होने का अनुमान है। पहले यह अनुमान ₹0.59 के घाटे का था। FY29 के लिए EPS अनुमान भी ₹2.27 से घटाकर ₹1.41 कर दिया गया है।

UBS और Emkay की राय अलग

Urban Company पर सभी ब्रोकरेज की राय एक जैसी नहीं है। इससे पहले UBS ने शेयर पर कवरेज शुरू की थी। उसने इसे ‘Buy’ रेटिंग दी थी। UBS का मानना है कि भारत का ऑनलाइन होम सर्विस बाजार तेजी से बढ़ सकता है। UBS ने इस बदलाव को भारत के क्विक कॉमर्स में आए ‘Blinkit मोमेंट’ जैसा बताया था।

इसके बाद Emkay ने भी शेयर पर कवरेज शुरू की। उसने ‘Buy’ रेटिंग दी और ₹190 का टारगेट दिया। Emkay को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के बीच भारत का कंज्यूमर सर्विस मार्केट करीब 19.8% CAGR से बढ़ सकता है।

Vedanta Aluminium share Price: मोतीलाल ओसवाल ने दी खरीदने की सलाह, शेयर 3 फीसदी उछला

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Vishal Mega Mart Share Price: गिरते बाजार में हाइपरमार्केट चेन का शेयर 11% भागा, MD गुनेंदर कपूर के रीअपॉइंटमेंट से ​निवेशक खुश

हाइपरमार्केट चेन विशाल मेगा मार्ट के शेयरहोल्डर्स के लिए 24 अगस्त का दिन बेहद अच्छा बीत रहा है। शेयर की कीमत में दिन में 11 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई पर भाव 115.40 रुपये के हाई तक गया। कंपनी ने शुक्रवार, 21 अगस्त को बाजार बंद होने के बाद जानकारी दी थी कि उसके मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) गुनेंदर कपूर को अगले 5 सालों के लिए रीअपॉइंट किया गया है। उनका नया कार्यकाल 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा और 31 अगस्त 2031 तक रहेगा।

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि कपूर को 27 जून 2024 को 3 साल के लिए विशाल मेगा मार्ट का MD और CEO नियुक्त किया गया था। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 जून 2027 को खत्म हो रहा है। उनके रीअपॉइंटमेंट पर अभी शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लिया जाना बाकी है।

शेयर एक साल में 25 प्रतिशत गिरा

विशाल मेगा मार्ट दिसंबर 2024 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 8000 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 52900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक साल में 25 प्रतिशत नीचे आया है। साल 2026 में अब तक यह 16 प्रतिशत की गिरावट देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 40.09 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 157.75 रुपये और निचला स्तर 98.70 रुपये है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,887.31 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 173.19 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 37 लाख रुपये दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026 के दौरान विशाल मेगा मार्ट का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 6,631.38 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 656 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 1.41 करोड़ रुपये रही।

जून तिमाही में विशाल मेगा मार्ट ने 24 नए स्टोर खोले, जिससे इसके कुल स्टोर्स की संख्या 819 हो गई। कंपनी ने अपनी क्विक-कॉमर्स पहल का विस्तार 520 शहरों में 767 स्टोर तक किया है। इसके रजिस्टर्ड यूजर्स की संख्या 1.41 करोड़ है।

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Urban Company Share Price: केंट RO हटाएगी Native वॉटर प्योरिफायर की बुराई वाले विज्ञापन, शेयर 7% तक उछला

होम सर्विसेज देने वाली अर्बन कंपनी के शेयरों में 24 अगस्त को अच्छी तेजी है। BSE पर शेयर की कीमत शुरुआती कारोबार में पिछले बंद भाव से 6.8 प्रतिशत तक उछलकर 169.45 रुपये के हाई तक गई। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 25900 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इस उछाल की अहम वजह है- कंपनी और केंट RO सिस्टम के बीच हुए विवाद का नतीजा और UBS की ओर से ‘बाय’ रेटिंग के साथ शुरू किया गया कवरेज। दरअसल अर्बन कंपनी ने केंट RO सिस्टम के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि और अपमानजनक प्रचार का केस दायर किया था।

कंपनी का आरोप था कि Kent RO के विज्ञापनों और सोशल मीडिया कंटेंट में उसके ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर्स के बारे में गलत और गुमराह करने वाले दावे किए गए। मुकदमेबाजी के बाद केंट ने कहा है कि वह ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर के बारे में अपमानजनक विज्ञापन हटा लेगी।

Urban Company ने शेयर बाजारों को बताया है कि उसने 11 अगस्त को यह केस दायर किया था। आरोप लगाया कि Kent RO का विज्ञापन कैंपेन उसके ‘Native’ M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro वॉटर प्योरिफायर की दो साल की फिल्टर लाइफ और दो साल की सर्विस लाइफ वाली खूबियों को निशाना बना रहा है। Kent RO के विज्ञापनों में इन खूबियों को “मार्केटिंग का हथकंडा” बताया गया और दावा किया गया कि ग्राहकों के लिए ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर का इस्तेमाल असुरक्षित और जोखिम भरा है।

12 अगस्त को हुई हाई कोर्ट में सुनवाई

इस मामले की सुनवाई 12 अगस्त को हाई कोर्ट में हुई। Kent RO से कहा गया कि वह 15 दिनों के अंदर विवादास्पद विज्ञापन और सोशल मीडिया कंटेंट हटा ले। इसके बाद Kent RO ने कहा कि वह केस से जुड़े विज्ञापनों को हटा लेगी और ऐसे ही या मिलते-जुलते दावे करने वाले दूसरे विज्ञापन या प्रमोशनल कंटेंट नहीं चलाएगी।

अर्बन कंपनी भारत, UAE, सिंगापुर और सऊदी अरब में एक मल्टी कैटेगरी होम सर्विस प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है। इसके प्लेटफॉर्म पर क्लीनिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिक वर्क, अप्लायंसेज रिपेयर, ब्यूटी ट्रीटमेंट और मसाज थेरेपी जैसी सर्विसेज मिलती हैं। इसका InstaHelp वर्टिकल बुकिंग के 10-15 मिनट के अंदर सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने और खाना बनाने के लिए लोग मुहैया कराने जैसी सर्विसेज देता है।

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UBS ने Urban Company पर दी ‘बाय’ रेटिंग

अर्बन कंपनी 17 सितंबर 2025 को ​लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,900.24 करोड़ रुपये का था। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 19.02 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ब्रोकरेज फर्म UBS ने इस शेयर पर कवरेज शुरू किया है और इसे “बाय” रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस 180 रुपये प्रति शेयर रखा है। मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक की रेटिंग को “अंडरवेट” से डबल अपग्रेड कर सीधा “ओवरवेट” कर दिया है। टारगेट प्राइस 128 रुपये से बढ़ाकर 165 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी को कंसोलिडेटेड बेसिस पर 92.12 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। एक साल पहले कंपनी 6.94 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी। जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 43.85 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 528.34 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Urban Company का Kent RO पर मानहानि केस, हाई कोर्ट में विज्ञापन हटाने पर बनी बात

Urban Company ने Kent RO Systems के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि और ब्रांड को बदनाम करने का मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि Kent RO ने अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्ट में उसके Native वॉटर प्यूरीफायर को लेकर गलत और भ्रामक दावे किए।

कंपनी ने रविवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह मुकदमा 11 अगस्त 2026 को दायर किया गया था।

किस बात पर हुआ विवाद?

Urban Company का कहना है कि Kent RO की विज्ञापन मुहिम में उसके Native M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro वॉटर प्यूरीफायर के दो साल की फिल्टर लाइफ और दो साल तक सर्विसिंग की जरूरत नहीं वाले फीचर को निशाना बनाया गया।

कंपनी के मुताबिक Kent RO ने इन दावों को ‘मार्केटिंग गिमिक’ बताया और कहा कि Native वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना उपभोक्ताओं के लिए ‘असुरक्षित’ और ‘जोखिम भरा’ है।

Kent RO ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई 12 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान Kent RO ने अदालत से कहा कि वह विवादित विज्ञापन हटा देगा। साथ ही भविष्य में ऐसे विज्ञापन या प्रचार सामग्री भी नहीं चलाएगा, जिसमें दो साल की फिल्टर लाइफ या दो साल तक बिना सर्विसिंग वाले फीचर को लेकर Urban Company के खिलाफ इसी तरह के दावे किए जाएं।

Urban Company के मुताबिक अदालत ने Kent RO को 12 अगस्त से 15 दिनों के भीतर विवादित विज्ञापन और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश 12 अगस्त को पारित हुआ था, जबकि इसे 22 अगस्त को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

दोनों कंपनियों के बीच और भी कानूनी मामले

Urban Company ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच अन्य कानूनी मामले अभी भी अदालत में लंबित हैं। इनमें Kent RO की ओर से दायर पेटेंट उल्लंघन का मुकदमा, उस पेटेंट को चुनौती देने वाला Urban Company का जवाबी दावा और Kent RO के खिलाफ दायर टॉर्टियस इंटरफेरेंस का मामला शामिल है।

शेयरों में कैसी रही चाल?

Urban Company का शेयर शुक्रवार को 8.19% चढ़कर ₹157.41 पर बंद हुआ था। इस साल अब तक शेयर करीब 20% चढ़ चुका है। वहीं पिछले 12 महीनों में इसमें करीब 6% की गिरावट रही है।

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