Silver Prices: चांदी में रिकॉर्ड हाई से 46% की गिरावट, जेपी मॉर्गन ने कीमतों के लिए अनुमान घटाया

Silver Prices: चांदी में निवेश करने वालों को पिछले कुछ महीनों में बड़ा झटका लगा है। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3,84,632 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन 19 अक्टूबर तक यह गिरकर ₹2,08,380 प्रति किलो रह गई। यानी रिकॉर्ड हाई से करीब 45.8% की गिरावट आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी दबाव में है। मंगलवार को इसकी कीमत करीब 56.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। जनवरी के 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से यह करीब 54% नीचे है।

चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इससे बाजार को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकते हैं। चांदी पर इसका दबाव पड़ रहा है, क्योंकि इससे नियमित ब्याज आय नहीं होती।

चांदी का भाव कितना गिर सकता है?

J.P. Morgan Global Research को उम्मीद है कि 2026 की चौथी तिमाही में चांदी करीब 63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर सकती है। बैंक ने 2026 के लिए औसत भाव का अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। 2027 के लिए उसका अनुमान 63 डॉलर प्रति औंस है।

Bloomberg Intelligence के कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने भी गिरावट की आशंका जताई है। Kitco के मुताबिक, उनके अनुसार चांदी निकट भविष्य में 50 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। लंबे समय तक इसका भाव 50 से 84 डॉलर के दायरे में रह सकता है।

तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों पर नजर

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को सहारा दिया। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने की आशंका बढ़ती है।

बाजार को उम्मीद है कि फेड 27-28 अक्टूबर की बैठक में दरें नहीं बदलेगा। हालांकि, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका भी बढ़ी है। आने वाले अमेरिकी CPI और PPI आंकड़े इस दिशा में अहम होंगे। महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो चांदी पर दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू चांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला है। लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गिरावट पूरी तरह नहीं रुक सकती।

चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को कच्चे तेल, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कीमत गिरने को सस्ता खरीदने का संकेत न मानें। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणों में खरीदारी करने से समय चुनने का जोखिम कुछ कम हो सकता है।

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Volkswagen Group considers selling Ducati

Volkswagen Group considers selling Ducati
Ducati Monster MY26's right side tank.

It’s no secret that Volkswagen Group, the German behemoth that owns brands such as Audi, Bugatti and Lamborghini, is in financial trouble. Facing fierce competition from Chinese firms, the group already announced plans to lay off 50,000 employees in Germany alone by 2030, and the fate of several factories across the world has also become uncertain. We also received reports of the Volkswagen Group considering a simplified variant line-up for cars across its brands. It now appears the two-wheeler business will be impacted too.

  1. Ducati is one of the Volkswagen Group brands being evaluated for a possible sale
  2. In 2025, it reported EUR 925 million revenue and EUR 52 million operating profit
  3. Patritalia, another Italian company, had already made an offer for Ducati and MV Agusta

Ducati sale is under evaluation, but no decisions have been made yet

This isn’t the first time Ducati is being evaluated for sale

Claudio Domenicali, CEO of the Borgo Panigale manufacturer, confirmed that the parent group is evaluating the brand’s future. “We are aware of the shareholders’ plan to reevaluate its holdings. Ducati is one of these holdings, but no final decision has been made on Ducati yet: it’s one of the ongoing evaluations,” Domenicali told GPOne in a press interaction at the brand’s “Ducati 100 – A century on display” exhibition in Bologna, Italy. To be clear, this doesn’t mean Volkswagen Group is bent on selling Ducati; it merely confirms that it is evaluating that possibility. The brand is among 600 of the group’s 2,000 businesses being reviewed. Now, Audi CEO Gernot Dollner has confirmed Domenicali’s claim, saying, “It’s part of the evaluation process that we’ll also talk about Ducati, but nothing has been decided.”

Bloomberg reported in early June that Volkswagen Group’s supervisory board approved slimming down its portfolio by a third, with the layoffs being a part of it, and approved the sale of a 51 percent of its stake in Everllence ship-engine unit, which is expected to bring EUR 7.4 billion. In contrast, a Ducati sale is expected to bring around EUR 1.25 billion.

This isn’t the first time Ducati is being evaluated for sale. The group acquired Ducati in 2012 and then considered selling it in 2017 before quickly changing its mind. The Italian superbike manufacturer has steadily become synonymous with innovation in motorsport and has been highly successful in the World Superbike Championship (WSBK), MXGP and, of course, MotoGP. Ducati reported revenue of EUR 925 million and operating profit of EUR 52 million in 2025.

Ducati already has a potential buyer in Patritalia

An Italian investor who wants to have all-Italian technicians, MV Agusta and all MotoGP classes

If Volkswagen Group decides to hand off Ducati, there is already someone waiting in the lobby. In August, Italy-based Patritalia expressed more than an interest in acquiring Ducati, after doing the same for MV Agusta, which is also in hot water. However, some of Patritalia’s plans for the brands have already riled up quite the chatter, according to Visordown. The group has expressed interest in taking over as the sole engine supplier for Moto2, which is currently powered by Triumph, while also advocating for a more open market across all three MotoGP classes. Secondly, it has outlined a preference for Ducati to have a predominantly Italian workforce. Volkswagen Group had previously made it clear that Ducati isn’t up for sale, but considering things have changed since then, we will have to await further developments.

Triumph has been the sole engine supplier for Moto2 since 2019, when it took over from Honda. It also recently announced that it is bringing a new engine with increased peak power delivery to the class from next year. Moto3 is slated to get Yamaha as the sole engine supplier from 2028, with the R7 engine heavily modified and adapted for the class, replacing KTM and Honda. Changing either Triumph or Yamaha would require their consent, as well as consent from Liberty Media, the current owner of the MotoGP brand. Considering that both companies have announced plans for the future and that Volkswagen hasn’t been receptive to Patritalia’s bids so far, its aspirations have a slim chance of becoming a reality at the moment.

Sources: GPOne, Bloomberg and Visordown

Coca-Cola IPO: भारत में बॉटलिंग बिजनेस का IPO लाएगी कोका-कोला, $10 अरब के वैल्यूएशन पर नजर

Coca Cola IPO: ग्लोबल बेवरेज कंपनी कोका-कोला अपनी भारतीय बॉटलिंग यूनिट Hindustan Coca-Cola Beverages (HCCB) का IPO लाने की तैयारी कर रही है। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कोका-कोला दिसंबर में IPO का ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने पर विचार कर रही है।

Bloomberg के मुताबिक, Coca-Cola ने IPO पर काम कर रहे बैंकों की टीम में Axis Capital और IIFL Capital Services को भी जोड़ा है। इससे पहले Kotak Mahindra Capital, Citigroup, JPMorgan Chase और Morgan Stanley भी इस डील पर काम कर रहे थे।

₹10 अरब डॉलर की वैल्यूएशन का लक्ष्य

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, IPO में ज्यादातर हिस्सेदारी मौजूदा निवेशक बेच सकते हैं। Coca-Cola अपनी भारतीय बॉटलिंग यूनिट की वैल्यूएशन करीब 10 अरब डॉलर रखना चाहती है।

पहले खबर थी कि IPO से करीब 1 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं। हालांकि, अभी बातचीत चल रही है। इसलिए IPO का समय, वैल्यूएशन और स्ट्रक्चर बदल सकता है।

भारत में IPO का जोर

जुलाई से सितंबर के बीच भारत में IPO के जरिए करीब 10 अरब डॉलर जुटाए गए। यह किसी एक तिमाही में जुटाई गई अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

इस दौरान NSE और SBI Funds Management जैसे बड़े IPO भी आए। भारत में इस साल अब तक करीब 250 IPO से 13 अरब डॉलर से ज्यादा जुटाए जा चुके हैं।

क्या करती है HCCB?

बेवरेज कंपनी Hindustan Coca-Cola Beverages भारत में Coca-Cola के कई लोकप्रिय ड्रिंक्स की बॉटलिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का काम करती है। कंपनी के पोर्टफोलियो में Coca-Cola, Thums Up, Sprite, Fanta, Limca और Maaza जैसे ब्रांड शामिल हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अदाणी और GMR के लिए खुल सकता है एयरलाइन कारोबार का रास्ता, सरकार नियम बदलने पर कर रही विचार

भारत सरकार दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेटरों के लिए एयरलाइन कंपनियों में हिस्सेदारी से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी ये ऑपरेटर किसी एयरलाइन में 10% से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं रख सकते। एविएशन मिनिस्टर के. राममोहन नायडू ने कहा कि सरकार इस पाबंदी को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है।

इस कदम का मकसद देश के एविएशन मार्केट में IndiGo और Air India के दबदबे को कम करना है। दोनों एयरलाइंस मिलकर देश के करीब 90% घरेलू यात्रियों को संभालती हैं। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है।

दिल्ली और मुंबई में अलग है नियम

बेंगलुरु जैसे एयरपोर्ट के लिए अपनी एयरलाइन शुरू करने पर ऐसी रोक नहीं है। लेकिन दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के ऑपरेशन और मैनेजमेंट एग्रीमेंट में ऐसी शर्त है, जो इनके ऑपरेटरों को किसी एयरलाइन पर नियंत्रण रखने से रोकती है।

नायडू ने कहा कि इस नियम में बदलाव पर विचार चल रहा है। हालांकि, अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। Bloomberg News ने सबसे पहले जुलाई में इस प्रस्ताव की जानकारी दी थी।

Adani और GMR के लिए खुल सकता है रास्ता

अगर यह पाबंदी हटती है तो Adani Group और GMR Airports के लिए एयरलाइन कारोबार में उतरने का रास्ता खुल सकता है। Adani Group मुंबई समेत आठ एयरपोर्ट ऑपरेट करता है। वहीं, GMR Airports दिल्ली समेत पांच एयरपोर्ट का संचालन करता है।

यानी नियम बदलने के बाद ये कंपनियां किसी एयरलाइन में बड़ी हिस्सेदारी खरीद सकती हैं या एयरलाइन कारोबार में उतरने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

सरकार चाहती है कम से कम पांच बड़ी एयरलाइंस

एविएशन मिनिस्टर ने कहा कि भारत को कम से कम पांच एयरलाइंस की जरूरत है। इनमें से हर एयरलाइन के पास कम से कम 100 विमान होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार नई एयरलाइन शुरू करने के लिए आवेदन करने वाले किसी भी खिलाड़ी के प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है।

कैसे बढ़ा IndiGo और Air India का दबदबा?

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय एविएशन मार्केट में कई बड़े बदलाव हुए हैं। Jet Airways और Go Airlines बंद हो गईं। दूसरी तरफ Vistara और AirAsia India का Tata Group की एयरलाइंस में विलय हो गया।

इसके बाद बाजार में IndiGo और Air India की पकड़ काफी मजबूत हो गई। Akasa Air अभी नई एयरलाइन है। SpiceJet भी चुनौतियों से जूझ रही है। इसके अलावा कुछ छोटी क्षेत्रीय एयरलाइंस हैं, लेकिन उनकी बाजार हिस्सेदारी काफी कम है।

ऐसे में सरकार ज्यादा बड़ी एयरलाइंस खड़ी करना चाहती है। अगर दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से जुड़ा नियम बदलता है तो Adani Group और GMR जैसे बड़े एयरपोर्ट ऑपरेटर भी इस बाजार में बड़े खिलाड़ी के तौर पर उतर सकते हैं।

SEBI ने अदाणी ग्रुप की पांच कंपनियों का केस ₹1.51 करोड़ में निपटाया, हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़ा था मामला

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Apple का बड़ा प्लान लीक! 2027 तक आएंगे 16 नए प्रोडक्ट्स, Smart Glass और Camera AirPods भी शामिल

Apple ने पिछले हफ्ते अपना ‘Surprise and Shine’ इवेंट आयोजित किया था, जिसमें कंपनी ने iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और अपना पहला फोल्डेबल फोन iPhone Duo लॉन्च किया। नए iPhones के साथ-साथ, क्यूपर्टिनो-बेस्ड टेक कंपनी ने नई Apple Watches और AirPods भी पेश किए। अब, Bloomberg की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि कंपनी 2027 की पहली छमाही तक 16 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कर सकती है।

आने वाले महीनों के लिए Apple का प्रोडक्ट रोडमैप

Bloomberg के मार्क गुरमन की एक रिपोर्ट के अनुसार, Apple 2026 के बचे हुए समय और 2027 की पहली छमाही में 16 नए हार्डवेयर प्रोडक्ट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इनमें एंट्री-लेवल iPhone, नए डिजाइन वाला MacBook Pro, लंबे समय से रुका हुआ स्मार्ट होम डिस्प्ले और स्मार्ट ग्लास के क्षेत्र में Apple की पहली बड़ी कोशिश शामिल हो सकती है। गुरमन का कहना है कि इस साल के आखिर में छह नए प्रोडक्ट आ सकते हैं, जिनमें नए टचस्क्रीन MacBook Pro मॉडल (संभवतः 14- और 16-इंच वर्शन) और M6 चिप वाला अपडेटेड 14-इंच MacBook Pro (नॉन-टचस्क्रीन मॉडल) शामिल हैं।

इसके अलावा, नए रंगों और M6 प्रोसेसर के साथ एक नया iMac भी लॉन्च किया जा सकता है। आखिर में, अपग्रेडेड OLED डिस्प्ले वाला iPad Mini भी पेश किया जा सकता है। उम्मीद है कि यह आने वाला कॉम्पैक्ट टैबलेट OLED iPad Air मॉडल की अगली लहर की शुरुआत करेगा। Apple ने इस साल अपने आम तौर पर अपनाए जाने वाले पैटर्न को भी बदला है और पिछले हफ्ते पूरी iPhone लाइनअप लॉन्च नहीं की। खबरों के मुताबिक, तीन iPhone मॉडल – iPhone 18, iPhone Air 2 और iPhone 18e – को जानबूझकर 2027 के वसंत (spring) में लॉन्च करने के लिए रोक कर रखा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 के आखिर में कुछ और नए प्रोडक्ट्स भी आएंगे: जैसे तेज M7 चिप्स वाले एंट्री-लेवल और टच-स्क्रीन मैकबुक के अपडेटेड वर्जन। उम्मीद है कि इसी दौरान Apple अपने पहले स्मार्ट ग्लास और इन-बिल्ट कैमरों वाले AirPods भी लॉन्च करेगा। इसके अलावा, 2027 के आखिर में होम सिक्योरिटी सिस्टम, नए डिजाइन वाली Apple Watch और iPhone की 20वीं एनिवर्सरी वाली सीरीज भी लॉन्च हो सकती है।

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Top IPO 2026: इस साल किन आईपीओ ने मालामाल किया? Tempsens 110% लिस्टिंग गेन के साथ सबसे आगे

Top IPO 2026: भारत के प्राइमरी मार्केट ने इस साल निवेशकों को शानदार लिस्टिंग गेन दिए हैं। कुछ IPO की शुरुआत इतनी मजबूत रही कि निवेशकों को पहले ही दिन काफी बड़ा मुनाफा मिला। कुछ मामलों में तो शेयर ने लिस्टिंग पर ही निवेश की रकम दोगुनी से ज्यादा कर दी।

पैसा लगभग डबल करने वाले IPO

Tempsens Instruments India इस लिस्ट में सबसे आगे है। कंपनी के शेयर IPO प्राइस से 110.40% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। यानी पहले दिन निवेशकों का पैसा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। यह इस साल की अब तक की सबसे मजबूत लिस्टिंग रही।

सरकारी कंपनी कोल इंडिया की सब्सिडियरी Bharat Coking Coal दूसरे नंबर पर रही। इसके शेयर 96.57% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। यानी निवेशकों को पहले दिन ही करीब दोगुनी रकम के बराबर फायदा मिला।

40% से ज्यादा रिटर्न देने वाले

इसके बाद लिस्टिंग गेन में बड़ा अंतर दिखता है। INDO MIM के शेयर 44.95% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। वहीं CMR Green Tech ने 43.44% का लिस्टिंग गेन दिया। दोनों IPO ने निवेशकों को पहले दिन ही मजबूत रिटर्न दिया।

Dhoot Transmission और Kusumgar की लिस्टिंग भी करीब-करीब एक जैसी रही। Dhoot Transmission के शेयर 37.06% प्रीमियम पर खुले। Kusumgar के शेयर 36.99% प्रीमियम पर लिस्ट हुए। दोनों के बीच सिर्फ मामूली अंतर रहा।

निवेशकों को मालामाल करने वाले IPO

कंपनी
लिस्टिंग प्रीमियम (%)

Tempsens110.40%
Bharat Coking Coal96.57%
INDO MIM44.95%
CMR Green Tech43.44%
Dhoot Transmission37.06%
Kusumgar36.99%
BigFoot Retail33.51%
Lalithaa Jewellery31.99%
Laser Power25.70%
Molbio Diagnostics

21.44%

नोट: इसमें ₹5 अरब से ज्यादा इश्यू साइज वाले IPO शामिल हैं।

स्रोत: Bloomberg

 

2026 में IPO से ₹72,165 करोड़ जुटे

Prime Database के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर 60 IPO आए। इन IPO के जरिए कंपनियों ने कुल ₹72,165 करोड़ जुटाए। खास बात यह रही कि जुलाई और अगस्त में IPO बाजार काफी सक्रिय रहा। इन दो महीनों में कुल जुटाई गई रकम का करीब 69% हिस्सा आया।

₹2.02 लाख करोड़ के IPO कतार में

IPO बाजार में आगे भी काफी हलचल देखने को मिल सकती है। Prime Database के मुताबिक, 75 कंपनियां SEBI की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इन कंपनियों के प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार करीब ₹2.02 लाख करोड़ है।

इनमें से 32 कंपनियों ने अपना इश्यू साइज बताया है। इन 32 कंपनियों के IPO का कुल आकार करीब ₹1.38 लाख करोड़ है। यानी आने वाले महीनों में भी प्राइमरी मार्केट में बड़ी रकम जुटाए जाने की संभावना है।

* एजेंसी इनपुट के साथ

Tempsens IPO Listing: 111% का लिस्टिंग गेन, पैसा डबल, ₹300 का शेयर ₹634 पर लिस्ट

 

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sugar Price: भाव में आ सकती है नरमी, सरकार ने विदेश भेजी जाने वाली चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की मंजूरी दी

भारत में चीनी की कमी को देखते हुए रिफाइनर करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में बेच सकते हैं। यह चीनी पहले विदेश भेजी जानी थी। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है।

यह स्टॉक करीब एक हफ्ते के भीतर घरेलू बाजार में आ सकता है। इतनी चीनी देश की करीब पांच दिन की कुल खपत के बराबर है। इससे हाल में तेजी से बढ़ी चीनी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

इस साल चीनी की कमी क्यों हुई?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है। लेकिन इस साल उत्पादन उम्मीद से कम रहने का अनुमान है। कई प्रमुख गन्ना उत्पादक इलाकों में बारिश सामान्य नहीं रही। फसलों में बीमारी का असर भी पड़ा है।

दूसरी तरफ अब देश में त्योहारी सीजन शुरू हो रहा है। अगस्त के आखिर से जनवरी तक चीनी की खपत आमतौर पर काफी बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर पैकेज्ड फूड तक में चीनी की मांग बढ़ती है। यानी इस समय बाजार में चीनी की जरूरत बढ़ रही है और सप्लाई पर दबाव है।

सरकार ने दो बड़े फैसले लिए

सरकार ने हाल में चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए दो कदम उठाए हैं। पहला, 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी गई है।

दूसरा, रिफाइनर्स को कुछ ऐसी रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है, जिसे पहले एक्सपोर्ट के लिए रखा गया था। अब इसी फैसले के तहत करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आ सकती है।

चीनी के दाम में पहले ही आई नरमी

सरकार के कदम का असर कीमतों पर दिखने लगा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक, देश में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत पिछले हफ्ते ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।

अब कीमत घटकर करीब ₹54 से ₹55 प्रति किलो रह गई है। 20 अगस्त को ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की घोषणा के बाद बाजार में राहत देखने को मिली है। नाइकनावरे का कहना है कि सरकार के समय पर उठाए गए कदमों से कीमतों में और नरमी आ सकती है। इससे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को राहत मिलेगी।

कितना इंपोर्ट हो सकता है?

सरकार ने भले ही 10 लाख टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, लेकिन पूरा कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम है। Bloomberg ने पांच ट्रेडर्स, एनालिस्ट्स और मिलर्स से बातचीत के आधार पर अनुमान लगाया है कि अक्टूबर के अंत तक करीब 3 लाख से 6 लाख टन चीनी का इंपोर्ट हो सकता है।

घरेलू कीमतों में नरमी आने से मिलर्स और रिफाइनर्स के लिए ज्यादा चीनी इंपोर्ट करने का फायदा कम हो गया है। इसलिए पूरा 10 लाख टन कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम बताई जा रही है।

ब्राजील से चीनी आने तक मिलेगी राहत

जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार में एक्सपोर्ट वाली चीनी उतारने से फिलहाल राहत मिल सकती है। बाद में भारत को इंपोर्ट की जरूरत फिर भी पड़ेगी। इसका मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखना है, जब तक ब्राजील से चीनी की खेप भारत पहुंचना शुरू नहीं हो जाती।

भारत में रिफाइनर्स को Advance Authorisation के तहत कच्ची चीनी ड्यूटी फ्री इंपोर्ट करने की अनुमति भी है। हालांकि, प्रोसेसिंग के बाद इस चीनी को तय नियमों के तहत एक्सपोर्ट करना होता है।

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मानसून का इस बार खेती पर कैसा असर! खरीफ फसलों की बुआई का गैप घटकर 2% पहुंचा पर धान दे रहा टेंशन, समझिए इसके मायने

देश में इस साल मानसूनी बारिश की शुरुआती सुस्ती के बाद अब खेती-किसानी के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आ रही है। जून के महीने में बीते 12 सालों की सबसे कम बारिश (40 फीसदी घाटा) दर्ज की गई थी, लेकिन जुलाई में हुई सामान्य बारिश ने खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार को दोबारा पटरी पर ला दिया है। Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसूनी फसलों के रकबे में जून के मुकाबले बड़ा सुधार देखने को मिला है। अगर आने वाले दिनों में बारिश का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता है तो इससे देश में खाद्यान्न की महंगाई को कंट्रोल करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

बुआई का अंतर घटकर 2% पर आया, 101.7 मिलियन हेक्टेयर में हुई बुआई

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक देशभर के किसानों ने 101.7 मिलियन हेक्टेयर (लगभग 251 मिलियन एकड़) में मानसूनी फसलों की बुआई पूरी कर ली है। यह आंकड़ा पिछले साल की समान अवधि में हुई बुआई के मुकाबले महज 2 फीसदी कम है। जून के महीने में अल नीनो के असर की वजह से यह अंतर काफी ज्यादा था।

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में कृषि सचिव आतिश चंद्रा ने बताया कि जून के बाद से बुआई की गति में काफी सुधार देखने को मिला है। दलहन, तिलहन और कपास जैसी प्रमुख फसलों की बुआई संतोषजनक दिख रही है। हालांकि कुछ फसलों का रकबा पिछले साल से थोड़ा कम है तो कुछ दूसरी फसलों के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी भी देखी गई है।

अगस्त और सितंबर की बारिश होगी बेहद अहम

भारत की कुल वार्षिक बारिश का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून से ही मिलता है। यह मानसून न सिर्फ फसलों की सिंचाई के लिए बल्कि भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए भी बहुत जरूरी है। जून से सितंबर तक चलने वाले इस सीजन में उगाई जाने वाली फसलें देश के कुल वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा होती हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 17 अगस्त तक देश में क्यूमेलेटिव बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है। कृषि सचिव ने स्पष्ट किया कि फसलों की पैदावार और अंतिम उत्पादन के लिए अगस्त और सितंबर महीनों की बारिश बेहद निर्णायक साबित होगी। इसके लिए कृषि मंत्रालय लगातार राज्य सरकारों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहा है। आतिश चंद्रा ने कहा कि हम राज्यों से आग्रह कर रहे हैं कि वे किसानों को इस सीजन में उपलब्ध सभी भूमि पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें, भले ही बुआई में थोड़ी देरी ही क्यों न हो रही हो।

धान की बुआई पिछड़ी, लेकिन अभी भी उम्मीद बरकरार

खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख फसल यानी धान का रकबा अभी भी पिछले आंकड़ों से पीछे चल रहा है। ये चिंता का विषय बना हुआ है। वैसे कृषि सचिव का कहना है कि किसानों के पास अगस्त के अंत तक और कुछ राज्यों/क्षेत्रों में सितंबर के महीने तक भी धान की रोपाई करने का समय उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी फसलों के अंतिम उत्पादन का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी क्योंकि राज्यों के साथ समय-समय पर समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं।

इसका सप्लाई और महंगाई पर क्या पड़ेगा असर?

अगर मानसूनी बारिश और फसलों की बुआई में यह रिकवरी नहीं होती तो देश में खाद्यान्न की सप्लाई प्रभावित हो सकती थी। सप्लाई घटने से खाने के सामान की कीमतें बढ़तीं और महंगाई पर काबू पाने की सरकारी को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था। कृषि और खाद्य बाजार पर दबाव के संकेत पहले से ही दिखने लगे हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो भारत लगभग एक दशक में पहली बार चीनी के आयात शुल्क में कटौती करने पर विचार कर रहा है ताकि घरेलू स्तर पर कीमतों और आपूर्ति को संतुलित रखा जा सके।

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JSW could acquire majority stake in Volkswagen’s India business

JSW and VW

JSW Group is in advanced talks to acquire a stake in Skoda Auto Volkswagen India, with the proposed deal potentially giving the Sajjan Jindal-led conglomerate a majority holding in Volkswagen AG’s India business, according to a Bloomberg report.

  1. Terms of the deal are yet to be finalised
  2. Skoda Auto Volkswagen India held 2.34 percent market share in FY2026
  3. JSW already owns 35 percent of JSW MG Motor India

The report says the proposed investment would bring fresh capital into Skoda Auto Volkswagen India, which oversees the group’s Skoda, Volkswagen, Audi, alongside luxury and super-luxury marques like Porsche, Lamborghini, and Bentley brands in the country. Both sides are aiming to reach an agreement in the coming weeks, although the terms are not settled and a transaction may not follow, the report said.

Volkswagen declines to comment

A Volkswagen spokesperson did not confirm the discussions, saying only that the company regularly evaluates opportunities to support its strategy in India’s passenger vehicle market. Bloomberg added that the terms of the proposed transaction are still being negotiated and may change before any agreement is reached.

What the deal could mean

If completed, the deal would mark JSW Group’s second major investment in India’s passenger vehicle industry after acquiring a 35 percent stake in MG Motor India from SAIC in 2023. The joint venture, JSW MG Motor India, began operations in 2024.

For Volkswagen, the investment could strengthen its position in India, where Skoda Auto Volkswagen India accounted for 2.34 percent of passenger vehicle sales in FY2026, according to FADA data. By comparison, Kia India held a 5.94 percent share, while JSW MG Motor India accounted for 1.40 percent. The additional investment could also support the group’s future product and business plans in the country.

India remains a focus market for Volkswagen 

India has become an increasingly important market for Volkswagen as it reshapes its global operations. According to the Bloomberg report, the company is looking to strengthen its presence outside Europe following its withdrawal from Russia and its planned exit from China.

With inputs from Dhruv Dhaka