Qualcomm layoffs: स्नैपड्रैगन चिप बनाने वाली कंपनी में छंटनी की तैयारी, स्मार्टफोन की घटती बिक्री से बढ़ी परेशानी

Qualcomm layoffs: दुनिया की बड़ी चिप निर्माता कंपनियों में शामिल क्वालकॉम (Qualcomm) दुनियाभर में कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है। कंपनी के CEO क्रिस्टियानो एमोन ने सोमवार को कर्मचारियों को भेजे एक मेमो में इसकी जानकारी दी। Reuters के मुताबिक, कर्मचारियों को नवंबर से छंटनी के नोटिस मिलने शुरू हो सकते हैं।

एमोन ने कहा कि कंपनी का मकसद बेहतर परफॉर्मेंस वाली वर्क कल्चर तैयार करना है। इसके तहत उन कर्मचारियों पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिनका प्रदर्शन लगातार उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया कि छंटनी से कितने कर्मचारी प्रभावित होंगे। पिछले साल सितंबर तक कंपनी में दुनियाभर में करीब 52,000 कर्मचारी थे। इनमें ज्यादातर फुल-टाइम कर्मचारी थे।

स्मार्टफोन बाजार में सुस्ती से बढ़ी चुनौती

क्वालकॉम को इस साल कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की कमजोर बिक्री से दबाव का सामना करना पड़ रहा है। मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों ने भी प्रमुख बाजारों में मांग को प्रभावित किया है। क्वालकॉम खासकर स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाले Snapdragon प्रोसेसर और चिपसेट बनाती है।

ये चिप फोन की प्रोसेसिंग, गेमिंग, कैमरा और AI जैसे काम संभालती हैं। कंपनी 5G और 4G नेटवर्क के लिए मॉडेम, Wi-Fi और ब्लूटूथ चिप भी बनाती है। अब कंपनी ऑटोमोबाइल, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और AI डेटा सेंटर से जुड़े चिप कारोबार में भी विस्तार कर रही है।

AI डेटा सेंटर कारोबार पर कंपनी की नजर

जुलाई के आखिर में जारी नतीजों के दौरान Qualcomm ने अनुमान जताया था कि उसका तिमाही मुनाफा बाजार की उम्मीदों से कम रह सकता है। कंपनी ने यह भी कहा था कि Apple से जुड़े प्रोडक्ट्स से होने वाला रेवेन्यू उम्मीद से ज्यादा तेजी से घटेगा।

हालांकि, Qualcomm को उम्मीद है कि डेटा सेंटर और स्मार्टफोन से इतर दूसरे कारोबारों में बढ़ोतरी से इस नुकसान की भरपाई हो सकती है। कंपनी वित्त वर्ष 2027 तक AI डेटा सेंटर बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है। उसका अनुमान है कि उस साल चिप बिक्री का बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन के अलावा दूसरे कारोबारों से आएगा। Qualcomm के शेयर पिछले 1 महीने में 11.32% टूटे हैं।

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रूसी तेल और गैस की खरीद पर ट्रंप ने प्रतिबंधों से दी छूट, भारत से हटी 100% तक टैरिफ की तलवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और ड्यूटीज यानि शुल्कों से छूट दी है। ट्रंप ने शुक्रवार रात जारी एक कार्यकारी आदेश में कहा कि कुछ प्रतिबंधों को लागू नहीं करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं ग्राहम कानून के तहत ऐसे प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट दे रहा हूं।’’ उन्होंने अमेरिकी संसद को एक सर्टिफिकेशन सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि इस समय ऐसी छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूस से सबसे अधिक तेल व गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस कानून को ग्राहम कानून के नाम से जाना जाता है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को पास किया था और ट्रंप ने दो दिन बाद इसे साइन किया था।

इस कानून के तहत ट्रंप को इसे लागू किए जाने के 30 दिन के अंदर रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले 5 सबसे बड़े देशों से अमेरिका में आने वाले सभी सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। ग्राहम कानून की धारा 115 में यह प्रावधान भी है कि अगर प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में हो, तो राष्ट्रपति ऐसी छूट दे सकते हैं।

भारत से फिलहाल हटी 100 प्रतिशत टैरिफ की तलवार

रूस से सबसे अधिक तेल व गैस खरीदने वाले देशों में चीन और भारत शामिल हैं। ग्राहम कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और ड्यूटीज से छूट के नए फैसले से अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ की तलवार फिलहाल के लिए हट गई है। ट्रंप ने कहा, ‘‘ग्राहम कानून की धारा 115(ए) के तहत, मैं ग्राहम कानून की धारा 112 और 113 या इस आदेश में निर्धारित किसी भी शुल्क को लागू करने से छूट देता हूं।’’ धारा 113 में रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों या उसे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।

TomTom Layoffs: नीदरलैंड की कंपनी फिर करेगी छंटनी, इस बार 200 लोगों की जा सकती है नौकरी

ग्राहम कानून पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और मार्को रुबियो की हुई थी मीटिंग

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक के दौरान ग्राहम कानून को लेकर चिंता जताई थी। समझा जाता है कि जयशंकर ने रुबियो को बताया था कि भारत की तेल रिफाइनरियां मुख्य रूप से मध्यम श्रेणी के सल्फरयुक्त कच्चे तेल की प्रोसेसिंग के लिए तैयार की गई हैं, जिसकी आपूर्ति पश्चिम एशिया के देशों और रूस से होती है।उन्होंने रुबियो को यह भी बताया था कि वेनेजुएला से हैवी ग्रेड का कच्चा तेल मिलता है, जबकि अमेरिका से हल्के ग्रेड का कच्चा तेल आता है। भारत की रिफाइनरियों में इस्तेमाल से पहले इन्हें दूसरे तेल के साथ मिलाना होगा।

ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया के देशों से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो कुछ दिन बाद भारत आने वाले हैं।

TomTom Layoffs: नीदरलैंड की कंपनी फिर करेगी छंटनी, इस बार 200 लोगों की जा सकती है नौकरी

नीदरलैंड्स की लोकेशन डेटा कंपनी टॉमटॉम एनवी (TomTom NV) एक बार फिर रीस्ट्रक्चरिंग कर रही है। इसके तहत वैश्विक स्तर पर 200 नौकरियां कम की जाएंगी। इससे सालाना लगभग 2.1 करोड़ यूरो (2.36 करोड़ डॉलर) की बचत होने की उम्मीद है। यह बात रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कही गई है। कंपनी AI को अपनाने के लिए पहले ही साल 2025 में 300 नौकरियां कम कर चुकी है। टॉमटॉम अब नए ड्राइविंग समाधान विकसित करने के लिए धीरे-धीरे अपना फोकस पार्टनरशिप्स पर शिफ्ट कर रही है।

इसके तहत कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के साथ जेनरेटिव AI पर और मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक के साथ ऑटोमेटेड ड्राइविंग पर काम कर रही है। टॉमटॉम अपने नए मैपिंग प्लेटफॉर्म ‘टॉमटॉम ऑर्बिस’ (TomTom Orbis) में निवेश भी कर रही है। TomTom का शेयर इस साल अब तक लगभग 30 प्रतिशत नीचे आया है।

ऑपरेटिंग मार्जिन गाइडेंस बढ़ाया

रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी ने 2026 के लिए अपने ऑपरेटिंग मार्जिन गाइडेंस को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 4 प्रतिशत कर दिया है। इसमें चौथी तिमाही में होने वाले 1.5 करोड़ यूरो के रीस्ट्रक्चरिंग खर्च का प्रभाव भी शामिल है। टॉमटॉम ने पूरे साल के लिए अपने रेवेन्यू के अनुमान को भी रिवाइज किया है। अब रेवेन्यू 50.5 करोड़ से 53 करोड़ यूरो के बीच रहने की उम्मीद है। पहले यह अनुमान 49.5 करोड़ से 55.5 करोड़ यूरो के बीच था। तीसरी तिमाही यानि कि जुलाई-सितंबर 2026 में टॉमटॉम का रेवेन्यू गिरकर लगभग 13 करोड़ यूरो रह गया। यह कंपनी के अनुमान से कम है।

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नेटफ्लिक्स में 1000 लोगों की छंटनी

नेटफ्लिक्स अपने 6% कर्मचारियों की छंटनी कर रही है। लगभग 1,000 लोगों की नौकरी जाने वाली है। यह साल 2022 के बाद से कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह जानकारी को-CEO ग्रेग पीटर्स और टेड सारंडोस की ओर से कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल से सामने आई है। छंटनी मुख्य रूप से नेटफ्लिक्स की प्रोडक्ट, टेक, लीगल और ह्यूमन रिसोर्सेज टीमों में होगी। पिछले साल के अंत में कंपनी के पास लगभग 16,000 कर्मचारी थे।

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

नौकरी करने वाले लोगों के लिए सालाना सैलरी हाइक का इंतजार काफी अहम होता है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में होने वाली बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलती है। लेकिन सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के कर्मचारियों को इस साल निराशा का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खर्च, सर्वर की महंगी कीमतें और वैश्विक कारोबारी अनिश्चितता जैसे कारण हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी।

Zoho कर्मचारियों को इस साल नहीं मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट

श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है और AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसी दबाव के चलते Zoho ने इस साल कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने स्वीकार किया कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी कि वह इस साल सैलरी हाइक को जारी नहीं रख सके।

AI के कारण चार गुना बढ़ी सर्वर की कीमतें

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की बढ़ती लागत है। वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी के परिचालन खर्च में भी इजाफा हुआ है। इन बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए Zoho ने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कारोबारी माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

सैलरी हाइक रोकने के फैसले के बीच कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना चाहती है। वेम्बू ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों की बड़े स्तर पर नौकरी जाने की स्थिति से बचने के लिए पूरी मेहनत करेगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरियों का भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कंपनी में भर्ती की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है।

अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम

वेम्बू ने बताया कि कंपनी इस समय खुद को नए कारोबारी माहौल के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया में है। अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कंपनी का बदलाव कितना सफल रहता है।

उन्होंने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया। उनके मुताबिक, ज्यादातर कर्मचारी कंपनी की स्थिति को समझ रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं।

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Netflix Layoffs: OTT प्लेटफॉर्म में फिर होगी छंटनी! 5% कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी

नेटफ्लिक्स (Netflix) में एक बार फिर छंटनी होने जा रही है। इस बार लगभग 5 प्रतिशत कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है। इसकी घोषणा अगले हफ्ते तक हो सकती है। यह बात पक न्यूज (Puck News) की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से कही गई है। पिछले साल के आखिर में नेटफ्लिक्स के पास लगभग 16,000 फुल-टाइम कर्मचारी थे। कंपनी एक ऑन डिमांड ओवर द टॉप स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है। सब्सक्रिप्शन के जरिए इस प्लेटफॉर्म पर टीवी शो, फिल्म, डॉक्युमेंट्री, गेम्स, एनीमे, गेम्स आदि का मजा लिया जा सकता है।

स्ट्रीमिंग मार्केट में कॉम्पिटीशन तेजी से बढ़ रहा है। मीडिया कंपनियां कंसोलिडेटेड हो रही हैं और यूट्यूब (YouTube) व्यूअरशिप और विज्ञापन पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा हासिल कर रहा है। नेटफ्लिक्स अपने रेवेन्यू के सोर्स बढ़ाने के लिए सब्सक्रिप्शन बिजनेस से आगे बढ़कर विज्ञापन, लाइव प्रोग्रामिंग और गेमिंग में भी निवेश कर रही है।

2022 में निकाले थे सैकड़ों कर्मचारी

इससे पहले नेटफ्लिक्स ने साल 2022 में बड़े पैमाने पर छंटनी की थी। उस वक्त कंपनी ने धीमी ग्रोथ और सब्सक्राइबर घटने के कारण सैकड़ों नौकरियां खत्म कर दी थीं। एक दशक से ज्यादा समय में पहली बार नेटफ्लिक्स के ग्राहकों में भारी गिरावट देखी गई थी।

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Amazon ने लगभग 1000 लोगों को निकाला

ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने भी एक बार फिर छंटनी की है। हाल ही में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ने कुछ नौकरियां कम की हैं, खासकर अपनी ‘स्टोर्स’ यूनिट में। यह यूनिट मुख्य ई-कॉमर्स वेबसाइट को देखती है। इंटरनल स्लैक चैनल से सामने आया है कि कस्टमर सर्विस और सेलिंग पार्टनर सर्विसेज समेत स्टोर्स के कई डिवीजन पर छंटनी का असर पड़ा है। हो सकता है कि एमेजॉन की दूसरी यूनिट्स के कर्मचारी भी इस जॉब कट से प्रभावित हुए हों।

नौकरी गंवाने वालों में अमेरिका, भारत और यूके के कर्मचारी शामिल हैं। इस बार एमेजॉन द्वारा निकाले गए व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों की संख्या 1,000 से कम बताई जा रही है। पिछले साल कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी की थी और 30,000 नौकरियां कम की थीं। यह सिलसिला इस साल जनवरी तक चला था।

Volkswagen Group considers selling Ducati

Volkswagen Group considers selling Ducati
Ducati Monster MY26's right side tank.

It’s no secret that Volkswagen Group, the German behemoth that owns brands such as Audi, Bugatti and Lamborghini, is in financial trouble. Facing fierce competition from Chinese firms, the group already announced plans to lay off 50,000 employees in Germany alone by 2030, and the fate of several factories across the world has also become uncertain. We also received reports of the Volkswagen Group considering a simplified variant line-up for cars across its brands. It now appears the two-wheeler business will be impacted too.

  1. Ducati is one of the Volkswagen Group brands being evaluated for a possible sale
  2. In 2025, it reported EUR 925 million revenue and EUR 52 million operating profit
  3. Patritalia, another Italian company, had already made an offer for Ducati and MV Agusta

Ducati sale is under evaluation, but no decisions have been made yet

This isn’t the first time Ducati is being evaluated for sale

Claudio Domenicali, CEO of the Borgo Panigale manufacturer, confirmed that the parent group is evaluating the brand’s future. “We are aware of the shareholders’ plan to reevaluate its holdings. Ducati is one of these holdings, but no final decision has been made on Ducati yet: it’s one of the ongoing evaluations,” Domenicali told GPOne in a press interaction at the brand’s “Ducati 100 – A century on display” exhibition in Bologna, Italy. To be clear, this doesn’t mean Volkswagen Group is bent on selling Ducati; it merely confirms that it is evaluating that possibility. The brand is among 600 of the group’s 2,000 businesses being reviewed. Now, Audi CEO Gernot Dollner has confirmed Domenicali’s claim, saying, “It’s part of the evaluation process that we’ll also talk about Ducati, but nothing has been decided.”

Bloomberg reported in early June that Volkswagen Group’s supervisory board approved slimming down its portfolio by a third, with the layoffs being a part of it, and approved the sale of a 51 percent of its stake in Everllence ship-engine unit, which is expected to bring EUR 7.4 billion. In contrast, a Ducati sale is expected to bring around EUR 1.25 billion.

This isn’t the first time Ducati is being evaluated for sale. The group acquired Ducati in 2012 and then considered selling it in 2017 before quickly changing its mind. The Italian superbike manufacturer has steadily become synonymous with innovation in motorsport and has been highly successful in the World Superbike Championship (WSBK), MXGP and, of course, MotoGP. Ducati reported revenue of EUR 925 million and operating profit of EUR 52 million in 2025.

Ducati already has a potential buyer in Patritalia

An Italian investor who wants to have all-Italian technicians, MV Agusta and all MotoGP classes

If Volkswagen Group decides to hand off Ducati, there is already someone waiting in the lobby. In August, Italy-based Patritalia expressed more than an interest in acquiring Ducati, after doing the same for MV Agusta, which is also in hot water. However, some of Patritalia’s plans for the brands have already riled up quite the chatter, according to Visordown. The group has expressed interest in taking over as the sole engine supplier for Moto2, which is currently powered by Triumph, while also advocating for a more open market across all three MotoGP classes. Secondly, it has outlined a preference for Ducati to have a predominantly Italian workforce. Volkswagen Group had previously made it clear that Ducati isn’t up for sale, but considering things have changed since then, we will have to await further developments.

Triumph has been the sole engine supplier for Moto2 since 2019, when it took over from Honda. It also recently announced that it is bringing a new engine with increased peak power delivery to the class from next year. Moto3 is slated to get Yamaha as the sole engine supplier from 2028, with the R7 engine heavily modified and adapted for the class, replacing KTM and Honda. Changing either Triumph or Yamaha would require their consent, as well as consent from Liberty Media, the current owner of the MotoGP brand. Considering that both companies have announced plans for the future and that Volkswagen hasn’t been receptive to Patritalia’s bids so far, its aspirations have a slim chance of becoming a reality at the moment.

Sources: GPOne, Bloomberg and Visordown

Nike Layoff: चीन में 26% गिरी सेल्स तो अब छंटनी की योजना, लेकिन भारत में खोलेगी कैंपस

Nike Layoff: स्पोर्ट्सवियर कंपनी नाइक ने पूरे साल के रेवेन्यू में एकाएक उम्मीद से तेज गिरावट का अनुमान लगाया। इसके बाद कंपनी ने अधिक नौकरियों में कटौती और अपने वैश्विक कारोबारी डिवीजनों में बदलाव की योजना का ऐलान कर दिया। इस प्रकार सीईओ एलियट हिल (Elliott Hill) की अगुवाई में कंपनी अपने कारोबारी ढांचे में बदलाव को और तेज कर रही है। गुरुवार को जारी कमजोर अनुमानों से यह संकेत मिला कि नाइक की दिक्कतें कम से कम अगले कई तिमाहियों तक बनी रह सकती हैं, खासतौर से चीन में जहां कॉन्स्टैंट करेंसी के आधार पर पहली तिमाही में सेल्स 26% गिर गई।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही जून-अगस्त 2026 में नाइक की बिक्री लगभग 4% घटकर $1121 करोड़ रह गई। हालांकि वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 60 बेसिस पॉइंट बढ़कर 42.8% हो गया। नतीजे आने पर इसके शेयर एक्सटेंडेड ट्रेडिंग में 8.5% गिर गए। एक अहम बात ये भी है कि ब्लू-चिप कंपनियों के इंडेक्स में लगभग 18 साल तक रहने के बाद एसएंडपी डाऊ जोन्स ने तिमाही रीबैलेंसिंग के दौरान नाइक को सितंबर में एसएंडपी 100 से निकाल दिया।

क्या है Nike की दिक्कतें

एलियट हिल के कार्यकाल के पहले दो वर्षों में नाइक ग्रोथ को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए वह रनिंग जैसे प्रमुख खेलों पर अधिक ध्यान दे रही है और थोक में सामान बेचने वालों के साथ अपने संबंधों को दोबारा मजबूत कर रही है। हालांकि एनालिस्ट्स का कहना है कि नाइक की दिक्कतों का एक बड़ा कारण पर्याप्त संख्या में नए और आकर्षक प्रोडक्ट नहीं लॉन्च कर पाना है। इसके चलते कंपनी को प्रमोशन और डिस्काउंट का सहारा अधिक लेना पड़ा है। कंपनी के सीईओ ने पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में कहा कि नाइक परफॉरमेंस बिजनेस अभी इतना बड़ा नहीं है कि नाइक स्पोर्ट्सवियर, जॉर्डन ब्रांड और ग्रेटर चाइना में दिख रहे दबाव की भरपाई कर सके। उन्होंने कहा कि इन्हें मजबूत होने में समय लगेगा।

अब क्या है नाइक का प्लान

नाइक ने अपने ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव का ऐलान किया है। इसके तहत नौकरियों में कटौती की जाएगी। साथ ही अब चार की बजाय बिजनेस को तीन एरिया- अमेरिका, एशिया पैसेफिक और ग्रेटर चाइना, और EMEA (यूरोप, मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका) में बांटा जाएगा। नाइक की योजना भारत में एक नया कैंपस खोलने की भी है।

छंटनी की बात करें तो अभी कंपनी ने यह नहीं तय किया है, कि कितनी नौकरियां कम की जाएंगी। इसके बारे में एंप्लॉयीज को अगले साल 2027 में जानकारी दी जाएगी। इससे पहले भी इस साल की शुरुआत में कंपनी छंटनी का ऐलान कर चुकी है, जिससे कंपनी को वित्त वर्ष 2031 तक करीब $250 करोड़ के बचत की उम्मीद है। इसमें से अधिकतर बचत वित्त वर्ष 2029 और 2030 में हासिल होने की उम्मीद है।

Oracle Layoffs: IT कंपनी ने बढ़ाया छंटनी का बजट, अब और 70 करोड़ डॉलर करेगी खर्च

Porsche Layoffs: स्पोर्ट्स कार कंपनी में फिर जॉब कट, जा सकती हैं और 4100 नौकरियां

स्पोर्ट्स कार बनाने वाली कंपनी पोर्श (Porsche) में और करीब 4,100 नौकरियां जाने वाली हैं। यह फॉक्सवैगन की बड़े पैमाने पर बदलाव की योजना का हिस्सा है। यह फैसला पोर्श में आ रही दिक्कतों की वजह से मुनाफे में कमी की चेतावनी के बाद लिया गया है। जर्मन बिजनेस अखबार ‘हैंडल्सब्लैट’ की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पोर्श, फॉक्सवैगन का हिस्सा है और फॉक्सवैगन यूरोप की सबसे बड़ी कार मेकर है। यह Audi की भी मालिक है। रिपोर्ट के अनुसार, फॉक्सवैगन के सुपरवाइजरी बोर्ड के हालिया समझौते के दस्तावेजों में ग्रुप के अब तक के सबसे बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान के तहत पोर्श में लगभग 4,100 कर्मचारियों की कटौती का प्रस्ताव है।

इसका मकसद खर्च और उपलब्ध पैसे के बीच लगभग 80.38 करोड़ डॉलर के अंतर को कम करना है। सरल शब्दों में कंपनी को अपने खर्च कम करने हैं। अखबार का कहना है कि नौकरियों में 4100 नई कटौतियां मौजूदा समझौतों के अलावा होंगी, यानि कि पहले से की गई या की जा रही छंटनी के अलावा। इस साल जुलाई में, पोर्श मैनेजमेंट और लेबर प्रतिनिधियों के बीच पहले से तय 4,000 नौकरियों की कटौती के अलावा 5,000 और लोगों की छंटनी पर सहमति बनी थी।

हाल ही में फॉक्सवैगन ने पूरे साल के लिए अपने मार्जिन टारगेट को कम कर दिया। अब उसे पहले के 4.0-5.5% की रेंज के बजाय ज्यादा से ज्यादा 1% मार्जिन की उम्मीद है।

Volkswagen में और 50000 लोगों की छंटनी को मिल चुकी है मंजूरी

इससे पहले सितंबर की शुरुआत में सामने आया था कि जर्मनी की फॉक्सवैगन में जल्द ही और 50000 नौकरियां जा सकती हैं। कंपनी के सुपरवाइजरी बोर्ड ने एक बदलाव योजना ‘फ्यूचर प्लान 2030’ को मंजूरी दी है। इसमें 50,000 और नौकरियां खत्म करना, 2035 तक अपने व्हीकल मॉडल लाइनअप को आधा करना और 2027-2031 के दौरान कैपिटल खर्च को 16 प्रतिशत तक कम करना जैसी 12 पहलें शामिल हैं। कंपनी ने इसके पीछे ग्लोबल कॉम्पिटीशन, बदलती मांगों और टेक्नोलॉजी में बदलाव का हवाला दिया है।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह फॉक्सवैगन के 89 साल के इतिहास में सबसे बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान है। इसमें जर्मनी के उन 4 प्लांट के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करना भी शामिल है, जिनके मॉडल अगले दशक में खत्म हो जाएंगे। AFP की एक रिपोर्ट में कहा गया कि फॉक्सवैगन के मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच इस दशक के आखिर तक कुल 1,00,000 नौकरियां कम करने पर सहमति बन गई है। 50,000 नौकरियां कम करने पर सहमति पहले ही बन चुकी थी और प्रक्रिया चल रही है। अब दुनियाभर में लगभग और 50,000 नौकरियां कम करने के प्लान को मंजूरी मिल गई है।

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ब्लूमबर्ग की एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया कि फॉक्सवैगन ग्रुप की भारतीय यूनिट अपने 3 साल के रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को तेज कर रही है। इसके कारण कंपनी की लगभग 12 प्रतिशत वर्कफोर्स कम हो जाएगी। कंपनी भारत में अपने अगले इन्वेस्टमेंट साइकिल से पहले लागत कम करना चाहती है। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2025 में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की थी। अब 2027 तक तेजी से छंटनी करने की तैयारी है। इसके तहत कुछ सौ व्हाइट-कॉलर और शॉप-फ्लोर नौकरियां खत्म हो सकती हैं। कहा जा रहा है कि इस बदलाव का मकसद फॉक्सवैगन के भारत में नेक्स्ट जनरेशन गाड़ियां लॉन्च करने से पहले कामकाज में करोड़ों डॉलर बचाना है।

अमेरिकी कंपनी ने 5 मिनट की Google Meet में पूरी भारतीय टीम को जॉब से निकाला? 80 कर्मचारियों की नौकरी जाने का दावा

Job loss News: पिछले कुछ समय से अचानक होने वाली छंटनी (Layoffs) के मामले लगातार कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। इसी बीच Reddit पर एक कर्मचारी की पोस्ट चर्चा में है। इसमें कर्मचारी ने दावा किया है कि अमेरिका की एक फाइनेंशियल कंपनी ने महज 5 मिनट की Google Meet कॉल के दौरान अपनी पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने बताया कि 80 कर्मचारियों के लिए एक आम शिफ्ट की तरह शुरू हुआ दिन एक पांच मिनट की कॉल के साथ खत्म हुआ, जिसने सब कुछ बदल दिया।

आरोप है कि फाइनेंशियल कंपनी के लिए काम करने वाली भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को उनकी शिफ्ट के दौरान बताया गया कि उनकी नौकरी खत्म की जा रही है। इससे कर्मचारी हैरान और परेशान हो गए कि अब आगे क्या होगा। यह घटना ओरेकल और एडिडास जैसी जानी-मानी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी के बीच हुई है।

कर्मचारी ने Reddit के r/IndianWorkplace फोरम पर अपना अनुभव शेयर किया है। पोस्ट का शीर्षक ‘Laid off over a Google Meet’ था। पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि एक दिन पहले तक वह अमेरिकी बैंक की कस्टमर सपोर्ट टीम का हिस्सा था, लेकिन अचानक पूरी टीम को नौकरी से निकाल दिया गया।

शाम की शिफ्ट के दौरान आया Google Meet का बुलावा

Reddit पोस्ट के मुताबिक, कंपनी ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए कर्मचारियों को उस दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा था। कर्मचारी शाम 6:30 बजे की शिफ्ट में काम कर रहा था। उसके मुताबिक, रात करीब 9:30 बजे अचानक सभी कर्मचारियों को Google Meet पर बुलाया गया। कर्मचारी का दावा है कि मीटिंग में बताया गया कि ‘पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम’ को नौकरी से हटा दिया गया है।

’80 कर्मचारी, सभी चले गए… 80 परिवार प्रभावित’

कर्मचारी ने छंटनी के पैमाने को बताते हुए लिखा कि टीम में कुल 80 कर्मचारी थे। सभी की नौकरी एक झटके में चली गई। उसने पोस्ट में कहा कि महज पांच मिनट की कॉल से 80 परिवार प्रभावित हुए हैं। कर्मचारी ने नौकरी जाने के बाद नई नौकरी मिलने को लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि इस घटना ने उसे कॉरपोरेट नौकरियों की अस्थिरता का एहसास कराया है।

कंपनी ने क्या वजह बताई?

पोस्ट पर एक Reddit यूजर ने पूछा कि कंपनी ने इतने बड़े फैसले के पीछे क्या कारण बताया? इसके जवाब में कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी का कहना था कि भारतीय टीम से अपेक्षित आउटपुट नहीं मिल रहा था। हालांकि, कर्मचारी ने इस कारण पर असहमति जताई। उसका आरोप था कि अमेरिकी टीम में भी एट्रिशन और अन्य समस्याएं थीं। जबकि भारतीय कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त मेहनत करते थे।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कर्मचारी के प्रति सहानुभूति जताई। एक यूजर ने लिखा, “यह बेहद दुखद है और दिल तोड़ने वाला है।” वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी की छंटनी प्रक्रिया, कर्मचारियों को मिलने वाले सेवरेंस और अचानक नौकरी जाने की स्थिति में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कॉरपोरेट सेक्टर में अचानक होने वाली छंटनी को लेकर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

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(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol हिंदी ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इन दावों का समर्थन किया है।)

Zomato से मंगाया खाना और चुना ‘कैश-ऑन-डिलीवरी’ तो देने पड़ेंगे ₹21 तक एक्स्ट्रा

ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो से खाना मंगाते हैं और कैश-ऑन-डिलीवरी (COD) ऑप्शन चुनते हैं तो संभल जाएं। कंपनी ने COD ऑर्डर्स पर एक अलग फीस शुरू की है। यह अलग-अलग यूजर्स और ऑर्डर की वैल्यू के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। रिपोर्ट्स की मानें तो यह फीस 5 रुपये से लेकर 21 रुपये तक है। ऑर्डर बिल में “पे ऑन डिलीवरी फीस” के तौर पर दिखने वाला यह नया चार्ज तब लागू होता है, जब ग्राहक डिलीवरी के समय अपने फूड ऑर्डर का पेमेंट कैश में करने का विकल्प चुनते हैं। चार्ज सभी ऑर्डर्स के लिए एक जैसा नहीं है, अलग-अलग ट्रांजेक्शन वैल्यू के लिए अलग-अलग चार्ज शो हो रहा है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस फीस को तय करने का सटीक आधार क्या है और क्या यह ऑर्डर की वैल्यू, लोकेशन या दूसरे पैरामीटर्स जैसे फैक्टर्स से जुड़ा है, इसका तुरंत पता नहीं चल सका। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म अलग-अलग फीस स्ट्रक्चर और मॉनेटाइजेशन मॉडल्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स पर नई फीस के अलावा, जोमैटो प्लेटफॉर्म पहले से ही फूड ऑर्डर्स पर प्लेटफॉर्म फीस वसूलता है। इसके साथ ही ऑर्डर के आधार पर डिलीवरी, पैकेजिंग और अन्य चार्ज भी लागू होते हैं। जोमैटो की कॉम्पिटीटर स्विगी अभी कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स पर कोई अलग फीस नहीं ले रही है।

जोमैटो पर हर दिन लगभग 23-25 ​​लाख फूड ऑर्डर

मनीकंट्रोल के मुताबिक, जोमैटो प्लेटफॉर्म हर दिन लगभग 23-25 ​​लाख फूड ऑर्डर प्रोसेस करता है। अगर हर ऑर्डर कैश ऑन डिलीवरी मानें तो 5 रुपये का चार्ज हर दिन कंपनी को 1.15-1.25 करोड़ रुपये या सालाना लगभग 420-456 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई करा सकता है। लेकिन यह बात भी गौर करने वाली है कि कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर जोमैटो को मिलने वाले कुल ऑर्डर्स का एक छोटा हिस्सा ही होते हैं। लेकिन इससे पता चलता है कि प्लेटफॉर्म के ये छोटे-छोटे चार्ज भी कमाई का अहम जरिया बन सकते हैं।

Oracle Layoffs: IT कंपनी ने बढ़ाया छंटनी का बजट, अब और 70 करोड़ डॉलर करेगी खर्च

इस साल की शुरुआत में जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी। इस पर GST अलग से लगता है। कंपनी के मौजूदा ऑर्डर वॉल्यूम को देखते हुए, फीस में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये की कमाई में बदल सकती है। पिछले साल सितंबर में मनीकंट्रोल के एक एनालिसिस में सामने आया था कि ई-कॉमर्स और फूड-डिलीवरी कंपनियों की प्लेटफॉर्म फीस से सालाना कुल मिलाकर 3,500-4,000 करोड़ रुपये की कमाई हो सकती है।