30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Trends (25)

रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

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दो साल का अनुभव लेकर 600 जगह भेजा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, Reddit पर छिड़ी बहस

भारत के तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाना इन दिनों कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच रेडिट पर एक नौकरी तलाश रहे शख्स की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब दो साल के अनुभव वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि वह सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसे बहुत कम जगहों से जवाब मिला। शख्स ने बताया कि करीब 500-600 आवेदन भेजने के बावजूद उसकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इसके उलट, सोशल मीडिया और रेडिट पर उसे लगातार ऐसी कहानियां दिखाई दे रही थीं, जिनमें लोगों को नौकरी से निकाले जाने के कुछ ही महीनों बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों से नए प्रस्ताव मिल रहे थे।

किसी को अमेजन के बाद गूगल, तो किसी को मेटा के बाद कई ऑफर

रेडिट उपयोगकर्ता ने कुछ ऐसी पोस्ट का जिक्र किया, जिन्हें देखकर वह खुद को दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में महसूस करने लगा। एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेजन से नौकरी जाने के करीब पांच महीने बाद उसे गूगल में नौकरी मिल गई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि नौकरी जाने के सिर्फ तीन महीने के भीतर उसे 25 प्रतिशत अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल गई। इतना ही नहीं, नौकरी की तलाश के दौरान वह विदेश यात्रा पर भी गया।

सबसे ज्यादा हैरानी एक अन्य दावे से हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि मेटा से नौकरी जाने के बाद उसने गूगल, एप्पल और ओपनएआई में साक्षात्कार दिए और तीनों जगह से उसे नौकरी के प्रस्ताव मिले। आखिर में उसने गूगल को चुना।

दूसरी तरफ 500-600 आवेदन के बाद भी इंतजार

इन कहानियों की तुलना करते हुए मूल पोस्ट लिखने वाले शख्स ने सवाल किया कि क्या वह किसी अलग ही दुनिया में रह रहा है। उसके मुताबिक, जहां कुछ लोग बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रस्ताव आसानी से हासिल कर रहे हैं, वहीं उसे सैकड़ों आवेदन भेजने के बाद भी मुश्किल से कोई प्रतिक्रिया मिल रही है। उसने बताया कि अब तक उसका सबसे अच्छा नतीजा एक अस्थायी छह महीने की नौकरी के लिए बातचीत तक पहुंचना रहा है।

क्या बड़ी कंपनियों का अनुभव ही सबसे बड़ा फर्क है?

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी तलाश रहे व्यक्ति का दो साल का अनुभव भी मेटा या अमेजन जैसी कंपनियों में रहा है। उसका तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों में पहले से काम कर चुके लोगों के लिए नई नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि ऐसी कंपनियों में चयन अपने आप में कठिन माना जाता है। एक अन्य व्यक्ति ने इसी चर्चा के बीच नौकरी के लिए मदद और संदर्भ की मांग भी कर दी।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया की सफलता की कहानियों पर उठाए सवाल

हर किसी ने इन सफलता की कहानियों को सच नहीं माना। कुछ रेडिट उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली ऐसी पोस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं। एक टिप्पणी में इन्हें प्रभावशाली लोगों द्वारा लोगों को झूठी उम्मीद देने वाला प्रचार तक बताया गया। यानी ऑनलाइन कुछ लोगों की तेज सफलता देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर तकनीकी पेशेवर के लिए नौकरी का बाजार एक जैसा है।

एक जवाब ने कहा- समस्या औसत होने की भी हो सकती है

चर्चा में एक टिप्पणी ने सबसे सीधा जवाब दिया। उपयोगकर्ता ने तर्क दिया कि अत्यधिक कुशल लोग अक्सर कई कंपनियों के लिए आकर्षक उम्मीदवार होते हैं। ऐसे लोग कम समय में जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए उन्हें नौकरी के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि औसत होना कोई बुरी बात नहीं है। कौशल को लगातार मेहनत और सीखने के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है, या सही कौशल और क्षमता भी उतनी ही जरूरी है?

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टेक दिग्गज अब ‘किसान’ बने; अमेरिका में कृषिभूमि की होड़:गेट्स-बेजोस 7 लाख एकड़ जमीन पर आलू-गाजर उगा रहे, जुकरबर्ग पाल रहे मवेशी

दुनिया के सबसे अमीर और टेक दिग्गजों में अब पशु-पालन और खेती का शौक बढ़ रहा है। अमेरिका में खेती की जमीन अब सिर्फ किसान की जरूरत नहीं, अरबपतियों के लिए बड़ा निवेश और शौक बन चुकी है। कोई यहां मवेशी पाल रहा है, तो कोई जमीन खरीदकर भविष्य ज्यादा सुरक्षित कर रहा है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग हवाई के काउआई द्वीप पर करीब 2,871 करोड़ रु. के 4,000 एकड़ कोउलाउ रेंच पर वाग्यू और एंगस नस्ल के मवेशी पाल रहे हैं। वहीं, रेडिट के सह-संस्थापक एलेक्सिस ओहानियन फ्लोरिडा में अपने फार्म पर केले के बाग और मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। हालांकि, इन दिग्गजों के खेती-बारी का नया शौक अमेरिका में कृषि जमीनों को एक बेहद महंगे ‘एसेट क्लास’ में बदल दिया है। ‘ द लैंड रिपोर्ट’ के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के पास 2.75 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिससे वे अमेरिका के 44वें सबसे बड़े भूस्वामी बन गए हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस 4.62 लाख एकड़ और वॉलमार्ट घराने से जुड़े स्टेन क्रोनके 27 लाख एकड़ जमीन के मालिक हैं। क्रोनके ने 2025 में न्यू मैक्सिको में 9.38 लाख एकड़ जमीन खरीदी, जिसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी रैंच बिक्री बताया गया। अलग-अलग राज्यों में इन जमीनों पर आलू, गाजर, प्याज, सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलें उगाई जाती हैं। कुछ किसानों को लीज पर भी दी जाती है। पीपुल्स कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में कृषि भूमि 411 लाख करोड़ की परिसंपत्ति बन चुकी है। अमेरिकी कृषि विभाग के मुताबिक, बीते वर्ष खेतों के मूल्य में 4.3% की बढ़ोतरी हुई। नेशनल यंग फार्मर्स कोएलिशन की पॉलिसी निदेशक एरिन फॉस्टर के अनुसार, जमीन की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि पहली बार खेती में उतरने वाले युवा या छोटे किसान प्रतिस्पर्धा से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। जमीन में निवेश क्यों? महंगाई के साथ बढ़ती है कीमत महंगाई से सुरक्षित बचाव – सीमित प्राकृतिक संसाधन होने के कारण जमीन की कीमतें हमेशा महंगाई के साथ बढ़ती हैं। एआई और डेटा सेंटर्स की मांग – टेक कंपनियों (एआई हाइपरस्केलर्स) को विशाल डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़े भूभाग की जरूरत होती है। लाइफस्टाइल और नॉन-फाइनेंशियल फायदे – कोरोना महामारी के बाद बड़े परिसरों में शिकार, मछली पकड़ने और खुद का ऑर्गेनिक अन्न उगाने का रुझान बढ़ा है।

टायर 2 सिटी के इस लड़के ने 25 की उम्र में बनाया ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ, बैंक में पड़े हैं 45 लाख रुपये! डिजिटल की ताकत से मिली ये सक्सेस

Tier 2 City Story: इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दौर में सही सोच और सही समय पर शुरुआत किसी की भी जिंदगी बदल सकती है। ऐसी ही एक कहानी रेडिट पर सामने आई है। भारत के एक टायर-2 शहर के रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने महज 18 साल की उम्र में फ्रीलांसिंग से शुरुआत की और देखते ही देखते अपना खुद का डिजिटल-मीडिया बिजनेस खड़ा कर लिया। अपनी मेहनत के बल पर इस युवक ने 25 साल की उम्र में करीब ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ हासिल कर लिया है। रेडिट पर अपनी इस सफलता की कहानी साझा करते हुए युवक ने अपने पूरे पोर्टफोलियो का ब्योरा दिया है।

18 की उम्र में फ्रीलांसिंग, फिर खड़ा किया अपना बिजनेस

युवक ने बताया है कि उसने 18 साल की उम्र से ही फ्रीलांस काम करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे अनुभव हासिल करने के बाद उसने एक डिजिटल-मीडिया कंपनी की नींव रखी। आज उसकी इनकम का मेन सोर्स उसका बिजनेस ही है। बिजनेस होने की वजह से उसकी कमाई फिक्स नहीं है बल्कि उतार-चढ़ाव भरी है। इसके बावजूद उसका पोर्टफोलियो उसकी सफलता की कहानी बयान कर रहा है।

जानिए कहां-कहां इन्वेस्ट है ₹1.6 करोड़

25 साल के इस युवा एंटरप्रेन्योर ने अपने पैसों को अलग-अलग एसेट क्लासेज में डाइवर्सिफाई किया हुआ है:-

भारतीय शेयर: ₹85 लाख

कैश/बैंक अकाउंट: ₹45 लाख

रियल एस्टेट: ₹15 लाख

यूएस स्टॉक्स: ₹7.5 लाख

म्यूचुअल फंड्स: ₹5 लाख

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: ₹5 लाख

क्रिप्टोकरेंसी: ₹3 लाख

गोल्ड ईटीएफ: ₹2 लाख

फिक्स्ड डिपॉजिट: ₹1 लाख

बैंक में पड़े हैं ₹45 लाख, आगे की स्ट्रैटिजी पर मांगी राय

युवक के बैंक खाते में पिछले काफी समय से ₹30 से ₹45 लाख की बड़ी राशि जमा है। उसका मानना है कि बचत खाते में इतना पैसा रखना काम का सौदा नहीं है। वह पिछले 1-2 सालों से रियल एस्टेट प्रॉपर्टी तलाश रहा है, लेकिन उसे अभी तक कोई ऐसा विकल्प नहीं मिला जहां कीमत और रिस्क/रिवॉर्ड का तालमेल सही बैठता हो। सुरक्षा के लिहाज से उसके पास ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस तो है, लेकिन फिलहाल उसने अपने या अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है।

FIRE गोल हासिल करने की चाहत

युवक का मुख्य उद्देश्य अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाना, फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत करना और किसी एक बिजनेस या एसेट पर निर्भरता कम करके फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना है ताकि वह जल्द से जल्द फायर (FIRE- Financial Independence, Retire Early) का टारगेट हासिल कर सके।

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उसने रेडिट कम्युनिटी से सुझाव मांगते हुए पूछा कि अगर 25 साल की उम्र में किसी के पास ₹1.5 से ₹2 करोड़ का नेटवर्थ हो और ₹40-45 लाख कैश में हो, तो उसे अपने अगले कदम के रूप में किन चीजों पर फोकस करना चाहिए?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

₹2.5 लाख महीना कमाता है ये 29 साल का युवक फिर भी कर्ज में डूबा! जानिए शादी-घर ने कैसे बिगाड़ा पूरा हिसाब

Bengaluru Viral News: हैंडसम सैलरी और अच्छा करियर होने के बावजूद खराब फाइनेंशियल मैनेजमेंट किसी को भी कर्ज के जाल में फंसा सकता है। बेंगलुरु के रहने वाले 29 वर्षीय एक शादीशुदा युवक की कहानी इसी बात का लेटेस्ट उदाहरण बनी है। टैक्स कटने के बाद हर महीने ₹2.5 लाख की कुल कमाई करने के बावजूद यह युवक शादी और घर के रिनोवेशन पर बड़ा खर्च करने की वजह से कई लोन और कर्ज के भारी बोझ तले दब गया है। युवक ने सोशल मीडिया पर अपने फाइनेंशियल स्टेटस को शेयर करते हुए लोगों से सलाह मांगी है।

95 फीसदी सेविंग्स खत्म, शादी और घर के रेनोवेशन ने बिगाड़ा बजट

युवक ने अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि ‘मैं हाल ही में एक ऐसे कर्ज के जाल में फंस गया, जिसमें मैं कभी नहीं फंसना चाहता था। मैंने हाल ही में दो बड़े खर्च किए एक मेरी शादी और दूसरा घर का रेनोवेशन, जिसने मेरी 95 प्रतिशत बचत को खत्म कर दिया।’

रेडिट पर की गई युवक की इस पोस्ट के मुताबिक उसके माता-पिता ने उसे अपने पैतृक घर पर एक और मंजिल बनाने के लिए जोर दिया ताकि उसे किराए पर दिया जा सके। इस घर के रेनोवेशन में कुल 35 लाख रुपये खर्च हुए। उसने अपनी सेविंग्स में से ₹15 लाख दिए और बाकी के ₹20 लाख लोन लिए। उसकी शादी का खर्च ₹30 लाख से अधिक हो गया। शादी के खर्चों के लिए उसने अपने स्टॉक्स (शेयर) बेचे लेकिन आखिरी समय में कैश की कमी होने की वजह से उसे 9.1 फीसदी के इंट्रेस्ट पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेना पड़ा। उसने बताया कि आखिरी समय में इस अमाउंट के कैश का बंदोबस्त करने के लिए उसके पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था।

EMI और क्रेडिट कार्ड का भारी-भरकम बोझ

घर के रेनोवेशन और शादी के अलावा युवक पर कार लोन भी है। इसपर अभी 3 लाख रुपये बचे हुए हैं। उसके माता-पिता फाईनेंशियली से उसी पर निर्भर हैं और राशन-पानी व अन्य घरेलू खर्चों के लिए उसी के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। हर महीने युवक को होम लोन में 35000, पर्सनल लोन ईएमआई 16000, कार लोन पर 15000, किराए और बिल पर 37000, क्रेडिट कार्ड के बिल पर 70 हजार, राशन के मद में 15 हजार, आउटिंग और मूवी पर करीब 6000 खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा 1500 रुपये SIP इन्वेंस्टमेंट में जाते हैं।

युवक के पास फिलहाल स्टॉक्स में 3 लाख रुपये और एफडी में 1 लाख रुपये जमा हैं। इसके अलावा उसके पास 50 सॉवरेन सोना है, जिसे वह बेचना या इस्तेमाल करना नहीं चाहता। युवक ने बताया है कि ‘हम पार्टियां नहीं करते, न ही मैं अक्सर बाहर खाता हूं। मैं अपने कैश फ्लो को सुधारने के लिए नौकरी बदलने की योजना बना रहा हूं, लेकिन इसमें अभी समय लग रहा है।’ अब वह किसी भी तरह अपने कर्जों को जल्द चुकता करने, क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर लगाम लगाने और मासिक बचत बढ़ाने के तरीके तलाश रहा है।

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इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि, ‘यह पति-पत्नी दोनों की मिलाकर कमाई है। अगर पति अपनी पत्नी की कमाई का इस्तेमाल अपने माता-पिता द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए करेगा, तो नई-नवेली पत्नी नाराज हो सकती है और लड़ाई शुरू हो सकती है। इसके अलावा युवक ने पत्नी के पक्ष के खर्चों का जिक्र नहीं किया है, यकीनन पत्नी भी अपने माता-पिता को कुछ पैसे भेज रही होगी या शादी के लिए लिए गए किसी लोन की भरपाई कर रही होगी।’

BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया

आज के दौर में जब ज्यादातर कॉलेज स्टूडेंट्स छुट्टियों में घूमने-फिरने या आराम करने की सोचते हैं। वहीं, बेंगलुरु के एक BBA सेकंड ईयर के स्टूडेंट ने कुछ अलग करने का फैसला किया। पहले सास की परीक्षाएं खत्म होने के बाद मिले लगभग 3 महीने के वेकेशन में उसने सड़कों पर उतर रैपिडो बाइक चलाने का फैसला किया। इसके बाद इस छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर अपनी इस 3 महीने की यात्रा की पूरी कहानी बताई। छात्र ने अपनी पोस्ट में रोज की कमाई, ऐप के एल्गोरिदम, रेस्टोरेंट के चक्करों और गिग वर्कर्स की जिंदगी की कठिनाई को विस्तार से बताया है।

सुबह 8 से शाम 4:30 बजे की ड्यूटी और ₹1200 की रोजाना कमाई

स्टूडेंट ने बताया कि वह सुबह लगभग 8 बजे ऐप पर ऑनलाइन होता था और शाम 4:30 बजे तक काम करके घर लौट आता था। यानी वह रोज करीब 8.5 घंटे सड़कों पर बिताता था। शुरुआत में उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि रैपिडो का प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम कैसे काम करता है। लेकिन धीरे-धीरे उसे समझ आने लगा कि शहर के किस इलाके में और किस समय राइड्स की डिमांड सबसे ज्यादा होती है। जैसे ही उसने एल्गोरिदम का को समझ लिया, उसकी कमाई आसान हो गई। एक दिन में वह रोजाना करीब ₹1200 तक कमा लेता था। छात्र के लिए पॉकेट मनी और साइड हसल के तौर पर यह कमाई काफी अच्छी थी।

पर क्या सबकुछ अच्छा ही था? गिग वर्कर्स की असली मजबूरी समझिए

इस तजुर्बे ने छात्र को उन लोगों की जिंदगी के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया जो पूरी तरह से डिलीवरी या राइड-शेयरिंग पर ही निर्भर हैं। उसने बताया कि 8.5 घंटे के दौरान वह कभी ब्रेक नहीं लेता था या तो वह बाइक चला रहा होता था या फिर अगली राइड का इंतजार कर रहा होता था। छात्र का कहना है कि वह छुट्टियों में सिर्फ एक्सपीरियंस और पॉकेट मनी के लिए यह काम कर रहा था, इसलिए उसके पास किसी भी वक्त काम बंद करके घर जाने का विकल्प था। लेकिन जो लोग अपने परिवार को पालने के लिए फुल-टाइम यह काम करते हैं, उनके पास घर लौटने का ऐसा कोई विकल्प नहीं होता।

छात्र ने ऐप के सिस्टम पर भी नाराजगी जताई। उसने लिखा कि कैप्टन (ड्राइवर) का अपनी राइड्स पर कोई कंट्रोल नहीं होता। अगर कोई ग्राहक राइड कैंसिल कर देता है, तो उसकी गलती न होने के बावजूद ड्राइवर की रेटिंग खराब हो जाती है। किसी भी समस्या के समय ऐप से सही कस्टमर सपोर्ट पाना किसी बुरे सपने जैसा है।

दोपहर में जब राइड कम तो आजमाई ये ट्रिक

स्टूडेंट की पोस्ट के मुताबिक दोपहर 12 से 3 बजे के बीच राइड्स काफी कम हो जाती थीं, इसलिए वह इस दौरान फूड ऑर्डर डिलीवर करने लगा। उसने बताया कि रेस्टोरेंट का अनुभव एकदम अलग होता था। कभी खाना तुरंत मिल जाता तो कभी 20-25 मिनट तक खड़े होकर इंतजार करना पड़ता। अपने इस सफर की एक सबसे हैरान कर देने वाली घटना का जिक्र करते हुए उसने बताया कि रैपिडो के जरिए स्विगी का एक फूड ऑर्डर लिया था क्योंकि उसकी ड्रॉप लोकेशन लड़के के घर के पास थी।

वो एक आइसक्रीम शॉप से जुड़ा ऑर्डर था। पर जब वो आइसक्रीम शॉप पहुंचा तो वहां बिजली नहीं थी। उनकी मशीनें और कंप्यूटर बंद थे। वे ऑर्डर तैयार नहीं कर सकते थे। दुकान वालों ने उससे कहा कि उसे स्विगी को कॉल करके ऑर्डर कैंसिल कराना होगा।

उसने स्विगी को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि वे इसे कैंसिल नहीं कर सकते और उसे रैपिडो से संपर्क करना होगा। फिर उसने रैपिडो को कॉल किया, तो उन्होंने कहा कि यह स्विगी का ऑर्डर है इसलिए स्विगी से बात करो। कुल मिलाकर वो स्विगी और रैपिडो के इस इन्फिनिट लूप में फंस गया और 45 मिनट तक परेशान होता रहा। आखिरकार उसने देखा कि डिलीवरी लोकेशन एक ट्यूशन सेंटर की थी। उसने गूगल मैप्स पर ट्यूशन सेंटर का नंबर ढूंढा और उन्हें सीधे कॉल करके पूरी बात बताई। इसके बाद ट्यूशन सेंटर वालों ने रेस्टोरेंट स्टाफ से बात की और तब जाकर ऑर्डर कैंसिल हुआ।

छात्र ने बताया कि सबसे अजीब बात यह है कि रैपिडो तब तक कस्टमर का कांटेक्ट नंबर नहीं दिखाता जब तक आप खाना पिक न कर लें (जिसके लिए रेस्टोरेंट के ओटीपी की जरूरत होती है)। अगर वह ड्रॉप लोकेशन कोई रैंडम घर होता तो वह शायद कुछ नहीं कर पाता।

ऑटो ड्राइवरों लड़ाई हो जाने का भी खतरा

बेंगलुरु में अक्सर बाइक टैक्सी और ऑटो ड्राइवरों के बीच विवाद की खबरें आती रहती हैं। छात्र ने बताया कि 3 महीनों के दौरान वह मजेस्टिक, रेलवे स्टेशनों और दूसरे बिजी इलाकों में नियमित रूप से ऐप लॉगिन करता था। ऑटो वाले कई बार उसे घूर-घूरकर ऐसे देखते थे मानो उसे स्कैन कर रहे हों, लेकिन राहत की बात यह रही कि पूरे 3 महीनों में किसी भी ऑटो वाले ने उसे कभी धमकी नहीं दी और न ही कोई विवाद हुआ।

ग्राहकों के साथ उसका अनुभव काफी अच्छा रहा। उसने रास्ते में कई अनजान यात्रियों के साथ दिलचस्प बातचीत की और किसी भी ग्राहक के साथ उसका कोई कड़वा अनुभव नहीं रहा। उसने यह काम आरटीओ और बैन वाले हालिया विवादों से पहले ही खत्म कर लिया था, इसलिए उसे उस तरह की किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

3 महीने के सफर से मिला जिंदगी का सबसे बड़ा सबक

इस BBA छात्र का मानना है कि यह 3 महीने का सफर सिर्फ ₹1200 रोज कमाने के बारे में नहीं था। इसने उसे जमीनी हकीकत दिखाई। राइड के लिए लंबा इंतजार, पेट्रोल का खर्च, अनिश्चितता, प्लेटफॉर्म के कड़े नियम, रेस्टोरेंट की परेशानियां और लगातार चलते रहने का मानसिक दबाव जैसी जमीनी हकीकतों से उसे रुबरू होना पड़ा।

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रेडिट पोस्ट के आखिर में उसने अपने इस अनुभव का सबसे बड़ा हासिल बताते हुए लिखा है कि ‘एक स्टूडेंट के तौर पर 3 महीने के लिए गिग वर्क करना और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे मजबूरी में करना, दोनों स्थितियों में जमीन-आसमान का फर्क है। मेरे लिए यह महज एक साइड हसल था, लेकिन किसी और के लिए वही ₹1,200 उसके घर के बिल भरने और भूखे रहने के बीच का इकलौता सहारा हो सकते हैं।’

Viral Post: ₹1.84 लाख से ₹75 लाख की सैलरी तक कैसे पहुंचा युवक? सोशल मीडिया पर शेयर किया अपना सीक्रेट

इंजीनियरिंग की डिग्री या बड़े कॉलेज से पढ़ाई किए बिना भी अच्छी नौकरी और सैलरी हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में यूजर ने अपनी नौकरी और कमाई से जुड़ी कहानी शेयर की है। यूजर ने बताया कि उसने करीब नौ साल के करियर में अपनी सालाना कमाई ₹1.84 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख कर ली। अपनी कहानी से यूजर ने बताया कि सही स्किल और लगातार मेहनत के दम पर बिना बड़े कॉलेज बैकग्राउंड के भी करियर में अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

Reddit के r/IndianWorkplace सबरेडिट पर इस प्रोफेशनल ने अपनी करियर जर्नी शेयर किया है। रेडिट पर शेयर किए गए इस पोस्ट को X पर एक यूजर ने शेयर किया है। यूजर ने कहा कि, उसने यह कहानी उन लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए शेयर की है, जो नौकरी जाने या B.Tech डिग्री न होने से परेशान हैं। उसके मुताबिक, मेहनत और बेहतर स्किल्स से करियर में सफलता हासिल की जा सकती है।

₹1.84 लाख सालाना से शुरू किया करियर

पोस्ट के अनुसार, इस प्रोफेशनल ने एक Tier-3 कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ मैथ में B.Sc. की पढ़ाई की। इसके बाद उसे WITCH कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पहली नौकरी मिली। उसने अपने करियर की शुरुआत महज ₹1.84 लाख सालाना सैलरी से की थी, जो टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों को काफी कम लग सकती है। करियर के शुरुआती चार सालों में उसकी सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई।

 

कोविड के बाद बढ़ी सैलरी

कोविड-19 के दौर तक उसकी सालाना कमाई करीब ₹4.5 लाख पहुंची थी। इसके बाद नौकरी के बाजार में आए बदलाव के बीच उसे एक बड़ी कंपनी में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज ₹8 लाख हो गया। इस तरह उसकी सैलरी में एक साथ करीब 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसके करियर को आगे बढ़ने का नया रास्ता मिला। इसके करीब एक साल बाद उसकी कमाई में एक और बड़ा बदलाव आया। मौजूदा नौकरी से संतुष्ट न होने के कारण उसने दूसरी कंपनियों में अवसर तलाशने शुरू किए।

कुछ ही सालों में सालाना सैलरी ₹42.2 लाख हो गई

इस दौरान उसे कई नौकरी के ऑफर मिले और बेहतर विकल्प मिलने के बाद उसने ₹17.4 लाख सालाना पैकेज पर नई नौकरी तय की। यह उसकी पिछली ₹8 लाख सालाना सैलरी से दोगुने से भी ज्यादा थी। अगले तीन सालों में उसने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम जारी रखा और कई चुनौतियों के बावजूद अपनी कमाई बढ़ाता रहा। समय-समय पर मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी के चलते उसका सालाना पैकेज करीब ₹30 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद उसने बेहतर कमाई और काम का अच्छा माहौल पाने के लिए एक स्टार्टअप का रुख किया। यह फैसला उसके लिए फायदेमंद रहा और उसकी सालाना सैलरी बढ़कर ₹42.2 लाख हो गई।

नौकरी से निकाला भी गया

करियर में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया, जब स्टार्टअप में काम करने के करीब एक साल बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, उसने इसे अपने करियर का अंत मानने के बजाय इस समय का इस्तेमाल आगे की नौकरी की तैयारी में किया। इसके बाद उसे एक दूसरे स्टार्टअप में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज बढ़कर ₹75 लाख हो गया। यह उसकी पिछली ₹42.2 लाख की सैलरी से करीब 77 फीसदी ज्यादा थी। यूजर के मुताबिक, करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स, लगातार सीखना और सही फैसले ज्यादा जरूरी हैं। समस्या हल करने की क्षमता भी सफलता में अहम भूमिका निभाती है।

सैलरी को लेकर करे नेगोशिएशन

Reddit यूजर ने अपनी कहानी में बताया कि नौकरी बदलते समय सैलरी पर बातचीत करना कितना जरूरी है। उन्होंने पहला ऑफर तुरंत स्वीकार करने के बजाय बेहतर पैकेज के लिए बातचीत की, जिससे उनकी सालाना सैलरी ₹8 लाख से बढ़कर ₹17.4 लाख हो गई। उन्होंने ये भी बताया कि नौकरी जाना हमेशा करियर के लिए नुकसान नहीं होता। उनके मामले में ₹42 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छूटने के बाद उन्हें ऐसा मौका मिला, जहां उनकी कमाई बढ़कर ₹75 लाख सालाना हो गई।

Hrithik Roshan: क्या ऋतिक रोशन-सबा आजाद का हो गया ब्रेकअप? ‘राया’ डेटिंग एप प्रोफाइल के स्क्रीनशॉट ने इंटरनेट पर मचाई खलबली

Hrithik Roshan: ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते पर एक बार फिर चर्चा हो रही है और इस बार वजह है एक रहस्यमयी डेटिंग ऐप प्रोफाइल। सोशल मीडिया पर ‘राया’ (Raya) नाम के एक खास डेटिंग ऐप का कथित स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, जिससे इस कपल के रिश्ते को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं।

इस स्क्रीनशॉट में एक प्रोफ़ाइल दिख रही है जिसमें ऋतिक रोशन की फोटो, उम्र और इंस्टाग्राम हैंडल का इस्तेमाल किया गया है। प्रोफ़ाइल के बायो में उन्हें मुंबई में रहने वाला “एक्टर/प्रोड्यूसर/एंटरप्रेन्योर” बताया गया है। इस कथित प्रोफ़ाइल ने ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है और इसके स्क्रीनशॉट रेडिट और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर घूम रहे हैं।

हालांकि, इस बात की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है कि यह अकाउंट असल में ऋतिक का है या यह अभी एक्टिव है। इससे पहले भी एक्टर की ‘राया’ प्रोफ़ाइल होने का दावा करने वाले ऐसे ही स्क्रीनशॉट सामने आए थे। ऋतिक या सबा आज़ाद में से किसी ने भी इस कथित अकाउंट या अपने रिश्ते को लेकर चल रही नई अटकलों पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

Reddit पर स्क्रीनशॉट शेयर होने के तुरंत बाद, लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। एक यूज़र ने लिखा, “लेकिन… सबा का क्या?” दूसरे यूज़र ने लिखा, “क्या वह सबा से आज़ाद हो गए हैं?” तीसरे यूज़र ने कमेंट किया, “ग्रीक गॉड (हैंडसम एक्टर) मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं, तो फिर हमारा क्या होगा?” एक कमेंट में यह भी लिखा था, “राया (Raya) भी एक नेटवर्किंग ऐप है, और इसमें अकाउंट डिलीट नहीं होते; यहाँ लोगों को शामिल करने का रेट प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज़ से भी कम है, lol। मुझे नहीं लगता कि वह एक्टिव हैं।”

No way DAWG- Spotted on Raya again

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BollyBlindsNGossip

दिलचस्प बात यह है कि ‘राया’ (Raya) से जुड़ा ऋतिक का नाम पहली बार सामने नहीं आया है। सितंबर 2024 में, उर्वशी रौतेला ने दावा किया था कि उन्हें इस खास डेटिंग ऐप पर ऋतिक और आदित्य रॉय कपूर के प्रोफ़ाइल दिखे थे। हालांकि, उनकी बातों से यह पक्के तौर पर साबित नहीं हुआ कि वे प्रोफ़ाइल असली थे, एक्टिव थे या डेटिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे थे, इसलिए ये दावे बिना पुष्टि के ही रह गए।

ऋतिक रोशन और सबा आज़ाद 2021 से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं। उन्होंने करण जौहर के 50वें जन्मदिन के जश्न में एक साथ शामिल होकर अपने रिश्ते को सबके सामने ज़ाहिर किया था। अक्टूबर 2025 में इस कपल ने साथ में चार साल पूरे किए और ऋतिक ने सोशल मीडिया पर दोनों की अनदेखी तस्वीरें शेयर कीं। पिछले कुछ सालों में उन्हें अक्सर कई इवेंट्स और सेलिब्रेशन में एक साथ देखा गया है।

14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

एक टेक प्रोफेशनल करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ रिमोट जॉब कर रहा था और अब तक उसकी यह ‘डबल जॉब’ वाली व्यवस्था बिना किसी बड़ी परेशानी के चल रही थी। दोनों कंपनियां अलग थीं, काम का तरीका और टेक्नोलॉजी स्टैक भी अलग था, इसलिए उसे लगता था कि दोनों नौकरियों का राज आसानी से छिपा रहेगा। लेकिन अचानक एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उसकी पूरी प्लानिंग हिला दी। उसे पता चला कि उसकी दोनों कंपनियां अब मर्ज होने जा रही हैं।

इसके बाद सबसे बड़ा डर यह है कि कंपनियों के सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड आपस में जुड़ते ही उसकी पहचान दोनों जगह सामने आ सकती है। खास बात यह है कि वह दोनों संस्थानों के कर्मचारियों के संपर्क में भी रहता है और दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। अब वह सोच रहा है कि नौकरी छोड़े या जोखिम लेकर इंतजार करे।

14 महीने तक आराम से चल रही थी दोहरी नौकरी

रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, टेक कर्मचारी करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ काम कर रहा था। दोनों नौकरियां पूरी तरह रिमोट थीं और दोनों में अलग-अलग टेक्नोलॉजी स्टैक इस्तेमाल होते थे।

उसका मानना था कि दोनों कंपनियों के कामकाज और टीमों के बीच इतना अंतर है कि किसी को उसके दूसरे रोजगार के बारे में पता चलने की संभावना बेहद कम है। इसी भरोसे के साथ वह दोनों नौकरियां संभालता रहा।

छोटी कंपनी को चुना था, ताकि न हो कोई टकराव

कर्मचारी के मुताबिक, उसकी एक कंपनी मिड-साइज SaaS कंपनी थी, जबकि दूसरी उसी सेक्टर में काम करने वाली अपेक्षाकृत छोटी कंपनी थी। उसने दूसरी कंपनी को इसलिए चुना था क्योंकि उसे लगता था कि छोटी कंपनी होने के कारण दोनों संस्थानों के बीच भविष्य में किसी तरह का कारोबारी संपर्क होने की संभावना काफी कम है। लेकिन जिस चीज को उसने सबसे कम संभावित माना था, वही आखिरकार उसके सामने आ गई।

CEO का एक ईमेल और बदल गया पूरा खेल

मुश्किल तब शुरू हुई जब उसे पहली कंपनी के CEO की ओर से ईमेल मिला। ईमेल में बताया गया था कि उसकी कंपनी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करने जा रही है। यानी जिस कंपनी में वह दूसरी नौकरी कर रहा था, अब वही उसकी पहली कंपनी के कॉरपोरेट दायरे में आने वाली थी। इसके बाद कर्मचारी को सबसे बड़ा डर अपने दोनों रोजगार रिकॉर्ड के आपस में जुड़ने का सताने लगा।

Slack डायरेक्टरी बनी सबसे बड़ी चिंता

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि वह दोनों कंपनियों के कर्मचारियों के साथ नियमित रूप से बातचीत करता है। ऐसे में मर्जर के बाद उसके लिए छिपे रहना और मुश्किल हो सकता है। दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। हालांकि दूसरी कंपनी में उसने अपने नाम का थोड़ा अलग फॉर्मेट इस्तेमाल किया था, लेकिन उसे खुद भी शक है कि सिस्टम और कर्मचारी डेटाबेस के एकीकरण के बाद यह अंतर उसे बचाने के लिए काफी नहीं होगा।

असली डर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों कंपनियों का इंटीग्रेशन कितनी जल्दी शुरू होगा। कर्मचारी को अंदाजा नहीं था कि पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगेंगे या सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड का एकीकरण शुरुआत में ही शुरू हो जाएगा। अगर दोनों कंपनियों के HR सिस्टम, डायरेक्टरी और डेटाबेस जल्दी आपस में जुड़ गए, तो एक ही व्यक्ति का दो जगह कर्मचारी के तौर पर मौजूद होना आसानी से सामने आ सकता है।

नौकरी छोड़ दे या जोखिम लेकर इंतजार करे?

यहीं से कर्मचारी की सबसे बड़ी दुविधा शुरू हुई। उसके सामने दो रास्ते थे दूसरी नौकरी से खुद इस्तीफा दे दे या फिर कुछ समय तक दोनों नौकरियां जारी रखकर हालात पर नजर रखे। पहला विकल्प उसे तुरंत संभावित जोखिम से बाहर निकाल सकता था। वहीं दूसरा विकल्प ज्यादा अनिश्चित था, लेकिन इसमें वह मर्जर की दिशा देखकर आगे फैसला लेने की उम्मीद कर रहा था।

Layoff हुआ तो Severance का भी सवाल

कर्मचारी के दिमाग में एक और संभावना आई। मर्जर के दौरान कंपनियां अक्सर restructuring करती हैं और कुछ पदों को खत्म भी किया जा सकते हैं। ऐसे में उसे लगा कि अगर वह इंतजार करता है और उसकी नौकरी restructuring में चली जाती है, तो शायद उसे severance मिल सके। हालांकि वह यह भी समझ रहा था कि इस रणनीति में बड़ा जोखिम है। अगर उससे पहले ही दोनों कंपनियों को उसके डबल एम्प्लॉयमेंट का पता चल गया, तो स्थिति उसके खिलाफ जा सकती है।

तनाव इतना बढ़ा कि सुबह 10 बजे ही खाने लगा Goldfish

अपनी पोस्ट के आखिर में टेक कर्मचारी ने अपनी स्थिति को मजाकिया अंदाज में बताते हुए कहा कि वह सुबह 10 बजे ही अपनी डेस्क पर बैठकर “stress eating goldfish” कर रहा था। उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए। पोस्ट सामने आते ही लोगों ने इसे गंभीर सलाह के साथ-साथ मजाकिया नजरिए से भी लेना शुरू कर दिया।

इंटरनेट ने कहा

पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी स्थिति पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने इसे “suffering from success” वाला मामला बताया। दूसरे ने मजाक करते हुए कहा कि वह दोनों कंपनियों की टीमों का परिचय कराने वाला व्यक्ति बन सकता है। किसी ने तो यहां तक सुझाव दे दिया कि वह अपना कानूनी नाम ही बदल ले। एक अन्य यूजर ने बेहद सीधे अंदाज में सलाह दी दूसरी नौकरी से इस्तीफा देकर भगवान से प्रार्थना करो। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि वे भी ऐसी ही “समस्या” झेलना चाहेंगे।

मर्जर ने खोल दिया Overemployment का सबसे बड़ा जोखिम

इस पूरे मामले की दिलचस्प बात यही है कि करीब 14 महीने तक दो रिमोट नौकरियां करने वाले इस कर्मचारी के लिए सबसे बड़ा खतरा काम का दबाव नहीं, बल्कि कंपनियों का आपस में जुड़ना बन गया। जब तक दोनों संस्थान अलग थे, अलग टेक स्टैक, अलग टीम और अलग सिस्टम ने उसकी दोहरी नौकरी को छिपाए रखा। लेकिन मर्जर के बाद वही अलग-अलग सिस्टम एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। अब उसकी पूरी चिंता इसी बात पर टिकी है कि यह इंटीग्रेशन कितनी जल्दी होता है और दोनों कंपनियों के रिकॉर्ड कब एक-दूसरे के सामने आते हैं।

गुरुग्राम में बाढ़ जैसे हालात इस बीच कंपनी के मैनेजर ने पूछा- टाइम पर ऑफिस कौन आया? तो भड़के लोग कहने लगे ये बातें

गुरुग्राम में गुरुवार को हर तरफ पानी भरा हुआ रहा। इस बीच एक मैनेजर का अटेंडेंस अपडेट मांगने वाला स्क्रीनशॉट, जिसमें पूछा गया था कि “कौन समय पर ऑफिस पहुंचा है” — Reddit पर लोगों के गुस्से का कारण बन गया है। यह नाराजगी तब सामने आई है, जब अधिकारियों ने शुक्रवार तक ‘वर्क-फ्रॉम-होम’ को बढ़ा दिया है, क्योंकि IMD ने उस दिन और बारिश का अनुमान लगाया है।

Reddit पर एक कर्मचारी द्वारा शेयर किए गए इस वायरल स्क्रीनशॉट में मैनेजर स्टाफ से न सिर्फ यह कन्फर्म करने के लिए कह रहा है कि वे समय पर ऑफिस पहुंचे हैं या नहीं, बल्कि खास तौर पर यह भी पूछ रहा है कि क्या वे DLF ऑफिस या सिग्नेचर टावर्स समय पर पहुंचे हैं। साथ ही उसने यह भी लिखा है कि “समय की पाबंदी ही प्रोफेशनलिज्म को दिखाती है।”

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इस पोस्ट पर कैप्शन था “क्या बारिश के बावजूद आज किसी और को भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा?” हर किसी की तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। हालांकि स्क्रीनशॉट की सच्चाई और मैनेजर की पहचान की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

रेडिट पर लोग क्या कह रहे हैं?

लोगों की प्रतिक्रियाएं व्यंग्य से लेकर गुस्से तक थीं। एक टॉप कमेंट में मैनेजर की ही बात उन्हीं पर लागू करते हुए लिखा गया- “समय की पाबंदी प्रोफेशनलिज्म दिखाती है… और सहानुभूति अच्छे मैनेजमेंट की निशानी है!!”कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने मंजूरी मिलने पर घर से काम (WFH) करने का विकल्प चुना, क्योंकि बहुत जल-जमाव था, भले ही उस समय बारिश नहीं हो रही थी।

एक जवाब में लिखा था कि उन्होंने बीमारी की छुट्टी ली थी और यह पूछने की “हिम्मत” पर सवाल उठाया गया कि कौन समय पर नहीं आया। एक अन्य यूजर ने लिखा कि “इंसानियत खत्म हो गई है,” और सवाल किया कि ऐसे मौसम में आने-जाने वाले कर्मचारियों के लिए कैब का इंतजाम क्यों नहीं किया गया।

एक और कमेंट करने वाले ने इस बात पर हैरानी जताई कि 2026 में भी ऐसा हो रहा है, “जबकि WFH के लिए पुलिस की एडवाइजरी जारी की गई है,” वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वे लगातार तीन दिनों से घर से काम कर रहे थे, और पिछले साल घर पहुंचने में लगे 4.5 घंटे के सफर को याद किया।