‘मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 4.7 करोड़ चुराए हैं’, टेक कर्मचारी ने 2 साल तक कुछ काम न करने पर कही बड़ी बात

एक टेक कर्मचारी ने यह दावा करके इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया है कि उसने लगभग दो साल तक काम पर लगभग कुछ भी न करते हुए 275,000 डॉलर (करीब 2.6 करोड़ रुपये) की सालाना सैलरी कमाई। कर्मचारी का अनुमान है कि इस दौरान उसे 500,000 डॉलर (लगभग 4.7 करोड़ रुपये) से ज्यादा का भुगतान किया गया, जबकि उसके पास लगभग कोई जिम्मेदारी नहीं थी।

रेडिट पोस्ट वायरल

रेडिट (Reddit) पर एक पोस्ट में उसने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक में एक बड़ा प्रमोशन कैसे एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ गया। कंपनी में अचानक हुए पुनर्गठन (restructuring) के कारण उसके पास न तो कोई सार्थक काम बचा और न ही उसे मैनेजमेंट से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले।

रेडिट के ‘r/corporate’ सबरेडिट पर अपना अनुभव साझा करते हुए कर्मचारी ने कहा- “मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 500,000 डॉलर से ज्यादा चुरा लिए हैं।” उसने बताया कि उसने कंपनी में लगभग एक दशक बिताया और इस दौरान पांच अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। हालांकि 2025 की शुरुआत में जो उसके करियर का एक अहम पड़ाव होना चाहिए था, वह अनिश्चितता के एक लंबे दौर में बदल गया।

रेडिट यूजर के अनुसार- उसे एक नई टीम में शामिल होने का ऑफर मिला, जो उसके करियर में एक बड़ा कदम था। लेकिन जिस दिन उसने नई टीम जॉइन की उसी दिन कंपनी में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन हुआ, जिसके चलते वे मैनेजर और डायरेक्टर दोनों ही कंपनी छोड़कर चले गए, जिन्होंने उसे काम पर रखा था।

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इस मौके के लिए अपने परिवार को वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क शहर ले जाने के बाद उन्होंने एक-दो सप्ताह इंतजार करने का फैसला किया कि नई लीडरशिप के तहत टीम कैसे काम करेगी। हालांकि हालात वैसे नहीं सुधरे जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने लिखा- “तो वहां मैं था। साल के लगभग 275,000 डॉलर कमा रहा था एक ऐसी टीम में जहां कोई जिम्मेदारी या मैनेजमेंट का कोई दिशा-निर्देश नहीं था। बस कुछ नहीं कर रहा था।”

ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे

कर्मचारी ने बताया कि उनका अनुभव सिर्फ कम काम या कभी-कभार होने वाली मीटिंग्स से कहीं बढ़कर था। उन्होंने बताया कि वे अपने काम के घंटों में ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे। न्यूयॉर्क शहर के मशहूर रेस्तरां ढूंढ़ते थे और मैनहट्टन में घूमते-फिरते थे। भले ही यह सुनने में एक बहुत ही शानदार स्थिति लगे, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी उद्देश्य का न होना धीरे-धीरे उनके लिए निराशा का कारण बन गया।

रेडिट यूजर ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने सार्थक काम पाने और बिजनेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए कई कोशिशें कीं। हालांकि उनका कहना है कि नए मैनेजर की तरफ से कोई खास दिशा-निर्देश नहीं मिले, जिसकी वजह से वे अपने काम से पूरी तरह अलग-थलग महसूस करने लगे।

आखिरकार उसने काम खोजने की नियमित कोशिशें बंद कर दीं और ज्यादातर दिन घर पर ही रहने लगा। उसने बताया कि वह अपने अपार्टमेंट के जिम में समय बिताता था, तरह-तरह के नाश्ते तैयार करता था, बालकनी में बैठकर शहर के नजारे देखते हुए कॉफी पीता था और कॉर्पोरेट जीवन की बेतुकी बातों के बारे में सोचता रहता था।

इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के प्रति उसके नजरिए को भी बदल दिया। उसने कहा कि उसे इस बात से काफी हैरानी हुई कि कोई कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना किसी काम (बिना किसी असाइनमेंट) के रह सकता है और फिर भी उसे अच्छी-खासी सैलरी मिलती रहती है।

टेक कर्मचारी का कहना है कि आखिरकार उसे एक बेहतर रोल मिल गया

इन अजीब हालात के बावजूद कर्मचारी ने तय किया कि वह इस अनचाहे ब्रेक का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगा। कई महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद उसे हाल ही में उसी कंपनी में एक और पद मिल गया, जिसे उसने अपने करियर में एक बड़ी तरक्की बताया। हालांकि वह इस नए मौके को लेकर उत्साहित था, लेकिन लगभग दो साल तक बिना किसी काम के रहने के बाद फिर से एक चुनौतीपूर्ण रोल में लौटना काफी मुश्किल साबित हुआ।

उन्होंने लिखा, “मुझे यहां आए अभी सिर्फ डेढ़ हफ्ता ही हुआ है और मुझे लगभग 2 साल तक कोई काम न करने का असर अभी से महसूस होने लगा है। मुझे लग रहा है कि मैं काफी पीछे छूट गया हूं और मेरी कार्यक्षमता भी काफी कम हो गई है।” फिर भी उन्होंने कहा कि वे खुश हैं कि उन्हें एक ऐसी भूमिका मिल गई है, जहां वे सार्थक योगदान दे सकते हैं और फिर से कुछ नया सीख सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बिना ज्यादा काम किए सैलरी लेने पर कोई गिल्ट महसूस हुआ तो उन्होंने माना कि शुरुआत में उन्हें लगा जैसे वे कंपनी पर एक ‘बेवजह का खर्च’ बन गए हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि इससे पहले एक सेल्सपर्सन के तौर पर वे कंपनी के लिए काफी रेवेन्यू (कमाई) लाते थे।

हालांकि समय के साथ उनका यह अपराधबोध गुस्से में बदल गया और फिर उन्होंने स्थिति को स्वीकार कर लिया। आखिरकार उन्होंने इस समय का भरपूर फायदा उठाने का फैसला किया—अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताया, न्यूयॉर्क के अलग-अलग रेस्तरां में खाना चखा और खुद को एक बहुत जरूरी मानसिक ब्रेक दिया।

उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी नौकरियों के बारे में एक अलग नजरिया दिया है। यहां कर्मचारी कभी-कभी कंपनी की व्यवस्था की कमियों के बीच ऐसे छिप सकते हैं कि किसी को पता ही नहीं चलता कि उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं।

पोस्ट के अंत में उन्होंने पाठकों को अपने सवाल पूछने के लिए इनवाइट किया। बाद में एक एडिट में उन्होंने अपने जैसे अनुभव साझा करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी कहानियां सुनकर उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बेहतर महसूस हुआ।

रेडिट यूजर्स ने अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए

इस कर्मचारी की कहानी पढ़ने के बाद कई रेडिट यूजर्स ने अपने विचार साझा किए। कुछ लोगों को इस स्थिति से जलन हुई तो कुछ ने इस बात पर चिंता जताई कि कोई सार्थक काम न होने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक यूजर ने कहा, “न्यूयॉर्क में इधर-उधर घूमना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन अगर मेरे हफ्ते में 2 दिन से ज्यादा समय खाली निकल जाए तो मैं पागल होने लगता हूं।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “मैं खुद टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं और पूरे दिन व्यस्त रहता हूं, इसलिए आप मेरी ‘ड्रीम जॉब’ जी रहे हैं! बस फर्क इतना है कि अगर मैं आपकी जगह होता तो उस खाली समय का इस्तेमाल अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और नए सर्टिफिकेशन लेने में करता।”

एक तीसरे यूजर ने कहा, “मैं यहां कुछ पूछने नहीं आया हूं, बस इतना कहना चाहता हूं कि ‘मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है!’ कुछ समय तक तो मजा आता है, लेकिन फिर यह निराशाजनक लगने लगता है। मुझे अभी एक प्रमोशन मिला है और मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं क्योंकि अब मुझे सच में काम करना पड़ेगा, लेकिन साथ ही मुझे कुछ नया सीखने और असली काम करने का मौका भी मिलेगा! और हां, अब यह पूरी तरह से रिमोट (घर से काम) नहीं है, बल्कि हाइब्रिड है, जिसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं! और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं यूरोप जा रहा हूं।”

2026 Mercedes-Maybach S-Class launched at Rs 3.35 crore

2026 Mercedes-Maybach S-Class launched at Rs 3.35 crore
Mercedes-Maybach-S-Class-India

Mercedes-Benz has launched the Maybach S-Class facelift at Rs 3.35 crore (ex-showroom). It has been brought to India in S 580e guise, making it the first Maybach in India to be offered with a plug-in hybrid powertrain. Only 30 units have been allocated in the first batch, costing Rs 97 lakh more than the ‘regular’ S-Class Manufaktur Edition AMG Line that was launched just a couple of months ago. This is also Mercedes’s third PHEV in India, following the updated S-Class and AMG E 53 Hybrid. Mercedes says around 50 percent of its S-Class sales in India are of the Maybach variant. 

  1. Maybach S-Class comes to India in S 580e guise with 3.0-litre PHEV powertrain 
  2. Gets executive rear seats with full-length business console as standard 
  3. Offers 98km electric-only range thanks to a 22kWh battery 

Mercedes-Maybach S 580e powertrain and specs 

The new PHEV powertrain is one of the biggest updates to the Maybach S-Class, as the outgoing model was offered with a 4.0-litre V8. The S 580e uses a 443hp/560Nm 3.0-litre inline-six petrol engine paired with a 160hp/480Nm electric motor and a 22kWh battery. Total system output is 585hp and 750Nm, and it comes with all-wheel drive as standard. Mercedes claims the car can travel up to 98km and reach a top speed of 140kph on electric power alone. It also has a WLTP-certified fuel efficiency of 34.48kpl, although it’s likely not to be of much interest to a Maybach owner.  

The S 580e offers three drive modes – Maybach, Electric and Battery Hold – along with adjustable energy recuperation, including one-pedal driving. As for charging, Mercedes will offer an 11kW AC on-board charger, and the car is also compatible with up to 60kW DC fast charging. The S 580e gets air suspension and rear-axle steering as standard. 

Mercedes-Maybach S 580e interior and features 

The focus of any Maybach is, of course, the back seat, and in that regard, Mercedes is offering the S 580e in a four-seat layout with executive seats with a full-length business console. Rear Comfort Package Plus is standard, offering fold-out tray tables, wireless charging pads, rear-compartment ambient lighting and even temperature-controlled cup holders. The seats recline to 43 degrees (compared to the regular S-Class’s 38 degrees) and are heated, ventilated and massaging. You also get two individual ‘smartphone’ remotes to operate everything instead of the tablet controller from before.

Up front, the dashboard remains largely unchanged from the regular S-Class. The MBUX Superscreen spans the front of the cabin, combining the central display with a front passenger display carrying a privacy function, while the driver gets a free-standing 3D display. The difference here is that you get a unique Maybach graphical theme for all screens, along with signature rose gold accents. Some of the equipment highlights include an augmented reality head-up display and navigation, a 31-speaker Burmester 4D surround sound system and two rear entertainment screens with wireless headsets.

The cabin is trimmed in Maybach-exclusive Nappa in crystal white and silver grey pearl, with Manufaktur piano lacquer trim, a Manufaktur roof liner in crystal white Nappa leather and Manufaktur seat backrest trim. 

Mercedes-Maybach S 580e exterior design 

Changes to the exterior are similar to those on the regular S-Class facelift, albeit with a few Maybach-specific twists. For instance, here too the grille is 20 percent larger and framed by LED illumination, with an illuminated Mercedes star on the bonnet above. The difference is that the grille uses the Maybach signature vertical slats, and there’s an illuminated ‘Maybach’ wordmark above them.

The headlamps are the new, larger units with the latest version of Mercedes’s Digital Light ambient lighting and three-pointed star daytime running lamps (DRLs), but rather than the techie blue accents, there are rose gold embellishments with the Maybach logo on them.

Mercedes-Benz Maybach S-Class facelift Wheel

As before, the Maybach is 180mm longer than the long-wheelbase S, and that’s plain to see in profile. The India-spec model rides on 20-inch forged Maybach wheels, which also house a counterweighted Mercedes logo that always stays upright as the wheels turn. The Maybach logo on the D-pillar is illuminated as well, and the tail-lamps also get the triple-three-pointed star LED signature, like in the standard S-Class.

What to expect from Mercedes-Maybach S-Class ahead of launch tomorrow

What to expect from Mercedes-Maybach S-Class ahead of launch tomorrow
Mercedes Maybach S-Class

Mercedes-Benz will launch the updated Maybach S-Class in India on October 5. The facelift brings styling and technology updates, along with more personalization options and changes to the powertrain range. With the launch just around the corner, here’s everything you need to know about the new Maybach S-Class.

What exterior changes does the new Maybach S-Class get over the S-Class?

The Maybach S-Class gets the larger illuminated grille seen on the updated S-Class, but with Maybach-specific vertical slats and an illuminated ‘Maybach’ wordmark above them. It also gets an illuminated Mercedes star on the bonnet, LED headlights with three-pointed-star DRLs and rose gold embellishments featuring the Maybach logo instead of the techie blue accents on the standard S-Class. There are also tiny Maybach logos in the lower air-dam mesh, an illuminated Maybach logo on the D-pillar and the same three-pointed-star LED signature for the tail-lamps as the standard S-Class.

The Maybach is 180mm longer than the long-wheelbase S-Class. It is also available with new 20- and 21-inch forged alloy wheels, which feature a counterweighted Mercedes logo that stays upright as the wheels turn. The carmaker says every Maybach S-Class gets some options from its Manufaktur personalization range, which now includes more exterior colours and two-tone paint combinations.

What are the key interior and feature highlights of the Maybach S-Class?

The cabin of the Maybach S-Class, like the standard S-Class gets a Superscreen-style layout comprising a 12.3-inch digital instrument cluster, a 14.4-inch central touchscreen and a 12.3-inch passenger display. The car also uses a new E&E architecture with four ‘supercomputers’ that run the entire car, from the screens to the safety features to the driving dynamics.

As on the outside, Mercedes has expanded the choice of extended leather upholstery and added new upholstery colours. For the first time on a Maybach, buyers can also specify leather-free vegan upholstery with its own unique design. 

What changes have been made to the rear-seat experience of the Maybach S-Class?

The rear seats now recline up to 43 degrees, compared with 38 degrees in the standard S-Class. They are also heated, ventilated and equipped with massage functions. The previous tablet controller has been replaced by two individual smartphone-style remotes for operating the car’s functions. There is also a Maybach drive mode that makes the suspension even softer.

What engine options are available internationally on the Maybach S-Class, and which one will India get?

Internationally, the Maybach S-Class is offered with petrol and plug-in hybrid powertrains. The S 580 gets a 4.0-litre V8 with a flat-plane crank, producing 537hp and 750Nm. Some markets also get the S 580e plug-in hybrid, which combines a 3.0-litre inline-six with a 163hp electric motor and a 22kWh battery. Total output is 585hp and 750Nm, with an electric-only range of up to 98km. The top-spec S 680 gets either a V12 or a more powerful V8 depending on the market. 

In India, we are likely to get the 612hp, 850Nm version of the S 580’s 4.0-litre V8.

What is the Maybach S-Class Night Series?

The Night Series is a darker-themed version of the Maybach S-Class. It gets darker exterior and interior colours, while chrome elements are replaced with dark chrome. It also gets a different set of aero-efficient black wheels adorned with dozens of Maybach logos.

How much will the new Maybach S-Class cost in India

The outgoing Maybach S 580 is currently priced at Rs 2.87 crore, ex-showroom, before options. Like the outgoing model, the updated Maybach S-Class is also expected to be locally assembled in India. The updated model is expected to cost more, with the price likely to be north of Rs 3 crore.

Gurugram Couple Monthly Expenses: 1.2 लाख रुपये का खर्च, जानें किराए से लेकर खाने तक कहां-कहां जाता है पैसा

गुरुग्राम में रहने वाले एक शादीशुदा कपल ने अगस्त महीने के अपने खर्च का हिसाब सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह पोस्ट चर्चा में आ गई। इस कपल ने बताया कि दो लोगों पर एक महीने में करीब 1.2 लाख रुपये खर्च हुए। उनकी शेयर की गई जानकारी में घर का किराया, राशन, घरेलू मदद, ट्रांसपोर्ट, बाहर खाना और ऑनलाइन ऑर्डर जैसी रोजमर्रा की जरूरतें शामिल हैं। हालांकि, लोगों की दिलचस्पी सिर्फ 1.2 लाख रुपये के आंकड़े में नहीं रही। सोशल मीडिया यूजर्स यह जानने को उत्सुक दिखे कि गुरुग्राम जैसे महंगे शहर में आखिर एक कपल का सामान्य जीवन जीने का मासिक बजट कितना हो सकता है।

खास तौर पर 3 BHK का किराया और घरेलू मदद के खर्च ने लोगों का ध्यान खींचा। कुछ यूजर्स ने बजट को अच्छी तरह मैनेज किया हुआ बताया, जबकि कुछ ने खर्च के अलग-अलग हिस्सों पर सवाल भी उठाए।

सबसे बड़ा खर्च घर का किराया

कपल के बजट में सबसे बड़ा हिस्सा घर का है। मोह‍ित और ज्योत्सना ने बताया कि वो गुरुग्राम में 3 BHK फ्लैट के लिए किराए और मेंटेनेंस पर करीब 36 हजार रुपये खर्च करते हैं। इसके अलावा घर के कामों में मदद करने वाली मेड को हर महीने 6 हजार रुपये दिए जाते हैं।

राशन पर 25 हजार, यानी रसोई भी नहीं है सस्ती

महीने के खर्च में अगली बड़ी रकम राशन और घर की जरूरतों पर जाती है। कपल के मुताबिक, किराने और घरेलू सामान पर करीब 25 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। यानी घर चलाने का खर्च ही उनके बजट का बड़ा हिस्सा खा जाता है।

इंटरनेट से लेकर OTT तक, छोटे खर्च मिलकर बड़ा बिल

मोबाइल और वाई-फाई के बिल पर करीब 3,500 रुपये खर्च होते हैं। वहीं OTT और म्यूजिक सब्सक्रिप्शन के लिए लगभग 2 हजार रुपये अलग से जाते हैं। देखने में ये रकम छोटी लग सकती है, लेकिन महीने के अंत तक ऐसे कई छोटे खर्च बजट को काफी बढ़ा देते हैं।

कार नहीं फिर भी 5 हजार रुपये ट्रांसपोर्ट पर

कपल के पास अपनी कार नहीं है। इसके बावजूद दिल्ली-गुरुग्राम आने-जाने और दूसरे कामों के लिए बाइक के पेट्रोल और कैब पर करीब 5 हजार रुपये खर्च होते हैं। कार न होने से खर्च कुछ हद तक नियंत्रित रहता है, लेकिन रोजमर्रा की आवाजाही का बिल फिर भी जुड़ता रहता है।

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वीकेंड का खाना भी बजट में बड़ा हिस्सा

इस कपल के लिए वीकेंड का मतलब घर से बाहर कॉफी और खाना भी है। इसके लिए करीब 15 हजार रुपये महीने खर्च होते हैं। वहीं ऑनलाइन खाना मंगाने पर लगभग 3 हजार रुपये और चले जाते हैं।

असली सवाल रकम नहीं, लोगों की अपनी जिंदगी है

कपल ने अपना खर्च साझा करते हुए पूछा कि गुरुग्राम में दो लोगों के लिए 1.2 लाख रुपये का मासिक खर्च ज्यादा है या उचित? इसके बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। किसी ने बजट को अच्छी तरह मैनेज किया हुआ बताया, तो कुछ लोग 3 BHK के 36 हजार रुपये किराए को लेकर हैरान दिखे।

मेड की 6 हजार रुपये की फीस भी चर्चा का विषय बनी। एक यूजर ने सवाल किया कि खाना बनाने, सफाई और किचन के काम के लिए इतनी कम रकम में घरेलू मदद कैसे मिल रही है। वहीं कुछ लोगों ने कपल से उनके रहने वाले सेक्टर के बारे में भी पूछा, क्योंकि उन्हें 3 BHK का किराया काफी कम लगा।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

‘वो 34 की हैं, मैं सिर्फ 22 का’… Team Lead के व्यवहार ने Techie को किया कंफ्यूज, Reddit पर पूछी राय

30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Trends (25)

रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

मुंबई-गुरुग्राम की चमक छोड़ भोपाल लौटे कारोबारी, आखिर ऐसा क्या मिला कि वापस जाने का मन नहीं?