साल भर में 92 लाख का टैक्स दिया, अब 90 लाख की नौकरी भी नहीं मिल रही – Uber इंजीनियर के पोस्ट ने मचाया बवाल

नई दिल्ली। अच्छी सैलरी वाली नौकरी और लाखों रुपये का इनकम टैक्स देने के बाद भी नौकरी जाने का डर खत्म नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Uber में सीनियर इंजीनियर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स दिया था। लेकिन अब पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने के बाद वे नई नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने रेडिट (Reddit) पर 7 अक्टूबर 2026 को शेयर की गई उनकी पोस्ट के मुताबिक, घर में नवजात बच्चा है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं होता है।

नौकरी छूटने का कारण रहा पैटरनिटी लीव

इंजीनियर का कहना है कि वे चार महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity leave) पर थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। घर में नवजात बच्चा है और परिवार की मदद के लिए भी कोई खास सहारा नहीं है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के साथ नई नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे नौकरी खोजने और इंटरव्यू की तैयारी पर पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। नौकरी जाने के बाद घर के खर्च और बच्चे की देखभाल की चिंता भी बढ़ गई है। वह कहते है कि नौकरी जाने के बाद उन्हें ऐसी नई नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसमें सालाना कम से कम 90 लाख रुपये मिलें।

सेवरेंस पे पर टैक्स से नाराज, भारत छोड़ने की कही बात

नौकरी जाने के बाद मिलने वाले पैसे यानी सेवरेंस पे (Severance pay) पर टैक्स लगने से भी इंजीनियर नाराज हैं। उनका कहना है कि नई नौकरी मिलने तक परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें इस पैसे की जरूरत है। ऐसे में टैक्स कटने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इंजीनियर ने कहा कि वे जल्द ही भारत छोड़ देंगे और वापस नहीं आना चाहते।

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी की सुरक्षा, टैक्स और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है।

Video: ऑफिस में जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ सकता है भारी? महिला ने बताया क्यों बचाकर रखें 20% एनर्जी

कॉर्पोरेट दुनिया में मेहनती और हमेशा उपलब्ध रहने वाले कर्मचारी को अक्सर जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन क्या हर दिन जरूरत से ज्यादा काम करना आगे चलकर आपके लिए ही परेशानी बन सकता है? इसी सवाल को लेकर एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि अगर कर्मचारी लगातार तय समय से पहले काम पूरा करते हैं या ऑफिस के बाद भी मैसेज का जवाब देते रहते हैं, तो धीरे-धीरे मैनेजमेंट उसी प्रदर्शन को सामान्य मानने लगता है। जो काम कभी अतिरिक्त प्रयास था, वही बाद में रोज की अपेक्षा बन सकता है। उन्होंने कर्मचारियों को अपनी पूरी ऊर्जा हर दिन खर्च करने के बजाय कुछ हिस्सा बचाकर रखने की सलाह दी।

उनके मुताबिक, यह काम से बचने की बात नहीं है, बल्कि मुश्किल दिनों के लिए खुद को तैयार रखने का तरीका है। सोशल मीडिया पर उनकी इस सोच को लेकर कई लोगों ने सहमति जताई और अपने ऑफिस अनुभव भी साझा किए।

‘आज जल्दी काम किया तो कल भी उतनी ही उम्मीद होगी’

इंस्टाग्राम पर अव्रीन ने एक वीडियो शेयर कर कर्मचारियों को काम और निजी जिंदगी के बीच सीमाएं तय करने की सलाह दी। उन्होंने समझाया कि अगर कोई कर्मचारी छह घंटे में पूरा होने वाला काम सिर्फ तीन घंटे में खत्म कर देता है, तो मैनेजर भविष्य में उसी काम को तीन घंटे में पूरा होने वाला मान सकते हैं। यानी एक बार दिखाई गई अतिरिक्त तेजी आगे चलकर रोज की अपेक्षा बन सकती है।

रात 10 बजे जवाब दिया तो रोज की उम्मीद?

अव्रीन ने ऑफिस के मैसेज का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई कर्मचारी कभी-कभार रात 10 बजे Teams पर जवाब देता है, तो इससे दूसरों को यह लग सकता है कि वह उस समय भी उपलब्ध रहता है। उनका कहना है कि कॉर्पोरेट माहौल में एक अनकही धारणा बन सकती है आपका सबसे अच्छा प्रदर्शन ही धीरे-धीरे आपका सामान्य प्रदर्शन मान लिया जाता है।

‘80% दो, 20% अपने लिए बचाकर रखो’

महिला ने कर्मचारियों को हर दिन अपना पूरा दम लगाने के बजाय अपनी ऊर्जा का कुछ हिस्सा बचाकर रखने की सलाह दी। उनके मुताबिक, इसका मतलब काम में लापरवाही करना नहीं है। बल्कि जरूरी यह है कि कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता को हर दिन का न्यूनतम मानक न बनने दें। बची हुई ऊर्जा उन दिनों काम आ सकती है, जब तबीयत खराब हो, निजी जिंदगी में कोई परेशानी चल रही हो या ऑफिस में अचानक कोई जरूरी स्थिति पैदा हो जाए।

ज्यादा मेहनत और लापरवाही में फर्क

अव्रीन ने साफ किया कि उनकी सलाह जिम्मेदारियों से बचने या जानबूझकर काम धीमा करने की नहीं है। उनका फोकस वर्कप्लेस बाउंड्रीज पर है। उनके मुताबिक, कभी-कभार अतिरिक्त मेहनत करना ठीक है, लेकिन अगर वही हर दिन की अपेक्षा बन जाए तो कर्मचारी पर लगातार दबाव बढ़ सकता है।

View this post on Instagram

A post shared by Instagram

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘बात तो सही है’

अव्रीन की पोस्ट पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके विचारों से सहमति जताई। कुछ लोगों ने कहा कि ऑफिस में सीमाएं तय करना जरूरी है, जबकि कई ने अपने अनुभव भी साझा किए।

एक यूजर ने लिखा कि वर्कप्लेस पर सीमाएं बनाना बेहद जरूरी है। दूसरे ने कहा कि यह बात बिल्कुल सही है। एक अन्य यूजर ने कॉर्पोरेट लाइफ को समझाने वाला अनुभव बताया।

एक कर्मचारी ने अपने मैनेजर का उदाहरण देते हुए लिखा कि लंबे समय तक 10 घंटे से ज्यादा काम करने के बावजूद उसे सामान्य काम का हिस्सा माना जाने लगा। इसके बाद उसने तय ऑफिस टाइम खत्म होते ही काम बंद करना शुरू कर दिया।

कभी ₹3,000 महीना कमाते थे पवन, आज ₹58 लाख सालाना की नौकरी, NIT छोड़कर ऐसे बनाई पहचान

क्या अच्छी जिंदगी जीने के लिए काफी है 1.5 से 2 लाख रुपये तक की सैलरी? इस शख्स ने हाई सैलरी के पीछे छिपे ट्रैप के बारे में बताया

आज के दौर में ज्यादा कमाने की चाह शायद ही किसी से छिपी हो। नौकरी में प्रमोशन, बढ़ती सैलरी और बेहतर पैकेज को अक्सर सफलता की निशानी माना जाता है। लेकिन क्या जिंदगी भर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने की दौड़ जरूरी है? इसी सवाल ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। मोहित तलरेजा ने अपनी राय साझा करते हुए कहा कि भारत के शहरों में रहने वाले लोगों के लिए 1.5 लाख से 2 लाख रुपये महीने की कमाई एक ऐसा पड़ाव हो सकती है, जहां से जिंदगी को सिर्फ पैसे के पीछे दौड़ाने के बजाय दूसरी जरूरी चीजों पर भी ध्यान दिया जा सके।

‘एक सीमा तय करिए, फिर जिंदगी भी जीना सीखिए’

तलरेजा का मानना है कि हर व्यक्ति के लिए यह सीमा अलग हो सकती है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस उम्र में इस आय तक पहुंचता है। लेकिन एक बार यह स्तर हासिल हो जाए, तो लगातार ज्यादा कमाने की कोशिश के बजाय जीवन के दूसरे पहलुओं को समय देना ज्यादा अहम हो सकता है। उनके मुताबिक, शहर में एक परिवार को आरामदायक जीवन देने के लिए 1.5 से 2 लाख रुपये की मासिक आय पर्याप्त हो सकती है।

ज्यादा कमाई के साथ बढ़ सकता है दबाव

तलरेजा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या हर बार बढ़ती सैलरी के पीछे भागना वाकई खुशहाल जिंदगी की गारंटी देता है। उनका कहना है कि जैसे-जैसे कोई व्यक्ति ज्यादा कमाई के लिए ऊपर बढ़ता है, वैसे-वैसे उसे अपनी जिंदगी के दूसरे हिस्सों से समझौता करना पड़ सकता है। काम का बढ़ता दबाव, कम होता खाली समय और परिवार से दूरी ये ऐसी कीमतें हैं, जिनका एहसास अक्सर बाद में होता है।

पैसा कमाइए, लेकिन खुद के लिए भी वक्त बचाइए

उनकी सलाह है कि करियर में एक तय आर्थिक मुकाम हासिल करने के बाद काम को सामान्य गति से आगे बढ़ने दिया जाए। इस दौरान व्यक्ति अपने स्वास्थ्य, परिवार, सीखने और निजी विकास पर भी ध्यान दे सकता है। तलरेजा का मानना है कि नौकरी के साथ कोई नया कौशल सीखना या अपनी कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा संतोष दे सकता है।

Instagram पर यह पोस्ट देखें

‘बहुत ज्यादा सैलरी भी बन सकती है जाल’

तलरेजा ने लगातार ज्यादा पैसे कमाने की मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ दूसरों के लिए ज्यादा से ज्यादा काम करते रहना लंबे समय में संतुष्टि नहीं देता। उनके अनुसार, हर व्यक्ति को खुद तय करना चाहिए कि उसके लिए ‘कितना काफी है’। उनकी यह बात सोशल मीडिया यूजर्स के बीच भी चर्चा का विषय बन गई। कुछ लोगों ने इसे सही नजरिया बताया, तो कुछ ने माना कि ज्यादा सैलरी के साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी बढ़ते हैं। वहीं कई यूजर्स ने कहा कि पैसों के साथ परिवार और खुद के लिए समय निकालना भी उतना ही जरूरी है।

नौकरी के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं? ऐनी हैथवे ने बताई वो गलती, जो आपका मौका छीन सकती है

ऑफिस में प्रोडक्टिविटी बढ़ानी है तो इन टाइम वेस्टिंग एक्टिविटीज से बचें!

सुबह उठते ही कई लोगों के सामने कामों की लंबी लिस्ट होती है। अलार्म बंद करने के बाद फोन पर ईमेल और मैसेज देखने लगते हैं, वहीं दूसरी तरफ पिछले दिन के अधूरे काम भी याद आने लगते हैं। ऐसे में दिन शुरू होने से पहले ही स्ट्रेस महसूस होने लगता है और लगता है कि समय बहुत तेजी से निकल रहा है। लेकिन ज्यादा काम करने का मतलब यह नहीं है कि अपनी नींद या आराम को कम कर दिया जाए।

समय बचाने के लिए रोज की छोटी-छोटी आदतों में थोड़ा बदलाव करके भी काफी समय बचाया जा सकता है। सही तरह से किया गया काम हर हफ्ते कई घंटे बचा सकता हैं। इसके लिए आपको बस अपने रूटीन में कुछ आसान और असरदार आदतों को शामिल करने की जरूरत है।

1. हर काम के लिए टाइम लिमिट रखें

किसी काम को बहुत ज्यादा परफेक्ट बनाने की कोशिश में कई बार हम जरूरत से ज्यादा समय लगा देते हैं। इससे बचने के लिए हर काम की एक टाइम लिमिट रखें। जैसे ईमेल के लिए 30 मिनट, मीटिंग की तैयारी के लिए 20 मिनट या जरूरी फोन कॉल के लिए 15 मिनट। समय तय होने से आपका ध्यान काम पर बना रहता है और बार-बार दूसरी चीजों में जाने की आदत कम होती है। इसके लिए फोन का टाइमर या कैलेंडर में टाइम ब्लॉक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. काम की प्रायोरिटी डिसाइड करें

हम दिनभर के काम की लिस्ट बनाते हैं, लेकिन किन कामों से बचना है, इस पर ध्यान नहीं देते। इसके लिए एक छोटी ‘न-करने वाली लिस्ट’ बनाएं और उसमें ऐसी आदतें लिखें जो आपका समय बेवजह खराब करती हैं। जैसे काम के बीच बार-बार सोशल मीडिया देखना, हर मैसेज का तुरंत जवाब देना या बिना जरूरत की मीटिंग में शामिल होना। जब इन चीजों से बचने का फैसला पहले से तय होगा, तो बार-बार सोचने में समय नहीं जाएगा।

3. काम के बीच दिमाग को दें छोटा ब्रेक

एक काम खत्म करने के तुरंत बाद दूसरे काम पर ध्यान लगाना कई बार मुश्किल होता है। ऐसे में दो कामों के बीच एक छोटा सा ब्रेक या रीसेट रूटीन रखें। जैसे एक मिनट के लिए डेस्क व्यवस्थित करना, गहरी सांस लेना, थोड़ा स्ट्रेच करना या पानी पीना। इससे दिमाग को यह समझने में मदद मिलती है कि पिछला काम खत्म हो चुका है और अब नए काम पर ध्यान देना है।

4. रोज 5 मिनट प्लानिंग करें

दिन की शुरुआत बिना किसी प्लान के करने पर जरूरी काम पीछे छूट सकते हैं और समय छोटे-छोटे कामों में निकल जाता है। इसलिए सुबह सिर्फ पांच मिनट निकालकर पूरे दिन की जरूरी चीजों का प्लान बना लें। लंबी लिस्ट बनाने की जरूरत नहीं है, बस उस दिन के तीन सबसे जरूरी काम तय करें और उनके लिए समय निकालें। इससे आपको दिनभर बार-बार यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि अब कौन सा काम करना है।

5. बार-बार होने वाले कामों को ऑटोमेट करें

जो काम हर दिन या हर हफ्ते रिपीट पड़ते हैं, उन्हें बार-बार हाथ से करने में काफी समय चला जाता है। ऐसे कामों के लिए टेक्नोलॉजी की मदद ली जा सकती है। जैसे बिलों के लिए ऑटो-पेमेंट, बार-बार भेजे जाने वाले ईमेल के लिए टेम्प्लेट और जरूरी कामों के लिए रिमाइंडर सेट करना। इससे आपको हर बार वही काम दोहराने या छोटे-छोटे फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

अच्छी प्रोडक्टिविटी का मतलब सिर्फ ज्यादा काम करना नहीं, बल्कि पूरे दिन को इस तरह जीना है कि काम के साथ आराम और प्राइवेट टाइम के लिए भी जगह बनी रहे। छोटी शुरुआत करके अपनी आदतों में बदलाव लाना ज्यादा आसान होता है। जब काम का तरीका बेहतर होने लगता है, तो दिन कम भागदौड़ वाला और ज्यादा बैलेंस फील होता है।

क्या हर सैलरी हाइक के लिए नौकरी बदलना सही है? निहार पाटिल ने बताया दूसरा रास्ता

पुणे के निहार पाटिल की जॉब स्विचिंग को लेकर दी गई सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि करियर में एक ऐसा पड़ाव आता है, जब हर बार सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं होता। खासकर जब नई नौकरी में मिलने वाला हाइक महज 20-30 हजार रुपये का हो, तो टैक्स और दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं रह जाती।निहार के मुताबिक, नौकरी चुनते समय केवल पैकेज पर ध्यान देने के बजाय अच्छा मैनेजर, बेहतर प्रोजेक्ट, जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस भी देखना चाहिए।

उनका मानना है कि एक स्थिर नौकरी के साथ अपने खाली समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, कुछ नया शुरू करने या अतिरिक्त इनकम सोर्स बनाने में किया जा सकता है। इसी सोच को लेकर उनकी बात पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

1.5 से 2 लाख की सैलरी के बाद बदलें नजरिया

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में निहार ने कहा कि भारत में जब किसी की मासिक सैलरी करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, तो नौकरी बदलने को लेकर सोच थोड़ी अलग होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस स्तर पर ऐसी कंपनियों और भूमिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जहां बहुत बड़ा सैलरी जंप मिल सके। ऐसे में अगर नई नौकरी से सिर्फ 20-30 हजार रुपये ज्यादा मिल रहे हैं, तो टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला वास्तविक अंतर काफी कम महसूस हो सकता है।

ज्यादा CTC का मतलब ज्यादा रिस्क भी?

निहार ने नौकरी बदलने से जुड़े एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्यादा सैलरी के साथ CTC भी बढ़ता है और कंपनियों में होने वाली री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी के दौरान यह एक जोखिम बन सकता है। ऐसे में अगर मौजूदा कंपनी में काम अच्छा चल रहा है, मैनेजर सपोर्टिव है और करियर स्थिर है, तो केवल छोटे सैलरी हाइक के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है।

9 से 5 के बाद बनाएं अपना ‘5 से 9’

निहार की सलाह का सबसे दिलचस्प हिस्सा नौकरी के बाहर की जिंदगी को लेकर है। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो उसके बाद के समय को अपनी ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। नई स्किल सीखना, अपना कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

उनके मुताबिक, करियर का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी से ज्यादा पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी जिंदगी बनाना होना चाहिए, जहां आपकी पूरी आर्थिक सुरक्षा सिर्फ एक नौकरी पर निर्भर न हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस

निहार की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने उनकी सोच को सही बताते हुए कहा कि एक स्तर के बाद फोकस मल्टीपल इनकम सोर्स, बेहतर लाइफस्टाइल और उद्देश्यपूर्ण जिंदगी पर होना चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने कॉरपोरेट वर्क कल्चर की हकीकत सामने रखी। एक यूजर ने कहा कि इतनी ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर दूसरी चीजों के लिए समय ही नहीं बचता, क्योंकि कंपनियां उनसे दिन-रात उपलब्ध रहने की उम्मीद करती हैं।

एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई कंपनियों में 9 से 5 का मतलब अब 9 से 9 हो चुका है। ऐसे में नौकरी के बाद किसी दूसरी चीज पर ध्यान देना आसान नहीं।

सिर्फ नौकरी या पूरी जिंदगी? असली सवाल यही है

एक यूजर ने इस बहस में संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि 5 से 9 को बेहतर बनाने के साथ-साथ 9 से 5 में भी संतुलन जरूरी है, क्योंकि अगर नौकरी ही नीरस और थकाऊ हो जाए तो बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है।

Video: दिल्ली में नहीं भाया वड़ा पाव तो पकड़ ली मुंबई की फ्लाइट, 20 रुपये के लिए खर्चे 15 हजार

 

30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Trends (25)

रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

मुंबई-गुरुग्राम की चमक छोड़ भोपाल लौटे कारोबारी, आखिर ऐसा क्या मिला कि वापस जाने का मन नहीं?

9-5 की नौकरी के बाद UK में लोग करते हैं ये काम, भारतीय महिला ने VIDEO में दिखाया पूरा सच

ब्रिटेन में रह रही भारतीय महिला अनुष्का व्यास का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने UK और भारत की 9-5 नौकरी के बाद की जिंदगी का अंतर दिखाने की कोशिश की है। अनुष्का ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का वीडियो शेयर किया, जहां लोग काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ समय बिताते, घूमते और फिटनेस पर ध्यान देते नजर आए। उनका कहना है कि UK में नौकरी के बाद भी लोगों के पास अपनी जिंदगी के लिए वक्त बचता है।

वहीं, भारत में ऑफिस खत्म होने के बाद लंबा सफर, ट्रैफिक और कई बार अतिरिक्त काम दिन का बाकी समय भी ले लेते हैं। अनुष्का के मुताबिक, इसी वजह से कई लोगों की पूरी उम्मीद वीकेंड पर टिक जाती है। उनके वीडियो ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

गुरुवार शाम 5:30 बजे पार्क का दिखाया नजारा

अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का नजारा दिखाया। उन्होंने बताया कि यह न तो वीकेंड था और न ही कोई छुट्टी का दिन। इसके बावजूद पार्क में लोग परिवार के साथ समय बिता रहे थे, पिकनिक कर रहे थे और फिटनेस पर ध्यान दे रहे थे।

‘यहां काम के बाद भी जिंदगी बचती है’

अनुष्का के मुताबिक, UK में लोग अपना काम खत्म करने के बाद परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकाल पाते हैं। उनके अनुसार, शाम का समय सिर्फ घर पहुंचने और आराम करने में ही नहीं निकलता, बल्कि लोग घूमने, एक्सरसाइज करने और अपनों के साथ वक्त बिताने का मौका भी पाते हैं।

भारत में 9-5 के बाद शुरू होती है दूसरी जद्दोजहद?

अनुष्का ने भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों के लिए ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी दिन खत्म नहीं होता। ऑफिस से निकलने के बाद ट्रैफिक और लंबा सफर समय ले लेता है। कई बार बॉस की तरफ से अतिरिक्त काम भी मिल जाता है। ऐसे में घर पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाती है।

वीकेंड का भी नहीं मिल पाता पूरा आराम

उन्होंने कहा कि लगातार थकान के कारण कई लोग वीकेंड का इस्तेमाल भी सिर्फ आराम करने में कर देते हैं। ऐसे में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना या अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।

‘सिर्फ पैसा नहीं, क्वालिटी ऑफ लाइफ भी जरूरी’

अनुष्का का कहना है कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी उन वजहों में शामिल है, जिनके कारण कुछ भारतीय विदेश में बसना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, अच्छी नौकरी और कमाई के साथ सुकून, परिवार के लिए समय और अपनी जिंदगी जीने की आजादी भी जरूरी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने UK के वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बताया, तो कुछ ने भारतीय वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत पर बात की। एक यूजर ने इसे “अनरियल वर्क-लाइफ बैलेंस” बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि काम के बाद मिलने वाला सुकून भी बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Video: 5 दिन से 50 फीट गहरे कुएं से बाहर आने की जद्दोजहद कर रहा था कोबरा, अचानक फिर गिरा नीचे; दूसरी कोशिश में ऐसे बची सांप की जान

25 साल के GenZ ने 1 करोड़ रुपये का जॉब ऑफर ठुकराया! मेंटल पीस से जुड़ी वजह जानकर चौंक जाएंगे

एक 25 साल के प्रोफेशनल ने 1 करोड़ रुपये की नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि वह ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहता था, जो मानसिक रूप से नुकसानदेह हो। इस फ़ैसले ने पैसे, मानसिक स्वास्थ्य और युवा कर्मचारी अपने करियर से क्या चाहते हैं, इस पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

यह कहानी बेंगलुरु की प्रोडक्ट डिज़ाइनर मुस्कान अतार ने शेयर की। उन्होंने कहा कि वह इस बात से प्रभावित थीं कि उस युवा प्रोफेशनल ने अपने करियर की शुरुआत में ही कितनी साफ़-साफ़ अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली थीं।

उन्होंने पैसे के बजाय अपने लंबे समय के लक्ष्यों को चुना

मुस्कान अतार ने लिंक्डइन पर लिखा, “मेरे एक दोस्त ने 25 साल की उम्र में ₹1 करोड़ का ऑफर ठुकरा दिया, ताकि उन्हें खराब माहौल वाले वर्कप्लेस में काम न करना पड़े।” उन्होंने कहा कि उन्होंने भी पहले ऐसे मौके ठुकराए हैं, लेकिन 25 साल की उम्र में ऐसा फैसला लेने के बारे में सोचना भी उनके लिए मुश्किल था।

उन्होंने कहा, “मैंने भी ऐसे मौकों को ना कहा है, लेकिन 25 साल की उम्र में इतनी स्पष्ट प्राथमिकता तय करने के बारे में मैं सोच भी नहीं सकती।” अतार ने बताया कि कई तरह के दबावों की वजह से उनके लिए यह फैसला लेना बहुत मुश्किल हो सकता था, जैसे परिवार की ज़रूरतें, दूसरों की उम्मीदें और निजी लक्ष्य।

Screenshot 2026-08-14 125614

“परिवार की ज़िम्मेदारियां, दोस्तों का दबाव और अपनी जीवनशैली की इच्छाओं की वजह से शायद मैं वह ऑफ़र स्वीकार कर लेती। वह भी मेरी ही तरह के बैकग्राउंड से आते हैं, फिर भी उनमें ऐसे फ़ायदे छोड़ने की हिम्मत है जो उनके लंबे समय के लक्ष्यों से मेल नहीं खाते। यह उनके व्यक्तित्व में एक बड़ा सुधार दिखाता है।”

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से यह भी पता चलता है कि कैसे कुछ युवा कर्मचारी नौकरी चुनते समय सिर्फ़ सैलरी से आगे की चीज़ों पर भी ध्यान दे रहे हैं। “कामकाजी लोगों की अगली पीढ़ी को पता है कि उनके लिए क्या ज़रूरी है। वर्कप्लेस को इसके हिसाब से ढलना सीखना होगा।”

उनकी पसंद पर लोगों की अलग-अलग राय थी

इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं; कुछ लोगों ने इस फैसले की तारीफ़ की, तो कुछ ने कहा कि हर कोई इतनी बड़ी सैलरी ठुकराने का जोखिम नहीं उठा सकता। एक व्यक्ति ने लिखा, “खुशी है कि लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के असर को समझ रहे हैं… चाहे वह अच्छा हो या बुरा… और हां, पैसा ज़रूरी है। मैं हमेशा कहता हूं कि मैं बाकी चीज़ों से ज़्यादा पैसे को चुनूंगा, कभी-कभी तो नौकरी की भूमिका या काम के घंटों से भी ज़्यादा। लेकिन टॉक्सिक माहौल और अजीब काम करने की जगह… बिल्कुल नहीं…!! यह बात मुझे MNC और PSU में एक दशक तक काम करने के बाद समझ आई, लेकिन 25 साल की उम्र में ऐसा करना तारीफ़ के काबिल है।”

एक और व्यक्ति ने कमेंट किया, “मेरे अंदर का मिडिल-क्लास इंसान 45 साल की उम्र में भी ऐसा नहीं कर पाएगा। तो हाँ, वे ऑफ़र मेरी तरफ़ भेज दो।” किसी ने लिखा, “यह बात बहुत रिलेटेबल है, भले ही पिछली पीढ़ी को यह बेवकूफी लगे, लेकिन कौन भला हर किसी की कहानी में हीरो रहा है!”

एक यूज़र ने कहा, “अगर कोई कुछ समय के लिए बिना इनकम के रह सकता है, तो ही यह मुमकिन है। शायद इस पीढ़ी के पास वह फ्लेक्सिबिलिटी है। हमारी पीढ़ी के पास वह नहीं थी, और अब भी नहीं है।” एक और व्यक्ति ने लिखा, “सच कहूं तो, उनकी तारीफ़ करनी चाहिए। अभी तो ऐसा लगता है कि वे एक प्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से आते हैं, क्योंकि हम सब जानते हैं कि कितने लोग ऐसे ऑफ़र के लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार होंगे! लेकिन हां, यह जानना बहुत अच्छी बात है कि आप ज़िंदगी में बहुत जल्दी क्या चाहते हैं और आपके पास वह फ़ैसला लेने की क्षमता/हालात/सपोर्ट है!”

एक कमेंट में लिखा था, “काम का भविष्य उन लोगों से तय होगा जो सिर्फ़ सैलरी नहीं, बल्कि मकसद, भलाई और सार्थक ग्रोथ को अहमियत देते हैं।”

लेऑफ के बाद ऑफिस की आखिरी विजिट बनी दर्दनाक याद! सोशल मीडिया पर वायरल हुई इमोशनल कहानी

नौकरी से निकाले जाने के बाद एक कर्मचारी कंपनी को लैपटॉप वापस करने के लिए ऑफिस गया। व्यक्ति के साथ वहां पर हैरान कर देने वाली घटना हुई। व्यक्ति ने ये घटना शेयर करते हुए बताया कि, ऑफिस की यह आखिरी यात्रा उसके 2 साल के बेटे के लिए भी एक मुश्किल और समझ से परे अनुभव बन गई। उसकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस घटना को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस पोस्ट पर तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। Reddit पर शेयर पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि, वह ब्लैकरॉक की कंपनी प्रीक्विन में काम करता था। हाल ही में उसकी नौकरी चली गई थी और वह ऑफिस में अपनी आखिरी दिन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पहुंचा था।

बेटा अंदर नहीं जा सकता

उस समय उसकी पत्नी भी काम पर थी और उनके 2 साल के बच्चे की देखभाल के लिए घर पर कोई और नहीं था। ऐसे में कर्मचारी को अपने बच्चे को ऑफिस साथ ले जाना पड़ा। उसने बताया, “घर पर उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था, इसलिए मेरे पास उसे अपने साथ ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं था।” लेकिन, ऑफिस पहुंचने के बाद कर्मचारी को बताया गया कि उसका बेटा अंदर नहीं आ सकता। उसने अपनी स्थिति समझाने की कोशिश की और बताया कि यह उसका आखिरी दिन था और उसे सिर्फ कंपनी का लैपटॉप जमा करके वापस जाना था। इसके बावजूद उसकी रिक्वेस्ट को मंजूरी नहीं दी गई और बच्चे को ऑफिस के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

इसके बाद कर्मचारी को मजबूर होकर एक कलीग को फोन करना पड़ा और जब तक वह लैपटॉप जमा करने की प्रक्रिया पूरी करता, तब तक अपने बेटे की देखभाल करने के लिए कहा। उसे लगा था कि यह काम महज पांच मिनट में पूरा हो जाएगा, लेकिन पूरी प्रक्रिया में करीब 15 मिनट लग गए। कर्मचारी ने कहा कि इस पूरी स्थिति की वजह से उसे काफी बुरा महसूस हुआ। लेकिन, इस अनुभव से परेशान होने के बावजूद उसने साफ किया कि वह कंपनी पर किसी नियम को तोड़ने का आरोप नहीं लगा रहा है। उसका कहना था कि वह समझता है कि ऑफिस में विजिटर्स और बच्चों को लेकर कंपनी की अपनी पॉलिसी हो सकती है।

Screenshot 2026-08-12 161526

बन गई एक दर्दनाक याद

नौकरी जाने के बाद इस अनुभव ने कर्मचारी को एहसास कराया कि कंपनी के लिए उसकी निजी परिस्थितियां उतनी मायने नहीं रखतीं, जितनी उसके लिए खुद रखती हैं। उन्होंने लिखा, “आप अपना सालों का समय दे सकते हैं, देर तक काम कर सकते हैं, जिम्मेदारी ले सकते हैं और कंपनी को अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मान सकते हैं। लेकिन जब नौकरी का रिश्ता खत्म होता है, तो आखिर में यह एक बिजनेस फैसला ही होता है।” उन्होंने लिखा, “मेरे लिए, यह चीजों को सही नजरिए से देखने की एक दर्दनाक याद दिलाने वाली बात थी।”

लोगों ने किया पोस्ट

व्यक्ति का ये पोस्ट कुछ ही समय में Reddit पर चर्चा का विषय बन गई। एक यूजर ने कहा, “कंपनी से पहले ही लेबल लगा हुआ बॉक्स मंगवा लेना चाहिए, ताकि लैपटॉप आसानी से वापस भेजा जा सके। उन्होंने कहा कि कंपनी का समय या पैसा बचाने के लिए कर्मचारी को खुद अपना समय और मेहनत खर्च करने की जरूरत नहीं है।” वहीं दूसरे ने कहा, “वह अगली बार खुद ऑफिस जाने के बजाय लैपटॉप रिसेप्शन पर छोड़ सकता है, किसी पुराने कलीग से मदद मांग सकता है या कंपनी से डिवाइस वापस भेजने के लिए बॉक्स मंगवा सकता है।”

वहीं, एक और यूजर ने कहा कि, “कई लोग कॉर्पोरेट नौकरी, अच्छी सैलरी और ऑफिस की सुविधाओं वाली जिंदगी को पसंद करते हैं, लेकिन नौकरी जाने के बाद कंपनी के रवैये से उन्हें निराशा होती है”। यूजर ने यह भी कहा कि कुछ कर्मचारियों को नौकरी से निकालने के दौरान उनके साथ खराब व्यवहार किया जाता है और ऐसी स्थिति में उनके लिए सहानुभूति महसूस करना जरूरी नहीं है।