साल भर में 92 लाख का टैक्स दिया, अब 90 लाख की नौकरी भी नहीं मिल रही – Uber इंजीनियर के पोस्ट ने मचाया बवाल

नई दिल्ली। अच्छी सैलरी वाली नौकरी और लाखों रुपये का इनकम टैक्स देने के बाद भी नौकरी जाने का डर खत्म नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Uber में सीनियर इंजीनियर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स दिया था। लेकिन अब पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने के बाद वे नई नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने रेडिट (Reddit) पर 7 अक्टूबर 2026 को शेयर की गई उनकी पोस्ट के मुताबिक, घर में नवजात बच्चा है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं होता है।

नौकरी छूटने का कारण रहा पैटरनिटी लीव

इंजीनियर का कहना है कि वे चार महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity leave) पर थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। घर में नवजात बच्चा है और परिवार की मदद के लिए भी कोई खास सहारा नहीं है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के साथ नई नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे नौकरी खोजने और इंटरव्यू की तैयारी पर पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। नौकरी जाने के बाद घर के खर्च और बच्चे की देखभाल की चिंता भी बढ़ गई है। वह कहते है कि नौकरी जाने के बाद उन्हें ऐसी नई नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसमें सालाना कम से कम 90 लाख रुपये मिलें।

सेवरेंस पे पर टैक्स से नाराज, भारत छोड़ने की कही बात

नौकरी जाने के बाद मिलने वाले पैसे यानी सेवरेंस पे (Severance pay) पर टैक्स लगने से भी इंजीनियर नाराज हैं। उनका कहना है कि नई नौकरी मिलने तक परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें इस पैसे की जरूरत है। ऐसे में टैक्स कटने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इंजीनियर ने कहा कि वे जल्द ही भारत छोड़ देंगे और वापस नहीं आना चाहते।

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी की सुरक्षा, टैक्स और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है।

न्यूज़रूम से वड़ा पाव के ठेले तक | Journalist Couple VadaPav Business | Patrakar Couple VadaPav Wale

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12 साल तक मीडिया में काम किया, लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब जसवीर सिंह जस्सी और पत्नी सुधा शाह की नौकरियाँ चली गईं। आर्थिक तंगी आई, लोगों ने ताने मारे और कई बार लगा कि अब आगे कोई रास्ता नहीं है।
फिर मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर गए और वहाँ पर खाए एक वड़ा पाव ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी।
आज यही कपल नोएडा सेक्टर 19 में अपना वड़ा पाव स्टॉल चलाता है और मेहनत से अपनी नई पहचान बना रहा है।
उनकी कहानी याद दिलाती है कि कोई काम छोटा नहीं होता, अगर आप उसे ईमानदारी और हौसले से करते हैं।
आपके लिए सफलता का असली मतलब क्या है?
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59 की उम्र में करियर ने लिया यू-टर्न! नौकरी छूटने के बाद ये महिला पहुंचीं अंटार्कटिका

59 साल की उम्र में जब मे ली अंटार्कटिका पहुंचीं, तो उनकी नई नौकरी में टेक्नोलॉजी या ऑफिस का काम नहीं, बल्कि फोर्कलिफ्ट, कार्गो और जमा देने वाली ठंड उनका इंतजार कर रही थी। मैकमर्डो रिसर्च स्टेशन पर उन्होंने सामान संभालने का काम शुरू किया। खास बात यह है कि इससे पहले ली ने करीब 30 साल ह्यूलेट-पैकार्ड (HP) जैसी टेक्नोलॉजी कंपनी में काम किया था और उन्हें उम्मीद थी कि वह इसी कंपनी से रिटायर होंगी। उनकी आगे की कहानी बताती है ली के अंटार्कटिका पहुंचने के बाद के अनुभव, वहां के काम और बेहद ठंडे माहौल में जिंदगी कैसे बदली, इसकी कई दिलचस्प बातें भी सामने आती हैं।

लेकिन अचानक नौकरी जाने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। लंबे कॉर्पोरेट करियर के बाद उन्हें नई नौकरी की तलाश करनी पड़ी और इसी दौरान उन्हें अंटार्कटिका में काम करने का मौका मिला। बिल्कुल अलग माहौल में काम करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इस बदलाव को स्वीकार किया और एक नई तरह की जिंदगी का अनुभव किया। उनकी यह कहानी बताती है कि करियर में बदलाव के लिए उम्र हमेशा रुकावट नहीं बनती।

नौकरी जाने के बाद बदली सोच

HP में करीब 30 साल काम करने के बाद जब 59 साल की उम्र में ली की नौकरी चली गई, तो उन्होंने फिर से टेक्नोलॉजी कंपनी में नौकरी तलाशना शुरू किया। उन्होंने दूसरी कंपनियों में आवेदन किया और अपने पुराने प्रोफेशनल संपर्कों से भी मदद ली, लेकिन अनुभव और रेफरल होने के बावजूद उन्हें जल्दी नौकरी नहीं मिली। करीब एक महीने की कोशिश के बाद एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी कि सिर्फ अच्छी सैलरी वाली नौकरी तलाशने के बजाय ऐसा काम क्यों न किया जाए, जिसमें उन्हें सच में दिलचस्पी हो।

अंटार्कटिका से पहले ही था खास लगाव

ली के लिए अंटार्कटिका बिल्कुल अनजान जगह नहीं थी। वह पर्यटक के तौर पर पहले ही दो बार वहां जा चुकी थीं और इस जगह को लेकर उनकी दिलचस्पी बढ़ गई थी। दोस्त की सलाह के बाद उन्होंने सोचना शुरू किया कि अगर अंटार्कटिका उन्हें इतना पसंद है, तो क्यों न वहां घूमने के बजाय काम करने का मौका तलाशा जाए। इसके बाद उन्होंने रिसर्च स्टेशनों पर मिलने वाली नौकरियों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।

सप्लाई टेक्नीशियन की मिली नौकरी

रिसर्च करने के दौरान ली को Amentum में काम करने का मौका मिला। यह कंपनी अमेरिकी अंटार्कटिक कार्यक्रम को कई तरह की सेवाएं देती है। ली ने यहां सप्लाई टेक्नीशियन की नौकरी के लिए आवेदन किया। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया के साथ बैकग्राउंड चेक और शारीरिक जांच से भी गुजरना पड़ा। आखिरकार उनका चयन हो गया। इस नौकरी में सैलरी उनकी पिछली नौकरी के मुकाबले काफी कम थी, लेकिन उनके पास बचत थी और घर का लोन भी पहले ही चुका चुकी थीं, इसलिए उन्हें तुरंत ज्यादा सैलरी वाली नौकरी की जरूरत नहीं थी।

2025 में पहुंचीं मैकमर्डो स्टेशन

ली 2025 में अंटार्कटिका पहुंचीं। उनकी यात्रा ऑकलैंड और क्राइस्टचर्च से होते हुए आगे बढ़ी और फिर उन्होंने बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III विमान से अंटार्कटिका की यात्रा की। मैकमर्डो स्टेशन पहुंचने के बाद उन्होंने IT और कम्युनिकेशन्स वेयरहाउस में काम शुरू किया। यहां उनका काम सामान और सप्लाई से जुड़ा था, जो उनके पुराने कॉर्पोरेट काम से काफी अलग अनुभव था।

काम के साथ मिली नई तरह की जिंदगी

अंटार्कटिका में ली को सिर्फ नई नौकरी ही नहीं, बल्कि बिल्कुल अलग तरह की जिंदगी भी मिली। उन्होंने बताया कि वहां लोग फोन में व्यस्त रहने के बजाय खाने के समय साथ बैठकर बातचीत करते हैं। काम के अलावा उन्होंने आर्ट शो, लाइन डांसिंग, मैराथन और बिंगो जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने DJ के तौर पर भी वॉलंटियर किया और 1980 के दशक के संगीत पर साप्ताहिक शो होस्ट किया। स्टेशन पहुंचने के करीब एक हफ्ते के अंदर ही उन्हें महसूस होने लगा कि वह इस नई जिंदगी में खुद को सहज महसूस कर रही हैं और यहीं रहना चाहती हैं।

अंटार्कटिका में बिताए समय ने ली के लिए सिर्फ करियर का रास्ता नहीं बदला, बल्कि जिंदगी को देखने का उनका नजरिया भी बदल दिया। लंबे समय तक कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने के बाद उन्हें वहां ऐसा माहौल मिला, जहां लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और साथ मिलकर रहते हैं। इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि जिंदगी हमेशा हमारी सोची हुई योजना के मुताबिक नहीं चलती, लेकिन बदलाव आने पर उसके साथ आगे बढ़ना सीखा जा सकता है। ली की कहानी बताती है कि नौकरी छूटना या करियर में बदलाव आना किसी नई शुरुआत का रास्ता भी बन सकता है। उम्र या पुराना करियर किसी को खुद के लिए नई राह चुनने से नहीं रोकता। कभी-कभी जिंदगी में आया अचानक बदलाव ही इंसान को ऐसा अनुभव दे जाता है, जिसकी उसने पहले कभी कल्पना भी नहीं की होती।

अमेरिकी कंपनी ने 5 मिनट की Google Meet में पूरी भारतीय टीम को जॉब से निकाला? 80 कर्मचारियों की नौकरी जाने का दावा

Job loss News: पिछले कुछ समय से अचानक होने वाली छंटनी (Layoffs) के मामले लगातार कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रहे हैं। इसी बीच Reddit पर एक कर्मचारी की पोस्ट चर्चा में है। इसमें कर्मचारी ने दावा किया है कि अमेरिका की एक फाइनेंशियल कंपनी ने महज 5 मिनट की Google Meet कॉल के दौरान अपनी पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने बताया कि 80 कर्मचारियों के लिए एक आम शिफ्ट की तरह शुरू हुआ दिन एक पांच मिनट की कॉल के साथ खत्म हुआ, जिसने सब कुछ बदल दिया।

आरोप है कि फाइनेंशियल कंपनी के लिए काम करने वाली भारतीय कस्टमर सर्विस टीम को उनकी शिफ्ट के दौरान बताया गया कि उनकी नौकरी खत्म की जा रही है। इससे कर्मचारी हैरान और परेशान हो गए कि अब आगे क्या होगा। यह घटना ओरेकल और एडिडास जैसी जानी-मानी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी के बीच हुई है।

कर्मचारी ने Reddit के r/IndianWorkplace फोरम पर अपना अनुभव शेयर किया है। पोस्ट का शीर्षक ‘Laid off over a Google Meet’ था। पोस्ट में कर्मचारी ने बताया कि एक दिन पहले तक वह अमेरिकी बैंक की कस्टमर सपोर्ट टीम का हिस्सा था, लेकिन अचानक पूरी टीम को नौकरी से निकाल दिया गया।

शाम की शिफ्ट के दौरान आया Google Meet का बुलावा

Reddit पोस्ट के मुताबिक, कंपनी ने ऑपरेशनल कारणों का हवाला देते हुए कर्मचारियों को उस दिन घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करने के लिए कहा था। कर्मचारी शाम 6:30 बजे की शिफ्ट में काम कर रहा था। उसके मुताबिक, रात करीब 9:30 बजे अचानक सभी कर्मचारियों को Google Meet पर बुलाया गया। कर्मचारी का दावा है कि मीटिंग में बताया गया कि ‘पूरी भारतीय कस्टमर सर्विस टीम’ को नौकरी से हटा दिया गया है।

’80 कर्मचारी, सभी चले गए… 80 परिवार प्रभावित’

कर्मचारी ने छंटनी के पैमाने को बताते हुए लिखा कि टीम में कुल 80 कर्मचारी थे। सभी की नौकरी एक झटके में चली गई। उसने पोस्ट में कहा कि महज पांच मिनट की कॉल से 80 परिवार प्रभावित हुए हैं। कर्मचारी ने नौकरी जाने के बाद नई नौकरी मिलने को लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि इस घटना ने उसे कॉरपोरेट नौकरियों की अस्थिरता का एहसास कराया है।

कंपनी ने क्या वजह बताई?

पोस्ट पर एक Reddit यूजर ने पूछा कि कंपनी ने इतने बड़े फैसले के पीछे क्या कारण बताया? इसके जवाब में कर्मचारी ने दावा किया कि कंपनी का कहना था कि भारतीय टीम से अपेक्षित आउटपुट नहीं मिल रहा था। हालांकि, कर्मचारी ने इस कारण पर असहमति जताई। उसका आरोप था कि अमेरिकी टीम में भी एट्रिशन और अन्य समस्याएं थीं। जबकि भारतीय कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त मेहनत करते थे।

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने कर्मचारी के प्रति सहानुभूति जताई। एक यूजर ने लिखा, “यह बेहद दुखद है और दिल तोड़ने वाला है।” वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी की छंटनी प्रक्रिया, कर्मचारियों को मिलने वाले सेवरेंस और अचानक नौकरी जाने की स्थिति में सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कॉरपोरेट सेक्टर में अचानक होने वाली छंटनी को लेकर कर्मचारियों के बीच नौकरी की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।

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(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol हिंदी ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इन दावों का समर्थन किया है।)

स्वीडन में अचानक चली गई नौकरी, फिर ज्योति ने उठाया ऐसा कदम, आज हर महीने कमा रही हैं 1 लाख रुपये

विदेश में जाकर करियर और नई पहचान बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। नए माहौल में खुद को ढालने के साथ नौकरी, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक पहचान बनाने की चुनौती भी रहती है। मुंबई की ज्योति वाकचौरे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब वह पति के साथ स्वीडन पहुंचीं। शुरुआत में उन्होंने वहां नौकरी की, लेकिन अचानक नौकरी चले जाने से उनके सामने मुश्किल खड़ी हो गई। इस झटके के बाद उन्होंने पीछे हटने के बजाय खुद के लिए एक नई राह तलाशने का फैसला किया। धीरे-धीरे उन्होंने कंटेंट क्रिएशन शुरू किया और फिर इसी अनुभव को अपने बिजनेस में बदल दिया।

आज उनकी कहानी सोशल मीडिया, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। विदेश में शुरू हुआ यह सफर कैसे एक नई पहचान और कमाई के रास्ते में बदला, यही उनकी कहानी को खास बनाता है।

पति की नौकरी के चलते पहुंचीं स्वीडन

ज्योति 2016 में अपने पति के साथ स्वीडन के गोथेनबर्ग चली गई थीं। उनके पति को वहां नौकरी मिली थी और ज्योति डिपेंडेंट वीजा पर स्वीडन पहुंचीं। नए देश में शुरुआत करना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें वहां अपना करियर और पहचान दोनों नए सिरे से बनानी थी।

अचानक चली गई नौकरी

स्वीडन में रहते हुए ज्योति ने नौकरी शुरू की, लेकिन एक दिन उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से निकाल दिया गया। उनके लिए यह अनुभव काफी परेशान करने वाला था। उन्होंने इस घटना को अचानक, चौंकाने वाला और अनुचित बताया। हालांकि, उन्होंने इस झटके को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। धीरे-धीरे उन्होंने इसी मुश्किल को अपने लिए नई राह बनाने की प्रेरणा में बदल दिया।

YouTube से शुरू हुआ नया सफर

नौकरी के साथ ज्योति ने कंटेंट बनाना शुरू किया। उन्होंने 2018 में अपना YouTube चैनल लॉन्च किया। शुरुआत भले ही साइड हसल के तौर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उनकी ऑनलाइन पहचान बढ़ने लगी। कंटेंट के जरिए उन्हें स्वीडन में नए लोगों से जुड़ने और अपना नेटवर्क बनाने का मौका मिला। यही नेटवर्क आगे चलकर उनके बिजनेस के लिए भी काफी काम आया।

महामारी में शुरू की अपनी कंपनी

साल 2020 में जब कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में कारोबार प्रभावित हो रहे थे, उसी दौरान ज्योति ने अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग कंपनी शुरू कर दी। शुरुआत में उन्होंने छोटे स्थानीय कारोबारों के साथ काम किया। समय के साथ उनका नेटवर्क बढ़ा और उन्हें स्वीडन के स्थानीय ग्राहकों से भी काम मिलने लगा।

अब हर महीने करीब ₹1 लाख की कमाई

कंटेंट क्रिएशन और सोशल मीडिया मार्केटिंग के सफर ने ज्योति को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाया। मौजूदा समय में उनके बिजनेस से औसतन करीब 1 लाख रुपये प्रति महीने की कमाई होने की बात सामने आई है। उनकी कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े ऑफिस या भारी निवेश के बिना अपना काम खड़ा किया।

कम खर्च में चल रहा है बिजनेस

ज्योति ने अपने बिजनेस के खर्चों को काफी सीमित रखा है। उनके मुताबिक, हर महीने करीब 15 हजार रुपये मुख्य रूप से ऐप्स और वीडियो एडिटिंग जैसे सॉफ्टवेयर पर खर्च होते हैं। वह ज्यादातर काम घर से करती हैं, इसलिए ऑफिस का किराया और उससे जुड़े दूसरे खर्च नहीं हैं। कम ऑपरेशनल कॉस्ट उनके बिजनेस को चलाने में मदद करती है।

भारत में निवेश, अब स्वीडन में भी कदम

ज्योति ने बताया कि उनके ज्यादातर निवेश अभी भारत में हैं और खासतौर पर प्रॉपर्टी में निवेश किया गया है। हालांकि, अब उन्होंने स्वीडन में भी निवेश करना शुरू कर दिया है। यानी विदेश में रहते हुए भी उन्होंने भारत से अपना आर्थिक जुड़ाव बनाए रखा है और धीरे-धीरे स्वीडन में भी अपनी वित्तीय मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

स्वीडन ने बदली उनकी सोच और जिंदगी

ज्योति के मुताबिक, स्वीडन में रहने का असर सिर्फ उनके करियर पर नहीं पड़ा, बल्कि उनके व्यक्तित्व में भी बदलाव आया। वह खुद को अब पहले से ज्यादा शांत, दयालु, समय की पाबंद और आत्मनिर्भर मानती हैं। लंबे समय तक स्वीडन में रहने के बाद वह वहां के जीवन और संस्कृति के साथ काफी सहज हो चुकी हैं।

बेटी का जन्म बनी सबसे खूबसूरत याद

स्वीडन में बिताए समय की उनकी सबसे खास यादों में बेटी का जन्म शामिल है। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी के बेहद खूबसूरत और यादगार पलों में से एक बताया। यह व्यक्तिगत अनुभव उनके लिए स्वीडन को सिर्फ एक रहने की जगह से कहीं ज्यादा खास बनाता है।

नौकरी छूटने से मिली नई पहचान

ज्योति की कहानी इस बात की मिसाल है कि जिंदगी में आया कोई बड़ा झटका हमेशा अंत नहीं होता। नौकरी जाने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय कंटेंट क्रिएशन और उद्यमिता की राह चुनी। पति की नौकरी के लिए विदेश पहुंची ज्योति ने धीरे-धीरे वहां अपनी खुद की पहचान बनाई। आज उनका सफर नौकरी छूटने से लेकर अपना बिजनेस खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनने तक पहुंच चुका है।

IT में 12 साल काम करने के बाद नौकरी से निकाला गया तो गांव लौट आया ये शख्स! फिर बताया अपना एक्सपीरियंस

एक ही कंपनी में दस साल से ज्यादा समय बिताने के बाद नौकरी छूटने पर ज्यादातर लोग भविष्य को लेकर परेशान हो जाते हैं। लेकिन नौकरी से निकाले जाने पर एक व्यक्ति के रिएक्शन ने ऑनलाइन कई लोगों का ध्यान खींचा है। दूसरी IT नौकरी खोजने के बजाय, उसने अपने गांव लौटने और एक नई शुरुआत करने का फैसला किया।

यह कहानी वनेश माली ने X पर शेयर की। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त ने ऐसी स्थिति के लिए बहुत पहले ही तैयारी कर ली थी और उनका मानना ​​है कि हर किसी के पास एक बैकअप प्लान होना चाहिए। अपना अनुभव शेयर करते हुए माली ने लिखा, “मेरा एक दोस्त 12 साल से ज्यादा समय तक एक बड़ी IT कंपनी में काम करता था। वह अपने काम में बहुत माहिर था। कुछ दिन पहले कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया। कई लोगों की नौकरी चली गई।”

लेकिन मेरा दोस्त, जिसकी नौकरी चली गई थी, दुखी नहीं था। उसने कहा, ‘मैं इसके लिए तैयार था। उसने तय किया कि अब वह IT में काम नहीं करेगा। IT की दुनिया बहुत तेजी से बदलती है।” वह अपने गांव वापस चला गया। वहां उसकी पहले से ही एक छोटी सी दुकान थी, जो किराए पर दी हुई थी। अब, वह उसे वापस ले लेगा और कपड़ों की अपनी दुकान खोलेगा। उसके पास परिवार की जमीन भी है और वह वहां बकरी पालन का फार्म शुरू करने की योजना बना रहा है।”

उसने मुझसे कहा, ‘हमारे पास हमेशा एक ‘प्लान B’ तैयार रहना चाहिए। जिंदगी में बहुत सारे बदलाव आते रहते हैं। अब वह गांव में अपनी नई जिंदगी को लेकर खुश और उत्साहित है। इस पोस्ट ने कई यूजर्स का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अचानक आने वाली मुश्किलों के लिए पहले से तैयारी करना कितना जरूरी है।

एक यूजर ने कहा, “लेकिन ‘प्लान B’ के लिए हमारे पास काफी बचत होनी चाहिए और हम अपनी 20s की शुरुआत में होने चाहिए। जब ‘प्लान A’ ही ठीक से काम नहीं कर रहा हो, तो ‘प्लान B’ के बारे में कैसे सोचें। एक और व्यक्ति ने लिखा, “जिन लोगों ने ऐसी जिंदगी की योजना बनाई है, वे अब चैन की नींद सो सकेंगे।”

IT हमें सिर्फ़ ज़िंदगी जीना सिखाता है। अगर कोई नया डिप्लॉयमेंट या सेटअप फ़ेल हो जाता है, तो हमेशा बैकअप होने से मदद मिलती है। सिर्फ़ बैकअप ही प्रोडक्शन को…। एक और यूज़र ने कहा, “वाह, यही तो पॉज़िटिविटी है, यही सही नज़रिया है। मैं उसकी ज़बरदस्त तरक्की की कामना करता हूं, और इस पोस्ट ने मुझे भी अपने ‘प्लान B’ के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया।”