साल भर में 92 लाख का टैक्स दिया, अब 90 लाख की नौकरी भी नहीं मिल रही – Uber इंजीनियर के पोस्ट ने मचाया बवाल

नई दिल्ली। अच्छी सैलरी वाली नौकरी और लाखों रुपये का इनकम टैक्स देने के बाद भी नौकरी जाने का डर खत्म नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Uber में सीनियर इंजीनियर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स दिया था। लेकिन अब पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने के बाद वे नई नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने रेडिट (Reddit) पर 7 अक्टूबर 2026 को शेयर की गई उनकी पोस्ट के मुताबिक, घर में नवजात बच्चा है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं होता है।

नौकरी छूटने का कारण रहा पैटरनिटी लीव

इंजीनियर का कहना है कि वे चार महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity leave) पर थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। घर में नवजात बच्चा है और परिवार की मदद के लिए भी कोई खास सहारा नहीं है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के साथ नई नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे नौकरी खोजने और इंटरव्यू की तैयारी पर पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। नौकरी जाने के बाद घर के खर्च और बच्चे की देखभाल की चिंता भी बढ़ गई है। वह कहते है कि नौकरी जाने के बाद उन्हें ऐसी नई नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसमें सालाना कम से कम 90 लाख रुपये मिलें।

सेवरेंस पे पर टैक्स से नाराज, भारत छोड़ने की कही बात

नौकरी जाने के बाद मिलने वाले पैसे यानी सेवरेंस पे (Severance pay) पर टैक्स लगने से भी इंजीनियर नाराज हैं। उनका कहना है कि नई नौकरी मिलने तक परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें इस पैसे की जरूरत है। ऐसे में टैक्स कटने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इंजीनियर ने कहा कि वे जल्द ही भारत छोड़ देंगे और वापस नहीं आना चाहते।

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी की सुरक्षा, टैक्स और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है।

7 दिन के लिए अमेरिका, 5-स्टार होटल और शानदार Waterfront View! Salesforce कर्मचारी ने दिखाई अपनी ‘ऑफिस लाइफ’

आमतौर पर कॉरपोरेट नौकरी का नाम सुनते ही लंबे काम के घंटे, मीटिंग्स, डेडलाइन और तनाव जैसी तस्वीर सामने आती है। लेकिन Salesforce की एक कर्मचारी ने अपनी नौकरी का ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने कॉरपोरेट लाइफ के दूसरे पहलू पर चर्चा छेड़ दी है। Salesforce में Design Lead के तौर पर काम करने वाली अनुष्का एस ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया कि कंपनी के एक सप्ताह लंबे ऑफसाइट के लिए उन्हें हैदराबाद से अमेरिका के Seattle ले जाया गया। इस दौरान उनके ठहरने का इंतजाम एक पांच सितारा होटल में किया गया, जहां से खूबसूरत waterfront का नजारा दिखाई देता था।

हैदराबाद से Seattle तक कंपनी का सफर

अनुष्का पिछले करीब एक साल से हैदराबाद में रह रही हैं। Massachusetts College of Art and Design से पढ़ाई करने वाली अनुष्का ने वीडियो में अपने करियर को मेहनत और शिक्षा से जोड़ते हुए युवाओं को पढ़ाई और अपने करियर पर ध्यान देने की सलाह दी। वीडियो में वह कॉरपोरेट नौकरी को लेकर होने वाली आम टिप्पणियों का जिक्र करती हैं। उनका कहना था कि अगर कोई सोचता है कि कॉरपोरेट में आने के बाद हासिल ही क्या हुआ, तो Salesforce का ये ऑफसाइट इसका एक अलग जवाब है।

7 दिन, 5-स्टार होटल और सामने खूबसूरत नजारा

अनुष्का ने बताया कि वह Seattle में सात दिनों तक एक पांच सितारा होटल में रुकीं। इसके बाद उन्होंने कैमरा घुमाकर होटल से दिखाई देने वाला खूबसूरत waterfront view भी दिखाया। उनके लिए यह यात्रा सिर्फ ऑफिस का काम नहीं थी, बल्कि बड़ी टेक कंपनी में काम करने के साथ मिलने वाले अनुभव और सुविधाओं की एक झलक भी थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में युवा दर्शकों से कहा कि पढ़ाई पर ध्यान दीजिए, क्योंकि टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों को अच्छी सुविधाएं देना जानती हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं बंट गईं। कुछ लोगों ने इसे कॉरपोरेट नौकरी के फायदों की अच्छी मिसाल बताया, जबकि कुछ ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी की सुविधाओं को इस तरह पेश करना मेहनत या “mazdoori” को ग्लोरिफाई करना है। एक यूजर ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी कंपनी भी उन्हें दुनियाभर में घूमने का मौका देती है। वहीं, दूसरे यूजर ने Salesforce के वर्क कल्चर और कर्मचारी सुविधाओं की तारीफ की। एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि सोशल मीडिया पर मेहनत-मजदूरी को ग्लोरिफाई क्यों किया जा रहा है।

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कॉरपोरेट जिंदगी सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं

अनुष्का का वीडियो इस बात की ओर ध्यान खींचता है कि बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी का अनुभव सिर्फ सैलरी और काम के घंटों तक सीमित नहीं होता। कुछ भूमिकाओं में कर्मचारियों को इंटरनेशनल ट्रैवल, ऑफसाइट, बेहतर होटल और दूसरे perks भी मिल सकते हैं। हालांकि, कॉरपोरेट जीवन का अनुभव हर कर्मचारी के लिए एक जैसा नहीं होता। किसी के लिए ऐसी यात्राएं नौकरी का आकर्षक हिस्सा हो सकती हैं, तो किसी के लिए काम का दबाव और जिम्मेदारियां ज्यादा महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं।

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क्या हर सैलरी हाइक के लिए नौकरी बदलना सही है? निहार पाटिल ने बताया दूसरा रास्ता

पुणे के निहार पाटिल की जॉब स्विचिंग को लेकर दी गई सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि करियर में एक ऐसा पड़ाव आता है, जब हर बार सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं होता। खासकर जब नई नौकरी में मिलने वाला हाइक महज 20-30 हजार रुपये का हो, तो टैक्स और दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं रह जाती।निहार के मुताबिक, नौकरी चुनते समय केवल पैकेज पर ध्यान देने के बजाय अच्छा मैनेजर, बेहतर प्रोजेक्ट, जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस भी देखना चाहिए।

उनका मानना है कि एक स्थिर नौकरी के साथ अपने खाली समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, कुछ नया शुरू करने या अतिरिक्त इनकम सोर्स बनाने में किया जा सकता है। इसी सोच को लेकर उनकी बात पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

1.5 से 2 लाख की सैलरी के बाद बदलें नजरिया

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में निहार ने कहा कि भारत में जब किसी की मासिक सैलरी करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, तो नौकरी बदलने को लेकर सोच थोड़ी अलग होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस स्तर पर ऐसी कंपनियों और भूमिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जहां बहुत बड़ा सैलरी जंप मिल सके। ऐसे में अगर नई नौकरी से सिर्फ 20-30 हजार रुपये ज्यादा मिल रहे हैं, तो टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला वास्तविक अंतर काफी कम महसूस हो सकता है।

ज्यादा CTC का मतलब ज्यादा रिस्क भी?

निहार ने नौकरी बदलने से जुड़े एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्यादा सैलरी के साथ CTC भी बढ़ता है और कंपनियों में होने वाली री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी के दौरान यह एक जोखिम बन सकता है। ऐसे में अगर मौजूदा कंपनी में काम अच्छा चल रहा है, मैनेजर सपोर्टिव है और करियर स्थिर है, तो केवल छोटे सैलरी हाइक के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है।

9 से 5 के बाद बनाएं अपना ‘5 से 9’

निहार की सलाह का सबसे दिलचस्प हिस्सा नौकरी के बाहर की जिंदगी को लेकर है। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो उसके बाद के समय को अपनी ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। नई स्किल सीखना, अपना कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

उनके मुताबिक, करियर का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी से ज्यादा पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी जिंदगी बनाना होना चाहिए, जहां आपकी पूरी आर्थिक सुरक्षा सिर्फ एक नौकरी पर निर्भर न हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस

निहार की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने उनकी सोच को सही बताते हुए कहा कि एक स्तर के बाद फोकस मल्टीपल इनकम सोर्स, बेहतर लाइफस्टाइल और उद्देश्यपूर्ण जिंदगी पर होना चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने कॉरपोरेट वर्क कल्चर की हकीकत सामने रखी। एक यूजर ने कहा कि इतनी ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर दूसरी चीजों के लिए समय ही नहीं बचता, क्योंकि कंपनियां उनसे दिन-रात उपलब्ध रहने की उम्मीद करती हैं।

एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई कंपनियों में 9 से 5 का मतलब अब 9 से 9 हो चुका है। ऐसे में नौकरी के बाद किसी दूसरी चीज पर ध्यान देना आसान नहीं।

सिर्फ नौकरी या पूरी जिंदगी? असली सवाल यही है

एक यूजर ने इस बहस में संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि 5 से 9 को बेहतर बनाने के साथ-साथ 9 से 5 में भी संतुलन जरूरी है, क्योंकि अगर नौकरी ही नीरस और थकाऊ हो जाए तो बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है।

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