तस्करों को पकड़ने के लिए SUV की छत पर लटक गया पुलिसकर्मी, 40 KM तक दौड़ी गाड़ी, VIDEO वायरल

तमिलनाडु के कोयंबटूर में सड़क पर उस वक्त लोगों की नजरें थम गईं, जब एक तेज रफ्तार SUV के ऊपर एक पुलिसकर्मी नजर आया। आमतौर पर ट्रैफिक और वाहन जांच से जुड़ी ड्यूटी कुछ मिनटों में पूरी हो जाती है, लेकिन यहां हालात अचानक बदल गए। भागती गाड़ी और उसके ऊपर खुद को संभालता पुलिसकर्मी देखकर सड़क से गुजर रहे लोग भी हैरान रह गए। यह पूरा दृश्य किसी फिल्म के एक्शन सीन जैसा नजर आया और देखते ही देखते इसकी तस्वीरें और वीडियो लोगों के मोबाइल कैमरों में कैद होने लगीं। तेज रफ्तार वाहन लगातार आगे बढ़ता रहा, जबकि पुलिसकर्मी ने अपनी पकड़ बनाए रखी।

पीछे पुलिस की गाड़ियां भी इस पूरे घटनाक्रम का पीछा कर रही थीं। सड़क पर मौजूद लोगों के लिए यह नजारा जितना चौंकाने वाला था, पुलिस टीम के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण। आखिर SUV इतनी तेजी से क्यों भाग रही थी और पुलिसकर्मी उसकी छत तक कैसे पहुंचा, यही सवाल इस घटना को खास बना रहा है।

सुबह-सुबह शुरू हुआ पूरा ड्रामा

घटना की शुरुआत सुबह करीब 5:45 बजे हुई। पुलिस को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों की एक खेप बेंगलुरु से कोयंबटूर लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर एक टीम ने कर्नाटक नंबर वाली सफेद SUV को वेल्लानाइपट्टी के पास देखा और कोविलपालयम पुलिस को इसकी जानकारी दी।

इसके बाद सब-इंस्पेक्टर वी. विग्नेश और हेड कॉन्स्टेबल वेलुमुरुगन ने कैकोलापलयम के पास वाहन को रोकने की कोशिश की।

पुलिसकर्मी का हाथ फंसा, फिर अचानक भागी गाड़ी

पुलिस के अनुसार, विग्नेश SUV की खिड़की से अंदर बैठे लोगों से पूछताछ कर रहे थे। तभी चालक ने अचानक शीशा ऊपर कर दिया, जिससे अधिकारी का हाथ फंस गया। इसके बाद SUV को पीछे किया गया, मानो पुलिस की घेराबंदी तोड़ने की कोशिश हो रही हो। इसी दौरान वेलुमुरुगन वाहन के किनारे मौजूद थे। उन्होंने तेजी से SUV की छत पर चढ़कर रूफ रेल पकड़ ली। वह चालक को रुकने का इशारा करते रहे और छत पर हाथ मारते रहे, लेकिन ड्राइवर ने गाड़ी रोकने के बजाय रफ्तार बढ़ा दी। अब पुलिसकर्मी चलती SUV की छत पर थे।

100 KM प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी SUV

SUV कोयंबटूर के कई व्यस्त इलाकों से होकर आगे बढ़ी। पुलिस के मुताबिक, वाहन कलापट्टी, नेहरू नगर जंक्शन और एयरपोर्ट जंक्शन से होते हुए अविनाशी रोड तक पहुंचा और फिर तिरुप्पुर की ओर बढ़ गया। पीछा कर रही पुलिस टीमों के लिए सबसे बड़ी चुनौती छत पर लटके वेलुमुरुगन की सुरक्षा थी। एक अधिकारी निजी कार से पीछा कर रहे थे, जबकि दूसरी टीम पुलिस वाहन से SUV के पीछे लगी थी।

सड़क पर चलते लोगों ने बना लिया VIDEO

तेज रफ्तार SUV की छत पर पुलिसकर्मी को पकड़े देखकर सड़क से गुजर रहे कई लोग हैरान रह गए। कुछ वाहन चालकों ने मोबाइल से इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया। बाद में यही फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आया और घटना तेजी से चर्चा में आ गई।

NHAI को भी सूचना दी गई, जिसके बाद एक एंबुलेंस को पीछा कर रही टीम के साथ लगाया गया। एंबुलेंस कर्मियों ने भी वेलुमुरुगन का वीडियो रिकॉर्ड किया।

FASTag ने भी नहीं रोकी भागती SUV

पुलिस ने SUV को रोकने के लिए कनीयूर टोल गेट को भी अलर्ट किया था। हालांकि, यहां भी वाहन रुकने से बच गया। SUV का FASTag सक्रिय होते ही बैरियर खुल गया और वह बिना रुके आगे निकल गई।

इसके बाद कोयंबटूर और तिरुप्पुर पुलिस टीमों ने आपस में समन्वय कर आगे रास्ता रोकने की योजना बनाई।

40 किलोमीटर बाद खत्म हुआ पीछा

आखिरकार अविनाशी टीम की मदद से पुलिस ने तिरुप्पुर जिले के मंगलम जंक्शन के पास SUV को रोक लिया। वाहन में सवार तीनों संदिग्ध गाड़ी छोड़कर पैदल भागने लगे, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपियों की पहचान राजस्थान निवासी बाबू धारा, ए. राजेश और एस. सुरेश के रूप में की है। पुलिस के अनुसार, भागने के दौरान दो आरोपियों को हाथ में चोट लगी और फ्रैक्चर भी हुआ।

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क्या हर सैलरी हाइक के लिए नौकरी बदलना सही है? निहार पाटिल ने बताया दूसरा रास्ता

पुणे के निहार पाटिल की जॉब स्विचिंग को लेकर दी गई सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि करियर में एक ऐसा पड़ाव आता है, जब हर बार सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं होता। खासकर जब नई नौकरी में मिलने वाला हाइक महज 20-30 हजार रुपये का हो, तो टैक्स और दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं रह जाती।निहार के मुताबिक, नौकरी चुनते समय केवल पैकेज पर ध्यान देने के बजाय अच्छा मैनेजर, बेहतर प्रोजेक्ट, जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस भी देखना चाहिए।

उनका मानना है कि एक स्थिर नौकरी के साथ अपने खाली समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, कुछ नया शुरू करने या अतिरिक्त इनकम सोर्स बनाने में किया जा सकता है। इसी सोच को लेकर उनकी बात पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

1.5 से 2 लाख की सैलरी के बाद बदलें नजरिया

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में निहार ने कहा कि भारत में जब किसी की मासिक सैलरी करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, तो नौकरी बदलने को लेकर सोच थोड़ी अलग होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस स्तर पर ऐसी कंपनियों और भूमिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जहां बहुत बड़ा सैलरी जंप मिल सके। ऐसे में अगर नई नौकरी से सिर्फ 20-30 हजार रुपये ज्यादा मिल रहे हैं, तो टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला वास्तविक अंतर काफी कम महसूस हो सकता है।

ज्यादा CTC का मतलब ज्यादा रिस्क भी?

निहार ने नौकरी बदलने से जुड़े एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्यादा सैलरी के साथ CTC भी बढ़ता है और कंपनियों में होने वाली री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी के दौरान यह एक जोखिम बन सकता है। ऐसे में अगर मौजूदा कंपनी में काम अच्छा चल रहा है, मैनेजर सपोर्टिव है और करियर स्थिर है, तो केवल छोटे सैलरी हाइक के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है।

9 से 5 के बाद बनाएं अपना ‘5 से 9’

निहार की सलाह का सबसे दिलचस्प हिस्सा नौकरी के बाहर की जिंदगी को लेकर है। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो उसके बाद के समय को अपनी ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। नई स्किल सीखना, अपना कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

उनके मुताबिक, करियर का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी से ज्यादा पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी जिंदगी बनाना होना चाहिए, जहां आपकी पूरी आर्थिक सुरक्षा सिर्फ एक नौकरी पर निर्भर न हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस

निहार की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने उनकी सोच को सही बताते हुए कहा कि एक स्तर के बाद फोकस मल्टीपल इनकम सोर्स, बेहतर लाइफस्टाइल और उद्देश्यपूर्ण जिंदगी पर होना चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने कॉरपोरेट वर्क कल्चर की हकीकत सामने रखी। एक यूजर ने कहा कि इतनी ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर दूसरी चीजों के लिए समय ही नहीं बचता, क्योंकि कंपनियां उनसे दिन-रात उपलब्ध रहने की उम्मीद करती हैं।

एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई कंपनियों में 9 से 5 का मतलब अब 9 से 9 हो चुका है। ऐसे में नौकरी के बाद किसी दूसरी चीज पर ध्यान देना आसान नहीं।

सिर्फ नौकरी या पूरी जिंदगी? असली सवाल यही है

एक यूजर ने इस बहस में संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि 5 से 9 को बेहतर बनाने के साथ-साथ 9 से 5 में भी संतुलन जरूरी है, क्योंकि अगर नौकरी ही नीरस और थकाऊ हो जाए तो बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है।

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H-1B Visa News: नौकरी गई तो तुरंत छोड़ना होगा अमेरिका! नहीं मिलेगी 60-दिनों की मोहलत! इस कारण मची खलबली

H-1B Visa News: अमेरिका में नौकरी गंवाने के बाद तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि अमेरिकी सरकार वीजा को लेकर 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को समाप्त करने पर विचार कर रही है। यह वह समय है, जिसके भीतर नौकरी जाने के बाद अमेरिका में रहकर नई नौकरी खोजने की सहूलियत मिलती है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव DHS (डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी) ने दिया है और फिलहाल व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट (OMB) इस पर विचार कर रहा है। अभी इस पर कोई फैसला नहीं है और प्रस्ताव की पूरी जानकारी सार्वजनिक भी नहीं हुई है। हालांकि अगर यह लागू होती है तो नौकरी जाने के बाद विदेशी एंप्लॉयीज के पास नई नौकरी खोजने या अपने इमिग्रेशन स्टेटस को बनाए रखने के लिए काफी कम समय मिल सकता है।

क्या है 60-दिनों का ग्रेस पीरियड

60-दिनों के ग्रेस पीरियड की सुविधा 2017 में मिलनी शुरू हुई थी ताकि कुछ विदेशी एंप्लॉयीज को अचानक नौकरी चले जाने की स्थिति में थोड़ा समय मिल सके। मौजूदा नियमों के अनुसार एलिजिबल वर्कर्स नौकरी खत्म होने के बाद आम तौर पर लगातार 60 दिनों तक या फिर वीजा पीरियड, जो भी पहले हो, तक अमेरिका में रह सकते हैं। इस दौरान वे नई नौकरी तलाश सकते हैं, नए एंप्लॉयर के साथ नौकरी हासिल कर सकते हैं, अपना इमिग्रेशन स्टेटस बदलने की कोशिश कर सकते हैं और अमेरिका में कानूनी रूप से रहने के लिए दूसरे विकल्प तलाश सकते हैं। ग्रेस पीरियड के इस नियम से अमेरिका में पहले से मौजूद फॉरेन वर्कर्स को नई नौकरी देने में एंप्लॉयर्स को भी सुविधा मिलती है।

भारतीयों पर अधिक असर क्यों?

अभी ग्रेस पीरियड हटाने की बात सिर्फ प्रस्ताव में है लेकिन अगर यह लागू होता है तो भारतीय प्रोफेशनल्स पर इसका गंभीर असर हो सकता है क्योंकि एच-1बी वीजा पर अमेरिका में काम करने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है। USCIS (यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज) के मुताबिक वित्त वर्ष 2024 में जितनी एच-1बी याचिका को मंजूरी दी गई थी, उसमें से करीब 71% तो भारत में जन्मे लोगों के थे। अमेरिका में 52 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग हैं। ऐसे में एंप्लॉयमेंट-बेस्ड इमिग्रेशन रूल्स में बदलाव का असर बड़ी संख्या में भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, खासतौर पर टेक्नोलॉजी जैसी इंडस्ट्री में, जहां जॉब स्विचिंग और लेऑफ होते रहते हैं।

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60% सैलरी हाइक के ऑफर पर जॉब बदलने में इस शख्स ने की ऐसी गलती कि अब पछता रहा! Job स्विच करते वक्त आप भी रखें ये ख्याल

आज के अनिश्चित जॉब मार्केट में जब भी किसी को बड़ी सैलरी हाइक का ऑफर मिलता है तो वह बिना ज्यादा सोचे-समझे तुरंत कंपनी बदल लेता है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ भारी-भरकम पैकेज देखकर नौकरी बदलना हमेशा सही होता है? बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल के सोशल मीडिया पोस्ट ने इस विषय पर इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है। सनी कुमार नाम के एक शख्स ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। ये काफी वायरल हो रहा है। उन्होंने अपने एक दोस्त की आपबीती सुनाते हुए दावा किया है कि आज के दौर में किसी छोटी कंपनी में ज्यादा सैलरी पाने से बेहतर है कि आप किसी बड़ी कंपनी में थोड़ी कम सैलरी पर काम करें। आइए जानते हैं कि उनके दोस्त ने 60% हाइक के चक्कर में क्या गलती की और नौकरी बदलते समय आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

60% हाइक का ऑफर और फिर लग गया बड़ा झटका

हमारी सहयोगी वेबसाइट न्यूज 18 ने इस वायरल वीडियो पर डिटेल्ड रिपोर्ट की है। इसके मुताबिक सनी कुमार ने वीडियो में बताया कि उनका एक दोस्त पुणे में मास्टरकार्ड जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता था। वहां उसकी सैलरी अच्छी थी, वर्क प्रोफाइल पूरी तरह स्टेबल था और वह अपने करियर में काफी अच्छा कर रहा था। इसी बीच उसे एक कंसल्टेंसी फर्म से 60 फीसदी सैलरी हाइक का बड़ा ऑफर मिला। इतने बड़े पैकेज के लालच में आकर उसने मास्टरकार्ड की स्टेबल नौकरी छोड़ दी और नई कंपनी जॉइन कर ली।

6 महीने में ही पलट गई बाजी

सनी के मुताबिक यह फैसला उनके दोस्त के लिए सही साबित नहीं हुआ। नई कंसल्टेंसी कंपनी को जॉइन किए हुए अभी महज छह महीने ही हुए थे कि कंपनी के हाथ से वो प्रोजेक्ट ही फिसल गया जिसके लिए उनके दोस्त को हायर किया गया था। इसके तुरंत बाद कंपनी ने उसके दोस्त से कहा कि या तो वह खुद इस्तीफा दे दे या फिर उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।

आईटी सेक्टर में अस्थिरता: सनी कुमार की सलाह

इस घटना का उदाहरण देते हुए सनी कुमार ने प्रोफेशनल्स को सलाह दी है कि वे सिर्फ बड़ा पे-चेक देखकर नौकरी बदलने से पहले दो बार जरूर सोचें। उन्होंने वीडियो में कहा कि अगर आप एक अच्छी और स्टेबल कंपनी में हैं, जहां आपकी सैलरी अच्छी है तो मेरा सुझाव यही होगा कि भले ही आपको 60-70% या 100% तक की हाइक भी क्यों न मिल रही हो, कम से कम अगले 6 महीने से एक साल तक जॉब स्विच न करें। इन दिनों आईटी सेक्टर काफी वोलटाइल यानी अस्थिर है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

सनी कुमार का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इस पर नौकरीपेशा लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने सनी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि जॉब सिक्योरिटी जरूरी है लेकिन मेट्रो शहरों की हकीकत भी देखनी होगी। यूजर ने लिखा कि कम सैलरी में मेट्रो शहर के कमरे का किराया और राशन का खर्च उठाना मुश्किल होता है। इसलिए किसी के बहकावे में आने के बजाय अपना फैसला खुद लें। मास्टरकार्ड अच्छी कंपनी है और हमें समझना चाहिए कि हर बार बात सिर्फ हाइक की नहीं, स्टेबिलिटी की होती है।

एक दूसरे यूजर ने कुमार के विचार का समर्थन करते हुए लिखा कि मैं हमेशा सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जॉब बदलूं तो एक बड़ी कंपनी से दूसरी बड़ी कंपनी में ही जाऊं। मैं किसी छोटी कंपनी में नौकरी खोने का रिस्क और उसका रोज का तनाव नहीं झेल सकता।

दूसरा पक्ष: बड़ी कंपनियां भी नहीं हैं लेऑफ से सुरक्षित

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सनी के इस तर्क का विरोध किया कि बड़ी कंपनियां पूरी तरह सुरक्षित होती हैं। उन्होंने इसके लिए उदाहरण भी दिए। एक यूजर ने कमेंट किया कि कोई भी कंपनी सुरक्षित नहीं है।। मुझे बीती 15 जून को ही HSBC से लेऑफ (नौकरी से निकालना) कर दिया गया। दूसरे यूजर ने लिखा कि क्या गारंटी है कि मास्टरकार्ड से भी उसे नहीं निकाला जाता… आजकल बड़ी कंपनियां भी बहुत ज्यादा रीस्ट्रक्चरिंग कर रही हैं। एक तीसरे शख्स ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘निकाले तो आप बड़ी कंपनी से भी जा सकते हैं और छोटी से भी। अंतर बस इतना है कि छोटी कंपनी ने कम से कम वहां रहने के दौरान आपको 60% ज्यादा पैसे तो दिए।’

जॉब स्विच करते वक्त केवल कंपनी का साइज न देखें, इन बातों का रखें ख्याल

बहस के बीच एक यूजर ने बहुत ही काम की सलाह दी कि फैसला सिर्फ कंपनी के छोटे या बड़े होने के आधार पर नहीं होना चाहिए बल्कि आज के दौर में कुछ अन्य महत्वपूर्ण चीजों का एनालिसिस करना जरूरी है:

SaaS कंपनियों से बचें: यूजर के मुताबिक इन दिनों SaaS (सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस) कंपनियों में जाने से बचना चाहिए। नौकरी बदलने से पहले कंपनी के ग्लोबल हेडकाउंट और भारत में उनके कर्मचारियों की संख्या की जांच करें। कंपनी का कुल रेवेन्यू कितना है और उसका नेट प्रॉफिट क्या है, इसकी जानकारी जरूर जुटाएं। कंपनी के भविष्य के प्लान क्या हैं और वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कितना निवेश कर रहे हैं, इन सभी पहलुओं को चेक करने के बाद ही कोई फैसला लें।

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