Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो HRA कितना बढ़ेगा? समझिए हर पे-लेवल का पूरा हिसाब

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर करीब 50-55 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी है। अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो उसके साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी बढ़ सकता है, क्योंकि इसकी गणना बेसिक पे के आधार पर होती है।

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत HRA शहर की कैटेगरी के हिसाब से मिलता है। X कैटेगरी शहरों में सबसे ज्यादा HRA मिलता है। वहीं, Y और Z कैटेगरी में यह क्रमश: कम होता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के तहत अंतिम HRA कितना होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

HRA कैसे बढ़ सकता है?

फिलहाल HRA की मौजूदा दरें इस तरह हैं।

  • X शहर: 30%
  • Y शहर: 20%
  • Z शहर: 10%

नीचे की गणना 2x, 2.5x और 3x फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर आधारित है। यह सिर्फ संभावित हिसाब है, अंतिम फैसला सरकार करेगी।

chart ggks

लेवल-4 कर्मचारी का अनुमानित HRA

मान लीजिए किसी लेवल-4 कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर के बाद ₹51,000 हो जाती है। ऐसे में HRA का अनुमान इस तरह बनता है।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹15,300
Y (20%)₹10,200
Z (10%)₹5,100

अगर यही कर्मचारी 2.5 फिटमेंट फैक्टर के दायरे में आता है और उसकी बेसिक पे ₹63,750 हो जाती है, तो HRA भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹19,125
Y (20%)₹12,750
Z (10%)₹6,375

यानी सिर्फ 2.0 से 2.5 फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर ही X शहर में HRA करीब ₹3,825, Y शहर में ₹2,550 और Z शहर में ₹1,275 बढ़ सकता है।

HRA बढ़ने का सीधा मतलब क्या है?

कई कर्मचारी सिर्फ बेसिक सैलरी पर ध्यान देते हैं। लेकिन HRA बढ़ने का असर हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी पर भी पड़ता है। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो उसी के साथ HRA की रकम भी ऊपर चली जाती है।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर सीधे HRA तय नहीं करता। यह सिर्फ बेसिक पे बढ़ाता है और HRA उसी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का तय प्रतिशत होता है। इसलिए अंतिम बढ़ोतरी का सही आंकड़ा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

8th Pay Commission में सैलरी हाइक का ये फैक्टर आप गारंटीड नहीं जानते होंगे! वो ‘हिडन फॉर्मूला’ जो कर देगा मालामाल

8th Pay Commission Salary Hike: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मन में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद उनकी सैलरी में कितना उछाल आएगा। आमतौर पर हर कोई इसे सिर्फ फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (DA) के आंकड़ों से जोड़कर देख रहा है, लेकिन असल में सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का फैसला एक ‘स्पेशल फैक्टर’ के हाथ में है। अगर यह फॉर्मूला मंजूर हो गया, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में सीधे 283% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह मास्टर फैक्टर है- ‘फैमिली यूनिट’ की गणना में बड़ा बदलाव का। आइए समझते हैं कि यह नया फॉर्मूला आपकी इन-हैंड सैलरी को कैसे बदल देगा।

क्या है ‘फैमिली यूनिट’ और अब तक कैसे तय होती थी आपकी सैलरी?

वेतन आयोग कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 के 15वें इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) के मानकों का पालन करता है। 7वें वेतन आयोग तक सरकार परिवार में केवल 3 यूनिट्स का खर्च जोड़कर न्यूनतम बेसिक पे तय करती थी:

  • कर्मचारी खुद: 1 यूनिट
  • पति या पत्नी: 1 यूनिट
  • 2 बच्चे (0.5 + 0.5): 1 यूनिट
  • कुल योग: 3 यूनिट्स

इसी 3 यूनिट्स के फॉर्मूले के आधार पर 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर दिया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 तय हुई थी।

8वें वेतन आयोग में 5 यूनिट्स का नया प्रस्ताव

कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि अब परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए। नए प्रस्ताव में यूनिट्स का गणित कुछ इस प्रकार है:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • पति या पत्नी: 1 यूनिट
  • 2 बच्चे (0.8 + 0.8): 1.6 यूनिट
  • आश्रित माता-पिता (0.8 + 0.8): 1.6 यूनिट
  • कुल योग: 5.2 यूनिट्स (राउंड ऑफ करके 5 यूनिट्स)

3 बनाम 5 यूनिट: जानिए आपकी सैलरी में कितना आएगा अंतर?

मान लीजिए, आज की महंगाई में एक व्यक्ति का न्यूनतम मासिक लिविंग कॉस्ट यानी राशन, कपड़ा, बिजली, मकान किराया, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च लगभग ₹13,800 बैठता है:

पुराने 3 यूनिट फॉर्मूले से: 3×₹13,800=₹41,400 (अनुमानित न्यूनतम बेसिक सैलरी)

प्रस्तावित 5 यूनिट फॉर्मूले से: 5×₹13,800=₹69,000 (प्रस्तावित न्यूनतम बेसिक सैलरी)

साफ है कि सिर्फ माता-पिता का खर्च जुड़ने (2 अतिरिक्त यूनिट्स) से ही कर्मचारियों की बेसिक पे सीधे ₹27,600 प्रति महीना अतिरिक्त बढ़ जाएगी!

फिटमेंट फैक्टर 3.83 होते ही ₹18,000 की बेसिक बनेगी ₹69,000

फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी में गुणा करके नई बेसिक पे निकाली जाती है। 5 यूनिट्स का फॉर्मूला लागू होने पर फिटमेंट फैक्टर बढ़कर 3.83 हो जाएगा।

ऐसे समझें कैलकुलेशन (लेवल-1 कर्मचारी):

  • मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000
  • नया फॉर्मूला: मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर
  • नई बेसिक सैलरी: ₹18,000×3.83=₹68,940 (लगभग ₹69,000)

यानी 5 यूनिट्स का नियम पास होते ही बेसिक पे ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹69,000 हो जाएगी। इसके ऊपर से मिलने वाला DA, HRA और अन्य अलाउंस अलग से जुड़ेंगे।

कर्मचारी यूनियनों ने दिए ये 3 मजबूत कानूनी तर्क

नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग के सामने 5 यूनिट्स लागू करने के लिए ठोस कानूनी आधार रखे हैं:

सीनियर सिटीजन एक्ट: ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना कर्मचारी की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: नए लेबर कोड्स में भी कर्मचारी के परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को आधिकारिक तौर पर जगह दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले: शीर्ष अदालत (1991 और भूपेंद्र नाथ हजारिका केस) ने साफ कहा है कि सरकार को अपने कर्मचारियों को सिर्फ ‘जीवित रहने लायक’ नहीं, बल्कि ‘सम्मानजनक जीवन’ जीने लायक वेतन देना चाहिए।

Viral Post: ₹1.84 लाख से ₹75 लाख की सैलरी तक कैसे पहुंचा युवक? सोशल मीडिया पर शेयर किया अपना सीक्रेट

इंजीनियरिंग की डिग्री या बड़े कॉलेज से पढ़ाई किए बिना भी अच्छी नौकरी और सैलरी हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में यूजर ने अपनी नौकरी और कमाई से जुड़ी कहानी शेयर की है। यूजर ने बताया कि उसने करीब नौ साल के करियर में अपनी सालाना कमाई ₹1.84 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख कर ली। अपनी कहानी से यूजर ने बताया कि सही स्किल और लगातार मेहनत के दम पर बिना बड़े कॉलेज बैकग्राउंड के भी करियर में अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

Reddit के r/IndianWorkplace सबरेडिट पर इस प्रोफेशनल ने अपनी करियर जर्नी शेयर किया है। रेडिट पर शेयर किए गए इस पोस्ट को X पर एक यूजर ने शेयर किया है। यूजर ने कहा कि, उसने यह कहानी उन लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए शेयर की है, जो नौकरी जाने या B.Tech डिग्री न होने से परेशान हैं। उसके मुताबिक, मेहनत और बेहतर स्किल्स से करियर में सफलता हासिल की जा सकती है।

₹1.84 लाख सालाना से शुरू किया करियर

पोस्ट के अनुसार, इस प्रोफेशनल ने एक Tier-3 कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ मैथ में B.Sc. की पढ़ाई की। इसके बाद उसे WITCH कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पहली नौकरी मिली। उसने अपने करियर की शुरुआत महज ₹1.84 लाख सालाना सैलरी से की थी, जो टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों को काफी कम लग सकती है। करियर के शुरुआती चार सालों में उसकी सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई।

 

कोविड के बाद बढ़ी सैलरी

कोविड-19 के दौर तक उसकी सालाना कमाई करीब ₹4.5 लाख पहुंची थी। इसके बाद नौकरी के बाजार में आए बदलाव के बीच उसे एक बड़ी कंपनी में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज ₹8 लाख हो गया। इस तरह उसकी सैलरी में एक साथ करीब 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसके करियर को आगे बढ़ने का नया रास्ता मिला। इसके करीब एक साल बाद उसकी कमाई में एक और बड़ा बदलाव आया। मौजूदा नौकरी से संतुष्ट न होने के कारण उसने दूसरी कंपनियों में अवसर तलाशने शुरू किए।

कुछ ही सालों में सालाना सैलरी ₹42.2 लाख हो गई

इस दौरान उसे कई नौकरी के ऑफर मिले और बेहतर विकल्प मिलने के बाद उसने ₹17.4 लाख सालाना पैकेज पर नई नौकरी तय की। यह उसकी पिछली ₹8 लाख सालाना सैलरी से दोगुने से भी ज्यादा थी। अगले तीन सालों में उसने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम जारी रखा और कई चुनौतियों के बावजूद अपनी कमाई बढ़ाता रहा। समय-समय पर मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी के चलते उसका सालाना पैकेज करीब ₹30 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद उसने बेहतर कमाई और काम का अच्छा माहौल पाने के लिए एक स्टार्टअप का रुख किया। यह फैसला उसके लिए फायदेमंद रहा और उसकी सालाना सैलरी बढ़कर ₹42.2 लाख हो गई।

नौकरी से निकाला भी गया

करियर में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया, जब स्टार्टअप में काम करने के करीब एक साल बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, उसने इसे अपने करियर का अंत मानने के बजाय इस समय का इस्तेमाल आगे की नौकरी की तैयारी में किया। इसके बाद उसे एक दूसरे स्टार्टअप में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज बढ़कर ₹75 लाख हो गया। यह उसकी पिछली ₹42.2 लाख की सैलरी से करीब 77 फीसदी ज्यादा थी। यूजर के मुताबिक, करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स, लगातार सीखना और सही फैसले ज्यादा जरूरी हैं। समस्या हल करने की क्षमता भी सफलता में अहम भूमिका निभाती है।

सैलरी को लेकर करे नेगोशिएशन

Reddit यूजर ने अपनी कहानी में बताया कि नौकरी बदलते समय सैलरी पर बातचीत करना कितना जरूरी है। उन्होंने पहला ऑफर तुरंत स्वीकार करने के बजाय बेहतर पैकेज के लिए बातचीत की, जिससे उनकी सालाना सैलरी ₹8 लाख से बढ़कर ₹17.4 लाख हो गई। उन्होंने ये भी बताया कि नौकरी जाना हमेशा करियर के लिए नुकसान नहीं होता। उनके मामले में ₹42 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छूटने के बाद उन्हें ऐसा मौका मिला, जहां उनकी कमाई बढ़कर ₹75 लाख सालाना हो गई।

8th Pay Commission: सैलरी बढ़ाने की तैयारी तेज! वेतन आयोग और DA हाइक पर सरकारी कर्मचारियों के लिए नए अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दी थी। साथ ही आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी जारी किया गया। आयोग करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स के वेतन, पेंशन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करेगा। इसके बाद सरकार को नई सिफारिशें देगा।

अलग-अलग राज्यों में हो रही बैठकें

अभी आयोग देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में कर्मचारी संगठन, यूनियन और महासंघ अपनी मांगें रख रहे हैं। आयोग उनके सुझाव और ज्ञापन भी ले रहा है।

आने वाली बैठकें

  • दिल्ली: 7 और 10 अगस्त 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 31 जुलाई)
  • चेन्नई: 7 और 8 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 18 अगस्त)
  • पुडुचेरी: 9 सितंबर 2026 (अपॉइंटमेंट की आखिरी तारीख 18 अगस्त)

कब आएगी आयोग की रिपोर्ट?

सरकार ने नवंबर 2025 में आयोग का गठन किया था। उम्मीद है कि आयोग 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा।

जुलाई 2026 का DA कब बढ़ेगा?

केंद्र सरकार हर साल दो बार महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाती है। जनवरी 2026 के लिए DA में 2% की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद कुल DA 60% हो गया।

अब कर्मचारियों की नजर जुलाई 2026 के DA पर है। पेंशन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका ऐलान आमतौर पर सितंबर में होता है। हालांकि, कुछ बार इसमें देरी होकर अक्टूबर भी हो सकता है। जुलाई 2026 का DA मई और जून 2026 के AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर तय होगा।

पश्चिम बंगाल में भी बना नया वेतन आयोग

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने 22 जुलाई को 7वें राज्य वेतन आयोग का गठन किया। इसके साथ आयोग का टर्म्स ऑफ रेफरेंस भी जारी किया गया। यह आयोग राज्य कर्मचारियों के वेतन, भत्तों, पेंशन और दूसरी सुविधाओं की समीक्षा करेगा।

कौन बने आयोग के अध्यक्ष?

सरकार ने अतनु चक्रवर्ती (रिटायर्ड IAS) को आयोग का अध्यक्ष बनाया है। वह पहले वित्त मंत्रालय में सचिव रह चुके हैं। आयोग का मुख्यालय कोलकाता में होगा। इसे गठन की तारीख से 6 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।

किन बातों पर होगा फैसला?

आयोग कर्मचारियों के पे मैट्रिक्स, फिटमेंट फैक्टर, सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और नए वेतन ढांचे को लागू करने के तरीके का अध्ययन करेगा। इसके बाद सरकार विस्तृत आदेश जारी करेगी।

DA में भी मिली बड़ी बढ़ोतरी

हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए DA और DR में 20% की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद राज्य कर्मचारियों का कुल DA और DR बढ़कर बेसिक सैलरी का 38% हो गया।

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Infosys अक्तूबर और जनवरी में बढ़ाएगी एंप्लॉयीज की सैलरी, इस साल करेगी 20000 फ्रेशर्स की भर्ती

इंफोसिस इस साल अक्तूबर में एंप्लॉयीज की सैलरी बढ़ाएगी। ज्यादातर एंप्लॉयीज की सैलरी अक्तूबर में बढ़ेगी। बाकी एंप्लॉयीज की सैलरी जनवरी में बढ़ेगी। कंपनी के सीईओ सलील पारेख ने 23 जुलाई को यह बताया। कंपनी ने गुरुवार को ही जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया।

सीनियर एंप्लॉयीज की सैलरी जनवरी में बढ़ेगी

पारेख ने नतीजों के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ज्यादातर एंप्लॉयीज की सैलरी में वृद्धि अक्तूबर में हो जाएगी। सीनियर एंप्लॉयीज की सैलरी जनवरी में बढ़ेगी।” कंपनी का कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 12.2 फीसदी बढ़कर 7,769 करोड़ रुपये रहा। इस दौरान रेवेन्यू 14 फीसदी बढ़कर 48,211 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने FY27 में रेवेन्यू ग्रोथ का आउटलुक घटाया

कंपनी ने FY27 में रेवेन्यू ग्रोथ का आउटलुक 3 फीसदी से घटाकर 1.5 फीसदी कर दिया। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। 24 जुलाई को इसके शेयरों पर जून तिमाही के नतीजों का असर दिखेगा। इंफोसिस देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है। कंपनी ने 23 जुलाई को नए सीईओ के नाम का भी ऐलान किया। मौजूदा सीईओ सलील पारेख का कार्यकाल 31 मार्च, 2027 को खत्म हो रहा है।

जून तिमाही में कंपनी ने की 4000 फ्रेशर्स की भर्ती

इंफोसिस ने कहा कि वह इस वित्त वर्ष (2026-27) के दौरान 20,000 फ्रेशर्स की भर्ती करेगी। उसने बताया कि जून तिमाही में उसने 4,000 से ज्यादा फ्रेशर्स की भर्ती की। बीते 12 महीनों में कंपनी के एंप्लॉयीज का एट्रिशन रेट (नौकरी छोड़ने की दर) बढ़कर 13 फीसदी हो गया। जून तिमाही में यह 12.6 फीसदी था। 30 जून को कंपनी में एंप्लॉयीज की कुल संख्या 3,28,062 थी। यह मार्च के अंत में 3,28,594 से थोड़ा कम है।

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इस साल अब तक 35 फीसदी फिसला है

इंफोसिस का शेयर 23 जुलाई को 0.076 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 1,052.90 रुपये पर बंद हुआ। इस साल कंपनी का शेयर 35 फीसदी से ज्यादा फिसला है। इस दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स 25 फीसदी गिरा है। बीते छह महीनों में भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा है। इसकी वजह एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के नए एआई टूल्स हैं। 23 जुलाई को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स लगातार चौथे दिन गिरकर बंद हुए।

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2 लाख रुपये महीने की सैलरी भी बन सकती है सबसे बड़ा जाल! MBA प्रोफेशनल ने बताई चौंकाने वाली वजह

कॉर्पोरेट दुनिया में बेहतर सैलरी और बड़ा पद हासिल करना अक्सर सफलता की सबसे बड़ी पहचान माना जाता है। हर नई नौकरी, प्रमोशन और वेतन वृद्धि लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन क्या लगातार अधिक कमाई की चाह वास्तव में बेहतर जीवन की गारंटी देती है, या फिर ये इंसान को ऐसी दौड़ में शामिल कर देती है, जहां संतुष्टि हमेशा एक कदम दूर रहती है? यही सवाल इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक अनुभवी प्रोफेशनल की राय ने इस बहस को नई दिशा दे दी है।

उनका मानना है कि करियर में एक स्तर के बाद केवल ज्यादा सैलरी पर ध्यान देने के बजाय जीवन की गुणवत्ता, मानसिक शांति, परिवार और भविष्य की सुरक्षा पर भी उतना ही फोकस होना चाहिए। उनकी यह सोच लोगों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है और एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इंसान के लिए ‘पर्याप्त कमाई’ की सीमा क्या होनी चाहिए।

‘₹2 लाख महीने के बाद शुरू हो जाता है असली ट्रैप

करीब 13 साल का कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले MBA ग्रेजुएट मोहित तलरेजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर कहा कि भारत में यदि किसी की मासिक आय लगभग ₹2 लाख तक पहुंच जाती है, तो वह आरामदायक जीवन जी सकता है। उनके मुताबिक इसके बाद सिर्फ ज्यादा सैलरी के पीछे भागना इंसान को ऐसी रेस में धकेल देता है, जहां प्रतिस्पर्धा कभी खत्म नहीं होती।

कॉर्पोरेट सीढ़ी जितनी ऊंची, उतना बढ़ता है दबाव

तलरेजा का मानना है कि ऊंचे पदों पर पहुंचने के साथ काम का तनाव और जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं। ऐसे स्तर पर अक्सर उन्हीं लोगों से मुकाबला होता है जो करियर के लिए अपनी सेहत, परिवार और निजी जिंदगी तक दांव पर लगाने को तैयार रहते हैं। उनका कहना है कि हर किसी के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धा सही विकल्प नहीं हो सकती।

पहले तय करें कितना काफी है

उन्होंने सलाह दी कि हर प्रमोशन को अगला लक्ष्य बनाने के बजाय लोगों को पहले यह तय करना चाहिए कि उनकी जरूरतों के हिसाब से कितनी आय पर्याप्त है। जब वो स्तर हासिल हो जाए, तो जीवन की गुणवत्ता सुधारने, परिवार के साथ समय बिताने और स्वास्थ्य पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

सिर्फ नौकरी नहीं, भविष्य के लिए दूसरा सहारा भी बनाएं

तलरेजा का कहना है कि प्रोफेशनल्स को ऐसी स्किल्स विकसित करनी चाहिए जो आने वाले 10-15 सालों में नौकरी पर निर्भर हुए बिना भी कमाई का जरिया बन सकें। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं, जिनसे भविष्य में स्वतंत्र आय अर्जित की जा सकती है।

लंबी दौड़ में क्या है असली जीत?

उनके अनुसार लक्ष्य सिर्फ बड़ा पैकेज या ऊंचा पद हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी जिंदगी बनानी चाहिए जिसमें आर्थिक सुरक्षा के साथ मानसिक शांति और व्यक्तिगत संतुलन भी बना रहे।

सोशल मीडिया पर बंट गई राय

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताते हुए कहा कि एक समय के बाद पैसा नहीं, जीवन का संतुलन ज्यादा मायने रखता है। वहीं कई लोगों का कहना था कि आज के दौर में ₹2 लाख महीना भी हर किसी के लिए पर्याप्त नहीं है। एक यूजर ने लिखा कि इतनी आय में बड़े शहरों में घर खरीदना आसान नहीं, जबकि दूसरे ने सलाह दी कि इस स्तर की कमाई के बाद खुद का बिजनेस शुरू करने पर विचार करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर साझा किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

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8th Pay Commission पर कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आया ये बड़ा अपडेट! जानिए सैलरी और HRA पर कितना पड़ेगा असर

8th Pay Commission: 8वां केंद्रीय वेतन आयोग केवल सैलरी में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, इसके नियम और शर्तें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्तों, पेंशन और काम करने के तरीकों में बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहे हैं।

3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हाल ही में आयोग ने भुवनेश्वर और कोलकाता (9-10 जुलाई 2026) में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और हितधारकों के साथ बैठकें पूरी की हैं।

1. सभी भत्तों (Allowances) की गहन समीक्षा

गैजेट के अनुसार, आयोग वर्तमान में मिलने वाले सभी प्रकार के भत्तों के ढांचे और उनके नियमों की समीक्षा कर रहा है।

उद्देश्य: बड़ी संख्या में मिलने वाले अलग-अलग भत्तों को सरल और युक्तिसंगत बनाना।

असर: कर्मचारियों को न केवल संशोधित दरें मिल सकती हैं, बल्कि पात्रता के नियमों में बदलाव, क्लेम प्रोसेस का आसान होना या कई भत्तों का आपस में विलय भी देखने को मिल सकता है। कर्मचारी संगठनों द्वारा HRA को बढ़ाकर 40% तक करने की मांग भी ज़ोरों पर है।

2. परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव पर जोर 

गैजेट में साफ तौर पर कहा गया है कि आयोग वर्तमान बोनस सिस्टम और परफॉर्मेंस आधारित भुगतानों की जांच करेगा और एक ऐसा इंसेंटिव फ्रेमवर्क तैयार करेगा जो उत्पादकता को बढ़ावा दे।

असर: भविष्य में मिलने वाला कंपंसेशन केवल समय-समय पर होने वाले वेतन संशोधन पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की जवाबदेही, दक्षता और मापने योग्य नतीजों से भी जोड़ा जा सकता है।

3. NPS, UPS, पेंशन और ग्रेच्युटी की समीक्षा

रिटायरमेंट बेनिफिट्स इस बार आयोग के सबसे बड़े फोकस एरिया में से एक हैं। गैजेट में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए ‘डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी’ की समीक्षा करने के निर्देश हैं।

असर: जो कर्मचारी NPS या UPS के दायरे से बाहर हैं, उनके लिए भी पेंशन और ग्रेच्युटी लाभों की जांच की जाएगी ताकि विसंगतियों को दूर कर उन्हें बेहतर लाभ दिए जा सकें।

4. प्राइवेट सेक्टर और CPSUs की सैलरी का आकलन

एक अनोखा और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि आयोग को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र में चल रहे मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, मिलने वाले फायदों और वर्किंग कंडीशंस पर भी विचार करने को कहा गया है।

उद्देश्य: सरकार ऐसा वेतन ढांचा तैयार करना चाहती है जिससे बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और उसे रोक कर रखा जा सके, साथ ही देश के राजकोषीय अनुशासन पर भी कोई आंच न आए।

5. फाइनल से पहले अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की छूट

हालांकि आयोग को अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने (मई-जून 2027 तक) का समय मिला है, लेकिन गैजेट नोटिफिकेशन सरकार को यह लचीलापन देता है कि आयोग विशिष्ट मामलों पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पहले भी दे सकता है।

असर: अगर सरकार चाहे, तो कुछ खास मुद्दों या भत्तों से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही लागू करने पर विचार कर सकती है।

8th Pay Commission: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. 8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ और इसके अध्यक्ष कौन हैं?

उत्तर: 8वें वेतन आयोग को आधिकारिक तौर पर 3 नवंबर 2025 को एक गैजेट नोटिफिकेशन के जरिए गठित किया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।

Q2. इस आयोग की सिफारिशें कब से लागू होने की उम्मीद है?

उत्तर: हालांकि सरकार ने अभी किसी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन परंपरा के अनुसार 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा था। इस लिहाज से नई संशोधित सैलरी और पेंशन 1 जनवरी 2026 से (बैकडेट या एरियर के साथ) प्रभावी होने की पूरी संभावना है।

Q3. क्या आयोग ने फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की घोषणा कर दी है?

उत्तर: नहीं, आयोग की तरफ से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि की दर या संशोधित पे-मैट्रिक्स की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारी संगठन लगातार 2.86 से लेकर 3.8 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड, इमरजेंसी के वक्त किसका इस्तेमाल करें? समझिए पूरा हिसाब

Personal Loan vs Credit Card: अगर अचानक अस्पताल का बड़ा बिल आ जाए। घर में कोई इमरजेंसी आ जाए। या नौकरी छूटने की वजह से तुरंत पैसों की जरूरत पड़ जाए। ऐसे समय में ज्यादातर लोगों के सामने दो विकल्प होते हैं- क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन-सा विकल्प कम महंगा पड़ता है? क्या हर इमरजेंसी में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना सही है? या फिर सीधे पर्सनल लोन लेना बेहतर रहेगा? जवाब आपकी जरूरत, रकम और उसे लौटाने की क्षमता पर निर्भर है।

पहले एक आसान उदाहरण समझिए

अब मान लीजिए आपको अचानक ₹2 लाख की जरूरत पड़ गई। यह पैसा आपको अस्पताल के बिल के लिए चाहिए। अब आपके पास दो रास्ते हैं। बैंक से 3 साल के लिए 12% ब्याज पर पर्सनल लोन लें। या क्रेडिट कार्ड से पूरा भुगतान कर दें। यहीं से दोनों विकल्पों का फर्क शुरू हो जाता है।

अगर पर्सनल लोन लेते हैं

मान लीजिए बैंक ने आपको ₹2 लाख का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए दे दिया।

डिटेलपैसों का हिसाब
लोन अमाउंट₹2,00,000
ब्याज दर12% सालाना
अवधि3 साल
अनुमानित EMIकरीब ₹6,640
कुल भुगतानकरीब ₹2.39 लाख
कुल ब्याजकरीब ₹39,000

EMI तय रहती है। आपको पहले से पता होता है कि हर महीने कितना पैसा देना है।

अगर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं?

अब मान लीजिए आपने पूरे ₹2 लाख का भुगतान क्रेडिट कार्ड से कर दिया। लेकिन बिल आने पर आप सिर्फ Minimum Due भरते रहे। यहीं सबसे बड़ी गलती होती है। मान लीजिए आपके क्रेडिट कार्ड का बिल ₹2 लाख आया है। बैंक कहता है कि फिलहाल सिर्फ ₹10,000 का मिनिमम ड्यू भर दीजिए। इससे लेट फीस तो नहीं लगेगी, लेकिन बाकी ₹1,90,000 पर हर महीने ब्याज लगता रहेगा।

ज्यादातर क्रेडिट कार्ड 30% से 48% सालाना तक ब्याज वसूलते हैं। यानी करीब 2.5% से 4% हर महीने। अगर आपने पूरा बिल नहीं चुकाया, तो ब्याज तेजी से बढ़ने लगता है। कई बार उस पर GST और दूसरे चार्ज भी जुड़ जाते हैं। ऐसे में ₹2 लाख का बकाया कुछ ही महीनों में काफी महंगा साबित हो सकता है।

एक नजर में सीधी तुलना

डिटेलपर्सनल लोनक्रेडिट कार्ड
ब्याज10%-18% सालाना
30%-48% सालाना

भुगतानतय EMIMinimum Due का विकल्प
बड़ी रकम के लिएबेहतरमहंगा
छोटी अवधि के लिएठीकअगर पूरा बिल समय पर चुका दें तो बेहतर

तो क्रेडिट कार्ड कब इस्तेमाल करें?

अगर आपको भरोसा है कि 30 से 45 दिन के भीतर पूरा पैसा चुका देंगे, तो क्रेडिट कार्ड अच्छा विकल्प हो सकता है।

मान लीजिए आपने ₹50,000 का अस्पताल का बिल कार्ड से भरा। सैलरी आने में सिर्फ 20 दिन बाकी हैं। अगर बिल की Due Date तक पूरा भुगतान कर दिया, तो आमतौर पर कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा। यही क्रेडिट कार्ड की सबसे बड़ी ताकत है।

और पर्सनल लोन कब लेना चाहिए?

अगर रकम बड़ी है और उसे लौटाने में कई महीने या साल लगेंगे, तो पर्सनल लोन बेहतर रहता है।

मान लीजिए शादी, इलाज या घर की मरम्मत के लिए ₹3 लाख चाहिए। आपको पता है कि इसे एक-दो महीने में नहीं चुका पाएंगे। ऐसे में पर्सनल लोन लेना ज्यादा समझदारी होगी। इसकी EMI तय रहती है और ब्याज भी क्रेडिट कार्ड के मुकाबले काफी कम होता है।

₹1 लाख पर कितना पड़ेगा फर्क?

मान लीजिए आपको ₹1 लाख की जरूरत है। आप यह रकम क्रेडिट कार्ड से खर्च करते हैं और सिर्फ मिनिमम ड्यू भरते रहते हैं। ऐसे में एक साल में ब्याज और दूसरे चार्ज मिलाकर आपको ₹30,000-₹40,000 या उससे भी ज्यादा अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।

वहीं, अगर आप यही ₹1 लाख 12% सालाना ब्याज पर 3 साल के लिए पर्सनल लोन लेते हैं, तो आपकी EMI करीब ₹3,320 महीने बनेगी। तीन साल में कुल भुगतान करीब ₹1.20 लाख होगा। यानी कुल ब्याज करीब ₹19,500-₹20,000 पड़ेगा।

सबसे अच्छा विकल्प क्या है?

इमरजेंसी में सबसे बड़ा फैसला पैसा जुटाना नहीं, सही तरीके से पैसा जुटाना होता है। अगर कुछ हफ्तों में पैसा लौटा सकते हैं, तो क्रेडिट कार्ड ठीक है। लेकिन अगर कर्ज लंबे समय तक चलेगा, तो पर्सनल लोन आपकी जेब पर कम बोझ डालेगा।

ऐसी स्थिति से बचने के लिए सबसे अच्छा विकल्प इमरजेंसी फंड है। अगर आपके पास 6 महीने के खर्च जितनी बचत अलग रखी है, तो ऐसी स्थिति में आपको न महंगा ब्याज देना पड़ेगा और न ही कर्ज लेना पड़ेगा।

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Warren Buffett: वॉरेन बफे 2034 तक अपनी पूरी संपत्ति दान करेंगे, बिल गेट्स फाउंडेशन को नहीं मिला कोई पैसा

Warren Buffett: दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे ने इस साल अपनी सालाना चैरिटी डोनेशन में Bill Gates Foundation को शामिल नहीं किया। उन्होंने करीब 6 अरब डॉलर (करीब ₹50,000 करोड़) का दान अपने परिवार से जुड़ी चार फाउंडेशन को देने का ऐलान किया। मंगलवार को जारी बयान में उन्होंने Bill Gates Foundation का कोई जिक्र नहीं किया।

2034 तक पूरी संपत्ति दान करेंगे

बफे ने यह भी कहा कि उनकी बची हुई Berkshire Hathaway की हिस्सेदारी 31 दिसंबर 2034 तक पूरी तरह दान कर दी जाएगी। इसकी मौजूदा कीमत करीब 146 अरब डॉलर है।

पहले योजना यह थी कि उनके निधन के बाद उनके तीन बच्चे 10 साल के भीतर उनकी संपत्ति दान करेंगे। अब बफे ने इस प्रक्रिया को पहले ही पूरा करने का फैसला किया है।

Bill Gates Foundation क्यों नहीं शामिल?

बफे ने इस फैसले की वजह नहीं बताई। हालांकि, यह फैसला ऐसे समय आया है जब बिल गेट्स के दिवंगत फाइनेंसर जॉफ्री एपस्टीन (Jeffrey Epstein )से संबंधों को लेकर फिर चर्चा हो रही है।

बिल गेट्स ने हमेशा कहा है कि उन्हें Epstein के अपराधों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि Epstein से उनकी मुलाकात सिर्फ चैरिटी के लिए फंड जुटाने की उम्मीद में हुई थी। बिल गेट्स पर किसी तरह का आपराधिक आरोप नहीं लगा है।

पहले सबसे ज्यादा दान Gates Foundation को मिला

2006 में अपनी संपत्ति दान करने का ऐलान करने के बाद से बफे 61 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम Bill Gates Foundation को दे चुके हैं। हर साल वह Berkshire Hathaway के शेयर Gates Foundation और अपने बच्चों की फाउंडेशन को दान करते रहे हैं।

कभी गहरे दोस्त थे Buffett और Gates

एक समय वॉरेन बफे और बिल गेट्स बेहद करीबी दोस्त थे। दोनों अक्सर मिलते थे, साथ में छुट्टियां बिताते थे और ऑनलाइन ब्रिज खेलते थे। गेट्स कई साल तक Berkshire Hathaway के बोर्ड में रहे। वहीं, बफे भी Gates Foundation के बोर्ड का हिस्सा थे।

हालांकि, बफे ने इसी साल CNBC को बताया था कि 2025 में Epstein से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद से उनकी गेट्स से कोई बातचीत नहीं हुई है।

Epstein मामले पर क्या बोले बफे?

बफे ने कहा कि Jeffrey Epstein लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाने में माहिर था। उन्होंने कहा कि वह किसी ऐसे मामले से जुड़ना नहीं चाहते, जिसकी भविष्य में जांच हो सकती हो।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें हैरानी होती है कि इतने प्रभावशाली और अमीर लोग Epstein के जाल में कैसे फंस गए। वहीं, Gates Foundation ने बताया है कि उसने Epstein से जुड़े पुराने संबंधों की समीक्षा शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी साझेदारियों की जांच के नियम भी मजबूत किए जा रहे हैं।

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