अगले साल कितनी होगी सैलरी हाइक? Aon सर्वे में आया ये आंकड़ा, जानिए किन सेक्टरों में होगी बंपर बढ़ोतरी

Salary Hike Projection: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड रिस्क के बावजूद भारत में कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Aon plc के ‘Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27’ के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश में औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 9% से मामूली रूप से ज्यादा है। मजबूत घरेलू खपत और निरंतर निवेश के कारण देश में बिजनेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है।

किन सेक्टरों में मिलेगी सबसे ज्यादा सैलरी हाइक?

सर्वे के अनुसार, सभी सेक्टरों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ खास सेक्टर्स टैलेंट की मांग और ग्रोथ के चलते सबसे आगे रहने वाले हैं:

NBFC: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 10.1% की सबसे ऊंची सैलरी ग्रोथ के साथ सूची में सबसे आगे रहेंगी।

एनर्जी: ऊर्जा सेक्टर में वेतन वृद्धि औसतन 9.9% तक रहने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर: इस क्षेत्र में कर्मचारियों को 9.8% तक की सैलरी हाइक मिल सकती है।

एट्रिशन रेट और टैलेंट की जंग

कंपनियों के बजट स्थिर होने के बावजूद कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला बढ़ा है। ओवरऑल एट्रिशन रेट बढ़कर 2026 में 18% पर पहुंच गया है, जो कि 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था। इससे यह साफ होता है कि कुशल और अनुभवी टैलेंट को अपने पास रोके रखने के लिए कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा बना हुआ है।

AI स्किल्स और अपस्किलिंग का दौर: मिल रहा है तगड़ा प्रीमियम

डे-टू-डे वर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की गहरी पैठ और तेजी से बदलते ट्रेंड्स का असर सैलरी और रिक्रूटमेंट पर साफ दिख रहा है। रूटीन कामकाज में एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां 2025 के 46.1% से बढ़कर 56% हो गई हैं। करीब 60% एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के प्रोफेशनल्स के लिए कंपनियां सामान्य से लगभग 10% अधिक पे-प्रीमियम दे रही हैं।

वेज कोड और पेरोल कॉस्ट का असर

सर्वे के मुताबिक, 65.4% एंप्लॉयर पूरी तरह से नए वेज कोड का पालन कर रहे हैं, जबकि 20.9% कंपनियां अगले छह महीनों में इसके अनुपालन की उम्मीद कर रही हैं। वैसे लगभग 42.8% कंपनियों को अंदेशा है कि इससे उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% तक बढ़ सकती है, जिसके लिए उन्हें अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर को समझदारी से री-अलाइन करना होगा।

127% सैलरी हाइक का ऑफर ठुकराए या नई नौकरी जॉइन करे? कर्मचारी की दुविधा पर Reddit यूजर्स ने दी सलाह

नौकरी बदलने का फैसला आसान नहीं होता, खासकर तब जब नई कंपनी पहले से कहीं ज्यादा सैलरी देने को तैयार हो और मौजूदा कंपनी भी आपको रोकने के लिए वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव दे। बेंगलुरु में काम करने वाले एक क्लिनिकल डेटा स्पेशलिस्ट के सामने ऐसी ही स्थिति आ गई है। उन्हें नई नौकरी में 127 फीसदी सैलरी हाइक का ऑफर मिला है। अब उनकी मौजूदा कंपनी भी वेतन बढ़ाकर उन्हें अपने साथ बनाए रखना चाहती है।

कर्मचारी ने Reddit पर अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि नई नौकरी में पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और घर से काम करने के लिए जरूरी सामान खरीदने हेतु जॉइनिंग बोनस भी दिया जा रहा है। हालांकि, नई जगह काम का दबाव कितना होगा और वर्क-लाइफ बैलेंस कैसा रहेगा, इसे लेकर वह असमंजस में हैं।

पुरानी कंपनी में सुकून, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता

कर्मचारी की मौजूदा कंपनी क्लिनिकल रिसर्च इंडस्ट्री में फंक्शनल सर्विस प्रोवाइडर (FSP) मॉडल के तहत काम करती है। उनके मुताबिक, पुरानी नौकरी में टीम और काम करने का तरीका जाना-पहचाना है। काम भी फिलहाल संभालने लायक है, इसलिए वहां बने रहने का मन था।

लेकिन मौजूदा प्रोजेक्ट या FSP एंगेजमेंट को लेकर अनिश्चितता और मैनेजर के कंपनी छोड़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने नई नौकरी के ऑफर के जवाब में सैलरी मैच करने की संभावना जताई है, मगर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।

कर्मचारी के सामने सवाल है कि अगर पुरानी कंपनी भी उतनी ही सैलरी देने लगे, तो क्या सिर्फ नए अवसर के लिए नौकरी बदलना सही होगा? या फिर परिचित माहौल में बने रहना ही बेहतर फैसला है?

Reddit यूजर्स ने दी सलाह, काउंटर ऑफर स्वीकार करने से पहले सोचें

कर्मचारी की पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उन्हें नई नौकरी चुनने की सलाह दी। कुछ लोगों का मानना था कि इस्तीफे की बात सामने आने के बाद कंपनी का व्यवहार बदल सकता है और भविष्य में कर्मचारी पर ज्यादा काम का दबाव डाला जा सकता है।

एक यूजर ने सलाह दी कि काउंटर ऑफर मिलने के बावजूद नई नौकरी के फायदे और जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दूसरे यूजर ने आशंका जताई कि कंपनी कर्मचारी को रोकने के साथ-साथ कम वेतन पर किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त करने की योजना भी बना सकती है। हालांकि, इन टिप्पणियों में बताई गई आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

127% hike with a new company vs retention offer from my current employer

by

u/AnaWong97 in

IndianWorkplace

नौकरी बदलने से पहले किन बातों पर दें ध्यान?

यह मामला केवल ज्यादा सैलरी पाने का नहीं, बल्कि लंबे समय के करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने का भी है। नौकरी बदलने से पहले वेतन के साथ काम के घंटे, जिम्मेदारियां, नौकरी की स्थिरता, मैनेजर और टीम का माहौल तथा भविष्य में तरक्की की संभावनाएं देखना जरूरी है।

साथ ही, अगर मौजूदा कंपनी वेतन बढ़ाने की पेशकश करती है, तो यह जानना भी अहम है कि वह प्रस्ताव लिखित और स्पष्ट है या नहीं। आखिरकार, 127 फीसदी की सैलरी हाइक आकर्षक जरूर है, लेकिन सही फैसला वही होगा जो आर्थिक फायदे के साथ करियर और जीवनशैली के लिए भी बेहतर साबित हो।

यूपी का शख्स मुंबई में नाई का काम करके हर महीने कमाता है करीब 1 लाख रुपये, हफ्ते में 6 दिन करता है मेहनत

video: हर नौकरी बदलने पर 30% सैलरी बढ़ना भी पड़ सकता है भारी, जानिए कम पैकेज का खेल

नौकरी बदलते समय सैलरी में बढ़ोतरी होना अक्सर करियर की सफलता जैसा लगता है। लेकिन हर बार मिलने वाला इन्क्रीमेंट आपकी असली मार्केट वैल्यू को नहीं दर्शाता। अगर किसी कर्मचारी ने करियर की शुरुआत कम पैकेज से की है, तो आगे की नौकरियों में भी वही पुरानी सैलरी उसके लिए आधार बन सकती है। ऐसे में प्रतिशत के हिसाब से अच्छी बढ़ोतरी मिलने के बावजूद कमाई बाजार के मुकाबले पीछे रह सकती है। नोएडा की फाउंडर वान्या गोयल ने सोशल मीडिया पर इसी समस्या की ओर ध्यान दिलाया है। उन्होंने समझाया कि 20 या 30 फीसदी की बढ़ोतरी हर बार पर्याप्त नहीं होती, खासकर तब जब शुरुआती पैकेज ही कम हो।

समय के साथ यह अंतर इतना बढ़ सकता है कि कर्मचारी को अपनी मौजूदा सैलरी और बाजार में चल रहे पैकेज के बीच बड़ा फर्क नजर आने लगे। इसलिए करियर में सिर्फ नौकरी बदलना और इन्क्रीमेंट देखना ही काफी नहीं है, बल्कि अपनी सही मार्केट वैल्यू समझना भी जरूरी है।

कम पैकेज से शुरू हुआ सफर बन सकता है लंबा गैप

वान्या गोयल के मुताबिक, कम शुरुआती सैलरी की सबसे बड़ी समस्या सिर्फ उस समय कम कमाई होना नहीं है। असली परेशानी तब शुरू होती है, जब अगली कंपनी भी आपकी पिछली सैलरी को ही नई पेशकश का आधार बना देती है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की सैलरी 6 लाख रुपये सालाना है। नौकरी बदलने पर उसे 30 फीसदी बढ़ोतरी के साथ करीब 7.2 लाख का पैकेज मिलता है। अगली बार यही रकम 8.6 लाख और फिर करीब 10.3 लाख तक पहुंच सकती है। कागज पर हर बार अच्छी बढ़ोतरी दिखाई देती है, लेकिन बाजार में उसी भूमिका की सैलरी अगर इससे काफी ज्यादा बढ़ चुकी हो, तो कर्मचारी धीरे-धीरे पीछे रह सकता है।

हर बार इन्क्रीमेंट नहीं, कभी चाहिए Salary Correction

यही वजह है कि गोयल ने कर्मचारियों को सिर्फ प्रतिशत बढ़ोतरी के पीछे भागने से बचने की सलाह दी। उनके मुताबिक, कुछ मामलों में सामान्य इन्क्रीमेंट के बजाय सैलरी करेक्शन की जरूरत होती है। यानी कर्मचारी को यह देखना चाहिए कि उसके अनुभव, जिम्मेदारी और काम के हिसाब से बाजार में उसकी वास्तविक कीमत क्या है।

सिर्फ मेहनत करना काफी नहीं

करियर में आगे बढ़ने के लिए अच्छा काम करना जरूरी है, लेकिन केवल मेहनत करने से हमेशा सही सैलरी मिलना तय नहीं है। गोयल का कहना है कि कर्मचारियों को अपने काम का असर सामने रखना भी आना चाहिए। उन्होंने उपलब्धियों का रिकॉर्ड रखने, काम के नतीजों को आंकड़ों में दिखाने और अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से पेश करने पर जोर दिया।

अपनी कीमत बताना भी करियर का हिस्सा

कई कर्मचारी अच्छा काम करते हैं, लेकिन अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करने या सैलरी पर बातचीत करने में पीछे रह जाते हैं। इसका नुकसान लंबे समय में उनकी कमाई पर पड़ सकता है।गोयल के मुताबिक, कर्मचारियों को अपनी मार्केट वैल्यू समझनी चाहिए, उपलब्धियों को सामने रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बेहतर पैकेज के लिए बातचीत करनी चाहिए।

View this post on Instagram

30% की बढ़ोतरी हमेशा बड़ी जीत नहीं

हर नौकरी बदलने पर 25 या 30 फीसदी वेतन बढ़ना सुनने में शानदार लग सकता है। लेकिन अगर शुरुआती पैकेज ही बाजार से काफी कम था, तो लगातार प्रतिशत के हिसाब से बढ़ती सैलरी भी आपको वास्तविक मार्केट रेट से पीछे रख सकती है।

Video: बाइक के पीछे लगाया लंबा डंडा, कुत्तों से बचने का अजीब जुगाड़ का वीडियो हुआ वायरल

8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी सैलरी? DA मर्जर, फिटमेंट फैक्टर और HRA पर ये है बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Salary Hike Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुआ 8वां वेतन आयोग इस समय देशभर में कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों, रेलवे और रक्षा बलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श के दौर में है। हाल ही में चंडीगढ़, चेन्नई और पुडुचेरी में बैठकों के बाद अगले महीने आयोग की टीम बेंगलुरु के दौरे पर जाने वाली है।

वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बंपर इजाफा होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी और किन-किन घटकों में बड़ा बदलाव होने वाला है?

सैलरी हाइक के ये है 4 मुख्य पिलर

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आठवां वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा कर रहा है। सैलरी रिवीजन मुख्य रूप से इन 4 घटकों पर निर्भर करेगा:

1. बेसिक पे: इसमें नया वेतन मैट्रिक्स, पे-स्ट्रक्चर और सबसे अहम फिटमेंट फैक्टर शामिल है।

2. भत्ते: महंगाई भत्ता (DA/DR), मकान किराया भत्ता (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA)।

3. कैश और अन्य लाभ: सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव और रिवॉर्ड।

4. अन्य ढांचागत सुधार: कामकाजी जरूरतें और विभिन्न पदों का युक्तिकरण।

बेसिक पे में महंगाई भत्ते के विलय की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत डीए का विलय मूल वेतन में किया जाए। बेसिक सैलरी ही वह आधार है जिससे प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की गणना होती है। अगर डीए को बेसिक पे में मिला दिया जाता है, तो बेसिक सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी, जिससे मिलने वाले सभी अन्य भत्ते और रिटायर्मेंट बेनेफिट्स कई गुना बढ़ जाएंगे।

फिटमेंट फैक्टर से ही होगा पूरा खेल

फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक है, जिसका उपयोग पुराना बेसिक वेतन बदलकर नया बेसिक वेतन तय करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था।

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा इस पर फिलहाल आयोग में चर्चा जारी है, लेकिन विश्लेषकों और कर्मचारी यूनियनों की रिपोर्ट के मुताबिक यह 2.28 से लेकर 3.83 के बीच तय हो सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.68 या 3.83 तक जाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

HRA में संशोधन: 2017 के बाद पहली बार बदलाव की तैयारी!

नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन ने आयोग के सामने HRA बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। 2017 के बाद से मकान किराए भत्ते (HRA) की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि शहरों में कमरों और मकानों का किराया काफी बढ़ चुका है।

कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है कि शहरों की कैटेगरी के हिसाब से HRA को X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y श्रेणी के लिए 24% और Z श्रेणी के शहरों के लिए 12% किया जाए। साथ ही, जब-जब डीए बढ़े, तब-तब HRA में भी अपने आप बढ़ोतरी का नियम बने।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

गठन के नियमों के अनुसार आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त (मई 2027 तक) मिला है। वैसे जानकारों का मानना है कि फरवरी या अप्रैल 2027 के आसपास कुछ अंतरिम सिफारिशों की घोषणा की जा सकती है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें तो आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इसे पूरी तरह लागू होने और एरियर जारी होने में 2029 या 2030 तक का समय लग सकता है।

 

EPFO के तहत सैलरी लिमिट बढ़कर ₹25,000 हुई, आपके वेतन और पेंशन पर क्या असर होगा?

EPFO salary Hike: सरकार ने एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) के तहत अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी कवरेज के लिए वेज सीलिंग यानी सैलरी सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दी है। इसका मकसद ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, “प्रोविडेंट फंड कटौती के लिए नई वेतन सीमा अब ₹25,000 प्रति माह होगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO ​​कवरेज के दायरे में आ सकते हैं।”

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा, “संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू हो गई है।” EPFO वेतन सीमा 2004 और 2014 के बीच बदली नहीं गई थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दिया गया था। सितंबर 2014 से पहले वेतन सीमा ₹6,500 प्रति माह थी। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सैलरी और आय में लगातार बढ़ोतरी और संगठित क्षेत्र में रोज़गार बढ़ने को देखते हुए अब सीमा को बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है।

₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च

इस फ़ैसले से सालाना लगभग ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। जबकि मौजूदा सालाना बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ होगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “यह फैसला ज्यादा कर्मचारियों को प्रोविडेंट फंड बचत एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत पेंशन सुरक्षा और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम (EDLI) के तहत बीमा कवरेज का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।”

सैलरी बढ़ने से नौकरीपेशा को क्या होगा फायदा?

यह बदलाव प्रोविडेंट फंड योगदान और पेंशन योग्य सैलरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मौजूदा वेतन स्तरों के अनुरूप बनाने में भी मदद करेगा। अभी, ₹15,000 से ज्यादा मासिक वेतन वाली नौकरी शुरू करने वाला कोई नया कर्मचारी अपने आप EPF के दायरे में नहीं आता है। लेकिन अब वेतन सीमा (wage ceiling) बढ़ने से हर महीने ₹15,000 से ₹25,000 कमाने वाले कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य सोशल सिक्योरिटी दायरे में आ जाएगा।

सरकार ने कहा कि सितंबर 2014 में पिछली बार सैलरी सीमा बढ़ाए जाने के बाद से देश भर में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साथ ही संगठित क्षेत्र में रोजगार का विस्तार भी हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन भी मौजूदा सीमा के करीब पहुंच गया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कैबिनेट का यह फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सोशल सिक्योरिटी देगा और संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी बढ़ावा देगा।”

वेज सीलिंग बढ़ने पर पेंशन पर क्या असर होगा?

इसका सबसे बड़ा और लंबे समय का असर एंप्लॉय पेंशन स्कीम (EPS) के तहत मिलने वाले पेंशन फायदों पर पड़ सकता है। स्टैंडर्ड EPS फ्रेमवर्क के तहत पेंशन-योग्य वेतन की सीमा 2014 से ₹15,000 तय की गई है। एक अधिकारी ने कहा कि इससे असल में एम्प्लॉयर का EPS योगदान पेंशन-योग्य वेतन के 8.33% के हिसाब से लगभग ₹1,250 प्रति माह तक सीमित हो गया था। अब जब यह सीमा बढ़कर ₹25,000 हो रही है, तो इसके हिसाब से 8.33% योगदान लगभग ₹2,083 प्रति माह होगा।

इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों पर नई लिमिट लागू होती है, उनके लिए EPS में ज्यादा से ज्यादा योगदान में हर महीने लगभग 833 रुपये की बढ़ोतरी होगी। स्टैंडर्ड EPS पेंशन फॉर्मूले के तहत पेंशन मुख्य रूप से पेंशन योग्य सैलरी और पेंशन योग्य सर्विस से जुड़ी होती है।

अधिकारी का अनुमान है कि 35 साल की पेंशन योग्य सर्विस वाले कर्मचारी की मासिक पेंशन, नई लिमिट के हिसाब से गिनी गई सर्विस के लिए लगभग 7,500 रुपये से बढ़कर 12,500 रुपये हो सकती है। यह पुरानी 15,000 रुपये की लिमिट के आधार पर गिनी गई पेंशन की तुलना में लगभग 66% की बढ़ोतरी होगी।

EPFO क्या है?

EPFO दुनिया के सबसे बड़े सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में से एक का मैनेजमेंट करता है। यह एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF), एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) और एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) स्कीम का संचालन करता है। लेटेस्ट EPFO ​​आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.98 करोड़ सदस्य करीब 7.68 लाख कंपनियों से जुड़े हैं। EPS के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलता है। EDLI स्कीम EPF सदस्यता से जुड़ा इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है।

ये भी पढ़ें- EPS Pension: नई वेज सीलिंग के बाद अब मिलेगी ₹12,500 पेंशन! समझिए पूरा गणित

न नौकरी की तलाश, न कोई पहचान… फिर CMO को भेजा एक मैसेज और मिल गया ₹17 लाख का ऑफर

कभी-कभी करियर का बड़ा बदलाव किसी नौकरी के आवेदन से नहीं, बल्कि एक छोटे से मैसेज से शुरू होता है। कारोबारी विशाल ठाकुर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने एक कंपनी के CMO को LinkedIn पर बिना किसी जान-पहचान के मैसेज किया, ताकि यह पता चल सके कि बाजार में उनकी स्किल्स की असली कीमत कितनी है। उस समय विशाल नौकरी बदलने की तलाश में भी नहीं थे। लेकिन कुछ ही दिनों में CMO का जवाब आया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते इंटरव्यू तक पहुंच गई। इसके बाद जो हुआ, उसने विशाल को भी हैरान कर दिया। उन्हें ऐसी नौकरी का ऑफर मिला, जिसकी सैलरी उनकी मौजूदा कमाई से करीब तीन गुना थी।

नौकरी बदलने का इरादा नहीं था, बस खुद को परखना चाहते थे

यह कहानी 2021 की है। उस वक्त विशाल की सालाना कमाई करीब ₹6 लाख थी। खास बात यह थी कि वह सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश भी नहीं कर रहे थे। उनके मन में बस एक सवाल था क्या उनकी स्किल्स की मार्केट वैल्यू उनकी मौजूदा सैलरी से कहीं ज्यादा हो सकती है? इसी सवाल का जवाब पाने के लिए उन्होंने सामान्य नौकरी तलाशने के बजाय एक अलग रास्ता चुना।

सीधे कंपनी के CMO को भेज दिया मैसेज

विशाल ने एक B2B कंपनी के CMO को LinkedIn पर Cold Message और ईमेल भेजा। मकसद नौकरी मांगना नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करना था। कुछ दिनों के भीतर ही उन्हें जवाब मिल गया। इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और मामला कई राउंड के इंटरव्यू तक पहुंच गया। हालांकि, इंटरव्यू का अनुभव विशाल के लिए बिल्कुल आसान नहीं था।

फाइनल इंटरव्यू के बाद लगा था शायद मौका हाथ से गया

अंतिम बातचीत कंपनी के CMO के साथ हुई। विशाल के मुताबिक, इस दौरान कई सवालों के जवाब वह ठीक तरह से नहीं दे पाए। इंटरव्यू खत्म होने के बाद उन्हें खुद भी लगा कि शायद उन्होंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट अभी बाकी था।

जिस ऑफर की उम्मीद नहीं थी, वही सामने आ गया

इंटरव्यू के बाद कंपनी ने विशाल को ₹17 लाख सालाना के पैकेज का ऑफर दिया। यानी उनकी उस समय की ₹6 लाख सालाना कमाई के मुकाबले करीब तीन गुना। विशाल के लिए यह फैसला चौंकाने वाला था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इंटरव्यू में कुछ सवालों के जवाब न दे पाने के बावजूद कंपनी ने उन्हें क्यों चुना।

CMO ने बताया आखिर उनमें क्या खास दिखा

इस सवाल का जवाब उन्हें बाद में खुद CMO से मिला। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उन्हें विशाल की सीखने की इच्छा, उत्साह और जिज्ञासा प्रभावित कर गई थी। उनका मानना था कि अगर किसी व्यक्ति में सीखने और समस्याओं को हल करने का सही रवैया है, तो वह कुछ महीनों में अपनी जानकारी की कमियों को दूर कर सकता है। यानी इस बार नौकरी सिर्फ इस आधार पर नहीं मिली कि उम्मीदवार पहले से कितना जानता था, बल्कि इस बात पर भी मिली कि वह कितना सीखने को तैयार था।

₹17 लाख का ऑफर मिला, फिर भी नहीं की नौकरी

दिलचस्प बात यह है कि विशाल ने आखिरकार ₹17 लाख का ऑफर स्वीकार नहीं किया। उन्होंने एक दूसरी opportunity चुनी, जिसमें Remote Work और ज्यादा flexibility मिल रही थी। फिर भी यह इंटरव्यू उनके करियर में एक बड़ा मोड़ बन गया।

एक इंटरव्यू ने बदल दी खुद को देखने की नजर

विशाल के मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह अपनी कल्पना से कहीं बड़े अवसरों के लिए तैयार हो सकते हैं। इसी आत्मविश्वास ने बाद में उन्हें करियर में बड़े जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया। आज वह एक मार्केटिंग एजेंसी और AI स्टार्टअप चला रहे हैं। उनका मानना है कि अगर उस समय CMO ने उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं जताया होता, तो शायद आगे की उनकी पेशेवर यात्रा भी अलग होती।

Video: बुरे सपने में बदला कपल का हनीमून, दार्जिलिंग में बारबेक्यू के दौरान हुआ हादसा, बुरी तरह से झुलसी महिला

3 लाख की नौकरी, रिजेक्शन और ताना… 5 साल में इस लड़के ने कैसे हासिल किया 29 लाख का पैकेज?

कभी नौकरी के लिए दर-दर भटकने वाला एक इंजीनियर आज लाखों रुपये के पैकेज पर काम कर रहा है। 2019 में B.Tech करने के बाद इस युवक के पास न अच्छी नौकरी थी और न ही करियर को लेकर कोई स्पष्ट दिशा। कई बार रिजेक्शन और मुश्किलों का सामना करने के बावजूद उसने कोशिश जारी रखी। Reddit के r/Indian_flex पर शेयर की गई उसकी कहानी बताती है कि करियर की शुरुआत भले ही कमजोर हो, लेकिन आगे की राह बदली जा सकती है।

इंजीनियरिंग के बाद भी नहीं थी नौकरी की तैयारी

युवक ने बताया कि कॉलेज के दौरान उसका पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था। इंजीनियरिंग उसके लिए पसंद का करियर नहीं था। वह गेमिंग में काफी दिलचस्पी रखता था और दोस्तों के साथ वक्त बिताने में ज्यादा सहज महसूस करता था।

2019 में B.Tech पूरी करने के बाद उसका प्लेसमेंट नहीं हुआ। परिवार की उम्मीदें अलग थीं। पिता चाहते थे कि वह IT सेक्टर में अच्छी नौकरी हासिल करे। नौकरी नहीं मिलने की वजह से घर में तनाव बढ़ने लगा और युवक ने बेंगलुरु जाने का फैसला किया।

बेंगलुरु में भी नहीं बदली तस्वीर

नौकरी की तलाश में बेंगलुरु पहुंचने के बाद भी उसके सामने सबसे बड़ी परेशानी स्किल की कमी थी। कुछ दोस्तों के साथ रहते हुए शुरुआती दिन किसी नए कॉलेज लाइफ जैसे ही गुजरते रहे। इसी बीच एक रेफरेंस के जरिए उसे यूरोप बेस्ड स्टार्टअप में करीब ₹12,000 महीने की नौकरी मिली। लेकिन काम में जरूरी तकनीकी पकड़ नहीं होने के कारण वह वहां ज्यादा समय नहीं टिक पाया। करीब 20 दिन बाद उसकी नौकरी चली गई।

कोविड ने और बढ़ाई परेशानी

नौकरी जाने के कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी आ गई। लॉकडाउन के कारण हालात और मुश्किल हो गए। आखिरकार जून 2020 में वह घर लौट आया। उस समय परिवार को लगता था कि वह नौकरी कर रहा है, जबकि वह कई महीनों से बेरोजगार था। माता-पिता के सवालों से बचने के लिए उसे अपनी नौकरी और सैलरी को लेकर झूठ तक बोलना पड़ा। करीब नौ महीने बाद आखिरकार उसे एक सर्विस बेस्ड कंपनी में नौकरी मिल गई। पैकेज था सिर्फ ₹3.37 LPA, लेकिन उसके लिए यह नौकरी किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी।

यहीं से लौटा आत्मविश्वास

कम सैलरी के बावजूद इस नौकरी ने उसके अंदर एक बड़ा बदलाव किया। प्रोजेक्ट में उसका प्रदर्शन अच्छा रहा और वह टीम के प्रमुख परफॉर्मर्स में शामिल होने लगा। यहीं उसे महसूस हुआ कि शायद उसमें उतनी कमी नहीं है, जितना वह खुद समझता था। इसके बाद उसने बेहतर अवसरों के लिए इंटरव्यू देना शुरू किया।

कई बार ऑफर मिला, लेकिन किस्मत ने रोका

2022 में उसने ₹7.72 LPA के एक अवसर के लिए इंटरव्यू के सभी जरूरी राउंड पार कर लिए, लेकिन HR राउंड में कुल अनुभव से जुड़ी शर्त के कारण चयन नहीं हो पाया।

बाद में उसे Big4 कंपनी में ₹8.75 LPA का ऑफर मिला। नौकरी शुरू करने के कुछ ही समय बाद उसने ₹16.5 LPA का इंटरव्यू भी क्लियर किया, लेकिन करियर के शुरुआती गैप की वजह से HR राउंड में फिर रिजेक्शन हो गया।

यह उसके लिए बेहद निराशाजनक दौर था, क्योंकि तकनीकी और इंटरव्यू प्रक्रिया पार करने के बावजूद अंतिम चरण में मौका हाथ से निकल गया।

शादी से पहले बदली कमाई की तस्वीर

कुछ समय बाद उसकी शादी तय हुई। शादी से करीब 20 दिन पहले उसे एक नई कंपनी से ऑफर मिला और पैकेज बढ़कर ₹15.8 LPA हो गया। इसके बाद भी उसने ग्रोथ की तलाश जारी रखी। करीब एक साल बाद उसने फिर स्विच करने का फैसला किया और एक Big4 कंपनी से शुरुआत में ₹25.3 LPA का ऑफर मिला।

My Career Journey from Unemployed to Good Pay with heartbreaks

by

u/itsnotsoez in

Indian_flex

नेगोशिएशन के बाद पहुंचा ₹29.05 LPA

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। दूसरी तरफ से काउंटर ऑफर मिलने के बाद पैकेज में और बदलाव हुआ। बातचीत के बाद Big4 कंपनी का ऑफर बढ़कर ₹29.05 LPA हो गया, जिसमें वैरिएबल और जॉइनिंग बोनस शामिल था। यानी जिस शख्स ने अपने करियर की शुरुआत ₹12 हजार महीने की नौकरी और फिर ₹3.37 LPA के पैकेज से की थी, वह कुछ वर्षों में करीब 29 लाख रुपये के पैकेज तक पहुंच गया।

‘मैं एक्सपर्ट नहीं, लेकिन कोशिश करता हूं’

युवक ने अपनी कहानी में खुद को प्रोग्रामिंग का बहुत बड़ा एक्सपर्ट नहीं बताया। उसका कहना है कि वह चीजों को समझने, काम पूरा करने और लगातार प्रयास करने पर भरोसा करता है। उसकी कहानी की खास बात यही है कि करियर में कई बार दरवाजे बंद हुए, लेकिन उसने कोशिश करना नहीं छोड़ा। नौकरी छूटने से लेकर रिजेक्शन और कम पैकेज तक, हर मुश्किल के बाद उसने अगला मौका तलाशा।

Video: घायल तेंदुए के पास पहुंचते ही बदला उसका मिजाज, अधिकारी पर झपटा जानवर, देखें पूरा वीडियो

क्या हर सैलरी हाइक के लिए नौकरी बदलना सही है? निहार पाटिल ने बताया दूसरा रास्ता

पुणे के निहार पाटिल की जॉब स्विचिंग को लेकर दी गई सलाह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि करियर में एक ऐसा पड़ाव आता है, जब हर बार सिर्फ सैलरी बढ़ाने के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं होता। खासकर जब नई नौकरी में मिलने वाला हाइक महज 20-30 हजार रुपये का हो, तो टैक्स और दूसरे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह बढ़ोतरी उतनी बड़ी नहीं रह जाती।निहार के मुताबिक, नौकरी चुनते समय केवल पैकेज पर ध्यान देने के बजाय अच्छा मैनेजर, बेहतर प्रोजेक्ट, जॉब सिक्योरिटी और वर्क-लाइफ बैलेंस भी देखना चाहिए।

उनका मानना है कि एक स्थिर नौकरी के साथ अपने खाली समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, कुछ नया शुरू करने या अतिरिक्त इनकम सोर्स बनाने में किया जा सकता है। इसी सोच को लेकर उनकी बात पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

1.5 से 2 लाख की सैलरी के बाद बदलें नजरिया

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में निहार ने कहा कि भारत में जब किसी की मासिक सैलरी करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, तो नौकरी बदलने को लेकर सोच थोड़ी अलग होनी चाहिए। उनका तर्क है कि इस स्तर पर ऐसी कंपनियों और भूमिकाओं की संख्या कम हो जाती है, जहां बहुत बड़ा सैलरी जंप मिल सके। ऐसे में अगर नई नौकरी से सिर्फ 20-30 हजार रुपये ज्यादा मिल रहे हैं, तो टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाला वास्तविक अंतर काफी कम महसूस हो सकता है।

ज्यादा CTC का मतलब ज्यादा रिस्क भी?

निहार ने नौकरी बदलने से जुड़े एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि ज्यादा सैलरी के साथ CTC भी बढ़ता है और कंपनियों में होने वाली री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी के दौरान यह एक जोखिम बन सकता है। ऐसे में अगर मौजूदा कंपनी में काम अच्छा चल रहा है, मैनेजर सपोर्टिव है और करियर स्थिर है, तो केवल छोटे सैलरी हाइक के लिए नौकरी छोड़ना जरूरी नहीं है।

9 से 5 के बाद बनाएं अपना ‘5 से 9’

निहार की सलाह का सबसे दिलचस्प हिस्सा नौकरी के बाहर की जिंदगी को लेकर है। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो उसके बाद के समय को अपनी ग्रोथ के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। नई स्किल सीखना, अपना कोई प्रोजेक्ट शुरू करना या कमाई का दूसरा जरिया तैयार करना भविष्य में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।

उनके मुताबिक, करियर का अंतिम लक्ष्य केवल नौकरी से ज्यादा पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। असली मकसद ऐसी जिंदगी बनाना होना चाहिए, जहां आपकी पूरी आर्थिक सुरक्षा सिर्फ एक नौकरी पर निर्भर न हो।

सोशल मीडिया पर छिड़ी दिलचस्प बहस

निहार की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई। कुछ लोगों ने उनकी सोच को सही बताते हुए कहा कि एक स्तर के बाद फोकस मल्टीपल इनकम सोर्स, बेहतर लाइफस्टाइल और उद्देश्यपूर्ण जिंदगी पर होना चाहिए। वहीं, कुछ यूजर्स ने कॉरपोरेट वर्क कल्चर की हकीकत सामने रखी। एक यूजर ने कहा कि इतनी ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के पास अक्सर दूसरी चीजों के लिए समय ही नहीं बचता, क्योंकि कंपनियां उनसे दिन-रात उपलब्ध रहने की उम्मीद करती हैं।

एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कई कंपनियों में 9 से 5 का मतलब अब 9 से 9 हो चुका है। ऐसे में नौकरी के बाद किसी दूसरी चीज पर ध्यान देना आसान नहीं।

सिर्फ नौकरी या पूरी जिंदगी? असली सवाल यही है

एक यूजर ने इस बहस में संतुलित नजरिया रखते हुए कहा कि 5 से 9 को बेहतर बनाने के साथ-साथ 9 से 5 में भी संतुलन जरूरी है, क्योंकि अगर नौकरी ही नीरस और थकाऊ हो जाए तो बाकी चीजों पर भी असर पड़ता है।

Video: दिल्ली में नहीं भाया वड़ा पाव तो पकड़ ली मुंबई की फ्लाइट, 20 रुपये के लिए खर्चे 15 हजार

 

Highest Paying Jobs: सॉफ्टवेयर इंजीनियर नहीं, ये लोग कमा रहे लाखों! PG मालिक से चायवाले तक की लिस्ट वायरल

भारत में अक्सर युवाओं को बताया जाता है कि IIT की पढ़ाई, FAANG जैसी बड़ी टेक कंपनियों में नौकरी या Data Structures and Algorithms (DSA) में महारत हासिल करना अच्छी कमाई का सबसे आसान रास्ता है। लेकिन टेक और AI कमेंटेटर साक्षी ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार लिस्ट शेयर कर इस सोच को ही उलट दिया। उन्होंने भारत में इस समय सबसे ज्यादा कमाई करने वाले लोगों की एक मजाकिया रैंकिंग साझा की, जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियर टॉप पर नहीं, बल्कि काफी पीछे नजर आए। इस लिस्ट में PG मालिक, मकान मालिक, पानी के टैंकर वाले और चाय-सिगरेट की दुकान चलाने वाले शामिल हैं।

नंबर-1 पर PG मालिक, एक कमरे से लाखों की कमाई

साक्षी की इस मजेदार रैंकिंग में सबसे ऊपर PG मालिक को रखा गया। उन्होंने बताया कि शहरों में बढ़ती नौकरी और किराए की मांग का फायदा PG के मालिकों को मिल रहा है। उनके मुताबिक, एक कमरे में तीन लोगों को रखा जाता है और हर व्यक्ति से करीब ₹10,000 से ₹15,000 तक किराया लिया जाता है। इस हिसाब से कुछ PG मालिक किराया और दूसरे खर्च निकालने के बाद भी ₹1 लाख से ₹1.5 लाख महीने तक कमा सकते हैं। यही वजह है कि पोस्ट में PG बिजनेस को आज के दौर के सबसे कमाई वाले कामों में से एक बताया गया।

बेंगलुरु के मकान मालिक भी पीछे नहीं

लिस्ट में तीसरे नंबर पर बेंगलुरु के मकान मालिक का जिक्र किया गया। टेक सिटी में किराए की बढ़ती मांग को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चाएं होती रहती हैं। पोस्ट में मजाकिया अंदाज में बताया गया कि दो बेडरूम का फ्लैट खरीदकर उसे करीब ₹50,000 महीने के किराए पर देना, हर साल किराया बढ़ाना और WhatsApp पर सिर्फ ‘last price’ लिखकर बातचीत खत्म करना भी कमाई का शानदार तरीका बन गया है।

पानी के टैंकर वाले भी बने ‘बिजनेस किंग’

बेंगलुरु में पानी की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इसी को लेकर साक्षी ने पानी के टैंकर संचालकों को भी अपनी लिस्ट में जगह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा कि ये लोग बेंगलुरु का ही पानी वापस बेंगलुरु के लोगों को बेचते हैं। पानी की कमी के समय टैंकरों की मांग बढ़ने से इस कारोबार की कमाई भी बढ़ जाती है।

ब्रोकरों की कमाई का भी किया जिक्र

रैंकिंग में प्रॉपर्टी ब्रोकर भी शामिल हैं। पोस्ट के मुताबिक, कुछ ब्रोकर किरायेदारों को कई ऐसे घर दिखाते हैं जो उनकी जरूरत के मुताबिक नहीं होते और आखिर में डील होने पर किरायेदार और मकान मालिक, दोनों से करीब एक महीने के किराए के बराबर कमीशन ले लेते हैं। बेंगलुरु जैसे शहरों में लगातार घर बदलने वाले किरायेदारों की बड़ी संख्या के कारण यह काम भी अच्छी कमाई वाला बताया गया।

टेक पार्क के बाहर चाय-सिगरेट वाला भी हिट

इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जिस शख्स को रखा गया, वह शायद सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम है टेक पार्क के बाहर चाय, सिगरेट और स्नैक्स बेचने वाला दुकानदार। साक्षी ने उसे टेक इंडस्ट्री का ‘अनसंग हीरो’ बताया। उनके अनुसार, हजारों सॉफ्टवेयर इंजीनियर रोजाना चाय, सिगरेट और स्नैक्स के लिए ऐसी दुकानों पर निर्भर रहते हैं। पोस्ट में अनुमान लगाया गया कि अच्छी लोकेशन वाली ऐसी दुकान से कुछ दुकानदार ₹30,000 से ₹50,000 महीने तक कमा सकते हैं।

न MBA, न फंडिंग, फिर भी कमाई!

इस पूरी पोस्ट का सबसे मजेदार हिस्सा यही था। चाय-सिगरेट की दुकान के लिए न किसी MBA की जरूरत है, न pitch deck की और न ही startup funding की। साक्षी ने इसी अंदाज में टेक इंडस्ट्री पर तंज कसते हुए बताया कि जहां इंजीनियर नौकरी और प्रमोशन के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं, वहीं कुछ छोटे कारोबारी रोजमर्रा की जरूरतों के दम पर अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सॉफ्टवेयर इंजीनियरों पर आया सबसे बड़ा तंज

पोस्ट के अंत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को लेकर सबसे मजेदार टिप्पणी की गई। साक्षी ने लिखा कि जब बाकी लोग अलग-अलग तरीकों से कमाई कर रहे हैं, तब सॉफ्टवेयर इंजीनियर रात 2 बजे तक DSA के सवाल हल कर रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि अगली salary hike अच्छी होगी।

सोशल मीडिया यूजर्स ने भी लिए मजे

साक्षी की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसे खबर लिखने तक 1.5 लाख से ज्यादा व्यूज मिले। यूजर्स ने भी अपने-अपने अंदाज में इस रैंकिंग पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने मजाक करते हुए कहा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने कमाई का सबसे मुश्किल रास्ता चुना है और उन्हें DSA की तैयारी के बजाय पानी का टैंकर खरीद लेना चाहिए था। एक अन्य यूजर ने बेंगलुरु का असली ‘product-market fit’ AI या सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि चाय, प्रॉपर्टी और मेट्रो से दूरी का गणित बताया। एक यूजर ने टैक्स को लेकर भी तंज कसा और कहा कि इन कामों में कमाई करने वालों में शायद सॉफ्टवेयर इंजीनियर ही ऐसा व्यक्ति है जो नियमित रूप से इनकम टैक्स और ITR जैसी चीजों से जूझता है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

MPSC Paper Leak: गर्लफ्रेंड को पास कराने के लिए एमपीएससी का पेपर कर दिया लीक! इंस्पेक्टर ने खोला राज, एग्जाम रद्द; 6 गिरफ्तार

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो HRA कितना बढ़ेगा? समझिए हर पे-लेवल का पूरा हिसाब

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर करीब 50-55 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी है। अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो उसके साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी बढ़ सकता है, क्योंकि इसकी गणना बेसिक पे के आधार पर होती है।

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत HRA शहर की कैटेगरी के हिसाब से मिलता है। X कैटेगरी शहरों में सबसे ज्यादा HRA मिलता है। वहीं, Y और Z कैटेगरी में यह क्रमश: कम होता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के तहत अंतिम HRA कितना होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

HRA कैसे बढ़ सकता है?

फिलहाल HRA की मौजूदा दरें इस तरह हैं।

  • X शहर: 30%
  • Y शहर: 20%
  • Z शहर: 10%

नीचे की गणना 2x, 2.5x और 3x फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर आधारित है। यह सिर्फ संभावित हिसाब है, अंतिम फैसला सरकार करेगी।

chart ggks

लेवल-4 कर्मचारी का अनुमानित HRA

मान लीजिए किसी लेवल-4 कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर के बाद ₹51,000 हो जाती है। ऐसे में HRA का अनुमान इस तरह बनता है।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹15,300
Y (20%)₹10,200
Z (10%)₹5,100

अगर यही कर्मचारी 2.5 फिटमेंट फैक्टर के दायरे में आता है और उसकी बेसिक पे ₹63,750 हो जाती है, तो HRA भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹19,125
Y (20%)₹12,750
Z (10%)₹6,375

यानी सिर्फ 2.0 से 2.5 फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर ही X शहर में HRA करीब ₹3,825, Y शहर में ₹2,550 और Z शहर में ₹1,275 बढ़ सकता है।

HRA बढ़ने का सीधा मतलब क्या है?

कई कर्मचारी सिर्फ बेसिक सैलरी पर ध्यान देते हैं। लेकिन HRA बढ़ने का असर हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी पर भी पड़ता है। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो उसी के साथ HRA की रकम भी ऊपर चली जाती है।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर सीधे HRA तय नहीं करता। यह सिर्फ बेसिक पे बढ़ाता है और HRA उसी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का तय प्रतिशत होता है। इसलिए अंतिम बढ़ोतरी का सही आंकड़ा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजन के लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।