ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना हुआ आसान, यहां जानिए थोड़ी-थोड़ी सेविंग्स से कैसे कर सकते हैं सोने में बड़ा निवेश

ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना पहले कभी इतना आसान नहीं था। आप थोड़ी-थोड़ी बचत से भी गोल्ड में अब बड़ा निवेश कर सकते हैं। कई बड़ी गोल्ड ज्वेलरी कंपनियों ने फिनटेक से समझौते किए हैं। इससे कम इनकम वाले परिवारों के लिए भी ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी खरीदना आसान हो गया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

पेटीएम ने कैरेटलेन से मिलाया है हाथ

कैरेटलेन ने Paytm से हाथ मिलाया है। इससे पेटीएम के यूजर्स डिजिटल गोल्ड में अपने छोटे-छोटे निवेश का इस्तेमाल कैरेटलेन से ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपने पेटीएम के जरिए डिजिटल गोल्ड में धीरे-धीरे करके कुल 6,000 रुपये का निवेश किया है। आपको कैरेटलेन की कोई 8,000 रुपये की ज्वेलरी पसंद है तो 6,000 रुपये का पेमेंट आपके डिजिटल गोल्ड में निवेश से हो जाएगा। बाकी 2,000 रुपये का पेमेंट आप यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए कर सकते हैं।

कैरेटलोन गोल्ड ज्वेलरी की होम डिलीवरी भी करेगी

अगर आप कैरेटलेन से गोल्ड ज्वेलरी की होम डिलीवरी चाहते हैं तो यह सुविधा भी उपलब्ध है। कई शहरों में कैरेटलेन की यह सुविधा उपलब्ध है। कंपनी आपकी गोल्ड ज्वेलरी की पैकिंग और शिपमेंट करेगी। आप पेटीएम ऐप पर ऑर्डर कनफर्मेशन, ट्रैकिंग और पर्चेज डिटेल्स देख सकते हैं। इसका मतलब है कि यह पूरा प्रोसेस ट्रांसपेरेंट है। पेटीएम के यूजर्स इस तरह अपनी छोटी-छोटी सेविंग्स का इस्तेमाल अपनी पसंद की ब्रांडेड ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं।

जेन डायमंड की यह स्कीम सोने में निवेश को आसान बनाती है

Zen Diamond India ने My Gold Multiplier Plan शुरू किया है। इसके जरिए ग्राहक हर महीने के कंट्रिब्यूशन से 999 फाइन हॉलमार्किंग गोल्ड ज्वेलरी खरीद सकते हैं। कंपनी के एमडी नील सोनावाला ने बताया कि इस स्कीम की मैच्योरिटी पर ग्राहक अपने निवेश का इस्तेमाल गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के लिए कर सकते हैं। कंपनी की तरफ से उन्हें सोने का 30 फीसदी रिवॉर्ड के रूप में भी मिलेगा। इतना ही नहीं ग्राहक अपने खुद के 24-कैरेट गोल्ड का इस्तेमाल भी रिडेम्प्शन के समय कर सकते हैं।

इंस्टाओन ईएमआई प्रोग्राम का भी उठा सकते हैं फायदा

जेन डायमंड ने इंस्टाओन ईएमआई प्रोग्राम भी शुरू किया है। कंपनी का कहना है कि यह जीरो-कॉस्ट, जीरो-डाउनपेमेंट और जीरो इंटरेस्ट ईएमआई ऑप्शन है। ग्राहक को कंपनी के स्टोर पर हर 90,000 के खर् पर 1 ग्राम गोल्ड कॉइन भी मिलता है। कैरेटलेन और जेन डायमंड की ईजी गोल्ड ज्वेलरी पर्चेज स्कीम ग्राहक को छोटी सेविंग्स से ब्रांडेड गोल्ड ज्वेलरी में निवेश का मौका देती हैं।

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स्कीम का फायदा उठाने से पहले ये बातें जरूर जान लें

एक बात ग्राहक को ध्यान में रखने की जरूरत है कि ऐसी स्कीमें आरबीआई के रेगुलेशन के तहत नहीं आती हैं। इसका मतलब है कि अगर कंपनी से आपका किसी तरह का विवाद होता है तो आप उसकी शिकायत आरबीआई में नहीं कर सकते। हालांकि, आम तौर पर ऐसा नहीं होता है।

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन का क्या होता है, कौन भरता है? घर खरीदने से पहले बैंक लोन और EMI से जुड़े ये नियम जान लीजिए

तलाक के जरिए दो लोग कानूनी तौर पर अपनी शादी को खत्म कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं होता कि किसी बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन के साथ किया गया आपका जॉइंट फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट भी खुद ब खुद खत्म नहीं हो जाता। अक्सर पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन लेते हैं। जब शादी टूटती है तो ज्यादातर लोगों को लगता है कि संपत्ति का बंटवारा होते ही लोन की जिम्मेदारी भी खत्म हो गई जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। बैंक के साथ साइन किए गए लोन एग्रीमेंट की शर्तें तब तक लागू रहती हैं जब तक कि बकाया कर्ज पूरी तरह चुकता न हो जाए या बैंक औपचारिक रूप से बदलाव के लिए सहमत न हो जाए। सिर्फ तलाक की डिग्री लोन कॉन्ट्रैक्ट को नहीं बदलती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी बॉरोअर्स को सलाह देता है कि वे अपने होम लोन के नियमों और शर्तों को ध्यानपूर्वक समझें और उन्हें लिखित रूप में अपने पास रखें

क्या तलाक के बाद भी दोनों को भरनी होगी EMI?

जॉइंट होम लोन के मामले में दोनों कर्जदारों को कभी भी यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि जो जीवनसाथी घर में रह रहा है या जिसे संपत्ति मिल रही है, वह ऑटोमेटिकली पूरी ईएमआई के लिए जिम्मेदार हो जाएगा। अगर मूल एग्रीमेंट के तहत दोनों व्यक्ति को-बॉकोअर्स हैं तो बैंक दोनों को समान रूप से जिम्मेदार ठहरा सकता है।

अगर कोई एक पक्ष ईएमआई देना बंद कर देता है तो बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए दूसरे पक्ष पर दबाव बना सकता है। ऐसा वो तब भी कर सकता है चाहे उनके बीच तलाक के समझौते में कुछ भी तय हुआ हो। इसलिए सेपरेशन की स्थिति में भी जरूरी है कि आप कानून और बैंक एक्सपर्ट की मदद से इससे जुड़े नियमों को समझ लें।

संपत्ति का मालिकाना हक और लोन की जिम्मेदारी में अंतर

संपत्ति का मालिकाना हक और होम लोन का दायित्व दो अलग-अलग विषय हैं। सिर्फ इस बात से कि आपने को-बॉरोअर के रूप में साइन किए हैं, ये साबित नहीं होता कि प्रॉपर्टी में आपका आधा या बराबर का हिस्सा है। इसी तरह प्रॉपर्टी में स्वामित्व का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि आप ही एकमात्र मालिक हैं और लोन के लिए सिर्फ आप ही देनदार हैं। तलाक के निपटारे के दौरान इन दोनों पहलुओं को अलग-अलग और गहराई से देखा जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई कानूनी या फाइनेंशियल डिस्प्यूट न पैदा हो।

जॉइंट होम लोन से बाहर निकलने के तीन मुख्य विकल्प

तलाक के बाद जॉइंट होम लोन को निपटाने के लिए आमतौर पर तीन तरह के व्यावहारिक रास्ते अपनाए जाते हैं-

एक जीवनसाथी द्वारा लोन का पूरा टेकओवर: एक आम समाधान यह है कि एक पक्ष संपत्ति अपने पास रखे और पूरी EMI भरे। इसके लिए बैंक की औपचारिक स्वीकृति अनिवार्य है। बैंक दूसरे कर्जदार का नाम हटाने या लोन को रीस्ट्रक्चर करने से पहले बाकी जीवनसाथी की आय, क्रेडिट प्रोफाइल और पुनर्भुगतान क्षमता का रीवैल्यूएशन करता है। जब तक यह औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक निजी समझौते से कोई भी पक्ष लोन से मुक्त नहीं होता।

संपत्ति बेचकर लोन चुकता करना: दूसरा विकल्प यह है कि संपत्ति को बेच दिया जाए और मिलने वाले पैसे से बैंक का पूरा बकाया लोन चुकता कर दिया जाए। अगर घर लोन की राशि से अधिक कीमत पर बिकता है तो बची हुई शेष रकम को दोनों पक्ष अपने मालिकाना हक और आपसी समझौते के आधार पर बांट सकते हैं। लेकिन अगर बिक्री मूल्य लोन राशि से कम है, तो पहले उस घाटे की भरपाई दोनों को मिलकर करनी होगी।

संयुक्त स्वामित्व जारी रखना: कुछ मामलों में विशेष रूप से जहां बच्चों का भविष्य जुड़ा होता है, पूर्व पति-पत्नी कुछ समय के लिए संपत्ति को संयुक्त रूप से बनाए रखने का निर्णय ले सकते हैं। यह व्यवस्था तभी काम कर सकती है जब ईएमआई भुगतान, घर का रखरखाव, प्रॉपर्टी टैक्स, रहने का अधिकार और भविष्य में बिक्री या हस्तांतरण से जुड़े नियम लिखित में स्पष्ट हों।

तलाक के सेटलमेंट में इन बातों का रखें ध्यान

तलाक के समझौते में सिर्फ प्रॉपर्टी का उल्लेख करने के बजाय होम लोन का स्पष्ट और खास रूप से विवरण होना चाहिए। दस्तावेज में यह साफ लिखा होना चाहिए कि घर में कौन रहेगा, ईएमआई का भुगतान कौन करेगा, संपत्ति में किसका कितना हिस्सा है और भविष्य में घर बेचने पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

व्यावहारिक तरीका यह है कि सबसे पहले बैंक से नवीनतम लोन स्टेटमेंट लें, संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेजों की जांच करें, बैंक के साथ अपनी योजना पर चर्चा करें और फिर सहमति से बने फैसले को अपने तलाक के कानूनी समझौते में शामिल करें। जब भी किसी सह-कर्जदार का नाम लोन से हटाया जाए या लोन बंद किया जाए, तो बैंक से इसका लिखित प्रमाण पत्र जरूर ले लें।

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

Rahul Gandhi : राहुल गांधी का मोदी सरकार पर निशाना, सुभाष चंद्रा के NCLT मामले पर उठाए सवाल, बोले- देश में 2 सिस्टम

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

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राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।

 

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।

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सुभाष चंद्रा के मामले में NCLT का बड़ा फैसला

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राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।

 

हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।

 

80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान

NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।

 

मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।

22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान

NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।

 

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।

 

राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस

सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

₹2.5 लाख महीना कमाता है ये 29 साल का युवक फिर भी कर्ज में डूबा! जानिए शादी-घर ने कैसे बिगाड़ा पूरा हिसाब

Bengaluru Viral News: हैंडसम सैलरी और अच्छा करियर होने के बावजूद खराब फाइनेंशियल मैनेजमेंट किसी को भी कर्ज के जाल में फंसा सकता है। बेंगलुरु के रहने वाले 29 वर्षीय एक शादीशुदा युवक की कहानी इसी बात का लेटेस्ट उदाहरण बनी है। टैक्स कटने के बाद हर महीने ₹2.5 लाख की कुल कमाई करने के बावजूद यह युवक शादी और घर के रिनोवेशन पर बड़ा खर्च करने की वजह से कई लोन और कर्ज के भारी बोझ तले दब गया है। युवक ने सोशल मीडिया पर अपने फाइनेंशियल स्टेटस को शेयर करते हुए लोगों से सलाह मांगी है।

95 फीसदी सेविंग्स खत्म, शादी और घर के रेनोवेशन ने बिगाड़ा बजट

युवक ने अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि ‘मैं हाल ही में एक ऐसे कर्ज के जाल में फंस गया, जिसमें मैं कभी नहीं फंसना चाहता था। मैंने हाल ही में दो बड़े खर्च किए एक मेरी शादी और दूसरा घर का रेनोवेशन, जिसने मेरी 95 प्रतिशत बचत को खत्म कर दिया।’

रेडिट पर की गई युवक की इस पोस्ट के मुताबिक उसके माता-पिता ने उसे अपने पैतृक घर पर एक और मंजिल बनाने के लिए जोर दिया ताकि उसे किराए पर दिया जा सके। इस घर के रेनोवेशन में कुल 35 लाख रुपये खर्च हुए। उसने अपनी सेविंग्स में से ₹15 लाख दिए और बाकी के ₹20 लाख लोन लिए। उसकी शादी का खर्च ₹30 लाख से अधिक हो गया। शादी के खर्चों के लिए उसने अपने स्टॉक्स (शेयर) बेचे लेकिन आखिरी समय में कैश की कमी होने की वजह से उसे 9.1 फीसदी के इंट्रेस्ट पर 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेना पड़ा। उसने बताया कि आखिरी समय में इस अमाउंट के कैश का बंदोबस्त करने के लिए उसके पास दूसरा कोई ऑप्शन नहीं था।

EMI और क्रेडिट कार्ड का भारी-भरकम बोझ

घर के रेनोवेशन और शादी के अलावा युवक पर कार लोन भी है। इसपर अभी 3 लाख रुपये बचे हुए हैं। उसके माता-पिता फाईनेंशियली से उसी पर निर्भर हैं और राशन-पानी व अन्य घरेलू खर्चों के लिए उसी के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। हर महीने युवक को होम लोन में 35000, पर्सनल लोन ईएमआई 16000, कार लोन पर 15000, किराए और बिल पर 37000, क्रेडिट कार्ड के बिल पर 70 हजार, राशन के मद में 15 हजार, आउटिंग और मूवी पर करीब 6000 खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा 1500 रुपये SIP इन्वेंस्टमेंट में जाते हैं।

युवक के पास फिलहाल स्टॉक्स में 3 लाख रुपये और एफडी में 1 लाख रुपये जमा हैं। इसके अलावा उसके पास 50 सॉवरेन सोना है, जिसे वह बेचना या इस्तेमाल करना नहीं चाहता। युवक ने बताया है कि ‘हम पार्टियां नहीं करते, न ही मैं अक्सर बाहर खाता हूं। मैं अपने कैश फ्लो को सुधारने के लिए नौकरी बदलने की योजना बना रहा हूं, लेकिन इसमें अभी समय लग रहा है।’ अब वह किसी भी तरह अपने कर्जों को जल्द चुकता करने, क्रेडिट कार्ड के खर्चों पर लगाम लगाने और मासिक बचत बढ़ाने के तरीके तलाश रहा है।

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इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि, ‘यह पति-पत्नी दोनों की मिलाकर कमाई है। अगर पति अपनी पत्नी की कमाई का इस्तेमाल अपने माता-पिता द्वारा इस्तेमाल किए गए क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए करेगा, तो नई-नवेली पत्नी नाराज हो सकती है और लड़ाई शुरू हो सकती है। इसके अलावा युवक ने पत्नी के पक्ष के खर्चों का जिक्र नहीं किया है, यकीनन पत्नी भी अपने माता-पिता को कुछ पैसे भेज रही होगी या शादी के लिए लिए गए किसी लोन की भरपाई कर रही होगी।’

दोस्त-रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने से पहले ठीक से सोच लें, नहीं तो बाद में बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का फैसला जल्दबाजी में नहीं करें। इस बारे में बगैर सोचे फैसला लेने से आप बाद में मुश्किल में फंस सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन के गारंटर की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर गारंटर मुश्किल में पड़ सकता है

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।

बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनाने के पीछे बैंक का मकसद अपने पैसे की सुरक्षा है। बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे को डूबने से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाता है। इसलिए लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में पहले वह लोन लेने वाले व्यक्ति से इसकी वजह पूछता है। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं होता है तो वह गारंटर से संपर्क करता है।

लोन पर डिफॉल्ट की स्थिति में गारंटर को भी बैंक भेजता है नोटिस

लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने पर बैंक पहले ग्राहक को नोटिस भेजता है। लगातार तीन ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक ग्राहक को रजिस्टर्ड नोटिस भेजता है। लगातार चार ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक बैंक ग्राहक और गारंटर दोनों को नोटिस भेजता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक के पास ग्राहक यानी लोन लेने वाले व्यक्ति और गारंटर के खिलाफ एक साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है।

पेमेंट में डिफॉल्ट का असर गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने के बाद अगर लोन का रीपेमेंट बंद हो जाता है तो इसका खराब असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि इससे गारंटर को खुद के लिए लोन लेने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनने से पहले आपको ठीक तरह से सोच समझ लेना चाहिए।

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व्यक्ति की वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी होने पर ही बनें गारंटर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको लोन का गारंटर तभी बनना चाहिए, जब लोन लेने वाला व्यक्ति आपका बहुत करीबी है। उदाहरण के लिए पत्नी, भाई, बहन के लोन लेने पर आप गांरटर बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी वित्तीय स्थिति और लोन चुकाने की क्षमता का पता होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स लंबी अवधि वाले लोन का गारंटर बनने से बचने की सलाह देते हैं।

RBI New Rule: होम लोन और पर्सनल लोन लेने वालों के लिए बड़ी खबर! RBI ला रहा है नए नियम, जानें आपकी EMI पर क्या पड़ेगा असर

RBI New Floating-Rate Draft: अगर आपने होम लोन, पर्सनल लोन ले रखा है या MSME लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फ्लोटिंग रेट लोन के ब्याज दरों, रीसेट फ्रीक्वेंसी और स्प्रेड को लेकर नए ड्राफ्ट नियम पेश किए हैं।

अगर इन प्रस्तावित नियमों को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो ये 1 अप्रैल 2027 से लागू हो जाएंगे। आरबीआई के इन नए नियमों का मकसद लोन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है ताकि बैंक मनमाने तरीके से स्प्रेड या ब्याज दरें न बढ़ा सकें। आइए इस ड्राफ्ट गाइडलाइंस को विस्तार से समझते हैं।

एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ेंगे सभी फ्लोटिंग पर्सनल लोन, ग्राहकों को होगा फायदा

आरबीआई के ड्राफ्ट के अनुसार, कमर्शियल बैंकों द्वारा दिए जाने वाले सभी फ्लोटिंग-रेट पर्सनल लोन और MSME लोन को एक एक्सटर्नल बेंचमार्क जैसे- रेपो रेट से जोड़ना अनिवार्य होगा।

फिलहाल कुछ लोन आंतरिक दरों जैसे- MCLR से जुड़े होते हैं, जिससे जब आरबीआई रेपो रेट घटाता है, तो बैंकों द्वारा ग्राहकों को तुरंत ब्याज दर कटौती का फायदा नहीं मिलता। एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ने के बाद रेपो रेट में बदलाव का सीधा असर आपकी लोन दर पर दिखेगा।

रिसेट फ्रीक्वेंसी पर सख्त नियम: 3 महीने में एक से ज्यादा बार नहीं बदलेगी दर

बैंकों द्वारा लोन की दरें कब-कब रीसेट होंगी, इसके लिए भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं:

3 महीने की सीमा: बैंक लोन की ब्याज दर रीसेट करने की समयसीमा खुद चुन सकते हैं, लेकिन यह 3 महीने में एक बार से ज्यादा नहीं हो सकती।

पूरे टेन्योर के लिए फिक्स: लोन एग्रीमेंट में जो रीसेट डेट और फ्रीक्वेंसी (जैसे- हर 3 महीने में) तय होगी, वह पूरे लोन कार्यकाल के दौरान समान रहेगी।

एग्रीमेंट में स्पष्टता: रीसेट की तारीख और बेंचमार्क का जिक्र लोन एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा।

क्रेडिट रिस्क प्रीमियम को लेकर कड़े नियम

बेंचमार्क दर के ऊपर बैंक जो अपना मार्जिन जोड़ते हैं, उसे ‘स्प्रेड’ कहा जाता है। इसमें क्रेडिट-रिस्क प्रीमियम, ऑपरेटिंग कॉस्ट और टर्म प्रीमियम शामिल होते हैं। अक्सर बैंक स्प्रेड बढ़ाकर ग्राहकों की ईएमआई बढ़ा देते हैं। नए नियमों के तहत, बैंक किसी ग्राहक का क्रेडिट रिस्क प्रीमियम केवल तभी बदल सकेंगे जब ग्राहक की क्रेडिट प्रोफाइल (CIBIL स्कोर/फाइनेंशियल स्थिति) में कोई बड़ा बदलाव आया हो और उसकी विस्तृत समीक्षा की गई हो।

स्प्रेड के अन्य घटकों को फ्लोटिंग-रेट लोन के लिए कम से कम 3 साल से पहले संशोधित नहीं किया जा सकता। इससे बैंकों द्वारा बिना किसी ठोस कारण के बीच में ही मार्जिन बढ़ाकर ईएमआई बढ़ा देने की प्रथा पर लगाम लगेगी।

पुराने लोन ग्राहकों के लिए क्या प्रावधान हैं?

आरबीआई ने मौजूदा लोन ग्राहकों के हितों का भी ध्यान रखा है:

  1. माइग्रेशन की डेडलाइन: आंतरिक या पुराने बेंचमार्क से जुड़े मौजूदा लोंस को 1 अप्रैल 2029 तक नए फ्रेमवर्क में शिफ्ट करना होगा।
  2. कोई चार्ज नहीं: इस ट्रांसफर के लिए बैंक ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकते।
  3. ग्राहक की सहमति जरूरी: माइग्रेशन केवल ग्राहक की स्पष्ट सहमति से होगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक को कोई वित्तीय नुकसान न हो।

ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

आरबीआई के इस नए फ्रेमवर्क से लोन लेने वाले ग्राहकों को स्पष्टता मिलेगी कि उनकी ईएमआई क्यों और कब बदल रही है। वैसे अभी ये सिर्फ एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है। आरबीआई द्वारा अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही ये नियम 1 अप्रैल 2027 से पूरी तरह प्रभावी होंगे।

बैंक ने अचानक क्यों रिजेक्ट कर दिया लोन? जानिए राजेश की इस एक भूल ने कैसे बिगाड़ा CIBIL का खेल!

Checking Credit Report Benefits: राजेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और सालों से अपनी हर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का बिल बिल्कुल समय पर भरते आए थे। उन्हें पूरा यकीन था कि उनका क्रेडिट स्कोर शानदार होगा। लेकिन जब वे अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होम लोन अप्लाई करने बैंक पहुंचे, तो बैंक अफसर ने उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया।

वजह थी उनकी क्रेडिट रिपोर्ट में एक ऐसा लोन ‘एक्टिव’ दिख रहा था, जिसे वे सालों पहले बंद कर चुके थे। साथ ही, एक ऐसे अनजान क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज थी, जिसके लिए उन्होंने कभी अप्लाई ही नहीं किया था।

राजेश की तरह ज्यादातर लोग क्रेडिट रिपोर्ट को तभी याद करते हैं जब उन्हें किसी लोन या नए क्रेडिट कार्ड की जरूरत होती है। लेकिन समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच न करना आपको भारी मुसीबत और वित्तीय नुकसान में डाल सकता है।

साल में कम से कम एक बार जरूर करें ‘फाइनेंशियल चेकअप’

बहुत से लोग सोचते हैं कि जब उन्होंने कोई ईएमआई मिस नहीं की है, तो रिपोर्ट देखने की क्या जरूरत? लेकिन जैसे हम अपनी सेहत के लिए रूटीन बॉडी चेकअप कराते हैं, वैसे ही साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना बेहद जरूरी है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी लोन हिस्ट्री और पर्सनल डिटेल्स सही तरीके से दर्ज हो रही हैं।

बड़ा लोन लेने से कुछ महीने पहले रिपोर्ट देखना क्यों है जरूरी?

अगर आप आने वाले कुछ महीनों में होम लोन, कार लोन या कोई बड़ा पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करने से ठीक पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर खंगालें। अगर रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी या गलत एंट्री पाई जाती है, तो उसे ठीक कराने में कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लगता है। लोन रिजेक्ट होने के बाद दौड़-भाग करने से बेहतर है कि आप पहले ही सतर्क रहें।

क्रेडिट रिपोर्ट में हो सकती हैं मानवीय और तकनीकी गलतियां

क्रेडिट रिपोर्ट पूरी तरह से गलतियों से मुक्त नहीं होती। कई बार बंद किए जा चुके लोन अकाउंट भी सिस्टम में ‘एक्टिव’ दिखाई देते हैं। समय पर चुकाई गई ईएमआई ‘डिलीटेड’ या ‘लेट पेमेंट’ के रूप में दर्ज हो जाती है। नाम या पैन कार्ड की स्पेलिंग मिस्टेक या आइडेंटिफिकेशन एरर की वजह से किसी और का लोन आपके नाम पर लिंक हो जाता है।

अनजान लोन या क्रेडिट कार्ड: कैसे करें फ्रॉड की पहचान

अगर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते समय आपको कोई ऐसा क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट दिखाई दे जिसके लिए आपने कभी अप्लाई ही नहीं किया था, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह आइडेंटिटी थेफ्ट या जालसाजी का संकेत हो सकता है। समय रहते शिकायत करने से आप किसी बड़े फ्रॉड का शिकार होने से बच सकते हैं।

सिर्फ 3 अंकों के क्रेडिट स्कोर पर न अटके रहें

ज्यादातर लोग सिर्फ अपना 3-अंकों का CIBIL/क्रेडिट स्कोर देखकर खुश या दुखी हो जाते हैं। लेकिन बैंक और वित्तीय संस्थान सिर्फ स्कोर ही नहीं, बल्कि पूरी रिपोर्ट की बारीकियों को देखते हैं:

  • आपके नाम पर कितने एक्टिव लोन चल रहे हैं?
  • आपने हाल में कितनी बार लोन के लिए इन्क्वायरी की है?
  • आपकी पुरानी रीपेमेंट हिस्ट्री कैसी रही है?

केवल रिपोर्ट देखने से नहीं सुधरेगा स्कोर, करने होंगे ये बदलाव

क्रेडिट रिपोर्ट सिर्फ एक आईना है। सिर्फ रिपोर्ट चेक करने से आपका क्रेडिट स्कोर नहीं बढ़ेगा। स्कोर बढ़ाने और बनाए रखने का असली तरीका आपकी वित्तीय आदतें हैं यानी समय पर ईएमआई भरना, क्रेडिट लिमिट का संतुलित इस्तेमाल करना और गैर-जरूरी लोन लेने से बचना। नियमित रिपोर्ट चेक करने का काम सिर्फ इतना है कि यह आपकी अच्छी आदतों पर कोई गलत दाग नहीं लगने देती।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹1.6 लाख सैलरी पर ₹1.85 लाख EMI! F&O ट्रेडिंग के चक्कर में लगा ₹60 लाख का चूना, चौंका देगी आईटी प्रोफेशनल की ये स्टोरी

Trading Loss Loan Trap: शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में रातों-रात अमीर बनने की चाहत कई लोगों के लिए बर्बादी का कारण बन रही है। मुंबई के एक 35 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल की आपबीती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर तेजी से वायरल हो रही है। MNC में मैनेजर के पद पर कार्यरत इस शख्स ने ट्रेडिंग में लगभग ₹80 लाख गंवा दिए हैं और अब वह ₹60 लाख के भारी-भरकम कर्ज के तले दब चुका है।

हालत यह है कि उसकी महीने की टेक-होम सैलरी ₹1.6 लाख है, जबकि बैंक और डिजिटल लोन ऐप्स की ईएमआई ही ₹1.85 लाख बनती है। सोशल मीडिया पर यूजर ने अपना दर्द शेयर करते हुए इस संकट से निकलने के रास्ते पूछे हैं।

कैजुअल ट्रेडिंग से शुरू हुआ सफर, ऐसे बना ₹60 लाख का कर्ज

रेडिट यूजर (gaushi1614) ने अपनी पोस्ट में बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उसने स्टॉक मार्केट और F&O ट्रेडिंग में कदम रखा था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर लत बन गई। पुराने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में वह और अधिक ट्रेडिंग करने लगा, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। ₹80 लाख गंवाने के बाद अब उस पर ₹60 लाख का बकाया कर्ज है।

  • दो पर्सनल लोन
  • डिजिटल लेंडिंग ऐप्स और NBFCs के लोन
  • ₹7 लाख से अधिक का बकाया क्रेडिट कार्ड बिल शामिल है।

घर चलाने के पैसे नहीं, परिवार से छिपा रखी है बर्बादी की कहानी

आईटी मैनेजर का कहना है कि उसकी प्राथमिकता किसी तरह अपनी मासिक ईएमआई का बोझ ₹1.85 लाख से घटाकर ₹1.2 से ₹1.3 लाख के स्तर पर लाना है, ताकि वह अपने परिवार के दैनिक खर्च संभाल सके और धीरे-धीरे पूरे कर्ज का भुगतान कर सके। यूजर ने बताया कि नए लोन लेने और क्रेडिट कार्ड का भारी इस्तेमाल करने के कारण बैंक अब उसे लोन कंसोलिडेशन या रीस्ट्रक्चरिंग की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस व्यक्ति की पत्नी और बच्चों को इस भारी कर्ज की भनक तक नहीं है। उसे डर है कि रिकवरी एजेंटों के घर आने पर उसके परिवार को सच पता चल जाएगा। हालांकि, उसने दावा किया है कि उसने अब तक एक भी ईएमआई बाउंस नहीं होने दी है, लेकिन अब स्थिति असहनीय हो गई है।

रेडिट यूजर्स ने दी काम की सलाह: ऐसे निकल सकते हैं कर्ज के जाल से

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और वित्तीय विशेषज्ञों ने इस परेशानी से उबरने के लिए व्यावहारिक और कड़े सुझाव दिए हैं:

1- सबसे महंगे कर्ज पहले चुकाएं

यूजर्स ने सलाह दी है कि क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन ऐप पर 36% से 42% तक का सालाना ब्याज लगता है। सबसे पहले संपत्ति जैसे- कार, ज्वेलरी बेचकर या रिश्तेदारों से बिना ब्याज की मदद लेकर इन हाई-इंटरेस्ट लोन का निपटारा करना चाहिए।

2- F&O ट्रेडिंग अकाउंट पूरी तरह बंद करें

ट्रेडिंग की लत आसानी से नहीं छूटती। इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट को स्थायी रूप से बंद कर देना चाहिए और कुछ समय के लिए हर तरह के निवेश से दूरी बना लेनी चाहिए।

3. पत्नी और परिवार से सच साझा करें

अकेले इतने बड़े मानसिक तनाव को झेलना मुश्किल है। रिकवरी एजेंटों के दबाव से पहले पत्नी को स्थिति के बारे में ईमानदारी से बताना चाहिए ताकि वे मिलकर जीवनशैली के खर्चों में कटौती कर सकें।

4. सिक्योर लोन या मोर्टगेज लोन का विकल्प

अगर घर या अन्य कोई संपत्ति है, तो हाई-कॉस्ट पर्सनल लोन को चुकाने के लिए कम ब्याज दर वाले लोन का विकल्प चुना जा सकता है, जिससे ईएमआई आधी हो सकती है।

Desperately need advice – 60L debt due to trading losses and I don’t know how to get out

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u/gaushi1614 in

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI Monetary Policy: आरबीआई ने इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाया, नहीं बढ़ेगी आपके होम लोन और कार लोन की EMI

आरबीआई ने रेपो रेट का ऐलान कर दिया है। उसने इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बना हुआ है। इसका मतलब है कि होम लोन और कार लोन की ईएमआई बढ़ने नहीं जा रही है। इसका अनुमान पहले से था। जानकारों का कहना था कि आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा जुलाई की पॉलिसी में रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करेंगे।

मनीकंट्रोल के पाल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स और एनालिस्ट्स का मानना था कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बनाए रखेगा। उसका रुख भी न्यूट्रल बना रहेगा। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन, ग्रोथ और कैपिटल फ्लो पर आरबीआई की कमेंट्री पर नजर रखने की जरूरत है।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक 3 जुलाई को शुरू हुई थी। इसके नतीजे आज आए। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने तीन दिन की बैठक में केंद्रीय बैेंक ने घरेलू इकोनॉमी के साथ ही वैश्विक इकोनॉमी के हालात पर चर्चा की। खासकर उसकी नजरें जियोपॉलिटिकल स्थिति पर थी।

आरबीआई ने हाल में देश में पूंजी की आवक बढ़ाने के लिए कुछ उपाय किए थे। इसका फायदा मिला है। FCNR(B) जुलाई के अंत में 60 अरब डॉलर के पार हो गया। इसका सबसे हिस्सा यानी 4.12 अरब डॉलर एसबीआई के पास आया है।

इनफ्लेशन

आरबीआई पॉलिसी में इनफ्लेशन के अपने अनुमान में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। फिर भी, उसकी कमेंट्री पर नजर रखनी होगी। इसकी वजह यह है कि जून की पॉलिसी में क्रूड में उछाल को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इनफ्लेशन के अनुमान को 4.6 फीसदी से बढ़ाकर 5.1 फीसदी कर दिया था।

ग्रोथ के अनुमान

आरबीआई ने जीडीपी ग्रोथ के लिए 6.6 फीसदी का अनुमान दिया है। लेकिन, एसबीआई रिसर्च का मानना है कि अप्रैल-जून तिमाही में ग्रोथ करीब 7 फीसदी रह सकती है। जून की पॉलिसी में केंद्रीय बैंक ने ग्रोथ के अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया था।

क्रूड ऑयल

क्रूड ऑयल की कीमतों पर अभी आरबीआई की सबसे ज्यादा नजरें हैं। इसकी वजह यह है कि अब भी कीमतें लड़ाई से पहले के लेवल से काफी ज्यादा है। यह भारत के लिए चिंताजनक है।

रेपो रेट का अनुमान

जानकारों का कहना है कि भले ही आज आरबीआई रेपो रेट नहीं बढ़ाएगा। लेकिन, महंगाई बढ़ने पर वह आगे रेट बढ़ा सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे होगा। साथ ही पहले लोन ले चुके लोगों की EMI भी बढ़ जाएगी।

Flipkart Freedom Sale: iPhone 17 Pro पर 13,000 तक की छूट, जानिए किस मॉडल पर कितना ऑफर

फ्लिपकार्ट ने अपनी फ्रीडम सेल 2026 शुरू होने से पहले कई बड़े ऑफर्स की जानकारी दे दी है। इस बार कंपनी ने सिर्फ बड़े-बड़े दावे करने के बजाय कई प्रोडक्ट्स की असली सेल कीमत भी बता दी है। खासकर एप्पल के प्रोडक्ट्स पर मिलने वाली छूट अब साफ हो गई है। फ्रीडम सेल सभी ग्राहकों के लिए 8 अगस्त से शुरू होगी। वहीं, फ्लिपकार्ट प्लस, फ्लिपकार्ट ब्लैक मेंबर और फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड रखने वाले ग्राहक 7 अगस्त से ही सेल का फायदा उठा सकेंगे।

iPhone 17 Pro पर मिलेगा शानदार ऑफर

इस सेल में iPhone 17 Pro पर भी अच्छी छूट मिलेगी। इसकी लॉन्च कीमत 1,34,900 रुपये थी, लेकिन सेल के दौरान यह 1,26,900 रुपये में मिलेगा। यह सीधी छूट है और इसके लिए किसी बैंक कार्ड की जरूरत नहीं होगी। यानी ग्राहकों को सीधे 8,000 रुपये की बचत होगी। अगर ग्राहक एसबीआई बैंक या फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड से भुगतान करते हैं, तो उन्हें 5,000 रुपये की अतिरिक्त छूट भी मिलेगी। इस तरह सभी ऑफर्स के बाद iPhone 17 Pro की प्रभावी कीमत 1,21,900 रुपये रह जाएगी, जो इसकी लॉन्च कीमत से 13,000 रुपये कम है।

iPhone 17 Pro Max पर भी फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल में अच्छी छूट मिलेगी। इस फोन की कीमत सेल के दौरान 1,41,900 रुपये होगी। वहीं, एसबीआई बैंक और फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक के पात्र क्रेडिट कार्ड धारक इसे 1,32,900 रुपये की प्रभावी कीमत पर खरीद सकेंगे। सीधी छूट के अलावा, फ्लिपकार्ट कुछ चुनिंदा बैंक कार्ड पर अतिरिक्त कैशबैक और नो-कॉस्ट ईएमआई का भी फायदा देगा। हालांकि, इन ऑफर्स के साथ कुछ नियम और शर्तें लागू होंगी। इसलिए खरीदारी करने से पहले ऑफर की सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ लेना बेहतर रहेगा।

सिर्फ iPhone ही नहीं, एंड्रॉयड फोन पर भी मिलेंगे शानदार ऑफर्स

फ्लिपकार्ट ने सिर्फ आईफोन ही नहीं, बल्कि कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन की सेल कीमतों का भी खुलासा कर दिया है। इससे ग्राहकों को अलग-अलग कंपनियों के फोन की कीमत और ऑफर्स की तुलना करने में आसानी होगी। गूगल पिक्सल 10 सीरीज की कीमतें भी सामने आ गई हैं। पिक्सल 10 की कीमत 62,999 रुपये, पिक्सल 10ए की 50,999 रुपये, पिक्सल 10 प्रो की 99,999 रुपये और पिक्सल 10 प्रो एक्सएल की कीमत 1,14,999 रुपये होगी।

वहीं, सैमसंग गैलेक्सी S26 अल्ट्रा और गैलेक्सी S26 प्लस पर भी छूट मिलेगी। हालांकि, इन दोनों फोन की अंतिम सेल कीमत का अभी ऐलान नहीं किया गया है। अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह अच्छा मौका हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल मेमोरी चिप समेत कई मोबाइल पार्ट्स की कीमतें बढ़ी हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में स्मार्टफोन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एप्पल जल्द ही आईफोन 17 सीरीज की कीमत बढ़ा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल में मिल रही मौजूदा कीमतें ग्राहकों के लिए बेहतर सौदा साबित हो सकती हैं। इसलिए जो लोग आईफोन 17 सीरीज खरीदने का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए यह सेल अच्छा अवसर हो सकती है।

अगर आप पहले से ही नया आईफोन खरीदने या अपना पुराना फोन बदलने की योजना बना रहे हैं, तो फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल आपके लिए अच्छा मौका हो सकती है। इस बार कंपनी ने सिर्फ ऑफर्स का प्रचार नहीं किया है, बल्कि कई आईफोन की वास्तविक सेल कीमत भी पहले ही बता दी है। iPhone 17 Pro की प्रभावी कीमत 1,21,900 रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि इसकी लॉन्च कीमत 1,34,900 रुपये थी। यानी ग्राहकों को अच्छी-खासी बचत का मौका मिलेगा।

इसके अलावा, आईफोन 15 जैसे पुराने मॉडल, जिसकी शुरुआती कीमत 55,900 रुपये से शुरू होगी, से लेकर iPhone 17 Pro मैक्स तक कई मॉडलों पर आकर्षक छूट दी जा रही है। ऐसे में लगभग हर बजट के ग्राहकों के लिए इस सेल में खरीदारी का अच्छा मौका होगा। फ्लिपकार्ट फ्रीडम सेल सभी ग्राहकों के लिए 8 अगस्त से शुरू होगी। वहीं, फ्लिपकार्ट प्लस और फ्लिपकार्ट ब्लैक मेंबर एक दिन पहले यानी 7 अगस्त से ही इन ऑफर्स का लाभ उठा सकेंगे।