EPFO: सैलरी ₹25,000 है तो तुरंत करें यह काम! EPFO के नए नियम से होगा बड़ा फायदा, जानें स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

EPFO Wage Limit Hike: केंद्र सरकार ने बीतें दिनों कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी को लेकर एक बड़ा ऐलान किया था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया। 17 सितंबर से लागू हुए इस फैसले के बाद लगभग 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को अब प्रोविडेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस (EDLI) के दायरे में लाया जाएगा।

वैसे सिर्फ ₹25,000 से कम वेतन होना ही पात्रता की एकमात्र गारंटी नहीं है। कर्मचारियों को संबंधित योजनाओं के नियमों और शर्तों को पूरा करना होगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस नई लिमिट का आपको कैसे फायदा मिलेगा और आप अपनी पात्रता कैसे चेक कर सकते हैं।

नए नियम के तहत कौन-कौन हो सकता है शामिल?

यह बदलाव मुख्य रूप से उन कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है, जो पहले सिर्फ इसलिए EPF कवरेज से बाहर थे क्योंकि उनका मूल वेतन (Basic Salary + DA) ₹15,000 प्रति माह से अधिक था।

श्रम मंत्रालय के अनुसार, जिन कर्मचारियों का वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और वे संबंधित शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें अब EPF के तहत नामांकित किया जा सकता है। जो कर्मचारी पहले से ही EPF के सदस्य हैं, उनका योगदान उनके लागू वेज बेस और सदस्यता की स्थिति पर निर्भर करेगा।

EPF, EPS और EDLI में कैसे कराएं अपना नामांकन?

कर्मचारी व्यक्तिगत रूप से किसी अलग सार्वजनिक फॉर्म के जरिए तीनों योजनाओं में सीधे रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते। इसके लिए नियोक्ता को ही प्रक्रिया पूरी करनी होती है:

एलिजिबिलिटी चेक करें: सबसे पहले यह पक्का करें कि आपका मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक नहीं है और आप योजना की अन्य शर्तों को पूरा करते हैं।

HR या पेरोल टीम से संपर्क करें: अपने नियोक्ता की HR या अकाउंट्स टीम से संपर्क करें ताकि वे आपकी पात्रता सत्यापित कर आपका एनरोलमेंट शुरू कर सकें।

जरूरी दस्तावेज दें: अपनी पहचान, रोजगार विवरण, आधार विवरण और बैंक खाते की जानकारी नियोक्ता को सौंपें।

कंट्रिब्यूशन वेरिफाई करें: नामांकन पूरा होने के बाद अपनी सैलरी स्लिप और EPFO पासबुक चेक करें ताकि यह पक्का हो सके कि पीएफ कटौती और योगदान सही से दर्ज हो रहा है।

EPF, EPS और EDLI से आपको क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

योजना का नाम मुख्य लाभ
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF)कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज के जरिए रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनता है।
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) अर्हता सेवा और पेंशन नियमों के आधार पर पात्र सदस्यों को आजीवन पेंशन मिलती है।
कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा (EDLI) EPF सदस्यता से जुड़ा मुफ्त जीवन बीमा कवर, जिसके तहत अनहोनी की स्थिति में नॉमिनी को क्लेम की राशि मिलती है।

क्या अब आपकी PF कटौती बढ़ जाएगी?

नई वेज सीलिंग लागू होने से पात्र कर्मचारियों के योगदान की गणना के लिए वेतन आधार बढ़ सकता है। नए ढांचे के तहत, अंशदान के लिए अधिकतम वेतन सीमा ₹25,000 या कर्मचारी का वास्तविक वेतन जो भी कम हो वो मानी जाएगी।

इस गणित को ऐसे समझिए, अगर आपके ₹25,000 के पूरे वेतन आधार पर 12% पीएफ कटता है, तो कर्मचारी का मासिक योगदान ₹3,000 होगा। नियोक्ता का 12% योगदान नियमानुसार EPF और EPS में बंटेगा, जबकि EDLI का प्रीमियम अलग से पूरी तरह नियोक्ता द्वारा दिया जाएगा।

PM VBRY: पहली नौकरी पर ₹15,000 का तोहफा! जानिए EPFO की इस खास स्कीम के बारे में

PM Viksit Bharat Rozgar Yojana PM VBRY: फॉर्मल सेक्टर में पहली बार नौकरी शुरू करने वाले युवाओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत पहली बार नौकरी जॉइन करने वाले योग्य कर्मचारियों को ₹15,000 तक का इंसेंटिव दिया जा रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के माध्यम से संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को फॉर्मल रोजगार से जोड़ना और ईपीएफ (EPF) सिस्टम में उनका स्वागत करना है।

वैसे यह ₹15,000 का इंसेंटिव सभी को एकमुश्त या खुद-ब-खुद नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार और ईपीएफओ ने कुछ जरूरी शर्तें, सैलरी सीमा और सर्विस पीरियड तय किया है।

कब से कब तक की नौकरियों पर मिलेगा फायदा?

यह योजना 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सर्जित होने वाली नई नौकरियों पर लागू होगी। अगर कर्मचारी का मासिक ईपीएफ वेतन ₹1 लाख प्रति माह तक है, तो वह इस योजना के तहत योग्य माना जाएगा। इंसेंटिव की राशि कर्मचारी के 1 महीने के ईपीएफ वेज के बराबर (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) होगी।

कौन है ₹15,000 इंसेंटिव के लिए योग्य?

PM-VBRY के ‘पार्ट-ए’ के तहत इंसेंटिव पाने के लिए कर्मचारी को पहली बार ईपीएफ सदस्य बनना अनिवार्य है। पात्रता की मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:

पात्रता की शर्तइसका क्या मतलब है?
पहली बार EPF मेंबरशिपकर्मचारी 1 अगस्त 2025 से पहले कभी भी ईपीएफ का अंशदान करने वाला सदस्य (छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट समेत) नहीं होना चाहिए।
जॉइनिंग की तारीख नौकरी में कार्यभार संभालने की तिथि 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच होनी चाहिए।
मासिक सैलरी कर्मचारी का मासिक वेतन ₹1 लाख तक होना चाहिए (योजना की परिभाषा के अनुसार)।
सर्विस की अवधिपहली किस्त के लिए 6 महीने और दूसरी किस्त के लिए 12 महीने की निरंतर सेवा आवश्यक है।
एंप्लॉयर कम्प्लायंसजिस कंपनी/संस्था में काम कर रहे हैं, उसने ईपीएफओ में जरूरी रिपोर्टिंग और कंट्रीब्यूशन (ECR) दाखिल किया हो।

 कैसे मिलेगी ₹15,000 की रकम?

यह इंसेंटिव कर्मचारियों को सीधे दो किस्तों में दिया जाएगा:

किस्तजरूरी शर्त  अधिकतम राशि
पहला किस्त निरंतर 6 महीने की योग्य सेवा पूरी होने पर ₹7,500
दूसरी किस्त 12 महीने की सेवा और फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम पूरा करने परबाकी बची राशि (कुल ₹15,000 तक)

ध्यान दें: इंसेंटिव की राशि योग्य सैलरी के आधार पर तय होगी, इसलिए हर किसी को फ्लैट ₹15,000 नहीं मिलेंगे। इसके अलावा, दूसरी किस्त तुरंत कैश में निकालने योग्य नहीं हो सकती है; गाइडलाइंस के मुताबिक इसे किसी उपयुक्त सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट या डिपॉजिट अकाउंट में तय समय के लिए रखा जा सकता है।

फाइनेंशियल लिटरेसी कोर्स क्यों है जरूरी?

दूसरी किस्त पाने के लिए फाइनेंशियल लिटरेसी प्रोग्राम को पूरा करना अनिवार्य बनाया गया है। 6 महीने की नौकरी पूरी होने पर पहली किस्त मिल जाएगी, लेकिन पूरे ₹15,000 पाने के लिए कर्मचारी को 12 महीने की नौकरी के साथ-साथ इस कोर्स को भी पूरा करना होगा।

इसके लिए कर्मचारी PM-VBRY के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर पूरी गाइडेंस ले सकते हैं। पोर्टल पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जनरेट करने और यूएएन-आधार लिंकिंग से जुड़ी जानकारियां भी उपलब्ध हैं।

पैसा बैंक खाते में कैसे आएगा?

सरकार ने साफ किया है कि पार्ट-ए के तहत इंसेंटिव का भुगतान सीधे कर्मचारी के आधार-सीडेड बैंक अकाउंट (DBT) में आधार ब्रिज पेमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इसलिए कर्मचारियों को अपने बैंक खाते और यूएएन को आधार से लिंक रखना जरूरी है।

एंप्लॉयर्स के लिए अलग लाभ

इस योजना में कंपनियों/नियुक्तियों के लिए भी अलग प्रावधान (‘पार्ट-बी’) है, जहां एंप्लॉयर को हर नए योग्य कर्मचारी पर ₹3,000 प्रति माह तक का इंसेंटिव मिल सकता है। इसे कर्मचारियों के ₹15,000 वाले व्यक्तिगत इंसेंटिव से जोड़कर न देखें।

PF खाते से कब और कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस पैसा? जानिए मेडिकल, शादी, मकान और पढ़ाई के लिए क्या हैं नियम

EPFO Advance Withdrawal Rules: अगर आप कहीं नौकरी करते हैं, तो हर महीने आपकी सैलरी से एक तय हिस्सा कटता है। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतनी ही रकम आपकी कंपनी भी आपके प्रोविडेंट फंड यानी PF खाते में जमा करती है। यह जमा पैसा आपकी रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा सहारा बनता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट से पहले भी अपने पीएफ खाते से एडवांस पैसा निकाल सकते हैं?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ एडवांस से जुड़े नियमों को काफी आसान और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों (EPF Scheme, 2026) के तहत आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम मेंबरशिप की अवधि को घटाकर 12 महीने कर दिया गया है।

किस काम के लिए कितनी बार निकाल सकते हैं पीएफ का पैसा?

ईपीएफओ ने विभिन्न जरूरतों को तीन मुख्य श्रेणियों- जरूरी जरूरतें, मकान से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां में बांटा है:

निकासी का कारण कितनी बार निकाल सकते हैं एडवांस?
इलाज/मेडिकल जरूरतेंकोई सीमा नहीं (जितनी बार चाहें निकाल सकते हैं)
बच्चों की पढ़ाईमेंबरशिप के दौरान कुल 10 बार
शादी (स्वयं या बच्चों की)मेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
मकान/प्लाट/होम लोनमेंबरशिप के दौरान कुल 5 बार
विशेष परिस्थितियांएक वित्तीय वर्ष में 2 बार तक

1. मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी

अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को अचानक इलाज के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तो आप पीएफ से एडवांस निकाल सकते हैं। मेडिकल इमरजेंसी के लिए निकासी की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी गई है।

2. बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए

बच्चों की उच्च शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए आप पूरी नौकरी (मेंबरशिप) के दौरान 10 बार तक एडवांस निकाल सकते हैं। वहीं, अगर परिवार में या खुद की शादी का खर्च उठाना है, तो इसके लिए 5 बार तक निकासी की अनुमति दी गई है।

3. मकान खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के लिए

अगर आप नया घर या प्लॉट खरीदना चाहते हैं, घर का निर्माण कराना चाहते हैं, घर का रेनोवेशन कराना चाहते हैं या पुराने होम लोन की किस्त चुकाना चाहते हैं, तो आप अपने पीएफ खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं। आवास से जुड़ी जरूरतों के लिए आप 5 बार तक एडवांस पैसा निकाल सकते हैं।

4. विशेष परिस्थितियों के लिए

केंद्रीय बोर्ड द्वारा अधिसूचित कुछ विशेष या आपातकालीन परिस्थितियों में भी कर्मचारियों को राहत दी जाती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी एक वित्तीय वर्ष में दो बार एडवांस निकाल सकते हैं।

आप अपने पीएफ से कितना पैसा निकाल सकते हैं?

ईपीएफओ के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर आपकी मेंबरशिप को 12 महीने पूरे हो चुके हैं, तो आप अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक एडवांस निकाल सकते हैं। इस बैलेंस में आपका अंशदान, कंपनी का अंशदान और उस पर मिला ब्याज शामिल होता है।

पीएफ एडवांस निकालने से पहले अपनी पात्रता की जांच जरूर कर लें। इसके लिए आप सीधे ईपीएफओ के आधिकारिक मेम्बर सेवा पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।

अब मिलेगी ₹12,500 मंथली पेंशन! वेज सीलिंग हाइक के बाद EPS नियमों पर EPFO ने दिया ये बड़ा अपडेट

EPFO Pension Rules: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। इस फैसले से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद ₹12,500 तक की मंथली पेंशन का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिलेगा।

इसी बीच पेंशन पात्रता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) की सदस्यता के नए नियमों को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है।

EPFO ने EPS सदस्यता के लिए क्या नियम तय किए हैं?

EPFO के अनुसार, पेंशन योजना (EPS) में शामिल होने के लिए दो मुख्य शर्तें और नियम तय किए गए हैं:

सैलरी ₹25,000 या उससे कम होने पर: अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो उसके लिए EPS की सदस्यता अनिवार्य है और उसकी सैलरी से पेंशन अंशदान काटा जाएगा।

सैलरी ₹25,000 से अधिक होने पर: अगर किसी नए कर्मचारी का मासिक वेतन ₹25,000 से अधिक है और वह पहले कभी EPS का सदस्य नहीं रहा है, तो वह EPS का पात्र नहीं होगा और उसके वेतन से EPS के लिए कोई कटौती नहीं की जाएगी।

(नोट: इसका मतलब यह है कि केवल सैलरी का आंकड़ा ही पात्रता तय नहीं करता, बल्कि कर्मचारी का पुराना EPS रिकॉर्ड भी यह तय करने में अहम भूमिका निभाता है कि वह पेंशन पाने का हकदार है या नहीं।)

EPF और EPS में कैसे बंटता है एंप्लॉयर का योगदान?

नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए PF और पेंशन दो अलग-अलग घटक हैं। नियम के मुताबिक कंपनी कर्मचारी के वेतन का कुल 12% हिस्सा ईपीएफ फंड में योगदान करती है। इस 12% योगदान को दो भागों में बांटा जाता है:

8.33% हिस्सा: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जमा होता है।

शेष 3.67% हिस्सा: कर्मचारी के भविष्य निधि (EPF) खाते में जमा किया जाता है।

कैलकुलेशन का गणित: अगर किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी ₹25,000 प्रति माह है, तो कंपनी का कुल 12% योगदान ₹3,000 बनता है। इसमें से:

EPS (पेंशन फंड): 8.33% के हिसाब से ₹2,082.50 जाएंगे।

EPF (फंड खाता): बचा हुआ ₹917.50 ईपीएफ खाते में जमा होगा।

EPS अंशदान न कटने या गलत कटने पर क्या करें?

EPFO ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि अगर ₹25,000 या उससे कम सैलरी होने के बावजूद उनका EPS अंशदान नहीं काटा जा रहा है, या अपात्र होने के बाद भी कटौती की जा रही है, तो वे ये कदम उठाएं:

पहले नियोक्ता से संपर्क करें: अपने HR या सैलरी विभाग से संपर्क करके अपनी पिछली EPS सदस्यता हिस्ट्री और पात्रता की जांच करवाएं।

EPFiGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: अगर नियोक्ता स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो कर्मचारी ईपीएफओ के आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर जाकर अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

PF Withdrawal: पीएफ से पैसा निकालने के नियमों में बड़ा बदलाव! EPFO ने TDS छूट के लिए इस फॉर्म को घोषित किया अमान्य

EPF Withdrawal Rules Change: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की तरफ से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। EPFO ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया है कि टैक्स वर्ष 2026-27 से EPF निकासी पर TDS छूट का दावा करने के लिए अब फॉर्म 15G और फॉर्म 15H मान्य नहीं होंगे। पीएफ अंशधारकों को अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के तहत TDS छूट का दावा करने के लिए फॉर्म 121 जमा करना अनिवार्य होगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए EPFO ने कहा, ‘EPF TDS छूट का दावा करने के लिए फॉर्म 15G या 15H अब मान्य नहीं है। टैक्स वर्ष 2026-27 से आयकर अधिनियम, 2025 के अनुसार फॉर्म 121 जमा करके ही TDS छूट का दावा किया जा सकता है।’

पहले क्या थे प्रावधान?

किंग स्टब्ब एंड कासिवा एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य के अनुसार, इससे पहले निवासी करदाताओं को अपनी उम्र और पात्रता के आधार पर फॉर्म 15G या फॉर्म 15H में से किसी एक को चुनना होता था:

फॉर्म 15G: 60 वर्ष से कम आयु के उन व्यक्तियों के लिए था जिनकी अनुमानित कुल आय कर योग्य सीमा से कम होती थी।

फॉर्म 15H: 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए था।

EPF सदस्यों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ये दोनों फॉर्म अब टैक्स वर्ष 2026-27 से TDS छूट के लिए अमान्य कर दिए गए हैं। नतीजतन, अगर कोई सदस्य अब EPF विथड्रॉल के लिए फॉर्म 15G या 15H जमा करता है, तो उसे TDS कटने से नहीं रोका जा सकेगा।

क्या बदला है और क्या नहीं?

फॉर्म 15G और 15H से हटाकर एकल फॉर्म 121 को लागू करना केवल एक प्रक्रियात्मक सरलीकरण है, न कि किसी नए टैक्स की शुरुआत। आयकर अधिनियम, 2025 जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हुआ है, योग्य निवासी करदाताओं को धारा 393(6) के तहत एक समेकित घोषणापत्र जमा करने की अनुमति देता है, जब उन्हें उम्मीद हो कि उस वर्ष के लिए उनकी कुल कर देनदारी शून्य होगी।

आदित्य भट्टाचार्य ने इस पर विस्तार से समझाते हुए कहा, ‘यह स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है कि फॉर्म 121 क्या करता है। यह आपकी निकासी को अपने-आप टैक्स-फ्री नहीं बनाता है। यह केवल एक पात्र व्यक्ति को जिसकी वर्ष के लिए अनुमानित कुल आय पर कोई टैक्स नहीं बनता, यह अनुरोध करने की अनुमति देता है कि स्रोत पर टैक्स (TDS) न काटा जाए।

यह पूरी तरह से वैकल्पिक है और अनिवासियों या ऐसे लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है जिन पर वास्तव में टैक्स बनता है। इसके अलावा, EPFO के निर्देशों के तहत एक वैध पैन कार्ड होना अनिवार्य है; बिना पैन के जमा किया गया घोषणापत्र अमान्य माना जाएगा। इसलिए सदस्यों को इसे जमा करने से पहले अपनी पात्रता की जांच कर लेनी चाहिए।’

EPFO का नया ऑनलाइन सिस्टम और यूनिक नंबर

EPFO ने अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को प्राप्त होने वाले प्रत्येक फॉर्म 121 के लिए एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर जारी करने और ऑनलाइन सबमिशन व ई-साइनिंग की सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया है।

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि इन कदमों से TDS रिपोर्टिंग अधिक पारदर्शी, सटीक और ट्रैसेबल बनेगी। उनकी सलाह है कि पीएफ से पैसा निकालने की योजना बना रहे सदस्यों को कटौतियों का इंतजार करने और फिर रिफंड का दावा करने के बजाय, शुरुआत से ही नए फॉर्म 121 का उपयोग करना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

EPF vs NPS: हर महीने ₹10,000 का निवेश, 30 साल में कहां तेजी से बढ़ेगा आपका पैसा? समझिए पूरा गणित

EPF vs NPS Return Calculation: रिटायरमेंट के लिए अगले 30 सालों तक हर महीने ₹10,000 का योगदान देना एक बड़ा और सुरक्षित कॉर्पस तैयार कर सकता है। लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में से कौन सा विकल्प आपको अधिक रिटर्न देगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पैसा किस तरह इन्वेस्ट और ग्रो हो रहा है।

EPF जहां सरकार द्वारा हर वित्त वर्ष घोषित की जाने वाली निश्चित ब्याज दर पर काम करता है, वहीं NPS का पैसा बाजार से जुड़े एसेट्स जैसे- शेयर बाजार, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी प्रतिभूतियों में लगाया जाता है।

अगर आप बिना किसी वार्षिक बढ़ोतरी के 30 सालों तक हर महीने ₹10,000 का योगदान करते हैं, तो आपकी कुल जमा राशि ₹36 लाख होगी। आइए दोनों विकल्पों के गणित और नियमों को विस्तार से समझते हैं:

EPF का गणित: सुरक्षित और निश्चित ब्याज का विकल्प

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25% की ब्याज दर तय की है। अगर हम पूरे 30 सालों के लिए 8.25% की औसत वार्षिक ब्याज दर मानकर चलें, तो हर महीने ₹10,000 का निवेश बढ़कर लगभग ₹1.57 करोड़ हो जाएगा।

वैसे यह 8.25% का रिटर्न गारंटीड नहीं है, क्योंकि EPF की ब्याज दरें हर साल सरकार द्वारा संशोधित की जाती हैं। हालांकि, इसका रिटर्न दैनिक बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

NPS का गणित: बाजार की ताकत और कंपाउंडिंग

NPS में कोई फिक्स रिटर्न की गारंटी नहीं होती। इसमें आपका पैसा आपकी पसंद के अनुसार इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में बांटा जाता है। ‘एक्टिव चॉइस’ के तहत आप इक्विटी में 75% तक एक्सपोजर ले सकते हैं। बाजार से जुड़े होने के कारण NPS का कॉर्पस EPF की तुलना में काफी अलग और बड़ा हो सकता है।

10% वार्षिक रिटर्न पर: अगर NPS पर औसतन 10% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका ₹10,000 का मासिक निवेश 30 साल में बढ़कर लगभग ₹2.26 करोड़ हो जाएगा।

9% वार्षिक रिटर्न पर: अगर रिटर्न 9% रहता है, तो कुल कॉर्पस लगभग ₹1.83 करोड़ बनेगा।

(नोट: पेंशन फंड नियामक PFRDA के अनुसार, NPS का अंतिम फंड बाजार के प्रदर्शन, आपके द्वारा चुने गए एसेट एलोकेशन और एन्युटी खरीदारी के प्रतिशत पर निर्भर करता है।)

रिटायर्मेंट पर पैसे निकालने के नियम: EPF और NPS का अंतररिटायर्मेंट के समय

जमा राशि निकालने के मामले में EPF और NPS के नियम बिल्कुल अलग हैं। EPF मुख्य रूप से एक नियोक्ता से जुड़ा बचत ढांचा है, जिसमें 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट पर जमा हुई पूरी 100% राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है। इसके अलावा, नौकरी के दौरान घर खरीदने, बच्चों की शिक्षा, शादी या बीमारी जैसी विशेष जरूरतों के लिए शर्तों के तहत आंशिक निकासी का विकल्प भी मिलता है।

दूसरी ओर, NPS एक स्वतंत्र और फ्लेक्सिबल पेंशन खाता है, जो रिटायरमेंट पर नियमित आय देने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। NPS के नियमों के तहत रिटायरमेंट के समय कुल कॉर्पस का अधिकतम 60% हिस्सा ही एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि कम से कम 40% राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है ताकि जीवनभर पेंशन मिलती रहे। इसमें भी गंभीर बीमारी या बच्चों की उच्च शिक्षा/शादी जैसी विशेष परिस्थितियों में सीमित आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है।

टैक्स छूट और नियम

EPF पर टैक्स: EPF मुख्य रूप से EEE (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आता है। हालांकि, अगर कर्मचारी का सालाना योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।

NPS पर टैक्स: धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा, NPS में धारा 80CCD (1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। रिटायर्मेंट के समय निकाली गई 60% एकमुश्त राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।

आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

केवल आंकड़ों की तुलना करें, तो 10% रिटर्न के अनुमान के साथ NPS (₹2.26 करोड़) EPF (₹1.57 करोड़) से बाजी मार लेता है। लेकिन इस अतिरिक्त रिटर्न के साथ बाजार का जोखिम भी जुड़ा हुआ है।

वैसे आप बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं, तो EPF बेहतर है। अगर आप लंबी अवधि के लिए बाजार का जोखिम उठाकर अधिक वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो NPS सही विकल्प है।

दोनों का कॉम्बिनेशन भी बढ़िया विकल्प है। नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए यह ‘EPF या NPS’ का चुनाव नहीं है। PFRDA के नियमों के अनुसार, आप EPF के साथ-साथ अलग से NPS खाता भी चला सकते हैं।

रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय सिर्फ बड़े आंकड़े न देखें, यह भी देखें कि आप कितना मार्केट रिस्क ले सकते हैं, आपको रिटायरमेंट से पहले कितनी लिक्विडिटी चाहिए और क्या आप नियमित पेंशन चाहते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50000 चाहिए तो कहां और कितना करें निवेश, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 चाहिए, तो सिर्फ आज की जरूरत देखकर निवेश करना काफी नहीं है। आज के ₹50,000 की कीमत 20-30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। महंगाई धीरे-धीरे आपके खर्च को बढ़ाती रहेगी।

इसे आसान तरीके से समझते हैं। मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप 60 की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं। आज आपका महीने का खर्च ₹50,000 है। अगर अगले 30 साल तक औसत महंगाई 6% रहती है, तो 60 की उम्र में इसी खर्च के लिए करीब ₹2.87 लाख महीने चाहिए होंगे।

यानी रिटायरमेंट के लिए आपका लक्ष्य आज के ₹50,000 नहीं, बल्कि भविष्य का खर्च होना चाहिए। इसी आधार पर रिटायरमेंट फंड तैयार करना होगा।

रिटायरमेंट के लिए कितना पैसा चाहिए?

मान लेते हैं कि 60 की उम्र में रिटायर होने के बाद आपको करीब 30 साल तक इस पैसे से खर्च चलाना है। साथ ही निवेश से औसतन 8% सालाना रिटर्न मिलता है और महंगाई 6% रहती है। इस हिसाब से आपको करीब ₹7.4 करोड़ चाहिए होगा। इससे रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्च को लंबे समय तक संभालने की गुंजाइश बनती है।

अगर आपको रिटायरमेंट के बाद पैसा 25 साल तक चाहिए, तो यह जरूरत करीब ₹6.4 करोड़ रह सकती है। यानी रिटायरमेंट की अवधि बढ़ने के साथ जरूरी कॉर्पस भी बढ़ता है।

₹7.4 करोड़ का फंड कैसे तैयार करें?

अब सवाल है कि 30 साल में ₹7.4 करोड़ कैसे जमा होंगे। इसके लिए SIP एक तरीका हो सकता है।

अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मानें, तो 30 साल तक करीब ₹21,200 महीने की SIP से ₹7.4 करोड़ के आसपास का कॉर्पस बन सकता है। हालांकि, SIP मार्केट से जुड़ा निवेश है, तो रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है।

अनुमानित सालाना रिटर्न
30 साल तक मासिक SIP

8%करीब ₹52,500
10%करीब ₹32,700
12%करीब ₹21,200

पैसा कहां निवेश करें?

30 साल का समय है, तो रिटायरमेंट के लिए सिर्फ एक ही निवेश विकल्प पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इक्विटी म्यूचुअल फंड, EPF, NPS और डेट निवेश जैसे विकल्पों को अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के हिसाब से पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है।

लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड कॉर्पस बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। वहीं EPF और NPS रिटायरमेंट के लिए अलग आधार तैयार कर सकते हैं। डेट वाले निवेश पोर्टफोलियो के अपेक्षाकृत स्थिर हिस्से के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कितना पैसा कहां लगाना है, इसका कोई एक फॉर्मूला नहीं है। 30 साल की उम्र में जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के ठीक पहले की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए समय के साथ निवेश का तरीका भी बदलना पड़ सकता है।

रिटायरमेंट से 5 साल पहले क्या करें?

रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर पूरा पैसा ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले निवेश में रखना जोखिम बढ़ा सकता है। मान लीजिए रिटायरमेंट से ठीक पहले शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ गई। उसी समय अगर आपको खर्च के लिए निवेश बेचना पड़ा, तो कॉर्पस पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है।

इसलिए रिटायरमेंट के करीब आने पर अगले कुछ साल के खर्च के लिए कम जोखिम वाले और आसानी से उपलब्ध निवेशों में पर्याप्त रकम रखने पर विचार किया जा सकता है। इससे बाजार में गिरावट के दौरान तुरंत इक्विटी बेचने की जरूरत कम हो सकती है।

इस बात पर भी गौर करना जरूरी

अगर आपके पास EPF, NPS, पेंशन, किराये की इनकम या कोई दूसरी नियमित कमाई है, तो पूरा ₹7.4 करोड़ का कॉर्पस अकेले आपको तैयार नहीं करना होगा। दूसरी इनकम से रिटायरमेंट के बाद होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा पूरा हो सकता है।

वहीं, मेडिकल खर्च और लंबी रिटायरमेंट को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए सिर्फ एक लक्ष्य बनाकर निवेश शुरू करना काफी नहीं है। हर कुछ साल में अपनी इनकम, खर्च, महंगाई और निवेश की समीक्षा करते रहना चाहिए।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

पैसों की जरूरत होने पर FD तोड़ें या FD पर लोन लें? समझिए पूरा कैलकुलेशन

कई बार हमें अचानक से पैसों की जरूरत पड़ जाती है और उस वक्त हमारे पास विकल्प काफी सीमित होते हैं। अब मान लीजिए कि आपको 3 लाख रुपये की जरूरत पड़ गई। आपके पास 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। FD पर आपको 7% सालाना ब्याज मिल रहा है। अब आपके सामने दो रास्ते हैं। पहला, FD तोड़कर पैसा निकाल लें। दूसरा, FD को जारी रखते हुए उसके बदले लोन ले लें।

दोनों विकल्पों में पैसा आपके काम आ जाएगा। लेकिन दोनों की लागत अलग होगी। इसलिए फैसला करने से पहले पूरा हिसाब समझना जरूरी है।

FD तोड़ने पर क्या होगा?

अब मान लेते हैं कि आपकी 5 लाख रुपये की FD एक साल की है और ब्याज दर 7% है। अगर FD पूरी अवधि तक चलती है तो एक साल में करीब 35,000 रुपये का ब्याज मिलेगा।

लेकिन आपको 6 महीने बाद 3 लाख रुपये की जरूरत पड़ गई और आपने FD तोड़ दी। ऐसी स्थिति में बैंक आम तौर पर FD की मूल ब्याज दर के बजाय उस अवधि के लिए लागू दर के हिसाब से ब्याज देता है। इसके अलावा बैंक की पॉलिसी के मुताबिक प्रीमैच्योर क्लोजर चार्ज भी लग सकता है।

कितनी पेनल्टी और कितना ब्याज

मिसाल के लिए, एफडी पर 6 महीने की लागू दर 6% है। और बैंक 1% की पेनल्टी लगाता है। ऐसे में प्रभावी ब्याज दर 5% रह जाती है।

5 लाख रुपये पर 6 महीने के लिए 5% की दर से करीब 12,500 रुपये ब्याज मिलेगा। यानी पूरी अवधि की FD से मिलने वाले करीब 35,000 रुपये के मुकाबले ब्याज में करीब 22,500 रुपये का अंतर आ सकता है।

FD पर लोन लेने पर कितना खर्च?

अब दूसरा विकल्प देखते हैं। आपने FD नहीं तोड़ी और बैंक से उसके बदले 3 लाख रुपये का लोन ले लिया। उदाहरण के लिए, बैंक FD की ब्याज दर से 1.5% ज्यादा ब्याज पर लोन देता है। यानी 7% की FD पर लोन की ब्याज दर करीब 8.5% हुई।

अगर 3 लाख रुपये का लोन 6 महीने के लिए लिया जाता है, तो ब्याज करीब 12,750 रुपये बैठेगा। इस दौरान आपकी 5 लाख रुपये की FD चलती रहेगी। यानी उस पर FD का ब्याज भी मिलता रहेगा।

दोनों विकल्पों का हिसाब

FD तोड़ेंFD पर लोन
आपकी जरूरत₹3 लाख₹3 लाख
FD₹5 लाख बंद₹5 लाख जारी
FD ब्याजकरीब ₹12,500करीब ₹17,500
लोन ब्याज—करीब ₹12,750
6 महीने बादFD नहीं रहेगीFD जारी रहेगी
अतिरिक्त फायदा—FD का ब्याज मिलता रहेगा

3 लाख की जरूरत 6 महीने के लिए है तो इस उदाहरण में FD पर लोन लेना सस्ता पड़ रहा है। लेकिन ₹3 लाख का लोन बाद में चुकाना होगा।

FD पर लोन कब बेहतर हो सकता है?

अगर आपको थोड़े समय के लिए पैसों की जरूरत है और कुछ महीनों में रकम वापस आने की उम्मीद है, तो FD पर लोन एक विकल्प हो सकता है।

इसमें आपकी FD बनी रहती है। जरूरत पूरी होने के बाद लोन चुका सकते हैं। FD को समय से पहले तोड़ने से मिलने वाले कम ब्याज का नुकसान भी बच सकता है।

FD कब तोड़ना समझदारी हो सकती है?

अगर आपको लंबे समय के लिए पैसे चाहिए और लोन चुकाने की स्थिति साफ नहीं है, तो सिर्फ FD बचाए रखने के लिए लोन लेना महंगा पड़ सकता है।

ऐसे में FD तोड़ने और लोन की कुल लागत की तुलना करनी चाहिए। खासकर तब, जब लोन की ब्याज दर काफी ज्यादा हो।

फैसला लेने से पहले ये 3 चीजें देखें

सबसे पहले बैंक से पूछें कि आज FD तोड़ने पर आपको हाथ में कितनी रकम मिलेगी। इसके बाद FD पर लोन की ब्याज दर और सभी चार्ज पता करें।

फिर दोनों का कुल खर्च निकालें। अगर कुछ महीनों की जरूरत है और जल्द पैसा वापस आने वाला है, तो FD पर लोन का विकल्प देखा जा सकता है। अगर लंबी अवधि के लिए रकम चाहिए, तो FD तोड़ना और लोन लेने की कुल लागत की तुलना करना ज्यादा जरूरी है।

EPF Contribution: अक्टूबर से PF के लिए सैलरी कितना ज्यादा पैसा कटेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Bank Strike: 28 से 30 सितंबर तक बैंक हड़ताल; जानिए किन चीजों पर असर पड़ेगा और कौन से काम जारी रहेंगे

Bank Strike: देशभर में बैंक शाखाओं में 28 से 30 सितंबर तक यानी सोमवार, मंगलवार और बुधवार तीन दिन की हड़ताल रहेगी। इसका असर उन कामों पर पड़ेगा, जिनके लिए बैंक की शाखा में जाना जरूरी होता है।

हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर यानी रविवार को खुले रहेंगे। ऐसे में जिन लोगों का जरूरी बैंक काम बाकी है, वे हड़ताल से पहले उसे निपटा सकते हैं।

यह हड़ताल 30 सितंबर की छमाही वित्तीय क्लोजिंग से ठीक पहले हो रही है। इसका ज्यादा असर सरकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों पर पड़ सकता है। प्राइवेट बैंकों में कामकाज पर असर कम रहने की उम्मीद है।

किन कामों पर असर पड़ेगा?

हड़ताल के दौरान बैंक काउंटर से कैश जमा करने या निकालने में दिक्कत हो सकती है। फिजिकल पासबुक अपडेट कराने का काम भी रुक सकता है।

चेक से जुड़े काम में देरी हो सकती है। मैनुअल प्रोसेसिंग वाले दूसरे काम भी प्रभावित होंगे। बैंक शाखा से नया डिमांड ड्राफ्ट बनवाना भी मुश्किल हो सकता है।

KYC और लोन का काम भी अटक सकता है

अगर आपको बैंक जाकर KYC करानी है, तो काम टल सकता है। अकाउंट अपडेट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में भी देरी हो सकती है।

लोन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करना या वेरिफिकेशन कराना भी प्रभावित हो सकता है। यानी जिन कामों में बैंक कर्मचारी की सीधी जरूरत है, उनके लिए आपको इंतजार करना पड़ सकता है।

बैंक लॉकर भी नहीं मिलेगा

बैंक शाखा बंद रहने पर फिजिकल बैंक लॉकर की सुविधा भी नहीं मिल सकती है। अगर लॉकर से कोई जरूरी सामान निकालना है, तो हड़ताल से पहले बैंक से संपर्क कर लेना बेहतर होगा।

UPI और मोबाइल बैंकिंग चलती रहेगी?

हड़ताल का मुख्य असर बैंक की शाखाओं पर होगा। UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं चलती रहने की उम्मीद है। आप UPI से पैसे भेज सकते हैं। बिल का भुगतान कर सकते हैं। इंटरनेट या मोबाइल बैंकिंग से भी सामान्य ट्रांजैक्शन किए जा सकेंगे।

ATM भी चालू रहने की उम्मीद है। हालांकि, किसी इलाके में कैश उपलब्धता कम हो सकती है। यह ATM में कैश भरने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। जहां कैश डिपॉजिट मशीन की सुविधा है, वहां उससे पैसे जमा किए जा सकते हैं।

रविवार को क्यों खुले रहे सरकारी बैंक?

हड़ताल का असर कम करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर यानी रविवार को भी खुले रहे। इस दौरान बैंक ऑफिस, ATM से जुड़े शाखा केंद्र और करेंसी चेस्ट भी चालू रहे। इसके लिए RBI की मंजूरी ली गई थी।

EPF Contribution: अक्टूबर से PF के लिए सैलरी कितना ज्यादा पैसा कटेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

EPF Contribution: अक्टूबर से PF के लिए सैलरी कितना ज्यादा पैसा कटेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

EPF Contribution: EPFO ने PF की सैलरी लिमिट15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है। नया नियम 17 सितंबर 2026 से लागू हो गया है। सितंबर में पुराने और नए नियम के हिसाब से अलग-अलग कैलकुलेशन होगी। अक्टूबर से नई व्यवस्था का पूरा असर दिखेगा।

इस बदलाव का असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनका PF के लिए माना जाना वाली बेसिक सैलरी 15,000 से 25,000 रुपये के बीच है। ऐसे कर्मचारियों का PF योगदान बढ़ सकता है। यानी हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।

20,000 रुपये के PF वेतन पर कितना PF कटेगा?

मान लीजिए आपका PF वेतन 20,000 रुपये है। अक्टूबर से कर्मचारी का योगदान 12% के हिसाब से 2,400 रुपये होगा। पहले 15,000 रुपये की सीमा के कारण यही योगदान 1,800 रुपये था। यानी अब हर महीने 600 रुपये ज्यादा PF में जाएंगे।

नियोक्ता भी 2,400 रुपये का योगदान करेगा। लेकिन पूरा पैसा EPF में नहीं जाएगा। इसमें से 1,666 रुपये EPS यानी पेंशन स्कीम में जाएंगे। बाकी 734 रुपये EPF खाते में जमा होंगे।

योगदानपुरानी व्यवस्थाअक्टूबर 2026 से
कर्मचारी का EPF योगदान₹1,800₹2,400
नियोक्ता का EPS योगदान₹1,250₹1,666
नियोक्ता का EPF योगदान₹550₹734
नियोक्ता का कुल योगदान₹1,800₹2,400
कुल कर्मचारी + नियोक्ता योगदान₹3,600₹4,800

इस तरह 20,000 रुपये के PF वेतन वाले कर्मचारी के मामले में PF में हर महीने कुल 4,800 रुपये जाएंगे। पहले यह रकम 3,600 रुपये थी।

क्या मौजूदा कर्मचारियों पर भी असर होगा?

हां, कुछ मौजूदा EPF सदस्यों पर भी इसका असर पड़ेगा। खासकर उन कर्मचारियों पर, जो पहले EPF में थे लेकिन 15,000 रुपये की पुरानी सीमा से ज्यादा PF वेतन होने के कारण EPS में शामिल नहीं थे।

EPFO के मुताबिक, 20,000 रुपये PF वेतन वाला ऐसा कर्मचारी नई व्यवस्था में EPS का सदस्य बन सकता है। इसके बाद नियोक्ता का योगदान EPF और EPS के बीच बांटा जाएगा।

हर कर्मचारी का PF 25,000 रुपये पर नहीं कटेगा

यहां एक बात समझना जरूरी है। 25,000 रुपये नई वेतन सीमा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी का PF 25,000 रुपये के आधार पर ही कटेगा। अगर किसी कर्मचारी का PF वेतन 25,000 रुपये से कम है, तो योगदान उसी वेतन के आधार पर होगा। PF वेतन और ग्रॉस सैलरी भी हमेशा एक जैसी नहीं होती।

EPFO के अक्टूबर के उदाहरण के मुताबिक, 10,000 रुपये के PF वेतन पर कर्मचारी का योगदान 1,200 रुपये होगा। 20,000 रुपये पर 2,400 रुपये और 25,000 रुपये पर 3,000 रुपये।

टेक होम सैलरी पर कितना असर?

20,000 रुपये के PF वेतन वाले कर्मचारी का योगदान 1,800 रुपये से बढ़कर 2,400 रुपये हो जाएगा। यानी हर महीने 600 रुपये ज्यादा PF में जमा होंगे। इसका सीधा असर टेक होम सैलरी पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर आपकी सैलरी स्ट्रक्चर और मौजूदा PF व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

इस बदलाव का दूसरा पहलू यह है कि कर्मचारी का PF में ज्यादा पैसा जमा होगा। लंबे समय में इससे रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाली रकम भी बढ़ सकती है।

कंपनी का पैसा कर्मचारी की सैलरी से नहीं कटेगा

EPFO ने यह भी साफ किया है कि कर्मचारी और नियोक्ता यानी कंपनी का योगदान अलग-अलग होता है। नियोक्ता का योगदान कर्मचारी की सैलरी से काटकर नहीं लिया जा सकता।

यानी 2,400 रुपये कर्मचारी के हिस्से से जाएंगे। इसके अलावा नियोक्ता अपनी तरफ से 2,400 रुपये का योगदान करेगा। इस तरह अक्टूबर से 20,000 रुपये के PF वेतन पर कुल 4,800 रुपये EPF और EPS में जाएंगे।

EPF Investment: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? समझिए पूरा हिसाब