How to Buy Home: ₹30000 की सैलरी में भी खरीद सकते हैं अपना घर, समझिए कैसे बनाएं पूरा प्लान

How to Buy Home: अपना घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है। लेकिन महीने की सैलरी ₹30,000 के आसपास हो, तो लगता है कि आज के जमाने में घर खरीदना शायद मुमकिन नहीं है। किराया, राशन, बिजली का बिल और बच्चों की फीस देने के बाद बचता ही कितना है? ऐसे में होम लोन की EMI चुकाना बड़ी जिम्मेदारी लगती है।

हालांकि, कम सैलरी में भी घर खरीदा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी कमाई के हिसाब से घर चुनें। बड़ा लोन लेने के बजाय ऐसी EMI रखें, जिसे हर महीने आसानी से चुका सकें। आइए, उदाहरण से समझते हैं कि ₹30,000 की सैलरी में घर खरीदने का प्लान कैसे बना सकते हैं।

₹30,000 की सैलरी पर कितना होम लोन लें?

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की अवधि के हिसाब से EMI करीब ₹10,000 हो सकती है। मोंगा के मुताबिक, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो घर खरीदना सिर्फ कमाई पर निर्भर नहीं करता। ये भी जरूरी है कि आप घर खरीदने की कितनी अच्छी तैयारी करते हैं। घर

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपकी सैलरी ₹30,000 है। इसमें से ₹8,000 घर और किराने, ₹3,000 बिजली और दूसरे बिलों, ₹4,000 आने-जाने और ₹5,000 परिवार के अन्य खर्चों में जाते हैं। इस तरह कुल खर्च ₹20,000 हुआ। अब आपके पास ₹10,000 बचते हैं।

सैलरी के हिसाब से खर्च का पूरा हिसाब समझें

महीने का हिसाबरकम
कुल सैलरी₹30,000
राशन और घर का खर्च₹8,000
बिजली, मोबाइल और दूसरे बिल₹3,000
आने-जाने का खर्च₹4,000
परिवार के दूसरे खर्च₹5,000
कुल खर्च₹20,000
खर्च के बाद बची रकम₹10,000

ये सिर्फ उदाहरण है। आप अपने परिवार के खर्च के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं। जैसे कि कुछ पैसे बचाकर इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।

डाउन पेमेंट के लिए पैसे कैसे जुटाएं?

बैंक आमतौर पर घर की पूरी कीमत का लोन नहीं देते। घर खरीदते समय आपको भी कुछ पैसा लगाना पड़ता है। इसी को डाउन पेमेंट कहते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च भी हो सकते हैं।

मान लीजिए, आपको ₹15 लाख का घर पसंद आया। बैंक ₹12 लाख का लोन देने को तैयार है। ऐसे में बाकी ₹3 लाख आपको अपनी तरफ से लगाने होंगे। रजिस्ट्री और दूसरे खर्चों के लिए अलग से पैसा भी चाहिए हो सकता है।

इसलिए घर खरीदने से पहले बचत शुरू करें। हर महीने ₹5,000 बचाने पर एक साल में ₹60,000 जमा होंगे। इसी तरह, तीन साल में ब्याज को छोड़कर ₹1.80 लाख जमा हो सकते हैं। अगर परिवार से आर्थिक मदद मिले या बोनस की रकम बचा सकें, तो डाउन पेमेंट का लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है।

होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अतुल मोंगा के मुताबिक, होम लोन लेने से पहले सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस देखें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेने से बचना चाहिए। लोन की अवधि और दूसरी शर्तें भी समझना जरूरी है।

कमाई और बैंकिंग रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है। अगर भविष्य में आपकी कमाई बढ़ती है और आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो लोन की कुछ रकम पहले चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे बकाया लोन और कुल ब्याज घट सकता है।

मोंगा का कहना है कि आखिरकार मकसद सिर्फ होम लोन लेना नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लोन की रकम इतनी हो, जिसकी EMI परिवार लंबे समय तक आसानी से चुका सके। इसके लिए परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों से समझौता नहीं करना पड़े।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

₹10 लाख की कार खरीदें या पैसा निवेश करें? 5 साल में कितना हो सकता है फायदा-नुकसान, पूरा हिसाब समझिए

Car vs Investment: कार खरीदना कई लोगों का सपना होता है। लेकिन इस फैसले का असर आपकी जेब पर भी पड़ता है। कार खरीदने के बाद उसकी कीमत घटती है। साथ ही पेट्रोल, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर भी पैसा खर्च होता है। दूसरी तरफ, यही ₹10 लाख निवेश कर दिए जाएं तो 5 साल में अच्छी रकम बन सकती है। ऐसे में सवाल है कि कार खरीदना बेहतर है या पैसे को बढ़ने का मौका देना?

₹10 लाख निवेश करने पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। आप इस रकम को 5 साल के लिए निवेश करते हैं। अब रिटर्न के अलग-अलग अनुमान से समझते हैं कि आपकी रकम कितनी हो सकती है।

अगर सालाना 8% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद ₹10 लाख बढ़कर करीब ₹14.69 लाख हो जाएंगे। इस तरह आपको लगभग ₹4.69 लाख का फायदा होगा।

वहीं, 10% सालाना रिटर्न पर रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है। यानी ₹6.11 लाख की बढ़त। अगर सालाना रिटर्न 12% रहा, तो 5 साल बाद कुल रकम करीब ₹17.62 लाख हो सकती है। इस स्थिति में मुनाफा लगभग ₹7.62 लाख होगा।

सालाना रिटर्नशुरुआती निवेश5 साल बाद कुल रकमअनुमानित मुनाफा
8%₹10,00,000₹14,69,000₹4,69,000
10%₹10,00,000₹16,11,000₹6,11,000
12%₹10,00,000₹17,62,000₹7,62,000

नोट : यह कैलकुलेशन कंपाउंडिंग के आधार पर है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में रिटर्न तय नहीं होता। असल नतीजा निवेश के विकल्प और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

कार खरीदने पर 5 साल में कितना खर्च होगा?

अब कार का हिसाब समझते हैं। मान लीजिए आप ₹10 लाख की कार खरीदते हैं और 5 साल तक उसे चलाते हैं। इस दौरान कार की कीमत घटेगी। इसे डेप्रिसिएशन कहते हैं। इसके अलावा इंश्योरेंस और सर्विस पर भी खर्च होगा।

उदाहरण के लिए, मान लेते हैं कि 5 साल बाद कार की रीसेल वैल्यू ₹5 लाख रह जाती है। यानी उसकी कीमत में ₹5 लाख की कमी आई। इसके अलावा, 5 साल में इंश्योरेंस पर करीब ₹1 लाख और सर्विस व मेंटेनेंस पर ₹75,000 खर्च होते हैं।

₹10 लाख की कार खरीदने पर 5 साल का खर्च

खर्च का हिसाबअनुमानित रकम
कार की खरीद कीमत₹10,00,000
5 साल बाद रीसेल वैल्यू₹5,00,000
कार की कीमत में कमी₹5,00,000
5 साल का इंश्योरेंस खर्च₹1,00,000
सर्विस और मेंटेनेंस₹75,000
5 साल की कुल लागत₹6,75,000

नोट: ये अनुमानित खर्च और वैल्यू हैं। इसमें पेट्रोल-डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है।

इस हिसाब से कार रखने की लागत 5 साल में करीब ₹6.75 लाख बैठती है। इसमें पेट्रोल या डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है। असल खर्च कार के मॉडल और इस्तेमाल के हिसाब से अलग हो सकता है।

दोनों विकल्पों में कितना फर्क पड़ेगा?

अब दोनों की तुलना करते हैं। अगर आप ₹10 लाख निवेश करते हैं और सालाना 10% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है।

दूसरी तरफ, कार खरीदने पर 5 साल बाद उसकी अनुमानित कीमत ₹5 लाख रह जाती है। यानी एक तरफ निवेश की रकम बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ कार की कीमत घट रही है।

सिर्फ निवेश की रकम और कार की रीसेल वैल्यू देखें, तो दोनों के बीच ₹11.11 लाख का अंतर होगा। कार के इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर खर्च हुए ₹1.75 लाख भी जोड़ दें, तो इस उदाहरण में वित्तीय अंतर करीब ₹12.86 लाख तक पहुंचता है।

लेकिन यह पूरी तरह समान आधार पर की गई तुलना नहीं है। निवेश करने वाले व्यक्ति के पास कार नहीं होगी। उसे आने-जाने के लिए दूसरे साधनों पर खर्च करना पड़ सकता है। वहीं, कार खरीदने वाले को निजी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। इसलिए अंतिम फैसला लेते समय इस पहलू को भी देखना जरूरी है।

क्या कार खरीदने के बजाय निवेश करना बेहतर है?

यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर रोज ऑफिस जाने या परिवार के साथ सफर करने के लिए कार जरूरी है, तो इसे सिर्फ खर्च मानना सही नहीं होगा। कार से समय बचता है और आने-जाने में सुविधा मिलती है।

लेकिन अगर कार खरीदने से आपकी बचत खत्म हो रही है या घर, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए पैसा कम पड़ सकता है, तो फैसला टालने पर विचार किया जा सकता है। एक विकल्प यह भी है कि आप कम कीमत की कार खरीदें और बाकी रकम निवेश करें। या फिर एकमुश्त 10 लाख आप निवेश कर सकते हैं। और कार लोन ले सकते हैं।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख के लोन पर कितना ब्याज देना पड़ेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI ETF: आज से खुला SBI का नया डिफेंस ETF, जानिए NFO, निवेश राशि और जोखिम की पूरी डिटेल

SBI BSE India Defence ETF: डिफेंस सेक्टर में निवेश की बढ़ती दिलचस्पी के बीच एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अपने नए इंडेक्स-ट्रैकिंग फंड ‘SBI BSE India Defence ETF’ के लॉन्च की घोषणा की है। इस NFO में निवेश की शुरुआत आज, 13 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है और निवेशक 19 अक्टूबर 2026 तक इसमें सब्स्क्रिप्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यह एक ओपन-एंडेड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) है, जो मुख्य रूप से BSE India Defence Index को ट्रैक करेगा और ट्रैकिंग एरर के अधीन रहते हुए इंडेक्स के समान टोटल रिटर्न देने का लक्ष्य रखेगा।

कैसा होगा एसेट एलोकेशन?

एसबीआई म्यूचुअल फंड द्वारा जारी स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, फंड का एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा:

95% से 100% हिस्सा: बीएसई इंडिया डिफेंस इंडेक्स में शामिल रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के सिक्योरिटीज/शेयरों में निवेश किया जाएगा।

0% से 5% हिस्सा: सरकारी प्रतिभूतियों, स्टेट डेवलपमेंट लोन्स, ट्रेजरी बिल्स, ट्राई-पार्टी रेपो और लिक्विड म्यूचुअल फंड यूनिट्स में लगाया जाएगा।

निवेश की शर्तें और फंड मैनेजर

यह एक पैसिवली मैनेज्ड फंड है। इसमें फंड मैनेजर एक्टिवली स्टॉक सिलेक्शन करने के बजाय सीधे इंडेक्स की कंपनियों में आनुपातिक निवेश करेगा। इस स्कीम के फंड मैनेजर वायरल छड़वा है। वे दिसंबर 2020 से एसबीआई म्यूचुअल फंड से जुड़े हुए हैं और कई पैसिव स्कीम्स की देखरेख करते हैं।

एक ही सेक्टर में केंद्रित होने के कारण इस फंड का रिस्क मीटर ‘वेरी हाई’ श्रेणी में रखा गया है। निवेशकों पर रक्षा क्षेत्र और संबंधित कंपनियों के शेयर उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ेगा।

NFO की मुख्य बातें

पैरामीटर विवरण
फंड का नाम SBI BSE India Defence ETF
स्कीम का प्रकारओपन-एंडेड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF)
अंडरलाइंग इंडेक्सBSE India Defence Index
एनएफओ की तारीख13 अक्टूबर 2026 से 19 अक्टूबर 2026
ऑफर प्राइस₹10.00 प्रति यूनिट
न्यूनतम निवेश₹5,000 (इसके बाद ₹1,000 के गुणक में)
फंड मैनेजरवायरल छड़वा
रिस्क रेटिंगवेरी हाई

निवेशकों के लिए क्या है खास?

अगर आप डिफेंस क्षेत्र की कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा फायदा उठाना चाहते हैं और किसी एक शेयर में जोखिम लेने के बजाय पूरे इंडेक्स में डायवर्सिफाइड निवेश की तलाश में हैं, तो यह ETF एक विकल्प हो सकता है। वैसे चूंकि यह एक थीमैटिक/सेक्टोरल फंड है, इसलिए इसमें सामान्य डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स की तुलना में जोखिम अधिक रहता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FD Rates: ₹5 लाख की FD कराएं तो 1, 3 और 5 साल में कितना पैसा मिलेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

अगर आपके पास ₹5 लाख हैं और आप इसे तय समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो बैंक की FD एक अच्छा विकल्प हो सकती है। इसमें तय अवधि के लिए पैसा जमा किया जाता है। बैंक इस रकम पर ब्याज देता है। हालांकि, FD कराने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपका पैसा कितने समय में कितना बढ़ेगा।

आइए, SBI की ब्याज दरों के आधार पर समझते हैं कि ₹5 लाख की FD कराने पर 1 साल, 3 साल और 5 साल में कितनी रकम मिल सकती है।

₹5 लाख की FD पर 1 साल में कितना मिलेगा?

मान लीजिए कि आप SBI में ₹5 लाख की FD एक साल के लिए कराते हैं। इस अवधि के लिए 6.25% सालाना ब्याज दर है। तिमाही कंपाउंडिंग के हिसाब से एक साल में करीब ₹31,990 का ब्याज बन सकता है। यानी एक साल बाद आपको कुल लगभग ₹5,31,990 मिलेंगे।

3 साल की FD में कितनी रकम बनेगी?

अगर आप ₹5 लाख की FD तीन साल के लिए कराते हैं, तो ब्याज के साथ आपकी जमा रकम भी बढ़ती रहेगी। इसे कंपाउंडिंग कहते हैं। SBI की तीन साल की FD पर 6.30% सालाना ब्याज दर के हिसाब से तीन साल में करीब ₹1,03,131 का ब्याज मिल सकता है। इस तरह मैच्योरिटी पर कुल रकम लगभग ₹6,03,131 होगी।

5 साल की FD पर कितना ब्याज मिलेगा?

अब बात पांच साल की FD की। इस अवधि में पैसा जमा रखने पर आपको लंबे समय तक ब्याज कमाने का मौका मिलता है। SBI की पांच साल की FD पर 6.05% सालाना ब्याज दर मानकर चलें, तो तिमाही कंपाउंडिंग के हिसाब से करीब ₹1,75,088 का ब्याज बन सकता है। यानी पांच साल बाद कुल रकम लगभग ₹6,75,088 हो सकती है।

₹5 लाख की FD का पूरा हिसाब

FD की अवधिजमा रकमअनुमानित ब्याज
मैच्योरिटी पर कुल रकम

1 साल₹5,00,000₹31,990₹5,31,990
3 साल₹5,00,000₹1,03,131₹6,03,131
5 साल₹5,00,000₹1,75,088₹6,75,088

नोट: कैलकुलेशन SBI की उदाहरण के तौर पर बताई गई ब्याज दरों और तिमाही कंपाउंडिंग पर आधारित है। वास्तविक रकम FD खोलने की तारीख और बैंक की शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है। टैक्स और TDS शामिल नहीं हैं।

FD कराने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

FD कराने से पहले बैंक की ब्याज दर पर ध्यान देना जरूरी है। अलग-अलग अवधि के लिए दरें अलग हो सकती हैं। साथ ही, यह भी देखें कि समय से पहले FD तोड़ने पर कितना जुर्माना लग सकता है। अगर आपको बीच में पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो पूरी रकम एक ही FD में जमा करने के बजाय अलग-अलग अवधि की FD करा सकते हैं।

FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में भी आ सकता है। इसलिए सिर्फ मैच्योरिटी की रकम देखकर फैसला न लें। टैक्स के बाद आपके पास कितनी रकम बचेगी, इस पर भी ध्यान दें।

एक साल, तीन साल या पांच साल, कौन-सी FD बेहतर है?

इसका जवाब आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर आपको एक साल के भीतर पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो छोटी अवधि की FD आपके काम आ सकती है।

वहीं, अगर आप तीन या पांच साल तक पैसा नहीं निकालना चाहते, तो लंबी अवधि की FD पर मिलने वाले कुल ब्याज की तुलना कर सकते हैं। फैसला करते समय ब्याज दर के साथ अपनी जरूरत और पैसों की उपलब्धता का भी ध्यान रखना चाहिए।

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₹1.04 लाख वाला Samsung Galaxy S25 अब सिर्फ आधे दाम में, SBI ऑफर के साथ मिलेगा एक्सचेंज का भी फायदा

Flipkart की सेल में अगर आप प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने का इंतजार कर रहे हैं, तो Samsung Galaxy S25 पर मिल रहा यह ऑफर आपके काम का हो सकता है। 1 लाख रुपये से ज्यादा MRP वाला यह फोन अभी 52 हजार रुपये के करीब खरीदा जा सकता है। खास बात यह है कि कीमत कम करने के लिए एक के बाद एक दो डिस्काउंट का फायदा मिल रहा है।

Samsung Galaxy S25 पर बड़ी छूट

Flipkart पर Samsung Galaxy S25 के 128GB स्टोरेज और 12GB RAM वाले मॉडल की कीमत 1,04,999 रुपये है। फिलहाल सेल के दौरान यह फोन 54,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। यानी इसकी कीमत पहले ही 5,000 रुपये कम हो चुकी है।

इसके बाद Flipkart SBI ऑफर के तहत 2,750 रुपये की अतिरिक्त छूट मिल रही है। दोनों डिस्काउंट का फायदा मिलने के बाद Galaxy S25 की प्रभावी कीमत घटकर सिर्फ 52,249 रुपये रह जाती है।

Samsung Galaxy S25 की डील प्राइस

कीमत/ऑफरराशि
MRP₹1,04,999
डिस्काउंट से पहले सेल कीमत₹59,999
लागू डिस्काउंट₹5,000
मौजूदा प्रोडक्ट कीमत₹54,999
Flipkart SBI डिस्काउंट₹2,750
अंतिम Buy Now कीमत₹52,249

Flipkart पर ₹53,350 तक का एक्सचेंज ऑफर भी मिल रहा है। लिस्टिंग में अभी Apple iPhone 15 Pro को एक्सचेंज के लिए चुने गए डिवाइस के तौर पर दिखाया गया है। एक्सचेंज की असल कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन सा डिवाइस एक्सचेंज किया जा रहा है, उसकी हालत कैसी है और Flipkart के नियम और शर्तें क्या हैं।

यह एक्सचेंज ऑफर 52,249 रुपये की Buy Now कीमत से अलग है। यानी अगर आपके पास पुराना स्मार्टफोन है और वह एक्सचेंज के लिए योग्य है, तो उसे बदलकर Galaxy S25 की प्रभावी कीमत को और कम किया जा सकता है।

Samsung Galaxy S25 के स्पेसिफिकेशन्स

Flipkart पर दिखाए गए Galaxy S25 वेरिएंट में 12GB RAM और 128GB स्टोरेज है। इसमें 50MP का मेन कैमरा, 12MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा और 3x ऑप्टिकल जूम वाला 10MP का टेलीफोटो कैमरा है। इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी, Samsung का ProVisual Engine और IP68-रेटेड डस्ट और वॉटर रेजिस्टेंस भी है।

सेल की कीमत, डिस्काउंट और SBI बैंक ऑफर के साथ, Galaxy S25 को Flipkart पर ₹52,249 में खरीदा जा सकता है। जिन खरीदारों के पास एलिजिबल स्मार्टफोन है, वे एक्सचेंज ऑफर का इस्तेमाल करके इसकी कीमत और कम कर सकते हैं।

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FD तोड़ने पर कितना नुकसान होता है, क्या आपको ऐसा करना चाहिए? समझिए पूरा हिसाब

FD premature withdrawal: FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट को सुरक्षित निवेश में गिना जाता है। लेकिन जरूरत पड़ने पर अगर FD की मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाल लिया जाए, तो मिलने वाला ब्याज उम्मीद से कम हो सकता है। बैंक प्रीमैच्योर क्लोजर पर पेनल्टी भी लगा सकते हैं। इसलिए FD तोड़ने से पहले यह समझना जरूरी है कि असल में कितना नुकसान हो सकता है।

FD तोड़ने पर क्या होता है?

मान लीजिए आपने ₹5 लाख की FD 3 साल के लिए 7% सालाना ब्याज पर कराई। लेकिन किसी जरूरी खर्च के लिए आपको 1 साल बाद ही पैसा निकालना पड़ गया।

अगर FD पूरी 3 साल चलती, तो आपको 7% की दर से ब्याज मिलता। लेकिन 1 साल में तोड़ने पर बैंक जरूरी नहीं कि पूरे 7% की दर से ब्याज दे। बैंक अक्सर उस अवधि के लिए लागू FD रेट के आधार पर ब्याज की गणना करता है और उसके ऊपर प्रीमैच्योर क्लोजर चार्ज भी लगा सकता है।

आसान उदाहरण से समझिए

अगर आपका बैंक 1 साल की FD पर 6% ब्याज दे रहा है और समय से पहले FD तोड़ने पर 1% की पेनल्टी लगती है। ऐसे में प्रभावी ब्याज दर 5% हो सकती है। ₹5 लाख पर 7% के हिसाब से एक साल का ब्याज करीब ₹35,000 बनता।

लेकिन 5% के हिसाब से ब्याज करीब ₹25,000 होगा। यानी इस उदाहरण में करीब ₹10,000 का ब्याज अंतर हो सकता है। वास्तविक रकम बैंक की FD की शर्तों और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी।

FD तोड़ने पर क्या-क्या नुकसान हो सकता है?

मामलापूरी अवधि तक FD रखने पर
समय से पहले FD तोड़ने पर

निवेश₹5 लाख₹5 लाख
मूल FD अवधि3 साल1 साल में बंद
FD रेट7%
लागू अवधि की दर देखी जाएगी

अनुमानित 1 साल का ब्याज₹35,000
उदाहरण में ₹25,000

संभावित ब्याज अंतर—₹10,000
प्रीमैच्योर क्लोजर चार्जनहींबैंक के नियम के अनुसार
कुल फायदाज्यादाकम

क्या हर स्थिति में FD तोड़ना गलत है?

नहीं। अगर अचानक मेडिकल खर्च आ गया है, नौकरी चली गई है या कोई जरूरी भुगतान करना है, तो FD तोड़ना समझदारी हो सकती है। खासकर तब, जब दूसरा विकल्प महंगा पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया हो।

मान लीजिए FD तोड़ने से आपको ब्याज में ₹10,000 का नुकसान हो रहा है, लेकिन पैसा न होने पर आपको 15-20% ब्याज वाला कर्ज लेना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में FD तोड़ना ज्यादा सस्ता पड़ सकता है।

FD तोड़ने से पहले 6 बातों का ध्यान रखें

  • FD पूरी होने में कितना समय बचा है, इसे जरूर देखना चाहिए। अगर कम समय बचा है, तो FD तोड़ने से बचा जा सकता है।
  • FD आज तोड़ने पर बैंक आपको कुल कितनी रकम देगा, पहले यह पता करें।
  • FD की तय ब्याज दर और समय से पहले निकालने पर मिलने वाली ब्याज दर की तुलना भी करनी चाहिए।
  • बैंक FD समय से पहले तोड़ने पर कितना चार्ज काटेगा, इसकी जानकारी लें।
  • अगर जरूरत कम रकम की है, तो पूरी FD तोड़ने के बजाय दूसरे विकल्प देखें।
  • FD तोड़ने के बजाय FD पर लोन, ओवरड्राफ्ट या दूसरी बचत का इस्तेमाल करना कितना महंगा पड़ेगा, इसकी तुलना भी कर लें।

FD तोड़ने के बजाय लोन लेना बेहतर हो सकता है?

कुछ मामलों में बैंक FD के बदले लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देते हैं। इसमें FD को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए अगर आपको थोड़े समय के लिए पैसे चाहिए, तो FD तोड़ने के साथ इस विकल्प की लागत भी देख लेनी चाहिए।

मसलन, आपकी ₹5 लाख की FD है और आपको सिर्फ ₹1 लाख की जरूरत है। ऐसी स्थिति में पूरी FD तोड़ने के बजाय FD के बदले मिलने वाले लोन या ओवरड्राफ्ट की ब्याज लागत देखना ज्यादा समझदारी हो सकती है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

FD Monthly Income: ₹10 लाख की FD से हर महीने कितनी कमाई होगी? समझिए ब्याज का पूरा कैलकुलेशन

FD Monthly Income: अगर आपके पास ₹10 लाख की एकमुश्त रकम है और आप इससे हर महीने एक तय इनकम चाहते हैं, तो FD एक विकल्प हो सकती है। इसमें आपकी मूल रकम बैंक में जमा रहती है और उस पर ब्याज मिलता है।

लेकिन सवाल है कि ₹10 लाख की FD से हर महीने कितनी इनकम होगी? इसका जवाब ब्याज दर पर निर्भर करता है। दर जितनी ज्यादा होगी, हर महीने मिलने वाला ब्याज भी उतना ही ज्यादा होगा।

बैंक FD की ब्याज दरें किस रेंज में हैं?

FD की दरें बैंक और अवधि के हिसाब से बदलती हैं। बड़े बैंकों में कई अवधियों पर ब्याज दर करीब 6% से 6.5% के आसपास है। वहीं कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा अवधि में इससे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं।

उदाहरण के लिए, SBI और HDFC Bank की कुछ FD अवधियों में दर करीब 6% से 6.5% के आसपास है। दूसरी तरफ AU Small Finance Bank और Jana Small Finance Bank जैसी संस्थाओं की कुछ अवधियों में दर 7% से 8% तक पहुंच रही है।

₹10 लाख की FD पर कितनी इनकम?

मान लीजिए आपको 6% ब्याज मिल रहा है। ऐसे में ₹10 लाख पर सालाना करीब ₹60,000 ब्याज बनेगा। यानी मासिक भुगतान के हिसाब से करीब ₹5,000 की इनकम होगी।

अगर ब्याज दर 7% है, तो सालाना ब्याज ₹70,000 होगा। इस हिसाब से हर महीने करीब ₹5,833 मिलेंगे। वहीं 8% ब्याज पर सालाना ₹80,000 और करीब ₹6,667 महीने की इनकम बनेगी।

FD पर ब्याजसालाना ब्याज
मंथली इनकम

6%₹60,000₹5,000
6.50%₹65,000₹5,417
7%₹70,000₹5,833
7.50%₹75,000₹6,250
8%₹80,000₹6,667

ये आंकड़े ₹10 लाख की रकम पर साधारण सालाना ब्याज के आधार पर हैं। वास्तविक भुगतान बैंक की FD स्कीम और ब्याज भुगतान के विकल्प के मुताबिक अलग हो सकता है।

हर महीने ब्याज चाहिए तो ऐसी FD चुनें

अगर आपका मकसद हर महीने खर्च के लिए रकम लेना है, तो ऐसी FD देखनी होगी जिसमें ब्याज का नियमित भुगतान मिलता हो। बैंक के विकल्प के हिसाब से ब्याज मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना लिया जा सकता है।

वहीं क्युमुलेटिव FD में ब्याज बीच में नहीं मिलता। वह FD की मूल रकम के साथ जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर मिलता है। इसलिए मंथली इनकम के लिए नियमित ब्याज भुगतान वाली FD ज्यादा सही है।

₹10 लाख की मूल रकम का क्या होगा?

अगर आप सिर्फ FD का ब्याज निकालते हैं, तो मूल ₹10 लाख FD में बना रह सकता है। यानी ब्याज को हर महीने इनकम के तौर पर लिया जा सकता है और मूल रकम को मैच्योरिटी तक रखा जा सकता है।

हालांकि, FD समय से पहले तोड़ने पर बैंक के नियम लागू होते हैं। ऐसे में ब्याज की रकम पर असर पड़ सकता है। इसलिए FD करने से पहले प्रीमैच्योर विड्रॉल की शर्त देखना जरूरी है।

FD के ब्याज पर टैक्स भी लगेगा

FD से मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल होता है। इसलिए ₹5,833 या ₹6,667 महीने की रकम को टैक्स के बाद मिलने वाली इनकम नहीं माना जा सकता।

आपकी कुल आय और लागू इनकम टैक्स नियमों के हिसाब से टैक्स देनदारी तय होगी। इसलिए FD चुनते समय ब्याज दर के साथ टैक्स के बाद बचने वाली रकम भी देखनी चाहिए।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Pension Calculator: LIC की इस स्कीम में एक बार लगाएं पैसा, जिंदगीभर मिलेगी पेंशन; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Pension Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक तय रकम खाते में आती रहे, तो काफी सहूलियत रहती है। इसी जरूरत के लिए LIC की Jeevan Akshay-VII स्कीम है। इसमें एक बार पैसा लगाना होता है। इसके बाद चुने गए विकल्प के हिसाब से पेंशन मिलती रहती है।

यह LIC का Immediate Annuity Plan है। यानी पैसा लगाने के बाद एन्युटी का भुगतान शुरू हो जाता है। LIC के मुताबिक इसमें एन्युटी की दर शुरुआत में तय होती है और चुने गए विकल्प के मुताबिक जिंदगीभर भुगतान मिलता है।

₹10 लाख लगाने पर कितनी पेंशन?

मान लीजिए आपकी उम्र 60 साल है। आप इस स्कीम में ₹10 लाख लगाते हैं। LIC के मौजूदा V07 ब्रोशर में सालाना पेमेंट के उदाहरण दिए गए हैं।

Option A में ₹10 लाख लगाने पर सालाना ₹86,100 की एन्युटी मिलती है। यानी करीब ₹7,175 महीने के हिसाब से। वहीं, Option F में सालाना एन्युटी ₹64,000 है। यानी करीब ₹5,333 महीने।

विकल्प₹10 लाख पर सालाना एन्युटी
करीब मासिक रकम

Option A₹86,100₹7,175
Option B₹85,500₹7,125
Option C₹84,000₹7,000
Option D₹81,800₹6,817
Option E₹79,200₹6,600
Option F₹64,000₹5,333
Option G₹68,700₹5,725

ये आंकड़े 60 साल की उम्र में ₹10 लाख के खरीद मूल्य और सालाना पेमेंट के LIC के उदाहरण पर आधारित हैं। इनमें पेंशन उम्रभर मिलती है। हालांकि, LIC से मिलने वाली एन्युटी/पेंशन पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लग सकता है।

पेंशन के कई विकल्प मिलते हैं

इस स्कीम में सिर्फ एक तरह की पेंशन नहीं है। LIC ने कुल 10 एन्युटी विकल्प दिए हैं। Option A में जिंदगीभर एक तय रकम मिलती है। Option B, C, D और E में 5, 10, 15 या 20 साल की गारंटी अवधि है। इसके बाद भी पॉलिसीधारक के जिंदा रहने तक पेंशन जारी रहती है।

Option F थोड़ा अलग है। इसमें जिंदगीभर पेंशन मिलती है। पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद खरीद मूल्य वापस करने का प्रावधान है। इसी वजह से इस विकल्प में पेंशन बाकी कुछ विकल्पों से कम रहती है।

पैसा एक बार लगाना होगा

Jeevan Akshay-VII में नियमित प्रीमियम नहीं भरना होता। इसमें एकमुश्त रकम लगानी होती है। इसके बाद आप पेंशन लेने का तरीका चुन सकते हैं।

पेंशन मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना ली जा सकती है। LIC के मुताबिक इस प्लान में 10 अलग-अलग एन्युटी विकल्प हैं।

पति-पत्नी के लिए भी विकल्प

अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद पति या पत्नी को भी पेंशन मिलती रहे, तो जॉइंट लाइफ के विकल्प हैं। इनमें दोनों लोगों की उम्र और चुने गए विकल्प के आधार पर एन्युटी तय होती है।

LIC के विकल्प H और I में दूसरे व्यक्ति को पेंशन जारी रखने का प्रावधान है। Option J में आखिरी व्यक्ति की मृत्यु के बाद खरीद मूल्य वापस करने का भी प्रावधान है।

पेंशन हर साल 3% बढ़ाने का विकल्प भी

Option G में पेंशन हर साल साधारण आधार पर 3% बढ़ती है। शुरुआत में मिलने वाली रकम बाकी कुछ विकल्पों से कम होती है। लेकिन समय के साथ पेंशन बढ़ती रहती है।

इसका फायदा लंबे समय तक पेंशन लेने वाले व्यक्ति को मिल सकता है। हालांकि, इसमें भी शुरुआत में मिलने वाली रकम और दूसरे विकल्पों की तुलना देखना जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत तय एन्युटी है। बाजार ऊपर जाए या नीचे, चुने गए विकल्प के मुताबिक एन्युटी भुगतान जारी रहता है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद तय आय चाहने वाले लोगों के लिए यह एक विकल्प है।

लेकिन एकमुश्त रकम लगाने के बाद उसे आसानी से वापस निकालने की सुविधा नहीं होती। इसलिए पूरी रिटायरमेंट बचत एक ही जगह लगाने के बजाय अपनी जरूरत और बाकी आय को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

पैसों की जरूरत होने पर FD तोड़ें या FD पर लोन लें? समझिए पूरा कैलकुलेशन

कई बार हमें अचानक से पैसों की जरूरत पड़ जाती है और उस वक्त हमारे पास विकल्प काफी सीमित होते हैं। अब मान लीजिए कि आपको 3 लाख रुपये की जरूरत पड़ गई। आपके पास 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) है। FD पर आपको 7% सालाना ब्याज मिल रहा है। अब आपके सामने दो रास्ते हैं। पहला, FD तोड़कर पैसा निकाल लें। दूसरा, FD को जारी रखते हुए उसके बदले लोन ले लें।

दोनों विकल्पों में पैसा आपके काम आ जाएगा। लेकिन दोनों की लागत अलग होगी। इसलिए फैसला करने से पहले पूरा हिसाब समझना जरूरी है।

FD तोड़ने पर क्या होगा?

अब मान लेते हैं कि आपकी 5 लाख रुपये की FD एक साल की है और ब्याज दर 7% है। अगर FD पूरी अवधि तक चलती है तो एक साल में करीब 35,000 रुपये का ब्याज मिलेगा।

लेकिन आपको 6 महीने बाद 3 लाख रुपये की जरूरत पड़ गई और आपने FD तोड़ दी। ऐसी स्थिति में बैंक आम तौर पर FD की मूल ब्याज दर के बजाय उस अवधि के लिए लागू दर के हिसाब से ब्याज देता है। इसके अलावा बैंक की पॉलिसी के मुताबिक प्रीमैच्योर क्लोजर चार्ज भी लग सकता है।

कितनी पेनल्टी और कितना ब्याज

मिसाल के लिए, एफडी पर 6 महीने की लागू दर 6% है। और बैंक 1% की पेनल्टी लगाता है। ऐसे में प्रभावी ब्याज दर 5% रह जाती है।

5 लाख रुपये पर 6 महीने के लिए 5% की दर से करीब 12,500 रुपये ब्याज मिलेगा। यानी पूरी अवधि की FD से मिलने वाले करीब 35,000 रुपये के मुकाबले ब्याज में करीब 22,500 रुपये का अंतर आ सकता है।

FD पर लोन लेने पर कितना खर्च?

अब दूसरा विकल्प देखते हैं। आपने FD नहीं तोड़ी और बैंक से उसके बदले 3 लाख रुपये का लोन ले लिया। उदाहरण के लिए, बैंक FD की ब्याज दर से 1.5% ज्यादा ब्याज पर लोन देता है। यानी 7% की FD पर लोन की ब्याज दर करीब 8.5% हुई।

अगर 3 लाख रुपये का लोन 6 महीने के लिए लिया जाता है, तो ब्याज करीब 12,750 रुपये बैठेगा। इस दौरान आपकी 5 लाख रुपये की FD चलती रहेगी। यानी उस पर FD का ब्याज भी मिलता रहेगा।

दोनों विकल्पों का हिसाब

FD तोड़ेंFD पर लोन
आपकी जरूरत₹3 लाख₹3 लाख
FD₹5 लाख बंद₹5 लाख जारी
FD ब्याजकरीब ₹12,500करीब ₹17,500
लोन ब्याज—करीब ₹12,750
6 महीने बादFD नहीं रहेगीFD जारी रहेगी
अतिरिक्त फायदा—FD का ब्याज मिलता रहेगा

3 लाख की जरूरत 6 महीने के लिए है तो इस उदाहरण में FD पर लोन लेना सस्ता पड़ रहा है। लेकिन ₹3 लाख का लोन बाद में चुकाना होगा।

FD पर लोन कब बेहतर हो सकता है?

अगर आपको थोड़े समय के लिए पैसों की जरूरत है और कुछ महीनों में रकम वापस आने की उम्मीद है, तो FD पर लोन एक विकल्प हो सकता है।

इसमें आपकी FD बनी रहती है। जरूरत पूरी होने के बाद लोन चुका सकते हैं। FD को समय से पहले तोड़ने से मिलने वाले कम ब्याज का नुकसान भी बच सकता है।

FD कब तोड़ना समझदारी हो सकती है?

अगर आपको लंबे समय के लिए पैसे चाहिए और लोन चुकाने की स्थिति साफ नहीं है, तो सिर्फ FD बचाए रखने के लिए लोन लेना महंगा पड़ सकता है।

ऐसे में FD तोड़ने और लोन की कुल लागत की तुलना करनी चाहिए। खासकर तब, जब लोन की ब्याज दर काफी ज्यादा हो।

फैसला लेने से पहले ये 3 चीजें देखें

सबसे पहले बैंक से पूछें कि आज FD तोड़ने पर आपको हाथ में कितनी रकम मिलेगी। इसके बाद FD पर लोन की ब्याज दर और सभी चार्ज पता करें।

फिर दोनों का कुल खर्च निकालें। अगर कुछ महीनों की जरूरत है और जल्द पैसा वापस आने वाला है, तो FD पर लोन का विकल्प देखा जा सकता है। अगर लंबी अवधि के लिए रकम चाहिए, तो FD तोड़ना और लोन लेने की कुल लागत की तुलना करना ज्यादा जरूरी है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

FD मैच्योरिटी के बाद पैसा निकालना भूल गए तो क्या होगा? समझिए RBI के नियम और ब्याज का पूरा हिसाब

FD Maturity: फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD को सुरक्षित निवेश माना जाता है। पैसा एक तय अवधि के लिए जमा किया और ब्याज दर भी पहले से पता होती है। लेकिन कई बार FD की मैच्योरिटी डेट निकल जाती है और निवेशक को पता ही नहीं चलता।

फिर सवाल उठता है… पैसा कहां गया? क्या FD अपने आप रिन्यू हो गई? अगर पैसा बैंक में ही पड़ा है तो कितना ब्याज मिलेगा? और अगर 10 साल तक किसी ने रकम पर ध्यान नहीं दिया तो उसका क्या होगा?

मैच्योरिटी के बाद FD का क्या होता है?

FD की अवधि पूरी होने के बाद बैंक आपके दिए मैच्योरिटी निर्देश के हिसाब से रकम का निपटारा करता है। अगर आपने ऑटो रिन्युअल का विकल्प चुना है, तो FD दोबारा रिन्यू हो सकती है। ऐसे में नई FD पर उस समय लागू ब्याज दर मिलेगी।

वहीं, अगर मैच्योरिटी पर पैसा आपके सेविंग्स अकाउंट में जाने का निर्देश दिया गया है, तो बैंक की प्रक्रिया के मुताबिक रकम उस खाते में क्रेडिट हो सकती है।

एक नजर में पूरा मामला

स्थितिक्या होगा?ब्याज का नियम
ऑटो रिन्युअल चालूFD दोबारा रिन्यू हो सकती है
नई FD की लागू दर

मैच्योरिटी पर खाते में क्रेडिट का निर्देशरकम खाते में आ सकती हैखाते की लागू दर
FD मैच्योर, रकम अनपेडरकम ओवरड्यू डिपॉजिट के रूप में रह सकती है
सेविंग्स या कॉन्ट्रैक्टेड FD दर में से जो कम हो

नई FD को समय से पहले तोड़ाप्री-मैच्योर निकासी
बैंक की पॉलिसी के मुताबिक ब्याज/पेनल्टी

रकम 10 साल या ज्यादा समय तक अनक्लेम्डDEA Fund में ट्रांसफर हो सकती हैबाद में बैंक के जरिए क्लेम किया जा सकता है

अगर कोई निर्देश नहीं दिया था तो?

यह स्थिति थोड़ी अलग है। अगर FD मैच्योर हो गई और उसकी रकम का भुगतान नहीं हुआ, तो वह रकम बैंक के पास ओवरड्यू डिपॉजिट के तौर पर रह सकती है।

RBI के मौजूदा नियमों के मुताबिक, ऐसी मैच्योर लेकिन अनपेड घरेलू टर्म डिपॉजिट पर ब्याज सेविंग्स अकाउंट की लागू ब्याज दर या मैच्योर FD की कॉन्ट्रैक्टेड ब्याज दर, दोनों में से जो कम हो, उस दर से मिलता है।

₹5 लाख की FD का आसान हिसाब

मान लीजिए आपने ₹5 लाख की FD 7% सालाना ब्याज पर कराई थी। FD मैच्योर होने के बाद पैसा बैंक में ही पड़ा रहा और उस समय सेविंग्स अकाउंट की लागू दर 3% थी।

अगर दोनों में 3% कम है, तो ओवरड्यू अवधि के लिए इसी दर से ब्याज मिलेगा।

स्थितिब्याज दर
₹5 लाख पर एक साल का अनुमानित ब्याज

पुरानी FD की दर7%₹35,000
मैच्योरिटी के बाद लागू कम दर3%₹15,000
अंतर4%₹20,000

यानी सिर्फ एक साल में करीब ₹20,000 के ब्याज का अंतर हो सकता है। इसलिए मैच्योरिटी के बाद FD को लंबे समय तक बिना देखे छोड़ना ठीक नहीं है।

 

FD ऑटो रिन्यू हो गई तो क्या करें?

मान लीजिए आपको मैच्योरिटी पर पैसा चाहिए था। लेकिन ध्यान नहीं दिया और FD ऑटो रिन्यू हो गई। ऐसे में बैंक से तुरंत बात करें। पहले यह पता करें कि FD कब रिन्यू हुई और नई FD की ब्याज दर क्या है।

अगर आपको पैसा निकालना है तो FD को समय से पहले तोड़ना पड़ सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक बैंक प्री-मैच्योर निकासी पर पेनल्टी लगा सकते हैं। यह पेनल्टी अमूमन 0.5% से 1% तक होती है।

10 साल तक पैसा नहीं निकाला तो क्या होगा?

RBI के नियमों के मुताबिक, अगर कोई डिपॉजिट 10 साल तक इनऑपरेटिव या अनक्लेम्ड रहता है, तो बैंक उसे DEA Fund में ट्रांसफर कर देता है। इसे Depositor Education and Awareness Fund कहते हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि आपका पैसा खत्म हो गया। अगर बाद में आपको या आपके वारिस को पैसे का पता चलता है, तो आप संबंधित बैंक के जरिए रकम का दावा कर सकते हैं। इसके लिए कोई तय समय-सीमा भी नहीं है।

पैसा खोजने के लिए UDGAM पोर्टल भी है

अगर आपको लगता है कि किसी बैंक में आपका पुराना पैसा या FD पड़ा हो सकता है, लेकिन बैंक या अकाउंट की जानकारी याद नहीं है, तो RBI का UDGAM पोर्टल काम आ सकता है।

इस पोर्टल के जरिए कई बैंकों में मौजूद अनक्लेम्ड डिपॉजिट की जानकारी खोजी जा सकती है। हालांकि, पैसा सीधे RBI से नहीं मिलता। दावा संबंधित बैंक के जरिए ही करना होता है।

नुकसान से बचने का आसान तरीका

  • FD कराते समय सिर्फ ब्याज दर देखकर काम खत्म न करें। यह भी देखें कि मैच्योरिटी पर पैसा कहां जाएगा और ऑटो रिन्युअल चालू है या नहीं।
  • FD की मैच्योरिटी डेट मोबाइल कैलेंडर में सेव कर दें। मैच्योरिटी से करीब एक हफ्ते पहले रिमाइंडर लगा दें।
  • अगर पैसा आगे भी FD में रखना है तो उस समय की ब्याज दर देखें। अगर पैसे की जरूरत है तो मैच्योरिटी पर रकम निकाल लें।

FD तोड़ने पर कितना नुकसान होता है? समझिए ब्याज और पेनल्टी का पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।