₹10 लाख की कार खरीदें या पैसा निवेश करें? 5 साल में कितना हो सकता है फायदा-नुकसान, पूरा हिसाब समझिए

Car vs Investment: कार खरीदना कई लोगों का सपना होता है। लेकिन इस फैसले का असर आपकी जेब पर भी पड़ता है। कार खरीदने के बाद उसकी कीमत घटती है। साथ ही पेट्रोल, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर भी पैसा खर्च होता है। दूसरी तरफ, यही ₹10 लाख निवेश कर दिए जाएं तो 5 साल में अच्छी रकम बन सकती है। ऐसे में सवाल है कि कार खरीदना बेहतर है या पैसे को बढ़ने का मौका देना?

₹10 लाख निवेश करने पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। आप इस रकम को 5 साल के लिए निवेश करते हैं। अब रिटर्न के अलग-अलग अनुमान से समझते हैं कि आपकी रकम कितनी हो सकती है।

अगर सालाना 8% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद ₹10 लाख बढ़कर करीब ₹14.69 लाख हो जाएंगे। इस तरह आपको लगभग ₹4.69 लाख का फायदा होगा।

वहीं, 10% सालाना रिटर्न पर रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है। यानी ₹6.11 लाख की बढ़त। अगर सालाना रिटर्न 12% रहा, तो 5 साल बाद कुल रकम करीब ₹17.62 लाख हो सकती है। इस स्थिति में मुनाफा लगभग ₹7.62 लाख होगा।

सालाना रिटर्नशुरुआती निवेश5 साल बाद कुल रकमअनुमानित मुनाफा
8%₹10,00,000₹14,69,000₹4,69,000
10%₹10,00,000₹16,11,000₹6,11,000
12%₹10,00,000₹17,62,000₹7,62,000

नोट : यह कैलकुलेशन कंपाउंडिंग के आधार पर है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में रिटर्न तय नहीं होता। असल नतीजा निवेश के विकल्प और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

कार खरीदने पर 5 साल में कितना खर्च होगा?

अब कार का हिसाब समझते हैं। मान लीजिए आप ₹10 लाख की कार खरीदते हैं और 5 साल तक उसे चलाते हैं। इस दौरान कार की कीमत घटेगी। इसे डेप्रिसिएशन कहते हैं। इसके अलावा इंश्योरेंस और सर्विस पर भी खर्च होगा।

उदाहरण के लिए, मान लेते हैं कि 5 साल बाद कार की रीसेल वैल्यू ₹5 लाख रह जाती है। यानी उसकी कीमत में ₹5 लाख की कमी आई। इसके अलावा, 5 साल में इंश्योरेंस पर करीब ₹1 लाख और सर्विस व मेंटेनेंस पर ₹75,000 खर्च होते हैं।

₹10 लाख की कार खरीदने पर 5 साल का खर्च

खर्च का हिसाबअनुमानित रकम
कार की खरीद कीमत₹10,00,000
5 साल बाद रीसेल वैल्यू₹5,00,000
कार की कीमत में कमी₹5,00,000
5 साल का इंश्योरेंस खर्च₹1,00,000
सर्विस और मेंटेनेंस₹75,000
5 साल की कुल लागत₹6,75,000

नोट: ये अनुमानित खर्च और वैल्यू हैं। इसमें पेट्रोल-डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है।

इस हिसाब से कार रखने की लागत 5 साल में करीब ₹6.75 लाख बैठती है। इसमें पेट्रोल या डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है। असल खर्च कार के मॉडल और इस्तेमाल के हिसाब से अलग हो सकता है।

दोनों विकल्पों में कितना फर्क पड़ेगा?

अब दोनों की तुलना करते हैं। अगर आप ₹10 लाख निवेश करते हैं और सालाना 10% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है।

दूसरी तरफ, कार खरीदने पर 5 साल बाद उसकी अनुमानित कीमत ₹5 लाख रह जाती है। यानी एक तरफ निवेश की रकम बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ कार की कीमत घट रही है।

सिर्फ निवेश की रकम और कार की रीसेल वैल्यू देखें, तो दोनों के बीच ₹11.11 लाख का अंतर होगा। कार के इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर खर्च हुए ₹1.75 लाख भी जोड़ दें, तो इस उदाहरण में वित्तीय अंतर करीब ₹12.86 लाख तक पहुंचता है।

लेकिन यह पूरी तरह समान आधार पर की गई तुलना नहीं है। निवेश करने वाले व्यक्ति के पास कार नहीं होगी। उसे आने-जाने के लिए दूसरे साधनों पर खर्च करना पड़ सकता है। वहीं, कार खरीदने वाले को निजी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। इसलिए अंतिम फैसला लेते समय इस पहलू को भी देखना जरूरी है।

क्या कार खरीदने के बजाय निवेश करना बेहतर है?

यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर रोज ऑफिस जाने या परिवार के साथ सफर करने के लिए कार जरूरी है, तो इसे सिर्फ खर्च मानना सही नहीं होगा। कार से समय बचता है और आने-जाने में सुविधा मिलती है।

लेकिन अगर कार खरीदने से आपकी बचत खत्म हो रही है या घर, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए पैसा कम पड़ सकता है, तो फैसला टालने पर विचार किया जा सकता है। एक विकल्प यह भी है कि आप कम कीमत की कार खरीदें और बाकी रकम निवेश करें। या फिर एकमुश्त 10 लाख आप निवेश कर सकते हैं। और कार लोन ले सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।