₹10 लाख की कार खरीदें या पैसा निवेश करें? 5 साल में कितना हो सकता है फायदा-नुकसान, पूरा हिसाब समझिए

Car vs Investment: कार खरीदना कई लोगों का सपना होता है। लेकिन इस फैसले का असर आपकी जेब पर भी पड़ता है। कार खरीदने के बाद उसकी कीमत घटती है। साथ ही पेट्रोल, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर भी पैसा खर्च होता है। दूसरी तरफ, यही ₹10 लाख निवेश कर दिए जाएं तो 5 साल में अच्छी रकम बन सकती है। ऐसे में सवाल है कि कार खरीदना बेहतर है या पैसे को बढ़ने का मौका देना?

₹10 लाख निवेश करने पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। आप इस रकम को 5 साल के लिए निवेश करते हैं। अब रिटर्न के अलग-अलग अनुमान से समझते हैं कि आपकी रकम कितनी हो सकती है।

अगर सालाना 8% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद ₹10 लाख बढ़कर करीब ₹14.69 लाख हो जाएंगे। इस तरह आपको लगभग ₹4.69 लाख का फायदा होगा।

वहीं, 10% सालाना रिटर्न पर रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है। यानी ₹6.11 लाख की बढ़त। अगर सालाना रिटर्न 12% रहा, तो 5 साल बाद कुल रकम करीब ₹17.62 लाख हो सकती है। इस स्थिति में मुनाफा लगभग ₹7.62 लाख होगा।

सालाना रिटर्नशुरुआती निवेश5 साल बाद कुल रकमअनुमानित मुनाफा
8%₹10,00,000₹14,69,000₹4,69,000
10%₹10,00,000₹16,11,000₹6,11,000
12%₹10,00,000₹17,62,000₹7,62,000

नोट : यह कैलकुलेशन कंपाउंडिंग के आधार पर है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में रिटर्न तय नहीं होता। असल नतीजा निवेश के विकल्प और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

कार खरीदने पर 5 साल में कितना खर्च होगा?

अब कार का हिसाब समझते हैं। मान लीजिए आप ₹10 लाख की कार खरीदते हैं और 5 साल तक उसे चलाते हैं। इस दौरान कार की कीमत घटेगी। इसे डेप्रिसिएशन कहते हैं। इसके अलावा इंश्योरेंस और सर्विस पर भी खर्च होगा।

उदाहरण के लिए, मान लेते हैं कि 5 साल बाद कार की रीसेल वैल्यू ₹5 लाख रह जाती है। यानी उसकी कीमत में ₹5 लाख की कमी आई। इसके अलावा, 5 साल में इंश्योरेंस पर करीब ₹1 लाख और सर्विस व मेंटेनेंस पर ₹75,000 खर्च होते हैं।

₹10 लाख की कार खरीदने पर 5 साल का खर्च

खर्च का हिसाबअनुमानित रकम
कार की खरीद कीमत₹10,00,000
5 साल बाद रीसेल वैल्यू₹5,00,000
कार की कीमत में कमी₹5,00,000
5 साल का इंश्योरेंस खर्च₹1,00,000
सर्विस और मेंटेनेंस₹75,000
5 साल की कुल लागत₹6,75,000

नोट: ये अनुमानित खर्च और वैल्यू हैं। इसमें पेट्रोल-डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है।

इस हिसाब से कार रखने की लागत 5 साल में करीब ₹6.75 लाख बैठती है। इसमें पेट्रोल या डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है। असल खर्च कार के मॉडल और इस्तेमाल के हिसाब से अलग हो सकता है।

दोनों विकल्पों में कितना फर्क पड़ेगा?

अब दोनों की तुलना करते हैं। अगर आप ₹10 लाख निवेश करते हैं और सालाना 10% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है।

दूसरी तरफ, कार खरीदने पर 5 साल बाद उसकी अनुमानित कीमत ₹5 लाख रह जाती है। यानी एक तरफ निवेश की रकम बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ कार की कीमत घट रही है।

सिर्फ निवेश की रकम और कार की रीसेल वैल्यू देखें, तो दोनों के बीच ₹11.11 लाख का अंतर होगा। कार के इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर खर्च हुए ₹1.75 लाख भी जोड़ दें, तो इस उदाहरण में वित्तीय अंतर करीब ₹12.86 लाख तक पहुंचता है।

लेकिन यह पूरी तरह समान आधार पर की गई तुलना नहीं है। निवेश करने वाले व्यक्ति के पास कार नहीं होगी। उसे आने-जाने के लिए दूसरे साधनों पर खर्च करना पड़ सकता है। वहीं, कार खरीदने वाले को निजी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। इसलिए अंतिम फैसला लेते समय इस पहलू को भी देखना जरूरी है।

क्या कार खरीदने के बजाय निवेश करना बेहतर है?

यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर रोज ऑफिस जाने या परिवार के साथ सफर करने के लिए कार जरूरी है, तो इसे सिर्फ खर्च मानना सही नहीं होगा। कार से समय बचता है और आने-जाने में सुविधा मिलती है।

लेकिन अगर कार खरीदने से आपकी बचत खत्म हो रही है या घर, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए पैसा कम पड़ सकता है, तो फैसला टालने पर विचार किया जा सकता है। एक विकल्प यह भी है कि आप कम कीमत की कार खरीदें और बाकी रकम निवेश करें। या फिर एकमुश्त 10 लाख आप निवेश कर सकते हैं। और कार लोन ले सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: बच्चे के जन्म पर ₹2000 की SIP, 18 साल बाद कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: बच्चे के जन्म के साथ ही माता-पिता के सामने एक लंबी लिस्ट आ जाती है। पढ़ाई, कॉलेज, करियर और आगे की जरूरतें। इनमें से ज्यादातर खर्च आज छोटे लगते हैं, लेकिन 15-18 साल बाद इनकी रकम काफी बड़ी हो सकती है। ऐसे में छोटी उम्र से निवेश शुरू करना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

मान लीजिए बच्चे के जन्म के साथ ही उसके नाम से हर महीने 2,000 रुपये की SIP शुरू की गई। रकम बहुत बड़ी नहीं है। परिवार के मासिक बजट पर भी इसका बहुत ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। लेकिन 18 साल का समय इस छोटी रकम को अच्छी-खासी पूंजी में बदल सकता है।

10% रिटर्न मिला तो करीब 11.5 लाख रुपये

अगर इस SIP से लंबी अवधि में औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो 18 साल बाद करीब 11.53 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है। यानी 4.32 लाख रुपये आपका लगाया हुआ पैसा होगा, जबकि करीब 7.21 लाख रुपये रिटर्न से बनेंगे। यहां समय सबसे बड़ा फैक्टर है। निवेश की अवधि 18 साल होने की वजह से रिटर्न पर भी आगे रिटर्न मिलता रहता है।

12% रिटर्न पर रकम 14 लाख के पार

अब अगर लंबी अवधि में औसत रिटर्न 12% सालाना रहा, तो तस्वीर और मजबूत हो जाती है। 2,000 रुपये की यही मंथली SIP 18 साल बाद करीब 14.23 लाख रुपये का फंड बना सकती है। इसमें भी कुल योगदान सिर्फ 4.32 लाख रुपये रहेगा। करीब 9.91 लाख रुपये की रकम निवेश से मिलने वाले रिटर्न से बनेगी।

15% रिटर्न मिला तो करीब 20 लाख रुपये

सबसे तेज तस्वीर तब बनती है जब निवेश पर औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है। ऐसी स्थिति में 2,000 रुपये की SIP 18 साल बाद करीब 19.65 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यहां कुल निवेश वही 4.32 लाख रुपये है। लेकिन रिटर्न करीब 15.33 लाख रुपये हो जाता है। यही वह जगह है जहां कंपाउंडिंग का असर साफ दिखाई देता है। निवेश की रकम छोटी है, लेकिन समय लंबा होने के कारण रिटर्न को भी बढ़ने के लिए पर्याप्त वक्त मिलता है।

18 साल बाद कितना पैसा?

रिटर्नकुल निवेश18 साल बाद फंडमुनाफा
10%₹4.32 लाख₹11.53 लाख₹7.21 लाख
12%₹4.32 लाख₹14.23 लाख₹9.91 लाख
15%₹4.32 लाख₹19.65 लाख₹15.33 लाख

नोट: 10%, 12% और 15% सिर्फ संभावित रिटर्न हैं। असल रिटर्न बाजार के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है।

सिर्फ 2,000 रुपये पर रुकना जरूरी नहीं

2,000 रुपये की SIP को शुरुआत मान सकते हैं। जैसे-जैसे परिवार की आय बढ़े, SIP की रकम भी बढ़ाई जा सकती है। मान लीजिए कुछ साल बाद मासिक SIP 2,000 से बढ़ाकर 3,000 या 5,000 रुपये कर दी जाती है। तब 18 साल के अंत में बनने वाला फंड काफी बड़ा हो सकता है।

इसे स्टेप-अप SIP के जरिए भी प्लान किया जा सकता है, जिसमें आमदनी बढ़ने के साथ निवेश की रकम धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है। इसका फायदा यह है कि शुरुआत में परिवार पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता। और बाद में बढ़ती आय के साथ बच्चे का फाइनेंशियल लक्ष्य भी बड़ा किया जा सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI कितनी बढ़ जाएगी? समझिए होम और पर्सनल लोन का पूरा कैलकुलेशन

RBI Repo Rate Hike: RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 7 अक्टूबर को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी। इसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके होम लोन की EMI पर भी पड़ सकता है। खासकर तब, जब आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा हो।

मान लीजिए आपने 20 साल के लिए 8.5% ब्याज दर पर होम लोन लिया है। अब ब्याज दर 0.50% बढ़कर 9% हो जाती है। ऐसे में आपकी EMI कितनी बढ़ेगी? 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के लोन पर इसका सीधा हिसाब समझिए।

10 लाख रुपये के लोन पर असर

10 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि में EMI करीब ₹8,678 बैठती है। ब्याज दर 9% होने पर यही EMI करीब ₹8,997 हो जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹319 ज्यादा देने होंगे। रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन लंबे समय तक यही बढ़ी हुई EMI चलती है तो कुल भुगतान पर इसका असर बढ़ जाता है।

20 लाख रुपये का लोन

20 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹17,356 है। ब्याज दर 9% होने पर यह बढ़कर करीब ₹17,995 हो जाएगी। मतलब हर महीने करीब ₹638 का अतिरिक्त बोझ। अगर घर का बजट पहले से EMI के हिसाब से सेट है, तो इतनी बढ़ोतरी भी महीने के खर्च में महसूस होती है।

30 लाख रुपये का लोन

30 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹26,035 बनती है। ब्याज दर बढ़कर 9% होने पर EMI करीब ₹26,992 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹957 ज्यादा। बड़े लोन में ब्याज दर का छोटा बदलाव भी EMI में साफ दिखाई देने लगता है।

40 लाख रुपये के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

40 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹34,713 है। 9% ब्याज होने पर यह करीब ₹35,989 हो जाएगी। इसका मतलब है कि हर महीने करीब ₹1,276 अतिरिक्त देने होंगे। साल भर में देखें तो EMI का यह अंतर करीब ₹15,300 बैठता है।

50 लाख रुपये के लोन पर असर सबसे ज्यादा

50 लाख रुपये के लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹43,391 है। अगर ब्याज दर 9% हो जाती है तो EMI करीब ₹44,986 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹1,595 ज्यादा। साल भर में यह अतिरिक्त बोझ करीब ₹19,100 हो जाता है।

होम लोन: 8.5% से 9% होने पर EMI का असर

लोन की रकम8.5% पर EMI9% पर EMIहर महीने बढ़ोतरी
सालाना अतिरिक्त बोझ

₹10 लाख₹8,678₹8,997₹319₹3,828
₹20 लाख₹17,356₹17,995₹638₹7,656
₹30 लाख₹26,035₹26,992₹957₹11,484
₹40 लाख₹34,713₹35,989₹1,276₹15,312
₹50 लाख₹43,391₹44,986₹1,595₹19,140

यह कैलकुलेशन 20 साल की लोन अवधि में 8.5% से 9% ब्याज दर होने पर किया गया है। वास्तविक EMI आपके बैंक, लोन की बाकी अवधि और ब्याज रीसेट के नियमों के हिसाब से अलग हो सकती है।

5 लाख रुपये के पर्सनल लोन पर भी असर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर होम लोन से ज्यादा होती है। मान लीजिए 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 12% ब्याज पर लिया गया है। इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी।

लेकिन, अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद पर्सनल लोन महंगा होता और ब्याज दर बढ़कर 12.5% हो जाती है तो नए लोन की EMI करीब ₹11,249 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹127 ज्यादा देने होंगे।

रेपो रेट बढ़ने पर EMI ही बढ़ेगी?

होम लोन में यह जरूरी नहीं। ब्याज दर बढ़ने के बाद बैंक और ग्राहकों के पास EMI बढ़ाने या लोन की अवधि बढ़ाने जैसे विकल्प होते हैं। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव किया जा सकता है।

अगर बैंक EMI को ज्यादा नहीं बढ़ाता है, तो लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है। दूसरी तरफ EMI बढ़ाने पर हर महीने जेब से ज्यादा पैसा जाएगा, लेकिन लोन की अवधि को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है।

रेपो रेट का असर आपकी जेब पर कैसे ?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा देता है। जब इसमें बदलाव होता है तो बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है। इसके बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।

हालांकि, रेपो रेट में 25 या 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर बैंक आपकी ब्याज दर भी बिल्कुल उतनी ही बढ़ा देगा। आपके लोन का बेंचमार्क, बैंक का स्प्रेड और रीसेट नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए अगर आपका फ्लोटिंग रेट वाला बड़ा होम लोन चल रहा है, तो RBI की हर रेपो रेट बैठक आपके लिए मायने रखती है। ब्याज दर में छोटा बदलाव भी 15 से 20 साल के लोन में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Pension Calculator: LIC की इस स्कीम में एक बार लगाएं पैसा, जिंदगीभर मिलेगी पेंशन; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Pension Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक तय रकम खाते में आती रहे, तो काफी सहूलियत रहती है। इसी जरूरत के लिए LIC की Jeevan Akshay-VII स्कीम है। इसमें एक बार पैसा लगाना होता है। इसके बाद चुने गए विकल्प के हिसाब से पेंशन मिलती रहती है।

यह LIC का Immediate Annuity Plan है। यानी पैसा लगाने के बाद एन्युटी का भुगतान शुरू हो जाता है। LIC के मुताबिक इसमें एन्युटी की दर शुरुआत में तय होती है और चुने गए विकल्प के मुताबिक जिंदगीभर भुगतान मिलता है।

₹10 लाख लगाने पर कितनी पेंशन?

मान लीजिए आपकी उम्र 60 साल है। आप इस स्कीम में ₹10 लाख लगाते हैं। LIC के मौजूदा V07 ब्रोशर में सालाना पेमेंट के उदाहरण दिए गए हैं।

Option A में ₹10 लाख लगाने पर सालाना ₹86,100 की एन्युटी मिलती है। यानी करीब ₹7,175 महीने के हिसाब से। वहीं, Option F में सालाना एन्युटी ₹64,000 है। यानी करीब ₹5,333 महीने।

विकल्प₹10 लाख पर सालाना एन्युटी
करीब मासिक रकम

Option A₹86,100₹7,175
Option B₹85,500₹7,125
Option C₹84,000₹7,000
Option D₹81,800₹6,817
Option E₹79,200₹6,600
Option F₹64,000₹5,333
Option G₹68,700₹5,725

ये आंकड़े 60 साल की उम्र में ₹10 लाख के खरीद मूल्य और सालाना पेमेंट के LIC के उदाहरण पर आधारित हैं। इनमें पेंशन उम्रभर मिलती है। हालांकि, LIC से मिलने वाली एन्युटी/पेंशन पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लग सकता है।

पेंशन के कई विकल्प मिलते हैं

इस स्कीम में सिर्फ एक तरह की पेंशन नहीं है। LIC ने कुल 10 एन्युटी विकल्प दिए हैं। Option A में जिंदगीभर एक तय रकम मिलती है। Option B, C, D और E में 5, 10, 15 या 20 साल की गारंटी अवधि है। इसके बाद भी पॉलिसीधारक के जिंदा रहने तक पेंशन जारी रहती है।

Option F थोड़ा अलग है। इसमें जिंदगीभर पेंशन मिलती है। पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद खरीद मूल्य वापस करने का प्रावधान है। इसी वजह से इस विकल्प में पेंशन बाकी कुछ विकल्पों से कम रहती है।

पैसा एक बार लगाना होगा

Jeevan Akshay-VII में नियमित प्रीमियम नहीं भरना होता। इसमें एकमुश्त रकम लगानी होती है। इसके बाद आप पेंशन लेने का तरीका चुन सकते हैं।

पेंशन मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना ली जा सकती है। LIC के मुताबिक इस प्लान में 10 अलग-अलग एन्युटी विकल्प हैं।

पति-पत्नी के लिए भी विकल्प

अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद पति या पत्नी को भी पेंशन मिलती रहे, तो जॉइंट लाइफ के विकल्प हैं। इनमें दोनों लोगों की उम्र और चुने गए विकल्प के आधार पर एन्युटी तय होती है।

LIC के विकल्प H और I में दूसरे व्यक्ति को पेंशन जारी रखने का प्रावधान है। Option J में आखिरी व्यक्ति की मृत्यु के बाद खरीद मूल्य वापस करने का भी प्रावधान है।

पेंशन हर साल 3% बढ़ाने का विकल्प भी

Option G में पेंशन हर साल साधारण आधार पर 3% बढ़ती है। शुरुआत में मिलने वाली रकम बाकी कुछ विकल्पों से कम होती है। लेकिन समय के साथ पेंशन बढ़ती रहती है।

इसका फायदा लंबे समय तक पेंशन लेने वाले व्यक्ति को मिल सकता है। हालांकि, इसमें भी शुरुआत में मिलने वाली रकम और दूसरे विकल्पों की तुलना देखना जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत तय एन्युटी है। बाजार ऊपर जाए या नीचे, चुने गए विकल्प के मुताबिक एन्युटी भुगतान जारी रहता है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद तय आय चाहने वाले लोगों के लिए यह एक विकल्प है।

लेकिन एकमुश्त रकम लगाने के बाद उसे आसानी से वापस निकालने की सुविधा नहीं होती। इसलिए पूरी रिटायरमेंट बचत एक ही जगह लगाने के बजाय अपनी जरूरत और बाकी आय को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

iPhone 18 Pro पर ₹57,000 की बचत! जानें कैसे मिलेगा डिस्काउटं, देखें Exchange, Bonus और Cashback का पूरा हिसाब

अगर आप नया iPhone 18 Pro खरीदने का प्लान बना रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत देखकर बजट को लेकर सोच में पड़ गए हैं, तो पुराने iPhone को एक्सचेंज करना आपके काम आ सकता है। जी हां, दरअसल India iStore एक जबरदस्त ऑफर दे रहा है, जिसके जरिए iPhone 18 Pro की असल कीमत काफी कम हो सकती है। फिलहाल, भारत में iPhone 18 Pro के 256GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत 1,64,900 रुपये है। वहीं, एक्सचेंज और पेमेंट से जुड़े खास फायदों को मिलाकर इस फोन की असल कीमत ₹1,07,900 तक कम की जा सकती है। इस हिसाब-किताब में एलिजिबल डिवाइस की एक्सचेंज वैल्यू, एक्सचेंज बोनस और बैंक कैशबैक शामिल हैं।

भारत में iPhone 18 Pro की कीमत

भारत में iPhone 18 Pro के 256GB मॉडल की कीमत ₹1,64,900 है। 512GB वाले मॉडल की कीमत ₹1,89,900 है, जबकि 1TB और 2TB मॉडल की कीमत क्रमशः ₹2,39,900 और ₹3,14,900 है।

iPhone 18 Pro को ₹1,07,900 में कैसे खरीदें

₹1,07,900 की प्रभावी कीमत iPhone 15 Pro 128GB को ₹40,000 में एक्सचेंज करने पर आधारित है। इसके बाद खरीदार ₹10,000 का अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस और ₹7,000 तक का बैंक कैशबैक पा सकते हैं।

iPhone 18 Pro को 1,07,900 रुपये की प्रभावी कीमत पर खरीदने के लिए iPhone 15 Pro के 128GB मॉडल को एक्सचेंज करना होगा। इस फोन की एक्सचेंज वैल्यू 40,000 रुपये तक मिल सकती है।

इसके अलावा 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 7,000 रुपये तक का बैंक कैशबैक भी मिल सकता है। इन सभी ऑफर्स को मिलाने पर iPhone 18 Pro की प्रभावी कीमत 1,07,900 रुपये रह जाती है।

इससे लिस्टेड कीमत में कुल ₹57,000 की कमी आती है:

फायदा / कीमतराशि
iPhone 18 Pro की कीमत₹1,64,900
iPhone 15 Pro की एक्सचेंज वैल्यू₹40,000
एक्सचेंज बोनस₹10,000
बैंक कैशबैक₹7,000
प्रभावी कीमत₹1,07,900

बैंक कैशबैक और एक्सचेंज बोनस

India iStore, Axis Bank, ICICI Bank या SBI के क्रेडिट कार्ड से किए गए एलिजिबल EMI ट्रांजैक्शन पर ₹7,000 तक का इंस्टेंट कैशबैक देता है। एलिजिबल नॉन-EMI ट्रांजैक्शन के लिए कैशबैक ₹6,000 है।

इसके अलावा, एक्सचेंज बोनस 10,000 रुपये तक मिल सकता है। यह ऑफर चुनिंदा स्टोर्स पर Cashify और Servify के जरिए उपलब्ध है। हालांकि, बोनस की राशि पुराने फोन की जांच के बाद तय की जाती है।

खास बात यह है कि हर iPhone 15 Pro के लिए ₹40,000 की एक्सचेंज वैल्यू की गारंटी नहीं है। अंतिम कीमत डिवाइस की हालत और उसके मूल्यांकन पर निर्भर करती है। इसलिए, खरीदारों को अंतिम कीमत का हिसाब लगाने से पहले अपनी एक्सचेंज वैल्यू और पेमेंट के लिए अपनी पात्रता (eligibility) की जांच कर लेनी चाहिए। साथ ही, फोन के आधार पर डिवाइस की एक्सचेंज वैल्यू अलग-अलग होगी, और उसी हिसाब से अंतिम कीमत भी अलग होगी।

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Flipkart दे रहा iPhone 17 पर ₹44,000 से ज्यादा का फायदा! जानें ऑफर और कीमत

अगर आप iPhone 17 खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो Flipkart पर आप जा कर कई बेहतरीन ऑफर्स के साथ इस हैंडसेट को खरीद सकते हैं। बता दें कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर iPhone 17 का 256GB वाला White कलर मॉडल ₹99,900 में लिस्टेड है। हालांकि, एक्सचेंज ऑफर, SuperCoin बेनिफिट और Flipkart Axis Bank कार्ड ऑफर का फायदा लेने के बाद इसकी प्रभावी कीमत ₹55,283 रह जाती है।

फिलहाल, यह डील 256GB स्टोरेज वाले मॉडल के लिए है, जबकि 512GB वाला मॉडल अभी प्रोडक्ट पेज पर ‘आउट ऑफ स्टॉक’ (स्टॉक में नहीं) दिखा रहा है।

iPhone 17 Flipkart डील: कीमत और ऑफर

Flipkart पर iPhone 17 के 256GB वेरिएंट की कीमत Rs 99,900 लिस्टेड है। खरीदार प्रोडक्ट पेज पर दिखाए गए ऑफर का इस्तेमाल करके इसकी असल कीमत कम कर सकते हैं।

ऑफरडिस्काउंट/बेनिफिट
लिस्टेड कीमत₹99,900
iPhone 15 पर एक्सचेंज ऑफर₹41,700 तक की छूट
SuperCoin बेनिफिट₹7 की छूट
Flipkart Axis Bank ऑफर₹2,910 की छूट
दिखाई गई प्रभावी कीमत₹55,283

बता दें कि इस डील में सबसे बड़ा डिस्काउंट एक्सचेंज ऑफर के जरिए मिल रहा है। Flipkart पर Apple iPhone 15 को एक्सचेंज करने पर ₹41,700 तक का बेनिफिट दिखाया जा रहा है। हालांकि, एक्सचेंज में मिलने वाली असली कीमत आपके पुराने फोन के मॉडल और उसकी कंडीशन पर निर्भर करेगी।

इसके अलावा, Flipkart पर ₹7 का SuperCoin बेनिफिट और Flipkart Axis Bank कार्ड से ₹2,910 का डिस्काउंट भी मिल रहा है। इन सभी ऑफर्स को मिलाने पर Flipkart के प्रोडक्ट पेज पर iPhone 17 की प्रभावी कीमत ₹55,283 दिखाई जा रही है।

iPhone 17 256GB: अन्य जानकारी

Flipkart के प्रोडक्ट पेज पर फिलहाल White कलर सेलेक्ट किया गया है। हालांकि, फोन के दूसरे कलर ऑप्शन भी लिस्टेड हैं। Flipkart पर iPhone 17 को 4.6 स्टार की रेटिंग मिली है, जो 27,187 रेटिंग के आधार पर है।

खरीदार इस फोन को EMI पर भी खरीद सकते हैं। प्रोडक्ट पेज के मुताबिक, 3 महीने के लिए EMI ₹19,917 प्रति महीने से शुरू होती है। इसके अलावा, पेज पर ₹299 की Protect Promise फीस भी दिखाई गई है।

हालांकि, ₹55,283 की प्रभावी कीमत कुछ शर्तों पर निर्भर करती है। खास तौर पर अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू और लागू होने वाले पेमेंट फायदों पर। इसलिए फोन खरीदने से पहले चेकआउट पर फाइनल कीमत जरूर चेक कर लें।

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EPF Pension: ₹12500 महीना तक हो सकती है पेंशन, समझिए सरकार के नए फैसले का पूरा असर

EPF Pension: केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।

अभी तक ₹15,000 तक के वेतन पर EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज लागू होती थी। यह सीमा 1 सितंबर 2014 से नहीं बदली थी। नई सीमा लागू होने पर ज्यादा कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।

पेंशन में 66.7% तक बढ़ोतरी

इस फैसले का सीधा असर EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना पर भी पड़ने की उम्मीद है। वजह है कि पेंशन की कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली वेतन सीमा भी ₹25,000 हो सकती है।

EPS में पेंशन का फॉर्मूला इस तरह है:

पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70

अभी अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 माना जाता है। ऐसे में 35 साल की पेंशन योग्य सेवा वाले कर्मचारी की फॉर्मूला आधारित पेंशन करीब ₹7,500 बनती है।

अगर यही सीमा ₹25,000 हो जाती है, तो 35 साल की सेवा पर पेंशन ₹12,500 हो सकती है। यानी फॉर्मूला के हिसाब से पेंशन में 66.7% की बढ़ोतरी हो सकती है।

पेंशन योग्य सेवा₹15,000 वेतन सीमा पर पेंशन₹25,000 वेतन सीमा पर पेंशनसंभावित बढ़ोतरी
10 साल₹2,143₹3,57166.70%
20 साल₹4,286₹7,14366.70%
25 साल₹5,357₹8,92966.70%
30 साल₹6,429₹10,71466.70%
35 साल₹7,500₹12,50066.70%

Zaggle की CHRO लता अय्यर ने कहा, ‘अगर बढ़ी लिमिट को EPS की कैलकुलेशन में लागू किया जाता है, तो पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी पेंशन योग्य सेवा और सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों पर निर्भर करेगी।’

EPF में ज्यादा पैसा कट सकता है

अब बात EPF की। यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। वेतन सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की सैलरी से EPF की कटौती तुरंत बढ़ जाएगी। फिलहाल कुछ कंपनियां ₹15,000 की सीमा पर EPF योगदान तय करती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कर्मचारी के वास्तविक बेसिक पे पर योगदान करती हैं। इसलिए नई व्यवस्था का असर कर्मचारी की मौजूदा पॉलिसी पर भी निर्भर करेगा।

मान लीजिए अभी किसी कर्मचारी का EPF योगदान ₹15,000 की सीमा पर हो रहा है। 12% के हिसाब से हर महीने कर्मचारी के हिस्से से ₹1,800 कटते हैं। अगर नई ₹25,000 की सीमा पर 12% योगदान लागू होता है, तो यह रकम बढ़कर ₹3,000 हो जाएगी। यानी हर महीने ₹1,200 ज्यादा EPF में जाएगा।

इसका सीधा असर टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा। हाथ में आने वाली सैलरी ₹1,200 तक कम हो सकती है। हालांकि, यह पैसा कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में ही जाएगा।

हर कर्मचारी की सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा

जिन कर्मचारियों का EPF योगदान पहले से ही उनके वास्तविक बेसिक पे पर होता है, उन पर नई सीमा का तुरंत कोई खास असर नहीं पड़ सकता।

मसलन, अगर किसी कर्मचारी की कंपनी पहले से ही ₹25,000 या उससे ज्यादा के बेसिक पे पर 12% EPF काट रही है, तो केवल वेतन सीमा बढ़ने से उसकी कटौती में जरूरी नहीं कि कोई बदलाव हो।

Choice International की CHRO नेहा जैन ने कहा, ‘अगर बढ़ी हुई सीमा पर EPF योगदान अनिवार्य होता है, तो फिलहाल ₹15,000 की सीमा पर 12% योगदान करने वाला कर्मचारी हर महीने ₹1,800 की जगह ₹3,000 योगदान करेगा। इससे टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹1,200 तक की कमी हो सकती है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर योगदान अभी की तरह मौजूदा सीमा पर ही कैप रहता है, तो टेक-होम सैलरी पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए अंतिम नोटिफिकेशन और योगदान का नया ढांचा काफी अहम होगा।’

EPF Wage Ceiling Hike: केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला! ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई सैलरी लिमिट, 51 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का पर्सनल लोन लेने पर कितना ब्याज देना होगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन आसान विकल्प लगता है। फिर चाहे शादी का खर्च हो, मेडिकल इमरजेंसी हो या घर से जुड़ा कोई जरूरी काम। पर्सनल लोन काफी कम जल्दी और काफी आसानी से मिल भी जाता है। और इसके लिए कुछ गिरवी रखने की भी जरूरत नहीं होती। इसलिए ज्यादातर लोग इसे लेना पसंद करते हैं।

लेकिन असली सवाल है कि ₹5 लाख का लोन लेने के बाद कुल कितना पैसा वापस करना पड़ेगा? इसका जवाब ब्याज दर और लोन की अवधि पर निर्भर करता है। ब्याज दर बढ़ने के साथ EMI भी बढ़ती है। साथ ही बैंक को लौटाई जाने वाली कुल रकम भी काफी बढ़ जाती है।

₹5 लाख के लोन पर ब्याज-EMI का हिसाब

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 5 साल यानी 60 महीने के लिए लिया है। इसकी ब्याज दर अमूमन 10% से शुरू होकर 25% तक भी जा सकती हैं। ये आपके क्रेडिट स्कोर और कमाई जैसी बातों पर निर्भर करता है। अलग-अलग ब्याज दर पर आपकी EMI और कुल ब्याज कुछ इस तरह होगा।

ब्याज दरमासिक EMI5 साल में कुल भुगतानकुल ब्याज
10%₹10,624₹6.37 लाख₹1.37 लाख
12%₹11,122₹6.67 लाख₹1.67 लाख
15%₹11,895₹7.14 लाख₹2.14 लाख
20%₹13,247₹7.95 लाख₹2.95 लाख

10% ब्याज पर ₹5 लाख का लोन

अगर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 10% है, तो ₹5 लाख के लोन की मासिक EMI करीब ₹10,624 होगी। 60 महीने तक EMI चुकाने पर बैंक को कुल करीब ₹6.37 लाख देने होंगे। यानी ₹5 लाख के लोन पर करीब ₹1.37 लाख ब्याज जाएगा।

12% ब्याज पर कितना भुगतान होगा?

ब्याज दर 12% होने पर EMI बढ़कर करीब ₹11,122 हो जाएगी। पांच साल में कुल भुगतान करीब ₹6.67 लाख रहेगा। इसमें करीब ₹1.67 लाख ब्याज होगा। यानी सिर्फ ब्याज दर में 2 प्रतिशत का अंतर होने से कुल ब्याज में भी फर्क आ जाता है। इसलिए लोन लेते समय मिलने वाली ब्याज दर को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

15% ब्याज पर EMI कितनी होगी?

अगर ब्याज दर 15% है, तो ₹5 लाख के लोन पर हर महीने करीब ₹11,895 की EMI बनेगी। पांच साल में कुल भुगतान करीब ₹7.14 लाख होगा। इसमें लगभग ₹2.14 लाख ब्याज शामिल होगा। यहां गौर करने वाली बात है कि लोन की रकम वही ₹5 लाख है। लेकिन ब्याज दर बढ़ने से बैंक को लौटाई जाने वाली रकम काफी बढ़ गई।

20% ब्याज पर लोन सबसे महंगा

अब अगर पर्सनल लोन पर ब्याज दर 20% है, तो EMI करीब ₹13,247 होगी। पांच साल में कुल भुगतान करीब ₹7.95 लाख पहुंच जाएगा। यानी ₹5 लाख उधार लेने के लिए करीब ₹2.95 लाख ब्याज देना पड़ेगा।

10% और 20% की ब्याज दर के बीच अंतर सिर्फ 10 प्रतिशत अंक का है। लेकिन पांच साल में कुल ब्याज में करीब ₹1.58 लाख का फर्क आ जाता है। इसलिए पर्सनल लोन लेते समय ब्याज दर पर अच्छी तरह बातचीत करना फायदेमंद हो सकता है।

सिर्फ EMI देखकर फैसला न करें

पर्सनल लोन लेते समय लोग अक्सर सिर्फ EMI देखते हैं। यह तरीका सही नहीं है। कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता। अगर लोन की अवधि ज्यादा है, तो हर महीने कम रकम जाने के बावजूद कुल ब्याज ज्यादा हो सकता है।

इसलिए लोन लेने से पहले इंटरेस्ट रेट, लोन टेन्योर और टोटल रीपेमेंट तीनों को देखना चाहिए। बैंक कितना लोन देने को तैयार है, यह भी अंतिम फैसला नहीं होना चाहिए। आपकी आय के हिसाब से कितनी EMI आराम से चुकाई जा सकती है, यह ज्यादा जरूरी है।

दूसरे चार्ज भी बढ़ा सकते हैं लागत

ऊपर के कैलकुलेशन सिर्फ लोन की रकम और ब्याज पर हैं। इसमें प्रोसेसिंग फी, GST, इंश्योरेंस और दूसरे संभावित चार्ज शामिल नहीं हैं। अलग-अलग बैंक और लोन के हिसाब से ये शुल्क अलग हो सकते हैं।

इसलिए पर्सनल लोन लेते समय बैंक से सिर्फ ब्याज दर और EMI न पूछें। यह भी पता करें कि लोन पूरा होने तक आपकी जेब से कुल कितनी रकम जाएगी। यही लोन की असली लागत बताएगी।

SIP vs SSY: हर महीने 3000 के निवेश से कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Maruti Suzuki Baleno Facelift की पूरी कीमत लिस्ट जारी, जानें सभी वेरिएंट्स के दाम

Maruti Suzuki ने 2026 Baleno facelift के सभी वेरिएंट्स की कीमतों की पूरी लिस्ट जारी कर दी है। इसकी शुरुआती कीमत 5.99 लाख रुपये है और टॉप मॉडल की कीमत 9.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जो पांच ट्रिम्स में उपलब्ध है। यह इसलिए अहम है क्योंकि Maruti Suzuki ने शुरू में इस कार को 5 सितंबर को लगभग 6.10 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया था, लेकिन अब Sigma बेस मॉडल की कीमत 5.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तय हो गई है। यह कीमत पुराने मॉडल के बराबर ही है, जबकि नई कार में नया इंजन, बेहतर सेफ्टी किट और अतिरिक्त फीचर्स दिए गए हैं। प्रीमियम हैचबैक सेगमेंट में गाड़ी खरीदने की सोच रहे ग्राहक अब Hyundai i20 और Tata Altroz जैसी प्रतिद्वंद्वी कारों से इसकी कीमतों की सही-सही तुलना कर सकते हैं।

Maruti Suzuki Baleno facelift: वेरिएंट्स और कीमत

आपकी जानकारी के लिए यहां सभी वेरिएंट्स की एक्स-शोरूम कीमतें दी गई हैं।

Baleno Facelift वेरिएंटपेट्रोल MTपेट्रोल AMTCNG MT
Sigma₹5.99 लाख——
Delta₹7.00 लाख₹7.50 लाख₹7.92 लाख
Zeta₹8.00 लाख₹8.50 लाख₹8.92 लाख
Alpha₹9.10 लाख₹9.60 लाख—
Alpha(O)₹9.50 लाख₹9.99 लाख—

Sigma बेस ट्रिम सिर्फ पेट्रोल-मैनुअल में आता है और इसकी कीमत ₹5.99 लाख है। इसमें AMT या CNG का ऑप्शन नहीं है। Delta ट्रिम मैनुअल में ₹7 लाख से शुरू होता है, AMT के लिए इसकी कीमत ₹7.50 लाख और CNG वेरिएंट के लिए ₹7.92 लाख तक जाती है। Zeta ट्रिम भी इसी पैटर्न को फॉलो करता है, जिसकी कीमतें क्रमशः ₹8 लाख, ₹8.50 लाख और ₹8.92 लाख हैं।

टॉप दो ट्रिम्स, Alpha और Alpha(O), में CNG का ऑप्शन बिल्कुल नहीं है: Alpha की कीमत ₹9.10 लाख (MT) और ₹9.60 लाख (AMT) है, जबकि Alpha(O) सबसे महंगा वेरिएंट है, जिसकी कीमत ₹9.50 लाख (MT) और ₹9.99 लाख (AMT) है। ध्यान दें कि ये सभी कीमतें एक्स-शोरूम हैं। सभी वेरिएंट्स में, AMT के लिए पेट्रोल-मैनुअल के मुकाबले ₹50,000 ज्यादा देने होंगे, जबकि CNG के लिए ₹92,000 ज्यादा देने होंगे।

Maruti Suzuki Baleno facelift: क्या बदला है?

Maruti Suzuki Baleno facelift में सबसे बड़ा बदलाव इसके इंजन में हुआ है। पुराना K12N 1.2-लीटर फोर-सिलेंडर इंजन हटाकर उसकी जगह Z12E 1.2-लीटर थ्री-सिलेंडर इंजन लगाया गया है, जो पहले से ही Swift और Dzire में इस्तेमाल हो रहा है। इसकी पावर और टॉर्क थोड़ी कम होकर 83hp और 112Nm हो गई है (7hp और 1Nm की कमी), लेकिन मैनुअल मॉडल में माइलेज बढ़कर 23.80kmpl और AMT मॉडल में 24.77kmpl हो गया है।

CNG वर्जन 70hp की पावर और 102Nm का टॉर्क देता है और इसका माइलेज 33.61km/kg बताया गया है। सेफ्टी के मामले में, Baleno में अब लेवल 2 ADAS सुइट और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे नए फीचर्स मिलते हैं, जो पहले नहीं थे। इसके अलावा, इसमें 6 एयरबैग, 360-डिग्री कैमरा और हिल होल्ड असिस्ट जैसे पुराने फीचर्स भी मौजूद हैं। कार के बाहरी डायमेंशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है – लंबाई 3,990mm, चौड़ाई 1,745mm और व्हीलबेस 2,520mm ही है।

खरीदारों के लिए इसका क्या मतलब है?

अगर आप Maruti Suzuki Baleno खरीदने की सोच रहे हैं, तो ध्यान रखें कि CNG का ऑप्शन सिर्फ Delta और Zeta वेरिएंट में मिलता है। टॉप-एंड Alpha और Alpha(O) वेरिएंट में CNG का विकल्प नहीं दिया गया है। इसलिए कम रनिंग कॉस्ट के लिए CNG कार खरीदने वाले ग्राहकों के पास सीमित विकल्प हैं।

नई Baleno में पुराने 4-सिलेंडर इंजन के मुकाबले पावर थोड़ी कम हुई है, लेकिन माइलेज बेहतर हुई है। ऐसे में अगर आपकी प्राथमिकता ज्यादा पावर और बेहतर परफॉर्मेंस है, तो बुकिंग से पहले इस बदलाव को ध्यान में रखना जरूरी है। वहीं, अगर आप बेहतर माइलेज और कम ईंधन खर्च चाहते हैं, तो नया इंजन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। साथ ही, ये शुरुआती कीमतें हैं और Maruti Suzuki आगे चलकर इनमें बदलाव कर सकती है।

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SIP Calculator: ₹3000 की मंथली SIP से कितना पैसा बनेगा? समझिए 10, 15 और 20 साल का पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: हर महीने ₹3,000 निवेश करना बहुत बड़ी रकम नहीं है। लेकिन लंबी अवधि में यही छोटी रकम बड़ा फंड बना सकती है। इसकी वजह कंपाउंडिंग है। समय जितना ज्यादा होगा, रिटर्न पर मिलने वाला रिटर्न भी उतना ही बढ़ता जाएगा।

मान लीजिए आप हर महीने ₹3,000 की SIP शुरू करते हैं। हम यहां दो अलग-अलग रिटर्न मानकर हिसाब समझ रहे हैं। पहला 12% सालाना। यह लंबी अवधि में बेंचमार्क माना जाता है। और दूसरा 15% सालाना, जो अगर फंड ने ज्यादा अच्छा प्रदर्शन किया, तो मिल सकता है। हालांकि, SIP का पैसा बाजार में लगता है, तो असल रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है।

एक नजर में SIP का पूरा हिसाब

अवधिकुल निवेश12% पर फंड15% पर फंड
10 साल₹3.60 लाख₹6.97 लाख₹8.36 लाख
15 साल₹5.40 लाख₹15.14 लाख₹20.31 लाख
20 साल₹7.20 लाख₹29.97 लाख₹45.48 लाख

10 साल में ₹8 लाख तक का फंड

अगर आप 10 साल तक हर महीने ₹3,000 निवेश करते हैं, तो आपकी कुल जेब से ₹3.60 लाख जाएंगे। 10 साल में कुल 120 किस्तें होंगी।

अगर औसत सालाना रिटर्न 12% रहा, तो आपका फंड करीब ₹6.97 लाख हो सकता है। यानी ₹3.60 लाख के निवेश पर करीब ₹3.37 लाख का रिटर्न मिलेगा।

वहीं, 15% सालाना रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹8.36 लाख तक पहुंच सकता है। इस स्थिति में करीब ₹4.76 लाख रिटर्न से आएंगे।

15 साल में ₹20 लाख के करीब

अब यही SIP 15 साल तक जारी रखें। इस दौरान आप कुल ₹5.40 लाख निवेश करेंगे। यानी 180 महीनों तक ₹3,000 की किस्त जाएगी।

12% सालाना रिटर्न के हिसाब से आपका फंड करीब ₹15.14 लाख हो सकता है। इसमें आपका निवेश ₹5.40 लाख होगा। बाकी करीब ₹9.74 लाख कंपाउंडिंग से मिलने वाला रिटर्न होगा।

अगर रिटर्न 15% सालाना रहा, तो फंड करीब ₹20.31 लाख हो सकता है। यानी ₹5.40 लाख के निवेश पर करीब ₹14.91 लाख का रिटर्न बन सकता है।

20 साल में ₹45 लाख से ज्यादा

सबसे बड़ा फर्क 20 साल की अवधि में दिखाई देता है। 20 साल तक हर महीने ₹3,000 लगाने पर आपका कुल निवेश ₹7.20 लाख होगा। इस दौरान आप 240 SIP किस्तें जमा करेंगे।

12% सालाना रिटर्न के हिसाब से यह रकम बढ़कर करीब ₹29.97 लाख हो सकती है। यानी आपके ₹7.20 लाख के निवेश पर करीब ₹22.77 लाख का रिटर्न मिल सकता है।

वहीं, 15% सालाना रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.48 लाख तक पहुंच सकता है। इसमें करीब ₹38.28 लाख रिटर्न होगा।

FD vs SCSS: सीनियर सिटिजंस के लिए FD बेहतर या SCSS? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।