RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कहा-जरूरत पड़ी तो रुपये में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग रोकने के लिए और कदम उठाएंगे

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रुपये के बारे में बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय बैंक कुछ और उपायों पर विचार करेगा। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) और इंटरेस्ट रेट सहित कई मसलों पर अपनी राय बताई। गौरतबल है कि पिछले हफ्ते रुपये पर दबाव घटाने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई बड़े कदम उठाए थे।

मल्होत्रा ने एक्सटर्नल सेक्टर यानी वैश्विक स्थितियों को भारत के लिए मुख्य चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था की ग्रोथ अच्छी है। बैंकों की बैलेंसशीट मजबूत है। कंपनियों की अर्निंग्स बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार और आरबीआई बैलेंस ऑफ पेमेंट्स की मजबूती के लिए और कदम उठाएंगे।

स्पेकुलेटिव फॉरेक्स ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लागने के लिए हाल में उठाए गए कदमों के बारे में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इसका मकसद विदेशी मुद्रा बाजार में जरूरत से ज्यादा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है। उदाहरण के लिए कैंसिल किए गए फॉरेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की रीबुकिंग पर रोक लगा दी गई है। इससे गैरजरूरी स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने कहा कि हमारे फॉरेक्स मार्केट का मुख्य मकसद अंडरलाइंग फॉरेन एक्सचेंज की जरूरत को पूरा करना या हेज करना है। यह शेयर बाजार जैसा नहीं है, जहां पार्टिसिपेंट्स शेयरों की कीमतों की दिशा पर दांव लगा सकते हैं। फॉरेक्स मार्केट मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्हें वास्तविक हेजिंग की जरूरत पड़ती है।

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हमने देखा है कि एक ही दिन में बड़ी संख्या में ट्रेड्स कैंसिल किए जा रहे हैं और रीबुक किए जा रहे हैं। कुछ मामलों में तो करीब एक-तिहाई ट्रेड्स जिस दिन किए गए उसी दिन क्लोज्ड या कैंसिल कर दिए गए। अगर किसी पार्टिसिपेंट को सच में हेजिंग की जरूरत है तो वह उस ट्रेड को तब तक बनाए रखेगा, जब तक उसकी जरूरत पूरी नहीं हो जाती है। एक दिन कैंसिलेशंस और रीबुकिंग से पता चलता है कि फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में काफी स्पेकुलेटिव ट्रेड्स हो रहे हैं।

क्या आरबीआई रुपये के सहारा देने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा? इस सवाल के जवाब में मल्होत्रा ने कहा कि मैं फिर से उस सिद्धांत को दोहराउंगा जिसके बारे में मैंने कुछ दिन पहले कौटिल्य इकोनॉमिक कॉनक्लेव में बताया था। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के बगैर कीमतों में स्थिरता नहीं आ सकती। मॉनेटरी पॉलिसी में उठाए गए कदमों का सही असर तभी दिखता है जब फाइनेंशियल सिस्टम में स्टैबिलिटी होती है।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर हम फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के रिस्क को कम करने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल नहीं करते हैं। मॉनेटरी पॉलिसी का इस्तेमाल प्राइस स्टैबिलिटी के लिए होता है। फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के लिए रेगुलेटरी, सुपरवायजरी और मैक्रोप्रूडेंशियल टूल्स का इस्तेमाल होता है। हालांकि, दोनों को पूरी तरह से अलग नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर फाइनेंशियल स्टैबिलिटी पर पड़ सकता है।

Barapullah flyover jam: बारापुला फेज-III फ्लाईओवर पर क्यों लग रहा है भारी जाम? अब नए सिरे से डिजाइन पर होगा काम

Barapullah Phase-III flyover traffic jam: राजधानी दिल्ली में गाड़ी चलाने वाले हाल ही में खुले बारापुल्ला फ़ेज़-III एलिवेटेड कॉरिडोर की तरफ न जाएं, क्योंकि सनडायल पार्क मर्जर पॉइंट और सराय काले खां के पास भारी जाम की सूचना है। फ्लाईओवर के तीन लेन वाले हिस्से को दो लेन वाले मौजूदा कॉरिडोर से जोड़ने वाले मर्जर पॉइंट पर कई दिनों से बहुत ज्यादा जाम की समस्या हो रही है। ट्रैफिक पुलिस ने इस डिजाइन को लेकर PWD विभाग से तुरंत बदलाव करने की मांग की है। तीन लेन वाला बारापुला फेज-III फ्लाईओवर सुंदरियाल पार्क के पास दो लेन वाले रूट में मिल रहा है। जबकि दो अन्य तीन लेन वाले रास्तों का ट्रैफिक भी इसी जगह आकर मिल रहा है, जिससे जाम की समस्या बढ़ रही है।

जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव

अधिकारियों ने बताया कि जाम की समस्या को कम करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव दिया है। ट्रैफिक पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) से फेज-तीन फ्लाईओवर के मौजूदा बारापुला मार्ग से जुड़ने वाले स्थान में तत्काल बदलाव करने को कहा है। पुलिस का कहना है कि जंक्शन का तीखा और अचानक बना डिजाइन व्यस्त मार्ग पर जाम की समस्या को और बढ़ा रहा है।

बारापुला फेज-तीन फ्लाईओवर को पिछले सप्ताह लोगों के लिए खोला गया था। लेकिन इसके खुलने के तुरंत बाद जुड़ने वाले नए मार्ग पर ट्रैफिक की स्थिति खराब हो गई। अधिकारियों ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल और सराय काले खां के बीच करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय करने में वाहन चालकों को एक घंटे से अधिक समय लग रहा था।

ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी को भेजे पत्र में कहा कि इस व्यवस्था के कारण भारी जाम लग रहा है। पुलिस द्वारा कराए गए ड्रोन सर्वेक्षण में जंक्शन पर समस्या की स्थिति सामने आई, जहां सीमित सड़क चौड़ाई में कई दिशाओं से आ रहा ट्रैफिक एक ही स्थान पर मिल रहा है।

फ्लाईओवर पर हैं तीन लेन

फेज-तीन फ्लाईओवर पर तीन लेन हैं। इसी स्थान पर सुंदरियाल की ओर से सराय काले खां और रिंग रोड की तरफ आने वाला ट्रैफिक कॉरिडोर में मिलता हैं। इसके अलावा आश्रम और डीएनडी की ओर से आने वाला ट्रैफिक भी मौजूदा बारापुला गलियारे से मिलता है। पत्र में कहा गया है कि इससे ट्रैफिक अचानक एक-दूसरे में मिल जाता है और जंक्शन पर ट्रैफिक का मर्जर पॉइंट बन जाता है।

ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि नया फ्लाईओवर सुंदरियाल के पास मौजूदा फ्लाईओवर से सीधे और तीखे मोड़ के साथ जुड़ रहा है। जबकि यहां सहज घुमाव होना चाहिए था। ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी से फ्लाईओवर के जुड़ने वाले स्थान को फिर से डिजाइन करने को कहा है।

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RBI Repo Rate Hike : आरबीआई गवर्नर ने कहा, ब्याज दरों में आगे भी कटौती की संभावना नहीं, इसमें अभी और बढ़ोतरी की संभावना

RBI Repo Rate Hike : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का अगला नीतिगत कदम या तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकता है या फिर दरों को बरकरार रखा जा सकता है। यह बदलाव महंगाई तथा अन्य आर्थिक स्थितियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

यह गाइडेंस तब आया है जब मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 5.25% से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि निकट भविष्य में “रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है” और आगे की पॉलिसी में हालात के हिसाब से या तो रेट बढ़ाए जाएंगे या फिर उन्हें जस का तस रखा जाएगा।

अक्टूबर में रेपो रेट में की गई यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद RBI की ओर से रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। उस समय MPC ने पॉलिसी रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था।

रुख में इस बदलाव का समर्थन MPC के छह में से चार सदस्यों ने किया, जबकि दो सदस्यों ने ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'(सोच-समझकर सख्ती) की ओर बढ़ने के खिलाफ वोट दिया।

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद, स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी रेट को 5.25% पर एडजस्ट किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है।

महंगाई बढ़ने का डर रहा हावी

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक अब वैसा अनुकूल नहीं है जैसा पिछले साल था। कीमतों के दबाव को देखते हुए MPC मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत का आकलन कर रही है।

RBI ने FY27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि FY27 की अगली तीन तिमाहियों में CPI महंगाई (रिटेल महंगाई) औसतन 5.8% रहने की उम्मीद है।

RBI गवर्नर ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी को सप्लाई शॉक के ‘सेकंड-राउंड’ असर (यानी सप्लाई में अचानक बदलाव से होने वाले बाद के असर) पर नजर रखनी होगी, भले ही शुरुआती सप्लाई-साइड महंगाई के असर से इन्हें अलग करना मुश्किल हो।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी आंशिक रूप से ऐसे ‘सेकंड-राउंड’ असर को रोककर काम करती है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का असर इकॉनमी तक पहुंचने में समय लगता है।

दरें बढ़ाने का फैसला कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में फिर से आई अस्थिरता के माहौल में लिया गया है। बैठक से पहले, एनर्जी की बढ़ती लागत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो गई थीं। अगस्त में रिटेल महंगाई दर 4.82% रही, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से ज्यादा है।

संजय मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव ने ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट को कमजोर किया है और फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया और कहा कि ग्लोबल महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका है। उन्होंने कहा कि सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और जारी संघर्षों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

 

 

RBI Policy : RBI ने वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमान भी बढ़े

RBI Policy : RBI ने वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमान भी बढ़े

RBI Policy : RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने 7 अक्टूबर को घोषणा की कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, दूसरी और तीसरी तिमाही के ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाए गए हैं। सेंट्रल बैंक ने Q2FY27 के ग्रोथ का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत और Q3FY27 के ग्रोथ अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। उसने Q4FY27 के ग्रोथ अनुमान को 6.8 प्रतिशत पर ही बनाए रखा गया है। हालांकि, Q1FY28 के लिए RBI ने ग्रोथ का अनुमान 7.3 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।

मार्च 2027 में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए पूरे साल का नया अनुमान, पहले के अनुमान से 0.4 प्रतिशत ज़्यादा है। संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि घरेलू आर्थिक ग्रोथ मजबूत स्तर पर है और मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी रहेगी। गवर्नर ने कहा कि पहली तिमाही में ग्रोथ की वजह प्राइवेट खपत रही। लोगों की खर्च करने की इच्छा (डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग) से लगातार मिल रहे सपोर्ट के कारण खपत का स्तर काफी हद तक मजबूत बना रहा।

उन्होंने आगे कहा कि हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधि की रफ़्तार बनी रही, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में इसमें थोड़ी कमी आई। उन्होंने कहा कि लागत के दबाव के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां बनी रहीं।

भारत की विकास दर के अनुमान में ऐसे समय में बढ़ोतरी हुई है जब ग्लोबल इकोनॉमी कमजोर है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल वैश्विक विकास दर धीमी रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर से बढ़ने से ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट खराब हो गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है। ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल सेंटीमेंट में घबराहट बनी हुई है और युद्ध तथा सख्त नीतियों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

बता दें कि आज MPC ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया और अपने पॉलिसी रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। चार सदस्यों ने इस बदलाव का समर्थन किया, जबकि दो ने इसका विरोध किया।

इस पर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक पिछले साल के मुकाबले कम अनुकूल है। इसी लिए कमिटी ने पॉलिसी रेट में बदलाव करना ज़रूरी समझा। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई दर 4.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष की बाकी तीन तिमाहियों में कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (खुदरा महंगाई दर) औसतन 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

 

 

RBI MPC Meeting Live: RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट: महंगे होंगे लोन और बढ़ेगी EMI, लेकिन मजबूत FDI और FD ब्याज दरों से मिलेगी राहत

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI कितनी बढ़ जाएगी? समझिए होम और पर्सनल लोन का पूरा कैलकुलेशन

RBI Repo Rate Hike: RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 7 अक्टूबर को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी। इसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके होम लोन की EMI पर भी पड़ सकता है। खासकर तब, जब आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा हो।

मान लीजिए आपने 20 साल के लिए 8.5% ब्याज दर पर होम लोन लिया है। अब ब्याज दर 0.50% बढ़कर 9% हो जाती है। ऐसे में आपकी EMI कितनी बढ़ेगी? 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के लोन पर इसका सीधा हिसाब समझिए।

10 लाख रुपये के लोन पर असर

10 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि में EMI करीब ₹8,678 बैठती है। ब्याज दर 9% होने पर यही EMI करीब ₹8,997 हो जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹319 ज्यादा देने होंगे। रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन लंबे समय तक यही बढ़ी हुई EMI चलती है तो कुल भुगतान पर इसका असर बढ़ जाता है।

20 लाख रुपये का लोन

20 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹17,356 है। ब्याज दर 9% होने पर यह बढ़कर करीब ₹17,995 हो जाएगी। मतलब हर महीने करीब ₹638 का अतिरिक्त बोझ। अगर घर का बजट पहले से EMI के हिसाब से सेट है, तो इतनी बढ़ोतरी भी महीने के खर्च में महसूस होती है।

30 लाख रुपये का लोन

30 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹26,035 बनती है। ब्याज दर बढ़कर 9% होने पर EMI करीब ₹26,992 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹957 ज्यादा। बड़े लोन में ब्याज दर का छोटा बदलाव भी EMI में साफ दिखाई देने लगता है।

40 लाख रुपये के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

40 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹34,713 है। 9% ब्याज होने पर यह करीब ₹35,989 हो जाएगी। इसका मतलब है कि हर महीने करीब ₹1,276 अतिरिक्त देने होंगे। साल भर में देखें तो EMI का यह अंतर करीब ₹15,300 बैठता है।

50 लाख रुपये के लोन पर असर सबसे ज्यादा

50 लाख रुपये के लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹43,391 है। अगर ब्याज दर 9% हो जाती है तो EMI करीब ₹44,986 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹1,595 ज्यादा। साल भर में यह अतिरिक्त बोझ करीब ₹19,100 हो जाता है।

होम लोन: 8.5% से 9% होने पर EMI का असर

लोन की रकम8.5% पर EMI9% पर EMIहर महीने बढ़ोतरी
सालाना अतिरिक्त बोझ

₹10 लाख₹8,678₹8,997₹319₹3,828
₹20 लाख₹17,356₹17,995₹638₹7,656
₹30 लाख₹26,035₹26,992₹957₹11,484
₹40 लाख₹34,713₹35,989₹1,276₹15,312
₹50 लाख₹43,391₹44,986₹1,595₹19,140

यह कैलकुलेशन 20 साल की लोन अवधि में 8.5% से 9% ब्याज दर होने पर किया गया है। वास्तविक EMI आपके बैंक, लोन की बाकी अवधि और ब्याज रीसेट के नियमों के हिसाब से अलग हो सकती है।

5 लाख रुपये के पर्सनल लोन पर भी असर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर होम लोन से ज्यादा होती है। मान लीजिए 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 12% ब्याज पर लिया गया है। इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी।

लेकिन, अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद पर्सनल लोन महंगा होता और ब्याज दर बढ़कर 12.5% हो जाती है तो नए लोन की EMI करीब ₹11,249 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹127 ज्यादा देने होंगे।

रेपो रेट बढ़ने पर EMI ही बढ़ेगी?

होम लोन में यह जरूरी नहीं। ब्याज दर बढ़ने के बाद बैंक और ग्राहकों के पास EMI बढ़ाने या लोन की अवधि बढ़ाने जैसे विकल्प होते हैं। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव किया जा सकता है।

अगर बैंक EMI को ज्यादा नहीं बढ़ाता है, तो लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है। दूसरी तरफ EMI बढ़ाने पर हर महीने जेब से ज्यादा पैसा जाएगा, लेकिन लोन की अवधि को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है।

रेपो रेट का असर आपकी जेब पर कैसे ?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा देता है। जब इसमें बदलाव होता है तो बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है। इसके बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।

हालांकि, रेपो रेट में 25 या 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर बैंक आपकी ब्याज दर भी बिल्कुल उतनी ही बढ़ा देगा। आपके लोन का बेंचमार्क, बैंक का स्प्रेड और रीसेट नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए अगर आपका फ्लोटिंग रेट वाला बड़ा होम लोन चल रहा है, तो RBI की हर रेपो रेट बैठक आपके लिए मायने रखती है। ब्याज दर में छोटा बदलाव भी 15 से 20 साल के लोन में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

RBI MPC Meet October 2026: देश के करोड़ों आम नागरिकों, होम लोन ग्राहकों और शेयर बाजार की नजरें कल यानी 7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के फैसले पर टिकी होंगी। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) कल सुबह 10 बजे अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी, जिसके बाद दोपहर में गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।

पिछले 4 लगातार बैठकों से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल व कमोडिटीज की कीमतों में तेजी के कारण इस बार ब्याज दरें बढ़ाए जाने की मजबूत संभावना जताई जा रही है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) और ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स समेत अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया जा सकता है।

इस बार की पॉलिसी पर क्या है दिग्गजों की राय?

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी की अध्यक्ष सीए किंजल शाह के मुताबिक, ‘खुदरा महंगाई बढ़ने, ऊर्जा की ऊंची लागत और वैश्विक स्तर पर मौद्रिक सख्ती के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किए जाने की व्यापक उम्मीद है। हालांकि, केवल दरों का फैसला ही पर्याप्त नहीं होगा। महंगाई की उम्मीदों को नियंत्रित रखने और घरेलू आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए कर्ज की उपलब्धता जारी रखने के लिए तरलता और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा पर आरबीआई की स्पष्ट स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।’

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी के उपाध्यक्ष सीए मंदार तेलंग ने कहा कि, ‘अब समय आ गया है कि सरकार केवल प्रक्रियाओं में छोटे-मोटे बदलाव करने के बजाय GST प्रशासन से जुड़े कुछ बुनियादी और संरचनात्मक मुद्दों पर भी ध्यान दे। केवल इस वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नहीं रोका जाना चाहिए कि सप्लायर या प्राप्तकर्ता ने रिटर्न दाखिल करते समय कोई वास्तविक क्लेरिकल, गणना संबंधी या प्रक्रियात्मक गलती कर दी हो, खासकर तब जब लेन-देन वास्तविक हो। सरकार को कई राज्यों में काम करने वाली कंपनियों के लिए वास्तविक केंद्रीकृत GST पंजीकरण और अनयूज्ड ITC को आपस में ट्रांसफर करने की सुविधा देनी चाहिए। 180 दिनों में भुगतान की शर्त और MSMEs के लिए पेमेंट बेसिस टैक्स जैसे व्यावहारिक सुधारों से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव घटेगा।’

कब और कहां देखें लाइव प्रसारण?

तारीख और समय: 7 अक्टूबर 2026, सुबह 10:00 बजे (पॉलिसी ऐलान) एवं दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस।

कहां देखें: आरबीआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल (YouTube Channel) और hindi.moneycontrol.com पर लाइव अपडेट्स।

कम होगी EMI या बढ़ेगा FDs पर ब्याज? जानिए 7 अक्टूबर को RBI के फैसले से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा

Market Trend : कच्चे तेल में नरमी से अच्छे हुए बाजार के सेंटिमेंट, जानिए निफ्टी और बैंक निफ्टी में क्या हो कमाई की रणनीति

Market Trend : कच्चे तेल में नरमी से बाजार के सेंटिमेंट अच्छे हुए हैं। निफ्टी 100 प्वाइंट चढ़कर 22650 के पार चला गया है। इधर कोटक और एक्सिस बैंक के दमदार बिजनेस अपडेट्स से बैंक निफ्टी का भी जोश हाई है और यह 55000 के ऊपर टिका है। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी रौनक है। दमदार बिजनेस अपडेट से ट्रेंट 10 फीसदी के अपर सर्किट के साथ निफ्टी का टॉप गेनर बना है। साथ ही कोटक महिंद्रा बैंक भी 4 फीसदी उछला है। उधर कल्याण ज्वेलर्स चमका है,लेकिन मुथूट फिसला है।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती के बावजूद मेटल शेयरों में तेजी है। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 1 फीसदी ऊपर दिख रहा है। FMCG से भी सपोर्ट मिल रहा है। लेकिन ऑटो और IT में दबाव नजर आ रहा है।

CAS फ्रेमवर्क वापस लेने की मीडिया रिपोर्ट्स के बाद कैपिटल मार्केट शेयरों में जोश है। BSE, एंजेल वन और मोतीलाल ओसवाल में जोरदार उछाल आया है। कैपिटल मार्केट इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी मजबूत हुआ है।

इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतें 2 साल की ऊंचाई पर पहुंचने से शुगर शेयरों में मिठास बढ़ी है। अवध शुगर और त्रिवेणी इंजीनियरिंग में अच्छी तेजी है। उधर श्री रेणुका और बलरामपुर चीनी में भी 4 फीसदी तक की तेजी है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वी के विजयकुमार का कहना है कि तेजड़ियों के लिए एक निश्चित स्तर से आगे इस तेजी को बनाए रखना मुश्किल होगा। चूंकि US 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 5.3% के आसपास बना हुआ है, इसलिए FIIs बिकवाली जारी रखेंगे,जिससे बाजार का रुख उछाल पर बिकवाली(sell on rally) वाला हो जाएगा। इसका मतलब है कि FIIs आकर्षक वैल्यूएशन के बावजूद लार्ज-कैप शेयरों की बिकवाली जारी रखेंगे,जबकि DIIs इन शेयरों की खरीदारी जारी रखेंगे क्योंकि फंड का इनफ्लो लगातार बना हुआ है।

बाजार में लगातार तेजी बने रहने के लिए कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की जरूरत होगी। लेकिन इस मोर्चे पर कोई स्पष्टता नहीं है। जब RBI गवर्नर कल MPC पॉलिसी के फैसले की घोषणा करेंगे तो यह अनिश्चितता सेंट्रल बैंक पर दबाव डालेगी। महंगाई की बढ़ती उम्मीदों और ज्यादातर विकसित देशों में बढ़ते बॉन्ड यील्ड को देखते हुए 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी तय लग रही है। बाजार ने पहले ही ब्याज दर में बढ़ोतरी का अनुमान लगा लिया है,इसलिए बाजार का ध्यान पॉलिसी के रुख और ग्रोथ और महंगाई पर RBI के अनुमानों पर होगा।

निवेशकों के नजरिए से यह समझना जरूरी है कि ब्याज दर में बढ़ोतरी उन बैंकों के लिए फायदेमंद होगी जिनके मार्जिन बढ़ते फ्लोटिंग रेट्स से बेहतर होंगे।

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज (Thincredblu Securities) के फाउंडर गौरव उदानी का कहना है कि आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी है, इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी)ज्यादा रहने और इंट्राडे में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

निफ्टी के लिए सबसे पहला सपोर्ट 22,450–22,500 के आसपास है,जबकि 22,750–22,850 मेन रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है। बाजार ने 22,500 के लेवल से कुछ रिकवरी दिखाई है,लेकिन पॉजिटिव मोमेंटम बनाए रखने के लिए 22,750 के ऊपर टिके रहना जरूरी होगा। अगर इंडेक्स सपोर्ट जोन को बनाए रखता है तो गिरावट पर खरीदारी के मौके होंगे। 22,850 के ऊपर टिके रहने से शॉर्ट-टर्म सेटअप बेहतर हो सकता है और 23,000 की ओर रास्ता खुल सकता है। जबकि 22,450 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव फिर से आ सकता है। एक्सपायरी को देखते हुए,ट्रेडर्स को सेशन के दौरान ज्यादा उतार-चढ़ाव और तेजी से रिवर्सल की उम्मीद रखनी चाहिए।

निफ्टी पर अनुज सिंघल की स्ट्रैटेजी

सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का कहना है कि निफ्टी में ऑप्शन राइटर्स की रेंज 22,380-22,720 है। सबसे अच्छा बिकवाली जोन 22,600-22,650 है। SL 22,750 पर रखें। कल भी इसी ट्रेड ने शानदार रिवॉर्ड दिया था। वहीं, सबसे अच्छा खरीदारी का जोन 22,400-22,450 है। SL 22,300 पर रखें।

निफ्टी बैंक पर अनुज सिंघल की स्ट्रैटेजी

अनुज सिंघल का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 54,900-55,100 पर और बड़ा रजिस्टेंस 55,200-55,400 पर है। इसके लिए पहला सपोर्ट 54,500-54,700 पर और बड़ा सपोर्ट 54,200-54,400 पर है। बिकवाली का जोन 54,850-55,050 है। SL 55,200 पर रखें। खरीदारी का जोन 54,300-54,500 है। SL 54,150 पर रखें।

 

 

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क्या आपके पास इंटरनेट या UPI ऐप नहीं है? RBI का नया ‘Tap and Pay’ फीचर बदल देगा आपके पेमेंट का तरीका

UPI Tap and Pay: अब बिना एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन के भी UPI से पेमेंट करना आसान हो सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने ‘UPI टैप एंड पे’ (UPI Tap and Pay) सुविधा शुरू की है। इससे यूजर्स NFC-इनेबल्ड पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनों पर पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए बस उन्हें अपने NFC-इनेबल्ड स्मार्टफोन को अनलॉक करके टर्मिनल पर टैप करना होगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 10 सितंबर को इस फीचर का ऐलान किया है। यह डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने और ग्राहकों को बेहतर सपोर्ट व सुरक्षा देने के लिए शुरू किए गए दो नए फीचर्स में से एक है।

हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। ‘UPI Tap and Pay’ का मतलब यह नहीं है कि UPI हर जगह बिना इंटरनेट कनेक्शन के काम करेगा। ट्रांजैक्शन के लिए यूजर के फोन में मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि पेमेंट के लिए POS मशीन के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

UPI ‘Tap and Pay’ कैसे काम करता है?

इस नए फीचर को इस तरह से बनाया गया है कि UPI पेमेंट भी कॉन्टैक्टलेस कार्ड पेमेंट की तरह काम करे।

NFC-इनेबल्ड स्मार्टफोन वाले यूजर्स अपने डिवाइस को अनलॉक करके उसे कम्पैटिबल POS टर्मिनल पर टैप कर सकते हैं। इसके बाद टर्मिनल के इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करके पेमेंट प्रोसेस किया जा सकता है।

यह सुविधा अलग-अलग तरह के UPI-लिंक्ड अकाउंट्स को सपोर्ट करती है, जिसमें UPI से जुड़े RuPay क्रेडिट कार्ड भी शामिल हैं।

छोटे पेमेंट के लिए, यूजर्स UPI PIN डाले बिना ₹5,000 तक का ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। ₹5,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए, POS टर्मिनल पर UPI PIN डालना होगा।

इससे फिजिकल स्टोर्स पर UPI का इस्तेमाल ज्यादा आसान हो सकता है, खासकर उन यूजर्स के लिए जिनके पास पेमेंट के समय मोबाइल डेटा उपलब्ध नहीं हो सकता है।

MyUPI क्या है?

Tap and Pay के साथ-साथ, RBI ने MyUPI की शुरुआत की है, जो भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित एक AI-संचालित ग्राहक सहायता प्लेटफॉर्म है।

MyUPI, NPCI के FiMI स्मॉल लैंग्वेज मॉडल पर आधारित है और इसका उद्देश्य विभिन्न बैंकों और UPI ऐप्स में यूजर्स के UPI लेनदेन और ऑटोपे की जानकारी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।

इस प्लेटफॉर्म में कई ऐसे फीचर्स भी हैं जो यूजर्स को अपने भुगतानों पर अधिक नियंत्रण प्रदान करते हैं।

इनमें से एक है सेफ्टी स्विच, जो यूजर्स को यह अनुरोध करने की अनुमति देता है कि यदि उन्हें संदेह है कि उनका खाता असुरक्षित हो गया है तो UPI डेबिट लेनदेन अस्वीकार कर दिए जाएं। एक अन्य फीचर, UPI नंबर डिलिंक, यूजर्स को अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से UPI भुगतान प्राप्त करना बंद करने की अनुमति देता है।

MyUPI पेमेंट पूरा होने से पहले यूजर्स को बेनिफिशियरी के बारे में अतिरिक्त जानकारी भी देगा। योग्य ट्रांजेक्शन के लिए, यह प्लेटफॉर्म ऑटोमेटेड चार्जबैक प्रोसेसिंग को सपोर्ट करेगा।

एक और फीचर, जिसे ‘ट्रांजेक्शन रीप्ले’ कहा जाता है, यूजर्स को किसी भी UPI ऐप के जरिए पहले किए गए ट्रांजेक्शन को दोबारा करने की सुविधा देगा।

ये बदलाव क्यों जरूरी हैं?

NPCI के अनुसार, UPI भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का एक अहम हिस्सा बन गया है और कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में इसकी हिस्सेदारी 89 प्रतिशत है।

नए फीचर्स से पता चलता है कि अब फोकस सिर्फ डिजिटल पेमेंट की सुविधा देने से आगे बढ़ रहा है। इसका मकसद फिजिकल टर्मिनल्स पर पेमेंट को आसान बनाना, कस्टमर सपोर्ट को बेहतर करना और यूजर्स को अपने अकाउंट्स पर ज्यादा कंट्रोल देना भी है।

NPCI ने कहा कि MyUPI का मकसद सिर्फ कस्टमर-सपोर्ट सर्विस के तौर पर नहीं, बल्कि एक भरोसे और कंट्रोल लेयर के तौर पर काम करना है। यह चौबीसों घंटे कई भाषाओं में मदद और सेल्फ-सर्विस के विकल्प देगा।

ये नई लॉन्चिंग UPI ऑथेंटिकेशन को आसान बनाने की NPCI की कोशिशों को भी आगे बढ़ाती हैं। GFF 2025 में UPI के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन लॉन्च किया गया था और NPCI के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक बायोमेट्रिक-ऑथेंटिकेटेड UPI ट्रांजेक्शन की कुल संख्या 6.29 बिलियन से ज्यादा हो गई थी।

‘Tap and Pay’ और MyUPI मिलकर UPI के लिए एक नए दौर की ओर इशारा करते हैं — एक ऐसा दौर जो न सिर्फ पेमेंट प्रोसेस करने पर, बल्कि उन्हें ज्यादा सुविधाजनक, सुरक्षित और मैनेज करने में आसान बनाने पर भी फोकस करता है।

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Solar Stock: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को ₹455 करोड़ का ऑर्डर मिला, 1 लाख घरों की छत पर सोलर पैनल लगाएगी

पुणे की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी GK Energy को बड़ा ऑर्डर मिला है, जो राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी ने दिया है। इसके तहत कंपनी को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर में 1 किलोवाट का सिस्टम लगेगा। यानी पूरे प्रोजेक्ट की क्षमता 100 MW होगी।

ऑर्डर की कुल कीमत करीब ₹454.5 करोड़ है। इसमें GST भी शामिल है। कंपनी को हर किलोवाट के लिए ₹45,450 मिलेंगे।

1 लाख घरों पर लगेगा सोलर

GK Energy को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर पर 1 kW का सिस्टम होगा। कंपनी का काम सिर्फ पैनल लगाने तक नहीं है। उसे पूरा काम संभालना होगा। इसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, सामान की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और सिस्टम शुरू करना शामिल है।

इन सोलर सिस्टम का 5 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस करना होगा। हर प्रोजेक्ट को संबंधित वर्क ऑर्डर मिलने के 60 दिनों के अंदर पूरा करना होगा।

जून तिमाही के नतीजे

GK Energy का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पहली तिमाही में 54% बढ़कर ₹57 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹37 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से बढ़ा। यह 55.4% बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹325 करोड़ था।

EBITDA 44% बढ़कर ₹82.4 करोड़ हो गया। हालांकि, यहां एक छोटी चिंता भी है। EBITDA मार्जिन 17.6% से घटकर 16.3% रह गया। यानी बिक्री बढ़ी, लेकिन खर्च भी बढ़े। प्रॉफिट बिफोर टैक्स भी बढ़कर ₹80.3 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹50.5 करोड़ था।

कंपनी करती क्या है?

GK Energy का मुख्य कारोबार सोलर से जुड़ा है। कंपनी दो बड़े काम करती है। पहला है सोलर प्रोजेक्ट्स का EPC कारोबार। यानी डिजाइन से लेकर निर्माण और इंस्टॉलेशन तक पूरा काम। दूसरा कारोबार सोलर सेल और दूसरे सोलर प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग का है। पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में EPC कारोबार की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।

शेयर में 6.83% से ज्यादा तेजी

बुधवार को GK Energy के शेयर 6.83% बढ़कर ₹134.81 पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.62% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में यह 19.63% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 2.73 हजार करोड़ रुपये है।

HDFC Bank में CEO पद को लेकर हलचल बढ़ी, RBI गवर्नर से मिले चेयरमैन राजीव कुमार

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank में CEO पद को लेकर हलचल बढ़ी, RBI गवर्नर से मिले चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank CEO Appointment: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। अब इसमें दो महीने से थोड़ा ज्यादा समय बचा है। इसी बीच बैंक के चेयरमैन राजीव कुमार ने पिछले हफ्ते RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सबसे अहम बात जगदीशन के अगले कार्यकाल को लेकर हुई। RBI यह समझना चाहता है कि बैंक बोर्ड जगदीशन को दोबारा एमडी और सीईओ बनाने के पक्ष में है या नहीं।

बोर्ड में जगदीशन के नाम पर कितनी सहमति?

RBI यह भी जानना चाहता था कि राजीव कुमार के चेयरमैन बनने के बाद बोर्ड में किसी दूसरे नाम पर भी चर्चा हुई है या नहीं। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि अभी तक HDFC Bank बोर्ड ने एमडी और सीईओ की नियुक्ति को लेकर RBI को कोई सिफारिश नहीं भेजी है।

RBI अब जल्द फैसला चाहता है

राजीव कुमार 30 जून 2026 को HDFC Bank के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके बाद से RBI अधिकारियों के साथ उनकी यह चौथी औपचारिक बातचीत बताई जा रही है।

शुरुआत में RBI ने बोर्ड को कुछ समय दिया। इसकी वजह यह थी कि राजीव कुमार ने 15 जुलाई को औपचारिक रूप से चेयरमैन का पद संभाला था। अब उन्हें पद संभाले करीब एक महीना हो चुका है। ऐसे में RBI चाहता है कि बैंक के नेतृत्व को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो।

आमतौर पर छह महीने पहले शुरू हो जाती है प्रक्रिया

बैंकों में आम तौर पर एमडी और सीईओ का कार्यकाल खत्म होने से करीब छह महीने पहले दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। बोर्ड अपनी सिफारिश RBI को भेजता है।

अगर नया सीईओ चुनना हो, तो पसंदीदा उम्मीदवारों के नाम आम तौर पर कार्यकाल खत्म होने से कम से कम चार महीने पहले RBI को भेजे जाते हैं।

HDFC Bank का मामला इसलिए अलग दिख रहा है। जगदीशन का कार्यकाल खत्म होने में अब करीब दो महीने बचे हैं। लेकिन बोर्ड ने अभी तक RBI को कोई नाम नहीं भेजा है।

जगदीशन के सामने क्या संभावनाएं?

पहले की रिपोर्टों के मुताबिक, इस पद को लेकर चार संभावनाएं हैं। जगदीशन को फिर से तीन साल का कार्यकाल मिल सकता है। उन्हें इससे छोटा कार्यकाल भी दिया जा सकता है। बैंक बोर्ड किसी दूसरे आंतरिक उम्मीदवार का नाम भी भेज सकता है।

इसके अलावा किसी बाहरी उम्मीदवार के नाम पर भी विचार हो सकता है। यानी फिलहाल यह तय नहीं है कि अक्टूबर के बाद HDFC Bank की कमान किसके हाथ में होगी।

AT-1 बॉन्ड मामले पर भी बात

RBI गवर्नर और राजीव कुमार की बातचीत सिर्फ सीईओ की नियुक्ति तक सीमित नहीं रही। सूत्रों के मुताबिक, AT-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई।

कुछ नाराज बॉन्डधारक इस मामले को लेकर बहरीन में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। RBI इस मामले को लेकर भी बैंक की स्थिति समझना चाहता है।

कुछ महीनों में बदला बैंक का नेतृत्व

HDFC Bank में पिछले कुछ महीनों में नेतृत्व स्तर पर काफी बदलाव हुए हैं। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में अचानक बोर्ड छोड़ दिया था।

इसके बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्य केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया। करीब तीन महीने की तलाश के बाद राजीव कुमार को नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुना गया। उन्हें पहले अतिरिक्त निदेशक बनाया गया था। RBI की मंजूरी के बाद 15 जुलाई को उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला।

HDFC Bank का शेयर बुधवार को 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 727.35 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 1 साल में यह 25.28% टूट चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।