Stock in Focus: सोलर कंपनी को ₹2025 करोड़ का ऑर्डर, राजस्थान में बनाएगी 500 MW का प्रोजेक्ट

Stock in Focus: रिन्यूएबल पावर कंपनी KPI Green Energy को बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को NACOF Oorja Private Ltd से करीब ₹2,025 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। इसमें टैक्स और GST शामिल हैं। कंपनी राजस्थान में 500 MW/550 MWp का सोलर प्रोजेक्ट तैयार करेगी।

राजस्थान में बनेगा 500 MW का सोलर प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट राजस्थान के बीकानेर जिले में बनेगा। इसे NACOF की सब्सिडियरी NOPL विकसित कर रही है। यह 5,000 MW के बड़े Solar Power Park का हिस्सा है।

KPI Green Energy को इस प्रोजेक्ट का पूरा EPC काम करना है। इसमें डिजाइन से लेकर प्रोजेक्ट की कमीशनिंग तक की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

क्या-क्या काम करेगी कंपनी?

KPI Green Energy सोलर प्लांट का डिजाइन और इंजीनियरिंग करेगी। इसके बाद जरूरी उपकरणों की खरीद और सप्लाई भी कंपनी करेगी। इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम भी इसी के जिम्मे होगा।

प्रोजेक्ट में PV मॉड्यूल, माउंटिंग स्ट्रक्चर, इनवर्टर और ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। इसके अलावा हाई-टेंशन स्विचगियर और दूसरे इलेक्ट्रिकल सिस्टम भी शामिल हैं।

12 महीने में पूरा करना होगा काम

कंपनी को साइट मिलने के बाद 12 महीने में EPC का काम पूरा करना होगा। इसमें प्रोजेक्ट की कमीशनिंग भी शामिल है।

इसके अलावा 33 kV ट्रांसमिशन लाइन और एवैक्यूएशन बे भी बनाया जाएगा। प्लांट में SCADA और मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाए जाएंगे।

पहले भी मिला था 500 MW का काम

KPI Green Energy ने बताया कि इस साल की शुरुआत में उसे बीकानेर में NTPC Renewable Energy से 500 MW/550 MWp का Solar BOS पैकेज मिला था। नया ऑर्डर उसी क्षेत्र में कंपनी के काम को और बढ़ाता है।

कंपनी के मुताबिक, नए ऑर्डर से उसकी EPC ऑर्डर बुक बढ़ेगी। इससे आने वाले एक साल के लिए रेवेन्यू की विजिबिलिटी भी बेहतर होगी।

KPI Green के शेयर का हाल

KPI Green Energy का शेयर मंगलवार को 4.24% की बढ़त के साथ ₹372.50 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 22.29% उछला है। कंपनी का मार्केट कैप 7.31 हजार करोड़ रुपये है।

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Stock in Focus: सोलर कंपनी को 400 MW का ऑर्डर, महाराष्ट्र के प्रोजेक्ट्स के लिए देगी मॉड्यूल

Stock in Focus: सोलर एनर्जी सॉल्यूशन कंपनी Vikram Solar को 400 MW का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी ने सोमवार, 28 सितंबर को इसकी जानकारी दी। इस ऑर्डर के तहत महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर लगाए जाने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए मॉड्यूल की सप्लाई की जाएगी।

400 MW के मॉड्यूल की होगी सप्लाई

Vikram Solar इस ऑर्डर के तहत 620 Wp क्षमता वाले हाई-एफिशिएंसी N-Type TOPCon G12R मॉड्यूल देगी। इनमें ग्लास-टू-ग्लास और बाइफेशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। मॉड्यूल में हाफ-कट सेल भी होंगे।

कंपनी के मुताबिक, मॉड्यूल की सप्लाई अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। पूरा ऑर्डर मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।

महाराष्ट्र के सोलर प्रोजेक्ट्स पर फोकस

यह ऑर्डर महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर लगाए जाने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए है। इससे कृषि फीडर सोलराइजेशन सेगमेंट में Vikram Solar की मौजूदगी और मजबूत होगी।

चेयरमैन ने क्या कहा?

Vikram Solar के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ज्ञानेश चौधरी ने कहा कि MSKVY 2.0 जैसे प्रोग्राम किसानों और कृषि समुदायों तक सोलर पावर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इतने बड़े और अलग-अलग जगहों पर लगाए जाने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए मॉड्यूल की सप्लाई कंपनी की G12R TOPCon टेक्नोलॉजी पर भरोसा दिखाती है।

₹1,250 करोड़ का एक और समझौता

सितंबर में Vikram Solar ने Avaada Electro के साथ ₹1,250 करोड़ का सोलर सेल सप्लाई एग्रीमेंट भी किया था। इसके तहत 1 GW N-Type G12R TOPCon सोलर सेल खरीदे जाएंगे।

इन सेल की सप्लाई घरेलू स्तर पर होगी। इनका इस्तेमाल Vikram Solar के मॉड्यूल बनाने में किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, डिलीवरी सितंबर 2026 से शुरू होनी है।

Vikram Solar का शेयर सोमवार को BSE पर 0.19% की मामूली गिरावट के साथ ₹160.05 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को ₹488 करोड़ का ऑर्डर मिला, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Pace Digitek की मटेरियल सब्सिडियरी Lineage Power को ₹488.46 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर NTPC GE Power Services ने दिया है। इसके तहत कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) कंटेनर्स की सप्लाई और कमीशनिंग करेगी।

ऑर्डर में 5.015 MWh क्षमता वाले BESS कंटेनर्स की सप्लाई, डिलीवरी, टेस्टिंग और कमीशनिंग शामिल है। इसके साथ बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) और एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) भी लगाए जाएंगे। कंपनी को 12 साल का मेनटेंस कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है।

दिसंबर 2026 तक पूरा होगा काम

यह कॉन्ट्रैक्ट घरेलू कंपनी NTPC GE Power Services ने दिया है। इसे 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करना है।

यह Lineage Power को हाल में मिला दूसरा बड़ा BESS ऑर्डर है। इससे पहले कंपनी को Kalpa Power से ₹92.9 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसमें 100 MWh BESS की सप्लाई और कमीशनिंग सपोर्ट शामिल है। यह काम भी दिसंबर 2026 तक पूरा होना है।

BESS क्षमता बढ़ा रही कंपनी

Pace Digitek तेजी से अपने एनर्जी स्टोरेज बिजनेस को बढ़ा रही है। कंपनी ने हाल ही में BESS मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 2.5 GWh से बढ़ाकर 5 GWh की है।

अब कंपनी FY27 के अंत तक इसे चरणबद्ध तरीके से 10 GWh तक ले जाने का लक्ष्य रखती है। पिछले एक साल में कंपनी 300 से ज्यादा यूटिलिटी-स्केल BESS कंटेनर बना चुकी है। इनकी कुल स्टोरेज क्षमता करीब 1.5 GWh है।

एनर्जी स्टोरेज बिजनेस में बढ़ रही पकड़

₹488.46 करोड़ का यह नया ऑर्डर Lineage Power की BESS ऑर्डर बुक को और मजबूत करता है। कंपनी मैन्युफैक्चरिंग के साथ सिस्टम इंटीग्रेशन और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन पर भी फोकस कर रही है।

Pace Digitek का शेयर सोमवार को 0.49% की गिरावट के साथ ₹155.40 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 28.71% टूटा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: रिन्यूएबल एनर्जी के लिए दो कंपनियों ने मिलाया हाथ, शेयरों पर दिख सकता है असर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी NLC India Renewables और PTC India ने ग्रीन एनर्जी के कारोबार में साथ काम करने के लिए ज्वाइंट वेंचर बनाया है। दोनों कंपनियां मिलकर ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स विकसित करेंगी। इसके अलावा इस सेक्टर में कारोबार के नए मौके भी तलाशे जाएंगे।

16 सितंबर को बनी नई कंपनी

नई कंपनी का नाम NIRL PTC Renewables Ltd है। इसे भारत में 16 सितंबर को शामिल किया गया है। PTC India ने रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी है।

इस ज्वाइंट वेंचर में NLC India Renewables की 74% हिस्सेदारी होगी। वहीं, PTC India के पास बाकी 26% हिस्सेदारी रहेगी।

PTC India ने लगाए ₹2.60 लाख

PTC India ने ज्वाइंट वेंचर में ₹10 फेस वैल्यू वाले 26,000 इक्विटी शेयर लिए हैं। इसके लिए कंपनी करीब ₹2.60 लाख का कैश निवेश करेगी।

कंपनी ने बताया कि ज्वाइंट वेंचर ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के विकास के मौके तलाशेगा। इसके लिए ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट की शर्तें और जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां लागू होंगी।

DIPAM से भी ली मंजूरी

PTC India ने बताया कि ज्वाइंट वेंचर बनाने से पहले DIPAM से मंजूरी ली गई थी। DIPAM वित्त मंत्रालय के तहत आता है। इसके बाद ही नई कंपनी को शामिल किया गया।

दोनों कंपनियों का क्या है कारोबार?

PTC India बिजली की ट्रेडिंग का कारोबार करती है। कंपनी बिजली उत्पादकों और खरीदारों के बीच बिजली की खरीद-बिक्री से जुड़ी है।

वहीं NLC India Renewables सरकारी कंपनी NLC India की सब्सिडियरी है और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। अब दोनों कंपनियां अपने-अपने अनुभव का इस्तेमाल ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए करेंगी।

दोनों शेयरों में तेजी

गुरुवार को PTC India का शेयर NSE पर 4.04% की तेजी के साथ ₹156 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में ये स्टॉक 10.73% टूटा है। इसका मार्केट कैप 4.72 हजार करोड़ रुपये है।

वहीं, NLC India के शेयर में 2.76% की बढ़त दिखी और ये ₹262.40 पर बंद हुआ। ये स्टॉक बीते 1 साल में तकरीबन फ्लैट है। हालांकि, 5 साल में इसने 369.83% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।

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Stock in Focus: सरकारी कंपनी को ₹3244 करोड़ का प्रोजेक्ट, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी Power Grid Corporation of India Ltd ने राजस्थान के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से बिजली निकालने के लिए बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है। कंपनी को राजस्थान के बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से 6 GW सोलर पावर ट्रांसमिशन के लिए सफल बोलीदाता चुना गया है।

यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत मिला है। कंपनी ने इसके लिए ₹3,244.33 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन चार्ज की बोली लगाई है। POWERGRID को 2 सितंबर 2026 को लेटर ऑफ इंटेंट of Intent मिला है।

1,000 किमी लंबी HVDC लाइन बनेगी

प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के बाड़मेर-II में 6,000 MW की HVDC टर्मिनल स्थापित की जाएगी। महाराष्ट्र के साउथ कलांब में भी टर्मिनल बनेगी। दोनों जगहों पर ±800 kV HVDC सिस्टम लगाया जाएगा।

बाड़मेर-II से साउथ कलांब के बीच करीब 1,000 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। यह राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगी।

इसके अलावा राजस्थान में 400 kV की ट्रांसमिशन लाइन, जरूरी बे और दूसरे उपकरण भी लगाए जाएंगे। बाड़मेर-II पावर स्टेशन पर दो SynCon यूनिट भी स्थापित की जाएंगी।

BOOT मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट Build, Own, Operate and Transfer यानी BOOT मॉडल पर विकसित होगा। इसके तहत कंपनी प्रोजेक्ट बनाएगी, चलाएगी और तय अवधि के बाद इसे ट्रांसफर किया जाएगा।

हाल में गुजरात का भी प्रोजेक्ट मिला

पिछले महीने भी POWERGRID को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन का बड़ा प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने ₹822.91 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन टैरिफ की बोली लगाई थी।

बुधवार को Power Grid Corporation का शेयर NSE पर 1.23% की तेजी के साथ ₹267.80 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Solar Stock: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को ₹455 करोड़ का ऑर्डर मिला, 1 लाख घरों की छत पर सोलर पैनल लगाएगी

पुणे की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी GK Energy को बड़ा ऑर्डर मिला है, जो राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी ने दिया है। इसके तहत कंपनी को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर में 1 किलोवाट का सिस्टम लगेगा। यानी पूरे प्रोजेक्ट की क्षमता 100 MW होगी।

ऑर्डर की कुल कीमत करीब ₹454.5 करोड़ है। इसमें GST भी शामिल है। कंपनी को हर किलोवाट के लिए ₹45,450 मिलेंगे।

1 लाख घरों पर लगेगा सोलर

GK Energy को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर पर 1 kW का सिस्टम होगा। कंपनी का काम सिर्फ पैनल लगाने तक नहीं है। उसे पूरा काम संभालना होगा। इसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, सामान की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और सिस्टम शुरू करना शामिल है।

इन सोलर सिस्टम का 5 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस करना होगा। हर प्रोजेक्ट को संबंधित वर्क ऑर्डर मिलने के 60 दिनों के अंदर पूरा करना होगा।

जून तिमाही के नतीजे

GK Energy का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पहली तिमाही में 54% बढ़कर ₹57 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹37 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से बढ़ा। यह 55.4% बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹325 करोड़ था।

EBITDA 44% बढ़कर ₹82.4 करोड़ हो गया। हालांकि, यहां एक छोटी चिंता भी है। EBITDA मार्जिन 17.6% से घटकर 16.3% रह गया। यानी बिक्री बढ़ी, लेकिन खर्च भी बढ़े। प्रॉफिट बिफोर टैक्स भी बढ़कर ₹80.3 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹50.5 करोड़ था।

कंपनी करती क्या है?

GK Energy का मुख्य कारोबार सोलर से जुड़ा है। कंपनी दो बड़े काम करती है। पहला है सोलर प्रोजेक्ट्स का EPC कारोबार। यानी डिजाइन से लेकर निर्माण और इंस्टॉलेशन तक पूरा काम। दूसरा कारोबार सोलर सेल और दूसरे सोलर प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग का है। पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में EPC कारोबार की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।

शेयर में 6.83% से ज्यादा तेजी

बुधवार को GK Energy के शेयर 6.83% बढ़कर ₹134.81 पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.62% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में यह 19.63% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 2.73 हजार करोड़ रुपये है।

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Rhetan TMT ने 1 MW कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया, ऊर्जा लागत घटाने पर फोकस

अहमदाबाद की TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने गुजरात के कडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट चालू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपनी जरूरत के लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है। इससे कंपनी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा लागत घटाने की तैयारी

कंपनी के मुताबिक उसकी कुल लागत में ऊर्जा का हिस्सा करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर हो सकती है।

BIS सर्टिफिकेशन से बढ़ी पहुंच

Rhetan TMT ने Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है। इससे कंपनी अब देशभर में सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इन प्रीमियम ग्रेड बार की सप्लाई कर सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे हाई-वैल्यू मार्केट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट कंपनी की ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि BIS सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी की उच्च मूल्य वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ी है। यह दोनों पहल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगी।

आगे की रणनीति

कंपनी ने कहा कि वह कैप्टिव रिन्यूएबल पावर और प्रीमियम ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Premier Energies Q1 Results: सोलर कंपनी का मुनाफा 50% बढ़ा, ₹5000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Premier Energies Q1 Results: सोलर इक्विपमेंट बनाने वाली Premier Energies ने गुरुवार, 6 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 50.4% बढ़कर 463.1 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 307.8 करोड़ रुपये था।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 35.3% बढ़कर 2,462.6 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 1,820.7 करोड़ रुपये थी। वहीं, EBITDA 30.3% बढ़कर 714.4 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 30.1% से घटकर 29% रह गया।

₹5,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Premier Energies ने कहा कि वह 5,000 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगी। कंपनी यह रकम क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), इक्विटी शेयर, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD), वारंट या अन्य इक्विटी में बदलने योग्य सिक्योरिटीज जारी करके जुटा सकती है।

मैनेजमेंट में फिर भरोसा

कंपनी सुरेंद्रपाल सिंह सलूजा को 19 दिसंबर 2026 से 18 दिसंबर 2031 तक फिर से चेयरमैन और होल-टाइम डायरेक्टर नियुक्त करने के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगी।

इसके अलावा, चिरंजीव सिंह सलूजा को भी अगले पांच साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यह फैसला कंपनी की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है।

Premier Energies के शेयर

Premier Energies का शेयर गुरुवार को 1.01% की बढ़त के साथ 1,045 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 30.85% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 47.08 हजार करोड़ रुपये है।

Premier Energies का बिजनेस

यह देश की प्रमुख सोलर कंपनियों में से एक है। कंपनी सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल बनाती है, जिनका इस्तेमाल घरों, उद्योगों और बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में होता है।

इसके अलावा, कंपनी EPC सेवाएं भी देती है, यानी सोलर प्लांट लगाने से लेकर उसे चालू करने तक का काम करती है। भारत में बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी की मांग और सरकारी सोलर योजनाओं से कंपनी के कारोबार को लगातार फायदा मिल रहा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।