Stock in Focus: सरकारी कंपनी को ₹3244 करोड़ का प्रोजेक्ट, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी Power Grid Corporation of India Ltd ने राजस्थान के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से बिजली निकालने के लिए बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है। कंपनी को राजस्थान के बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से 6 GW सोलर पावर ट्रांसमिशन के लिए सफल बोलीदाता चुना गया है।

यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत मिला है। कंपनी ने इसके लिए ₹3,244.33 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन चार्ज की बोली लगाई है। POWERGRID को 2 सितंबर 2026 को लेटर ऑफ इंटेंट of Intent मिला है।

1,000 किमी लंबी HVDC लाइन बनेगी

प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के बाड़मेर-II में 6,000 MW की HVDC टर्मिनल स्थापित की जाएगी। महाराष्ट्र के साउथ कलांब में भी टर्मिनल बनेगी। दोनों जगहों पर ±800 kV HVDC सिस्टम लगाया जाएगा।

बाड़मेर-II से साउथ कलांब के बीच करीब 1,000 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। यह राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगी।

इसके अलावा राजस्थान में 400 kV की ट्रांसमिशन लाइन, जरूरी बे और दूसरे उपकरण भी लगाए जाएंगे। बाड़मेर-II पावर स्टेशन पर दो SynCon यूनिट भी स्थापित की जाएंगी।

BOOT मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट Build, Own, Operate and Transfer यानी BOOT मॉडल पर विकसित होगा। इसके तहत कंपनी प्रोजेक्ट बनाएगी, चलाएगी और तय अवधि के बाद इसे ट्रांसफर किया जाएगा।

हाल में गुजरात का भी प्रोजेक्ट मिला

पिछले महीने भी POWERGRID को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन का बड़ा प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने ₹822.91 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन टैरिफ की बोली लगाई थी।

बुधवार को Power Grid Corporation का शेयर NSE पर 1.23% की तेजी के साथ ₹267.80 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Solar Stock: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को ₹455 करोड़ का ऑर्डर मिला, 1 लाख घरों की छत पर सोलर पैनल लगाएगी

पुणे की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी GK Energy को बड़ा ऑर्डर मिला है, जो राज्य सरकार की बिजली वितरण कंपनी ने दिया है। इसके तहत कंपनी को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर में 1 किलोवाट का सिस्टम लगेगा। यानी पूरे प्रोजेक्ट की क्षमता 100 MW होगी।

ऑर्डर की कुल कीमत करीब ₹454.5 करोड़ है। इसमें GST भी शामिल है। कंपनी को हर किलोवाट के लिए ₹45,450 मिलेंगे।

1 लाख घरों पर लगेगा सोलर

GK Energy को 1 लाख घरों की छत पर सोलर सिस्टम लगाना है। हर घर पर 1 kW का सिस्टम होगा। कंपनी का काम सिर्फ पैनल लगाने तक नहीं है। उसे पूरा काम संभालना होगा। इसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, सामान की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और सिस्टम शुरू करना शामिल है।

इन सोलर सिस्टम का 5 साल तक ऑपरेशन और मेंटेनेंस करना होगा। हर प्रोजेक्ट को संबंधित वर्क ऑर्डर मिलने के 60 दिनों के अंदर पूरा करना होगा।

जून तिमाही के नतीजे

GK Energy का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पहली तिमाही में 54% बढ़कर ₹57 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹37 करोड़ था। कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से बढ़ा। यह 55.4% बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹325 करोड़ था।

EBITDA 44% बढ़कर ₹82.4 करोड़ हो गया। हालांकि, यहां एक छोटी चिंता भी है। EBITDA मार्जिन 17.6% से घटकर 16.3% रह गया। यानी बिक्री बढ़ी, लेकिन खर्च भी बढ़े। प्रॉफिट बिफोर टैक्स भी बढ़कर ₹80.3 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹50.5 करोड़ था।

कंपनी करती क्या है?

GK Energy का मुख्य कारोबार सोलर से जुड़ा है। कंपनी दो बड़े काम करती है। पहला है सोलर प्रोजेक्ट्स का EPC कारोबार। यानी डिजाइन से लेकर निर्माण और इंस्टॉलेशन तक पूरा काम। दूसरा कारोबार सोलर सेल और दूसरे सोलर प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग का है। पहली तिमाही में कंपनी के रेवेन्यू में EPC कारोबार की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।

शेयर में 6.83% से ज्यादा तेजी

बुधवार को GK Energy के शेयर 6.83% बढ़कर ₹134.81 पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 18.62% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में यह 19.63% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 2.73 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT ने 1 MW कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया, ऊर्जा लागत घटाने पर फोकस

अहमदाबाद की TMT स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने गुजरात के कडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 मेगावाट का कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट चालू कर दिया है। कंपनी ने कहा कि यह प्रोजेक्ट अब अपनी जरूरत के लिए रिन्यूएबल बिजली पैदा कर रहा है। इससे कंपनी के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

ऊर्जा लागत घटाने की तैयारी

कंपनी के मुताबिक उसकी कुल लागत में ऊर्जा का हिस्सा करीब 20% है। ऐसे में कैप्टिव सोलर पावर से लंबे समय में ऑपरेशनल क्षमता बढ़ने और लागत घटने की उम्मीद है। इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर हो सकती है।

BIS सर्टिफिकेशन से बढ़ी पहुंच

Rhetan TMT ने Fe500D, Fe550 और Fe550D ग्रेड के TMT बार के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है। इससे कंपनी अब देशभर में सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए इन प्रीमियम ग्रेड बार की सप्लाई कर सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे हाई-वैल्यू मार्केट में उसकी मौजूदगी मजबूत होगी।

मैनेजमेंट ने क्या कहा

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि 1 मेगावाट का कैप्टिव सोलर प्रोजेक्ट कंपनी की ऊर्जा लागत पर बेहतर नियंत्रण देने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने कहा कि BIS सर्टिफिकेशन मिलने से कंपनी की उच्च मूल्य वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की क्षमता भी बढ़ी है। यह दोनों पहल कंपनी की भविष्य की ग्रोथ के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगी।

आगे की रणनीति

कंपनी ने कहा कि वह कैप्टिव रिन्यूएबल पावर और प्रीमियम ग्रेड TMT प्रोडक्ट्स के जरिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। साथ ही भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के मुताबिक अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Premier Energies Q1 Results: सोलर कंपनी का मुनाफा 50% बढ़ा, ₹5000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Premier Energies Q1 Results: सोलर इक्विपमेंट बनाने वाली Premier Energies ने गुरुवार, 6 अगस्त को जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे जारी किए। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 50.4% बढ़कर 463.1 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 307.8 करोड़ रुपये था।

कंपनी की ऑपरेशंस से रेवेन्यू 35.3% बढ़कर 2,462.6 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 1,820.7 करोड़ रुपये थी। वहीं, EBITDA 30.3% बढ़कर 714.4 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBITDA मार्जिन 30.1% से घटकर 29% रह गया।

₹5,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Premier Energies ने कहा कि वह 5,000 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगी। कंपनी यह रकम क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), इक्विटी शेयर, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD), वारंट या अन्य इक्विटी में बदलने योग्य सिक्योरिटीज जारी करके जुटा सकती है।

मैनेजमेंट में फिर भरोसा

कंपनी सुरेंद्रपाल सिंह सलूजा को 19 दिसंबर 2026 से 18 दिसंबर 2031 तक फिर से चेयरमैन और होल-टाइम डायरेक्टर नियुक्त करने के लिए भी शेयरधारकों की मंजूरी मांगेगी।

इसके अलावा, चिरंजीव सिंह सलूजा को भी अगले पांच साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यह फैसला कंपनी की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया है।

Premier Energies के शेयर

Premier Energies का शेयर गुरुवार को 1.01% की बढ़त के साथ 1,045 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 30.85% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 47.08 हजार करोड़ रुपये है।

Premier Energies का बिजनेस

यह देश की प्रमुख सोलर कंपनियों में से एक है। कंपनी सोलर सेल और सोलर मॉड्यूल बनाती है, जिनका इस्तेमाल घरों, उद्योगों और बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में होता है।

इसके अलावा, कंपनी EPC सेवाएं भी देती है, यानी सोलर प्लांट लगाने से लेकर उसे चालू करने तक का काम करती है। भारत में बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी की मांग और सरकारी सोलर योजनाओं से कंपनी के कारोबार को लगातार फायदा मिल रहा है।

LIC Q1 Results: प्रॉफिट 23% बढ़कर 13492 करोड़ रुपये, कुल इनकम 237848 करोड़

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IREDA Q1 Results: सरकारी कंपनी का मुनाफा 37% बढ़ा, सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फंडिंग दी

IREDA Q1 Results: सरकारी नवरत्न कंपनी इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 36.8% बढ़कर ₹337.5 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹246.7 करोड़ था।

NII में 24% की बढ़ोतरी

IREDA की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 24.1% बढ़कर ₹856.8 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹690.5 करोड़ थी। IREDA के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बिजय कुमार मोहंती ने कहा कि मजबूत कारोबारी बुनियाद और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए बढ़ती फाइनेंसिंग डिमांड का असर नतीजों में दिखा है।

लोन बुक में भी उछाल

30 जून 2026 तक IREDA की लोन बुक 19% बढ़कर ₹94,936 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹79,941 करोड़ थी। कंपनी ने तिमाही के दौरान ₹4,991 करोड़ उधार जुटाए, ₹6,556 करोड़ के लोन वितरित किए और ₹3,380 करोड़ के नए लोन मंजूर किए।

सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फंडिंग

IREDA की कुल लोन बुक में सोलर एनर्जी की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 26% रही। इसके बाद राज्य बिजली कंपनियां (19%), विंड एनर्जी (11%) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (11%) का स्थान रहा।

NIM में सुधार, GNPA बढ़ा

IREDA का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बढ़कर 3.75% हो गया, जो पिछले साल 3.60% था। प्रोविजन कवरेज रेशियो बढ़कर 68.22% और कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 20.30% रहा।

हालांकि, ग्रॉस एनपीए (GNPA) मार्च के अंत के 3.49% से बढ़कर 3.76% हो गया। वहीं, नेट एनपीए 1.29% से घटकर 1.23% पर आ गया। कंपनी के मुताबिक, यह बेहतर जोखिम प्रबंधन और मॉनिटरिंग सिस्टम का नतीजा है।

IREDA के शेयर

नतीजों से पहले सोमवार को IREDA का शेयर 2.83% की बढ़त के साथ ₹122.98 पर बंद हुआ। 1 साल में स्टॉक 16.92% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 33.03 हजार करोड़ रुपये है।

LIC OFS: बीमा कंपनी में 6.5% हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर का तय

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Q1 Results: घाटे से मुनाफे में लौटी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी, रेवेन्यू भी डबल; शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Clean Max Enviro Energy Solutions ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 107% बढ़कर ₹832 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह ₹402.3 करोड़ था। कंपनी इस तिमाही में घाटे से निकलकर ₹55 करोड़ के मुनाफे में आ गई। पिछले साल इसी अवधि में उसे ₹16.6 करोड़ का घाटा हुआ था।

Clean Max का एडजस्टेड EBITDA 74% बढ़कर ₹494 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹283.9 करोड़ था। हालांकि, EBITDA मार्जिन 70.6% से घटकर 50% रह गया।

रिकॉर्ड क्षमता जोड़ी

जून तिमाही में Clean Max ने 0.53 गीगावाट (GW) की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता शुरू की। यह कंपनी के इतिहास में एक तिमाही में जोड़ी गई सबसे बड़ी क्षमता है। इसके साथ ही जून के अंत तक कंपनी की कुल कॉन्ट्रैक्टेड रिन्यूएबल पावर सेल्स क्षमता 6 GW पहुंच गई, जो मार्च के अंत में 5.7 GW थी।

वहीं, ऑपरेशनल रिन्यूएबल पावर क्षमता बढ़कर 3,493 मेगावाट (MW) हो गई। पिछली तिमाही में यह 3,088 MW थी। इसमें 2,442 MW सोलर और 646 MW विंड क्षमता शामिल है।

आगे भी मजबूत ग्रोथ की उम्मीद

Clean Max ने FY28 के लिए कम से कम ₹3,000 करोड़ EBITDA का लक्ष्य बरकरार रखा है। वहीं, FY27 में कम से कम 1.5 GW नई रिन्यूएबल क्षमता शुरू करने का टारगेट भी दोहराया है।

कंपनी ने बताया कि वह पहली तिमाही में ही इस लक्ष्य का करीब 40% हासिल कर चुकी है। फिलहाल 2.6 GW की कॉन्ट्रैक्टेड क्षमता पर काम चल रहा है।

Data और AI सेक्टर पर बड़ा दांव

Clean Max के मुताबिक, भारत के कमर्शियल और इंडस्ट्रियल (C&I) नॉन-डेटा सेंटर रिन्यूएबल एनर्जी बाजार में उसकी करीब 14% हिस्सेदारी है। वहीं, उसकी कुल कॉन्ट्रैक्टेड क्षमता का 42% यानी 2.5 GW हिस्सा Data और AI ग्राहकों से जुड़ा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में यही उसकी ग्रोथ का बड़ा आधार बनेगा।

Clean Max के शेयरों का हाल

Clean Max Enviro Energy Solutions का शेयर शुक्रवार को को NSE पर 2.48% की बढ़त के साथ ₹1,341.40 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसका रिटर्न 54.63% रहा है। कंपनी का मार्केट कैप 15.73 हजार करोड़ रुपये है। यह कंपनी इसी साल मार्च में मार्केट में लिस्ट हुई थी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Waaree Energies Q1 Results: सोलर कंपनी को ₹850 करोड़ का मुनाफा, अमेरिका में मिली बड़ी राहत

Waaree Energies Q1 Results: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी वारी एनर्जीज ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 850 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 745 करोड़ रुपये था। वहीं, मार्च तिमाही में कंपनी ने 773 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। इस तरह मुनाफा सालाना आधार पर 14.09% और तिमाही आधार पर 9.96% बढ़ा।

रेवेन्यू में 79% की बढ़ोतरी

जून तिमाही में वारी एनर्जीज का ऑपरेशन से रेवेन्यू 7,932 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 4,426 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में भी कंपनी का रेवेन्यू 4,426 करोड़ रुपये रहा था। इस तरह रेवेन्यू में सालाना और तिमाही, दोनों आधार पर करीब 79% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

जून तिमाही में कंपनी का EBITDA बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही में यह 997 करोड़ रुपये था। यानी तिमाही आधार पर इसमें 44.4% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.2% रह गया। मार्च तिमाही में यह 22.5% था।

अमेरिका से मिला बड़ा फायदा

वारी एनर्जीज ने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद उसे बड़ा फायदा मिला है। कोर्ट ने एक्सपोर्टर्स पर लगाए गए रेसिप्रोकल ड्यूटी को गैरकानूनी करार दिया था।

इसके बाद अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने रिफंड क्लेम स्वीकार किए। इसी के आधार पर वारी एनर्जीज ने 349.18 करोड़ रुपये को अन्य ऑपरेटिंग रेवेन्यू के तौर पर दर्ज किया। इसके अलावा, कंपनी ने 25.13 करोड़ रुपये को एसेट्स और इन्वेंट्री की लागत में कमी के रूप में भी दर्ज किया।

वारी एनर्जीज के शेयरों का हाल

वारी एनर्जीज का शेयर बुधवार को 1.59% की बढ़त के साथ 2,738 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने से स्टॉक लगभग फ्लैट है। वहीं, 1 साल में इसने 14.06% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 78.71 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Tata Power Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹1401 करोड़ मुनाफा, शेयरों में दिख सकती है हलचल

Tata Power Q1 Results: टाटा पावर ने जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 11% बढ़कर ₹1,401 करोड़ रहा। CNBC-TV18 के पोल में इसका अनुमान ₹1,185 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 5.6% बढ़कर ₹19,051 करोड़ पहुंच गया। यह भी अनुमान ₹18,657 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA ₹4,013 करोड़ रहा। यह भी अनुमान से बेहतर है। हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन पिछले साल के 23% से घटकर 21.07% रह गया।

रिन्यूएबल एनर्जी सबसे बड़ा सहारा

टाटा पावर ने कहा कि इस तिमाही में उसकी ग्रोथ का सबसे बड़ा आधार रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और जनरेशन कारोबार रहे। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल नई क्षमता में 86% हिस्सेदारी क्लीन एनर्जी की रही। इसी दौरान देश में बिजली की मांग भी सालाना आधार पर 8.5% बढ़ी।

कंपनी ने इस तिमाही में ₹5,375 करोड़ का पूंजीगत निवेश (Capex) किया। यह अब तक का उसका सबसे बड़ा तिमाही निवेश है।

रूफटॉप सोलर में शानदार प्रदर्शन

रूफटॉप सोलर कारोबार ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी ने तिमाही के दौरान 371 MWp रूफटॉप सोलर इंस्टॉल किए। यह पिछले साल से 37% ज्यादा है। वहीं, सार्वजनिक और बस ईवी चार्जिंग नेटवर्क बढ़कर 7,200 से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट तक पहुंच गया।

सोलर मैन्युफैक्चरिंग कारोबार भी दमदार रहा। कंपनी ने रिकॉर्ड 1,001 MW सोलर मॉड्यूल और 862 MW सोलर सेल का उत्पादन किया।

इस कारोबार का रेवेन्यू 53% बढ़कर ₹2,462 करोड़ पहुंच गया। EBITDA 113% उछलकर ₹626 करोड़ रहा। वहीं, PAT 287% बढ़कर ₹371 करोड़ हो गया। कंपनी ने बताया कि लागत कम होने और बिक्री के बेहतर मिश्रण से मुनाफे में तेज बढ़ोतरी हुई।

दूसरे कारोबारों से भी मिला सहारा

जनरेशन और कोल कारोबार को मुंबई प्लांट के बेहतर प्रदर्शन, मुंद्रा पावर से अतिरिक्त आय और हल्दिया प्लांट में बेहतर मार्जिन का फायदा मिला। इस क्लस्टर का मुनाफा 27% बढ़ा।

ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार में भी बेहतर रिटर्न और नई परियोजनाओं से आय बढ़ी। हालांकि, राजस्थान और गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन पर कुछ असर पड़ा। इसके बावजूद रूफटॉप सोलर और मैन्युफैक्चरिंग कारोबार ने इसकी भरपाई कर दी।

टाटा पावर का शेयर नतीजों से पहले सोमवार को 1.23% चढ़कर ₹379 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में इसने 8.99% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q1 Results: घाटे से ₹86 करोड़ के मुनाफे में लौटी सोलर कंपनी, शेयरों पर रहेगी नजर

Q1 Results: सोलर ग्लास बनाने वाली कंपनी Borosil Renewables ने जून तिमाही (Q1FY27) में शानदार वापसी की है। कंपनी का शुद्ध मुनाफा ₹86.8 करोड़ रहा। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी को ₹166.5 करोड़ का घाटा हुआ था।

रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन मजबूत

जून तिमाही में बोरोसिल रिन्यूएबल्स का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 17.1% बढ़कर ₹405.7 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹346.6 करोड़ था। वहीं, EBITDA बढ़कर ₹127.2 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹63.1 करोड़ था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 18.2% से बढ़कर 31.3% हो गया। इससे पता चलता है कि कंपनी की कमाई और लागत नियंत्रण दोनों में सुधार हुआ है।

आगे क्या है कंपनी का प्लान?

बोरोसिल रिन्यूएबल्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन प्रदीप कुमार खेरुका ने कहा है कि FY28 तक इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 60% बढ़ाने का लक्ष्य है।

उनके मुताबिक, नई क्षमता इस साल शुरू होने की उम्मीद है। FY27 में करीब 8% वॉल्यूम ग्रोथ और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के दम पर प्रदर्शन में और सुधार की उम्मीद है।

बोरोसिल का मुनाफा कैसे बढ़ा?

हाल में सरकार ने चीन और वियतनाम से आने वाले सस्ते सोलर ग्लास पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है।

इससे Borosil Renewables जैसी घरेलू कंपनियों को सस्ते आयात से मुकाबले में राहत मिली है। साथ ही, बेहतर प्राइसिंग और मार्जिन का भी फायदा मिला है।

बोरोसिल के शेयरों का हाल

जून तिमाही के नतीजों से पहले 16 जुलाई को Borosil Renewables का शेयर 0.44% गिरकर ₹617.80 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में कंपनी ने 14.29% का रिटर्न दिया है। इसका मार्केट कैप 8.59 हजार करोड़ रुपये है।

बोरोसिल का बिजनेस क्या है

Borosil Renewables भारत की प्रमुख सोलर ग्लास निर्माता कंपनी है। कंपनी सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाला लो-आयरन टेक्सचर्ड ग्लास बनाती है। इसके उत्पाद सोलर मॉड्यूल निर्माताओं को सप्लाई किए जाते हैं। कंपनी का कारोबार भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फैला हुआ है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।