रेवंत ने कृषि के लिए 20 दिनों तक बिना रुकावट बिजली आपूर्ति के दिये निर्देश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कम बारिश के मद्देनजर खड़ी फसलों को बचाने के लिए अगले 20 दिनों तक कृषि क्षेत्र को चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही श्री रेड्डी ने इस मामले में लापरवाही बरतने पर ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव और टीजी-जेनको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) सहित वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने की चेतावनी भी दी है।

उन्होंने बुधवार रात यहां कम बारिश, अल नीनो के प्रभाव तथा बिजली और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बार-बार बिजली कटौती को लेकर कड़ी नाराजगी जतायी। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि बार-बार निर्देश दिये जाने के बावजूद स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बिजली की कमी के कारण किसानों की फसलों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को कृषि क्षेत्र में बिजली की अधिक मांग वाले क्षेत्रों की पहचान करने और फसल कटाई पूरी होने तक पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्यों नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने पूछा कि नैनी और महानदी से कोयले की आपूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद यादाद्रि बिजली संयंत्र अपनी स्थापित क्षमता के अनुसार पूरा उत्पादन क्यों नहीं कर रहा है।

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उन्होंने कहा, “मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूं। खड़ी फसलों को बचाने के लिए बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बार-बार निर्देश देने के बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।” उन्होंने कहा, ” मैं ऐसे किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं करूंगा, जिससे जनता को परेशानी हो। लापरवाही बरतने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शूंगा।”

मुख्यमंत्री ने अल नीनो के संभावित प्रभाव को कोविड-19 महामारी के समान एक आपदा बताते हुए कहा कि यदि विभागों ने समय रहते बचाव के उपाय नहीं किए, तो मौजूदा परिस्थितियां बड़े संकट का रूप ले सकती हैं। उन्होंने सभी विभागों को जून तक के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने, अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन करने और सामान्य बारिश बहाल होने तक जनता की परेशानियां कम करने के लिए आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्यभर में पेयजल की कमी को रोकने के लिए पहले से व्यवस्था करने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में निर्माण कार्यों और अन्य उपयुक्त जरूरतों के लिए मलजल शोधन संयंत्रों से शोधित पानी का इस्तेमाल करने को कहा। उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने की तैयारियों के तहत प्रत्येक मंडल में समूह-एक और समूह-दो के अधिकारियों की नियुक्ति की जायेगी। ये अधिकारी बारिश की कमी, बिजली और पेयजल आपूर्ति, फसलों की स्थिति तथा चारे की उपलब्धता पर नजर रखेंगे। उन्होंने कहा कि जमीनी स्थिति की नियमित रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दशहरा और दिवाली के बीच ग्राम सभाएं आयोजित करने तथा सांस्कृतिक दलों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने का भी निर्देश दिया। इन अभियानों के जरिए अल नीनो के संभावित प्रभावों की जानकारी देने के साथ-साथ पानी और बिजली की बचत को बढ़ावा दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि सामान्य बारिश बहाल होने तक सभी विभाग सतर्क रहें और लोगों की परेशानियां कम से कम रखने के लिए पहले से ही आवश्यक कदम उठायें।

Pic Credit : UNI

टाटा की कंपनी की फ्लोटिंग सोलर सेगमेंट में एंट्री, नॉर्वे की कंपनी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में करेगी टेस्टिंग

Tata Power Floating Solar: टाटा पावर ने नॉर्वे की रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी कंपनी ओशन सन के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां भारत में फ्लोटिंग सोलर टेक्नोलॉजी का टेस्ट करेंगी।

इसके लिए महाराष्ट्र के मुलशी जलाशय में करीब 300 kWp का पायलट प्रोजेक्ट लगाया जाएगा। यह जलाशय टाटा पावर का है।

फ्लोटिंग सोलर क्या होता है

फ्लोटिंग सोलर यानी पानी की सतह पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल होते हैं। इसमें जमीन पर पैनल लगाने के बजाय किसी जलाशय, झील या तालाब की सतह पर पैनल लगाए जाते हैं।

इससे जमीन की जरूरत कम होती है। और खाली पड़ी पानी की सतह का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है।

पायलट प्रोजेक्ट में क्या जांच की जाएगी?

इस पायलट में टेक्नोलॉजी की परफॉर्मेंस देखी जाएगी। साथ ही इसकी भरोसेमंद क्षमता और लागत भी जांची जाएगी। कंपनियां यह भी देखेंगी कि भारत में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। इसके लिए इसकी तुलना मौजूदा फ्लोटिंग सोलर सिस्टम से की जाएगी।

तुलना में बिजली उत्पादन, क्षमता का इस्तेमाल और इंस्टॉलेशन का समय देखा जाएगा। ऑपरेशन और मेंटेनेंस की जरूरत, लागत और पूरे प्रोजेक्ट की कारोबारी व्यवहार्यता भी जांची जाएगी।

बाकी फ्लोटिंग सोलर से अलग कैसे?

आमतौर पर फ्लोटिंग सोलर सिस्टम में पैनल को पानी पर तैराने के लिए पॉन्टून का इस्तेमाल होता है। कई पॉन्टून को आपस में जोड़कर एक स्ट्रक्चर बनाया जाता है। ओशन सन की टेक्नोलॉजी इससे अलग है। इसमें सोलर पैनल एक पतली हाइड्रो-इलास्टिक मेम्ब्रेन पर लगाए जाते हैं। यह मेम्ब्रेन सीधे पानी की सतह पर तैरती है।

पायलट से मिलने वाले डेटा से इस टेक्नोलॉजी की असली क्षमता समझने में मदद मिलेगी। इसके बाद भारत में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की संभावना देखी जाएगी।

भारत में 102 GW से ज्यादा क्षमता

टाटा पावर के मुताबिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी के अनुमान के अनुसार भारत में फ्लोटिंग सोलर की क्षमता 102 GWp से ज्यादा है।

टाटा पावर के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर सिन्हा ने कहा कि इनोवेशन कंपनी के लिए काफी अहम है। कंपनी क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन को तेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ओशन सन के साथ साझेदारी से ग्लोबल टेक्नोलॉजी को भारत में लाकर उसकी वास्तविक परिस्थितियों में जांचने का मौका मिलेगा।

इंडिया-EFTA समिट में हुआ समझौता

टाटा पावर और ओशन सन के बीच समझौता दूसरे इंडिया-ईएफटीए प्रॉस्पेरिटी समिट के दौरान हुआ। इसमें भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

टाटा पावर का शेयर 7 अक्टूबर को 344.80 रुपये पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले इसमें 1.95% की गिरावट रही।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT का बजाज ट्यूबलर के साथ MOU, 20000 MT TMT बार खरीदने का प्रस्ताव

TMT स्टील बार कंपनी Rhetan TMT ने महाराष्ट्र की Bajaj Tubular Products के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) साइन किया है। इसके तहत 24 महीने में करीब 20,000 मीट्रिक टन TMT बार की खरीद का प्रस्ताव है। कंपनी ने इस कारोबार की संभावित वैल्यू ₹250-300 करोड़ आंकी है।

20,000 MT TMT बार की खरीद

MOU के तहत Bajaj Tubular Products ने अगले 24 महीनों में Rhetan TMT से करीब 20,000 MT TMT बार खरीदने की इच्छा जताई है। हालांकि, यह कोई पक्का ऑर्डर नहीं है। असल खरीद अलग-अलग ऑर्डर के जरिए होगी। यह मात्रा प्रोजेक्ट की जरूरत, प्रोडक्ट की उपलब्धता और सप्लाई शेड्यूल के आधार पर बदल सकती है।

₹250-300 करोड़ का कमर्शियल पोटेंशियल

Rhetan TMT के मैनेजमेंट के मुताबिक, इस रिश्ते से 24 महीनों में करीब ₹250-300 करोड़ का कमर्शियल पोटेंशियल बन सकता है। यह अनुमान संभावित प्रोडक्ट मिक्स, ऑर्डर की फ्रीक्वेंसी और मौजूदा व अनुमानित मार्केट रेट को ध्यान में रखकर लगाया गया है। कंपनी ने साफ किया है कि यह पक्का ऑर्डर या तय रेवेन्यू नहीं है।

कंपनी को क्या फायदा होगा?

इस MOU से Rhetan TMT को Bajaj Tubular Products के साथ लंबे समय का कारोबारी रिश्ता बनाने का मौका मिलेगा। अगर प्रस्तावित खरीद ऑर्डर में बदलती है, तो इससे कंपनी की बिक्री मात्रा बढ़ सकती है। साथ ही, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का बेहतर इस्तेमाल भी संभव है।

मैनेजिंग डायरेक्टर ने क्या कहा?

Rhetan TMT के मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन ए. शाह ने कहा कि यह MOU कंपनी के कारोबारी संबंधों को बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। उनके मुताबिक, Bajaj Tubular Products के साथ यह समझौता लंबे समय के कमर्शियल रिश्ते और भविष्य में नए कारोबारी अवसर तलाशने का रास्ता खोलता है।

1 MW का सोलर प्रोजेक्ट भी शुरू

Rhetan TMT ने गुजरात के काडी स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में 1 MW के कैप्टिव ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्रोजेक्ट से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। कंपनी के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट उसकी अपनी जरूरतों के लिए रिन्यूएबल बिजली उपलब्ध कराएगा। इससे एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पाकिस्तान ने बांग्लादेश जा रही मदद रोकी:न्यूक्लियर फ्यूल ले जा रही फ्लाइट को एयरस्पेस नहीं दिया, सबसे बड़े बिजली संकट से जूझ रहा देश

पाकिस्तान ने बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं दी। यह उड़ान 24 सितंबर को ढाका पहुंचने वाली थी, लेकिन अब फ्यूल की डिलीवरी टल गई है। यह फ्यूल बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भेजा जा रहा था। इसका इस्तेमाल प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए किया जाना है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई गांवों में रोज 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। फ्यूल समय पर नहीं पहुंचने से बिजली उत्पादन शुरू होने में देरी हो सकती है। इससे देश की ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। आखिरी वक्त में नहीं मिली मंजूरी रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम बांग्लादेश की रूपपुर प्लांट बना रही है और न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई भी वही कर रही है। प्लांट की यूनिट-2 के लिए फ्यूल की पहली खेप लेकर रूसी फ्लाइट को अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रास्ते ढाका पहुंचना था। एयरपोर्ट पर फ्यूल उतारने की सभी तैयारियां पूरी थीं। तभी बांग्लादेशी अधिकारियों को बताया गया कि रूस को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिली है। बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीक मंत्री फकीर महबूब अनाम ने कहा कि पाकिस्तान ने मंजूरी न देने की सही वजह नहीं बताई है। अक्टूबर से दूसरे रास्ते से आएगा फ्यूल द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अब रोसाटॉम ने फ्यूल की डिलीवरी के लिए दूसरा रास्ता तय किया है। सप्लाई अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी। रोसाटॉम ने कहा है कि बाकी फ्यूल दिसंबर तक 7 अलग-अलग कार्गो फ्लाइट्स से बांग्लादेश पहुंचाया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि डिलीवरी में हुई देरी से रूपपुर प्लांट के पूरे शेड्यूल पर असर नहीं पड़ेगा। ढाका में पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इस मामले को तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कत बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को काफी अहमियत देता है और इस घटना को इसी तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश में बन रहा पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश ने अपनी बिजली जरूरत पूरी करने के लिए रूस से 2011 में समझौता किया था। इसके तहत राजधानी ढाका से करीब 160 किलोमीटर दूर पद्मा नदी के किनारे रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने की योजना बनी। यह देश का पहला परमाणु बिजलीघर है। इसे रूस की सरकारी परमाणु एजेंसी रोसाटॉम की अगुवाई में बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की लागत करीब 12.65 अरब डॉलर है। इस प्रोजेक्ट पर 2017 में काम शुरू हुआ था। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर 2026 से बिजली उत्पादन का काम शुरू होगा। 2 साल पहले ही लेट है रूपपुर प्लांट रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई बढ़ाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका काम कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से करीब 2 साल पीछे हो चुका है। अप्रैल में प्लांट की यूनिट-1 में न्यूक्लियर फ्यूल डालने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद अगस्त में प्लांट की अंतिम टेस्टिंग शुरू हुई। अक्टूबर में यूनिट-1 से करीब 300 मेगावाट बिजली ट्रायल के तौर पर नेशनल ग्रिड में भेजने की तैयारी है। दिसंबर में कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर बांग्लादेश न्यूक्लियर पावर पैदा करने वाला दुनिया का 33वां देश बन जाएगा। गैस की कमी और आयात ने बांग्लादेश की परेशानी बढ़ाई बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था लंबे समय से प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत की गैस का एक बड़ा हिस्सा बाहर से महंगे दामों पर खरीदता है। ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। दुनिया की करीब पांचवीं ऊर्जा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके बंद होने से बांग्लादेश जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की परेशानी और बढ़ गई है। इस बिजली संकट का असर बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर भी पड़ा है। गारमेंट, फूड, सिरेमिक और फार्मास्युटिकल कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा है। अस्पतालों में भी बिजली कटौती के दौरान नर्सों को मरीजों की देखभाल के लिए टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा। ऐसे में बांग्लादेश के लिए रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट को जल्द शुरू करना अहम है। इससे देश में बिजली की सप्लाई बढ़ सकती है और बाहर से खरीदी जाने वाली ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सकती है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… PoK के लोग बोले- हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। LoC (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोग इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अदाणी ग्रुप का पश्चिम बंगाल के लिए मास्टरप्लान! 2035 तक ₹1 लाख करोड़ के निवेश का ऐलान, पोर्ट से डेटा सेंटर तक क्या-क्या बनेगा?

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार, 24 सितंबर को कहा कि अदाणी ग्रुप 2035 तक पश्चिम बंगाल में पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, सड़कों और पुलों, ग्रीन सीमेंट और हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश करेगा। ₹1 लाख करोड़ के निवेश के इस रोडमैप में 2035 तक पूरे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स शामिल होंगे।

यह घोषणा गौतम अदाणी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा कोलकाता के न्यू टाउन में ग्रुप के प्रस्तावित 2,000-बेड वाले ‘अदाणी आरोग्य मंदिर’ की आधारशिला रखने के मौके पर की गई। अदाणी फाउंडेशन द्वारा विकसित किए जाने वाले इस हॉस्पिटल प्रोजेक्ट में ₹4,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश होगा।

अपनी निवेश योजना के बारे में बात करते हुए गौतम अदाणी ने कहा, “हम पश्चिम बंगाल को पूर्व में अपनी कर्मभूमि मानते हैं।” उन्होंने ग्रुप के पूर्वी क्षेत्र के कामकाज में राज्य की भूमिका की तुलना गुजरात के मुंद्रा से की, जिसे उन्होंने ग्रुप के बड़े प्रोजेक्ट्स की नींव बताया।

अस्पताल में कैंसर के इलाज की होगी सुविधा

अदाणी आरोग्य मंदिर 51.75 एकड़ में फैला होगा और इसमें 2,000 बिस्तरों वाला मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, एक मेडिकल कॉलेज, एक नर्सिंग कॉलेज और सहयोगी हेल्थकेयर व पैरामेडिकल शिक्षा के संस्थान शामिल होंगे।

इस हेल्थकेयर प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए गौत अदाणी ने कहा, “अडानी आरोग्य मंदिर एक नॉन-प्रॉफिट मेडिकल इंस्टीट्यूट होगा जिसमें 2,000 बिस्तर होंगे। इनमें से 1,000 बिस्तर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए होंगे, जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं।”

अस्पताल के पहले चरण में कैंसर के इलाज पर फोकस किया जाएगा और टर्शियरी और स्पेशलाइज़्ड हेल्थकेयर सर्विस दी जाएंगी। कैंपस में स्टेप-डाउन और ट्रांज़िशनल केयर की सुविधाएं, मरीज़ों के रिश्तेदारों के लिए रहने की जगह और हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स के लिए रिहायशी सुविधाएं भी होंगी।

मेडिकल कॉलेज में हर साल 150 अंडरग्रेजुएट छात्र, 100 से ज़्यादा पोस्टग्रेजुएट छात्र और 40 से ज़्यादा सुपर-स्पेशलिस्ट दाखिला ले सकेंगे। ग्रुप ने कहा कि बड़े हेल्थकेयर इकोसिस्टम से लगभग 10,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।

इस प्रोजेक्ट में जीनोमिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन, बायोमेडिकल इंफॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लिनिकल ट्रायल और बायोमेडिकल साइंस के दूसरे क्षेत्रों से जुड़ी रिसर्च सुविधाएं भी शामिल होंगी।

ग्रुप की योजनाओं में राज्य की भूमिका के बारे में बात करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा, “हम बंगाल को पुनर्निमित करने में आपकी मौजूदगी की उम्मीद करते हैं। इसका अंतिम विज़न सिर्फ़ एक हॉस्पिटल कैंपस नहीं, बल्कि एक पूरी तरह से इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर सिटी बनाना है।”

राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार और दुर्गा पूजा के लिए हुए करार

हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के साथ-साथ, अदाणी ग्रुप ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ दो और समझौते (MoU) किए। एक समझौता राइटर्स बिल्डिंग के जीर्णोद्धार से जुड़ा है, जबकि दूसरा ग्रुप की ‘अदाणी पूजा प्रीव्यू’ पहल के ज़रिए कोलकाता के दुर्गा पूजा इकोसिस्टम को सहयोग देने से संबंधित है। अदाणी ग्रुप ने कुमारतुली घाट के कायाकल्प में सहयोग की भी घोषणा की।

 

 

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ईरान युद्ध से तेल महंगा, दुनियाभर में गुस्सा बढ़ा:बांग्लादेश की फैक्ट्रियों में काम रुका, फिलीपींस में मछुआरों ने नावें रोक दीं

ईरान युद्ध का असर अब पश्चिम एशिया से बाहर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इसका असर हर देश में अलग तरह से दिख रहा है। कहीं पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें हैं, कहीं खाना पकाने की गैस नहीं मिल रही। फिलीपींस में मछुआरे महंगे डीजल के कारण समुद्र में नहीं जा पा रहे हैं। बांग्लादेश में गैस और बिजली की कमी से कपड़ा फैक्ट्रियों का काम प्रभावित हुआ है। श्रीलंका में सरकार इस उलझन में है कि ईंधन की कीमत बढ़ाए या सब्सिडी देकर लोगों को राहत दे। वहीं, सीरिया और ग्वाटेमाला में महंगे ईंधन के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। पुर्तगाल में ड्राइवरों ने धीमी रफ्तार से गाड़ियां चलाकर और लगातार हॉर्न बजाकर विरोध किया। यानी तेल का संकट अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है। इसका असर परिवहन, खेती, मछली पालन, बिजली और उद्योग तक पहुंच रहा है। इंडोनेशिया: पेट्रोल के लिए कतार, गैस की भी कमी इंडोनेशिया के सुलावेसी प्रांत में खाना पकाने वाली गैस की कमी और बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर पेट्रोल की राशनिंग भी शुरू की गई है। पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोग खाली टैंक वाली बाइक को धक्का देकर पंप तक ले जाते नजर आ रहे हैं। ईंधन की राशनिंग के खिलाफ टैक्सी ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। जावा के योग्याकार्ता में छात्रों ने भी बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ विरोध किया। इंडोनेशिया के लिए मुश्किल यह है कि सरकार पहले से ही ईंधन पर सब्सिडी देती है। कच्चे तेल की कीमत अनुमान से ज्यादा बढ़ने पर इस सब्सिडी का खर्च भी बढ़ रहा है। फिलीपींस: डीजल इतना महंगा कि मछुआरों ने नावें रोक दीं मनीला बे के मछुआरे कई हफ्तों की बारिश के बाद समुद्र में लौटने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन महंगे डीजल ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी। बड़ी संख्या में मछुआरे नाव लेकर समुद्र में नहीं गए, क्योंकि उनके पास ईंधन खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। मछुआरा संगठन के नेता फर्नांडो हिकाप ने कहा कि कई लोग दोबारा मछली पकड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन नाव में डालने के लिए ईंधन खरीदना उनके लिए मुश्किल हो गया है। इसका असर सिर्फ मछुआरों की कमाई पर नहीं है। अगर नावें समुद्र में नहीं जाएंगी तो मछली की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। बांग्लादेश: गैस की कमी से कपड़ा उद्योग प्रभावित बांग्लादेश की मुश्किल सीधे उद्योग तक पहुंच गई है। देश अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा पेट्रोलियम आयात करता है और बड़ी मात्रा में तेल मिडिल ईस्ट से आता है। ईंधन और गैस की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर देश के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है। कुछ फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। गाजीपुर के एक कपड़ा कारखाने के अधिकारी ने बताया कि दिन में चार-पांच बार बिजली कट रही है। इसके कारण फैक्ट्रियों में कई घंटे काम रुक जाता है। बांग्लादेश के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि कपड़ा उद्योग देश के बड़े रोजगार और निर्यात क्षेत्रों में शामिल है। बिजली और गैस की कमी लंबे समय तक बनी रही तो उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। श्रीलंका: सरकार के सामने दो रास्ते, दोनों में नुकसान श्रीलंका में हर महीने ईंधन की कीमत तय की जाती है। लेकिन पेट्रोल पंपों को सप्लाई करने वाली कंपनियों ने ईंधन देना सीमित करना शुरू कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा कीमत पर उन्हें नुकसान हो रहा है। अब सरकार के सामने दो रास्ते हैं। वह ईंधन की कीमत बढ़ाए या कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए ज्यादा सब्सिडी दे। कीमत बढ़ाने का मतलब लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल महंगा होना है। इसका असर परिवहन और दूसरी चीजों की कीमत पर पड़ सकता है। वहीं, सब्सिडी बढ़ाने का मतलब सरकारी खर्च बढ़ना है। श्रीलंका पहले से भारी कर्ज के दौर से गुजर रहा है। इसलिए सरकार के लिए लंबे समय तक अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ उठाना आसान नहीं है। इटली: फ्यूल बोनस देने की तैयारी, 11 हजार मिलेंगे इटली में 18 सितंबर से डीजल और महंगा हो सकता है। मेलोनी सरकार ने 17.08 सेंट यानी करीब 19 रुपए प्रति लीटर की टैक्स राहत खत्म कर रही है। इटली में डीजल की कीमत पहले ही 3 साल से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर है। टैक्स राहत हटने के बाद कीमत 2.4 यूरो प्रति लीटर से ऊपर जाने का अनुमान है। ऐसे में 50 लीटर की टंकी भरवाने पर करीब 10 यूरो ज्यादा (1110 रुपए) देने होंगे। इटली सरकार अब सभी लोगों को टैक्स में राहत देने के बजाय जरूरतमंद लोगों को सीधे मदद देने पर विचार कर रही है। इसके तहत 100 यूरो यानी करीब ₹11,100 का फ्यूल बोनस देने का प्रस्ताव है। यह पैसा कर्मचारियों को उनकी सैलरी के साथ दिया जा सकता है। इसमें नौकरीपेशा लोगों के अलावा खुद का काम करने वाले लोगों को भी शामिल करने की बात है। सीरिया: कीमत में 40% तक इजाफा, प्रदर्शन शुरू सीरिया में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 40% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके कुछ ही घंटे बाद कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों ने सड़कें रोकीं और टायर जलाए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए। सरकार का कहना है कि युद्ध के कारण ईंधन महंगा हुआ है और कीमत बढ़ाना मजबूरी है। पुर्तगाल: सड़क पर धीमी गाड़ियां और लगातार हॉर्न पुर्तगाल में ड्राइवरों ने महंगे ईंधन के खिलाफ विरोध का अलग तरीका अपनाया। सोशल मीडिया के जरिए ड्राइवरों ने ‘बुजिनाओ’ नाम से प्रदर्शन शुरू किया। इसमें लोग कारों की रफ्तार बहुत धीमी रखते हैं और लगातार हॉर्न बजाते हैं। पुर्तगाल में डीजल की कीमत 9 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गई है। ऐसे में ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ा है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प:900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने ज्यादा मौतों के डर से सप्लाई रोकी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इजराइल को 2.8 अरब डॉलर यानी करीब ₹26 हजार करोड़ के हथियार देने की तैयारी कर रहा है। इस पैकेज में करीब 40 हजार भारी बम शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत नेपाल को रोज 18 घंटे 654 MW बिजली देगा:यह 28 लाख घरों की जरूरत के बराबर; बाढ़ से नेपाल में बिजली उत्पादन घटा

भारत ने नेपाल को 654 मेगावाट बिजली देने की मंजूरी दी है। भारत के बिजली मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2026 तक रोज 18 घंटे, यानी रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली निर्यात करने की मंजूरी दी है। इतनी बिजली लगातार मिलने पर लगभग 28 लाख घरों की सालभर की बिजली जरूरत पूरी हो सकती है। दरअसल, हाल ही में आई बाढ़ से नेपाल के हाइड्रोपावर ढांचे को काफी नुकसान हुआ है। इससे वहां करीब 550 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता के नुकसान का अनुमान है। नेपाल को अतिरिक्त बिजली की जरूरत पैदा हुई है। नेपाल ने साल 2023-24 में भारत को ज्यादा बिजली बेची थी भारत इससे पहले भी नेपाल को बिजली देता रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 में भारत ने नेपाल को करीब 18ा0 मिलियन यूनिट बिजली दी थी। यह औसतन करीब 206 MW लगातार बिजली के बराबर बैठती है। हालांकि नेपाल सर्दियों के मौसम में भारत से बिजली आयात करता है, लेकिन मानसून के महीनों में वह भारत को भारी मात्रा में बिजली बेचता भी है। वर्ष 2023-24 में नेपाल ने भारत से जितनी बिजली खरीदी, उससे ज्यादा मूल्य की बिजली भारत को बेची थी। लेकिन 26 अगस्त को आई बाढ़ की वजह से नेपाल कम बिजली बना रहा है, जिसके चलते उसकी भारत पर निर्भरता बढ़ी है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल ‘BHISHM Cube-R300’ की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार

गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार

BHISM Cube R 300

गुजरात विधानसभा परिसर में अत्याधुनिक पोर्टेबल इमरजेंसी मेडिकल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया है। यह पोर्टेबल यूनिट 12 मिनट में तैनात होकर 300 मरीजों का इलाज करने में सक्षम है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल सरकार का बड़ा फैसला: मूंगफली, मूंग, उड़द और सोयाबीन की MSP पर खरीद के लिए पंजीकरण

 

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात विधानसभा परिसर में ‘BHISHM Cube-R300’ की विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के मार्गदर्शन में ‘आरोग्य मैत्री पहल’ के तहत यह अत्याधुनिक यूनिट तैयार की गई है, जो आपदा के समय चिकित्सा सेवाओं में क्रांति लाएगी।

महानुभावों की उपस्थिति और डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन

इस भव्य अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया सहित मंत्रिमंडल के सदस्य एवं विधायक विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी महानुभावों ने इस दो दिवसीय प्रदर्शनी के तहत ‘भीष्म क्यूब’ की कार्यप्रणाली को दर्शाने वाली विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी देखी।

 

12 मिनट में तैनाती और 300 मरीजों के इलाज की क्षमता

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि इस पोर्टेबल अस्पताल को महज 12 मिनट से भी कम समय में किसी भी स्थान पर कार्यान्वित किया जा सकता है। इस सिंगल यूनिट द्वारा एक साथ लगभग 300 घायलों को आपातकालीन उपचार दिया जा सकता है। पूरी प्रणाली 72 मॉड्यूलर मिनी-क्यूब्स में विभाजित है, जिसमें प्रत्येक क्यूब का वजन 20 किलोग्राम से कम होने के कारण इसे लाना-ले जाना बेहद आसान है।

 

पूर्णतः अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और परिवहन क्षमता

इस अस्पताल में वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, मिनी-लैब, सर्जिकल उपकरण और ऑक्सीजन आपूर्ति सहित लगभग 400 चिकित्सा सामग्रियां उपलब्ध हैं। जमीन, हवाई या समुद्री मार्ग से कहीं भी भेजी जा सकने वाली यह प्रणाली स्वयं की बिजली उत्पादन क्षमता रखती है और दुर्गम क्षेत्रों में इसे विमान या हेलीकॉप्टर के माध्यम से एयरड्रॉप भी किया जा सकता है।

 

गुजरात के लिए महत्व और वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता

आपदा के जोखिमों और लंबे समुद्री तट वाले गुजरात के लिए इस अस्पताल की तैनाती राज्य की राहत एवं बचाव क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। इससे पहले भारत सरकार द्वारा इन क्यूब्स को यूक्रेन, मालदीव, जमैका और श्रीलंका जैसे देशों में मानवीय सहायता के रूप में भेजा जा चुका है। इस उद्घाटन समारोह में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, GSDMA, SDRF के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

 

हमारे राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मजबूत और त्वरित बनाने वाली इस अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल की पहल वास्तव में सराहनीय है। चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक का यह समन्वय कठिन समय में कई नागरिकों की अमूल्य जान बचाने में मददगार साबित होगा।

 

Adani Power Share: मोतीलाल ओसवाल ने Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की, बुल केस में ₹305 का टारगेट दिया

Adani Power Share: ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अदाणी ग्रुप की पावर कंपनी Adani Power पर कवरेज शुरू करते हुए इसे ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹250 का टारगेट प्राइस रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 20% ज्यादा है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, बुल केस में यह 46.8% तक भी उछल सकता है। गुरुवार को अदाणी पावर 207.50 रुपये पर तकरीबन फ्लैट बंद हुआ। 2026 में अब तक शेयर करीब 40% चढ़ चुका है।

मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी की मजबूत ग्रोथ योजनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। Adani Power FY32 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता 2.3 गुना बढ़ाकर 42 GW करना चाहती है। FY27 में 1.3 GW, FY28 में 1.6 GW और FY29 में 3.2 GW नई क्षमता जोड़ने का अनुमान है।

थर्मल पावर में तगड़ी पकड़

Adani Power भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी है। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी की उत्पादन क्षमता 18 GW थी। भारत की कुल कोयला और लिग्नाइट वाली बिजली क्षमता में कंपनी की हिस्सेदारी 8% है। निजी क्षेत्र में यह हिस्सेदारी करीब 24% है।

कंपनी की 95% ऑपरेशनल क्षमता लंबे और मध्यम अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA से जुड़ी है। कंपनी बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOMs को बिजली बेचती है। साथ ही वह मर्चेंट मार्केट में भी बिजली की बिक्री करती है।

मोतीलाल ओसवाल क्यों है बुलिश?

ब्रोकरेज का मानना है कि Adani Power ने संकट में फंसे कई बिजली प्लांटों का अधिग्रहण कर उन्हें सफलतापूर्वक चलाया है। कंपनी की एक और बड़ी ताकत उसकी पूंजी खर्च रणनीति है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कंपनी ने औसतन ₹3.5 करोड़ प्रति MW की लागत पर बिजली क्षमता का अधिग्रहण किया है। वहीं नया थर्मल पावर प्लांट बनाने में करीब ₹12 करोड़ प्रति MW खर्च आता है। कंपनी के न्यूक्लियर एनर्जी में उतरने की संभावना को भी ब्रोकरेज ने भविष्य के लिए एक अतिरिक्त अवसर माना है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा कैपेक्स साइकिल पूरी होने के बाद कंपनी का EBITDA करीब ₹80,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

बुल केस में ₹305 का टारगेट

अगर बिजली की कीमतें और प्लांट लोड फैक्टर अनुमान से बेहतर रहे, तो मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ₹305 का बुल केस टारगेट रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 46.8% ज्यादा है।

इसके उलट, कमजोर स्थिति में ब्रोकरेज ने ₹140 का बेयर केस टारगेट बताया है। यह पिछले बंद भाव से करीब 32.6% नीचे है।

जोखिम भी कम नहीं

ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की आने वाली थर्मल क्षमता में करीब 44% अभी किसी पावर खरीद समझौते से जुड़ी नहीं है। इससे बिजली की मांग और कीमतों को लेकर जोखिम बना हुआ है।

इसके अलावा, बड़े कैपेक्स, प्रोजेक्ट में देरी, लागत बढ़ने और पर्यावरण नियमों का पालन भी अहम जोखिम हैं। कंपनी को बिजली सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ता है।

फिलहाल Adani Power को कवर करने वाले 10 में से 9 एनालिस्ट्स ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। एक एनालिस्ट ने ‘Hold’ रेटिंग रखी है।

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