भारत से अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश:वीडियो में उम्मीदवार की तारीफ, मुंबई में बैठे शख्स को हर पोस्ट के 15 डॉलर मिले

अमेरिका में चुनाव के दौरान वोटरों को प्रभावित करने के लिए भारत से सोशल मीडिया पर वीडियो फैलाए गए। इन वीडियो में आम लोग सड़कों पर खड़े होकर एक उम्मीदवार की तारीफ करते और महंगाई जैसे मुद्दों पर अपनी राय देते नजर आए। वीडियो ऐसे बनाए गए थे, जैसे लोग अपनी मर्जी से उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हों। लेकिन इन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए पैसे दिए जा रहे थे। मुंबई में बैठा आयुष जैन हर पोस्ट के बदले करीब 15 डॉलर (1400 रुपए) कमा रहा था। गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखने वाले दो रिसर्च ग्रुप्स के मुताबिक, इन वीडियो को पोस्ट करने वाले ज्यादातर अकाउंट भारत से चलाए जा रहे थे। डेमोक्रेट उम्मीदवार के समर्थन में 36 वीडियो पोस्ट किए गए यह मामला अगस्त में मिशिगन राज्य में सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को चुनने से पहले का है। सोशल मीडिया पर कम से कम 36 वीडियो पोस्ट किए गए जिन्हें लाखों बार देखा गया। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर डाले गए इन वीडियो में ज्यादातर सांसद हेली स्टीवंस की तारीफ की गई थी। इनमें लोग महंगाई और रोजी-रोटी जैसे मुद्दों पर बात करते हुए स्टीवंस का समर्थन करते नजर आए। हालांकि, वीडियो बनाने वालों की पहचान सामने नहीं आई है और यह भी साफ नहीं है कि इनके पीछे पैसा किसने लगाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान स्टीवंस को उनके प्रतिद्वंद्वी डॉ. अब्दुल एल-सैयद के खिलाफ जीत दिलाने की कोशिश कर रहे किसी राजनीतिक समूह से जुड़ा हो सकता है। लेकिन इन वीडियो को फैलाने में स्टीवंस के चुनाव अभियान या उनके समर्थक समूहों का हाथ होने का कोई सबूत सामने नहीं आया है। 4 अगस्त को चुनाव में एल-सैयद ने जीत हासिल की। हर 1000 व्यू पर मिलते थे 1 से 5 डॉलर पेंसिल्वेनिया की कंपनी ने आयुष को काम पर रखा था अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य की ‘लुमिना क्लिपर्स’ नाम की एक कंपनी ने आयुष जैन को हायर किया था। यह कंपनी सोशल मीडिया पर बॉट अकाउंट के जरिए पोस्ट की पहुंच बढ़ाने का काम करती है। बॉट ऐसे अकाउंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में पोस्ट और इन्फोर्मेशन फैलाने के लिए किया जा सकता है। इस कंपनी का फोन नंबर UAE का है और इसे पुर्तगाल में रहने वाले आयरलैंड के नागरिक राइस मैके चलाते हैं। मैके ने माना कि उनकी कंपनी ने मिशिगन के इन वीडियो को फैलाने में भूमिका निभाई थी। इसके लिए आयुष जैन और उनके जैसे दर्जनों अन्य लोगों को काम पर रखा गया था। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्हें यह काम किसने दिया था और इसके लिए कितना पैसा खर्च हुआ। 28 अकाउंट ने पैसे लेकर फैलाए वीडियो इस अभियान का सबसे पहले पता ‘एंटीबॉट4नवालनी’ नाम के समूह ने लगाया। समूह ने एक्स पर ऐसे 28 अकाउंट की पहचान की, जो पैसे लेकर वीडियो पोस्ट कर रहे थे। इन पोस्ट को 70 लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद क्लेमसन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर भी ऐसे अकाउंट खोजे। इनमें से कुछ अकाउंट पहले चीन से जुड़े बॉट नेटवर्क के जरिए चलाए गए अभियानों में भी सामने आ चुके थे। रिसर्चर्स के मुताबिक, ये अकाउंट आम तौर पर कार्टून और मनोरंजन से जुड़े वीडियो पोस्ट करते थे लेकिन चुनाव के दौरान अचानक राजनीतिक वीडियो फैलाने लगे। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार के चुनाव के बाद भी इन अकाउंट से राजनीतिक पोस्ट जारी रहीं। इनमें कैलिफोर्निया में गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के समर्थन वाली पोस्ट भी शामिल थीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं:10 में से 9 सर्वे में पीछे, महंगाई-ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपने ही उम्मीदवार दूरी बना रहे अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के साथ क्या किया? जानिए ऐसा वहां क्या हुआ कि बवाल इस हद तक पहुंच गया

Albania Supreme Court Fire: भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से सुलग रहे अल्बानिया में अब गृहयुद्ध जैसे हालात हो गए है। राजधानी तिराना में पिछले कई दिनों से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन इतने हिंसक हो गए कि गुस्साई भीड़ ने सीधे देश के सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों को ही आग के हवाले कर दिया। आखिर क्यों भड़का है यूरोप के इस छोटे से देश में ऐसा जनसैलाब कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जंग छिड़ गई है? आइए आपको बताते हैं इसकी असली वजह।

क्यों भड़का इतना बड़ा बवाल?

अल्बानिया में यह प्रदर्शन ‘फ्लेमिंगो’ नामक नागरिक और छात्र आंदोलन के बैनर तले हो रहा है। हाई स्कूल और यूनिवर्सिटी के छात्र सोशलिस्ट प्रधानमंत्री एडी रामा (Edi Rama) के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर हैं।

यह पूरा विवाद तब और भड़क उठा जब सरकार ने एक ऐसे क्षेत्र में बड़े लक्जरी पर्यटन विकास की अनुमति दे दी, जो फ्लेमिंगो का प्राकृतिक आवास माना जाता है। इस प्रोजेक्ट के तार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर से जुड़े होने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया।

भ्रष्टाचार, शिक्षा और महंगाई की मार

अल्बानिया के युवा देश में बढ़ती बेरोजगारी, चरम पर पहुंच चुके भ्रष्टाचार, और जर्जर होती सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से निराश हैं। जनता का आरोप है कि सरकार आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर रही है।

वैसे प्रधानमंत्री एडी रामा ने इन हिंसक प्रदर्शनों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को बाहरी तत्वों और वामपंथी उग्रवादी समूहों (एंटीफा) द्वारा वैचारिक रूप से कट्टर बनाया गया है।

लगातार छठे दिन भी जारी इस हिंसक संघर्ष ने अल्बानिया की सरकार के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है, और सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस जन-आक्रोश को संभालना बड़ी चुनौती बन गया है।

फ्रांस, इटली और स्पेन में भी भारी हिंसा और आगजनी

वैसे सिर्फ अल्बानिया ही नहीं है जो विरोध प्रदर्शनों की आग में झुलस रहा है। फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल की सड़कों पर भी जनसैलाब उमड़ पड़ा है, जिसने कई प्रमुख यूरोपीय शहरों को रणक्षेत्र में बदल दिया है।

फ्रांस में पिछले तीन हफ्तों से हाई स्कूल के छात्र शिक्षा संसाधनों की कमी के खिलाफ नाकाबंदी कर रहे थे, जो अब व्यापक महंगाई विरोधी आंदोलन बन चुका है। पेरिस, मार्सेली, ल्यों और लिमोगेस में भारी लूटपाट और हिंसा हुई। लिमोगेस में 19वीं सदी के सिटी हॉल में आग लगा दी गई।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ‘जिन्होंने लूटपाट की है और गणतंत्र को गिराने की कोशिश की है, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।’ अब तक 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हिंसा के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराते हुए लिखा, ‘माइग्रेंट्स ने फ्रांस पर कब्जा कर लिया है, उन्हें तुरंत सीमाएं बंद करनी चाहिए!’ वैसे फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस हिंसा में प्रवासियों की भूमिका से इनकार किया है।

स्पेन की राजधानी मैड्रिड के ‘पुएर्ता डेल सोल’ स्क्वायर पर हफ्तों से सैकड़ों तंबू गड़े हुए हैं, जो घरों के आसमान छूते किरायों और बेदखली के खिलाफ विरोध जता रहे हैं। यह विरोध 87 वर्षीय मैरीकार्मेन की बेदखली के बाद अस्पताल में हुई मौत के बाद शुरू हुआ।

स्पेन में न्यूनतम वेतन 1,221 यूरो (~$1,370) है, जबकि 80 वर्ग मीटर के अपार्टमेंट का औसत किराया 1,130 यूरो (~$1,270) है। यानी युवा अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा केवल रहने पर खर्च कर रहे हैं। जनता के दबाव के कारण संसद में हाउसिंग बिल पास न होने पर प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने नवंबर में मध्यावधि चुनाव कराने की घोषणा की है।

इटली में महंगाई दर बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई है। मिलान, ट्यूरिन और बोलोग्ना में हिंसक झड़पें हुईं। मिलान में पुलिस गाड़ियों पर वॉटर कैनन चलाए गए और 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनमें अधिकांश नाबालिग है। अब ’17 अक्टूबर आंदोलन’ ने हर शनिवार स्थायी प्रदर्शन का आह्वान किया है।

वहीं बाल्कन देश सर्बिया में पिछले दो सालों से भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चला रहे छात्र आगामी चुनावों में पूर्व सत्तावादी नेता अलेक्जेंडर वुसिक की वापसी को चुनौती दे रहे हैं।

फ्रांस में महंगाई पर भड़की हिंसा : राष्ट्रपति मैक्रों ने शांति की अपील की

फ्रांस में बढ़ती महंगाई, शिक्षा बजट में कटौती और चरमराती सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ जारी देशव्यापी प्रदर्शनों के दाैरान हिंसक दंगों, लूटपाट की घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ‘शांति और व्यवस्था’ बनाए रखने की अपील की है।

राष्ट्रपति कार्यालय (एलिसी पैलेस) से राष्ट्र के नाम दिए टीवी संबोधन में श्री मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों से स्थिति को और न बिगड़ने देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “हम सभी गुस्सा और शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदर्शनकारियों की ‘जायज मांगों’ और तोड़फोड़ व लूटपाट के जिम्मेदार उपद्रवियों के बीच स्पष्ट फर्क किया जाना चाहिए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को पूरे फ्रांस में 5,50,000 से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। अधिकतर प्रदर्शन हालांकि शांतिपूर्ण रहे, लेकिन रात ढलते ही कई शहरों में हिंसा भड़क उठी। सप्ताहांत के दौरान पुलिस ने 2,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं गृह मंत्रालय ने यह संख्या लगभग 2,400 बताई है।

पेरिस, मार्सिले, ल्योन और लिमोगेस में नकाबपोश समूहों ने दुकानों में तोड़फोड़ की, गाड़ियों में आग लगा दी और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचाया। लिमोगेस में आग लगने के कारण 143 वर्ष पुराने टाउन हॉल का गुंबद ढह गया। रविवार को भी पेरिस के कुछ हिस्सों में झड़पें जारी रहने पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

श्री मैक्रों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसी तबाही को ‘किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता’। उन्होंने वादा किया कि उपद्रवियों को सख्त सजा दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने जनता की शिकायतों के समाधान के लिए इस सप्ताह ठोस उपायों पर बैठकों की प्रतिबद्धता जताई।

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यह विरोध प्रदर्शन सितंबर में पेरिस के उपनगरीय इलाकों के विद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों की हड़ताल से शुरू हुआ था, जो कर्मी बढ़ाने और बेहतर संसाधनों की मांग कर रहे थे। बाद में कक्षाओं में भीड़, कर्मचारियों की कमी, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को लेकर यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया।

वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी द्वारा छात्रा को प्रतिबंधित तरीके से गर्दन से दबोचने की घटना सामने आते ही जन आक्रोश और भड़क गया। पुलिस पर बेतहाशा बल प्रयोग का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में कूद पड़े। इस अशांति ने मैक्रों सरकार को भारी राजनीतिक दबाव में ला खड़ा किया है। विरोधी सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन प्रदर्शन के इतने बड़े पैमाने का अंदाजा लगाने में पूरी तरह नाकाम रहा। स्थिति पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सोमवार को कैबिनेट की आपात बैठक करने वाले थे।

घटनाक्रम पर राजनीतिक नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने वामपंथियों पर जन आक्रोश का फायदा उठाने का आरोप लगाया, वहीं वामपंथी नेता ज्यां-ल्यूक मेलेनचोन ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के अधिकार का बचाव किया। आगे उपद्रव की आशंका के मद्देनजर मार्सिले प्रशासन ने सभाओं पर पाबंदी लगा दी है।

फ्रांस का यह आंदोलन बढ़ती महंगाई, मकानों की किल्लत और बदहाल सार्वजनिक सेवाओं को लेकर पूरे यूरोप में पनप रहे असंतोष का हिस्सा है। बेल्जियम, पुर्तगाल, इटली और अल्बानिया में भी ऐसे ही आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं।

इस स्थिति ने फ्रांस सरकार के लिए कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ प्रदर्शनों के पीछे की बुनियादी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

Pic Credit : UNI

‘दृश्यम’ का मशहूर घर कोई सेट नहीं, जो बना टूरिस्ट स्पॉट, जानें कहां है विजय सालगांवकर की हवेली

अजय देवगन की फिल्म drishyam विजय सालगांवकर का घर कहानी का अहम हिस्सा है। फिल्म में इसी घर से कई बड़े राज जुड़े हैं और कहानी बार-बार यहीं लौटकर आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म में दिखाया गया यह घर असली है? गोवा में मौजूद करीब 100 साल पुरानी इस हवेली को अब लोग ‘दृश्यम मूवी हाउस’ के नाम से जानने लगे हैं।

नॉर्थ गोवा के इस गांव में है Drishyam वाला घर

फिल्म में विजय सालगांवकर अपने परिवार के साथ जिस घर में रहता है, वह नॉर्थ गोवा के उक्कासिम गांव में स्थित है। ‘दृश्यम’ के तीनों हिंदी पार्ट में यह घर नजर आया है। फिल्म की कहानी में इसका खास महत्व है, इसलिए दर्शकों के बीच भी इसे लेकर काफी दिलचस्पी बनी रहती है।

सादगी और पुर्तगाली शैली है इस हवेली की खासियत

यह हवेली किसी आलीशान महल जैसी नहीं है। इसकी पहचान इसकी सादगी, पुराने फर्नीचर, बड़े कमरों और आसपास फैली हरियाली से है। घर की नीली-सफेद दीवारें, लाल छत और मेहराबदार खिड़कियां इसे पुराने गोवा के घरों जैसा लुक देती हैं।

हवेली के अंदर कई हिस्से हैं और इसके आसपास बड़ा बगीचा भी है। घर की सीढ़ियां भी फिल्म के कई सीन याद दिलाती हैं। यही वजह है कि फिल्म के फैंस इस जगह को देखने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

तीनों फिल्मों में बदलता रहा घर का रंग

‘दृश्यम’ की पहली फिल्म में इस घर की दीवारों का रंग हल्का पीला था, जबकि दूसरे और आखिरी पार्ट में इसे नीले रंग में दिखाया गया। घर की बनावट और इसके आसपास का माहौल हालांकि दर्शकों को पहले की तरह ही नजर आता है।

घर के अंदर जाने की अनुमति नहीं

यह हवेली एक निजी प्रॉपर्टी है और इसकी देखभाल के लिए एक केयरटेकर मौजूद है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिसर के अंदर आम लोगों की एंट्री पर रोक है। इसलिए यहां जाने वाले पर्यटकों को घर के बाहर से ही इसे देखना पड़ सकता है।

गोवा में फिल्मी लोकेशन देखने वालों के लिए एक और जगह

गोवा में फिल्मी लोकेशन देखने के शौकीनों के लिए यह घर एक खास आकर्षण बन गया है। इसके अलावा पणजी स्थित गोवा पुलिस मुख्यालय भी ‘दृश्यम’ से जुड़ी चर्चित जगहों में शामिल है। इसकी पीली-सफेद इमारत फिल्म देखने वालों को आसानी से पहचान में आ जाती है।

drishyam की कहानी में अहम भूमिका निभाने वाली यह पुरानी हवेली अब फिल्म के फैंस के लिए भी खास जगह बन चुकी है। गोवा घूमने जाने वाले लोग अपनी यात्रा में इस जगह को शामिल करने के बारे में सोच सकते हैं, हालांकि घर के अंदर जाने की अनुमति मिलने की गारंटी नहीं है।गोवा में मौजूद इस हवेली से जुड़ी जानकारी इंडिया टुडे की रिपोर्ट के आधार पर दी गई है।

 

2026 के साहित्य नोबेल का ऐलान आज:चीन की कैन श्वे सबसे आगे, भारत के अमिताव घोष भी दावेदार; सिर्फ 1 भारतीय के पास यह पुरस्कार

2026 के साहित्य नोबेल पुरस्कार का ऐलान आज किया जाएगा। स्वीडिश अकादमी भारतीय समय के मुताबिक शाम 4:30 बजे विजेता के नाम की घोषणा करेगी। ऐलान से पहले बुकमेकरों के अनुमान में चीन की प्रयोगधर्मी लेखिका कैन श्वे सबसे आगे चल रही हैं। भारत के लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में शामिल है। भारत से अब तक सिर्फ रवींद्रनाथ टैगोर को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें 1913 में यह पुरस्कार दिया गया था। वह नोबेल जीतने वाले पहले एशियाई भी थे। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। पुरस्कार राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर यानी करीब 11.5 करोड़ रुपए है। सपनों जैसी कहानियां लिखती हैं कैन श्वे चीन की 73 साल की लेखिका कैन श्वे इस बार साहित्य के नोबेल की सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। उनका असली नाम डेंग शियाओहुआ है। कैन श्वे की कहानियां आम कहानियों से अलग होती हैं। इनमें सपने जैसे दृश्य होते हैं और कहानी से ज्यादा किरदारों के मन में चल रहे विचारों पर ध्यान दिया जाता है। उनके लेखन की तुलना मशहूर लेखकों फ्रांज काफ्का और जॉर्ज लुइस बोर्खेस से भी की गई है। उनकी चर्चित किताबों में ‘द लास्ट लवर’, ‘लव इन द न्यू मिलेनियम’ और ‘आई लिव इन द स्लम्स’ शामिल हैं। इंटरनेशनल बुकर की शॉर्टलिस्ट में पहुंचे थे अमिताव घोष भारत के लेखक अमिताव घोष की चर्चित किताब ‘सी ऑफ पॉपीज’ 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल हुई थी। यह किताब उनके आइबिस ट्रिलॉजी का पहला हिस्सा है। घोष की किताबों में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे प्रमुखता से दिखाई देते हैं। उनकी एक और चर्चित किताब ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ जलवायु परिवर्तन और इंसानों पर उसके असर के बारे में है। दक्षिण एशियाई मूल के दूसरे चर्चित लेखकों में सलमान रुश्दी, माइकल ओंडाट्जे और मॉरीशस की भारतीय मूल की लेखिका आनंदा देवी शामिल हैं। जापान-ऑस्ट्रेलिया समेत 10 देशों के लेखक भी नोबेल की रेस में जापान के मशहूर लेखक हारुकी मुराकामी लंबे समय से साहित्य के नोबेल के संभावित विजेताओं में शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के जेराल्ड मर्नेन और अमेरिका के थॉमस पिंचन भी प्रमुख नामों में हैं। इसके अलावा मेक्सिको की क्रिस्टीना रिवेरा गार्सा, स्पेन के एनरिक विला-मातास, पुर्तगाल की लिडिया जॉर्ज, रूस की ल्यूडमिला उलित्स्काया, कनाडा की मार्गरेट एटवुड और फ्रांस के मिशेल ह्वेलेबेक के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि, ये आधिकारिक दावेदारों की सूची नहीं है। स्वीडिश अकादमी संभावित विजेताओं की शॉर्टलिस्ट सार्वजनिक नहीं करती। पिछले 10 साल में 4 महिलाओं को मिला साहित्य नोबेल पिछले 10 साल में साहित्य का नोबेल 10 लेखकों को मिला, जिनमें 4 महिलाएं थीं। इनमें 6 ने अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में लिखा, जबकि 6 विजेता यूरोप से रहे। 2024 में दक्षिण कोरिया की हान कांग एशिया से पुरस्कार जीतने वाली लेखिका थीं। इस दौरान दक्षिण एशिया से कोई लेखक नहीं जीता। हर साल स्वीडिश अकादमी नॉमिनेशन मंगाती है। इसमें अकादमी के सदस्य, साहित्य और भाषा के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल विजेता और लेखक संगठनों के प्रमुख नाम भेज सकते हैं। लेखक खुद को नामांकित नहीं कर सकते। नोबेल कमेटी पहले 15 से 20 नाम चुनती है, फिर मई में इन्हें 5 उम्मीदवारों तक सीमित किया जाता है। इसके बाद स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य वोटिंग से विजेता चुनते हैं। 50 साल तक गोपनीय रहता है नॉमिनेशन स्वीडिश अकादमी नोबेल के नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट जारी नहीं करती। नॉमिनेशन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रहती है। इसलिए 2026 में किन लेखकों को नामांकित किया गया, इसकी पूरी जानकारी 2076 में सामने आएगी। नोबेल रिकॉर्ड के मुताबिक, सरवपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आरके नारायण जैसे भारतीय लेखकों को अलग-अलग वर्षों में साहित्य नोबेल के लिए नामांकित किया गया था। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 2026 का केमिस्ट्री नोबेल फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को:अणुओं के मिरर इमेज की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई; दवाएं बनाने में मदद मिली 2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

हरियाणवी युवक की स्पेन में मौत:इकलौता बेटा 11 साल पहले गया था विदेश, परिवार जल्द शादी की तैयारी में था; पिता जर्मनी में

हरियाणा में करनाल के रहने वाले एक युवक की स्पेन में अचानक मौत हो गई। सीने में दर्द होने के बाद उसके साथी उसे अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार को फोन पर उसकी मौत की सूचना मिली। महमल थ्रोटा गांव निवासी रविंद्र (28) इकलौता बेटा था। वह 11 साल पहले स्पेन गया था। वहां उसकी परमानेंट रेजिडेंसी (PR) होने वाली थी। परिवार उसकी शादी के बारे में भी सोच रहा था। रविंद्र के पिता गुरमुख सिंह भी जर्मनी में रहते हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह जर्मनी से स्पेन के लिए रवाना हो गए हैं। 2015 में 12 लाख रुपए खर्च कर विदेश भेजा था गुरमीत सिंह ने बताया कि परिवार ने वर्ष 2015 में करीब 12 लाख रुपए खर्च करके रविंद्र को विदेश भेजा था। वहां कागजी दिक्कतों के कारण उसे पहले पुर्तगाल जाना पड़ा। कुछ दिनों बाद वह स्पेन चला गया। रविंद्र स्पेन में एक रेस्टोरेंट में काम करता था और अपना खर्च चलाता था। उसे वहां किसी तरह की परेशानी नहीं थी। स्पेन में उसके कागज की प्रक्रिया चल रही थी और परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही वह वहां स्थायी हो जाएगा। दोस्तों ने अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया रविंद्र के चाचा गुरमीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को रविंद्र को अचानक सीने में दर्द हुआ था। इसके बाद उसके साथी उसे अस्पताल लेकर गए। वहां डॉक्टरों ने रविंद्र को मृत घोषित कर दिया। शाम करीब 6 बजे रविंद्र के मामा के बेटे का फोन आया। वह भी स्पेन में रविंद्र के पास ही रहता है। उसने परिवार को बताया कि रविंद्र की मौत हार्ट अटैक से हुई। रविंद्र के पिता जर्मनी से स्पेन रवाना चाचा के मुताबिक, रविंद्र के पिता गुरमुख सिंह पिछले कई सालों से जर्मनी में रह रहे हैं। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद वह जर्मनी से स्पेन के लिए रवाना हो गए। रविंद्र के शव को भारत लाने के लिए कागजी कार्रवाई की जा रही है। गांव में रविंद्र की मां और छोटी बहन रहती हैं। जल्द ही रविंद्र की शादी के लिए लड़की देखने की तैयारी थी। बेटे के भविष्य और शादी को लेकर परिवार ने जो उम्मीदें लगा रखी थीं, उसकी अचानक मौत से वे भी टूट गईं। परिवार ने सरकार से शव भारत लाने में मदद मांगी रविंद्र के चाचा गुरमीत सिंह ने सरकार से शव जल्द भारत लाने में मदद करने की अपील की है, ताकि परिवार उसे अंतिम विदाई दे सके। अचानक हुई मौत से परिवार सदमे में है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें :- करनाल के युवक की जर्मनी में संदिग्ध मौत:11 साल पहले रोजगार के लिए गया था; परिजनों को शव भारत आने का इंतजार करनाल के रहने वाले 32 वर्षीय रिंकू की जर्मनी में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। करीब 11 साल पहले बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर विदेश गया रिंकू अब कभी घर नहीं लौटेगा। मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजन शव के भारत पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…

NCERT ने क्लास 9 के लिए मध्यकालीन इतिहास की किताब में बदलाव किया, नई किताब में क्या क्या लिखा गया सब जानिए

NCERT Book Row: राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की क्लास 9 की नई सोशल साइंस की किताब में कहा गया है कि भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। इसमें आगे कहा गया है कि सातवीं सदी से ही कई राजाओं और राजकुमारों ने लड़ाई के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के दूसरे रूपों को रक्षक के तौर पर याद किया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 2’ नाम की यह किताब नए एकेडमिक सेशन के शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार (30 सितंबर) को जारी की गई। इस किताब का पहला हिस्सा जून में जारी किया गया था।

‘रसिस्टेंस एंड रीजिलियन्स’ (प्रतिरोध और मजबूती) नाम के चैप्टर में सातवीं सदी से भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए लगातार हमलों का जिक्र है। साथ ही युद्ध में धार्मिक परंपराओं के बारे में भी बताया गया है। किताब में लिखा है, “भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।”

किताब में लिखा है, “भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।”

इसमें कहा गया है, “माना जाता है कि बस्तर के शासक अन्नमराजा को उनकी तलवार माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से मिली थी। जबकि विजयनगर के कुमार कंपन ने मदुरै में सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से मिली तलवार का इस्तेमाल किया था। इसी तरह, पारंपरिक रूप से यह भी माना जाता है कि शिवाजी को देवी तुलजा भवानी से तलवार मिली थी।”

भारतीय शासकों के बारे में क्या कहा गया?

इस अध्याय में बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप ने सातवीं सदी के बाद से क्षेत्रीय विस्तार और धार्मिक उद्देश्य से प्रेरित हमलों का लगातार सामना किया। इसमें यह भी बताया गया है कि भारतीय शासकों और समुदायों ने अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं का विरोध कैसे और कब किया।

एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश सकलानी के अनुसार, “इस (सेकेंडरी) स्तर पर सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई से विश्लेषणात्मक और तार्किक क्षमता विकसित होने, आलोचनात्मक पड़ताल को बढ़ावा मिलने, अलग-अलग संस्कृतियों की समझ बढ़ने और सीखने वालों को नागरिक व सामाजिक जीवन में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ भाग लेने में सक्षम बनाने की उम्मीद की जाती है।”

उन्होंने कहा, “इसी भावना के साथ माध्यमिक स्तर के लिए किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 2’ की रूपरेखा तैयार की गई और इसे विकसित किया गया है।”

अल्प ज्ञात महिला शासकों का उल्लेख

एनसीईआरटी की ओर से तैयार की गई कक्षा-9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी से लेकर उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा तक भारत की अल्प ज्ञात महिला शासकों के बारे में जानकारी दी गई है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार को ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ नामक यह किताब जारी की गई। किताब का पहला भाग इस साल जून में जारी किया गया था।

रानी नायकी देवी को 1178 में माउंट आबू के पास कसरहड़ा में मोहम्मद गोरी को हराने का श्रेय दिया जाता है। सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए एक के बाद एक आक्रमणों का विवरण देने वाले अध्याय प्रतिरोध और दृढ़ता में तुर्क आक्रमणकारियों के खिलाफ हिंदू शाही शासकों, चंदेलों, सोलंकियों और चौहानों के प्रतिरोध का भी उल्लेख किया गया है।

वर्तमान कर्नाटक के उल्लाल की शासक रानी अब्बक्का चौटा (1525 से 1570) ने पुर्तगालियों की नौसेना का डटकर सामना किया था। काकतीय वंश की रानी रुद्रमा देवी का भी इस किताब में उल्लेख किया गया है, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत के समक्ष प्रतिरोध किया था।

चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में क्या है?

पाठ्यपुस्तक में बताई गईं कम चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में मदुरै के मुथु वीरप्पा नायक की कहानी भी शामिल है। माना जाता है कि उन्होंने मुगल दरबार की ओर से भेजी गई चप्पल के सामने झुकने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय उसमें अपना पैर रख दिया था।

किताब में यह भी बताया गया है कि तमिलनाडु के जिंजी (सेनजी) किले को 2025 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। इसके के अनुसार किले पर विजयनगर नायकों, बीजापुर सल्तनत, मुगलों, मराठों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों का शासन रहा।

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रानी दुर्गावती का भी जिक्र

इस किताब में शामिल ऐतिहासिक हस्तियों में रानी दुर्गावती भी थीं, जिन्हें गढ़ा/गोंड राज्य में साहस, नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता वाली शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस किताब में ‘द माइटी मराठा वुमेन’ विषय के तहत ताराबाई और अहिल्याबाई होलकर का भी उल्लेख किया गया है।

‘पहला प्यार दूसरी बार’ का मजेदार इंट्रोडक्शन वीडियो जारी

फिल्म ‘पहला प्यार दूसरी बार’ की नई स्टारकास्ट का मजेदार इंट्रोडक्शन वीडियो जारी किया गया है, जिसमें अनुभव बस्सी, गुरलीन पन्नू और देवेश दीक्षित नए कलाकारों को रोस्ट करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में फिल्म से डेब्यू कर रहे स्पर्श वालिया, अलीशा चोपड़ा, कुणाल वैद, साक्षी वैद्य, तुषार छिब्बर और सरगुन कौर लूथरा से बस्सी, पन्नू और दीक्षित मजेदार और तीखे सवाल करते हुए उनकी टांग खींचते नजर आते हैं। वीडियो में ‘पहला प्यार दूसरी बार’ को लेकर ‘प्यार का पंचनामा 3’ जैसे सवालों के जरिए भी खूब मस्ती की गई है।

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ट्रेलर से पहले जारी इस वीडियो में छह नए कलाकारों की युवा ऊर्जा और मस्ती भरी बातचीत देखने को मिलती है। फिल्म का ट्रेलर 21 सितंबर को रिलीज होगा।

‘पहला प्यार दूसरी बार’ को लव फिल्म्स प्रस्तुत कर रहा है। अनुज सैनी निर्देशित इस फिल्म के निर्माता लव रंजन और अंकुर गर्ग हैं। फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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क्रिस्टियानो रोनाल्डो पुर्तगाल के साथ बने रहेंगे

स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो के संन्यास की अटकलों के बीच पुर्तगाल के नए कोच जॉर्ज जीसस ने उन्हें आगामी नेशंस लीग मैचों के लिए 25 सदस्यीय टीम शामिल किया। 41 वर्षीय रोनाल्डो ने कहा कि इस गर्मी में हुआ विश्व कप उनका आखिरी विश्वकप था, लेकिन इस वैश्विक स्टार ने अभी तक यह नहीं बताया है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से कब संन्यास लेने की योजना बना रहे हैं। 2028 में होने वाली अगली प्रमुख टूर्नामेंट, यूरोपीय चैंपियनशिप के समय तक वह 43 वर्ष के हो जाएंगे।

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पुर्तगाल के विश्व कप के राउंड ऑफ 16 में स्पेन से 1-0 से हारने के बाद स्पेन के रॉबर्टो मार्टिनेज की जगह जीसस को कोच नियुक्त किया गया था। जीसस ने इससे पहले सऊदी अरब में रोनाल्डो के क्लब अल-नस्र में कोचिंग की थी, जहां उन्होंने पिछले सीज़न में साथ मिलकर लीग जीती थी।

रोनाल्डो की भूमिका के बारे में जीसस ने कहा, “बुलाए गए सभी खिलाड़ी मेरे लिए उपलब्ध हैं। अगर वह अच्छा प्रदर्शन करता है, तो वह खेलता है। अगर वह अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है, तो वह नहीं खेलता है। मैं सबके साथ ऐसा ही व्यवहार करता हूं।

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ईरान युद्ध से तेल महंगा, दुनियाभर में गुस्सा बढ़ा:बांग्लादेश की फैक्ट्रियों में काम रुका, फिलीपींस में मछुआरों ने नावें रोक दीं

ईरान युद्ध का असर अब पश्चिम एशिया से बाहर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इसका असर हर देश में अलग तरह से दिख रहा है। कहीं पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें हैं, कहीं खाना पकाने की गैस नहीं मिल रही। फिलीपींस में मछुआरे महंगे डीजल के कारण समुद्र में नहीं जा पा रहे हैं। बांग्लादेश में गैस और बिजली की कमी से कपड़ा फैक्ट्रियों का काम प्रभावित हुआ है। श्रीलंका में सरकार इस उलझन में है कि ईंधन की कीमत बढ़ाए या सब्सिडी देकर लोगों को राहत दे। वहीं, सीरिया और ग्वाटेमाला में महंगे ईंधन के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। पुर्तगाल में ड्राइवरों ने धीमी रफ्तार से गाड़ियां चलाकर और लगातार हॉर्न बजाकर विरोध किया। यानी तेल का संकट अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है। इसका असर परिवहन, खेती, मछली पालन, बिजली और उद्योग तक पहुंच रहा है। इंडोनेशिया: पेट्रोल के लिए कतार, गैस की भी कमी इंडोनेशिया के सुलावेसी प्रांत में खाना पकाने वाली गैस की कमी और बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर पेट्रोल की राशनिंग भी शुरू की गई है। पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोग खाली टैंक वाली बाइक को धक्का देकर पंप तक ले जाते नजर आ रहे हैं। ईंधन की राशनिंग के खिलाफ टैक्सी ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। जावा के योग्याकार्ता में छात्रों ने भी बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ विरोध किया। इंडोनेशिया के लिए मुश्किल यह है कि सरकार पहले से ही ईंधन पर सब्सिडी देती है। कच्चे तेल की कीमत अनुमान से ज्यादा बढ़ने पर इस सब्सिडी का खर्च भी बढ़ रहा है। फिलीपींस: डीजल इतना महंगा कि मछुआरों ने नावें रोक दीं मनीला बे के मछुआरे कई हफ्तों की बारिश के बाद समुद्र में लौटने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन महंगे डीजल ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी। बड़ी संख्या में मछुआरे नाव लेकर समुद्र में नहीं गए, क्योंकि उनके पास ईंधन खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। मछुआरा संगठन के नेता फर्नांडो हिकाप ने कहा कि कई लोग दोबारा मछली पकड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन नाव में डालने के लिए ईंधन खरीदना उनके लिए मुश्किल हो गया है। इसका असर सिर्फ मछुआरों की कमाई पर नहीं है। अगर नावें समुद्र में नहीं जाएंगी तो मछली की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। बांग्लादेश: गैस की कमी से कपड़ा उद्योग प्रभावित बांग्लादेश की मुश्किल सीधे उद्योग तक पहुंच गई है। देश अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा पेट्रोलियम आयात करता है और बड़ी मात्रा में तेल मिडिल ईस्ट से आता है। ईंधन और गैस की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर देश के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है। कुछ फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। गाजीपुर के एक कपड़ा कारखाने के अधिकारी ने बताया कि दिन में चार-पांच बार बिजली कट रही है। इसके कारण फैक्ट्रियों में कई घंटे काम रुक जाता है। बांग्लादेश के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि कपड़ा उद्योग देश के बड़े रोजगार और निर्यात क्षेत्रों में शामिल है। बिजली और गैस की कमी लंबे समय तक बनी रही तो उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। श्रीलंका: सरकार के सामने दो रास्ते, दोनों में नुकसान श्रीलंका में हर महीने ईंधन की कीमत तय की जाती है। लेकिन पेट्रोल पंपों को सप्लाई करने वाली कंपनियों ने ईंधन देना सीमित करना शुरू कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा कीमत पर उन्हें नुकसान हो रहा है। अब सरकार के सामने दो रास्ते हैं। वह ईंधन की कीमत बढ़ाए या कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए ज्यादा सब्सिडी दे। कीमत बढ़ाने का मतलब लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल महंगा होना है। इसका असर परिवहन और दूसरी चीजों की कीमत पर पड़ सकता है। वहीं, सब्सिडी बढ़ाने का मतलब सरकारी खर्च बढ़ना है। श्रीलंका पहले से भारी कर्ज के दौर से गुजर रहा है। इसलिए सरकार के लिए लंबे समय तक अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ उठाना आसान नहीं है। इटली: फ्यूल बोनस देने की तैयारी, 11 हजार मिलेंगे इटली में 18 सितंबर से डीजल और महंगा हो सकता है। मेलोनी सरकार ने 17.08 सेंट यानी करीब 19 रुपए प्रति लीटर की टैक्स राहत खत्म कर रही है। इटली में डीजल की कीमत पहले ही 3 साल से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर है। टैक्स राहत हटने के बाद कीमत 2.4 यूरो प्रति लीटर से ऊपर जाने का अनुमान है। ऐसे में 50 लीटर की टंकी भरवाने पर करीब 10 यूरो ज्यादा (1110 रुपए) देने होंगे। इटली सरकार अब सभी लोगों को टैक्स में राहत देने के बजाय जरूरतमंद लोगों को सीधे मदद देने पर विचार कर रही है। इसके तहत 100 यूरो यानी करीब ₹11,100 का फ्यूल बोनस देने का प्रस्ताव है। यह पैसा कर्मचारियों को उनकी सैलरी के साथ दिया जा सकता है। इसमें नौकरीपेशा लोगों के अलावा खुद का काम करने वाले लोगों को भी शामिल करने की बात है। सीरिया: कीमत में 40% तक इजाफा, प्रदर्शन शुरू सीरिया में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 40% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके कुछ ही घंटे बाद कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों ने सड़कें रोकीं और टायर जलाए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए। सरकार का कहना है कि युद्ध के कारण ईंधन महंगा हुआ है और कीमत बढ़ाना मजबूरी है। पुर्तगाल: सड़क पर धीमी गाड़ियां और लगातार हॉर्न पुर्तगाल में ड्राइवरों ने महंगे ईंधन के खिलाफ विरोध का अलग तरीका अपनाया। सोशल मीडिया के जरिए ड्राइवरों ने ‘बुजिनाओ’ नाम से प्रदर्शन शुरू किया। इसमें लोग कारों की रफ्तार बहुत धीमी रखते हैं और लगातार हॉर्न बजाते हैं। पुर्तगाल में डीजल की कीमत 9 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गई है। ऐसे में ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ा है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प:900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने ज्यादा मौतों के डर से सप्लाई रोकी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इजराइल को 2.8 अरब डॉलर यानी करीब ₹26 हजार करोड़ के हथियार देने की तैयारी कर रहा है। इस पैकेज में करीब 40 हजार भारी बम शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…