NCERT ने क्लास 9 के लिए मध्यकालीन इतिहास की किताब में बदलाव किया, नई किताब में क्या क्या लिखा गया सब जानिए

NCERT Book Row: राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की क्लास 9 की नई सोशल साइंस की किताब में कहा गया है कि भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। इसमें आगे कहा गया है कि सातवीं सदी से ही कई राजाओं और राजकुमारों ने लड़ाई के समय काली, दुर्गा, भवानी और शक्ति के दूसरे रूपों को रक्षक के तौर पर याद किया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 2’ नाम की यह किताब नए एकेडमिक सेशन के शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार (30 सितंबर) को जारी की गई। इस किताब का पहला हिस्सा जून में जारी किया गया था।

‘रसिस्टेंस एंड रीजिलियन्स’ (प्रतिरोध और मजबूती) नाम के चैप्टर में सातवीं सदी से भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए लगातार हमलों का जिक्र है। साथ ही युद्ध में धार्मिक परंपराओं के बारे में भी बताया गया है। किताब में लिखा है, “भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।”

किताब में लिखा है, “भारत में देवियों की पूजा एक पुरानी परंपरा रही है। काली, दुर्गा और भवानी जैसी देवियों की पूजा को एक पुरानी प्रथा बताया गया है, जिसमें शासक लड़ाई के समय शक्ति के रूपों को रक्षक के तौर पर याद करते थे।”

इसमें कहा गया है, “माना जाता है कि बस्तर के शासक अन्नमराजा को उनकी तलवार माणिक्यदेवी (दंतेश्वरी) से मिली थी। जबकि विजयनगर के कुमार कंपन ने मदुरै में सल्तनत की सेनाओं के खिलाफ देवी से मिली तलवार का इस्तेमाल किया था। इसी तरह, पारंपरिक रूप से यह भी माना जाता है कि शिवाजी को देवी तुलजा भवानी से तलवार मिली थी।”

भारतीय शासकों के बारे में क्या कहा गया?

इस अध्याय में बताया गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप ने सातवीं सदी के बाद से क्षेत्रीय विस्तार और धार्मिक उद्देश्य से प्रेरित हमलों का लगातार सामना किया। इसमें यह भी बताया गया है कि भारतीय शासकों और समुदायों ने अरब, तुर्की, मुगल और यूरोपीय सेनाओं का विरोध कैसे और कब किया।

एनसीईआरटी प्रमुख दिनेश सकलानी के अनुसार, “इस (सेकेंडरी) स्तर पर सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई से विश्लेषणात्मक और तार्किक क्षमता विकसित होने, आलोचनात्मक पड़ताल को बढ़ावा मिलने, अलग-अलग संस्कृतियों की समझ बढ़ने और सीखने वालों को नागरिक व सामाजिक जीवन में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ भाग लेने में सक्षम बनाने की उम्मीद की जाती है।”

उन्होंने कहा, “इसी भावना के साथ माध्यमिक स्तर के लिए किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड- पार्ट 2’ की रूपरेखा तैयार की गई और इसे विकसित किया गया है।”

अल्प ज्ञात महिला शासकों का उल्लेख

एनसीईआरटी की ओर से तैयार की गई कक्षा-9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में चालुक्य वंश की रानी नायकी देवी से लेकर उल्लाल की रानी अब्बक्का चौटा तक भारत की अल्प ज्ञात महिला शासकों के बारे में जानकारी दी गई है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह महीने बाद मंगलवार को ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ नामक यह किताब जारी की गई। किताब का पहला भाग इस साल जून में जारी किया गया था।

रानी नायकी देवी को 1178 में माउंट आबू के पास कसरहड़ा में मोहम्मद गोरी को हराने का श्रेय दिया जाता है। सातवीं शताब्दी के बाद भारतीय उपमहाद्वीप पर हुए एक के बाद एक आक्रमणों का विवरण देने वाले अध्याय प्रतिरोध और दृढ़ता में तुर्क आक्रमणकारियों के खिलाफ हिंदू शाही शासकों, चंदेलों, सोलंकियों और चौहानों के प्रतिरोध का भी उल्लेख किया गया है।

वर्तमान कर्नाटक के उल्लाल की शासक रानी अब्बक्का चौटा (1525 से 1570) ने पुर्तगालियों की नौसेना का डटकर सामना किया था। काकतीय वंश की रानी रुद्रमा देवी का भी इस किताब में उल्लेख किया गया है, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत के समक्ष प्रतिरोध किया था।

चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में क्या है?

पाठ्यपुस्तक में बताई गईं कम चर्चित प्रतिरोध गाथाओं में मदुरै के मुथु वीरप्पा नायक की कहानी भी शामिल है। माना जाता है कि उन्होंने मुगल दरबार की ओर से भेजी गई चप्पल के सामने झुकने से इनकार कर दिया था और इसके बजाय उसमें अपना पैर रख दिया था।

किताब में यह भी बताया गया है कि तमिलनाडु के जिंजी (सेनजी) किले को 2025 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। इसके के अनुसार किले पर विजयनगर नायकों, बीजापुर सल्तनत, मुगलों, मराठों, फ्रांसीसियों और अंग्रेजों का शासन रहा।

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रानी दुर्गावती का भी जिक्र

इस किताब में शामिल ऐतिहासिक हस्तियों में रानी दुर्गावती भी थीं, जिन्हें गढ़ा/गोंड राज्य में साहस, नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता वाली शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस किताब में ‘द माइटी मराठा वुमेन’ विषय के तहत ताराबाई और अहिल्याबाई होलकर का भी उल्लेख किया गया है।

15 साल की सिंचना के पास 13.9 लाख रुपये का पोर्टफोलियो, जानें गुल्लक के 10 हजार से कैसे शुरू हुआ निवेश का सफर?

आमतौर पर 15 साल की उम्र में बच्चे स्कूल, दोस्तों और अपनी पसंदीदा चीजों को करने में व्यस्त रहते हैं, लेकिन बेंगलुरु की सिंचना संतोष ने इसी उम्र में एक ऐसी राह चुनी, जो उन्हें बाकी बच्चों से अलग बनाती है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली सिंचना की दिलचस्पी बचपन से ही पैसों की बचत और उसके सही इस्तेमाल को समझने में रही है। एक छोटी-सी गुल्लक से शुरू हुई उनकी बचत की आदत धीरे-धीरे वित्तीय समझ और निवेश की जिज्ञासा में बदल गई। आज वो करीब 13.9 लाख रुपये के निवेश पोर्टफोलियो को संभाल रही हैं।

खास बात ये है कि उनके लिए पैसा सिर्फ बचाने या बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने का माध्यम है। पढ़ाई के साथ वित्तीय दुनिया को समझने और नई चीजें सीखने का उनका यह सफर दिखाता है कि सही मार्गदर्शन और जिज्ञासा के साथ छोटी उम्र में भी बड़े लक्ष्य तय किए जा सकते हैं।

गुल्लक में जमा किए 10 हजार रुपये

RR नगर स्थित स्वर्गरानी स्कूल की छात्रा सिंचना को बचपन से ही पैसे बचाने की आदत थी। 12 साल की उम्र तक उन्होंने अपनी गुल्लक में करीब 10,000 रुपये जमा कर लिए थे। लगातार बढ़ती रकम को देखकर उन्हें समझ आया कि छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी बन सकती है। यही अनुभव उनके लिए वित्तीय समझ की पहली सीढ़ी बना।

टेलीस्कोप खरीदने के लिए खुद जुटाए पैसे

सिंचना की ‘मनी जर्नी’ को एक और अहम मोड़ तब मिला, जब उन्हें बचपन में टेलीस्कोप खरीदना था। उनके पिता संतोष कुमार ने उनसे इसकी कीमत का कुछ हिस्सा खुद जुटाने को कहा। सिंचना ने रिश्तेदारों से बात कर 10,000 रुपये जुटाए, जबकि बाकी 2,000 रुपये माता-पिता ने दिए। इस अनुभव से उन्हें पैसे की कीमत और लक्ष्य के लिए बचत करने की अहमियत समझ आई।

YouTube से सीखी निवेश की बारीकियां

निवेश शुरू करने से पहले पिता ने उन्हें वित्तीय अवधारणाओं को समझने की सलाह दी। इसके बाद सिंचना ने खुद सीखना शुरू किया। उन्होंने YouTube पर पर्सनल फाइनेंस और निवेश से जुड़े वीडियो देखे और Ankur Warikoo, Dave Ramsey, Power of Money, Mint Wealth और Sonia Shenoy जैसे क्रिएटर्स से सीखने की बात कही है। वह छुट्टियों और वीकेंड में इसके लिए समय निकालती थीं।

NISM और SEBI सर्टिफिकेशन भी किए

Moneycontrol से बात करते हुए  सिंचना ने बताया कि उन्होंने आपनी वित्तीय शिक्षा को ऑनलाइन वीडियो तक सीमित नहीं रखा। उनके पास दो NISM और एक SEBI सर्टिफिकेशन हैं। एक NISM परीक्षा में वह पहली कोशिश में सिर्फ एक अंक से चूक गई थीं, लेकिन दोबारा परीक्षा देकर उन्होंने उसे पास किया।

13.9 लाख का पोर्टफोलियो, माता-पिता की निगरानी

इस साल सिंचना ने निवेश को ज्यादा गंभीरता से शुरू किया। परिवार के अनुसार, कुछ ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों से पैसा निकाला गया, जिनसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल रहा था। अब उनका निवेश इक्विटी और म्यूचुअल फंड में है और यह भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फैला हुआ है। करीब सात साल की निवेश अवधि के साथ उनका लक्ष्य भविष्य में मास्टर डिग्री की पढ़ाई का खर्च जुटाना है। निवेश में माता-पिता की निगरानी भी रहती है।

‘GDP’ है सिंचना का निवेश मंत्र

म्यूचुअल फंड को समझने के लिए सिंचना ने ‘GDP’ नाम का अपना फ्रेमवर्क बनाया है Growth, Direct और Passive। वह ग्रोथ पर केंद्रित फंड, कम लागत वाले डायरेक्ट प्लान और इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड को अपने निवेश नजरिए का हिस्सा मानती हैं।

अब बच्चों को सिखाएंगी Financial Literacy

सिंचना की रुचि केवल निवेश तक सीमित नहीं है। 14 साल की उम्र में उन्होंने NCERT के सिलेबस पर आधारित ‘ITIHASA – The Royal Game’ नाम का इतिहास कार्ड गेम बनाया और बेंगलुरु के 36 सरकारी हाई स्कूलों में 170 गेम सेट दान किए।

अब वह बच्चों के लिए एक रणनीति-आधारित वित्तीय कार्ड गेम तैयार कर रही हैं। इसमें बजटिंग, बैंकिंग, ब्याज, महंगाई, जोखिम, बीमा, क्रेडिट, कर्ज और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव जैसी बातें खेल के जरिए सिखाई जाएंगी। उनका लक्ष्य भारत के 10 लाख छात्रों तक वित्तीय साक्षरता को अनुभव आधारित तरीके से पहुंचाना है। गुल्लक में जमा 10 हजार रुपये से शुरू हुआ सिंचना का सफर आज निवेश से आगे बढ़कर दूसरों को पैसों की समझ देने की दिशा में पहुंच चुका है।

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NEET UG 2026 Re-Exam Answer Key Released: 28 जून तक दर्ज करें आंसर की पर आपत्ति, आपका दावा हुआ सही तो वापस होगी ऑब्जेक्शन फीस

NEET UG 2026 Re-Exam Answer Key Released: नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) यूजी 2026 री-एग्जाम देने वाले 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट है। राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 21 जून, 2026 को हुए नीट यूजी 2026 री-एग्जाम की अस्थायी उत्तर कुंजी (Answer Key) आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी है। इसके साथ ही एजेंसी ने परीक्षार्थियों के लिए आंसर की के लिए ऑब्जेक्शन विंडो खोल दी है। री-एग्जाम में शामिल हुए जो कैंडिडेट अब प्रोविजनल आंसर की देख सकते हैं और आधिकारिक पोर्टल के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। कैंडिडेट द्वारा किसी सवाल पर की गई आपत्ति अगर सही पाई जाती है, तो उसके लिए लिया गया शुल्क वापस कर दिया जाएगा।

एनटीए ने आंसर की जारी करने और आपत्ति विंडो खोलने की जानकारी एक नोटिफिकेशन के जरिए दी। एजेंसी की अधिसूचना के मुताबिक, चुनौती विंडो 25 जून से 28 जून, 2026 को रात 11:50 बजे तक खुली रहेगी। अस्थायी उत्तर कुंजी में जिन परीक्षार्थियों कोई गड़बड़ी मिलती है, वे हर सवाल के लिए 200 रुपये की नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस देकर ऑब्जेक्शन दे सकते हैं। परीक्षार्थियों को सवालों पर आपत्ति दर्ज कराते समय उसके समर्थन में जरूरी दस्तावेज दाखिल करने होंगे।

नीट यूजी 2026 आंसर की को कैसे चैलेंज करें?

नीट यूजी 2026 प्रोविजनल आंसर की पर ऑब्जेक्शन उठाने के लिए कैंडिडेट इन स्टेप्स को फॉलो कर सकते हैं:

  • नीट की ऑफिशियल वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जाएं।
  • होमपेज पर, “NEET(UG) – 2026 री-एग्जामिनेशन के लिए आंसर की चैलेंज” लिंक पर क्लिक करें।
  • अपने लॉगिन क्रेडेंशियल जैसे एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड डालें।
  • एनसीईआरटी या स्टैंडर्ड टेक्स्टबुक से सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट या सबूत अपलोड करें।
  • जरूरी फीस भरें और चैलेंज सबमिट करें।

आपत्ति सही होने पर एनटीए लौटाएगा फीस

एनटीए ने चुनौती दिए गए हर सवाल के लिए 200 रुपये की नॉन-रिफंडेबल प्रोसेसिंग फीस तय की है। हालांकि, अगर एक्सपर्ट रिव्यू के बाद चैलेंज सही पाया जाता है, तो उस खास सवाल के लिए दी गई फीस वापस कर दी जाएगी। कैंडिडेट ध्यान दें कि ऑब्जेक्शन सिर्फ एक बार सबमिट किए जा सकते हैं, और फाइनल सबमिशन के बाद कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसलिए, कैंडिडेट को सलाह दी जाती है कि पेमेंट करने से पहले सभी डिटेल्स ध्यान से वेरिफाई कर लें।

रिस्पॉन्स शीट से निकाल सकते हैं अपना स्कोर

प्रोविजनल आंसर की जारी होने के बाद छात्र अपनी रिस्पॉन्स शीट और उत्तर कुंजी का मिलान कर सकते हैं। इससे यह पता लगाया जा सकता है कि कितने प्रश्न सही हुए हैं और अनुमानित स्कोर कितना बन रहा है। हालांकि अंतिम परिणाम केवल एनटीए द्वारा जारी फाइनल आंसर की के आधार पर ही तैयार किया जाएगा।

आपत्तियों की समीक्षा के बाद आएगी फाइनल आंसर की

28 जून तक प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा के बाद एनटीए फाइनल आंसर की जारी करेगा। इसके बाद ही नीट यूजी 2026 री-एग्जाम का अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा। इसलिए जिन उम्मीदवारों को किसी उत्तर पर संदेह है वे समय रहते अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।

Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में पहली बार शामिल हुआ आपातकाल, भारतीय नदियों के नाम भी शामिल

Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।

इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।

स्कूल के सिलेबस में बदलाव

स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”

इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”

जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर

किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”

इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।

‘लोकतंत्र और आप’

इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका

इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।

यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।

भारत की नदियों के नाम भी शामिल

ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।

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इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।