बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

vipashyana dhyan shivir for children's

आध्यात्मिक जीवन की सही उम्र: बचपन

भारत में एक भ्रांति प्रचलित है कि अध्यात्म का मार्ग बुढ़ापे में अपनाया जाना चाहिए। परंतु बुढ़ापे में जब शरीर और इंद्रियां दुर्बल हो जाती हैं, तब साधना कर पाना अत्यंत कठिन होता है। “धर्म तो जीवन जीने की कला है”—इसे बचपन से ही सीखा जाना चाहिए, ताकि संपूर्ण जीवन सुखमय और अर्थपूर्ण बन सके। बचपन में पड़े धर्म के संस्कार मन को वश में करने की विद्या सिखाते हैं, जिससे बच्चों के लिए शील और सदाचार का पालन करना सहज हो जाता है।

 

शिविर का मंगल उद्देश्य

इस बाल शिविर का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को एक ऐसी मानवीय चेतना से समृद्ध करना है, जो पूरे देश और विश्व में सुख-शांति का वातावरण निर्मित कर सके। इतनी छोटी उम्र में ही बच्चों के भीतर धर्म और सद्गुणों के बीज रोपित करने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसी कल्याणकारी लक्ष्य को ध्यान में रखकर आनापान ध्यान बाल शिविरों का आयोजन किया जाता है।

 

बालकों के विकास में लाभ

देश-विदेश में आयोजित आनापान शिविरों में शामिल हुए बच्चों के व्यक्तित्व और व्यवहार में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिला है। इस विधि के नियमित अभ्यास से बच्चों में निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव महसूस किए गए हैं:

 

शैक्षणिक व भावनात्मक विकास:

एकाग्रता, स्मरण शक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि होती है।

नैतिक मूल्य और आत्मविश्वास: नैतिक मूल्यों का विकास होता है तथा खेलकूद व अन्य कलाओं में कुशलता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

 

शिविर संबंधी विवरण और पात्रता

आयोजक: धम्म मालवा विपश्यना केंद्र

शुल्क: यह शिविर पूरी तरह से निःशुल्क आयोजित किया जाता है।

आयु वर्ग: 8 से 13 वर्ष और 13 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए पृथक शिविर।

 

अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए विजिट करें: https://malwa.dhamma.org/