जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

जंतर-मंतर मारपीट मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, पढ़िए क्या था पूरा मामला

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता के साथ कथित मारपीट के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया गया है। स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर किया था। शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधिमंडल ने संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचकर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका भी शामिल थे। 

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क्या था पूरा मामला

खुद को 'हिन्दुत्व एक्टिविस्ट' बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उन्होंने CJP के प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की थी। वायरल वीडियो क्लिप में भारद्वाज कथित तौर पर यह कहते नजर आए कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की 'खोपड़ी फोड़ दी थी' और कथित घटना की गंभीरता के बावजूद जेल जाने से बच गए। CJP ने उस प्रदर्शन का आयोजन किया था, जिसके दौरान कथित मारपीट की घटना हुई थी। संगठन लगातार स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। CJP का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली पुलिस ने खोपड़ी में फ्रैक्चर के दावे को नकारा

विवाद उस समय और बढ़ गया जब गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने कहा कि 38 वर्षीय संजय कुमार को झड़प के दौरान सिर में साधारण चोट लगी थी। पुलिस ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि संजय कुमार की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है।  पुलिस के मुताबिक स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य आरोपी सूरज कुमार को घटनास्थल पर हिरासत में लिया गया था। दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें नोटिस भी जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

 

 

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?

स्वतंत्र भारद्वाज एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन पर जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आ गया जब भारद्वाज से जुड़े एक पॉडकास्ट की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

 

हालांकि, स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय पर हमला करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। भारद्वाज के मुताबिक, उन्हें करीब 10-15 लोगों ने घेर लिया था और उन्हें डर था कि उनके साथ मारपीट या उनकी हत्या तक की जा सकती है। उन्होंने वायरल पॉडकास्ट क्लिप को भी कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किए जाने का दावा किया और कहा कि उनकी राजनीतिक संबद्धता को लेकर लोगों ने उस क्लिप को मजाक या व्यंग्य के तौर पर बनाया था।

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निशु आजाद ने क्या आरोप लगाए?

निशु आजाद ने भारद्वाज के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके समर्थकों ने उन्हें परेशान किया और दुष्कर्म की धमकियां भी दीं। निशु के अनुसार, इन धमकियों को लेकर उन्होंने अलग से FIR भी दर्ज कराई है। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान संजय के साथ गंभीर मारपीट हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी अब तक बाहर क्यों है और पुलिस से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर संजय की खोपड़ी में फ्रैक्चर होने की बात को लेकर गलत सूचना फैलाई गई थी। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में मामला दर्ज किया जा चुका है और आरोपी से पूछताछ भी की गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को अभी कुछ नोटिस दिए जाने बाकी हैं।  जांच पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल करने समेत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मामले को मिला राजनीतिक रंग

निशु आजाद के मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कुछ नेताओं ने निशु के प्रति समर्थन जताया है। इसके बाद जंतर-मंतर की घटना और स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

स्वतंत्र भारद्वाज के वायरल वीडियो पर बवाल, निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर CJP ने घेरा थाना

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जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता पर हुए हमले के मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर आरोपियों की गिरफ्तारी और हत्या की धारा लगाने की मांग की है। ALSO READ: 'डरो मत, मैं साथ हूं': पिता पर हमले के बाद निशु आजाद के समर्थन में आए राहुल गांधी

 

CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हमारी साथी निशु के पिता संजय के साथ मारपीट हुई, उनका सिर फोड़ा गया। खुलेआम ये घटना हुई। लगातार हमारी टीम सौरव और हमारी पूरी टीम दिल्ली पुलिस से मांग करती रही कि इन गुंडों को आप गिरफ्तार करें, इन पर हत्या के प्रयास का चार्ज लगाएं लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रही। 
 

उन्होंने कहा कि अब देश की राजधानी में हालात ऐसे हो गए हैं कि गुंडे ये खुलेआम कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने संजय का सिर फोड़ा, पूरी कोशिश थी उन्हें जान से मारने की। खुद कबूल कर रहे हैं कि उस पर हत्या के प्रयास का केस बनता था लेकिन दिल्ली पुलिस ने कपिल मिश्रा और भाजपा के गुंडों की शय पर उस व्यक्ति के साथ कुछ नहीं किया।

रांका ने कहा कि आज देश के लिए, हमारे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक दिन है जहां पर खुलेआम गुंडागर्दी करने वाले लोग दावा करते हैं कि उन्होंने किसी को जान से मारने का प्रयास किया लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमारी पूरी टीम निशु और उनके पिता, संजय के साथ पहले दिन से खड़ी रही है। हम दिल्ली पुलिस से मांग करेंगे कि इन गुंडों को, जिन्होंने खुद की पहचान बताई है, उन्हें गिरफ्तार किया जाए, उन पर हत्या के प्रयास की धाराएं लगाई जाएं, जितनी भी संगीन धाराएं उन पर लगती हैं, लगाई जाएं।

 

गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर निशु आजाद के पिता संजय कुमार पर हुए हमले का मामला फिर से सुर्खियों में है। 23 जून 2026 को जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हाथापाई में गाजियाबाद के रहने वाले संजय कुमार के सिर में चोट लग गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल पॉडकास्ट क्लिप में स्वतंत्र भारद्वाज ने यह दावा किया कि उसने ही निशु के पिता संजय कुमार का सिर फोड़ा था और राजनीतिक रसूख के चलते वह बिना किसी बड़ी कानूनी कार्रवाई के बच निकला।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दी सफाई

जंतर-मंतर पर CJP के विरोध-प्रदर्शन के दौरान CJP कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर हमले को लेकर एक पॉडकास्ट के दौरान किए दावे पर कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा कि लोग जिसे हमला कह रहे हैं, वह असल में आत्मरक्षा था। अगर मैंने आत्मरक्षा में ऐसा नहीं किया होता, तो भीड़ मुझे पीट-पीटकर मार सकती थी या मेरी हत्या हो सकती थी। मेरे पास वीडियो सबूत हैं। मुझे 10-15 लोगों ने घेर लिया था। जब मैंने आत्मरक्षा में कदम उठाया, तो उनके सिर पर चोट लग गई।

स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि राहुल गांधी और अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा पॉडकास्ट क्लिप नकली है। जो लोग कह रहे हैं कि मुझे कपिल मिश्रा के प्रभाव के कारण छोड़ा गया, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान मेरे भाइयों की तरह हैं। लोगों को समझना चाहिए कि क्या बात व्यंग्य में कही गई थी।

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

सत्येंद्र जैन को मिली जमानत, DJB STP टेंडर घोटाले में कोर्ट का बड़ा फैसला

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दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी। उन्हें 2 लाख रुपये के जमानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के 2 जमानती बॉन्ड पर जमानत दी गई है। सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को एंटी-करप्शन ब्रांच ने DJB STP टेंडर घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। ALSO READ: पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

 

विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग्विजय सिंह ने जैन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सत्येंद्र जैन जमानत दे दी। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्येंद्र जैन की जमानत पर खुशी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, सत्येंद्र जैन को जमानत मिली। भाजपा का ऑपरेशन पंजाब फेल। 'सत्यमेव जयते'।

एसीबी ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत के समक्ष दावा किया कि सत्येंद्र जैन आदतन अपराधी हैं।  जमानत याचिका पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

 

एसीबी के प्रमुख सयुंक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि मामला एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा था।

 

जांच में सामने आया था कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक खास तकनीक और उसके प्रदाता यूरोटेक को फायदा हुआ। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ा।

 

एसीबी ने इस मामले में 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले में पैसों के पूरे लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम की जांच जारी है।

Raghav Chadha SIR Row: ‘दिल्ली वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश’; राघव चड्ढा के पंजाब ड्राफ्ट लिस्ट विवाद में नया मोड़, AAP का बड़ा आरोप

Raghav Chadha SIR Row: पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम ‘शिफ्टेड’ (दूसरी जगह चले गए) बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया है कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया है। वहीं, AAP ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा दिल्ली में अपना नाम वोटर लिस्ट में रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश कर रहे थे।

आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व सहयोगी पर आरोप लगाया कि इसके लिए चड्ढा ने कथित तौर पर बैकडेटेड प्रोसेस” (पुरानी तारीख वाली प्रक्रिया) का सहारा लिया गया। पार्टी का कहना है कि अब चड्ढा अपनी ही स्थिति का ठीकरा AAP और पंजाब सरकार पर फोड़ रहे हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग के एक सीनियर अधिकारी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में चड्ढा का नाम शामिल करने के लिए पर्दे के पीछे की किसी भी कोशिश के दावों को खारिज करते हुए पीटीआई से कहा, “ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया और न ही उठाया जा रहा है।” आपको बता दें कि चड्ढा ने अप्रैल में AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन की थी।

क्या है पूरा विवाद?

पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के बाद तैयार की गई वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में राघव चड्ढा के नाम के आगे “शिफ्टेड” स्टेटस दर्ज किया गया है। पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को कहा कि वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में उनके नाम के आगे शिफ्टेड (यानी कहीं और चले गए) लिखा गया है। जबकि उनका वोटर ID मोहाली में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार राजनीतिक बदले की भावना से चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है।

X पर एक पोस्ट में चड्ढा ने कहा, “पंजाब में AAP सरकार अब बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा सांसद हूं और मेरा वोटर ID पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। इसके बावजूद वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरे नाम के आगे ‘शिफ्टेड’ लिखा गया है।” उन्होंने आरोप लगाया, “यह सिर्फ क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है।” चड्ढा ने कहा कि वह SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

‘शिफ्टेड किसने मार्क किया’?

चड्ढा ने आगे कहा, “अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ एक ड्राफ्ट लिस्ट है, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं। ‘दावे और आपत्तियों’ (claims and objections) की प्रक्रिया के दौरान सुधार किए जा सकते हैं, जो अभी चल रही है। फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर में जारी की जाएगी। मैं पहले से ही SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हूं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें “शिफ्टेड” किसने मार्क किया? इस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया और ऊंचे लेवल पर इसे किसने मंजूरी दी?

पंजाब अधिकारियों पर लगाया आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल थे। चड्ढा ने आरोप लगाया, “मुझे ‘शिफ्टेड’ के तौर पर किसने मार्क किया? AAP सरकार के एक अधिकारी ने? उस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया? फिर से AAP सरकार के ही एक अधिकारी ने…। ऊंचे स्तर पर यह प्रक्रिया किसने पूरी की? एक बार फिर उसी AAP सरकार के एक अधिकारी ने।” उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी तक, पंजाब सरकार के अधिकारी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया के हर चरण में तैनात होते हैं।

उन्होंने कहा, “BLO आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के अधिकारी असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं। सबसे ऊपर पंजाब कैडर का IAS अधिकारी होता है जो मुख्य चुनाव अधिकारी के तौर पर काम करता है।” उन्होंने दावा किया कि ऐसे अधिकारी राजनीतिक दबाव में आ सकते हैं क्योंकि उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर राज्य सरकार के कंट्रोल में होते हैं।

राज्यसभा सांसद ने आरोप लगाया, “इन अधिकारियों को पता है कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद AAP सरकार ही उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका ट्रांसफर कर सकता है और कौन उनकी जिंदगी मुश्किल बना सकता है। इस तरह, AAP सरकार राजनीतिक बदला लेने के लिए राज्य के अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डालती है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब से उन्होंने “भ्रष्ट” पार्टी छोड़ी है, तब से आम आदमी पार्टी का नेतृत्व उनसे नाराज है।

चुनाव आयोग की नियमों का किया जिक्र

उन्होंने कहा, “AAP ने उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार ने उन अन्य सांसदों को भी निशाना बनाया है जिन्होंने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा। यह गलत क्लासिफिकेशन उसी राजनीतिक बदले की भावना का ताजा उदाहरण है।” चड्ढा ने चुनाव आयोग की विस्तृत SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का भी जिक्र किया, जिसमें जन-प्रतिनिधियों की एक “प्रोटेक्टेड लिस्ट” (सुरक्षित सूची) का प्रावधान है।

AAP का पलटवार

चड्ढा की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP की पंजाब यूनिट के प्रवक्ता ने कहा कि स्पेशल समरी रिविजन (SSR) चुनाव आयोग करता है, न कि राज्य सरकार। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में किसका नाम शामिल करना है या किसका नाम हटाना है, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।” प्रवक्ता ने आगे कहा, “यह बात सभी जानते हैं कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, पंजाब में नहीं। अगर वह अब पंजाब में नहीं रहते हैं, तो यह उनकी अपनी जिम्मेदारी थी कि वह या तो वहां अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बनाए रखते या उसे कहीं और ट्रांसफर करवाते। वोटर लिस्ट से अपना नाम हटने के लिए वह अब AAP या पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते।”

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उन्होंने यह भी दावा किया कि AAP को चुनाव आयोग के सूत्रों से जानकारी मिली है कि चड्ढा “बैक-डेटेड प्रोसेस” का इस्तेमाल करके दिल्ली के राजिंदर नगर में वोटर के तौर पर रजिस्टर होने की कोशिश कर रहे थे। AAP प्रवक्ता ने कहा, “अगर बैक डेटेड प्रोसेस या ऐसी कोई गैर-कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो इसकी जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। अगर BJP या किसी और ने बैक-डेटेड प्रोसेस के जरिए नाम दर्ज कराने में मदद की है, तो हम इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगे और सच्चाई सामने लाएंगे।”

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

Raghav Chadha name removed from voter list in SIR

पंजाब में SIR में भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चढ्‍डा का नाम कटने से हड़कंप मच गया। उन्होंने राज्य की भगवंत मान सरकार पर बदले की राजनीति के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स तक लाने का आरोप लगाया। ALSO READ: क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

 

राघव चढ्‍डा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आप सरकार अब बदले की राजनीति को प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स) तक ले आई है।

 

उन्होंने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हूँ और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद, प्रारूप मतदाता सूची में मेरे नाम को स्थानांतरित के रूप में वर्गीकृत किया गया है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। 'दावे और आपत्ति' (क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शन) प्रक्रिया के दौरान नामों को सुधारा जाता है, जो फिलहाल जारी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी। मैं एसआईआर (SIR) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने की प्रक्रिया में हूं।

 

भाजपा सांसद के अनुसार, यह केवल एक लिपिकीय गलती नहीं लगती। यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है। मुझे ‘स्थानांतरित’ के रूप में किसने चिह्नित किया? आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उस वर्गीकरण का सत्यापन किसने किया? फिर से, आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने आगे बढ़ाया? एक बार फिर, वही आप की पंजाब सरकार के अधिकारी ने।

 

उन्होंने कहा कि जमीन पर तैनात बीएलओ (BLO) से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस पूरी प्रक्रिया का हर प्रशासनिक स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों से भरा पड़ा है। बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के एईआरओ, ईआरओ और डीईओ पंजाब सरकार के अधिकारी हैं। सबसे शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं जो पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी जानते हैं कि चुनावी ड्यूटी समाप्त होते ही आप सरकार उनके तबादले, तैनाती और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका तबादला कर सकता है और कौन उनका जीवन कठिन बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक बदले को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाती है।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका नेतृत्व गुस्से में जल रहा है। इसने हममें से उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया था। आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार द्वारा निशाना बनाया गया है। यह गलत वर्गीकरण उस राजनीतिक प्रतिशोध का एक नया अध्याय है।

 

उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) के विस्तृत दिशानिर्देशों का पैराग्राफ 4(d) उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक 'सुरक्षित सूची' (प्रोटेक्टेड लिस्ट) बनाता है जिनके नाम चिह्नित किए गए हैं। इसमें न्यायाधीश, सांसद और विधायक शामिल हैं। यह कहता है: न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों के धारकों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल व लोक सेवा आदि क्षेत्रों की हस्तियों के वे सभी नाम जो पहले चुनावी डेटाबेस में चिह्नित किए गए हैं, उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाना है, ताकि दावों और आत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा संसद सदस्य हूं। यदि मेरे नाम को चिह्नित भी किया गया था, तो पैराग्राफ 4(d) के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची में मेरा नाम शामिल करना अनिवार्य था। इस निर्देश की केवल अनदेखी नहीं की गई, बल्कि मेरे मामले में जानबूझकर इसका उल्लंघन किया गया। आप भले ही पंजाब सरकार चला सकती है, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है।

कनाडा में भागवत बोले- मदद करना भारत की परंपरा:विविधता ही हमारे देश की खूबसूरती, दूसरों को अलग मानने की सोच छोड़नी चाहिए

RSS प्रमुख मोहन भागवत सोमवार को टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि मुश्किल वक्त में दूसरों की मदद करना भारत की पुरानी परंपरा रही है। दुनिया में कहीं भी संकट आया और भारत से मदद मांगी गई, तो भारत ने कभी पीछे हटकर इनकार नहीं किया। कई बार भारत ने बिना मदद मांगे भी दूसरों की सहायता की है। भागवत ने कहा- भारत में विविधता एकता के खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी खूबसूरती है। देश में अलग-अलग जाति, पंथ, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन ये सभी एक ही समाज का हिस्सा हैं। उन्होंने विविधता को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि ‘ये मेरा, वो तुम्हारा’ जैसी सोच से ऊपर उठने की जरूरत है। अलग-अलग रूप और पहचान के बावजूद सभी में एक ही दिव्यता है। इसलिए दूसरों को अलग या पराया मानने के बजाय सभी के साथ भाईचारे और सेवा की भावना रखनी चाहिए। भागवत बोले- भारत ने मुस्लिम-ईसाई, सभी को स्वीकार किया भागवत ने कहा कि हिंदू सभी का सम्मान और स्वीकार करते हैं। दुनिया में कहीं किसी पर अत्याचार हुआ और उसने शरण मांगी, तो उसे भारत में जगह मिली। भारत में मुस्लिम, ईसाई, यहूदी, पारसी और दूसरे समुदाय रहते हैं। लोग सिर्फ शरण लेने ही नहीं, बल्कि ज्ञान हासिल करने के लिए भी भारत आए हैं। उन्होंने कहा कि इंसान को फूल की तरह होना चाहिए। कली फूल बने और अपनी खुशबू पूरे वातावरण में फैलाए। इसी तरह व्यक्ति को विकसित होकर मानवता के लिए समर्पित होना चाहिए। एक हिंदू की सोच यह होनी चाहिए कि मुझे भी आगे बढ़ना है, मुझे सफल होना है, क्योंकि मुझे सेवा करनी है। भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें कार्यक्रम में 8 प्रांतों से पहुंचे 2,500 से ज्यादा लोग टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु’ कार्यक्रम का आयोजन कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग (CHORD) ने किया था। कार्यक्रम में पूर्व कनाडाई रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी मौजूद थे। आयोजकों के मुताबिक, कनाडा के आठ प्रांतों से 2,500 से ज्यादा लोग पहुंचे। मोहन भागवत 17 दिनों के तीन देशों के विदेश दौरे पर हैं और कनाडा उनके दौरे का दूसरा पड़ाव है। वह 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। अमेरिका में कार्यक्रमों के बाद अब वे कनाडा पहुंचे हैं। दौरे में अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन भी शामिल है। —————————— भागवत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम से पहले तिरंगे का अपमान, रिजिजू बोले- RSS या भाजपा की आलोचना करने की आजादी लेकिन देश का अपमान महंगा पड़ेगा केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम स्थल के बाहर भारतीय झंडे के अपमान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- हमने हमेशा कहा है कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह बहुत महंगा पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें…

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

Complaint filed against Rahul Gandhi in Haldwani Uttarakhand

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है। अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है।

खबरों के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। राहुल गांधी के खिलाफ यह एफआईआर अनुसूचित जाति के युवक अमित कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई है। यह मामला हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद किए गए 'शुद्धिकरण यज्ञ' और उसे लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी से जुड़ा है।

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अमित कुमार की तरफ से आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ने उनके खिलाफ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। अमित कुमार ने कहा कि वह स्वयं अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और सुरक्षा प्रभावित हुई है। अमित कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस बयान से उनके और शुद्धिकरण में शामिल दूसरे लोगों के सम्मान और सामाजिक छवि पर असर पड़ा है।

अमित कुमार के अनुसार, 8 अगस्त को रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली हुई थी। रैली के बाद मैदान में कूड़ा-कचरा और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलने का आरोप लगाते हुए 11 अगस्त को उन्होंने अनुसूचित जाति के अन्य सदस्यों के साथ मैदान की सफाई और हवन-शुद्धिकरण किया था।

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दरअसल, राहुल गांधी ने कहा कि शुद्धिकरण एससी/एसटी एक्ट के तहत एक आपराधिक कृत्य है, जिन भी लोगों ने ऐसा किया है उन पर जल्द से जल्द एफआईआर होनी चाहिए। हालांकि इस मामले को लेकर हल्द्वानी पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों ने वहां शुद्धिकरण हवन किया था।

क्या RSS पर बैन लगाएंगे ट्रम्प:अमेरिका के धार्मिक कमीशन ने क्यों की ये सिफारिश; मोहन भागवत के अमेरिकी दौरे पर हंगामा बढ़ा

संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर हैं। इस बीच वहां मांग उठ रही हैं- RSS पर बैन लगे। यह मांग अमेरिकी सरकार का धार्मिक स्वतंत्रता आयोग USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स ने की है। मार्च में इसी आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भी RSS पर प्रतिबंध की सिफारिश की थी। इस मांग का आधार क्या है, RSS पर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्या ट्रम्प RSS पर बैन लगाएंगे; इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: अमेरिका में RSS पर पाबंदी को लेकर कौन सवाल उठा रहा है? जवाब: मोहन भागवत 25 अगस्त से 19 दिन के विदेश दौरे पर हैं। पहला पड़ाव अमेरिका है, फिर कनाडा और ब्रिटेन। RSS पर प्रतिबंधों को लेकर तीन प्रमुख लोगों ने बयान दिए हैं- 19 अगस्त को USCIRF के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा, ‘RSS नेता भले ही भारतीय सरकार से जुड़े हों, लेकिन उन्हें अमेरिका में हाई-लेवल मीटिंग्स और डिप्लोमेसी में तरजीह नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के दोषी पाए गए RSS सदस्यों पर बैन लगाना चाहिए।’ USCIRF के चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद ने भी कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं। ये एक ऐसा भारतीय संगठन है, जिससे जुड़े समूहों ने ईसाई और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। अब RSS नेता मोहन भागवत अमेरिका आ रहे हैं।’ कमीशन की पूर्व चेयरपर्सन नादिन मेंजा ने भी अमेरिकी मैगजीन ‘प्रोविडेंस’ में लिखा, ‘भागवत जिस एकता और सद्भाव की बात करते हैं, वह संघ की जमीनी हरकतों से बिल्कुल अलग है। संघ के रवैये के लिए उसे बैन किया जाना चाहिए।’ सवाल-2: तो फिर इन बयानों का आधार क्या है और इसके पीछे की दलील क्या है? जवाब: RSS पर पाबंदी की बात मार्च 2026 से शुरू हुई। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की। इसमें भारत से जुड़े 2 पन्ने हैं। इनमें 23 घटनाओं का जिक्र है- इन 10 प्रमुख घटनाओं के अलावा 13 और घटनाओं का जिक्र है, जिसमें 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों, रेवरेंड फ्रैंकलिन ग्राहम का वीजा रद्द करने और गौ संरक्षण के नाम पर हत्या करने जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन घटनाओं में USCIRF ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसकी सरकारों, हिंदू राष्ट्रवादी नेता और संगठन का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का सिर्फ एक जगह जिक्र है। वो भी Targeted Sanctions, यानी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के सेक्शन में। USCIRF का कहना है कि RSS की संपत्तियां जब्त कर लेनी चाहिए और उसके सदस्यों के अमेरिका आने पर रोक या वीजा रद्द कर देना चाहिए। सवाल-3: RSS पर बैन की मांग करने वाला ये USCIRF आखिर है क्या?
जवाब: USCIRF की शुरुआत 3 दशक पहले हुई… आयोग बनने की कहानी आयोग का स्ट्रक्चर USCIRF में संसद के जरिए नियुक्त 9 कमिश्नर होते हैं, जो दोनों पार्टियों से होते हैं। एक कमिश्नर को चेयरमैन बनाया जाता है। फिलहाल पाकिस्तानी मूल के डॉ. आसिफ महमूद इसके चेयरमैन हैं। आयोग का काम आयोग की ताकत आयोग अपनी सालाना रिपोर्ट अमेरिकी विदेश मंत्रालय को सौंपता जरूर है, लेकिन खुद कोई कार्रवाई नहीं कर सकता, सिर्फ सिफारिशें देता है। सवाल-4: क्या वाकई अमेरिका में RSS पर बैन लग सकता है?
जवाबः नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं लगता। इसकी 4 बड़ी वजहें हैं… सवाल-5: पाबंदी की इस मांग पर भारत सरकार और RSS का क्या रुख है?
जवाबः भारत के विदेश मंत्रालय ने USCIRF को पूर्वाग्रह से ग्रसित और जीरो भरोसे वाली संस्था बताया है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 21 अगस्त को कहा, ‘USCIRF सालों से भारत के खिलाफ भ्रामक, गलत और भड़काऊ बयान देती रही है। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि ये अपने छिपे हुए एजेंडे के तहत काम करती हैं और इनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है।’ वहीं RSS ने फिलहाल इस पर कोई बात नहीं कही है। हालांकि 24 अगस्त को VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा, ‘USCIRF के मन में सनातन धर्म, हिंदू समाज और भारत के प्रति गहरी नफरत है। हाल में RSS के प्रति जो नफरत दिखाई है, वह हिंदूफोबिया से प्रेरित उसके जाने-पहचाने एजेंडे का एक हिस्सा है।’ मार्च में भारत के पूर्व जजों और अधिकारियों ने एक बयान जारी कर USCIRF रिपोर्ट को दिमागी तौर पर दिवालिया और स्वार्थी बताया था। 275 अफसरों ने इस बयान पर दस्तखत किए थे, जिसमें 25 रिटायर्ड जज, 10 राजदूतों समेत 119 रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स और 131 आर्म्ड फोर्सेस के अधिकारी थे। सवाल-6: USCIRF पर क्यों उठ रहे हैं सवाल, पाकिस्तान से क्या है कनेक्शन?
जवाबः USCIRF के मौजूदा चेयरमैन डॉ. आसिफ महमूद पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी हैं। वे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरात जिले के खारियान गांव में जन्मे। उन्होंने कराची के सिंध मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली, फिर 1990 के दशक के आखिर में अमेरिका चले गए। अमेरिका के कैलिफोर्निया में महमूद प्रैक्टिस करने लगे। बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी से राजनीति भी की है। 2008 से 2016 तक डेमोक्रेटिक नेशनल कन्वेंशन में डेलिगेट रहे। 2022 में कैलिफोर्निया से अमेरिकी कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। फिर 2024 में डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हाकीम जेफ्रीज ने उन्हें USCIRF में नियुक्त हुए। जुलाई 2026 में चेयरमैन चुने गए। 2019 में जब भारत सरकार ने आर्टिकल 370 हटाया, तब महमूद ने जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए अमेरिकी संसदीय सुनवाई कराने के लिए लॉबिंग की थी। महमूद ने कहा था, ‘कश्मीरी अकेले नहीं हैं। हम तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक कि उन सभी के मानवाधिकार सुरक्षित नहीं हो जाते।’ महमूद पर सवाल उठते रहे हैं- ——————————–
ये भी पढ़ें- ‘मोहन भागवत का कार्यक्रम सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं’: आयोजक बोले- 16 धर्मों के लोग आएंगे, विरोध करने वाले भी आएं HSS के ग्लोबल कोऑर्डिनेटर सौमित्र गोखले ने 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में हाऊडी मोदी कार्यक्रम करवाया था, जिसमें 50 हजार लोग जमा हुए थे। इस बार चीफ गेस्ट RSS प्रमुख मोहन भागवत हैं। कई संगठन उनका विरोध कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेंजमेंट एंड डायलॉग के डायरेक्टर सुदेश अग्रवाल और प्रवक्ता प्रिया सामंत से बात की। पढ़िए पूरी बातचीत…

कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, कथित वाल्मीकि घोटाले में भूमिका से किया इनकार

B. Nagendra: कर्नाटक कैबिनेट मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि यह इस्तीफा ‘कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम’ में कथित तौर पर 89 करोड़ रुपये की गड़बड़ी को लेकर बीजेपी की रायचूर से बेल्लारी तक 10 दिन की पदयात्रा से ठीक पहले दिया गया।

योजना और सांख्यिकी विभाग संभालने वाले नागेंद्र ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कथित वाल्मीकि घोटाले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी आलाकमान के नेताओं से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहा हूं। मेरे मुख्यमंत्री का भी मानना ​​है कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है। विकास और मुख्यमंत्री के विजन में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए। बीजेपी ने मुझे आरोपी बताकर एक बेगुनाह को आरोपी बना दिया है।”

इससे पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा

बता दें कि यह दूसरी बार है जब नागेंद्र ने सरकार से इस्तीफा दिया है। इससे पहले, 2024 में कर्नाटक अनुसूचित जनजाति विकास बोर्ड से जुड़े ₹94 करोड़ के फंड डायवर्जन घोटाले में नाम आने के बाद उन्होंने सिद्धारमैया की कैबिनेट से ST कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

वहीं, कर्नाटक विधानसभा का हालिया मॉनसून सत्र हंगामे की वजह से बेकार चला गया, क्योंकि बीजेपी ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की थी।

नागेंद्र ने कहा, “साजिश वाली राजनीति के कारण, हमने कई बार अपील की और विपक्ष से कहा कि वे नोटिस दें और चर्चा के लिए आएं। वे सूखे, KPSC और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए नहीं आए। बिना किसी आधार या मुद्दे के, उन्होंने घोटाले होने का झूठा दावा करते हुए विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने झूठा दावा किया कि वाल्मीकि घोटाला हुआ और निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर दी।”

उन्होंने आगे कहा, “SIT और CID ने इस मामले की जांच की। साजिश के तहत CBI जांच शुरू करवाई गई और ED ने मुझे गिरफ्तार कर लिया। मैं तीन महीने जेल में भी रहा और फिर बाहर आया। दूसरी चार्जशीट में, उन्होंने बेवजह मेरा नाम शामिल कर दिया।”

बीजेपी और उसकी सहयोगी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) ने कथित वाल्मीकि घोटाले को लेकर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। दोनों पार्टियों ने 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 170 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।

बीजेपी एमएलसी एन. रवि कुमार ने कहा, “नागेंद्र को आज नहीं तो कल इस्तीफा देना ही होगा क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार किया है। 600 खातों में पैसे जमा किए गए। वह सरकारी फंड था… कांग्रेस पार्टी ने तेलंगाना और बेल्लारी लोकसभा चुनावों में और परिवार के लिए सोना खरीदने में सरकारी पैसे का इस्तेमाल किया।”

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